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  • दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, नई पार्टी ‘जननीति भारत’ लॉन्च; जनता के लिए बताए तीन वचन

    दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, नई पार्टी ‘जननीति भारत’ लॉन्च; जनता के लिए बताए तीन वचन

    लखनऊ 
    आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखने वालीं दिव्या मित्तल ने आज सोशल मीडिया पर लाइव आकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। साथ ही अपनी नई पार्टी ‘जननीति भारत’ की घोषणा की। उन्होने कहा कि राजनीति आप पर राज करती है, लेकिन ये दल आपके राज के लिए बना है। पार्टी के तीन वचन बताते हुए कहा कि नई राजनीतिक पहल के तहत देश की नीतियों के केंद्र में आम लोगों को रखने पर जोर दिया गया है। नीतियां जनता की वास्तविक जरूरतों के आधार पर तय करने की बात कही गई है। किसानों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं का समाधान उनके अनुभवों और सुझावों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों में जाति, धर्म या पहचान के बजाय लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। महिलाओं की सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि लोगों की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाई जा सकें और उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहे।

    दिव्या मित्तल ने बनाई जननीति भारत पार्टी
    दिव्या मित्तल ने वीडियो संदेश में बताया कि राजनीति में आने की बात कहने के बाद उन्होंने लोगों को एक नंबर दिया था, जिस पर इतने संदेश आए कि व्हाट्सएप ने उसे रोक दिया। उन्होंने इसके लिए माफी मांगते हुए लोगों के समर्थन पर आभार जताया। दिव्या ने कहा कि वह उम्मीद का दीया लेकर निकली थीं, लेकिन लोगों के संदेशों ने उन्हें सूरज के सामने खड़े होने जैसा एहसास कराया। उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए कहा कि देश में पार्टियों की कमी नहीं, बल्कि सबकी सुनवाई नहीं होने की समस्या है। गंगा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां हर बूंद बराबर है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ रखा है

    इससे पहले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की जनसत्ता दल की ओर से दिव्या मित्तल को पार्टी से जुड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की भी चर्चा उठी थी। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक सवाल के जवाब में दिव्या मित्तल को सपा में शामिल होने का ऑफर दिया था। और कहा थी कि वो भी अब उन्हें तय करना पड़ेगा कि हरा गमछा और लाल गमछा डाल लें।

    आपको बता दें आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद नौकरी छोड़ने के बाद राजनीति में आने का फैसला किया। वे मिर्जापुर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी के पद पर तैनात रह चुकी हैं। अपने कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल की पहचान सख्त प्रशासनिक कार्यशैली और फैसलों को लेकर चर्चा में रहने वाली अधिकारी के रूप में बनी। हालांकि, उनकी तैनाती के दौरान जनप्रतिनिधियों के साथ मतभेदों की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। मिर्जापुर में विकास कार्यों को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ उनके टकराव की बात कही जाती रही है।

    2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नौकरी से त्यागपत्र देने की जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा कि 13 वर्षों की अविस्मरणीय सेवा यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया है। साधारण परिवेश में पली-बढ़ीं दिव्या ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई के बाद लंदन में नौकरी की, लेकिन अपने देश के लिए कुछ करने की इच्छा उन्हें भारत वापस ले आई। उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने को सौभाग्य बताया। दिव्या ने लिखा कि वह देश को कुछ देने आई थीं, लेकिन उन्हें लोगों से इतना प्यार, सम्मान और अपनापन मिला कि उनकी झोली भर गई। उन्होंने अपने कार्यकाल में साथ देने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों के प्रति भी आभार जताया था।

     

  • दिव्या मित्तल से शाह फैसल तक, IAS से राजनीति में आए इन अफसरों की कहानी

    दिव्या मित्तल से शाह फैसल तक, IAS से राजनीति में आए इन अफसरों की कहानी

    लखनऊ
    दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का ऐलान किया है। दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव पद से इस्तीफा दिया था। बता दें कि, देश में ऐसे नेताओं की एक अच्छी-खासी लिस्ट है जो पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी यानी IAS थे और बाद में राजनीति में कदम रखा। कुछ अधिकारियों को तो राजनीति में अच्छी-खासी सफलता भी मिली। आइए जानते हैं उनकी कहानी।

