Tag: Chaitra Navratri

  • चैत्र नवरात्रि की शुरुआत: घटस्थापना का मुहूर्त कल सुबह, समय नोट कर लें

    चैत्र नवरात्रि की शुरुआत: घटस्थापना का मुहूर्त कल सुबह, समय नोट कर लें

    इंदौर
    हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र बहुत ही पवित्र त्योहार माना जाता है. यह नौ दिनों तक चलने वाला पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित होता है. इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है. यह त्योहार हमें अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश भी देता है. इन 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा के लिए व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और मां दुर्गा को भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। 

    द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होगी और 27 मार्च, राम नवमी के दिन समाप्त होगी. इन 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है और हर दिन का अपना एक खास रंग और भोग भी होता है. तो आइए अब पंडित प्रवीण मिश्र से जानते हैं कि चैत्र नवरात्र पर कल कितने बजे से घटस्थापना का मुहूर्त शुरू होगा और किस विधि के साथ कलश को स्थापित किया जाएगा. इन दोनों बातों के अलावा, चैत्र नवरात्र की पूजा की पूजन सामग्री भी जानेंगे। 

    चैत्र नवरात्र 2026 घटस्थापना का मुहूर्त

     चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च यानी कल सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा।

    इसी तिथि के चलते चैत्र नवरात्र की कलशस्थापना का पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

    नवरात्र पर कैसे होगी कलश स्थापना?

    नवरात्र की पूजा शुरू करने से पहले स्नान करें. फिर, मां दुर्गा के स्वागत के लिए घर व पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और पास में पानी से भरा कलश रखकर उसके ऊपर नारियल रखें. शुभ मुहूर्त में घट स्थापना या कलश स्थापना करें. फिर मां दुर्गा के आगे देसी घी का दीपक जलाएं, मां को फूलों की माला चढ़ाएं और फल, सूखे मेवे, मीठा पान, सुपारी, लौंग व इलायची का भोग लगाएं।

    इसके बाद, मां दुर्गा को कम से कम सात श्रृंगार की चीजें अर्पित करें और उनके मंत्रों का जाप करके आह्वान करें. फिर, दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें. शाम के समय भी रोजाना मां की पूजा करें और भोग लगाएं. भोग अर्पित करने के बाद भक्त सात्विक भोजन करके अपना व्रत खोल सकते हैं।

    घटस्थापना की विशेष सामग्री (Chaitra Navratri 2026 Pujan Samagri) 

    चैत्र नवरात्र की घटस्थापना कुछ आवश्यक सामग्री के बिना अधूरी मानी जाती है. जिसमें लकड़ी की चौकी, मिट्टी का एक बर्तन, मिट्टी का कलश, पवित्र स्थान की मिट्टी, 7 प्रकार के अनाज, गंगाजल, कलावा या मौली, सुपारी, आम या अशोक के पत्ते, अक्षत (साबुत चावल), जटा वाला नारियल, लाल कपड़ा, पुष्प और पुष्पमाला।

    चैत्र नवरात्र के 9 दिन पहनें ये सभी शुभ रंग

    पहला दिन 19 मार्च 2026 पीला मां शैलपुत्री
    दूसरा दिन 20 मार्च 2026 हरा मां ब्रह्मचारिणी
    तीसरा दिन 21 मार्च 2026 ग्रे (धूसर) मां चंद्रघंटा
    चौथा दिन 22 मार्च 2026 नारंगी मां कूष्मांडा
    पांचवा दिन 23 मार्च 2026 सफेद मां स्कंदमाता
    छठा दिन 24 मार्च 2026 लाल मां कात्यायनी
    सातवां दिन 25 मार्च 2026 रॉयल ब्लू मां कालरात्रि
    आठवां दिन 26 मार्च 2026 गुलाबी मां महागौरी
    नौवां दिन 27 मार्च 2026 बैंगनी मां सिद्धिदात्री
  • Chaitra Navratri 2026: अमावस्या के असर में होगा चैत्र नवरात्र, जानें कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

    Chaitra Navratri 2026: अमावस्या के असर में होगा चैत्र नवरात्र, जानें कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

     इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार के दिन से हो रही है. शक्ति की उपासना के यह दिन बहुत ही शुभ माने जाते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्र की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और यह पर्व लगातार नौ दिनों तक मां दुर्गा की भक्ति और साधना के लिए समर्पित रहता है. इस साल का चैत्र नवरात्र कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद एक अनोखा संयोग बन रहा है. दरअसल, इस दिन चैत्र नवरात्र के घटस्थापना वाले दिन पर अमावस्या का संयोग भी बन रहा है।

    चैत्र नवरात्र पर अमावस्या का संयोग

    चैत्र नवरात्र पर चैत्र अमावस्या का संयोग करीब 72 साल बाद बन रहा है. इसलिए इस बार का पर्व धार्मिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि प्रतिपदा तिथि थोड़ी देर से शुरू होगी, फिर भी नवरात्र पूरे नौ दिनों तक ही मनाए जाएंगे।

