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  • राज्यपाल रमेन डेका की युवाओं से अपील, आत्मविश्वास और मेहनत से बनाएं पहचान

    राज्यपाल रमेन डेका की युवाओं से अपील, आत्मविश्वास और मेहनत से बनाएं पहचान

    आत्मविश्वास और परिश्रम से बनाएं अपनी पहचान, समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं युवा : राज्यपाल  रमेन डेका

    पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

    24 हजार 800 विद्यार्थियों को उपाधियां एवं डिप्लोमा प्रदान किए गए

     

    रायपुर, 
    राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि युवा आत्मविश्वास, निरंतर प्रयास और अपनी विशिष्ट प्रतिभा के बल पर जीवन में आगे बढ़ें। असफलता से घबराने के बजाय उसके कारणों को समझें और गलतियों से सीखकर पुनः प्रयास करें। शिक्षा का उपयोग व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी होना चाहिए। राज्यपाल आज पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर के सप्तम दीक्षांत समारोह को अध्यक्षीय आसंदी से संबोधित कर रहे थे। समारोह में पिछले पांच वर्षों के 24 हजार 800 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा की उपाधियां प्रदान की गईं।

            समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, विधायक श्री धरमलाल कौशिक एवं श्री सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी,  हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष श्री कैलाश चंद्र शर्मा, नेक अध्यक्ष श्री नागेश्वर राव, विश्वविद्यालय के कुलपति श्री वीरेंद्र कुमार सारस्वत तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।

             इस अवसर पर विश्वविद्यालय की उन्नत आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण और स्मारिका ‘अभ्युदय’ का विमोचन किया गया। विश्वविद्यालय की ओर से एकलव्य विद्यालय देवपहरी के 311 विद्यार्थियों को बैग, स्वेटर, टिफिन एवं पानी की बोतलें वितरित की गईं।

             राज्यपाल श्री डेका ने उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियों में अभिभावकों, गुरुजनों और शिक्षण संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान है। दीक्षांत समारोह जीवन में नई ऊर्जा और नई जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मुक्त विश्वविद्यालय दूरस्थ क्षेत्रों तक ज्ञान पहुंचाने और शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने ज्ञान तक पहुंच आसान बनाई है। युवाओं को इन साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए अपनी विचारशक्ति और रचनात्मक क्षमता को विकसित करना चाहिए।

            राज्यपाल ने कहा कि आज रोजगार और आजीविका के अनेक नए क्षेत्र उपलब्ध हैं। युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर पूरी मेहनत से आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में अपना स्थान स्वयं बनाना पड़ता है। दूसरों की नकल अथवा तुलना करने के बजाय अपनी विशिष्टता पर विश्वास रखें। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों पर अपनी अपेक्षाएं थोपने के बजाय उनकी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने में सहयोग दें।

            डेका ने जीवन में आंतरिक संतुष्टि, संतुलन और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की आवश्यकता बताई। उन्होंने डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से बचने और अपने समय का सार्थक कार्यों में उपयोग करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने, पौधे लगाने और उनकी देखभाल जैसे कार्यों से समाज में बदलाव ला सकता है। जीवन में ऐसा कार्य अवश्य करें, जिसका उद्देश्य केवल लेन-देन नहीं, बल्कि सकारात्मक परिवर्तन हो।

             उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के उत्थान में करें। स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक पंडित सुंदरलाल शर्मा के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय उन लोगों के सपनों को साकार कर रहा है, जो कामकाज अथवा अन्य परिस्थितियों के कारण नियमित अध्ययन नहीं कर पाते। उन्होंने विश्वविद्यालय को नैक की ‘ए प्लस’ ग्रेडिंग मिलने पर बधाई दी और कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने तथा शिक्षा की पहुंच बढ़ाने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।   

           हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष श्री कैलाश चंद्र शर्मा ने दीक्षांत भाषण दिया।  समारोह को नेक अध्यक्ष श्री नागेश्वर राव ने भी संबोधित किया।

          कुलपति श्री वीरेंद्र कुमार सारस्वत ने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी। इस अवसर पर विश्व विद्यालय के कार्य परिषद के सदस्य, अन्य अधिकारी , प्रशासनिक अधिकारी , प्राध्यापकगण सहित बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक, और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे ।

  • युवाओं को डेका की सलाह, शिक्षा से लक्ष्य प्राप्त करें और नए विचारों को स्टार्टअप का रूप दें

    युवाओं को डेका की सलाह, शिक्षा से लक्ष्य प्राप्त करें और नए विचारों को स्टार्टअप का रूप दें

