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  • तीन मैच में संजू सैमसन के 11, 82 और 3 रन, अब वैभव सूर्यवंशी को आजमाने की उठी मांग

    तीन मैच में संजू सैमसन के 11, 82 और 3 रन, अब वैभव सूर्यवंशी को आजमाने की उठी मांग

    नई दिल्ली
    संजू सैमसन, आखिर कब तक? तीन मैच, दो नाकामियां और एक बड़ी पारी, जिस पर दो-दो जीवनदान का एहसान है. वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा टी20 सीरीज में संजू के बल्ले से 11, 82 और 3 रन निकले हैं. रांची में 82 रन बनाकर उन्होंने जरूर उम्मीद जगाई, लेकिन उस पारी की चमक के पीछे छिपी हकीकत भी देखिए. जब वह 6 रन पर थे, तब उनका कैच छूटा. 42 पर उन्हें दूसरा जीवनदान मिला. यानी संजू की पारी को दो बार विपक्षी टीम ने खुद मौका दिया. सवाल है कि क्या एक बड़ी पारी और दो जीवनदान के सहारे ही भारतीय टीम में उनकी जगह बची रहनी चाहिए?

    सवाल इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि टीम के पास एक ऐसा किशोर बल्लेबाज मौजूद है, जिसने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया का ध्यान खींचा है. नाम है वैभव सूर्यवंशी. लेकिन वैभव को मौका मिले, उससे पहले संजू को लगातार मौके दिए जा रहे हैं. पांच मैचों की सीरीज के तीन मुकाबले बीत चुके हैं. अब सिर्फ दो मैच बाकी हैं. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या टीम मैनेजमेंट अब भी संजू को आजमाता रहेगा या वैभव को मैदान पर उतारने का साहस दिखाएगा?

    एक पारी के दम पर कब तक बचेगी जगह?
    संजू की 82 रनों की पारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लेकिन किसी खिलाड़ी का आकलन सिर्फ उसकी सर्वश्रेष्ठ पारी के आधार पर नहीं होता. टी20 क्रिकेट में असली परीक्षा प्रदर्शन में निरंतरता है. संजू ने पहले मैच में 11 रन बनाए, दूसरे में 82 और तीसरे में सिर्फ 3 रन बनाकर लौट गए. तीन पारियों का यह उतार-चढ़ाव एक बार फिर वही सवाल खड़ा करता है, जो उनके करियर के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है- क्या संजू अपनी प्रतिभा को लगातार प्रदर्शन में बदल सकते हैं?

    रांची में मिली दो जीवनदान की बात इसलिए अहम है, क्योंकि बड़े स्तर पर बल्लेबाज को हर बार ऐसे मौके नहीं मिलते. अगर कैच पकड़ लिए जाते, तो क्या संजू की पारी 82 रनों तक पहुंचती? इसका जवाब कोई निश्चित तौर पर नहीं दे सकता. लेकिन इतना जरूर है कि उनकी पारी को परखते समय इन मौकों का जिक्र जरूरी है. रन बने, यह अच्छी बात है. मगर उन रनों के पीछे मिले अवसरों को भुलाकर सिर्फ स्कोरकार्ड देखकर फैसला करना भी सही नहीं होगा.

    वैभव कब तक देखेंगे ड्रेसिंग रूम से तमाशा?
    दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी हैं, जिनकी प्रतिभा पर दुनिया तालियां बजा चुकी है, लेकिन भारतीय टीम में उन्हें अपनी बारी का इंतजार है. टीम में चुनकर भी मैदान से दूर रखना, किसी युवा खिलाड़ी के लिए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी? वैभव ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से बड़े-बड़े गेंदबाजों के पसीने छुड़ाए हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को साबित करने का मौका उनके हाथ नहीं आया. अगर टीम मैनेजमेंट ने उन्हें चुना है, तो उनकी काबिलियत पर भरोसा भी जताया होगा. फिर उस भरोसे को आजमाने से परहेज क्यों? आखिर वैभव को मौका देने के लिए और कितनी दस्तक का इंतजार है?

    वैभव सूर्यवंशी ने छोटी उम्र में ही अपने बल्ले से बड़े-बड़े गेंदबाजों को चुनौती दी है. उनकी बल्लेबाजी में जो बेखौफ अंदाज दिखता है, उसने उन्हें खास पहचान दिलाई है. बेशक, आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव में फर्क है. वैभव को भी टीम इंडिया की जर्सी में उतरकर अपनी काबिलियत साबित करनी होगी. लेकिन सवाल है कि जब उन्हें मैदान पर उतरने का मौका ही नहीं मिलेगा, तो उनकी असली परीक्षा होगी कैसे? प्रतिभा को बेंच पर बैठाकर नहीं, मैदान में उतारकर परखा जाता है. वैभव को मौका दिए बिना उनके बारे में फैसला सुनाना आखिर कितना जायज है?

    अब सीरीज में दो ही मैच बचे हैं. यही वह समय है, जब टीम मैनेजमेंट को भविष्य को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए. अगर वैभव को मौका देना है, तो अभी क्यों नहीं? क्या हर बार संजू की एक बड़ी पारी का इंतजार किया जाएगा? और अगर संजू लगातार रन नहीं बना पा रहे हैं, तो क्या सिर्फ उनकी पुरानी उपलब्धियों के आधार पर उन्हें आगे भी खिलाते रहना उचित है?

    औसत 27 से नीचे, फिर भी सवालों से बाहर क्यों?
    संजू का टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजी औसत 27 से नीचे आ चुका है. यह आंकड़ा अपने आप में किसी खिलाड़ी की पूरी कहानी नहीं बताता, लेकिन जब खराब पारियों और अच्छी पारी के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे, तो सवाल पूछना जरूरी हो जाता है. भारतीय टीम में जगह किसी की स्थायी जागीर नहीं हो सकती. यहां प्रदर्शन, टीम की जरूरत और भविष्य की योजनाओं को बराबर महत्व मिलना चाहिए.

    संजू को बाहर करने की मांग का मतलब यह नहीं कि उनमें प्रतिभा नहीं है. उनकी प्रतिभा पर सवाल नहीं है, सवाल उस प्रतिभा से मिलने वाले नतीजों पर है. आखिर कब तक उम्मीद के आधार पर जगह मिलती रहेगी? कब तक एक बड़ी पारी पिछली नाकामियों पर पर्दा डालती रहेगी? और कब तक किसी दूसरे खिलाड़ी को मौका देने का फैसला टलता रहेगा?

    संजू की जगह या वैभव का भविष्य?
    अब तस्वीर साफ है. वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के दो मैच बाकी हैं. टीम मैनेजमेंट के सामने विकल्प मौजूद है. वह संजू को एक और मौका देकर उनकी फॉर्म पर भरोसा जता सकता है, या वैभव को उतारकर यह देख सकता है कि युवा बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कर सकता है.

    लेकिन फैसला सिर्फ एक खिलाड़ी को खिलाने या दूसरे को बाहर बैठाने का नहीं है. यह टीम की सोच का सवाल है. क्या भारत भविष्य के लिए नए विकल्प तैयार करना चाहता है, या पुराने विकल्पों को बार-बार आजमाने में ही उलझा रहेगा?

    संजू को अपनी जगह बचाने का पूरा अधिकार है, लेकिन वैभव को मौका पाने का हक भी कम नहीं है. संजू की नाकामी अपने आप वैभव की सफलता की गारंटी नहीं बनती, मगर वैभव को मौका न देना उनकी परीक्षा शुरू होने से पहले ही रोक देना है.

    अब संजू के सामने बल्ले से जवाब देने की चुनौती है और टीम मैनेजमेंट के सामने फैसले की. सीरीज के आखिरी दो मैच बताएंगे कि भारतीय टीम सिर्फ आज का स्कोर देख रही है या कल की टीम भी तैयार कर रही है. वैभव को मौका मिलेगा या नहीं, यह फैसला टीम मैनेजमेंट का है. लेकिन एक सवाल का जवाब उन्हें देना ही होगा- जबकिशोर प्रतिभा दरवाजे पर खड़ी है, तो उसे अंदर आने का मौका आखिर कब मिलेगा?

  • संजू की वापसी से वैभव सूर्यवंशी को करना पड़ा इंतजार, गंभीर ने बताया टीम का प्लान

    संजू की वापसी से वैभव सूर्यवंशी को करना पड़ा इंतजार, गंभीर ने बताया टीम का प्लान

    नई दिल्ली
    अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 में अभिषेक शर्मा ने 30 गेंदों में शतक ठोककर खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन इसी सीरीज में संजू सैमसन ने भी चुपचाप अपना जवाब दे दिया. इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर लगातार नाकामी के बाद टीम से बाहर हुए संजू ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों में 117 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे. उनका स्ट्राइक रेट 180 रहा.

