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  • JPSC-JSSC आंदोलन पर पुलिस का शिकंजा, नेताओं समेत 214 से ज्यादा लोगों पर केस

    JPSC-JSSC आंदोलन पर पुलिस का शिकंजा, नेताओं समेत 214 से ज्यादा लोगों पर केस

    रांची

    रांची में 21 अगस्त को पुलिस और छात्रों की झड़प के बाद JPSC-JSSC आंदोलन के नेताओं समेत 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों पर शनिवार 22 अगस्त को FIR दर्ज की गई है। इससे छात्र आंदोलन फिर से शुरू होने की आशंका है।

    झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच पुलिस ने आंदोलन के नेताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 21 अगस्त को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। इन मामलों में 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 200 से अधिक अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर सरकारी काम में बाधा डालने, प्रशासन के तय रूट का पालन नहीं करने और पुलिस से भिड़ने के आरोप हैं।

    JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के प्रमुख नेता नामजद
    रांची के कोतवाली थाने में दर्ज मामलों में JPSC-JSSC Reforms Manch के नेताओं कुणाल प्रताप सिंह, पीयूष कुमार और रविंद्र पासवान के नाम शामिल हैं। रांची सिटी एसपी पारस राणा के अनुसार, शुक्रवार की झड़प के संबंध में तीन FIR दर्ज की गई हैं। इनमें 14 नामजद आरोपियों के अलावा 200 से ज्यादा अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह मंच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और नियुक्तियों से जुड़े विवाद को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहा है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तीन में से एक FIR पुलिस की ओर से दर्ज की गई है। इसमें सरकारी काम में बाधा डालने और प्रशासन की ओर से निर्धारित रूट का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। बाकी दो FIR व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर दर्ज हुई हैं। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज की भी जांच कर रही है ताकि हिंसा या कथित उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

    नेताओं के पुतले जलाने को लेकर विवाद
    21 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम आयोजित किया था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्ग का पालन नहीं कर रहे थे, जिसके कारण विवाद बढ़ा। कोतवाली थाना प्रभारी सानोज चौधरी ने भी झड़प की वजह प्रदर्शनकारियों द्वारा निर्धारित रूट का पालन नहीं करना बताया।

    वहीं, JPSC-JSSC Reforms Manch के नेता कुणाल सिंह ने पुलिस के आरोप से अलग दावा किया है। उनका आरोप है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं ने हिंसा शुरू की। इस मामले में दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर है और FIR में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
    सिर्फ रांची नहीं, चार जिलों में टकराव

    छात्रों की ओर से आयोजित मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के पुतला दहन अभियान को राज्य के कई हिस्सों में विरोध का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, रांची के अलावा हजारीबाग, गिरिडीह और गढ़वा में भी प्रदर्शन के दौरान टकराव हुआ। हजारीबाग में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। यानी 21 अगस्त का विवाद केवल रांची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के कई जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन और विरोध आमने-सामने आ गए।

    JPSC-JSSC विवाद क्या है?
    झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं। इससे पहले प्रदर्शनकारी CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग भी उठा चुके हैं। छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे थे।

    इस आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के दौर भी हुए हैं। 8 अगस्त को सरकार और JPSC-JSSC Reforms Manch के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन छात्र नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया था। सरकार ने छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया था।

    हाईकोर्ट के फैसलों के बाद विवाद और बढ़ा
    इस पूरे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट के हालिया आदेश भी महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को JSSC-CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। इससे एक दिन पहले अदालत ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं से संबंधित नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचनाओं पर भी रोक लगाई थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई गई।

    यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार ने लंबे छात्र आंदोलन के बाद भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर कदम उठाए थे, लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आंदोलनकारी संगठनों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। JPSC-JSSC Reforms Manch ने सरकार पर अदालत के सामने कमजोर पक्ष रखने और इसे “कानूनी ड्रामा” बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि यह आंदोलनकारियों का आरोप है, सरकार की ओर से इस रिपोर्ट में उस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    आंदोलन पर बढ़ता पुलिस दबाव
    रांची में ताजा FIR ऐसे समय दर्ज हुई हैं जब JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर आंदोलन लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का विषय बना हुआ है। इससे पहले भी विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था तथा पुलिस ने बल प्रयोग किया था। 11 अगस्त को ABVP के प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस से झड़प हुई थी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
    अब 21 अगस्त की घटना में 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने से आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस कार्रवाई के बीच छात्र संगठन भर

  • JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: नियुक्त अधिकारियों को हटाने पर रोक के बाद आज फिर हाईकोर्ट में सुनवाई

    JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: नियुक्त अधिकारियों को हटाने पर रोक के बाद आज फिर हाईकोर्ट में सुनवाई

    रांची
     झारखंड हाई कोर्ट में मंगलवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) नियुक्ति परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा से हुई नियुक्तियों को रद करने के मामले में सुनवाई होगी।

    पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने इन नियुक्तियों के जरिए काम करने वाले पदाधिकारियों को हटाए जाने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी और सीआइडी की जांच रिपोर्ट तलब की थी। अब मंगलवार को इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों को वेतन नहीं मिलने के मामले में भी सुनवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

    पूर्व में हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इन परीक्षाओं को रद करने के राज्य सरकार द्वारा 18 अगस्त को जारी आदेश पर रोक लगा दी है। सरकार के आदेश से इन नवनियुक्त पदाधिकारियों की नियुक्ति रद हो गई थी।

    कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल ये सभी अपने पद पर बने हुए हैं। पूर्व में हुई सुनवाई में अदालत ने कहा था कि इस मामले में प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि सरकार ने नैसर्गिक न्याय का पालन नहीं किया है। इसलिए उक्त पदों पर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को अगले आदेश तक नौकरी से नहीं हटाया जाए। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

    अदालत ने सरकार को कहा था कि वह बताए कि सीआईडी की अबतक की जांच में ऐसा कौन सा तथ्य सामने आया था, जिसके आधार पर सरकार ने इतना कड़ा निर्णय लिया है।

    सरकार द्वारा नियुक्ति रद किए जाने के बाद हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल करते हुए सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिनमें जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्त, सीडीपीओ और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद करने का निर्णय लिया गया था।

    बता दें कि सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद करने का फैसला लिया है, जिसमें टीडीपीएल की भूमिका रही है। इन चारों परीक्षाओं में चूंकि नियुक्ति हो चुकी थी, जिस कारण ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।

  • झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद गहराया, 20 अगस्त को CM आवास घेराव की तैयारी

    झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद गहराया, 20 अगस्त को CM आवास घेराव की तैयारी

    रांची
     रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और मोरहाबादी मैदान से लेकर झारखंड विधानसभा तक, जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का ऐतिहासिक आंदोलन लगातार सुलग रहा है।

    सरकार ने इस बड़े छात्र आक्रोश को शांत करने, कमजोर करने और आंदोलन को किसी भी तरह खत्म करने के लिए 'साम, दाम, दंड और भेद' की पूरी रणनीति अपनाई। आज की वार्ता निणार्यक होगी। वार्ता फेल होने से 20 अगस्त को सीएम आवास घेरने की तैयारी है।

    कई दौर की हाई-लेवल वार्ताएं, परीक्षाओं को रद्द करने के बड़े एलान, उच्च स्तरीय जांच के वादे, पुलिसिया लाठीचार्ज, मुकदमों का डर और धरना स्थल की सुविधाएं बंद करने जैसे तमाम हथकंडों के बावजूद छात्र अपनी मुख्य मांगों (विशेषकर सीबीआई जांच) पर चट्टान की तरह अड़े हुए हैं।

    आइए जानते हैं, झारखंड सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने या थामने के लिए कौन-कौन से 10 बड़े और कड़े प्रयास किए।

    1. कई दौर की उच्चस्तरीय वार्ताएं
    सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए चार मंत्रियों की एक हाई-पावर कमेटी बनाई, जिसने छात्रों के अलग-अलग प्रतिनिधियों के साथ 5 से 6 दौर की लंबी और मैराथन बैठकें कीं।

    स्टेट गेस्ट हाउस में कई घंटों तक चली इन बैठकों में सरकार की ओर से हरसंभव बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की गई, ताकि गतिरोध खत्म हो सके। चार मंत्रियों की टीम बनाई गई। तमाम बड़े अधिकारी लगे हैं।