    यशवंत सिन्हा
    भारतीय प्रशासनिक सेवा से सफल राजनेता बनने की लिस्ट में सबसे पहला नाम यशवंत सिन्हा का आता है। यशवंत सिन्हा 1960 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं। IAS बनने से पहले वे दो साल तक पटना विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के शिक्षक रहे। यशवंत सिन्हा 1984 तक कई विभागों में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में काम किया। वहीं साल 1984 में उन्होंने नौकरी छोड़कर राजनीति का रुख किया। राजनीति उन्हें काफी रास आई। साल 1984 में वो जनता पार्टी में शामिल हो गए। 1988 में वे राज्यसभा सांसद बने। बता दें कि, जब चंद्रशेखर 1990 में प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने यशवंत सिन्हा को वित्त मंत्री बनाया था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को यशवंत सिन्हा अपने गुरु मानते थे।

    वहीं साल 1993 में वे भाजपा में आ गए। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी तो उन्हें इसबार विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। 2018 में मतभेदों के कारण उन्होंने बीजेपी से किनारा कर लिया। फिलहाल यशवंत सिन्हा तृणमूल कांग्रेस में हैं

    अजीत जोगी
    एक ऐसा अधिकारी, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे। 1968 के बैच के आईएएस अधिकारी अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। अजीत जोगी ने राजनीति में शामिल होने का फैसला किया तो वह भी जिला कलेक्टर थे। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने के बाद वो कांग्रेस में शामिल हो गए।

    अजीत जोगी, मध्यप्रदेश में अधिकारी थे। उस समय छत्तिसगढ़, एक राज्य नहीं बना था और वो मध्यप्रदेश का ही हिस्सा था। जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश में नौकरी के दौरान अजीत जोगी तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के करीब आ गए और उन्होंने ही अजीत जोगी को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिलवाया। राजीव गांधी के कहने वो अजीत जोगी राजनीति में आए और कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा। वहीं जब छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश से अलग हुआ तब अजीत जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। साल 2016 में उन्होंने खुद की पार्टी भी बनाई। मई 2020 को उनका निधन हो गया।

    अल्फोंज कन्नाथानम
    केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले अल्फोंज कन्नाथानम, 1979 बैच के IAS अधिकारी हैं। 1990 के दशक में दिल्ली विकास प्राधिकरण DDA के कमिश्नर रहते हुए उन्हें काफी पहचा मिली थी। उन्होंने कई अवैध इमारतों को ध्वस्त करवा था। इसरे बाद उनको ‘डिमोलिशन मैन’ भी कहा जाता था। साल 2006 में आईएएस से रिटायरमेंट के बाद वो कोट्टायम में कंजिरप्पाली से विधायक बने। वहीं 2011 में बीजेपी में शामिल हो गए और छह साल बाद, राजस्थान से राज्यसभा सांसद बने। बाद में वो केंद्रीय मंत्री भी बने

    आर के सिंह
    कभी देश के सबसे कड़क IAS अधिकारी के रुप में चर्चित रहे राज कुमार सिंह यानी आरके सिंह, राजनीति में भी काफी सपल रहे। बता दें कि, आर के सिंह ने जिलाधिकारी रहते हुए भाजपा नेता एल.के. आडवाणी को गिरफफ्तार भी किया था। समस्तीपुर के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने एल.के. आडवाणी को उनकी रथ यात्रा के दौरान गिरफ्तार किया था। आरके सिंह ने 1974 में एक भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी बने , वहीं 1975 में वो एक IAS अधिकारी बने। IAS अधिकारी के रूप में पटना के डीएम भी रहे

    रिटायरमेंट के बाद उन्होंने साल 2013 में भाजपा का दामन थाम लिया और 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में सफलता भी हासिल की। बिहार के आरा से वो दो बार सांसद बन चुके हैं। सांसद बनने के बाद आरके सिंह, केंद्रीय मंत्री भी बने। वहींसाल 2024 के लोकसभा चुनाव उनके लिए अच्छा नहीं रहा और उन्हें इस चुनाव में हार मिली। फिलहाल उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से दूरी बना ली है।

    IAS शाह फैसल
    जम्मू-कश्मीर से आने वाले यूपीएससी टॉपर शाह फैसल ने भी नौकरी छोड़ राजनीति का रुख किया था। शाह फैसल ने 2010 में UPSC AIR-1 हासिल किया। IAS अफसर बनने के बाद उन्होंने कई अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाली, लेकिन 2019 में अचानक इस्तीफे का ऐलान कर दिया। इसके लिए उन्होंने बकायदा ‘जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट’ नाम की पार्टी भी बना ली थी। उनकी पार्टी जेकेपीएम ने अगस्त 2020 को घोषणा की, कि फैसल अब पार्टी छोड़ चुके हैं।