    लक्ष्य प्राप्ति के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम, अपने आइडिया को स्टार्टअप में बदलें –   डेका

    आईटीएम विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर राज्यपाल ने दिया जोर

     रायपुर,
    राज्यपाल रमेन डेका ने युवाओं से अपने नए विचारों को स्टार्टअप में बदलने, नवाचार को अपनाने और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है और युवाओं के विचार देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।  स्टार्टअप की संभावनाएं अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों और गांवों में भी नए उद्यम आकार ले रहे हैं। युवाओं को इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी पहचान स्वयं बनानी चाहिए।

                 राज्यपाल रमेन डेका आज आईटीएम विश्वविद्यालय, रायपुर के 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में 16 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, चार शोधार्थियों को पीएचडी तथा 464 विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधियां प्रदान की गईं।

             राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। युवा अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देकर नए उद्यम शुरू कर सकते हैं और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी क्षमता, ज्ञान और रचनात्मकता के बल पर रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ें। अपने आइडिया को स्टार्टअप में बदलें, अपनी जगह स्वयं बनाएं और सफलता के बाद समाज को न भूलें।उन्होंने कहा कि समाज ने प्रत्येक व्यक्ति को बहुत कुछ दिया है, इसलिए समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव हमेशा बना रहना चाहिए।

                राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन की एक पारी के समापन और दूसरी पारी की शुरुआत का प्रतीक है। आगे का जीवन चुनौतियों और संघर्षों से भरा हो सकता है, लेकिन मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से उनका सामना किया जा सकता है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि के क्षेत्र में करियर बनाना चाहिए, जिससे उन्हें संतुष्टि मिले और वे सफलता हासिल कर सकें। उन्होंने कहा कि डिग्री केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान और कौशल के माध्यम से परिवार, समाज और देश के प्रति दायित्व निभाने का अवसर है। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि सही-गलत का विवेक विकसित करना और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। युवाओं को डिग्री को अंतिम मंजिल नहीं मानना चाहिए, बल्कि निरंतर सीखने और नए प्रयोग करने की प्रवृत्ति बनाए रखनी चाहिए।

                    राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मोबाइल के युग में आगे बढ़ रहे हैं। इन तकनीकों के पीछे भी मानवीय बुद्धि का योगदान है। उन्होंने डिजिटल लत और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से युवाओं को दूर रहने की सलाह दी। जरूरत के अनुसार ही मोबाइल का उपयोग करने तथा परिवार, मित्रों और समाज के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।
    राज्यपाल ने कहा कि शांति और सुरक्षा से विकास को गति मिलती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के प्रभाव में कमी के बाद बने विकास के अवसरों तथा बस्तर में आजीविका के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन स्थलों के विकास की आवश्यकता भी बताई।

                   अपने संबोधन में राज्यपाल ने युवाओं से बड़े सपने देखने, उन्हें साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करने और असफलताओं से निराश हुए बिना नए प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में सभी का योगदान आवश्यक है। युवाओं को अपनी तरक्की के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए अपने ज्ञान और हुनर का उपयोग राष्ट्र के समग्र विकास के लिए करना चाहिए।

                    कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामचंद्र जहांगीर ने स्वागत भाषण दिया। छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष वी.के. गोयल ने भी संबोधित किया। समारोह में हाई कोर्ट के पूर्व जज गौतम भादुड़ी, विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल एवं कार्य परिषद के सदस्य, प्राध्यापकगण, पालक तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

  • छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल तेज, सरकार ने उठाया सकारात्मक कदम

    छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल तेज, सरकार ने उठाया सकारात्मक कदम

    छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए सकारात्मक पहल

    राज्यपाल रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने की भेंट

    रायपुर
    राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने भेंट कर छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा इसके संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में  चर्चा की।

    छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा

              भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश एवं मानकीकरण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा है और लगभग डेढ़ करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं।

    छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल

              राज्यपाल डेका ने स्वयं पहल करते हुए इस विषय  पर सार्थक चर्चा की। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश एवं अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए विषय के विद्वानों एवं विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।

    छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा

            भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तथा पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन भी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के  विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।

             इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक एवं श्रीमती अर्चना पाठक उपस्थित थीं।

  • छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों की जानकारी अब एक क्लिक पर, राज्यपाल डेका ने पोर्टल किया शुरू

    छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों की जानकारी अब एक क्लिक पर, राज्यपाल डेका ने पोर्टल किया शुरू