    गंभीर ने कहा कि इंग्लैंड में संजू को बाहर रखना उनके कोचिंग कार्यकाल का सबसे मुश्किल फैसला था. उन्होंने माना कि वर्ल्ड कप जीतने से पहले संजू के प्रदर्शन को देखते हुए यह फैसला आसान नहीं था. हालांकि, गंभीर ने यह भी कहा कि कई बार टीम मैनेजमेंट को खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म के आधार पर फैसला लेना पड़ता है.

    गंभीर के मुताबिक टी20 क्रिकेट में सिर्फ रन या विकेट नहीं देखे जाते, बल्कि खिलाड़ी और टीम कितना इम्पैक्ट डाल रहे हैं, यह ज्यादा अहम है.

    इसी वजह से उन्होंने अभिषेक के 100 रन से ज्यादा टीम के पावरप्ले में 100 रन पूरे करने को बड़ी उपलब्धि बताया. उनके कोचिंग कार्यकाल में भारत ने पहली बार पावरप्ले में 100 रन बनाए. गंभीर ने कहा कि टीम को इसी आक्रामक सोच के साथ आगे बढ़ना है और अब अगला लक्ष्य 300 रन का स्कोर है.

    वर्ल्ड कप वाली टीम पर भरोसा क्यों?
    संजू के मामले में गंभीर ने एक और बात साफ की. उनका कहना था कि टीम मैनेजमेंट शुरू से ही वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कॉम्बिनेशन पर वापस जाने को लेकर स्पष्ट था.

    गंभीर ने कहा कि कोई खिलाड़ी दो-तीन मैच या एक-दो सीरीज में नाकाम होने से खराब खिलाड़ी नहीं बन जाता. भारत एक वर्ल्ड कप से दूसरे वर्ल्ड कप तक अजेय रहा और वर्ल्ड कप जीता. ऐसे में सिर्फ दो-तीन नाकामियों के बाद उस टीम या उसके खिलाड़ियों पर भरोसा खत्म नहीं किया जा सकता.

    संजू आए तो वैभव को करना पड़ा इंतजार
    अफगानिस्तान सीरीज में संजू की वापसी का सीधा असर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर पड़ा. वैभव को प्लेइंग इलेवन से बाहर होना पड़ा. गंभीर ने इसे वैभव के लिए झटका नहीं, बल्कि इंतजार का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट को वैभव की प्रतिभा और वह क्या कर सकता है, इसकी पूरी जानकारी है. लेकिन जो खिलाड़ी करीब दो साल से लगातार अच्छा कर रहा है, वह उस खिलाड़ी से आगे रहेगा जो अभी टीम में आया है.

    उनका संदेश साफ था- चाहे खिलाड़ी 15 साल का हो या 30 साल का, अगर मौका मिलने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है तो इंतजार करना होगा. भारतीय क्रिकेट में यही प्रतियोगिता है और टीम के ड्रेसिंग रूम में इस तरह की प्रतिभाओं की मौजूदगी ही टीम को मजबूत बनाती है.

  • ‘मैं मशीन नहीं हूं’, 57 रन की तूफानी पारी के बाद संजू सैमसन ने खोला दिल

    ‘मैं मशीन नहीं हूं’, 57 रन की तूफानी पारी के बाद संजू सैमसन ने खोला दिल

    नई दिल्ली
    द‍िल्ली में अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 में संजू सैमसन ने बल्ले से ऐसा जवाब दिया, जिसका इंतजार लंबे समय से था. उन्होंने सिर्फ 22 गेंदों पर 57 रनों की तूफानी पारी खेली और भारत की 7 विकेट की जीत में अहम भूमिका निभाई. मैच के बाद संजू ने सिर्फ अपनी बल्लेबाजी नहीं, बल्कि आलोचना, बाहर के शोर और वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी खुलकर बात की.

    संजू ने माना कि भारतीय क्रिकेटरों के आसपास होने वाली लगातार चर्चा और आलोचना का उन पर असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि अनुभव ने उन्हें ऐसी चीजों से निपटना जरूर सिखाया है, लेकिन वह इंसान हैं और चीजें उन्हें प्रभावित करती हैं.

    संजू ने कहा- मैं Wi-Fi बंद करने की कोशिश करता हूं. लेकिन कभी-कभी Wi-Fi ऑन हो जाता है और कुछ कमेंट्स दिख जाते हैं.

    उन्होंने कहा कि कुछ सीनियर खिलाड़ी उनके बारे में कुछ कहते हैं और कुछ नहीं कहते. यह पूरी तरह उनकी पसंद और उस समय की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है. कोई पॉज‍िट‍िव शब्द चुन सकता है तो कोई नकारात्मक.

    संजू ने कहा कि अब वह इतने मैच्योर और अनुभवी हो चुके हैं कि इन चीजों को संभाल सकें. हालांकि, उन्होंने साफ माना कि कभी-कभी उन्हें बुरा लगता है.

    उन्होंने कहा- मैं मशीन नहीं हूं. मैं रोबोट नहीं हूं. आप थोड़ा प्रभावित तो होते ही हैं. लेकिन फिर आप खुद से बात करते हैं और खुद को याद दिलाते हैं कि आप कौन हैं और आपको क्या करना है.

    'बाहर का शोर असर करता है, लेकिन माइंडसेट साफ होना चाहिए'
    संजू ने माना कि भारत में क्रिकेटरों के लिए बाहरी शोर (Outside Noise) से बचना आसान नहीं है. सोशल मीडिया, आलोचना और लगातार होने वाली चर्चाओं के बीच खिलाड़ी को अपने माइंडसेट को लेकर स्पष्ट रहना जरूरी है.

    उन्होंने कहा कि उन्हें खुद से यह तय करना होता है कि तैयारी कैसे करनी है और किस तरह खेलना है.

    संजू ने कहा- अगर मैंने उन चीजों पर ध्यान दिया होता तो मैं इस तरह बल्लेबाजी नहीं कर पाता. गेंद को मारने से पहले मैं 10 बार सोचता. अगर गेंद बाहर चली जाती, तो फिर से Wi-Fi की समस्या हो जाती. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

    वैभव की एंट्री पर संजू ने क्या कहा?
    संजू के लिए मौजूदा दौर में ओपनिंग स्लॉट को लेकर चुनौती इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अपने प्रदर्शन से अपनी दावेदारी मजबूत की है.
    वैभव ने इस सीजन करीब 700-800 रन बनाकर जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसका जिक्र खुद संजू ने किया. उन्होंने माना कि टीम में वैभव को मौका मिलना स्वाभाविक था.संजू ने कहा; भारतीय टीम चलाना आसान काम नहीं है. आप देखिए, 15 साल के लड़के ने 700-800 रन बनाए हैं.

    उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट से पहले भी वैभव ने शानदार प्रदर्शन किया था और किसी न किसी तरह उसे टीम में शामिल करना जरूरी था.

    संजू ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने दो-तीन मैचों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था. दूसरी तरफ वैभव फॉर्म में थे और उस सीरीज में मैच जीतने की इच्छा के साथ आए थे. ऐसे में लीडरश‍िप के नजरिए से वैभव को मौका देना समझ में आने वाली बात थी.

    गौतम गंभीर पर संजू सैमसन ने क्या कहा?
    संजू ने वैभव को मौका देने के फैसले को लेकर किसी तरह की शिकायत करने के बजाय टीम मैनेजमेंट की स्थिति को समझने की बात कही.

    उन्होंने कहा कि वह खुद कप्तान रहते हुए कई बार मुश्किल फैसले ले चुके हैं. इसलिए वह जानते हैं कि ऐसे फैसले लेना कितना आसान नहीं होता.

    संजू के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में सबसे ज्यादा जरूरी चीज कम्युनिकेशन है.उन्होंने बताया कि सीरीज के दौरान टीम के अंदर इस मामले पर काफी बातचीत हुई. यहां तक कि सीरीज शुरू होने से पहले भी हेड कोच गौतम गंभीर ने उनसे काफी बात की थी.

    'कठिन फैसला लेना मुश्किल'
    संजू ने टीम के लीडरश‍िप ग्रुप की भी तारीफ की. उनके मुताबिक टीम मैनेजमेंट के लिए लोकप्रिय फैसले लेना आसान होता है, लेकिन टीम के हित में कठिन फैसला लेना ज्यादा मुश्किल होता है.

    उन्होंने कहा- हार्ड डिसीजन लेना आसान नहीं है. बहुत लोकप्रिय फैसले लेना आसान है. लेकिन मुझे लगता है कि एक लीडरशिप ग्रुप के तौर पर हम टीम को सबसे आगे रखते हुए कुछ वाकई कठिन फैसले ले रहे हैं. संजू ने आगे कहा कि इन फैसलों के लिए नेतृत्व समूह को श्रेय दिया जाना चाहिए.

    यानी दूसरे टी20 में बल्ले से शानदार वापसी करने वाले संजू ने मैच के बाद एक और अहम बात साफ कर दी- उनके लिए चयन की दौड़ में मौजूद दूसरे खिलाड़ियों से ज्यादा जरूरी टीम का हित है. वैभव की तारीफ करते हुए उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कठिन चयन फैसलों को समझने के लिए आपसी बातचीत और टीम के लक्ष्य पर भरोसा जरूरी है.

  • संजू सैमसन के भविष्य पर उठे सवाल, क्या खत्म हो रही टीम इंडिया में जगह?

    संजू सैमसन के भविष्य पर उठे सवाल, क्या खत्म हो रही टीम इंडिया में जगह?

    नई दिल्ली
    भारतीय क्रिकेट में संजू सैमसन का नाम हमेशा उन खिलाड़ियों में लिया जाएगा, जिनकी प्रतिभा पर शायद ही कभी किसी ने सवाल उठाया हो. लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के साथ हमेशा 'अगर' और 'मगर' जुड़े रहे. कभी टीम में जगह नहीं मिली, कभी लगातार मौके नहीं मिले और जब मिले तो टीम का संयोजन बदल गया. अब एक बार फिर घटनाक्रम ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संजू सैमसन टीम इंडिया की टी20 योजनाओं से धीरे-धीरे बाहर होते जा रहे हैं या फिर वह सिर्फ एक 'स्टेपनी' बनकर रह गए हैं.

    सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि सिर्फ चार महीने पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी. संजू सैमसन न सिर्फ टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे, बल्कि 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' भी चुने गए थे. उस समय वह टीम इंडिया की सफलता के बड़े नायकों में गिने जा रहे थे. लेकिन सिर्फ चार महीने बाद तस्वीर बदलती नजर आ रही है. इंग्लैंड टी20 सीरीज में बीच में प्लेइंग इलेवन से बाहर होना, आखिरी मैच में मौका मिलना और फिर जिम्बाब्वे दौरे के लिए घोषित टीम में जगह नहीं मिलना इस ओर इशारा करता है कि फिलहाल वह टीम मैनेजमेंट की पहली पसंद नहीं हैं. यही वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या संजू अब टीम इंडिया के लिए सिर्फ एक बैकअप यानी 'स्टेपनी' बनकर रह गए हैं.

    इंग्लैंड दौरे से शुरू हुआ बड़ा सवाल
    इस सवाल की शुरुआत इंग्लैंड दौरे से होती है. भारत की टी20 टीम शुरुआती मुकाबलों में बुरी तरह पिछड़ चुकी थी और सीरीज हाथ से निकल चुकी थी. ऐसे समय में संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में वापस लाया गया. पहली नजर में यह फैसला सकारात्मक लगा, लेकिन अगर घटनाक्रम को थोड़ा गहराई से देखें तो यह सवाल भी उठता है कि जब टीम सीरीज गंवा चुकी थी, तभी संजू की याद क्यों आई? अगर टीम मैनेजमेंट वास्तव में उन्हें अपनी भविष्य की योजनाओं का अहम हिस्सा मानता, तो क्या उन्हें शुरुआत से ही लगातार मौके नहीं मिलने चाहिए थे?

    यह भी संभव है कि टीम प्रबंधन सभी विकल्पों को आजमाना चाहता हो. लेकिन एक दूसरा पहलू भी है. संजू को लेकर सोशल मीडिया पर लंबे समय से बहस चलती रही है. हर बार उनके बाहर होने पर चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट पर सवाल उठते हैं. ऐसे में इंग्लैंड सीरीज में उन्हें मौका देना उन आलोचनाओं को कुछ समय के लिए शांत करने की कोशिश भी माना जा सकता है.

    हालांकि, सबसे बड़ा संकेत जिम्बाब्वे दौरे के लिए घोषित टीम से मिला. इंग्लैंड सीरीज के बीच ही तीन टी20 मैचों की इस सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान हुआ, लेकिन उसमें संजू सैमसन का नाम नहीं था. दूसरी ओर, वैभव सूर्यवंशी को एक बार फिर मौका मिला. इससे साफ संकेत मिला कि चयनकर्ता भविष्य की टीम तैयार करने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं.

    जिम्बाब्वे दौरा बताता है टीम इंडिया का रोडमैप
    जिम्बाब्वे दौरे जैसी सीरीज में अक्सर नए खिलाड़ियों को मौका दिया जाता है. ऐसे दौरे अनुभवी खिलाड़ियों को भी लय हासिल करने का अवसर देते हैं. ऐसे में अगर चयनकर्ता संजू को अपनी लंबी योजना का हिस्सा मानते, तो उन्हें भी इस टीम में जगह मिल सकती थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि चयनकर्ताओं की प्राथमिकता अब नई पीढ़ी तैयार करना है.

    वैभव सूर्यवंशी पर टीम मैनेजमेंट का भरोसा साफ दिखता है. जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम का ऐलान इंग्लैंड सीरीज के दौरान ही हुआ और उसमें वैभव को जगह मिली, जबकि संजू सैमसन को नहीं. इससे यही संदेश जाता है कि चयनकर्ता युवा खिलाड़ियों पर लंबी अवधि का दांव लगाने के लिए तैयार हैं.

    यानी एक खिलाड़ी भविष्य की योजना का हिस्सा है, जबकि दूसरे को जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल होने वाले विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है.

    क्या संजू के लिए अभी भी खुला है वापसी का रास्ता?
    क्या इसका मतलब यह है कि संजू सैमसन का अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म हो गया है? अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. क्रिकेट में परिस्थितियां बहुत तेजी से बदलती हैं. चोट, खराब फॉर्म या टीम संयोजन में बदलाव किसी भी खिलाड़ी के लिए वापसी का रास्ता खोल सकते हैं.

    लेकिन मौजूदा तस्वीर यही कहती है कि टीम इंडिया की टी20 रणनीति अब भविष्य की ओर बढ़ चुकी है. चयनकर्ता उन खिलाड़ियों में निवेश करना चाहते हैं, जिन्हें अगले पांच से सात वर्षों तक भारतीय क्रिकेट की रीढ़ बनाया जा सके. ऐसे में संजू सैमसन फिलहाल उस योजना के केंद्र में नजर नहीं आते.

    फिलहाल तस्वीर यही कहती है कि संजू सैमसन टीम इंडिया की पहली पसंद नहीं हैं. उन्हें तब मौका मिलता है, जब टीम को किसी विकल्प की जरूरत होती है. यही वजह है कि उनके प्रदर्शन से ज्यादा उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. मौजूदा हालात में वह नियमित सदस्य से ज्यादा एक 'स्टेपनी' की तरह नजर आते हैं.
     

  • वानखेड़े में संजू सैमसन का तूफानी शतक, MI vs CSK मैच में बनाए 10 चौके, 6 छक्के

    वानखेड़े में संजू सैमसन का तूफानी शतक, MI vs CSK मैच में बनाए 10 चौके, 6 छक्के

     मुंबई
    आईपीएल 2026 के 33वें मुकाबले में गुरुवार को चेन्नई सुपर किंग्स ने मुंबई इंड‍ियंस को मसलकर रख द‍िया. इस मुकाबले के सबसे बड़े हीरो संजू सैमसन रहे. सैमसन ने अपनी 54 गेंदों में नाबाद 101 रन की शानदार पारी से महफ‍िल लूट ली, जिसमें 10 चौके और 6 छक्के शामिल रहे. उनका स्ट्राइक रेट 187.04 का रहा. यह इस सीजन में उनका दूसरा शतक रहा। 

    संजू सैमसन के शतक और चेन्नई के गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर CSK ने मुंबई इंडियंस को 103 रन से करारी शिकस्त दी. अकील हुसैन ने 4 विकेट झटके. वहीं नूर अहमद ने दो विकेट लिए. वहीं चेन्नई की यह जीत रनों के ल‍िहाज से उनकी सबसे बड़ी जीत रही। 

    इससे पहले संजू सैमसन ने आईपीएल में अपना पांचवां शतक जड़ा, वहीं इस सीजन का उनका यह दूसरा शतक रहा. इसके साथ ही IPL में MI के खिलाफ CSK के किसी बल्लेबाज का यह पहला शतक रहा. जो एक यून‍िक र‍िकॉर्ड रहा। 

    संजू की पारी की बदौलत ही चेन्नई ने 20 ओवर में 207/6 का मजबूत स्कोर खड़ा किया. जवाब में मुंबई की टीम 104/10 (19 ओवर्स ) में स‍िमट गई. वानखेड़े में खेले जा रहे इस मुकाबले में टॉस जीतकर मुंबई ने पहले गेंदबाजी चुनी, लेकिन यह फैसला शुरुआत में भारी पड़ता द‍िखा। 

