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  • नवरात्र में पूजा कॉम्बो पैक तैयार कर आत्मनिर्भरता की राह मजबूत कर रहीं वाराणसी की महिलाएं

    नवरात्र में पूजा कॉम्बो पैक तैयार कर आत्मनिर्भरता की राह मजबूत कर रहीं वाराणसी की महिलाएं

    नवरात्रि विशेष-4: उत्पादन की शक्ति

    योगी सरकार की पहल से प्रेरणा मार्ट बने महिला उद्यमियों का बाजार, 65 दुकानों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच रहे स्थानीय उत्पाद

    पूजा की जरूरी सामग्री एक पैक में उपलब्ध, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार और आमदनी बढ़ाने का अवसर

    वाराणसी
    एक तरफ घर-घर मां दुर्गा के जयकारे गूंज रहे हैं, दूसरी तरफ मुर्दहा गांव में कुछ महिलाओं के हाथ चुनरी सहेज रहे हैं, रोली तौल रहे हैं, हवन सामग्री बांध रहे हैं। पहले जिनकी दुनिया घर की चौखट तक सिमटी थी, आज उनके बनाए पूजा कॉम्बो पैक वाराणसी के बाजार में पहुंच रहे हैं। हरहुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुर्दहा में माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं नवरात्र की मांग को आजीविका के अवसर में बदल रही हैं। मां की चुनरी से लेकर हवन-पूजन की जरूरी सामग्री तक एक ही पैक में उपलब्ध है। नौ दिन शक्ति की उपासना हो रही है और ये महिलाएं उसी शक्ति को अपने हुनर और हौसले से जमीन पर उतार रही हैं।

    एक पैक में पूरी पूजा, हर पैक में महिलाओं की मेहनत
    माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह की निहारिका देवी और सीमा देवी अपने समूह की अन्य महिलाओं के साथ सुबह से ही काम में जुट जाती हैं। कोई चुनरी सहेजती है, कोई रोली और चंदन तौलती है, तो कोई सिंदूर, अक्षत, धूप, कपूर, कलावा और हवन सामग्री को करीने से पैक करती है। इन सबको मिलाकर बनता है नवरात्र का पूजा कॉम्बो पैक। इस पैक की खासियत यह है कि भक्त को पूजा की तैयारी के लिए बाजार में भटकना नहीं पड़ता। जो चाहिए, सब एक जगह मिल जाता है। नवरात्र जैसे त्योहारों पर पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है। समूह की महिलाओं ने इसी मांग को अवसर में बदल दिया है।

    65 प्रेरणा मार्ट बने महिला उद्यमियों का बाजार
    उत्पाद बन जाने के बाद असली चुनौती उसे सही ग्राहक तक पहुंचाने की होती है और इसका जवाब बने हैं प्रेरणा मार्ट। योगी सरकार की महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की पहल के तहत ये मार्ट स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रहे हैं। उपायुक्त (स्व रोजगार) पवन कुमार सिंह के अनुसार वाराणसी के आठ ब्लॉकों में आठ-आठ प्रेरणा मार्ट संचालित हैं। जिला मुख्यालय पर एक मार्ट अलग है। इस तरह जिले में कुल 65 प्रेरणा मार्ट हैं, जिनका संचालन स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही करती हैं।

    उत्पादक से उद्यमी तक का सफर
    ब्लॉक मिशन मैनेजर पूजा तिवारी बताती हैं कि प्रेरणा मार्ट के माध्यम से महिलाएं केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी बिक्री और विपणन से भी जुड़ रही हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे अपनी पहचान उद्यमी के रूप में बना रही हैं। नवरात्र में हम देवी के नौ रूपों की उपासना करते हैं और ये महिलाएं उसी शक्ति का व्यावहारिक रूप दिखा रही हैं। वे परिवार को संभालती हैं, समूह में मिलकर काम करती हैं और बाजार में अपने उत्पाद की पहचान गढ़ती हैं। मुर्दहा की ये महिलाएं हर पैक के साथ यही संदेश दे रही हैं कि शक्ति की सच्ची आराधना अपने हुनर पर भरोसा करना है।

    “नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए प्रेरणा मार्ट के माध्यम से हमारे बनाए पैक लोगों तक पहुंच रहे हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। हमें खुशी है कि हम अपने काम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे पा रहे हैं।”-निहारिका देवी, माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह
     
    “पहले हम घर के कामकाज तक ही सीमित रहते थे, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद कुछ नया करने का अवसर मिला है। सरकार की ओर से समूह की महिलाओं को आगे बढ़ने के ऐसे अवसर मिलना हमारे लिए उत्साह बढ़ाने वाला है।
    सीमा देवी, माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह

    नवरात्र जैसे त्योहारों पर पूजा सामग्री के कॉम्बो पैक तैयार करना महिलाओं के लिए आमदनी बढ़ाने का अच्छा अवसर है। इससे उनके पारंपरिक कौशल को बाजार मिल रहा है और समूह के माध्यम से मिलकर काम करने की भावना भी मजबूत हो रही है।
    पवन कुमार सिंह, उपायुक्त (स्व रोजगार), वाराणसी

  • नवरात्र स्पेशल: बिहार के 9 शक्तिस्थलों की महिमा, मुंडेश्वरी से पटनदेवी तक जानें खासियत

    नवरात्र स्पेशल: बिहार के 9 शक्तिस्थलों की महिमा, मुंडेश्वरी से पटनदेवी तक जानें खासियत

    पटना

     Shakti peeth in Bihar शारदीय नवरात्र हो या चैत्र नवरात्र, मां दुर्गा की भक्ति में डूबा बिहार अपनी समृद्ध धार्मिक परंपराओं के लिए खास पहचान रखता है। राज्य के अलग-अलग जिलों में स्थित देवी मंदिरों में सालभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के दौरान इन मंदिरों की रौनक देखते ही बनती है।

    Devi Temple in Bihar कहीं मां के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं, तो कहीं विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है। आइए, तस्वीरों के जरिए बिहार के नौ प्रसिद्ध शक्तिस्थलों और देवी मंदिरों की महिमा जानते हैं।

    1. Maa Mundeshwari Temple: कैमूर की पहाड़ियों पर विराजती हैं मां
    Maa Mundeshwari Temple बिहार के कैमूर जिले में स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर अपनी प्राचीनता और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। कैमूर की पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर को देश के प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है।

    यहां मां मुंडेश्वरी की पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना भी की जाती है। मंदिर की प्राचीन स्थापत्य शैली और धार्मिक परंपराएं श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।

    नवरात्र के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। इस मंदिर की एक खास पहचान यहां प्रचलित पारंपरिक बलि-विधि है, जिसमें रक्तपात के बिना अनुष्ठान किया जाता है। आस्था और इतिहास का संगम होने के कारण यह मंदिर बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है।

    2. Patan Devi Temple: पटना की बड़ी और छोटी पटनदेवी की महिमा
    Bari Patan Devi Temple राजधानी पटना में स्थित बड़ी पटनदेवी और छोटी पटनदेवी मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र हैं। बड़ी पटनदेवी को बिहार के प्रमुख शक्तिस्थलों में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह स्थान मां सती से जुड़ी पौराणिक परंपराओं के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है।

    नवरात्र में दोनों मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, आरती और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। सुबह से ही श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचने लगते हैं। राजधानी में स्थित होने के कारण यहां बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी भक्त आते हैं। मां के दर्शन कर श्रद्धालु सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
    3. Maa Tara Chandi Temple: सासाराम में मां के दर्शन के लिए उमड़ते हैं भक्त
    रोहतास जिले के सासाराम में स्थित मां तारा चंडी मंदिर बिहार के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में शामिल है। कैमूर पहाड़ी क्षेत्र के निकट स्थित इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। यहां मां तारा की पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहता है। श्रद्धालु मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।

    स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस मंदिर को विशेष स्थान प्राप्त है। सासाराम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक है।

    4. Maa Mangla Gauri Temple: गया में माता के दर्शन का विशेष महत्व
    गया स्थित मां मंगला गौरी मंदिर बिहार के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में से एक है। यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन परंपराओं के कारण देशभर में जाना जाता है।

    मान्यता है कि यहां माता की पूजा करने से भक्तों को सुख, सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।

    विशेष रूप से सावन और नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। भक्त माता को चुनरी, फूल और प्रसाद अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं।

    गया के धार्मिक पर्यटन स्थलों में इस मंदिर का महत्वपूर्ण स्थान है। मां मंगला गौरी के दर्शन के लिए बिहार के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    5. Aami Mandir: सारण में मां अंबिका के दरबार की अलग पहचान
    सारण जिले के आमी गांव में स्थित मां अंबिका मंदिर क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्त माता से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

    गंगा नदी के निकट स्थित इस मंदिर का वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है।

    संतान सुख और मनोकामना पूर्ति की कामना से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। आमी मंदिर सारण जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    6. Maa Chandika Sthan: मुंगेर में शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र
    मुंगेर स्थित मां चंडिका स्थान बिहार के प्रमुख देवी मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। श्रद्धालु यहां मां चंडिका की पूजा कर परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं।

    नवरात्र के दिनों में मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं। भक्त सुबह से ही दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

    मुंगेर और आसपास के जिलों के लोगों के बीच इस मंदिर की विशेष मान्यता है। धार्मिक परंपराओं और स्थानीय आस्था के कारण चंडिका स्थान लंबे समय से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहा है।