    2. प्रमुख परीक्षाएं रद्द करने का बड़ा एलान
    छात्रों के भारी दबाव के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए विवादों में घिरी 14वीं JPSC प्रीलिम्स परीक्षा के साथ-साथ 2023 और 2025 की कई बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद करने का औपचारिक एलान किया। सरकार का तर्क था कि इससे छात्रों की सबसे बड़ी व्यावहारिक मांग पूरी हो गई है।

    3. '98% मांगें पूरी' होने का दावा
    तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार समेत सरकार के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से बार-बार यह दोहराया कि छात्रों की लगभग 98% मांगें सैद्धांतिक रूप से मान ली गई हैं।

    सरकार का यह भी कहना था कि शेष 2% मांगें कानूनी और संवैधानिक अड़चनों के कारण तुरंत पूरी नहीं की जा सकतीं।

    4. CID और ED जांच का ठोस प्रस्ताव
    आंदोलन की धार को कम करने के लिए सरकार ने आपराधिक गड़बड़ियों की जांच सीआईडी से और बड़े पैमाने पर हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच ईडी से कराने की घोषणा की।

    इसके अलावा, मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन और 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का लिखित वादा भी किया गया।

    5. JPSC सदस्यों के इस्तीफे, ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां
    आक्रोशित छात्रों को यह संदेश देने के लिए कि सरकार गंभीर है, जेपीएससी के तीन सदस्यों से इस्तीफा दिलवाया गया। सीआईडी जांच तेजी से जारी है।

    इसके साथ ही, पूर्व चेयरमैन सहित कई अन्य नामजद आरोपियों को सीआईडी द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजा गया ताकि यह दिखाया जा सके कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

    6. विशेष सुधार समिति का गठन
    भविष्य में इस तरह की धांधलियों को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए आईआईटी-आईएसएम धनबाद, आईआईएम रांची और एक्सएलआरआई जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान किया गया। साथ ही, छात्रों से सीधे सुझाव मांगने के लिए एक विशेष ई-मेल आईडी भी जारी की गई।

    7. विधानसभा घेराव से पहले धमकियां, पुलिस कार्रवाई
    जब वार्ता के रास्ते फेल होने लगे, तो सरकार ने सख्त रुख अपनाया। विधानसभा घेराव के पूर्व छात्रों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। घेराव प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात कर कंटीली तारें लगाई गईं और धारा 163 लागू की गई।

    प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, और आंदोलनकारी छात्रों पर बड़े स्तर पर मुकदमे (एफआईआर) दर्ज किए गए।

    8. धरना स्थल पर दबाव और प्रशासनिक हथकंडे
    छात्र नेताओं का आरोप है कि आंदोलन को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर करने के लिए धरना स्थल पर प्रशासन ने दबाव बढ़ाना शुरू किया।

    रणनीति के तहत धरना स्थल की बिजली काट दी गई, ताकि रात के वक्त छात्रों को अंधेरे और असुविधा का सामना करना पड़े। इसके अलावा, पुलिस बल लगातार कैंप कर दबाव बनाए रहा।

    9. छात्रों को घर भेजने के लिए बसें और हेल्पलाइन
    आंदोलन को तितर-बितर करने के लिए प्रशासन ने सुदूर जिलों से आए छात्रों को उनके घरों तक वापस भेजने के वास्ते विशेष बसों का इंतजाम किया। इसके लिए अलग-अलग जिलों के लिए प्रशासनिक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए ताकि छात्र अपने घर लौट जाएं और आंदोलन स्वतः दम तोड़ दे।

    10. मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सीधी अपील
    सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से युवाओं को संयम बरतने, राजनीति से दूर रहने और परीक्षाओं में सुधार के लिए अपने सुझाव भेजने की अपील की। इसके साथ ही, आंदोलन में बने अलग-अलग छात्र गुटों से सरकार ने अलग-अलग संपर्क साधा, ताकि छात्रों के बीच आपसी एकजुटता और एकता को तोड़ा जा सके।

    सीनियर जर्नलिस्ट राकेश परिहार बताते हैं, झारखंड सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम में 'गाजर और छड़ी' की नीति अपनाई। एक तरफ जहां वार्ताओं, रियायतों, उच्च स्तरीय जांच और सुधारों के वादे किए गए।

