Tag: investment

  • राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, 21 IAS अधिकारी संभालेंगे निवेश और प्रवासी राजस्थानियों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी

    राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, 21 IAS अधिकारी संभालेंगे निवेश और प्रवासी राजस्थानियों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी

    जयपुर
    राजस्थान में व्यापार और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने तथा निवेशकों को अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर नई पहल की है। इसके तहत कार्मिक विभाग ने 21 आईएएस अधिकारियों को देश के विभिन्न राज्यों और दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। ये अधिकारी अपने-अपने आवंटित राज्यों और देशों में राजस्थान में निवेश करने के इच्छुक व्यक्तियों और संस्थानों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा, वे देश-विदेश में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों से जुड़े मामलों में सहयोग करेंगे और संबंधित राज्यों में कार्यरत राजस्थान कैडर या राजस्थान मूल के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखेंगे।

    चार पुराने आदेश निरस्त, नई एकीकृत व्यवस्था लागू
    राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने राज्यों और देशों के साथ समन्वय से जुड़ी व्यवस्था को नए सिरे से पुनर्गठित किया है। इसके लिए पहले जारी किए गए चार अलग-अलग आदेशों को निरस्त कर एकीकृत नई व्यवस्था लागू की गई है। नए आदेश के तहत सभी 21 आईएएस अधिकारियों को उनके निर्धारित राज्यों और देशों की जिम्मेदारी आवंटित की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राजस्थान में व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाना, नए निवेशकों को आकर्षित करना और प्रवासी राजस्थानियों को प्रशासनिक स्तर पर जरूरी सहायता उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को अपने निर्धारित क्षेत्रों में निवेश संबंधी संभावनाओं को बढ़ाने और संबंधित पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

    इन आईएएस अधिकारियों को मिले राज्यों और देशों के प्रभार
    कार्मिक विभाग की ओर से जारी आवंटन सूची के अनुसार, गायत्री ए. राठौड़ को गोवा और सिंगापुर, टी. रविकांत को आंध्र प्रदेश और केन्या, मंजू राजपाल को बिहार और हांगकांग तथा नवीन जैन को हरियाणा और सऊदी अरब के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। कृष्ण कुणाल झारखंड और कतर, जबकि रवि जैन छत्तीसगढ़ और ऑस्ट्रेलिया के साथ समन्वय का काम संभालेंगे। इसी तरह, डॉ. रवि कुमार सुरपुर को कर्नाटक और दक्षिण अफ्रीका, डॉ. जोगा राम को केरल और संयुक्त अरब अमीरात तथा पी. रमेश को तेलंगाना और आयरलैंड का प्रभार सौंपा गया है। आरती डोगरा उत्तराखंड और जर्मनी के साथ समन्वय करेंगी, जबकि डॉ. रोहित गुप्ता उत्तर प्रदेश और ब्रिटेन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    तमिलनाडु से जापान और पंजाब से स्पेन तक की जिम्मेदारी
    आईएएस अधिकारी आनंदी को तमिलनाडु और जापान के साथ समन्वय का दायित्व दिया गया है। राजन विशाल पंजाब और स्पेन का कार्यभार देखेंगे। अर्चना सिंह को मध्य प्रदेश के साथ-साथ फिनलैंड और डेनमार्क की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नकाते शिवप्रसाद मदन महाराष्ट्र और ब्राजील के साथ तालमेल स्थापित करेंगे।

    वहीं, शिवांगी स्वर्णकार असम और अमेरिका, अनुपमा जोरवाल दिल्ली और इटली तथा रुक्मणी रियार पश्चिम बंगाल के साथ-साथ स्वीडन और नॉर्वे से समन्वय का काम संभालेंगी। हिमांशु गुप्ता को ओडिशा और युगांडा की जिम्मेदारी दी गई है।

    हिमाचल प्रदेश से नेपाल और गुजरात से स्विट्जरलैंड तक समन्वय
    नई व्यवस्था के तहत अरविंद कुमार पोसवाल हिमाचल प्रदेश और नेपाल के साथ समन्वय स्थापित करेंगे। वहीं, सुरेश कुमार ओला को गुजरात और स्विट्जरलैंड का प्रभार सौंपा गया है। राज्य सरकार की इस व्यवस्था के तहत सभी आवंटित अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में निवेश के इच्छुक लोगों और संस्थानों को जरूरी मार्गदर्शन देंगे। साथ ही, प्रवासी राजस्थानियों से जुड़े मामलों में सहायता और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय के जरिए राजस्थान में व्यापार, निवेश और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेंगे।

     

  • हरियाणा में मारुति से फ्लिपकार्ट तक का निवेश, चार IMT के विस्तार की तैयारी तेज

    हरियाणा में मारुति से फ्लिपकार्ट तक का निवेश, चार IMT के विस्तार की तैयारी तेज

    चंडीगढ़
    हरियाणा में औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए सरकार मौजूदा औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आइएमटी) में बड़ी कंपनियों की परियोजनाओं को बढ़ावा देने के साथ ही नए औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रयासों से प्रदेश को देशी और वैश्विक कंपनियों के लिए प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल के अनुसार, चार आइएमटी के विस्तार के लिए लगभग 14,300 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिह्नित की गई है। इससे औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना हैं।

    हरियाणा में छह प्रमुख आइएमटी विकसित की गई हैं। इनमें मानेसर लगभग 4,000 एकड़, रोहतक 3,600 एकड़, बावल 3,300 एकड़, खरखौदा 3,200 एकड़, फरीदाबाद 1,800 एकड़ और सोहना 1,500 एकड़ में फैली हैं। इन औद्योगिक क्षेत्रों में सरकार उद्योगों की स्थापना के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।

    फ्लिपकार्ट 140 एकड़ में 1300 करोड़ रुपये का किया निवेश
    प्रमुख निवेश परियोजनाओं में मारुति सुजुकी 800 एकड़ में 18,000 करोड़ रुपये, एटीएल 178 एकड़ में 7,000 करोड़ रुपये, आदित्य बिरला ग्रुप 70 एकड़ में 1,140 करोड़ रुपये और यूनो-मिंडा 94 एकड़ में 11,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही हैं

    डा. अमित अग्रवाल ने बताया कि फ्लिपकार्ट 140 एकड़ में 1,300 करोड़ रुपये, डेंसो 37 एकड़ में 570 करोड़ रुपये, टोयोटा बोशोकु 21 एकड़ में 400 करोड़ रुपये और अमूल 10 एकड़ में 300 करोड़ रुपये की परियोजना के साथ निवेश कर रहे हैं।

    फैवेली ट्रांसपोर्ट पांच एकड़ में 200 करोड़ रुपये तथा यूफ्लेक्स 14 एकड़ में 300 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं। यामाहा, एस्कोर्ट्स, व्हर्लपूल, इंडियन आयल, एशियन पेंट्स, जेसीबी, होंडा, हीरो, टाटा, गूगल, माइक्रोसाफ्ट, सैमसंग और भारत इलेक्ट्रानिक्स सहित अनेक कंपनियां भी प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी हैं।

    चार आइएमटी के विस्तार के लिए जमीन चिह्नित
    औद्योगिक नेटवर्क को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना के तहत खरखौदा के विस्तार के लिए लगभग 5,800 एकड़, कोसली में नई आइएमटी के लिए 5,000 एकड़, बावल के विस्तार के लिए 2,000 एकड़ और सोहना के विस्तार के लिए 1,500 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिह्नित की गई है।

    अमित अग्रवाल के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, स्पष्ट भूमि स्वामित्व, पूर्व-स्वीकृत औद्योगिक भूमि उपयोग, सिंगल-विंडो सहायता और बेहतर सड़क संपर्क विकसित करने पर जोर है।

    उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए कौशल विकास केंद्र, सामान्य सुविधा केंद्र, स्टार्टअप सहायता और इन्क्यूबेशन सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 500 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि वाला सक्षम कोष बनाया गया है।

     

  • हरियाणा में सिंगापुर का बड़ा निवेश, गुरुग्राम-पानीपत में शहरी विकास और विनिर्माण को मिलेगी रफ्तार

    हरियाणा में सिंगापुर का बड़ा निवेश, गुरुग्राम-पानीपत में शहरी विकास और विनिर्माण को मिलेगी रफ्तार

    चंडीगढ़.

