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  • विभागीय प्रदर्शनी में ड्रोन दीदी, कौशल विकास के नवाचारों का किया अवलोकन

    विभागीय प्रदर्शनी में ड्रोन दीदी, कौशल विकास के नवाचारों का किया अवलोकन

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बैतूल में आयोजित तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय योजनाओं अंतर्गत संचालित गतिविधियों, हितग्राहियों को मिल रहे लाभ, स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे उत्पादों तथा नवाचारों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न स्टॉलों पर अधिकारियों एवं हितग्राहियों से संवाद किया। उन्होंने मुख्यमंत्री स्कूटी वितरण योजना अंतर्गत कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्कूटी और लैपटॉप वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। बैतूल जिले में कुल 1731 विद्यार्थियों को लैपटॉप तथा 230 विद्यार्थियों को स्कूटी का लाभ मिला। कार्यक्रम में सांकेतिक रूप से 10 लैपटॉप और 30 स्कूटी वितरित की गईं।

    आईओटी आधारित नल-जल मॉनिटरिंग और शिक्षा संजीवनी अभियान की सराहना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के स्टॉल पर आईओटी के माध्यम से नल-जल योजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली का अवलोकन कर सराहना की। उन्होंने पशुपालन विभाग की डेयरी प्लस योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना एवं आचार्य विद्यासागर योजना पर केंद्रित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मत्स्य विभाग के स्टॉल पर उन्होंने केज कल्चर एवं मत्स्य उत्पादन की जानकारी ली। शिक्षा संजीवनी अभियान के अंतर्गत जनसहभागिता से शालाओं में किए जा रहे अधोसंरचना विकास तथा डेस्क-बेंच, एलईडी सहित अन्य सुविधाओं की उपलब्धता की भी उन्होंने सराहना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्टॉल पर स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार ब्रास मेटल हस्तशिल्प एवं मिलेट्स उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने कृषि कार्यों में महिलाओं द्वारा ड्रोन के उपयोग की जानकारी ली। वन विभाग, सामाजिक न्याय, उद्यानिकी, स्वास्थ्य, पर्यटन और किसान कल्याण तथा कृषि विकास की प्रदर्शनी का अवलोकन कर सराहना की।

    विद्यार्थियों के सोलर प्रोजेक्ट और जिले के पर्यटन स्थलों की जानकारी ली

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के स्टॉल पर विद्यार्थियों द्वारा तैयार सोलर एनर्जी चार्जिंग स्टेशन एवं सोलर स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रोजेक्ट की कार्य प्रणाली की जानकारी ली और उनके नवाचार की सराहना की।

    बालिकाओं को दुलार किया, दिव्यांग बच्चों के हुनर की सराहना

    महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल पर मोटे अनाज (श्रीअन्न) से तैयार विभिन्न उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने नन्हीं बालिकाओं सनम सातपुते एवं रुचिका उईके को स्नेहपूर्वक दुलार किया तथा लाड़ली लक्ष्मी योजना के हितग्राहियों को आश्वासन प्रमाण पत्र वितरित किए।

    प्रदर्शनी अवलोकन दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उईके, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, राज्यसभा सांसद माया नारोलिया, अध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक बैतूल श्री हेमन्त खंडेलवाल, विधायक आमला डॉ. योगेश पंडाग्रे, विधायक भैंसदेही श्री महेंद्र सिंह चौहान, विधायक घोड़ा डोंगरी गंगाबाई उईके, जिला विकास सलाहकार समिति सदस्य श्री सुधाकर पवार सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहें।

     

  • मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा में बाधा ना बने आर्थिक अभाव : ए. श्रीजा

    मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा में बाधा ना बने आर्थिक अभाव : ए. श्रीजा

    स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और राज्य शिक्षा केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भोपाल में हुआ राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
    आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने पर हुआ मंथन

    भोपाल
    आर्थिक अभाव के कारण किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा बाधित न हो, इस दिशा में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) देश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की शैक्षिक निरंतरता के लिए एक बड़ा संबल है। यह बात भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय आर्थिक सेवा की अधिकारी श्रीमती ए. श्रीजा ने राजधानी भोपाल में कही।

    स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और राज्य शिक्षा केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को एक निजी होटल में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय आर्थिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी श्रीमती ए. श्रीजा ने कहा कि अक्सर कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चे किशोरावस्था में ही पढ़ाई के स्थान पर आजीविका अर्जित करने की ओर ध्यान देने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा प्रभावित होती है। वहीं, छोटी-मोटी मेहनत-मजदूरी से वे न तो अपने परिवार की आर्थिक कठिनाइयों को दूर कर पाते हैं और न ही अपने भविष्य को बेहतर बना पाते हैं। ऐसे परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनकी शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है।

    कक्षा 9 से 12 तक प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति
    राज्य शिक्षा केंद्र के संयुक्त संचालक श्री प्राचीश जैन ने कहा कि राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को कक्षा 8 के बाद उन्हें माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक, निर्धारित पात्रता एवं नवीनीकरण संबंधी शर्तें पूरी करने पर, प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इस प्रकार पात्र विद्यार्थी अधिकतम चार वर्षों में कुल 48 हजार रुपये की छात्रवृत्ति का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है।

    संयुक्त संचालक श्री जैन ने कहा कि, कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र एवं मेधावी विद्यार्थियों को जानकारी के अभाव, आवेदन में त्रुटियों अथवा सत्यापन में देरी के कारण छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए अधिकारियों एवं शिक्षकों को योजना की पात्रता शर्तों, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीयन तथा संस्थान एवं जिला स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया के संबंध में भारत सरकार के अधिकारियों और योजना से जुडी टीम के सदस्यों ने सहभागियों को समुचित मार्गदर्शन भी प्रदान किया है। प्रदेश में योजना के और अधिक प्रभावी क्रियान्वयन से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही विद्यालयों, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर छात्रवृत्ति का लाभ अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

    पात्रता और चयन के प्रमुख नियम
    उल्लेखनीय है कि योजना अंतर्गत शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त एवं स्थानीय निकाय के विद्यालयों में कक्षा 8 में अध्ययनरत ऐसे विद्यार्थियों को लाभ प्राप्त होता है, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक ना हो। साथ ही विद्यार्थी ने कक्षा 7 में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों को प्राप्तांक में 5 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है। योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों का चयन मानसिक योग्यता एवं शैक्षिक अभिरुचि परीक्षण के आधार पर राज्य स्तरीय परीक्षा के माध्यम से होता है। कार्यशाला में भारत सरकार के राष्ट्रीय स्कॉलरशिप प्रकोष्ठ की संचालक श्रीमती श्रीकला पी. वेणुगोपाल, सलाहकार श्री राघवेन्द्र खरे, मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, योजना से जुड़े विभिन्न जिलों के नोडल अधिकारी तथा अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला में योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति से लाभान्वित चयनित विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की। विद्यार्थियों ने अपने परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता ने उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। उन्होंने छात्रवृत्ति से मिले संबल के आधार पर अपनी वर्तमान शैक्षणिक उपलब्धियों और भविष्य की तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी।