Tag: Funeral

  • धर्मांतरण के बाद अंतिम संस्कार पर बवाल, बस्तर में दो पक्ष आमने-सामने

    धर्मांतरण के बाद अंतिम संस्कार पर बवाल, बस्तर में दो पक्ष आमने-सामने

    सुकमा.

    एक बुजुर्ग की मौत के बाद परिवार को अंतिम विदाई देने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा. सुकमा के छिंदगढ़ ब्लॉक के पेंदलनार गांव में 76 वर्षीय बंडी मुचाकी की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया.

    ईसाई धर्म अपना चुके परिवार ने गांव में ही शव दफनाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने इसकी अनुमति नहीं दी. इसके बाद परिजन शव लेकर सुकमा पहुंचे, मगर यहां के कब्रिस्तान में भी दफनाने की व्यवस्था नहीं हो सकी. एक तरफ पिता का शव और दूसरी तरफ अंतिम संस्कार के लिए जगह की तलाश, इस स्थिति ने परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं. मृतक के बेटे रमेश कुमार के मुताबिक उनका परिवार कई वर्षों पहले ईसाई धर्म अपना चुका है.

    यूनाइटेड क्रिश्चियन एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अल्फ्रेड सुना ने बताया कि सुकमा में 10 से 12 चर्च हैं, लेकिन मौजूदा कब्रिस्तान में जगह सीमित है. उनका कहना है कि बाहर से आने वाले लोगों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत है. तहसीलदार गिरीश निंबालकर के मुताबिक प्रशासन ने हस्तक्षेप कर अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई है. अलग कब्रिस्तान के लिए भूमि प्रस्तावित है, लेकिन अब तक उसका आवंटन नहीं हुआ है. अब सवाल यह है कि जब जिले में कई चर्च हैं, तो अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित भूमि की व्यवस्था कब होगी?

  • गुना में अस्पताल के बाहर सजी अर्थी, शव घर ले जाने को लेकर विवाद

    गुना में अस्पताल के बाहर सजी अर्थी, शव घर ले जाने को लेकर विवाद

    गुना.

    मध्य प्रदेश के गुना जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मृत महिला का शव उसके मकान मालिक ने नहीं लाने दिया तों स्वजन को खुले आसमान के नीचे अंतिम यात्रा की रस्म करनी पड़ीं। मकान मालिक ने कह दिया कि नवरात्रि है, इसलिए शव को घर नहीं लाने दिया जा सकता।

    31 वर्षीय मृतका पूजा रजक अपने पिता और तीन बच्चों के साथ किराए के मकान में रहा करती थी। इंदौर में उसका विवाह हुआ लेकिन कैंसर की बीमारी के कारण पति ने छोड़कर दूसरा विवाह कर लिया, इस वजह से वह तीनों बच्चों को लेकर गुना में पिता के साथ आकर रहने लगी थी। पिता पहलवान रजक मजदूरी करते थे और किराए के घर में रहते हैं। हालत ज्यादा खराब होने पर तीन दिन पहले पूजा को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। आर्थिक रूप से मजबूर पिता और मां भोपाल ले जाकर इलाज कराना चाहते थे।

    इंदौर से दूसरी पत्नी संग आया पति
    पहली पत्नी की मौत की खबर सुनकर पति भी इंदौर से अपनी दूसरी पत्नी के साथ गुना आया। इस दौरान पूजा के स्वजन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला अस्पताल में ही पूजा के अंतिम संस्कार के लिए तैयार की, उसकी अर्थी सजाई गई और शादी के जोड़े में अंतिम यात्रा निकाल बूढ़े बालाजी मुक्तिधाम ले जाया गया, जहां बेटे ने मुखाग्नि दी।

    कलेक्टर ने की थी मदद
    सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद भार्गव ने कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को पूरा मामला बताया तो उन्होंने आर्थिक मदद की, लेकिन भोपाल में डॉक्टरों ने भी गंभीर हालत बताई। इस पर बीते दिन महिला को वापस गुना लाया जा रहा था, जिसकी रास्ते में मौत हो गई।