    सिंगापुर के निवेशकों ने हरियाणा में लाजिस्टिक्स, शहरी विकास, तकनीकी, विनिर्माण और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई है। साथ ही डाटा सेंटर, रक्षा क्षेत्र, आधारभूत ढांचे और हाउसिंग परियोजनाओं में निवेश को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन सोमवार को सिंगापुर इंडिया नेटवर्क फार ग्रोथ फोरम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ उद्यमियों संग चर्चा की। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि हरियाणा को भारत की नवाचार राजधानी के रूप में स्थापित करना लक्ष्य है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2017 में हरियाणा ने सिंगापुर की कंपनियों और संस्थाओं के साथ लाजिस्टिक्स, टाउनशिप, एविएशन, स्मार्ट सिटीज, वेलनेस, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में पांच बड़े एमओयू किए थे।

    चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की विशेष संभावनाएं
    इनका कुल प्रस्तावित मूल्य 3.8 बिलियन सिंगापुर डालर (28 हजार 584) करोड़ रुपये से अधिक था। असेंडास-सिंगब्रिज ने गुरुग्राम में इंटरनेशनल टेक पार्क विकसित किया है। इस नींव को अब अगले स्तर तक ले जाना है। उन्होंने चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की विशेष संभावनाएं बताईं। पहला, लाजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर। सिंगापुर की लाजिस्टिक्स और सप्लाई चेन विशेषज्ञता के लिए यहां अपार अवसर हैं। दूसरा, अर्बन डेवलपमेंट और रियल एस्टेट। गुरुग्राम और आसपास इंटीग्रेटेड टाउनशिप, कमर्शियल डेवलपमेंट तथा आधुनिक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में साझेदारी की बड़ी संभावनाएं हैं। तीसरा, टेक्नोलाजी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स। सिंगापुर की कंपनियां अपने टेक्नोलाजी, डिजिटल, फाइनेंशियल और प्रोफेशनल कैपेबिलिटी सेंटर्स हरियाणा में स्थापित कर सकती हैं। चौथा, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग।

    हरियाणा ने सिंगापुर-आधारित ग्लोबल स्कूल्स ग्रुप के साथ पार्टनरशिप की
    हरियाणा का आटोमोबाइल और इंजीनियरिंग इकोसिस्टम मजबूत है। अब इलेक्ट्रानिक्स, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर्स और फ्यूचर-रेडी इंडस्ट्रीज की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह सिंगापुर की प्रौद्योगिकी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के साथ प्राकृतिक साझेदारी का क्षेत्र है। हरियाणा ने सिंगापुर-आधारित ग्लोबल स्कूल्स ग्रुप के साथ पार्टनरशिप की है। इसके माध्यम से विश्व स्तरीय के-12 शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और लगभग दो हजार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर के बिजनेस लीडर्स को आमंत्रित करते हुए कहा कि हरियाणा आकर गुरुग्राम-मानेसर, औद्योगिक क्लस्टर, लाजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को देखें और बताएं कि आप यहां क्या बनाना चाहते हैं। समय आ गया है कि भारत-सिंगापुर संबंधों को गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट से बिजनेस-टू-बिजनेस, निवेश से साझेदारी, साझेदारी से इकोसिस्टम और संवाद से डिलीवरी तक ले जाया जाए।

    हिसार के आसपास रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा
    हरियाणा में डाटा सेंटर स्थापित करने, हिसार के आसपास रक्षा क्षेत्र में निवेश, आधारभूत इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने तथा नई तकनीक अपनाने से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। पानीपत में हाउसिंग क्षेत्र के विकास संबंधी विषयों पर भी गहन मंथन हुआ। गुरुग्राम में सस्ते दर पर रिहायशी क्षेत्र विकसित करने तथा हाउसिंग फार रेंटल नीति को लेकर बातचीत हुई। विदेशी निवेशक हरियाणा में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने और नई तकनीकों को बढ़ावा देने पर सहमत नजर आए।

  • हरियाणा में उद्योगों को बड़ी राहत, डबल लाइसेंस व्यवस्था खत्म; अनुपालन का बोझ होगा कम

    हरियाणा में उद्योगों को बड़ी राहत, डबल लाइसेंस व्यवस्था खत्म; अनुपालन का बोझ होगा कम

