Tag: Sawan

  • सावन के आखिरी सोमवार शाम करें ये 5 उपाय, बरसेगी महादेव की विशेष कृपा

    सावन के आखिरी सोमवार शाम करें ये 5 उपाय, बरसेगी महादेव की विशेष कृपा

    आज सावन का आखिरी सोमवार है. सावन के सोमवार पर भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है. वहीं, ज्योतिषियों के मुताबिक, सावन का अंतिम सोमवार महादेव की कृपा पाने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है. इस विशेष दिन शिवलिंग का सही विधि से पूजन करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. इसके अलावा, सावन के सोमवार की संध्या (प्रदोष काल) भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. मान्यता है कि शाम के समय भोलेनाथ अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं. तो आइए जानते हैं सावन के आखिरी सोमवार की शाम कौन से कार्य करना शुभ रहेगा l

    शाम को कच्चा दूध और जल अर्पित करें
    सावन सोमवार पर आज शाम शिव मंदिर जाएं और तांबे के लोटे में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें. जल चढ़ाते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करें l

    बेलपत्र पर चंदन से लिखें राम-नाम
    इसके अलावा, शाम के समय 108 बेलपत्र लें और उन पर सफेद चंदन से 'राम' लिखें. शाम की पूजा के समय अपनी मनोकामना का ध्यान करते हुए ये बेलपत्र एक-एक करके शिवलिंग पर चढ़ाएं l

    गाय के घी का दीपक जलाएं
    मंदिर में जाकर या घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और मुख्य द्वार पर गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं. दीपक के तेल में एक चुटकी काला तिल डाल दें. इससे आर्थिक परेशानियां और ग्रह दोष दूर होते हैं l

    शमी पत्र और शहद अर्पित करें
    अगर व्यापार, नौकरी या धन से जुड़ी कोई बाधा आ रही है, तो शिवलिंग पर शहद और शमी के पत्ते अर्पित करें. इससे आरोग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है l

    महामृत्युंजय मंत्र का जप
    शाम की आरती के बाद शिव प्रतिमा के समक्ष बैठकर कम से कम 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जप करें. यह उपाय हर प्रकार के रोग, भय और कष्टों को दूर करता है l

  • अमृतसर के शिवाला बाग भाइयां मंदिर में उमड़ी भारी भीड़, सावन सोमवार-नाग पंचमी और संक्रांति के संयोग ने बढ़ाई रौनक

    अमृतसर के शिवाला बाग भाइयां मंदिर में उमड़ी भारी भीड़, सावन सोमवार-नाग पंचमी और संक्रांति के संयोग ने बढ़ाई रौनक

    अमृतसर
    सावन के तीसरे सोमवार पर अमृतसर में आस्था का अलग ही रंग देखने को मिला। सावन सोमवार के साथ नाग पंचमी और संक्रांति का संयोग होने के कारण शिवाला बाग भाइयां मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। 

    श्रद्धालुओं को करीब दो घंटे तक लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। इसके बावजूद उनके चेहरे पर थकान के बजाय भगवान शिव के दर्शन की उत्सुकता नजर आई।

    सुबह से ही श्रद्धालु फूल, बेलपत्र, दूध और पूजा की थालियां लेकर मंदिर पहुंचते रहे। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारों के बीच भक्तों ने प्राचीन शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की।

    शिव की आराधना के लिए विशेष
    मंदिर के पंडित ने बताया कि सावन का सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस बार नाग पंचमी और संक्रांति का संयोग होने से श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहा। उन्होंने बताया कि शिवाला बाग भाइयां के प्राचीन शिवलिंग के प्रति लोगों की गहरी आस्था है और यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    भगवान शिव का मनमोहक स्वरूप सजाया
    मंदिर में भगवान भोलेनाथ का विशेष 16 श्रृंगार किया गया। फूलों और पूजन सामग्री से भगवान शिव का मनमोहक स्वरूप सजाया गया, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

    भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा
    पंडित ने बताया कि सावन के सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन से भोलेनाथ की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही आस्था सोमवार को शिवाला बाग भाइयां मंदिर में देखने को मिली।

  • महादेव की आराधना का खास दिन, सावन सोमवार पर ये समय रहेगा शुभ

    महादेव की आराधना का खास दिन, सावन सोमवार पर ये समय रहेगा शुभ

    3 अगस्त 2026 के दिन सावन का पहला सोमवार पड़ रहा है। सावन सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण और खास माना जाता है। इस दिन कई शिव भक्त व्रत रख भोलेनाथ की आराधना करते हैं। कई लोग इस दिन अभिषेक और रुद्राभिषेक भी करते हैं। शुभ मुहूर्त का ध्यान रख कर पूजा-पाठ आरंभ करना चाहिए। गौर फरमाने वाली बात यह रहेगी कि सावन के पहले सोमवार पर सुबह के समय राहुकाल लग रहा है। शुभ मुहूर्त में शिव पूजा और जलाभिषेक करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते हैं सावन सोमवार पर पूजा कब और कब नहीं करना चाहिए-
    सावन के पहले सोमवार पर पूजा कब करें, जानें सुबह-शाम के मुहूर्त और शिव पूजा कब न करें

    सावन के पहले सोमवार पर पूजा के शुभ मुहूर्त
        ब्रह्म मुहूर्त- 04:07 बजे से 04:49 बजे तक (सुबह)
        प्रातः सन्ध्या- 04:28 बजे से 05:32 बजे तक (सुबह)
        अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:39 बजे
        विजय मुहूर्त- 02:26 बजे से 03:19 बजे तक (दोपहर)
        गोधूलि मुहूर्त- 06:53 बजे से 07:14 बजे तक (शाम)
        सायाह्न सन्ध्या- 06:53 बजे से 07:57 बजे तक (शाम)
        अमृत काल- 05:07 बजे से 06:45 बजे तक (शाम)
        निशिता मुहूर्त- 11:51 बजे से 12:34 बजे, अगस्त 04 (रात)

    चौघड़िया शुभ मुहूर्त
        अमृत – सर्वोत्तम 05:32 बजे से 07:12 बजे तक (सुबह)
        शुभ – उत्तम 08:52 बजे से 10:32 बजे तक (सुबह)
        चर – सामान्य 01:53 बजे से 03:33 बजे तक (दोपहर)
        चर – सामान्य 06:53 बजे से 08:13 बजे तक (शाम)

    सावन के पहले सोमवार पर पूजा कब करने से बचें?
        राहुकाल- 07:12 से 08:52 बजे तक (सुबह)
        यमगण्ड- सुबह 10:32 बजे से दोपहर 12:12 बजे
        गुलिक काल- 01:53 बजे से 03:33 बजे तक (दोपहर)
        विडाल योग- 05:32 बजे से 10:29 बजे तक (सुबह), दोपहर 10:00 बजे से सुबह 05:32 बजे, अगस्त 04
        वर्ज्य- 07:22 बजे से 08:59 बजे तक (सुबह)
        गण्ड मूल- रात 10:00 बजे से सुबह 05:32 बजे, अगस्त 04
        दुर्मुहूर्त- 12:39 बजे से 01:32 बजे तक (दोपहर), दोपहर 03:19 बजे से 04:13 बजे तक (शाम)
        बाण रोग- शाम 06:51 बजे से पूर्ण रात्रि तक
        पञ्चक- पूरे दिन

    सावन के पहले सोमवार पर रुद्राभिषेक कब करें?
    ज्योतिष शास्त्र और पंचांग के अनुसार, रुद्राभिषेक करने से पहले शिववास का समय देखा जाता है। शिववास के समय जब शिव जी नंदी पर विराजमान होते हैं तब रुद्राभिषेक करना शुभ माना जाता है। इस मुहूर्त में रुद्राभिषेक करने से सफलता मिलती है।