  • IIT-IIM से पढ़ीं दिव्या मित्तल अब राजनीति में रखेंगी कदम

    IIT-IIM से पढ़ीं दिव्या मित्तल अब राजनीति में रखेंगी कदम

    लखनऊ
    पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल अब राजनीति में कदम रखने जा रही हैं। IIT और IIM से पढ़ाई करने वाली दिव्या मित्तल ने IAS बनने से पहले लंदन में लाखों रुपये के पैकेज पर नौकरी की थी। फिर देश सेवा के लिए विदेश की नौकरी छोड़कर उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और तीसरे प्रयास में IAS बनीं। अब प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया है।

    2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का सफर बेहद रोचक रहा है। हरियाणा के रेवाड़ी में जन्मी दिव्या मित्तल ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की। पहले उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह पति के साथ लंदन चली गईं। जहां एक मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े पैकेज पर जॉब भी किया। हालांकि कुछ समय बाद ही उनका 9 से 6 वाली जॉब से मोह भंग हो गया और देश सेवा के लिए भारत आ गईं।

    तीन बार दी परीक्षा, तीनों बार मिली सफलता
    दिव्या मित्तल ने भारत आकर यूपीएससपी की तैयारी में जुट गईं। उन्होंने तीन बार सिविल सर्विस की परीक्षा दी। तीनों बार सफलता भी मिली लेकिन जिस आईएएस के टैग को हासिल करना चाहती थीं, उसे आखिर में हासिल करके ही माना। साल 2010 में उन्होंने पहली बार में ही 332वीं रैंक हासिल की और भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुनी गईं। फिर अगले साल परीक्षा दी और इस बार 134वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनीं। तीसरी बार में 68वीं रैंक के साथ आईएएस बन गईं। दिव्या मित्तल को 2013 में यूपी कैडर से प्रदेश में सेवा का मौका मिला।

    इन पदों पर रहीं दिव्या मित्तल
    बीते 13 सालों में दिव्या मित्तल की लगातार फिल्ड में तैनाती मिलती रही। मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद से आईएएस की करियर शुरूआत हुई। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक, बरेली में विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष, यूपी ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी की सीईओ, संतकबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में डीएम के पद पर काम किया।

    एक महीने पहले दिया था इस्तीफा
    दिव्या मित्तल ने बीते 30 अगस्त को इस्तीफा दे दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्होंने लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा था। जिसमें उन्होंने अपनी भावनाएं प्रकट की थीं। उन्होंने लिखा था, 'आज मैंने 13 सालों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। लेकिन सब कुछ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। मैं लौट आई और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।'

    राजनीति में जाएंगी पूर्व आईएएस
    दिव्या ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (ट्विटर) पर एक वीडियो के जरिए साफ कर दिया कि वह राजनीति में प्रवेश करेंगी। हालांकि किस पार्टी से जुड़ेगी ये साफ नहीं है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना भी साधा। यह भी कहा कि वह किसी से नहीं डरेंगी।

  • IAS छोड़ने के बाद क्या करेंगी दिव्या मित्तल? 29 सितंबर सुबह 8:30 बजे करेंगी बड़ा खुलासा

    IAS छोड़ने के बाद क्या करेंगी दिव्या मित्तल? 29 सितंबर सुबह 8:30 बजे करेंगी बड़ा खुलासा

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की पूर्व जिलाधिकारी (DM) और चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था। इसके 14 दिन बाद 14 सितंबर को उनका इस्तीफा स्वीाकर कर लिया गया। उन्होंने इसकी जानकारी एक्स हैंडल पर दी थी।

    इस्तीफा स्वीकार होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके भविष्य को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, इन दावों पर विराम लगाते हुए दिव्या मित्तल ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि वह 29 सितंबर को सुबह अपने भविष्य के प्लान का एलान करने वाली हैं।

    सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे कयासों का किया जिक्र
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में उन तमाम अटकलों और कयासों का जिक्र किया, जिसको लेकर उनके इस्तीफे के बाद से कयास लगाए जा रहे थे।