    वहीं दूसरी तरफ लाठीचार्ज, एफआईआर, धरना स्थल की बत्ती काटने और पुलिसिया धमकियों जैसे कड़े प्रशासनिक हथकंडे भी आजमाए गए। हालांकि, सीबीआई जांच जैसी मुख्य मांग पर सरकार के अड़ियल रुख और छात्रों की जिद के कारण यह पूरा चक्रव्यूह बेअसर साबित हुआ और जेपीएससी आंदोलन अब भी जस का तस जारी है।

     

  • छात्र आंदोलन के 14वें दिन सरकार से बातचीत, मांगें नहीं मानीं तो विधानसभा घेराव

    छात्र आंदोलन के 14वें दिन सरकार से बातचीत, मांगें नहीं मानीं तो विधानसभा घेराव

    रांची
     झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं से जुड़ी मांगों और अभ्यर्थियों की समस्याओं को लेकर 'JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच' का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज (8 अगस्त 2026) सरकार के प्रतिनिधिमंडल से दूसरी बार मुलाकात कर रहा है।

    यह महत्वपूर्ण वार्ता मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित की गई है। शुक्रवार शाम को भी सरकार और छात्रों को बीच पहले दौर की वार्ता हुई थी।

    छात्र न्याय मंच की ओर से सरकार के समक्ष अपनी बात रखने के लिए 8 प्रतिनिधियों को नामित किया गया है। इस प्रतिनिधिमंडल में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:
        चंदन कुमार
        रामा अवतार महतो
        दिनबंधु मंडल
        बिमल कुमार
        पूजा कुमारी
        प्रेम कुमार
        रवि शंकर
        अमित कुमार शर्मा

    उम्मीद जताई जा रही है कि इस वार्ता में अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक चर्चा होगी और भर्ती परीक्षाओं में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए कोई ठोस हल निकल सकेगा।

    रांची में स्टेट गेस्ट हाउस के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है, जहां छात्रों का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राज्य सरकार के अधिकारियों से मिलकर छात्रों की मांगों पर चर्चा करेगा।

    14वें दिन क्या-क्या हुआ?
    छात्र आंदोलन के 14वें दिन यानी 8 अगस्त को छात्रों की सरकार से पहले दौर की बातचीत रांची के मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में हुई। इस वार्ता में दोनों पक्षों ने कई बिंदुओं पर सकारात्मक बातचीत होने की बात कही है। हालांकि, छात्रों ने कहा कि यह पहले चरण की वार्ता थी।  

    इस वार्ता में सरकार की ओर से मंत्री संजय प्रसाद यादव, दीपिका सिंह पांडेय, चमरा लिंडा, सुद्धिव कुमार और स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह शामिल रहे।

    छात्रों ने कहा कि सरकार के अंतिम निर्णय तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने सरकार को चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि अगर 10 अगस्त तक सरकार उनकी मांगें नहीं पूरी करती है तो सभी छात्र विधानसभा का घेराव करेंगे।

    AISA का विधानसभा मार्च
    लेफ्ट छात्र संगठन AISA ने विधानसभा का घेराव का एलान किया था। इसके तहत तमाम छात्रों ने विधानसभा की तरफ मार्च किया। इस दौरान हंगामा तब हो गया, जब एक छात्र ने आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी। नेहा ने आरोप लगाया कि आरोपी छात्र आरएसएस से जुड़ा है और ये हमला बीजेपी के इशारे पर किया गया है।

    जुनैद की बेज बिरयानी शुरू
    दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्रों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद जुनैद (जुनैद मलिक) शुक्रवार को रांची पहुंचे।

    उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनका हौसला बढ़ाया।

    नेताओं ने किया अनशन का एलान
     छात्रों की आंदोलन पर सियासत भी गर्म रही। जयराम महतो ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि छात्र आंदोलन एवं भूख हड़ताल के समर्थन में वह 9 अगस्त को सुबह छह बजे से पुराना विधानसभा परिसर में एक दिवसीय निर्जला अनशन पर बैठेंगे।

    इसी तरह गोड्डा से सांसद कहा है कि यदि 13 अगस्त तक यानी संसद सत्र समाप्त होने तक, इस मामले में कोई फैसला नहीं होता है तो वह पार्टी से अनुमति लेकर आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में शामिल होंगे और अनशन पर बैठेंगे।