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  • थलपति विजय ने परिसीमन पर खोला मोर्चा, विधानसभा में प्रस्ताव; 850 लोकसभा सीटों का किया विरोध

    थलपति विजय ने परिसीमन पर खोला मोर्चा, विधानसभा में प्रस्ताव; 850 लोकसभा सीटों का किया विरोध

    चेन्नई 

    परिसीमन बिल को लेकर थलपति विजय ने एक बार फिर विद्रोही तेवर दिखाया है। नीट और FCRA बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास करने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बुधवार को केंद्र की मोदी सरकार के परिसीमन प्लान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव को पेश करते हुए सीएम विजय ने साफ कर दिया कि वे दक्षिण भारत के अधिकारों की कीमत पर मोदी सरकार को लोकसभा सीटें नहीं बढ़ाने देंगे।

    तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार के सामने यह स्पष्ट मांग रखी है कि देश में लोकसभा सीटों की कुल संख्या को हमेशा के लिए 543 पर ही फ्रीज रखा जाए। प्रस्ताव में कहा गया है कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने राष्ट्रीय नीतियों का पालन करते हुए जनसंख्या नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू किया है। ऐसे में केवल आबादी के आधार पर सीटें बढ़ाने से संसद में तमिलनाडु और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व हमेशा के लिए कमजोर हो जाएगा।

    850 सीटें करने का विरोध
    तमिलनाडु सरकार के मुताबिक 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करना उन राज्यों के लिए नुकसानदायक बेहद होगा, जिन्होंने केंद्र के जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू किया है। प्रस्ताव में दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा को केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बताते हुए कहा गया, "यह केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि दक्षिणी राज्यों को परिसीमन से किसी भी तरह का नुकसान न हो।…”

    महिला आरक्षण पर क्या बोले CM विजय?
    प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने महिला आरक्षण को लेकर कहा कि इसे मौजूदा सीटों की संख्या के हिसाब से लागू किया जाए। उन्होंने कहा, “2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर ही दिया जाना चाहिए। महिला आरक्षण में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। तमिलनाडु में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने ज्यादा मतदान किया है। महिलाओं को आरक्षण देना कोई रियायत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का मामला है। 33 फीसदी महिला आरक्षण को बिना किसी और देरी के लागू किया जाना चाहिए।”

    केंद्र के सामने चार बड़ी मांगें
    प्रस्ताव के जरिए तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 पर ही स्थायी रूप से बरकरार रखी जाएं। दूसरी मांग यह है कि राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का बंटवारा मौजूदा प्रतिनिधित्व के अनुपात के आधार पर ही फ्रीज किया जाए। इसके अलावा आबादी और राज्यों के बीच मौजूदा 2.2:1 अनुपात को बनाए रखने की मांग है। वहीं 2029 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा 543 सीटों के आधार पर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने की भी मांग की गई है।

    परिसीमन बिल पर तकरार
    गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने बीते 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया था। इसका मकसद लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करना और 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करना था। हालांकि, विधेयक को जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत नहीं मिल सका और बिल पारित नहीं हो पाया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध किया है। विपक्ष की मांग है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर लागू किया जाए।

  • थलपति विजय की बढ़ीं मुश्किलें, सरकार बनने के दो महीने के भीतर नए विवाद ने मचाई हलचल

    थलपति विजय की बढ़ीं मुश्किलें, सरकार बनने के दो महीने के भीतर नए विवाद ने मचाई हलचल

    चेन्नई 

    तमिलनाडु में बीते मई महीने में चुनाव जीतकर थलपति विजय ने राजनीति मे धांसू एंट्री मारी थी। हालांकि अब 2 महीने के भीतर ही TVK सरकार मुश्किलों में घिर गई है। इसके पीछे की वजह है राज्य में हाल ही में हुई एक सनसनीखेज घटना। दरअसल तमिलनाडु के नागरकोइल से बीते दिनों एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई थी। यहां की एक जेल में एक दिव्यांग कैदी की हिरासत में मौत हो गई। मामला सामने आते ही राज्य में भारी सियासी बवाल मच गया है। इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने विजय की सरकार पर तीखा हमला बोला है।