    उन्होंने लिखा, "आगे क्या करना है? मैंने पढ़ा: बच्चे छोटे हैं। अब घर। अच्छा पैकेज मिलेगा। वापस विदेश। IAS पर किताब लिखी है। कोचिंग। टिकट पक्का हो गया होगा। राजनीति। 29 सितंबर, सुबह 8:30 बजे बताऊंगी।"

    दिव्या मित्तल के इस पोस्ट के बाद उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है और लोग उन्हें आगे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों ने लिखा है कि हमें इंतजार है। ऐसे में अब सभी 29 सितंबर को सुबह 8:30 बजे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब दिव्या मित्तल स्वयं अपने अगले कदम का खुलासा करेंगी।

    कौन हैं पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल?
    गौरतलब है कि पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले में हुआ है। दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई की है।

    शादी के बाद वह अपने पति गगनदीप के साथ लाखों के पैकेज पर लंदन चली गईं। कुछ समय बाद वह लंदन की नौकरी छोड़ वापस अपने देश भारत लौट आईं।

    यहां आकर वह यूपीएससी की तैयारी में जुट गई। इसके बाद साल 012 में दिव्या मित्तल यूपीएससी ने क्रैक किया। उनका सेलेक्शन आईपीएस के लिए हुआ, लेकिन वह आईएएस बनना चाहती थी।

    दूसरे प्रयास में 2013 में आईएएस बन गईं। दिव्या मित्तल अपने कार्यकाल के दौरान मिर्जापुर, बस्ती, देवरिया जिले में डीएम रहीं। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी संभाली।

     

  • व्यक्तिगत कारणों और पारिवारिक प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए आईएएस दिव्या मित्तल ने दिया था स्वैच्छिक इस्तीफा

    व्यक्तिगत कारणों और पारिवारिक प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए आईएएस दिव्या मित्तल ने दिया था स्वैच्छिक इस्तीफा

    लखनऊ
    यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल आज से प्रशासनिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त हो गई हैं। उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या का इस्तीफा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने स्वीकार्य करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उनका इस्तीफा आज 15 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। दिव्या ने 30 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए स्वेच्छा से प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। अब उनके अगले कदम पर अटकलें लगाई जा रही हैं।

    राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पास पहुंचा था। दिव्या के पति गगनदीप सिंह ढिल्लों ने भी चार साल पहले 2022 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। गगनदीप सिंह 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा (आईटीएस) अधिकारी थे।

    यूपी कॉडर की वर्ष 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दिए जाने की जानकारी अपने फेसबुक और एक्स एकाउंट के माध्यम से दी थी। दिव्या को मई 2026 में देवरिया के डीएम के पद से हटाकर राजस्व विभाग में अपेक्षाकृत कम महत्व के विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया था। वे तभी से असहज बताई जा रही थीं।

    मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती
    आईएएस बनने के बाद मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती मिली थी। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक के पद पर तैनात रहीं। बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष भी रहीं। संतकबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। बीच में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाली।

    आईआईटी और आईआईएम की पढ़ाई, लाखों की नौकरी छोड़ी
    दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी में 23 नवंबर 1983 को हुआ था। शुरुआती पढ़ाई के बाद आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। गगनदीप के साथ शादी के बाद दोनों लंदन चले गए। जहां एक कंपनी की जॉब की। बाद में लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़ देश सेवा के लिए दोनों भारत आ गए और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2021 में पति गगनदीप और 2013 में दिव्या मित्तल ने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की।

    मिर्जापुर से लड़ेंगी चुनाव?
    दिव्या को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक चर्चा उनके मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की भी है। इस्तीफा देते समय भी उन्होंने मिर्जापुर को ही याद किया था। यहां की एक बुजुर्ग मां को याद किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट लिखा था कि आज आभार से आंखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोलीं, बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।?

