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  • गोमती नदी की बाढ़ से बढ़ा ग्राउंड वाटर लेवल, बारिश से नदी और तालाबों को मिला पानी

    गोमती नदी की बाढ़ से बढ़ा ग्राउंड वाटर लेवल, बारिश से नदी और तालाबों को मिला पानी

    लखनऊ
     बाढ़ आई तो तमाम परिवारों को पलायन करना पड़ा। गृहस्थी का सामान पानी के भेंट चढ़ गया। बचाव कार्य में सरकारी तंत्र को लगना पड़ा। अब गोमती नदी शांत है लेकिन इस बाढ़ का गोमती नदी के गंदगी को बहा दिया, जिसे साफ करने के योजना को दस माह से अधिकारी बना रहे थे तो दूसरी तरफ बाढ़ का धरती के गगरी को भी भर दिया है।

    सिंचाई विभाग का मानना है कि 24 से 27 सितंबर के बीच लगातार बारिश से जहां बाढ़ से नुकसान हुआ था तो दूसरी तरफ भूजल को लाभ मिला है। भूजल में इतना पानी पहुंच गया तो उसका जलस्तर बढ़ना तय है। इन चार दिनों में 12 सौ क्यूबिक मीटर बारिश होने से आई बाढ़ से खेतों के साथ ही खाली जगह पर पानी भरा रहा है। यह जगह ऐसी थी, जहां मिट्टी थी। नदी के आसपास के तालाब भी भर गए।

    पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई और लखनऊ में नदी के कैचमेंट क्षेत्र में कई दिनों का पानी भरा रहा, जो भूजल तक पहुंचा। यह पानी गोमती के साथ ही उसकी सहायक नदियों का भी था। इसमें उन्नाव के बेहटा नदी माल रोड पर जेहटा के पास आकर गोमती नदी में मिलती है। इसी तरह अयोध्या के कल्याणी नदी सुलतानपुर में गोमती में मिलती है तो नदी और अयोध्या की नदी का पानी भी गोमती नदी के कैचमेंट क्षेत्र में एकत्र हो गया था।

    कैचमेंट क्षेत्र में भरा होने के कारण अगर गोमती नदी को पानी भी मिलता रहेगा और मार्च तक गोमती नदी पानी से लबालब भरी दिखेगी। इसके साथ ही नदी के तेज बहाव से सफाई होने से उसमें साफ पानी मौजूद है। अब अगर नालों को डायवर्ट कर दिया जाए तो गोमती नदी के सफाई करने के के आवश्यकता नहीं होगी।

    लखनऊ में प्रवेश करते ही गंदगी हो रही है
    गोमती नदी लखनऊ में कुल तीस किलोमीटर में बहती है लेकिन लखनऊ में प्रवेश करते ही उससे नाले जुड़ने लगते थे, जिसमें सीवर भी होता है। करीब 45 नालों का हर दिन पानी नदी में जाने से वह भूजल के लिए खतरनाक होता है। शहर में 48 प्रतिशत सीवर लाइन होने से 52 प्रतिशत सीवर सीधे नदी में जाता है।

    पीलीभीत से लेकर गाजीपुर तक गोमती नदी में इस बार अधिक पानी रहा है। 24 से 27 सितंबर 12 सौ क्यूबिक मीटर बारिश होने से बाढ़ के कारण आसपास के खेतों के साथ ही तालाब भी भरे हैं। यहां कच्चा होने से भूजल तक पानी पहुंचा है, जो अच्छे संकेत हैं। इसके अलावा उन्नाव, बाराबंकी और अयोध्या के नदी का पानी भी गोमती नदी के क्षेत्र में आने से उसका लाभ भी भूजल को मिला है। खास यह है कि गोमती नदी गहराई से साफ हो गई, क्योंकि पानी का बहाव तेज था। -मुकेश कुमार वैश्य, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग

    अभी गेट खुले रहेंगे
    गऊघाट पर अभी पानी सामान्य से अधिक होने के कारण बैराज के गेट को खोले रखा गया है। बैराज पर शनिवार को समुद्र तल से 107.32 मीटर पानी था, तब यहां पर पानी 105.70 मीटर होगा, तब बैराज के सभी दसों गेटों को बंद कर दिया जाएगा।

  • भूजल संकट से जूझते पंजाब के लिए राहत भरी खबर, केंद्र की रिपोर्ट से बढ़ी उम्मीद

    भूजल संकट से जूझते पंजाब के लिए राहत भरी खबर, केंद्र की रिपोर्ट से बढ़ी उम्मीद

    चंडीगढ़.

    पंजाब में दशकों से लगातार गिर रहे भूजल लेवल को लेकर राज्य के लोगों को राहत मिली है। सेंट्रल भूजल बोर्ड के साल 2026 के ताजा आंकड़ों/मूल्यांकन के मुताबिक, दशकों में पहली बार पंजाब में भूजल लेवल में सुधार दर्ज किया गया है।

    इस बारे में जानकारी पंजाब के जल संसाधन मंत्री ने शेयर की है। केंद्र की इस रिपोर्ट ने भूजल संकट से उभरने की नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने कहा कि भूजल के इस्तेमाल की दर साल 2022 में 164 फीसदी से घटकर साल 2026 में 152.22 फीसदी हो गई है, जबकि ज्यादा इस्तेमाल वाले ब्लॉक की संख्या 117 से घटकर 110 हो गई है और सुरक्षित ब्लॉक की संख्या 17 से बढ़कर 20 हो गई है।
    कुल 153 मूल्यांकन किए गए ब्लॉक में से 109 में सुधार दर्ज किया गया है। पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जल संसाधन मंत्री ने कहा कि ये सुधार सरकार की नहर का पानी खेतों तक पहुंचाने और भूजल बचाने की कोशिशों का नतीजा हैं।

    उन्होंने कहा कि भूजल का सालाना इस्तेमाल साल 2022 में 28.02 बिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर 2026 में 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर हो गया है। साल 2025 के मुकाबले 14 ब्लॉक बेहतर कैटेगरी में आए हैं, जिनमें से 4 ब्लॉक सेफ कैटेगरी में पहुंच गए हैं। फाजिल्का का अरनीवाला शेख सुभानपुर, फिरोजपुर का मक्खू, होशियारपुर का हाजीपुर और पठानकोट का नरोट जैमल सिंह सेफ कैटेगरी में आ गए हैं।