    रायपुर : निजी विश्वविद्यालयों की अद्यतन जानकारी के लिए नया वेब पोर्टल शुरू, राज्यपाल डेका ने किया शुभारंभ

    रायपुर

    राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा तैयार किए गए नए वेब पोर्टल
    cgpurc.cgstate.gov.in का क्लिक कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष  वी. के. गोयल सहित आयोग के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

    नए पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित महत्वपूर्ण एवं अद्यतन जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इसमें अध्यादेश के आधार पर संचालित पाठ्यक्रमों का विवरण, अकादमिक कैलेंडर, प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी, विद्यार्थियों की अंकसूची ,डिग्री तथा गत वर्षों के परीक्षा परिणाम अपलोड किए जाएंगे।

    पोर्टल पर विश्वविद्यालयों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क, कार्यरत अधिकारियों, विभिन्न समितियों एवं उनके सदस्यों तथा पीएचडी शोध-निर्देशकों की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा एनईपी-2020, नैक प्रत्यायन, अन्य विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्टार्टअप, जॉब ओरिएंटेशन प्रोग्राम, कैंपस प्लेसमेंट और ई-लाइब्रेरी से संबंधित जानकारी भी पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी।
    पोर्टल में शैक्षणिक स्वीकृतियों, भरे एवं रिक्त पदों से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे निजी विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में पारदर्शिता, सूचना की सुगमता और प्रभावी निगरानी को बढ़ावा मिलेगा।

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस! न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र ने ली पद की शपथ

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस! न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र ने ली पद की शपथ

    राज्यपाल डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की दिलाई शपथ
    रायपुर

     राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र  (Krushna Ram Mohapatra) को आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके पूर्व कृष्न राम महापात्र उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के पद पर कार्यरत थे। राज्यपाल डेका ने मुख्य न्यायाधीश कृष्न राम महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी। राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश महापात्र को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 

        इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

        समारोह में मुख्य न्यायाधीश महापात्र की धर्मपत्नी श्रीमती अनिता महापात्र सहित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील द्वारा किया गया तथा उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव गृह विभाग श्रीमती निहारिका बारिक, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, महाधिवक्ता विवेक शर्मा, उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं हाईकोर्ट के अधिवक्तागण उपस्थित थे। 

        उल्लेखनीय है कि महापात्र छत्तीसगढ़ के 16 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।

  • उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का स्वागत करने पहुंचे राज्यपाल डेका, गर्मजोशी से हुआ अभिनंदन

    उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का स्वागत करने पहुंचे राज्यपाल डेका, गर्मजोशी से हुआ अभिनंदन

    राज्यपाल डेका ने उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का किया आत्मीय स्वागत

    रायपुर, 
    उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के छत्तीसगढ़ आगमन पर राज्यपाल रमेन डेका, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में उनका आत्मीय स्वागत किया।

           उपराष्ट्रपति का स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री दयालदास बघेल, वाणिज्य एवं उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी ) श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन,  राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, राज्य सभा सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने आत्मीय स्वागत की। इसी प्रकार कौशल विकास,  तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, सुनील सोनी, मोती लाल साहू और जनप्रतिनिधि अशोक बजाज और मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, जनप्रतिनिधियों ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में आत्मीय स्वागत किया।

  • डेका का सफलता मंत्र: वर्तमान पर ध्यान दें, सीखना न छोड़ें और समाज के काम आएं

    डेका का सफलता मंत्र: वर्तमान पर ध्यान दें, सीखना न छोड़ें और समाज के काम आएं

    वर्तमान पर फोकस करें, निरंतर सीखते रहें और समाज के लिए योगदान दें-डेका

    संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ कार्यक्रम

    रायपुर
    संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2026-27 में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ कार्यक्रम आज राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं का राज्यपाल ने सम्मान भी किया।

    राज्यपाल रमेन डेका ने नवप्रवेशित छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह अध्याय उन्हें केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय में कदम रखते ही छात्राएं उस गौरवशाली परंपरा की उत्तराधिकारी बन गई हैं, जिसने दशकों से बालिकाओं को ज्ञान और शिक्षा का प्रकाश प्रदान किया है।

    डेका ने महिलाओं की तुलना पानी से करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार महिलाओं के बिना समाज भी अधूरा है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने पास जो कुछ है, उससे संतुष्ट रहें, लेकिन अपने भविष्य को लेकर निरंतर प्रयास करती रहें। जीवन में आगे बढ़ने के अनेक अवसर और क्षेत्र हैं। यदि किसी एक क्षेत्र में सफलता नहीं मिलती है तो निराश होने के बजाय अन्य अवसरों का लाभ उठाकर कर आगे बढ़ना चाहिए।