    चंडीगढ़
     हरियाणा में कारोबार और निवेश बढ़ाने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा अनुपालन का बोझ कम करने का सिलसिला जारी है। आठ प्राथमिक क्षेत्रों में सुधार लागू किए जा चुके हैं, जबकि 14 अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को अगले माह तक लागू कर दिया जाएगा।

    इन सुधारों का उद्देश्य अनावश्यक प्रक्रियाओं, दोहराव वाले अनुमोदनों और अतिरिक्त अनुपालनों को समाप्त कर नागरिकों, उद्यमियों तथा निवेशकों के लिए सेवाओं को अधिक सरल और त्वरित बनाना है।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में अनुपालन न्यूनीकरण एवं डीरेगुलेशन अभियान की प्रगति की समीक्षा के बाद हरियाणा की स्थिति की जानकारी दी। राज्य के सुधार एजेंडा में भूमि विनियमन, निर्माण, उपयोगिताओं, औद्योगिक विकास, बिजली, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा ईज आफ डूइंग बिजनेस से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए चिकित्सा व्यवसायियों के पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) संबंधी आवश्यकताओं को सरल करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित लाइसेंस के लिए एकल नोडल व्यवस्था विकसित की जा रही है। स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से संबंधित सेवाओं को इनवेस्ट हरियाणा पोर्टल के साथ एकीकृत करने का भी प्रस्ताव है। इससे विभिन्न विभागों के स्तर पर होने वाली प्रक्रियाओं को एक सुव्यवस्थित तौर पर संचालित करने में सहायता मिलेगी।

    उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग ने बताया कि व्यवसायों के लिए दोहरी लाइसेंस व्यवस्था समाप्त करने के हरियाणा के प्रस्ताव को डीरेगुलेशन सेल ने स्वीकृति दे दी है।

    ओवरलैपिंग लाइसेंस, अनुमोदन, एनओसी और परमिट को समाप्त करने से व्यवसायों पर अनावश्यक अनुपालन का बोझ कम होगा।

    एकमुश्त पंजीकरण शुरू किया जा चुका है।
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए स्व-घोषणा, स्थापना-पूर्व अनुमोदन तथा निरीक्षण से संरक्षण की व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य चल रहा है। औद्योगिक क्लस्टरों में अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए एचएसआइआइडीसी तथा हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र की भूमिका को और मजबूत किया जा रहा है।

    तीन हिस्सों में बांटे जा सकेंगे औद्योगिक प्लॉट
    एचएसआइआइडीसी के निदेशक मंडल ने औद्योगिक प्लाटों को अधिकतम तीन प्लाटों में विभाजित करने की अनुमति दी है। हालांकि प्रत्येक परिणामी प्लाट का क्षेत्रफल 450 वर्ग मीटर से कम नहीं होना चाहिए।

    आइएमटी मानेसर के सेक्टर-8 में 4.6 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक श्रमिक आवास का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार इंडस्ट्रियल एस्टेट कुंडली में छह एकड़ क्षेत्र में ऐसी ही सुविधा विकसित की जा रही है।

    पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित ‘सक्षम’ फंड के माध्यम से बुनियादी ढांचे के उन्नयन की योजना है। एचएसआइआइडीसी ने साझा अग्निशमन बुनियादी ढांचे के लिए भी नई नीति जारी की है।

     

  • यूपी में 8 मेगा प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी, ₹4,104 करोड़ का निवेश और हजारों रोजगार की उम्मीद

    यूपी में 8 मेगा प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी, ₹4,104 करोड़ का निवेश और हजारों रोजगार की उम्मीद

    लखनऊ
     राज्य में चार हजार करोड रुपये से अधिक के निवेश का रास्ता साफ हो गया है। औद्योगिक निवेश को लेकर सोमवार को आठ बड़ी परियोजनाओं के लिए लेटर आफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी करने की मंजूरी मिल गई।

    मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत हुई उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति(एचएलइसी) की बैठक में 4,104.82 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। परियोजनाओं के लिए ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट सिस्टम (ओआईएमएस) पोर्टल के माध्यम से मूल्यांकन समिति की संस्तुति पहले ही प्राप्त हो चुकी थी।