    द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस बार चैत्र अमावस्या की तिथि 18 मार्च की सुबह 8 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 19 मार्च की सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. इसके बाद प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा, जिससे नवरात्र की शुरुआत मानी जाएगी. खास बात यह है कि अमावस्या और प्रतिपदा दोनों तिथियां सूर्योदय से मान्य होती हैं. इसी कारण इस बार अमावस्या के स्नान-दान और नवरात्र की घटस्थापना एक ही दिन यानी 19 मार्च को की जाएगी।

    चैत्र अमावस्या पर स्नान-दान का मुहूर्त 
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र अमावस्या के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. 19 मार्च को स्नान-दान के लिए सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. परंपरा के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर स्नान कर दान-पुण्य करने की परंपरा है।

    चैत्र नवरात्र 2026 घटस्थापना का मुहूर्त
    नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का भी विशेष महत्व होता है. 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक कलश स्थापना का शुभ समय रहेगा. यदि इस समय में स्थापना न हो पाए तो दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक भी कलश स्थापना की जा सकती है।

    इन दुर्लभ संयोगों में मनाई जाएगी नवरात्र

    इस साल नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च (गुरुवार) से होगी और इसका समापन 27 मार्च को होगा. पहले दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी काफी शुभ मानी जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ बन रहे हैं. इन तीनों योगों को अत्यंत शुभ माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इस समय मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

     

  • नवरात्रि से पहले कर लें ये जरूरी सफाई: इन 5 चीजों को घर में रखने से रूठ जाती हैं मां दुर्गा

    नवरात्रि से पहले कर लें ये जरूरी सफाई: इन 5 चीजों को घर में रखने से रूठ जाती हैं मां दुर्गा

    चैत्र नवरात्रि केवल उपवास और पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन और परिवेश को शुद्ध करने का एक पावन अवसर भी है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति मां दुर्गा स्वयं धरती पर पधारती हैं और अपने भक्तों के घर में वास करती हैं। माता रानी के स्वागत के लिए केवल मन की शुद्धि ही काफी नहीं है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर में रखी कुछ चीजें नकारात्मक ऊर्जा का संचय करती हैं, जो सुख-समृद्धि के मार्ग में अदृश्य बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं। यदि घर में वास्तु दोष हो या भारी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा जमा हो, तो कठिन पूजा-अर्चना के बाद भी वह शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाता जिसकी हम कामना करते हैं। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहे नव-संवत्सर और चैत्र नवरात्रि से पहले यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने आशियाने को उन वस्तुओं से मुक्त करें जो दरिद्रता और अशांति को निमंत्रण देती हैं। घर के कोनों में छिपा कबाड़ या टूटी-फूटी वस्तुएं न केवल धन के प्रवाह को रोकती हैं, बल्कि परिवार के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती हैं। तो आइए जानते हैं, वास्तु के उन 5 खास नियमों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप नवरात्रि से पहले अपने घर का कायाकल्प कर सकते हैं।

    खंडित मूर्तियां या फटे हुए धार्मिक चित्र
    अक्सर हम अनजाने में घर के मंदिर में ऐसी मूर्तियां रखे रहते हैं जो कहीं से खंडित होती हैं या देवी-देवताओं के चित्र फटे हुए होते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसी मूर्तियां घर में दुख और अशांति का कारण बनती हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले इन्हें पूरे सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें या पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं।

    खराब या बंद पड़ी घड़ियां
    वास्तु में रुकी हुई घड़ी को 'ठहरे हुए भाग्य' का प्रतीक माना जाता है। बंद पड़ी घड़ियां घर की प्रगति को रोकती हैं और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती हैं। यदि आपके घर में कोई ऐसी घड़ी है जो काफी समय से बंद है या टूटी हुई है, तो उसे तुरंत ठीक कराएं या घर से बाहर निकाल दें।

    टूटे हुए कांच और बर्तन
    टूटे हुए शीशे या चटके हुए बर्तन घर में दरिद्रता (गरीबी) को न्योता देते हैं। नवरात्रि के दौरान माता का भोग लगाने के लिए साफ और अखंडित बर्तनों का ही उपयोग होना चाहिए। इसलिए, रसोईघर या श्रृंगार दान में रखे टूटे हुए कांच के सामान को हटाना ही श्रेयस्कर है।

    फटे-पुराने जूते और चप्पल
    वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार या अलमारी के नीचे रखे फटे-पुराने जूते-चप्पल नकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत होते हैं। यह शनि दोष का भी कारण बन सकते हैं। नवरात्रि से पहले घर के कोनों की सफाई करें और जो जूते उपयोग में नहीं हैं, उन्हें हटा दें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।

    कबाड़ और बेकार का सामान
    घर की छत या स्टोर रूम में रखा पुराना कबाड़, जंग लगा लोहा या रद्दी कागज मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। माता अंबे की कृपा पाने के लिए घर के वातावरण को हल्का और खुला रखना जरूरी है। कबाड़ हटाने से घर में 'प्राण ऊर्जा' का संचार बढ़ता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।