    ऋतुराज गायकवाड़ ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज दिखाया और 14 गेंदों में 22 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दिलाई. हालांकि वह बड़ी पारी में इसे नहीं बदल सके. मध्य ओवरों में रनगति थोड़ी धीमी हुई. कार्त‍िक शमा ने 19 गेंदों में 18 रन बनाए, जिससे दूसरे स्ट्रैटेजिक टाइमआउट के बाद टीम की रफ्तार पर असर पड़ा। 

    हालांकि जैमी ओवर्टन ने 7 गेंदों में 15 रन बनाकर अंत में टीम को थोड़ा तेज किया. मुंबई की ओर से जसप्रीत बुमराह और अल्लाह गजनफर एक बार फिर सबसे किफायती गेंदबाज रहे. उन्होंने अपने यॉर्कर और स्लोअर गेंदों से डेथ ओवरों में रन बनाना मुश्किल कर दिया। 

    रिकॉर्ड्सबुक  में सैमसन की एंट्री
    इस शतक के साथ संजू सैमसन अब टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले भारतीयों की सूची में 8 शतकों के साथ शामिल हो गए हैं, जहां व‍िराट कोहली (9) और  रोहित शर्मा (8) जैसे नाम मौजूद हैं. वहीं IPL में भी सैमसन के नाम अब 5 शतक हो गए हैं। 

    CSK के MI के खिलाफ सबसे बड़े स्कोर (IPL)
    218/4 (2021, दिल्ली)
    208/5 (2008, चेन्नई)
    207/6 (2026, वानखेड़े)* 
    206/4 (2024, वानखेड़े)

    CSK के लिए सबसे ज्यादा शतक (IPL)
    2 : शेन वॉटसन
    2 : मुरली विजय
    2 : ऋतुराज गायकवाड़
    2 : संजू सैमसन 

     

    सैमसन इस सीजन में CSK के लिए 2 शतक लगाने वाले दूसरे खिलाड़ी बने (वॉटसन के बाद, 2018)

    संजू सैमसन की पारी का ब्रेकडाउन

        तेज गेंदबाजों के खिलाफ: 40 गेंद में 83 रन (स्ट्राइक रेट 207.5)
        10 चौके, 5 छक्के
        स्पिन के खिलाफ: 14 गेंद में 18 रन (स्ट्राइक रेट 128.6)
        1 छक्का
        यानी सैमसन ने पेसर्स को ज्यादा टारगेट किया

    T20 में भारतीयों के सबसे ज्यादा शतक
    9 : विराट कोहली
    9 : अभिषेक शर्मा
    8 : रोहित शर्मा
    8 : संजू सैमसन 

     IPL में सबसे ज्यादा शतक
    8 : विराट कोहली
    7 : जोस बटलर
    6 : क्रिस गेल
    5 : केएल राहुल
    5 : संजू सैमसन 

  • धोनी की गैरमौजूदगी में संजू सैमसन और ऋतुराज गायकवाड़ संभालेंगे चेन्नई सुपर किंग्स की कमान

    धोनी की गैरमौजूदगी में संजू सैमसन और ऋतुराज गायकवाड़ संभालेंगे चेन्नई सुपर किंग्स की कमान

    चेन्नई

    इंडियन प्रीमियर लीग का तीसरा मुकाबला सोमवार को चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला जाना है. राजस्थान रॉयल्स के साथ एक दशक से ज्यादा समय तक जुड़े रहने वाले संजू सैमसन के लिए ये मुकाबला बेहद भावुक होने वाला है. क्योंकि वह इस बार चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से अपनी पूर्व टीम राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ उतरेंगे. वहीं, रविंद्र जडेजा भी अपनी पूर्व फ्रेंचाइजी के खिलाफ खेलेंगे, जिससे इस मुकाबले में एक अलग भावनात्मक पहलू जुड़ गया है.

    एक दशक से अधिक समय तक सैमसन राजस्थान रॉयल्स की पहचान रहे
    वह टीम के मुख्य बल्लेबाज, कप्तान और सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे, जिन्होंने टीम को 2022 के फाइनल तक पहुंचाया था.

    जिस तरह MS Dhoni, चेन्नई सुपर किंग्स की पहचान रहे हैं, उसी तरह सैमसन राजस्थान रॉयल्स की पहचान थे. लेकिन एक बड़े ट्रेड में जडेजा के राजस्थान लौटने के बाद अब केरल का यह बल्लेबाज पीली जर्सी में नजर आएगा, जिससे सीएसके के नए कोर ग्रुप को एक नई दिशा मिली है.