    इससे पहले नागरकोइल के एथनकाडु के रहने वाले 35 वर्षीय दिव्यांग एस. सबरी वर्मन की संदिग्ध परिस्थितियों में न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सबरी वर्मन को 9 जुलाई को थेंथमराईकुलम पुलिस ने प्रतिबंधित गुटखा बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जहां उसकी दुकान से करीब 200 ग्राम प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद जब्त किए गए थे। शुरुआत में इस मौत को सामान्य दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आते ही हड़कंप मच गया। रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कोहनी, घुटनों, बांहों और पैरों समेत 19 अलग-अलग जगह पर चोटों के निशान पाए गए।

    जानकारी के मुताबिक 13 जुलाई की आधी रात को सबरी वर्मन और बैरक में बंद दूसरे साथी कैदियों के बीच मारपीट हुई थी। इसके बाद बीच-बचाव करने पहुंचे जेल स्टाफ ने भी कथित तौर पर दिव्यांग कैदी को बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी जान चली गई। बवाल बढ़ने के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर एक चीफ वार्डन सहित तीन जेल कर्मचारियों को सस्पेंड करके गिरफ्तार कर लिया है। वहीं जेल के 8 साथी कैदियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

    तमाशा देख रही विजय सरकार- DMK
    इस घटना के बाद तमिलनाडु में भारी राजनीतिक आक्रोश देखने को मिल रहा है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने बुधवार रात पीड़ित परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और पुलिस व प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। कनिमोझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में विजय को भी घेरा। उन्होंने लिखा, “हिरासत में हुई इस मौत के तीन दिन बाद भी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तरफ से कोई स्पष्टीकरण या बयान नहीं आया है। सरकार का कोई भी मंत्री पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा। इस सरकार ने प्रभावित परिवार को कोई राहत राशि देने की पहल तक नहीं की है। कुल मिलाकर, हमेशा की तरह टीवीके सरकार जिम्मेदारी लेने के बजाय सिर्फ तमाशा देख रही है।”

    सीबीआई जांच की मांग
    इधर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इसे एक भयावह घटना करार दिया। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिस तरह पिछली सरकार में कस्टडी में मौतें होती थी, वही अब मौजूदा प्रशासन के अंदर भी जारी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की। वहीं PMK नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की है।

  • DMK-AIADMK-BJP ने राज्यपाल से की शिकायत, थलपति विजय सरकार पर दबाव

    DMK-AIADMK-BJP ने राज्यपाल से की शिकायत, थलपति विजय सरकार पर दबाव

     नई दिल्ली
    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है। राज्य की तीन बड़ी पार्टियों (DMK, AIADMK, BJP) ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को तीनों पार्टियों के नेताओं ने राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर के साथ अलग-अलग समय पर मुलाकात की और सत्ताधारी पार्टी के ऊपर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोप लगाए। इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के ऊपर सरकारी मशीनरी के गलत उपयोग और राज्य कैबिनेट की मीटिंग में गैर अधिकृत लोगों के प्रवेश का भी आरोप लगाया।

    राज्यपाल से मिलकर आए डीएमके नेता आरएस भारती ने मीडिया के सामने अपने तर्कों को रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की विजय सरकार मशीनरी का गलत उपयोग कर रही है और विधायकों की खरीद फरोख्त करने की कोशिश कर रही है। इसके खिलाफ ऐक्शन होना ही चाहिए। उन्होंने कहा, "हमने गवर्नर से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात है और उन्हें तमिलनाडु में जारी हॉर्स ट्रेडिंग और सत्ता के गलत इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। दो लोग जॉन और विष्णु रेड्डी, जिनका सरकार से कोई संबंध नहीं है वह राज्य के मंत्रियों से ज़्यादा ताकतवर लगते हैं। वे सभी हाई-लेवल मीटिंग में शामिल होते हैं और अधिकारियों को आदेश देते हैं। तमिलनाडु में ऐसी खराब स्थिति पैदा हो गई है। हमने पहले भी एक याचिका दी थी, लेकिन गवर्नर शहर में नहीं थे, इसलिए आज हमने मुलाकात की और इन सभी मुद्दों पर जोर दिया।

    बता दें, यह पहली बार नहीं है जब राज्य की डीएमके की तरफ से मुख्यमंत्री विजय के ऊपर आरोप लगाए गए हों। एक हफ्ते पहले ही स्टालिन की पार्टी ने हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप में विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की थी।

