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  • कैदियों के हाथों बनी मिठाइयों की भारी डिमांड, चंडीगढ़ में दुकानों पर लगी लंबी कतारें

    कैदियों के हाथों बनी मिठाइयों की भारी डिमांड, चंडीगढ़ में दुकानों पर लगी लंबी कतारें

    चंडीगढ़.

    दीपावली का त्योहार हो और घर में मिठाई की मिठास न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है। त्योहार पर अपनों के साथ खुशियां बांटने के लिए लोग तरह-तरह की मिठाइयां खरीद रहे हैं।

    मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। लेकिन इस बार शहर के लोगों को मॉडल जेल में बंद कैदियों के हाथों से तैयार होने वाली शुद्ध मिठाई की मिठास से महरूम रहना पड़ रहा है।

    मिठाई का स्टॉक खत्म
    सेक्टर-22 स्थित सृजन शॉप पर दीवाली से पहले ही मिठाई का स्टॉक खत्म हो गया है। दुकान पर मिठाई खरीदने पहुंच रहे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। दरअसल, जेल में तैयार होने वाली मिठाइयों की गुणवत्ता, शुद्धता और स्वाद के चलते हर साल त्योहारों पर इनकी काफी मांग रहती है। इस बार पंजाब राजभवन, चंडीगढ़ पुलिस और अन्य सरकारी विभागों से बड़े पैमाने पर मिठाई के ऑर्डर मिले हैं। अकेले पंजाब राजभवन की ओर से ही सृजन शाप को 10 क्विंटल मिठाई का ऑर्डर दिया गया था।

    दो क्विंटल मिठाई की मांग
    इसके अलावा एक अन्य सरकारी विभाग की ओर से पौने दो क्विंटल मिठाई की मांग की गई। कई दूसरे सरकारी विभागों ने भी बड़ी मात्रा में मिठाई के ऑर्डर दिए। इन ऑर्डर की आपूर्ति करने में ही मिठाई का अधिकांश स्टाक खत्म हो गया।

  • छत्तीसगढ़: बिलासपुर में 21 आजीवन कैदियों को मिली राहत, अच्छे व्यवहार के चलते रिहाई

    छत्तीसगढ़: बिलासपुर में 21 आजीवन कैदियों को मिली राहत, अच्छे व्यवहार के चलते रिहाई

    बिलासपुर.

    अच्छे व्यवहार, अनुशासन और बेहतर आचरण ने जेल की सलाखों के पीछे जीवन बिता रहे 21 कैदियों के लिए नई उम्मीद का रास्ता खोल दिया. बिलासपुर केंद्रीय जेल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 21 कैदियों को रिहा किया गया है. इनमें 20 पुरुष और एक महिला कैदी शामिल हैं.

    इन सभी ने जेल में करीब 14 साल या  उससे अधिक समय बिताया है. जेल में उनके व्यवहार और आचरण को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर उनकी रिहाई का निर्णय लिया गया. इस फैसले को कैदियों के जीवन में सुधार लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता पिछले कुछ महीनों से लगातार बिलासपुर केंद्रीय जेल का दौरा कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कैदियों से जुड़े विभिन्न मामलों पर गंभीरता से ध्यान दिया.

    साथ ही, कैदियों की मानसिक स्थिति, जेल में उनके व्यवहार और आचरण को समझने पर विशेष जोर दिया गया. जेल अधीक्षक के मुताबिक, डीजी हिमांशु गुप्ता ने ऐसे कैदियों को रिहा कर समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल करने के लिए शासन स्तर पर पहल की, जिनका जेल में रहते हुए आचरण अच्छा रहा है और जिन्होंने अनुशासन का पालन किया है. इसी पहल के तहत 21 आजीवन कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ. जेल से रिहा हुए कैदियों के लिए यह केवल सलाखों से बाहर आने का अवसर नहीं, बल्कि अपने जीवन को नए सिरे से शुरू करने की उम्मीद भी है.

    लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब उन्हें समाज के बीच लौटकर सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलेगा. इस पहल का उद्देश्य अन्य कैदियों को भी सकारात्मक व्यवहार और अनुशासन के लिए प्रेरित करना है. जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने कहा कि राज्य शासन के द्वारा आज 21 दंडित बंदियों को शासन माफी के तहत आजीवन कारावास के बंदियों को रिहा किया गया है. कुछ को निर्शत कुछ को सर्शत मुचलका के द्वारा छोड़ा गया है. सभी बंदी 14 से 16 साल तक की सजा काट चुके है.

  • बिहार की जेलें शिक्षा के मामले में देश में बनीं नंबर वन

    बिहार की जेलें शिक्षा के मामले में देश में बनीं नंबर वन

    पटना.

    जेल अब केवल सजा काटने की जगह नहीं रह गई है, बल्कि नई शुरुआत का दरवाजा बन रही है. 2025 में बिहार के जेलों ने शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने उसे पूरे देश में सर्वोच्च स्थान पर पहुंचा दिया है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के माध्यम से 10वीं में 1256 और 12वीं में 183 बंदियों का नामांकन कराया गया है.

    देश में नंबर वन बिहार
    यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है और इसने बिहार की जेलों को सुधारात्मक मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है. उच्च शिक्षा के मोर्चे पर भी राज्य आगे है. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से 1565 बंदियों का नामांकन कराया गया है, जबकि 2025 में ही 1354 बंदियों को उच्च शिक्षा से जोड़ा गया है. जॉब ओरिएंटेड ट्रेनिंग पर भी जोर दिया गया है.

    कैदियों को क्या मिलेगा फायदा?
    2025-26 में 3902 सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदियों को अलग-अलग ट्रेंडों में स्किल ट्रेनिंग दिया गया. कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और अन्य एजेंसियों के माध्यम से 1443 बंदियों को प्रशिक्षित किया गया. इसका सीधा फायदा यह होगा कि रिहाई के बाद उन्हें रोजगार के अवसर मिलेंगे और दोबारा अपराध की संभावना घटेगी.

    आर्ट ऑफ लिविंग के साथ समझौता
    जानकारी के मुताबिक, राज्य की सभी 59 जेलों में मानसिक और शारीरिक संतुलन के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के साथ पांच सालों का समझौता किया गया है. दूसरी ओर अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के माध्यम से 2025 में पीड़ित परिवारों को दो करोड़ 73 लाख नौ हजार 590 रुपए की सहायता राशि देने की प्रक्रिया चल रही है.

    वीरान पहाड़ों पर बनाए जायेंगे जेल
    इससे पहले बजट सत्र के दौरान गंभीर श्रेणी के अपराधियों के लिए वीरान पहाड़ पर जेल बनाने का ऐलान किया गया था. गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने खुद ही इसे लेकर ऐलान किया था. सम्राट चौधरी के मुताबिक, अपराधियों के लिए हाई सिक्योरिटी जेल पहाड़ पर बनेंगे, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होगा. यहां आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता होगा और इस रास्ते में चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जाएगी.