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  • राम की पैड़ी पर ड्रोन शो देखने उमड़ा जनसैलाब, बच्चों से बुजुर्गों तक दिखा उत्साह

    अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित दीपोत्सव-2026 में रामनगरी ने भव्यता, आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। राम की पैड़ी पर आयोजित स्वदेशी ड्रोन शो में पूरा आसमान रामायण के प्रसंगों से जगमगा उठा। प्रभु श्रीराम की वीर मुद्रा, रावण वध, पुष्पक विमान और राम दरबार की आकृतियां आसमान में उभरीं तो वहां मौजूद श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर निहारते रह गए। किसी ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की तो कोई मोबाइल कैमरे में इन अद्भुत दृश्यों को कैद करते दिखाई दिया। 

    आधुनिक तकनीक के जरिए रामायण के प्रसंगों को जीवंत अंदाज में प्रस्तुत करने की इस पहल ने लोगों को आस्था और सांस्कृतिक गौरव से जोड़ दिया। आसमान में रोशनी और रंगों से बनती आकृतियों के बीच राम की पैड़ी जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजती रही। परिवार के साथ पहुंचे लोग एक-दूसरे को आसमान में उभरती आकृतियां दिखाते और तस्वीरें खींचते नजर आए। दीपोत्सव की इस भव्य प्रस्तुति ने रामनगरी पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए उत्सव को यादगार बना दिया।

    स्वदेशी ड्रोन ने जीवंत किए रामायण के प्रमुख प्रसंग
    राम की पैड़ी पर ड्रोन की रोशनी से आसमान में रामायण के कई प्रमुख प्रसंग साकार हुए। प्रभु श्रीराम की वीर मुद्रा, रावण वध और पुष्पक विमान की आकर्षक आकृतियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। लक्ष्मण और हनुमान की वीर मुद्राओं के साथ राम दरबार और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की भव्य छवि भी आसमान में दिखाई दी। रामकथा को पीढ़ियों तक पहुंचाने वाले महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास की आकृतियों ने भी लोगों को आकर्षित किया। एक के बाद एक उभरते दृश्यों के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया। आधुनिक तकनीक के माध्यम से रामायण की कथा को इस तरह प्रस्तुत करने की लोगों ने सराहना की।

    मोबाइल कैमरों में कैद किए यादगार पल, बच्चों से बुजुर्गों तक दिखा उत्साह
    ड्रोन शो शुरू होते ही राम की पैड़ी पर मौजूद लोगों की नजरें आसमान पर टिक गईं। रंग-बिरंगी रोशनी से बनती आकृतियों को देखकर लोग रोमांचित नजर आए। कई लोग अपने बच्चों और परिजनों को आसमान में उभरती रामायण की छवियां दिखाते रहे। वहीं, युवा तस्वीरें और वीडियो बनाने में जुटे रहे। हर खास दृश्य पर तालियां गूंजती रहीं। लोगों के चेहरों पर खुशी और आश्चर्य का भाव साफ दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने कहा कि आस्था और आधुनिक तकनीक का ऐसा संगम दीपोत्सव को और खास बना रहा है।

    ड्रोन शो बेहद आकर्षक रहा
    यश सोनकर ने कहा कि राम की पैड़ी पर इस तरह का भव्य आयोजन देखना शानदार अनुभव रहा। आसमान में रोशनी से बनते अलग-अलग दृश्य देखकर मन प्रसन्न हो गया। अमन ने बताया कि ड्रोन शो बेहद आकर्षक रहा। लोगों का उत्साह देखकर लगा कि पूरा अयोध्या उत्सव में डूबा हुआ है। उन्होंने मोबाइल में आयोजन के कई खास पलों को रिकॉर्ड किया, ताकि इन यादों को दोबारा देख सकें। अयोध्या निवासी छवि ने कहा कि रामनगरी में दीपोत्सव का माहौल बेहद खूबसूरत रहा। राम की पैड़ी पर बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ उत्सव मनाते देखना हमेशा याद रहेगा।

    पहली बार पहुंचे शाश्वत को भाया दीपोत्सव का नजारा
    दीपोत्सव के दसवें संस्करण में बनारस से पहली बार अयोध्या पहुंचे शाश्वत मिश्रा ने कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव अपने आप में अद्भुत है। पूरे शहर में उत्सव का माहौल देखने को मिला। जगह-जगह जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे। दीपों से सजी रामनगरी और यहां पहुंचे लोगों का उत्साह देखकर मन खुश हो गया।

  • Bilaspur दशहरा: साइंस कॉलेज मैदान में होगा 80 फीट के रावण का दहन

    Bilaspur दशहरा: साइंस कॉलेज मैदान में होगा 80 फीट के रावण का दहन

    बिलासपुर.

    दशहरा पर्व पर शहर में रावण दहन के दो प्रमुख आयोजन होंगे। साइंस कॉलेज मैदान में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू रावण दहन करेंगे, जबकि पुलिस मैदान में शहर विधायक अमर अग्रवाल रावण के पुतले का दहन करेंगे।

    पुलिस मैदान और साइंस कॉलेज मैदान में दशहरा उत्सव को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। दोनों स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। आयोजन के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए पर्व का उत्सवी माहौल बनेगा। रावण दहन के बाद होने वाली आतिशबाजी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। शहर के दोनों प्रमुख आयोजन स्थलों पर लोग परिवार के साथ दशहरा उत्सव देखने पहुंचेंगे। रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा। आयोजन में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी भी रहेगी।

    पुलिस ग्राउंड में 65 फीट और साइंस कॉलेज मैदान में 80 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा. इसके अलावा शहर में दर्जनभर से अधिक स्थानों पर दशहरा उत्सव मनाया जाएगा. शाम से शुरू होने वाले कार्यक्रमों में शोभायात्रा निकाली जाएगी और आतिशबाजी के साथ रावण दहन किया जाएगा.

  • 3 महीने की मेहनत से बना हरियाणा का सबसे ऊंचा रावण, जानें खासियत

    3 महीने की मेहनत से बना हरियाणा का सबसे ऊंचा रावण, जानें खासियत

    पंचकूला.

    शारदीय नवरात्रों पर घर से लेकर बाजारों तक रौनक और सभी जगहों पर चहल-पहल देखी जा रही है. इसके साथ ही लोगों को अब, 20 अक्टूबर विजयादशमी (दशहरा) के पर्व का इंतजार है. दशहरे पर इस बार सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र हरियाणा का जिला पंचकूला और राजधानी दिल्ली का द्वारका क्षेत्र होगा, क्योंकि दोनों जगहों पर देश के सबसे अधिक ऊंचाई वाले 221 फीट के रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा.

    दिल्ली और पंचकूला में देश के बड़े रावण के पुतले: इन दोनों पुतलों को अंबाला के बराड़ा के रहने वाले तेजिंदर सिंह चौहान ने अपनी टीम के साथ मिलकर बनाया है. ईटीवी भारत ने उनसे बातचीत कर इन पुतलों की विशेषताओं के बारे में जाना. आप भी जानें कि उन्होंने इन पुतलों को कितने समय में और कैसे तैयार किया है. 34 लाख पुतला, 50 फीट की तलवार: तेजिंदर सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर हरियाणा के जिला पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित शालीमार ग्राउंड में 221 फीट के रावण का आकर्षक पुतला तैयार किया है. बताया कि इस पुतले को बनाने में साढे तीन महीने का समय लगा है और करीब 34 लाख रुपये खर्च आया है. तेजिंदर सिंह चौहान ने अपनी टीम के करीब 100 वालंटियर के साथ शनिवार की देर शाम पंचकूला के शालीमार ग्राउंड में विश्व के इस सबसे अधिक ऊंचाई वाले रावण के पुतले को खड़ा किया. पुतले को पूरी सावधानी से खड़ा करने के लिए दो क्रेन और एक जेसीबी की मदद ली गई. साथ ही इसे जमीन में मजबूती के साथ खड़ा करने के मकसद से दो गहरे गड्ढे किए गए.