    CM थलपति विजय पर लगा विधायकों को तोड़ने का आरोप
    एक हफ्ते पहले ही MDMK के नेता वाइको ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री विजय ने व्यक्तिगत रूप से भी विधायकों को तोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने DMK के दो विधायकों को विधानसभा से इस्तीफा देने और उनके साथ जाने के लिए मनाने की कोशिश की है। इस दावे को लेकर डीएमके ने सीधे तौर पर राज्यपाल से इसकी शिकायत की। इसके अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने विधायकों को भरोसा दिलाया कि अगर वह अपनी सीट छोड़ देते हैं, तो उन्हें उपचुनाव के दौरान TVK से टिकट और आर्थिक मदद दी जाएगी।

    भाजपा और AIADMK ने भी की राज्यपाल से मुलाकात
    DMK के अलावा AIADMK और भाजपा ने भी राज्यपाल से मुलाकात करके राज्य में चल रही गतिविधियों पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की। दोनों पार्टियों ने मुख्यमंत्री विजय के ऊपर हॉर्स ट्रेडिंग और राज्य कैबिनेट में निजी लोगों को शामिल करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने गवर्नर से संविधान के अनुच्छेद 167 का इस्तेमाल करते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगने और ज़रूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया। भारतीय जनता पार्टी ने भी लगभग समान आरोप लगाते हुए जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया और विजय के खिलाफ जांच की मांग की।

    राज्यपाल ने तीनों पार्टियों के नेताओं से मिलने की पुष्टि की
    शनिवार को हुई इन हाई प्रोफाइल बैठकों से राज्य की राजनीति भी गर्म रही। राज्यपाल विश्वानाथ आर्लेकर ने इन पार्टियों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि की। लोकभवन ने एक बयान जारी करके बताया कि डीएमके ने अपने ज्ञापन में पुलिस मशीनरी के गलत इस्तेमाल से कथित गैर-कानूनी गिरफ्तारी, कस्टडी में दबाव डालने और चुने हुए प्रतिनिधियों को पाला बदलने के लिए उकसाने की कोशिशों पर चिंता जताई गई। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि विधायकों को पाला बदलने के लिए लालच दिया गया और सरकारी कामकाज में निजी लोगों की भागीदारी पर सवाल उठाए।

    'जॉन और विष्णु अब मुख्यमंत्री के सलाहकार' TVK ने दिया जवाब
    तीन तरफ से आए इस हमले का जवाब थलपति विजय की पार्टी ने भी जोरदार तरीके से दिया। पार्टी की तरफ से कहा गया कि हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। जहां तक जॉन और विष्णु रेड्डी के कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने की बात है। उन दोनों को मुख्यमंत्री का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया है। इसलिए अब वह निजी व्यक्ति नहीं रह गए बल्कि सरकारी मशीनरी का हिस्सा हैं।

  • तमिलनाडु की राजनीति में हलचल: फ्लोर टेस्ट से पहले विजय की पार्टी को DMDK का झटका

    तमिलनाडु की राजनीति में हलचल: फ्लोर टेस्ट से पहले विजय की पार्टी को DMDK का झटका

    चेन्नई

    तमिलनाडु की थलापति विजय सरकार के लिए बुधवार का दिन बहुत बड़ा साबित होने वाला है. आज उनकी सरकार विधानसभा में बहुमत साबित करेगी. राज्य विधानसभा में 107 सीटें जीतने वाली विजय की पार्टी टीवीके कांग्रेस, वाम दलों और अन्य के समर्थन के साथ सरकार बनाने में सफल हुई है. थलापति विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्रे आर्लेकर के समक्ष 120 विधायकों से अधिक विधायकों के समर्थन की सूची पेश की थी तभी उनको सरकार बनाने का मौका मिला. इसके बाद राज्य की दूसरी अहम पार्टी एआईएडीएमके भी दो फाड़ हो गई है. उसके एक धड़े ने थलापति विजय का समर्थन करने का फैसला किया है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि थलापति सहज तरीके से बहुमत हासिल करे लेंगे। 