  • सावन 2026: जानें भगवान शिव के 8 महान भक्तों की अद्भुत गाथाएं

    सावन 2026: जानें भगवान शिव के 8 महान भक्तों की अद्भुत गाथाएं

    Sawan 2026: सावन का पावन महीना शुरू हो चुका है. सावन का महीना देवों के देव महादेव और उनकी भक्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है. सावन की हर एक बूंद और हवा में बहती हर-हर महादेव की गूंज शिव भक्तों को एक अद्भुत ऊर्जा से भर देती है. कहा जाता है कि इस पावन मास में जो भी भक्त सच्चे हृदय से भगवान शिव की शरण में जाता है, भोलेनाथ उसके सभी कष्ट हर लेते हैं l

    हिंदू परंपरा में भगवान शिव केवल देवताओं के ही नहीं, बल्कि ऋषियों, राजाओं, असुरों, पशु-पक्षियों और साधारण मनुष्यों के भी आराध्य रहे हैं. शिव जी की भक्ति में न तो कोई भेदभाव है और न ही किसी आडंबर की आवश्यकता है. इनकी भक्ति केवल सच्चे भाव और समर्पण का मोल है. पौराणिक काल से लेकर आज तक ऐसे कई परम शिव भक्त हुए हैं, जिन्होंने अपनी निष्ठा और अनोखी भक्ति से महादेव का हृदय जीत लिया था. आइए भगवान शिव के 8 सबसे महान और परम भक्तों के बारे में, जिनकी भक्ति की मिसाल आज भी पूरा संसार देता है l

    भक्त कन्नप्पा (Kannappa)
    दक्षिण भारत के एक शिकारी कुल में जन्मे कन्नप्पा शिव भक्ति के सर्वोच्च प्रतीक माने जाते हैं. कथा के मुताबिक, जब कन्नप्पा ने देखा कि शिवलिंग की एक आंख से रक्त बहा था तो  उन्होंने बिना झिझके तीर से अपनी एक आंख निकालकर शिवलिंग पर लगा दी थी. जब दूसरी आंख से भी रक्त बहने लगा, तो उन्होंने अपनी दूसरी आंख भी दान करने के लिए पैर का अंगूठा शिवलिंग पर रख दिया था ताकि आंख सही जगह लगे. उनकी इस निश्छल भक्ति से प्रकट होकर महादेव ने उन्हें गले लगाया और दृष्टि वापस लौटा दी थी

    लंकापति रावण (Ravana)
    रावण भले ही अपने अहंकार के कारण विनाश को प्राप्त हुआ था, लेकिन वह भगवान शिव के सबसे बड़े और ज्ञानी भक्तों में से एक था. रावण ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की और अपने सिर काटकर शिव जी के चरणों में अर्पित कर दिए थे. उसने अत्यंत मधुर और ओजस्वी शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने उसे चंद्रहास खड्ग और अक्षय शक्ति का वरदान दिया था l

    महर्षि मार्कंडेय (Markandeya)
    ऋषि मार्कंडेय की आयु केवल 16 वर्ष तय थी, लेकिन उनकी भक्ति ने काल को भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था. जब यमराज उनके प्राण लेने आए, तो बालक मार्कंडेय शिवलिंग से लिपट गए थे और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने लगे थे. स्वयं महादेव ने प्रकट होकर यमराज से मार्कंडेय के प्राणों की रक्षा की और उन्हें अमरता तथा चिरंजीवी होने का वरदान दिया था

    बाणासुर (Banasura)
    दैत्यराज बलि का पुत्र बाणासुर भगवान शिव का अनन्य भक्त था. बाणासुर ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए सहस्त्र भुजाओं से तांडव नृत्य के दौरान विभिन्न वाद्ययंत्र बजाए थे. उसकी इस अद्भुत कला और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने स्वयं उसके नगर की रक्षा करने का वचन दिया था l