    हरियाणा में फूंकेगा 221 फीट का रावण, 34 लाख रुपये खर्च
    12 टन का रावण और चार हजार मीटर कपड़ा: तेजिंदर सिंह चौहान ने इस रावण के पुतले का वजन करीब 10-12 टन बताया. उन्होंने बताया कि रावण के जूते 40 फीट लंबे और 7 फीट ऊंचे हैं. रावण की तलवार 50 फीट ऊंची है, जबकि रावण का चेहरा (ठोडी से माथे तक) 25 फीट है. इसके अलावा मुकुट को चार भागों में तैयार किया गया है, जिसकी ऊंचाई 30 फीट है, लेकिन मुकुट के पीछे लगी रोप के साथ इसकी ऊंचाई 55 फीट है. गौर करने वाली बात ही है कि पुतले में 7 टन लोहे का इस्तेमाल किया गया है और इसके बीच में 700 बांस भी लगाए गए हैं. रावण के पुतले की पूरी पोशाक वेलवेट के लगभर चार हजार मीटर कपड़े से तैयार की गई है. उन्होंने बताया कि पुतले पर हुआ पूरा खर्च रामलीला आयोजक कमेटी और श्री माता मनसा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा वहन किया गया है.

    6 बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम
    अंबाला के बराड़ा के रहने वाले और रावण के सबसे अधिक ऊंचाई के पुतले बनाने में महारत हासिल कर चुके तेजिंदर सिंह चौहान का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में छह बार दर्ज हो चुका है. ईटीवी भारत से बातचीत में तेजिंदर ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले साल 1985 में 200 फीट का रावण का पुतला बनाया था. उसके बाद से रावण के पुतले बनाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज 221 फीट तक पहुंच चुका है. उन्होंने बताया कि रावण के इस पुतले को साल 2026 का विश्व का सबसे अधिक ऊंचाई वाला पुतला कहा जा सकता है. बताया कि हरियाणा के जिला पंचकूला के सेक्टर 5 और दिल्ली के द्वारका के सेक्टर 10 में, दोनों जगहों पर रावण का एकसमान 221 फीट ऊंचाई का पुतला खड़ा किया गया है.

    12 टन के करीब है रावण के पुतले का वजन
    ऊंचाई से पहले सुरक्षा को प्राथमिकता: तेजिंदर सिंह चौहान ने बताया कि वह साल 2025 में राजस्थान के कोटा में विश्व का सबसे अधिक ऊंचाई वाला 233 फीट के रावण का पुतला बना चुके हैं. लेकिन साल 2026 के सबसे अधिक ऊंचाई वाले 221 फीट के पुतले पंचकूला और दिल्ली में बनाए गये हैं. उन्होंने बताया कि वह इससे भी अधिक ऊंचाई वाला पुतला बना सकते थे लेकिन सुरक्षा का ध्यान सबसे पहले रखा जाता है. क्योंकि पुतले की ऊंचाई के साथ क्षेत्रफल का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है, ताकि पुतले के जलने पर जब वह नीचे गिरे तो किसी को कोई नुकसान न पहुंचे. पंचकूला शालीमार ग्राउंड के क्षेत्रफल के अनुसार अधिकतम ऊंचाई 221 फीट का पुतला खड़ा किया गया है, ताकि लोग रावण दहन होते हुए सुरक्षित तरीके से देख सकें, क्योंकि लोगों के लिए यह आयोजन किया जा रहा है.

    देहरादून में 181 फीट का पुतला 
    तेजिंदर सिंह चौहान ने बताया कि हरियाणा के जिला पंचकूला के सेक्टर 5 और दिल्ली के द्वारका के सेक्टर 10 में 221 फीट के एकसमान पुतले खड़े किए हैं. जबकि उन्होंने तीसरा 181 फीट की ऊंचाई वाला रावण का पुतला देहरादून में खड़ा किया है. यह तीनों पुतले इस बार सबसे अधिक ऊंचाई वाले हैं.

  • देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतलों की तैयारी, दिल्ली-पंचकूला में 221 फीट और देहरादून में 181 फीट ऊंचाई

    देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतलों की तैयारी, दिल्ली-पंचकूला में 221 फीट और देहरादून में 181 फीट ऊंचाई

    अंबाला
    देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतले का रिकार्ड कायम करने वाले अंबाला के बराड़ा ब्लॉक से तेजेंद्र चौहान इस बार देश की राजधानी दिल्ली समेत पंचकूला और देहरादून में रावण के पुतले तैयार कर रहे हैं।

    हालांकि इस बार राजस्थान के कोटा में चौहान अपने कारीगरों के साथ नहीं पहुंचे हैं, जबकि उक्त तीनों स्थानों पर साढ़े तीन माह से रावण के पुतलों को तैयार किया जा रहा है।

    इन तीनों पुतलों पर स्थानीय रामलीला कमेटियों द्वारा कुल एक करोड़ दस लाख रुपये का खर्च होगा। इन में ही इन दिनों तेजेंद्र चौहान जुटे हैं और दशहरे से पहले इन रावण के पुतलों को खड़ा कर दिया जाएगा।

    बता दें कि बराड़ा से शुरु हुआ यह सफर साल 2017 में खत्म हो गया था जब चौहान ने यहां पर 210 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया था।

    जगह कम होने के कारण इसे पंचकूला शिफ्ट कर दिया गया था जहां पर 221 फीट का पुतला तैयार किया गया था। अब इसी ऊंचाई का पुतला दिल्ली और पंचकूला में तैयार होगा, जबकि देहरादून में इसकी ऊंचाई 181 फीट रखी गई है।

    तीनों पुतलों पर 20.5 टन लोहा लगेगा
    चौहान ने बताया कि तीनों स्थानों पर बनने वाले रावण के पुतलों में 20.50 टन लोहे का इस्तेमाल किया जाएगा। ऊचाई के हिसाब से यह तय होता है।

    दिल्ली और पंचकूला में जो रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं, उनमें प्रति पुतले में सात टन लोहा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह देहरनादून में बनने वाले रावण के पुतले में साढ़े छह टन लोहा इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा प्रति पुतले में दो लाख रुपये की आतिशबाजी भी लगाई जाएगी, जो ईको फ्रेंडली होगी।

    बराड़ा के कारीगर जुटे हैं निर्माण
    इन तीनों पुतलों को बनाने में अंबाला के ही कारीगर जुटे हैं। बराड़ा से चौहान अपनी टीम लेकर चलते हैं। एक पुतला बनाने में चालीस करीगरों की टीम लगती है यानी तीनों पुतले बनाने में कुल 120 कारीगर जुटे हैं।

    खास है कि इन पुतलों को बनाने के बाद खड़ा करने के लिए क्रेन का सहारा लेना पड़ता है। यह पुतले भी टुकड़ों में बनते हैं। पुतले का हर हिस्सा अलग तैयार किया जाता है और बाद में इनको जोड़ा जाता है। यह पुतले कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगते हैं। देश में बनने वाले रावण के यह सबसे बड़े पुतले हैं।

    इस तरह से है ऊंचाई
     रावण के जो पुतले 221 फीट ऊंचे बनाए जा रहे हैं। उनमें हर हिस्से की अलग ऊंचाई है। इसके तहत रावण के सिर पर 58 फीट का मुकुट, चेहरा 25 फीट, गर्दन 8 फीट और धड़ 90 फीट, पैरों की ऊंचाई 40 फीट, जूतियों की ऊंचाई दस फीट, रावण के हाथ में तलवार 50 फीट, जूते की लंबाई 40 फीट है।

    इसी तरह रावण का जो पुतला 181 फीट का है, उसमें मुकुट 45 फीट, चेहरा 20 फीट, गर्दन 6 फीट, धड़ 80 फीट, पैर 32 फीट, जूते की ऊंचाई छह फीट तथा लंबाई 36 फीट तथा रावण की तलवार र35 फीट की है।