    डीएमके ने विश्वास मत का बहिष्कार किया
     तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके सरकार के विश्वास मत को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. विपक्षी दल DMK ने मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट करने का फैसला किया. DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने सदन में कहा कि उनकी पार्टी इस फ्लोर टेस्ट में हिस्सा नहीं लेगी और मतदान से पूरी तरह अलग रहेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने सत्ता पक्ष को वोट दिया था, अब उन्हें लगने लगा है कि उन्होंने गंभीर गलती की है. उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि हम DMK के सदस्य सदन से वॉकआउट कर रहे हैं और इस वोटिंग प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे. इस फैसले के बाद विधानसभा का राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है. विपक्ष के बहिष्कार से सरकार के विश्वास मत की वैधता और समर्थन संख्या को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक बदलावों का संकेत दे सकता है। 

     थलापति विजय सरकार का विरोध करेंगे AIADMK के सभी विधायक- पलानीस्वामी
    तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके सरकार के खिलाफ राजनीतिक टकराव तेज हो गया है. एआईएडीएमके प्रमुख ई पलानीस्वामी ने स्पष्ट कहा है कि उनकी पार्टी टीवीके के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और विश्वास मत दोनों का विरोध करेगी. पलानीस्वामी ने कहा कि AIADMK के 47 विधायक पार्टी लाइन पर रहकर एकजुट रूप से टीवीके सरकार के खिलाफ वोट करेंगे. उन्होंने विधानसभा में बढ़ते मतभेदों और राजनीतिक अराजकता पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री का एक गुट का समर्थन करना सही नहीं है. उन्होंने आगे सवाल उठाया कि जब सदन में असहमति साफ दिखाई दे रही है, तब सरकार द्वारा एक पक्ष का समर्थन करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है. पलानीस्वामी ने दोहराया कि हम इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं और AIADMK के सभी सदस्य इसके खिलाफ मतदान करेंगे. इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है, जिससे विधानसभा में निर्णायक वोटिंग का माहौल और भी दिलचस्प हो गया है। 

    थलापति विजय को किन-किन दलों ने दिया समर्थन
     तमिलनाडु विधानसभा में हुए ट्रस्ट वोट के दौरान कई प्रमुख दलों ने टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है. मतदान प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले मुस्लिम लीग ने खुलकर टीवीके के पक्ष में समर्थन की घोषणा की. पार्टी ने कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की गलत रणनीतियों को रोकने और राज्य में गवर्नर शासन की स्थिति बनने से बचाने के लिए यह कदम जरूरी है. इसके अलावा वीसीके ने भी टीवीके को समर्थन दिया और सरकार से महाराष्ट्र व कर्नाटक की तरह राज्य में अंधविश्वास विरोधी कानून लाने की मांग की. वहीं माकपा और कांग्रेस ने भी विधानसभा में टीवीके सरकार के पक्ष में वोट देने की घोषणा की. इन दलों के समर्थन से टीवीके को राजनीतिक मजबूती मिलती दिख रही है और राज्य की सत्ता समीकरणों में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। 

  • विजय के शपथ समारोह में अटपटे हालात, तमिलनाडु की राजनीति में नए मोड़

    विजय के शपथ समारोह में अटपटे हालात, तमिलनाडु की राजनीति में नए मोड़

    चेन्नई

     तमिनलाडु की सियासत में सस्पेंस ही सस्पेंस है. ऐसा लग रहा जैसे सांप-सीढ़ी का खेल चल रहा हो. कभी थलापति विजय की टीवीके की सरकार बनती दिखती है तो कभी डीएमके-एआईडीएमके के बीच गठबंधन की हवा चलती है. कभी सरकार बनने की बात आती हो तो कभी फिर इंतजार बढ़ जाता है. थलापति विजय कभी सरकार बनाने के लिए बहुमत होने की बात करते हैं तो कभी उनके नंबर कम पड़ जाते हैं. पहले खबर आई कि थलापति विजय आज सरकार बनाएंगे और शपथग्रहण होगा. मगर अब तमिलनाडु में फिर ट्विस्ट आ गया है. ऐसा लग रहा है कि थलापति विजय के शपथग्रहण पर फिर से ग्रहण लग गया है. कारण कि आधिकारिक तौर पर अब तक गवर्नर ने सरकार बनाने के लिए थलापति विजय को न्योता नहीं दिया है। 