    नंदी (Nandi)
    ऋषि शिलाद के पुत्र नंदी केवल भगवान शिव के वाहन ही नहीं, बल्कि उनके सबसे प्रिय गण और अनन्य भक्त हैं. नंदी ने अल्पायु का योग टालने के लिए घोर तपस्या करके शिव जी को प्रसन्न किया था. महादेव ने उन्हें अजर-अमर होने का वरदान दिया और अपने गणों का अधिपति तथा अपना मुख्य द्वारपाल व वाहन स्वीकार किया l

    भगवान श्री राम (Lord Rama)
    भगवान विष्णु के अवतार श्री राम भी महादेव के परम भक्त और आराधक हैं. लंका पर चढ़ाई करने से पहले श्री राम ने समुद्र तट पर बालू से शिवलिंग का निर्माण कर विधिवत पूजन किया था, जिसे आज रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है. शिव पुराण के अनुसार श्री राम और महादेव एक-दूसरे को अपना आराध्य मानते हैं l

    कुबेर देव (Kubera Devta)
    धनेश्वर कुबेर देव पूर्वजन्म में गुणनिधि नाम के एक साधारण व्यक्ति थे, जो अनजाने में शिव पूजा से जुड़े थे. कठिन तपस्या और शिव चरणों में समर्पण के कारण महादेव ने उन्हें समस्त ब्रह्मांड की धन-संपदा का स्वामी बनाया और उन्हें दिक्पाल तथा अपना परम मित्र होने का गौरव दिया था l

    उपमन्यु (Upamanyu)
    ऋषि धौम्य के शिष्य उपमन्यु की बाल-भक्ति शिव पुराण में अत्यंत प्रसिद्ध है. दूध की इच्छा रखने वाले बालक उपमन्यु को जब माता ने चावल के आटे का पानी दिया, तो उन्होंने सच्चे दूध के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या शुरू कर दी थी. उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें क्षीरसागर ही उपहार में दे दिया था l 

  • सावन में शिव कृपा पाने के लिए करें ये उपाय, दूर होंगी परेशानियां

    सावन में शिव कृपा पाने के लिए करें ये उपाय, दूर होंगी परेशानियां

    हिंदू धर्म में सावन महीने का विशेष महत्व है। सावन का महीना भगवान शिव को अतिप्रिय है। मान्यता है कि सावन में भगवान शंकर पृथ्वी लोक में विचरण करते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। सावन भर भगवान शिव की पूजा-अर्चना विशेष रूप से की जाती है। शिव कृपा पाने के लिए शिव भक्त सावन में कई तरह के उपाय भी करते हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, सावन में किए गए उपाय और पूजा-अर्चना से भगवान शिव की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इन उपायों को करने से भोलेनाथ के आशीर्वाद से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति और खुशहाली आती है। जानें सावन में शिव कृपा पाने के लिए हर दिन कौन-से उपाय करने चाहिए।

    सावन विशेष उपाय:
    घर में नकारात्मक ऊर्जा वास्तु दोष का कारण बनती है। जिसके कारण घर में तनाव, कलह और आर्थिक परेशानियां भी रहती हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सावन में प्रतिदिन बेलपत्र के ऊपर चंदन से 'ऊं नम: शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-शांति और समृद्धि आती है।

    मनवांछित फल की प्राप्ति के लिए सावन में शिव जी को क्या चढ़ाना चाहिए:
    भगवान शिव को 'भोलेनाथ' भी कहा जाता है। कहते हैं कि भगवान शिव भक्ति भाव से एक लोटा जल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। सावन माह भगवान शिव को प्रिय है, इसलिए इस माह में उनकी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सावन में प्रतिदिन शिवलिंग पर जल में काला तिल मिलाकर अभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

    धन लाभ की प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए:
    सावन महीने में शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक अत्यंत शुभ और लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि सावन भर शिवलिंग का दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को धन संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और धन लाभ के योग बनते हैं।