    स्वीकृत परियोजनाओं में मेगा और सुपर मेगा श्रेणी की इकाइयां शामिल हैं। इनके जरिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विनिर्माण, सीमेंट, फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण, वायर एवं इलेक्ट्रिकल उत्पाद, डेयरी और सौर ऊर्जा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।

    एपीएल अपोलो ट्यूब्स लिमिटेड की गोरखपुर में 320 करोड़ रुपये की इकाई, टेरेस्ट्रियल फूड प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड की अमरोहा में 277.30 करोड़ रुपये की परियोजना और अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की ललितपुर में 738 करोड़ रुपये की परियोजना इसमें शामिल है।

    इसके अलावा शुक्र फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड गौतमबुद्धनगर में 587.50 करोड़, गुडलक इंडिया लिमिटेड बुलंदशहर में 268.67 करोड़, जीके वाइंडिंग्स वायर्स लिमिटेड हाथरस में 381.14 करोड़, बनासकांठा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स लिमिटेड बागपत में 539.83 करोड़ और एल्पेक्स सोलर लिमिटेड मथुरा में 992.38 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

    कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
    इन परियोजनाओं के धरातल पर आने से प्रदेश में औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। सरकार का जोर निवेश परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन और पात्र इकाइयों को नीति के अनुरूप प्रोत्साहन उपलब्ध कराने पर है।

    बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार व अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री ने 51,600 करोड़ निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर कर औद्योगिक विकास का रोडमैप पेश किया

    मुख्यमंत्री ने 51,600 करोड़ निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर कर औद्योगिक विकास का रोडमैप पेश किया

    पटना
     बिहार में इस्पात, कपड़ा और परमाणु उर्जा क्षेत्र में 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में गुरुवार को लोकसेवक आवास में आयोजित समारोह में उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच लगभग 51600 करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को देश के प्रमुख स्टील हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टील, टेक्सटाइल, क्लीन एवं परमाणु ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देकर राज्य में रोजगार, उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार तथा समृद्ध और विकसित बिहार के संकल्प को साकार किया जाएगा। राज्य में स्टील एवं मेटल आधारित उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में बड़ी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    मिशन मोड में होगा काम
    मुख्यमंत्री ने विभागों को आपसी समन्वय और मिशन मोड में काम करने पर जोर देते हुए कहा कि एमओयू केवल निवेश प्रस्ताव तक सीमित न रहे। परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारा जाए तथा निवेशकों को सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसके विस्तार से किसानों को बेहतर बाजार और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्वास्थ्य एवं फार्मा सेक्टर में भी निवेश की संभावनाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। बिहार के पास विशाल बाजार, युवा मानव संसाधन हैं। निवेशकों के विश्वास, सरकार की नीतियों और बेहतर आधारभूत संरचना के बल पर बिहार को औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में लाएंगे।

    ‘बिहार को बनाएं और भरोसा करें’
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिल्ड एंड विलीव (बिहार को बनाएं और भरोसा करें) बिहार के औद्योगिक विकास का मूल मंत्र होगा। उन्होंने एमओयू पर हस्ताक्षर के पूर्व बिहार बिजनेस कनेक्ट 2026 की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से देश-विदेश के प्रमुख औद्योगिक समूहों और निवेशकों को बिहार में उपलब्ध अवसरों से जोडने तथा राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

    कंपनी का नाम क्षेत्र निवेश (करोड़ रुपये)
    1. श्याम स्टील इस्पात 5,000

    2. शाकंभरी इस्पात एंड पावर इस्पात 5,000

    3. नक्षित आयरन एंड स्टील इस्पात 6,836

    4. श्रीलंगटा बाबा मेटल्स एंड पावर इस्पात 5,500

    5. अंकुर स्टील इस्पात 6,000

    6. श्रीसमृद्धि स्टील इस्पात 290

    7. ग्लोबल रिनिवेबल एडवांस्ड क्लीन एनर्जी (ग्रेस) न्यूक्लियर एनर्जी 22,500

    8. क्रियेटिव ग्रुप वस्त्र 250

    9. भारत साइंस एंड इनोवेशन विज्ञान एवं नवाचार 200

    10. अनुभव एपरेल्स वस्त्र उद्योग 50