    जी हां, टीवीके के संस्थापक एक्टर विजय के 118 विधायकों के बहुमत के आंकड़े को पार करने और सरकार बनाने का दावा पेश करने के कुछ घंटे बाद ही शुक्रवार देर रात उनकी बहुमत की स्थिति को लेकर नया संशय पैदा हो गया. आईयूएमएल ने थलापति विजय को समर्थन देने से इनकार कर दिया. वहीं वीसीके ने अपना फैसला लंबित रखा है और समर्थन के बदले कड़ी शर्तें रखीं. इससे तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति अस्थिर हो गई और बहुमत के आंकड़े फिर से अनिश्चित हो गए। 

    116, 117, 118: विजय अब भी बहुमत से दूर
    इन सबके बीच सरकार बनाने को लेकर थलापति विजय की टीवीके के लिए असमंजस और अनिश्चितता और बढ़ गई है. कारम कि थलापति विजय अब भी बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं. राज्यपाल से तीसरी बार मुलाकात के बाद भी टीवीके विधानसभा में बहुमत से कुछ कदम दूर है. यही कारण है कि राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए न्योता नहीं दिया है. थलापति विजय की टीवीके के पास 108 सीटें हैं. असल में देखें तो 107 क्योंकि विजय ने दो सीटों से जीत दर्ज की है. ऐसे में एक सीट उन्हें छोड़नी होगी. तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। 

    कैसे थलापति विजय को लगा झटका
    थलापति विजय के दो सीटों से जीतने के बाद प्रभावी बहुमत घटकर 117 रह गया. डीएमके गठबंधन से अलग हुई कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ विजय को समर्थन दिया है. सीपीआई और सीपीआई(एम) के दो-दो विधायकों ने भी बिना शर्त बाहर से समर्थन देने का ऐलान किया है. लेकिन आईयूएमएल ने डीएमके गठबंधन के साथ रहने का फैसला किया, जिससे विजय की पक्की संख्या घट गई और बहुमत के आंकड़े कड़े हो गए. ऐसे में विजय के बहुमत का आंकड़ा कभी 116 पर अटक जाता है तो कभी 118 पूरा हो जाता है. मगर आईयूएमएल के पीछे हटने से टीवीके अभी 116 पर है और उसे अब भी दो सीटों की जरूरत है। 

    आईयूएमएल ने बिगाड़ा विजय का खेल
    इधर डीएमके की पुरानी सहयोगी आईयूएमएल के पास दो विधायक हैं. उसने कहा कि वह राज्यपाल आरएन रवि की ओर से आमंत्रित किसी भी पार्टी को ‘स्थिर और धर्मनिरपेक्ष सरकार’ बनाने के लिए समर्थन देगी और भाजपा को ‘पीछे के रास्ते’ से राज्य में घुसने से रोकेगी. चूंकि न तो डीएमके और न ही एआईएडीएमके के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है. इसलिए माना जा रहा था कि राज्यपाल विजय को सरकार बनाने का न्योता देंगे. टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 

    हालांकि, बाद में खबर आई कि डीएमके की एक और सहयोगी वीसीके ने अपने विधायकों के साथ थलापति विजय को समर्थन देने का फैसला किया है. एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद पार्टी सूत्रों ने बताया कि वीसीके ने समर्थन देने पर सहमति जताई है और शनिवार सुबह टीवीके को समर्थन पत्र सौंपेगी. पार्टी प्रवक्ता ने भी यूएनआई से इस कदम की पुष्टि की। 

    शपथग्रहण पर ग्रहण
    वहीं, वाम दलों के समर्थन और वीसीके के संभावित समर्थन के साथ थलापति विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की. इससेक पहले वो दो बार राज्यपाल से मिल चुके थे और दोनों बार निराशा हाथ लगी थी. अबकी बार थलापति विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और समर्थन पत्र सौंपे. इससे राज्यभर में टीवीके कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल बन गया. खबरें यह भी थीं कि विजय का शपथ ग्रहण शनिवार को हो सकता है। 

    रात में अचानक हुआ खेल
    हालांकि, रात में हालात अचानक बदल गए. थलापति विजय ने सीपीआई और सीपीआई(एम) नेताओं से मिलकर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और आईयूएमएल और वीसीके नेताओं से मिलने की योजना बनाई, लेकिन दोनों दलों ने अपने रुख पर पुनर्विचार के संकेत दिए. इससे थलापति विजय को तगड़ा झटका लगा. अब सबसे बड़ा यूटर्न है कि आईयूएमएल ने स्पष्ट रूप से टीवीके को समर्थन देने से इनकार कर दिया है. उसने कहा कि वह डीएमके गठबंधन के साथ ही रहेगी. आईयूएमएल ने कहा कि हम पहले भी डीएमके के साथ थे, अब भी हैं और आगे भी रहेंगे। 

    थलापति विजय को एक बार फिर झटका लगा है.