    करियर में तरक्की पाने के लिए सावन में क्या उपाय करें:
    भगवान शिव को चंदन प्रिय है। मान्यता है कि प्रतिदिन पूजा के समय शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाने के बाद उसी चंदन का तिलक माथे पर लगाएं। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और करियर में उन्नति के योग बनते हैं।

    मानसिक शांति के लिए:
    भगवान शिव की पूजा में पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' के जाप का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस मंत्र का नियमित जाप करने से मन शांत होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह आने वाले संकटों पर विजय दिलाता है और तरक्की प्राप्त होती है।

  • सावन सोमवार व्रत कथा: शिव कृपा से पूरी होती मनोकामनाएं

    सावन सोमवार व्रत कथा: शिव कृपा से पूरी होती मनोकामनाएं

    सावन (श्रावण मास) हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का महीना माना जाता है. यह पूरा महीना भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में शिव जी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. वहीं, सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. लाखों शिवभक्त (कांवड़िए) पवित्र नदियों से जल भरकर लाते हैं और मीलों पैदल यात्रा करके अपने स्थानीय या प्रमुख शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है. चलिए अब सुनते हैं सावन का व्रत कथा.

    सावन व्रत कथा
    प्राचीन काल में एक धनी साहूकार था, जिसकी कोई संतान नहीं थी. संतान प्राप्ति के लिए वह हर सोमवार पूरी श्रद्धा से शिव पूजा करता था. साहूकार की भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया, लेकिन यह शर्त रखी कि उस बालक की आयु केवल 16 वर्ष होगी.

    साहूकार के पुत्र का जन्म हुआ. जब वह 16 वर्ष का हुआ, तो उसके मामा उसे शिक्षा के बहाने काशी ले गए. रास्ते में एक नगर में उनका विवाह एक राजकुमारी से हुआ. विवाह के बाद, जब साहूकार का पुत्र 16 वर्ष का होने पर मृत अवस्था में गिरा, तो राजकुमारी का विलाप सुनकर शिव-पार्वती वहां से गुजर रहे थे. माता पार्वती के आग्रह पर शिवजी ने उस लड़के को जीवनदान दे दिया. वह सकुशल अपने घर लौट आया और माता-पिता को इस चमत्कार का पता चला. तब से भक्तों का सावन सोमवार व्रत और कथा में अटूट विश्वास बन गया.

    सावन पूजन विधि
    सुबह साफ कपड़े पहनकर शिव जी के सामने व्रत या पूजा का संकल्प लें. फिर, शिवलिंग पर पहले गंगाजल, फिर कच्चा दूध और अंत में दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं. शिवलिंग पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत चढ़ाएं. शिव जी को बेलपत्र, धतूरा और मदार के फूल अर्पित करें. धूप-दीपक जलाएं और कोई भी फल या मिठाई का भोग लगाएं. ऊं नमः शिवाय का जाप करते हुए आरती करें और अंत में क्षमा मांगें.

  • सावन 2026 का पहला सोमवार 3 अगस्त को, जानें पूजा विधि

    सावन 2026 का पहला सोमवार 3 अगस्त को, जानें पूजा विधि

     देवों के देव महादेव की भक्ति का पवित्र महीना सावन शुरू होने जा रहा है. हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व होता है. यह पूरा महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए समर्पित रहता है, लेकिन इसमें पड़ने वाले सोमवार व्रतों की महिमा सबसे खास मानी गई है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार का व्रत रखने और शिवलिंग पर जल अर्पित करने से शिव जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर करते हैं. आइए जानते हैं साल 2026 में सावन का पहला सोमवार कब है, इसकी सही तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व.

    कब है सावन का पहला सोमवार 2026?
    हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से हो रही है. सावन शुरू होने के ठीक चार दिन बाद पहला सावन सोमवार पड़ेगा. साल 2026 में सावन का पहला सोमवार व्रत 3 अगस्त 2026 को रखा जाएगा. इस दिन देशभर के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलेगी और श्रद्धालु जलाभिषेक के साथ भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करेंगे.