  • UP कैडर की 2013 बैच की IAS दिव्या मित्तल ने छोड़ी सेवा, केंद्र सरकार ने मंजूर किया इस्तीफा

    UP कैडर की 2013 बैच की IAS दिव्या मित्तल ने छोड़ी सेवा, केंद्र सरकार ने मंजूर किया इस्तीफा

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित और तेजतर्रार 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने मंजूर कर लिया है. निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए उन्होंने 30 अगस्त को यह पद छोड़ने की घोषणा की थी, जो 15 सितंबर से प्रभावी हो गया है।  

    लंदन की नौकरी छोड़ बनी थीं आईएएस
    दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई करने के बाद लंदन में अच्छी नौकरी की थी, लेकिन सब कुछ पाने के बाद भी उन्हें कुछ अधूरा लगा. इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर यूपीएससी की तैयारी की. उन्होंने पहले प्रयास में आईपीएस और दूसरे प्रयास में 2013 में आईएएस की सफलता हासिल की. उनके पति गगनदीप सिंह ने भी 2022 में अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर एक कंपनी शुरू की थी। 

    सख्त कार्यशैली और भविष्य की राह
    मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया में डीएम रहीं दिव्या मित्तल की गिनती सख्त और बेबाक अफसरों में होती थी. मिर्जापुर में उन्होंने आजादी के 75 साल बाद पानी की व्यवस्था कराई थी. इस्तीफा मंजूर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर जयशंकर प्रसाद की पंक्ति "प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो" लिखकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं। 

    मामले में सियासत भी
    आपको बता दें कि दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सियासत भी देखने को मिली थी. सपा प्रमुख ने आरोप लगाया था कि प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों को काम नहीं करने दिया जा रहा है, वहीं कांग्रेस नेता अजय राय ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी. उन्होंने इशारा भी किया था अगर दिव्या मित्तल कांग्रेस से चुनाव लड़ना चाहेंगी तो उसपर विचार किया जाएगा। 

  • तीन जिलों की DM रहीं दिव्या मित्तल ने छोड़ी IAS की नौकरी, बोलीं- ‘आज आभार से आंखें नम हैं’

    तीन जिलों की DM रहीं दिव्या मित्तल ने छोड़ी IAS की नौकरी, बोलीं- ‘आज आभार से आंखें नम हैं’

     लखनऊ
    यूपी के तीन जिलों में डीएम के पद पर सेवा दे चुकी आईएएस दिव्या मित्तल ने आईएएस से रिजाइन कर दिया है। रविवार को उनकी सोशल मीडिया पोस्ट से इसकी जानकारी हुई तो पूरे यूपी में हलचल मच गई। दिव्या मित्तल ने त्यागपत्र देने की जानकारी के साथ एक अंतिम चिट्ठी भी लिखी है, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव साझा किए हैं। हालांकि, इसमें कहीं यह जिक्र नहीं किया है कि उन्होंने रिजाइन क्यों किया।

    कौन हैं आईएएस दिव्या मित्तल?
    यूपी की चर्चित आईएएस अधिकारियों में गिनी जाने वाली दिव्या मित्तल 2013 बैच की आईएएस हैं, जिन्हें 2015 में कंफर्मेशन मिला और मेरठ में ज्वांइट मजिस्ट्रेट के पद नियुक्त किया गया। मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली 42 वर्षीय दिव्या मित्तल यूपी में तीन जिलों संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया की डीएम रह चुकी हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम से पीजीडीएम किया है।

    कहां-कहां मिली पोस्टिंग?
    पद / स्थान                                           अवधि
    मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट                        नवंबर 2015 से मई 2017
    गोंडा में सीडीओ                                 मई 2017 से अप्रैल 2018
    कानपुर नगर में संयुक्त प्रबंध निदेशक (UPSIDC)     अप्रैल 2018 से फरवरी 2019
    बरेली में उपाध्यक्ष (बरेली विकास प्राधिकरण)     फरवरी 2019 से सितंबर 2020
    संत कबीर नगर में डीएम एवं कलेक्टर     सितंबर 2020 से सितंबर 2022
    मिर्जापुर में डीएम एवं कलेक्टर     सितंबर 2022 से सितंबर 2023
    लखनऊ में प्रतीक्षा सूची में     सितंबर 2023 से फरवरी 2024
    लखनऊ में सीईओ (UPRRDA)     फरवरी 2024 से जुलाई 2024
    देवरिया में डीएम एवं कलेक्टर     जुलाई 2024 से मई 2026
    लखनऊ में विशेष सचिव (राजस्व विभाग)     मई 2026 से अब तक
    दिव्या मित्तल ने चिट्‌ठी वाली पोस्ट का पूरा वर्जन

    आईएएस दिव्या मित्तल ने लिखा,
        ‘आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।

        साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।

        बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।

        मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।

        आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।