    सैमसन शानदार फॉर्म में भी हैं. उन्होंने भारत की टी20 वर्ल्ड कप जीत में अहम भूमिका निभाई थी. वेस्टइंडीज, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ करो या मरो वाले मुकाबलों में लगातार तीन अर्धशतक लगाकर वह देश के नए स्टार बनकर उभरे हैं.

    धोनी की गैरमौजूदगी में उतरेगी सीएसके
    संजू सैमसन और कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ पारी की शुरुआत करेंगे और वही टीम की लीडरशिप का मुख्य हिस्सा भी होंगे, क्योंकि MS Dhoni कैल्फ स्ट्रेन के कारण कम से कम दो हफ्तों तक बाहर रहेंगे. धोनी टीम के साथ गुवाहाटी नहीं गए हैं और उनकी गैरमौजूदगी में सैमसन और गायकवाड़ पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी.

  • संजू सैमसन पर बैन की चर्चाएं, क्या सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ वह खेल पाएंगे? नियम बताते हैं

    संजू सैमसन पर बैन की चर्चाएं, क्या सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ वह खेल पाएंगे? नियम बताते हैं

    कलकत्ता

     ‘Sanju Samson ban’ शब्द सोशल मीडिया पर जमकर ट्रेंड कर रहा है, खासकर आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल से पहले. भारत और इंग्लैंड की टीमें इस मुकाबले में आमने-सामने होंगी. सोशल मीडिया पर ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर 8 में मैच जिताऊ पारी के बाद जश्न मनाने के कारण इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) संजू सैमसन पर बैन लगा सकती है, जिससे फैंस काफी परेशान हैं।

    आखिर हुआ क्या था?
    कोलकाता के ईडन गार्डन्स में रविवार को विजयी चौका लगाने के बाद संजू सैमसन ने हेलमेट उतारकर जमीन पर फेंक दिया और घुटनों के बल बैठकर भगवान का धन्यवाद किया. कुछ लोगों का मानना है कि हेलमेट ‘फेंकने’ का यह एक्शन ICC के ‘क्रिकेट उपकरण के दुरुपयोग’ वाले नियम के तहत आ सकता है।

    फिलहाल, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि ICC संजू सैमसन के खिलाफ कोई कार्रवाई करने जा रही है. हालांकि, सोशल मीडिया पर चर्चा है कि अगर सैमसन दोषी पाए गए तो उन्हें एक मैच के लिए सस्पेंड किया जा सकता है.

    ICC का नियम क्या कहता है?
    ICC के आचार संहिता के अनुच्छेद 2.2 के तहत, खिलाड़ियों को क्रिकेट उपकरण का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए. इसमें हेलमेट, बैट, स्टंप या किसी भी अन्य उपकरण को फेंकना या मारना शामिल है. अगर यह काम गुस्से में नहीं, बल्कि भावनाओं में किया गया हो, तब भी इसकी समीक्षा की जा सकती है और कार्रवाई हो सकती है।

    नियम में यह भी कहा गया है कि अगर किसी भी एक्शन से उपकरण या स्टेडियम की संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो उसे नियम का उल्लंघन माना जाएगा. हाल ही में, स्कॉटलैंड के क्रिकेटर जॉर्ज मंसी को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के एक मैच में आउट होने के बाद हेलमेट फेंकने पर एक डिमेरिट प्वाइंट दिया गया था. यानी ऐसे मामलों में कार्रवाई संभव है।

    क्या सैमसन सस्पेंड हो सकते हैं?
    तकनीकी रूप से, अगर मैच अधिकारियों को लगता है कि सैमसन ने हेलमेट फेंका है, तो उन्हें सजा मिल सकती है. आमतौर पर, ऐसे मामलों को लेवल 1 अपराध माना जाता है. लेवल 1 के उल्लंघन पर अधिकतम 50% मैच फीस का जुर्माना और दो डिमेरिट प्वाइंट दिए जा सकते हैं।

    अक्सर, खिलाड़ियों को ऐसे मामलों में बैन नहीं किया जाता, सिर्फ डिमेरिट प्वाइंट मिलते हैं. मैच रेफरी भी देखते हैं कि यह एक्शन किस संदर्भ में किया गया. जश्न के दौरान किए गए ऐसे एक्शन को आमतौर पर गुस्से में किए गए कामों की तुलना में हल्के में लिया जाता है. इसलिए, सैमसन पर बैन लगना संभव नहीं लगता।