    वीसीके ने भी लिया यूटर्न
    वहीं, वीसीके ने कहा कि बातचीत जारी है और विजय को समर्थन देने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. खबरें यह भी थीं कि पार्टी समर्थन के बदले कड़ी शर्तें रख रही है. यह बात तब और मजबूत हो गई जब वीसीके के उप महासचिव और नवनिर्वाचित विधायक वन्नियारासु ने सोशल मीडिया पर सत्ता और शासन में हिस्सेदारी की मांग की. इस अनिश्चितता के बीच TVK के सदस्य जो विजय के शपथ ग्रहण की उम्मीद में बड़ी संख्या में जुटे थे, उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया. अब आगे जब तक बहुमत वाला नंबर नहीं दिखा देते एक्टर विजय, तब तक टीवीके सरकार का सपना… सपना ही रहेगा। 

  • विजय का पुराना वीडियो फिर चर्चा में: चर्च यात्रा और राजनीति से कनेक्शन

    विजय का पुराना वीडियो फिर चर्चा में: चर्च यात्रा और राजनीति से कनेक्शन

    थलपति विजय की पार्टी TVK ने तमिलनाडु में धमाकेदार जीत हासिल की है. उनकी ऐतिहासिक जीत की किसी ने कल्पना नहीं की थी. राज्य की विरोधी पार्टियां विजय के समर्थन में आए जन सैलाब को देखकर हैरान हैं. विजय के पेरेंट्स बेटे की जीत को लेकर खुश हैं. जीत के जश्न के बीच विजय का पुराना वीडियो सामने आया है, जिसमें वो घुटनों के बल चलकर चर्च जा रहे हैं.

    विजय को तमिलनाडु में मिली जीत
    ये वीडियो तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले का है. एक्टर तिरुचिरापल्ली (Trichy) के सेंट एंथनी चर्च में नंगे पैर घुटनों के बल चलकर प्रार्थना करते हुए देखे गए थे. ये मोमेंट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ था. किसी ने विजय की आस्था को सराहा था. तो कुछ लोगों ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया था. विजय अपनी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के चुनावी मैदान में सफलता की दुआ करने गए थे. हालांकि अब इस वीडियो देखकर लोगों का कहना है एक्टर की दुआ रंग लाई है.

    विजय ने चर्च ही नहीं, बल्कि मंदिरों में भी माथा टेका था. वो शिरडी साई बाबा के दरबार भी पहुंचे थे. विजय ने अपनी इन धार्मिक यात्राओं के जरिए बताया था कि वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. विजय ने मस्जिद का भी दौरा किया था.

    मालूम हो, विजय के पिता क्रिश्चियन और मां हिंदू हैं. वो जन्म से रोमन कैथोलिक हैं. लेकिन पब्लिक के बीच उनकी छवि सेक्युलर शख्सियत की बनी है. वो हर धर्म को मानते हैं. विजय का असली नाम जोसफ विजय चंद्रशेखर है. बेटे विजय के चुनाव जीतने के बाद उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने तिरुथानी मुरुगन मंदिर में जाकर विशेष पूजा अर्चना की थी. खुशी के मां के आंसू झलके थे. एक्टर के पिता को भरोसा है कि उनका बेटा राज्य का मुख्यमंत्री बनेगा.

    वैसे विजय को राजनीति में सफल शुरुआत देने के पीछे उनके पिता का अहम योगदान रहा है. फिल्मों में भी पिता की बदौलत ही विजय का करियर चमका. एक्टर ने पिता की फिल्म से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपना करियर शुरू किया था. वो अपनी इस सफल जीत का क्रेडिट पेरेंट्स के आशीर्वाद और राज्य की जनता को देते हैं.