    7. Maa Ugratara Temple: महिषी में विराजती हैं मां उग्रतारा
    सहरसा जिले के महिषी में स्थित मां उग्रतारा मंदिर बिहार के प्रसिद्ध शक्तिस्थलों में शामिल है। यह मंदिर धार्मिक और तांत्रिक परंपराओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां मां उग्रतारा की आराधना करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। भक्त माता के दर्शन कर सुख, शांति

    सारण जिले के आमी गांव में स्थित मां अंबिका मंदिर क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्त माता से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

    गंगा नदी के निकट स्थित इस मंदिर का वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है।

    संतान सुख और मनोकामना पूर्ति की कामना से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। आमी मंदिर सारण जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    8. Maa Raj Rajeshwari Temple: मुजफ्फरपुर में आस्था का प्रमुख केंद्र

    मुजफ्फरपुर स्थित मां राजराजेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था रखता है। यहां माता की पूजा-अर्चना के लिए सालभर भक्त पहुंचते हैं। नवरात्र के समय मंदिर में सजावट, आरती और विशेष अनुष्ठानों के कारण भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है।

    श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस मंदिर का विशेष महत्व है। मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए यह मंदिर देवी उपासना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    9. Maa Kali Temple: फारबिसगंज में मां काली के दर्शन की विशेष मान्यता
    अररिया जिले के फारबिसगंज स्थित मां काली मंदिर सीमांचल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मां काली की आराधना करने के लिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि माता की पूजा करने से भक्तों को साहस, शक्ति और संकटों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।

    नवरात्र के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। भक्त माता को फूल, प्रसाद और चुनरी अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। सीमांचल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में इस मंदिर का खास स्थान है।
    नवरात्र में इन मंदिरों के दर्शन से जुड़ी है बिहार की धार्मिक विरासत

    बिहार के ये नौ देवी मंदिर राज्य की समृद्ध धार्मिक परंपरा, लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करते हैं। पटना की पटनदेवी से लेकर कैमूर की मुंडेश्वरी और सहरसा की उग्रतारा तक, हर मंदिर की अपनी अलग पहचान और स्थानीय मान्यताएं हैं।

    नवरात्र के अवसर पर इन मंदिरों में श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। जो लोग इन धार्मिक स्थलों तक नहीं पहुंच पाते, वे तस्वीरों के माध्यम से इनके दर्शन कर सकते हैं और बिहार की आध्यात्मिक विरासत को करीब से जान सकते हैं।

  • पीली सरसों के चमत्कारी उपाय: नवरात्रि में अपनाएं और आर्थिक तंगी को कहें अलविदा!

    पीली सरसों के चमत्कारी उपाय: नवरात्रि में अपनाएं और आर्थिक तंगी को कहें अलविदा!

    आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है. ये दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा को समर्पित किया गया है. माता चंद्रघंटा असुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं. नवरात्रि का ये पावन पर्व 27 मार्च तक चलेगा. इस दौरान की गई व्रत-पूजा से देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है. यह समय जीवन की कई समस्याओं से निजात पाने का भी माना जाता है.

    ऐसे में नवरात्रि के समय में कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं. इन्हीं उपायों में शामिल है पीली सरसों के उपाय. ज्योतिष और लाल किताब में पीली सरसों के प्रभावी उपाय बताए गए हैं. इन उपायों को करने से कर्ज खत्म हो सकता है. आर्थिक तंगी दूर हो सकती है. ये उपाय ज्यादा से ज्यादा फल दें, इसके लिए इन्हें चैत्र नवरात्रि के समाप्त होने से पहले अवश्य कर लें.

    पीली सरसों के प्रभावी उपाय

        नवरात्रि के दौरान थोड़ी सी पीली सरसों को लाल कपड़े में बांधकर एक पोटली बनाएं. फिर इस पोटली को अपने घर के मुख्य द्वार पर टांग दें. इस उपाय को करने से नकारात्मक उर्जा दूर होती है.
        नवरात्रि के दौरान रात को एक मुट्ठी पीली सरसों अपने सिर से 7 बार वारकर (उसारकर) किसी सुनसान चौराहे या बहते जल में प्रवाहित कर दें. इससे धन प्राप्त करने में जो बाधाएं हैं वो दूर होती हैं.
        नवरात्रि के दौरान लाल कपड़े में पीली सरसों बांधकर पोटली बनाकर उसे अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखें. इससे कर्ज से मुक्ति मिलती है.
        नवरात्रि में मंगलवार और रविवार को अपने सिर से पीली सरसों 7 बार वारकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर या चौराहे पर फेंक दें. इससे करियर में आ रही सारी परेशानियां दूर होती है.
        नवरात्रि में पूजा के दौरान एक चांदी की कटोरी एक मुट्ठी पीली सरसों रखकर माता के चरणों में रखें. फिर पूजा करें. इसे पूजा पूर्ण होती है.