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  • ‘आरक्षण सामाजिक न्याय का विषय’, दत्तात्रेय होसबाले का बड़ा बयान

    ‘आरक्षण सामाजिक न्याय का विषय’, दत्तात्रेय होसबाले का बड़ा बयान

    इंदौर.

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के अंतिम दिन बुधवार को सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से चर्चा की। इन्होंने प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा कि आरक्षण पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसका उपयोग समाजहित में किया जाना चाहिए और जिन लोगों को इसकी आवश्यकता है, उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

    मतदाता सूची के समय-समय पर पुनरीक्षण को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। मतदाता सूची में ऐसे कई लोगों के नाम दर्ज हैं, जिनका निधन हो चुका है। कई लोगों के नाम एक से अधिक स्थानों पर हैं। कुछ लोग वर्षों पहले अपना गांव या शहर छोड़कर दूसरी जगह बस गए हैं, लेकिन उनके नाम अब भी पुरानी मतदाता सूची में दर्ज हैं। ऐसे में सूची को अद्यतन करना जरूरी है, ताकि व्यक्ति का नाम उसके वर्तमान निवास क्षेत्र की मतदाता सूची में रहे। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है और उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, तो यह भी गंभीर विषय है। इसका संबंध केवल चुनावी व्यवस्था से ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से भी है।

    मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया अपनाई जाती रही है –
    पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए समय-समय पर पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए, उन्हें हटाया जाना चाहिए और सभी पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल किए जाने चाहिए।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाना है
    उन्होंने इस प्रक्रिया पर होने वाली राजनीतिक बयानबाजी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का विषय नहीं है। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाना है। इसलिए राजनीतिक दलों को इसे राजनीतिक एजेंडा बनाने के बजाय निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था के लिए सहयोग करना चाहिए। वोट चोरी के आरोप पर बोले सरकार्यवाह बोले कि यदि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है और उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, तो यह भी गंभीर विषय है। इसका संबंध केवल चुनावी व्यवस्था से ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से भी है।

    पक्ष या विपक्ष का विषय नहीं है
    उन्होंने इस प्रक्रिया पर होने वाली राजनीतिक बयानबाजी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का विषय नहीं है। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाना है। इसलिए राजनीतिक दलों को इसे राजनीतिक एजेंडा बनाने के बजाय निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था के लिए सहयोग करना चाहिए। होसबाले बोले- हमें राम मंदिर बनाकर दिखाना था, दिखा दिया। राम मंदिर बनाने का संकल्प पूरा किया। काशी, मथुरा और वाग्देवी धार के मामले में पूछे गए सवाल उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कुछ मुद्दे कोर्ट में चल रहे और बाकी में समाज को आगे आना चाहिए। जो मामले कोर्ट में चल रहे हैं उन्हें वहीं रहने दें। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में संघ की डेढ़ सौ गुना शाखाएं बढ़ी हैं।

  • धर्म सम्मेलनों से समाज में एकता और राष्ट्र सेवा की भावना को मिलेगा बल: दत्तात्रेय होसबोले

    धर्म सम्मेलनों से समाज में एकता और राष्ट्र सेवा की भावना को मिलेगा बल: दत्तात्रेय होसबोले

    धर्मशाला
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने शनिवार को कहा कि पूरे देश में धर्म के सही अर्थ और कर्तव्यों के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को एकजुट करने के उद्देश्य से विभिन्न धर्म सम्मेलन, स्वधर्म सम्मेलन और हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, "समाज में एकता और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जो लोग आध्यात्मिक साधना और समाज सेवा में लगे हुए हैं। वे इन सम्मेलनों में भाग लेकर राष्ट्र सेवा और आपसी एकता को बढ़ावा दे रहे हैं।" आरएसएस महासचिव ने कहा कि संघ ने समाज परिवर्तन के जो मार्ग बताए हैं, उनमें सभी लोगों को जुड़कर परस्पर सहयोग से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य है कि भारत मां की संतान के रूप में हर व्यक्ति अपने कर्तव्य को निभाए। समाज में एकता बनी रहे और लोग राष्ट्र के लिए कार्य करने की भावना से संकल्प लेकर आगे बढ़ें।

    होसबोले ने कहा कि देश में कई चुनौतियां और संकट मौजूद हैं, लेकिन सरकार भी देश को अच्छी स्थिति में लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, "धर्म सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य यही है कि हम सभी चुनौतियों को मिलकर पार करें और देश को मजबूत बनाएं।"

    आरएसएस महासचिव ने जोर देकर कहा कि इन सम्मेलनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, आपसी भाईचारा और राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति आध्यात्मिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, उन्हें समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

    दत्तात्रेय होसबोले ने स्पष्ट किया कि संघ किसी भी प्रकार के विभाजन या द्वेष को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि वह समाज को एक सूत्र में पिरोने और सभी को राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित करने का प्रयास कर रहा है।
    उन्होंने कहा कि हिंदू सम्मेलन, स्वधर्म सम्मेलन और धर्म सम्मेलन केवल धार्मिक चर्चा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सामाजिक एकता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण पर भी गहन चर्चा की जाती है।

  • दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- भारत का ईरान युद्ध पर स्टैंड सही, संघ की सोच शांति की है, भारतीयता-हिंदुत्व मानसिकता नहीं जीवनशैली

    दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- भारत का ईरान युद्ध पर स्टैंड सही, संघ की सोच शांति की है, भारतीयता-हिंदुत्व मानसिकता नहीं जीवनशैली

    पानीपत
    हरियाणा में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के आखिरी दिन  सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच ईरान को लेकर भारत के स्टैंड पर कहा कि भारत हित में सरकार सही कर रही है, ऐसा विश्वास है कि सरकार का स्टैंड सही है। उन्होंने कहा कि

    संघ पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों पर जोर देता है। बांग्लादेश और नेपाल में सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद नई सरकारें बनी हैं। दोनों देशों में शांति-स्थिरता और उनका भारत के साथ अच्छा संबंध पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर भी चिंता जताई। होसबाले ने कहा- भारतीयता क्या है, हिंदुत्व क्या है, इसकी एक स्पष्ट अवधारणा होनी चाहिए। यह केवल एक मानसिकता नहीं बल्कि एक जीवनशैली है।

    हरियाणा में भी RSS का बड़ा केंद्र विकसित करने की तैयारी

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) उत्तर भारत के लिए हरियाणा में बड़ा केंद्र विकसित करने की तैयारी में है। इसका प्रस्ताव हरियाणा के पानीपत में चल रही अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में रखा जाएगा। पानीपत के पट्टीकल्याणा में बना माधव दृष्टि साधना केंद्र करीब 25 एकड़ में फैला है। इसे नागपुर मुख्यालय की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।

    रणनीतिक दृष्टि से अनुकूल होने के कारण संघ यहां से कई उत्तर भारतीय राज्यों को एक साथ साधने की तैयारी में है। दिल्ली से निकटता और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण माधव सृष्टि को और अधिक अपग्रेड किया जाएगा। 8 साल पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने पट्टीकल्याणा में सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र की आधारशिला रखी थी।

    RSS की 3 दिवसीय सभा की अहम बातें

    संघ ने अपने तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में आखिरी दिन कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और सुझाव रखे। इनमें आरएसएस के दायित्व परिवर्तन भी शामिल रहा। आरएसएस के शताब्दी वर्ष (2025-26) की वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई।

    यहां केरल और तमिलनाडु समेत दक्षिण के राज्यों और पूर्वोत्तर में संघ की गतिविधियों और सामने आई चुनौतियों का जिक्र किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि एक वर्ष में देश में संघ की 88,949 शाखाएं लगाई गईं। जो पिछले साल से 5,820 ज्यादा हैं।

    गुरु तेग बहादुर व संत शिरोमणि रविदास जयंती से मैसेज

    सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व पर कई कार्यक्रम किए गए। वहीं संत शिरोमणि रविदास जी की 650वीं जयंती पर इस साल कार्यक्रम हो रहे हैं। यह समरता का संदेश है।

    3 दिन में 32 संगठनों ने दिए सुझाव

    माधव सृष्टि में चल रहे तीन दिवसीय सभा के अंतिम दिन आरएसएस के सरसंघ चालक का संबोधन होगा। इससे पहले दो दिन में आरएसएस की विचारधारा से जुड़े 32 संगठनों ने सुझाव रखे। 1487 पदाधिकारियों ने यहां भाग लिया।

    संघ में बदलाव और अगले साल की योजना पर सहमति लेंगे

    बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ के स्ट्रक्चरल बदलावों के साथ ही अगले एक साल तक होने वाले कार्यों को लेकर आज सभा से स्वीकृति लेंगे।

    उन राज्यों पर ध्यान, जिनमें BJP नहीं जीती

    आरएसएस प्रतिनिधि सभा के पहले दिन चर्चा के केंद्र में वो राज्य रहे, जिनमें BJP या तो कभी सत्ता में नहीं रही, या दमदार उपस्थिति नहीं है। संघ के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया कि आगले दो वर्षों में मुख्य ध्यान चार राज्यों- केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल पर केंद्रित रहेगा। इन राज्यों में संघ अपने कार्य विस्तार के लिए माइक्रो-मैनेजमेंट और नए सांगठनिक स्ट्रक्चर पर जोर दे रहा है।

    पंजाब में राष्ट्रीय सिख संगत को एक्टिव करेंगे

    आरएसएस पंजाब को एक चुनौती के रूप में ले रही है। वहां कभी भाजपा अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है। असल में पंजाब की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा का सिखों के साथ तालमेल बैठना आसान नहीं। इसलिए पंजाब में राष्ट्रीय सिख संगत को नए सिरे से एक्टिव किया जाएगा। संघ यह मैसेज देना चाहता है कि सिखों और हिंदुओं का रिश्ता 'नख-मांस' जैसा है। पंजाब में अगले साल के शुरु में चुनाव होने हैं।

    पंजाब को लेकर आरएसएस की 4 रणनीति

        राष्ट्रीय सिख संगत का मिशन 'डोर-टू-डोर': सिखों से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए 'राष्ट्रीय सिख संगत' दल को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। यह दल पंजाब के गांवों में घर-घर जाकर संपर्क साधेगा और भ्रांतियों को दूर कर राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार करेगा।

        सामाजिक समरसता और ममता संगम: पंजाब के विभिन्न जिलों में मातृशक्ति के विशेष 'ममता संगम' सम्मेलन आयोजित किए हैं। इन सम्मेलनों के दौरान जो सुझाव या चुनौतियां आईं, उनके आधार पर आगे की तैयारी होगी।

        नशे के खिलाफ युद्ध स्तर पर मुहिम: पंजाब की सबसे बड़ी समस्या 'ड्रग्स' को लेकर संघ ने अपनी चिंता जताई है। बैठक में तय हुआ कि संघ अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से गांव-गांव में नशा मुक्ति अभियान छेड़ेगा, ताकि युवाओं को विनाश से बचाया जा सके।

        'पंच प्रभुदन' और प्रवासियों से संपर्क: पंजाब से भारी संख्या में युवा विदेशों की ओर पलायन कर रहे हैं। संघ 'पंच प्रभुदन' कार्यक्रम के तहत विदेशों में बसे पंजाबी और सिख समुदाय से संपर्क साधेगा, ताकि उन्हें अपनी मिट्टी और संस्कृति से दोबारा जोड़ा जा सके।