    ये रहेगा पूजा का मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 01 मिनट तक

    प्रातः सन्ध्या: सुबह 04 बजकर 40 मिनट से लेकर 05 बजकर 44 मिनट तक

    सावन 2026 सोमवार के व्रतों की पूरी लिस्ट (Sawan Somwar 2026 Dates)

    पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026

    दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026

    तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026

    चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

    पहले सावन सोमवार का महत्व
    धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और सावन के सोमवार व्रत भी रखे थे. इसी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था.  मान्यता है कि कुंवारी कन्याएं यदि सावन सोमवार का व्रत रखती हैं, तो उन्हें मनचाहा और योग्य जीवनसाथी मिलता है. साथ ही, इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं. सावन के पहले सोमवार पर भगवान शिव का अभिषेक करने से कुंडली के चंद्र दोष, मंगल दोष और कालसर्प दोष से भी राहत मिलती है.

    सावन के पहले सोमवार की सरल पूजा विधि
    – प्रातःकाल स्नान व संकल्प: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र (संभव हो तो हरे, पीले या सफेद रंग के) पहनें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.

    – घर के मंदिर में या पास के शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें.

    – शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल, फिर कच्चा दूध, गंगाजल, दही, शहद और घी (पंचामृत) अर्पित करें. अंत में दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं.

    – इसके बाद भगवान भोलेनाथ को उनका प्रिय बेलपत्र (3 पत्तियों वाला), धतूरा, भांग, शमी पत्र, चंदन, अक्षत (चावल), श्वेत फूल और भस्म अर्पित करें.

    – पूजा के दौरान ऊं नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर मानसिक जप करते रहें. सावन सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें.

    – अंत में आरती करें और शिव जी को फल, मेवे या शक्कर का भोग लगाएं.

  • सावन 2026 में चार सोमवार का संयोग, जानें व्रत और त्योहारों की पूरी सूची

    सावन 2026 में चार सोमवार का संयोग, जानें व्रत और त्योहारों की पूरी सूची

     धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सावन का महीना शिव भक्तों के लिए विशेष है. हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह इस बार 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगा. यह महीना पूरी तरह से भगवान शिव की उपासना को समर्पित है, जिसमें सोमवार के व्रत और त्योहारों के साथ-साथ इस साल अगस्त के महीने में खगोलीय घटनाओं का भी विशेष संयोग बन रहा है.

    सावन 2026 के मुख्य सोमवार
    सावन के दौरान पड़ने वाले सोमवार का व्रत रखना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इस वर्ष सावन के दौरान कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं.
        पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
        दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
        तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
        चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026

    सावन के प्रमुख त्योहार
    11 अगस्त (मंगलवार) – सावन शिवरात्रि: सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. इस दिन देशभर के शिवालयों में महादेव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है.

    15 अगस्त – हरियाली तीज: सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ होता है, जिसमें वे माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं.

    17 अगस्त – नाग पंचमी: सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है, जो इस बार सोमवार के शुभ संयोग में पड़ रही है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कुंडली के कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

    28 अक्टूबर – रक्षाबंधन: भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार इस वर्ष 28 अक्टूबर को मनाया जाएगा. यह दिन भाई-बहन के उस रिश्ते को समर्पित है जहाँ बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई अपनी बहनों की आजीवन रक्षा करने का संकल्प लेते हैं.

    अगस्त में ग्रहण का संयोग और रक्षाबंधन
    अगस्त 2026 का महीना खगोलीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है.

    12 अगस्त 2026 (सूर्य ग्रहण): इस दिन पूर्ण सूर्य ग्रहण की घटना होगी.  यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और कोई धार्मिक नियम लागू नहीं होंगे.

    28 अगस्त 2026 (रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण): इस साल रक्षाबंधन के दिन ही साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण पड़ रहा है. यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा.