    राज्यपाल ने कहा कि जीवन सतत सीखने की प्रक्रिया है और हम जीवनभर विद्यार्थी बने रहते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं , तकनीक ने ज्ञान के नए द्वार खोले हैं, लेकिन तकनीक पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। इंटरनेट से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, लेकिन यह मानव बुद्धि और विवेक का स्थान नहीं ले सकता। जीवन को सरल, सार्थक और बेहतर बनाने के लिए ज्ञान प्राप्त करना तथा उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि हमें केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि समाज ने हमें क्या दिया, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि हम समाज, अपने पड़ोस और देश की बेहतरी के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। जीवन अनमोल है, इसलिए इसे अनावश्यक चिंताओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए कठोर परिश्रम करना चाहिए। निरंतर प्रयासों से भविष्य निश्चित रूप से बेहतर बनेगा।

    राज्यपाल ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षकों का योगदान अमूल्य है, जिसे पैसों में नहीं मापा जा सकता। शिक्षकों को भी अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे वे उनसे प्रेरणा ले सकें।

    उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने समाज के लिए छोटे-छोटे सकारात्मक योगदान करें। उनके ये छोटे प्रयास मिलकर समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

    कार्यक्रम में महाविद्यालय की उन प्रतिभाशाली छात्राओं को राज्यपाल ने सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और कुशाग्रता से महाविद्यालय का नाम रोशन किया।

    इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, संत युधिष्ठिर लाल, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषा किरण अग्रवाल, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं।

  • जनजातीय बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की नई पहल, शबरी वाचनालय बनेगा सर्वांगीण विकास का केंद्र: डेका

    जनजातीय बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की नई पहल, शबरी वाचनालय बनेगा सर्वांगीण विकास का केंद्र: डेका

    जनजातीय बालिकाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम बनेगा शबरी वाचनालय -डेका

    रायपुर
     राज्यपाल रमेन डेका ने आज वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ द्वारा जनजातीय बालिकाओं में अध्ययन, ज्ञानार्जन एवं पठन-पाठन की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित शबरी वाचनालय का उद्घाटन किया। वाचनालय की स्थापना के लिए राज्यपाल द्वारा अपने स्वेच्छानुदान मद से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि शबरी वाचनालय एक दूरदर्शी पहल है, जो जनजातीय बालिकाओं के लिए अध्ययन, चिंतन, आत्मविकास एवं व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां अध्ययन करने वाली बालिकाएं ज्ञान एवं शिक्षा के बल पर प्रतियोगी परीक्षाओं सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करेंगी। उनकी उपलब्धियां न केवल उनके परिवार, बल्कि समाज और राष्ट्र का गौरव भी बढ़ाएंगी।

    उन्होंने कहा कि शबरी कन्या आश्रम वर्षों से जनजातीय बालिकाओं को केवल आश्रय और शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रसेवा की भावना भी प्रदान कर रहा है। इसी का परिणाम है कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाली अनेक बालिकाएं आज शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन तथा समाज सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संपदा एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण राज्य है। यहां की संस्कृति का संबंध रामायण काल की परंपराओं से है। उन्होंने कहा कि असम और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं में अनेक समानताएं हैं तथा दोनों राज्यों की सांस्कृतिक धारा भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है। ऐसे गौरवशाली सांस्कृतिक परिवेश का हिस्सा होना हम सभी के लिए गर्व की बात है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय इंटरनेट और तकनीक का युग है। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच जीवन मूल्यों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। परिवार और समाज के प्रति संवेदनशीलता, संतोष और सकारात्मक सोच ही जीवन को सार्थक बनाती है। संतुष्ट व्यक्ति ही वास्तविक रूप से प्रसन्न रह सकता है। जीवन ईश्वर का अमूल्य उपहार है, इसलिए इसके प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

    राज्यपाल डेका ने कहा कि अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संबद्ध वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ प्रांत विगत कई दशकों से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, स्वावलंबन एवं सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने का यह प्रयास वास्तव में प्रेरणादायी है। उन्होंने संस्था के संस्थापकों, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों के समर्पण भाव की सराहना करते हुए उनके सेवा कार्यों की प्रशंसा की।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ वनवासी विकास समिति के अध्यक्ष उमेश कच्छप, सचिव अनुराग जैन, संस्था के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सहयोगी तथा शबरी कन्या आश्रम की छात्राएं उपस्थित थीं।