    ग्रहण का प्रभाव: महत्वपूर्ण बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा. भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक चलेगा. चूंकि भारत में चंद्रमा क्षितिज से नीचे होगा, इसलिए यहाँ सूतक मान्य नहीं है. रक्षाबंधन के अनुष्ठानों, राखी बांधने की परंपरा या मंदिरों के कपाट खुलने पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा.

  • सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से, जानें पहले सोमवार की तारीख

    सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से, जानें पहले सोमवार की तारीख

    सावन की शुरुआत इस बार 30 जुलाई से होने जा रही है और समापन 28 अगस्त को होगा. हिंदू धर्म में सावन एक बेहद पवित्र, खूबसूरत और उमंग से भरा महीना है. यह हिंदू पंचांग का पांचवां महीना होता है, जो आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जुलाई-अगस्त के दौरान आता है.

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इस महीने में आने वाले सभी सोमवार (सावन सोमवार) का विशेष महत्व है. श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, और धतूरा चढ़ाते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माना जाता है कि इसी महीने में देवों और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था. मंथन से निकले विष को पीकर सृष्टि की रक्षा करने वाले भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था. विष की तपन को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया था, तभी से सावन में शिवजी का जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है. तो आइए जानते हैं कि सावन के पहला सोमवार कब पड़ेगा.

    सावन के पहले सोमवार की तिथि
    द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन का पहला सोमवार इस बार 3 अगस्त को है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन उत्तरभाद्रपद और रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा. इसके साथ ही सुकर्मा योग और धृति योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक कार्यों और शिव साधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है.

    ये रहेगा पूजा का मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 01 मिनट तक

    प्रातः सन्ध्या: सुबह 04 बजकर 40 मिनट से लेकर 05 बजकर 44 मिनट तक

    ऐसे करें सावन के पहले सोमवार पर पूजा

    – सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा घर में बैठकर व्रत का संकल्प लें.

    – फिर, घर के मंदिर में या पास के शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल चढ़ाएं. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें और अंत में दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं.

    – इसके बाद, शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं, इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत, सफेद फूल और मौली अर्पित करें.

    – अंत में धूप-दीप जलाकर ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर से आरती करें. महादेव को ऋतु फल या सफेद मिठाई का भोग लगाएं.

    कितने सावन सोमवार होंगे?
    इस साल उत्तर भारत के अनुसार सावन में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं.
    पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
    दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
    तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
    चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026

  • सावन 2026 में पड़ेंगे 4 सोमवार, जानें पूरी तारीख और महत्व

    सावन 2026 में पड़ेंगे 4 सोमवार, जानें पूरी तारीख और महत्व

    भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है. इस पूरे समय में भक्त भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं और सोमवार का व्रत रखते हैं. हर साल सावन शुरू होने से पहले लोगों के मन में एक सवाल जरूर उठता है कि इस बार सावन में कितने सोमवार पड़ेंगे 4 या 5? तो आइए जानते हैं.

    कब से शुरू होगा सावन 2026?
    पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई, गुरुवार से आरंभ होगा और 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा. इस दौरान शिव भक्त पूरे श्रद्धा भाव से पूजा, रुद्राभिषेक और व्रत करते हैं.

    इस साल उत्तर भारत के अनुसार सावन में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं.
    पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
    दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
    तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
    चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026

    हर साल क्यों होता है असमंजस की स्थिति?
    सावन की तिथियों को लेकर हर साल अलग-अलग जानकारी सामने आती है क्योंकि भारत में दो तरह के पंचांग प्रचलित हैं. उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों में अमांत पंचांग मान्य है. इसी वजह से सावन की शुरुआत और समाप्ति में अंतर आ जाता है, और सोमवार की संख्या भी बदल सकती है.

    सावन सोमवार का धार्मिक महत्व
    मान्यता है कि सावन के सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की इच्छाएं पूरी होती हैं. इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित की जाती है. कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं. अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना से व्रत रखते हैं, वहीं विवाहित लोग सुख-शांति और समृद्धि के लिए यह व्रत करते हैं.