LASIK सर्जरी कराने वाले रेलकर्मियों के लिए सख्त नियम, वैकल्पिक नौकरी का लाभ हो सकता है बंद

अंबाला.

रेलवे में अपनी मेडिकल श्रेणी और सेवा से जुड़े विशेष लाभ हासिल करने के लिए अब कर्मचारी अपनी मर्जी से आंखों की लेसिक सर्जरी नहीं करवा सकेंगे।

रेलवे बोर्ड ने ऐसे कर्मचारियों के संबंध में सख्त फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी रेलवे की मेडिकल अथारिटी की सलाह के बिना स्वेच्छा से लेसिक सर्जरी करवाता है और इसके बाद अपनी मौजूदा मेडिकल श्रेणी में अनफिट घोषित हो जाता है तो उसे चिकित्सकीय आधार पर अयोग्य होने के कारण मिलने वाले वैकल्पिक रोजगार के लाभ नहीं दिए जाएंगे। ऐसे कर्मचारी को अपने अनुरोध पर स्थानांतरित कर्मचारी माना जाएगा और उसी के अनुरूप उसके मामले का निपटारा होगा। इसी को लेकर रेलवे बोर्ड ने पत्र जारी किया है। आदेश का उद्देश्य स्वेच्छा से कराई गई सर्जरी के बाद मेडिकल श्रेणी में बदलाव का लाभ लेकर वैकल्पिक पद और अन्य सेवा सुविधाएं हासिल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।

मेडिकल अथॉरिटी की सलाह के बिना सर्जरी पर आपत्ति
रेलवे बोर्ड के संज्ञान में ऐसे मामले आए थे, जिनमें कर्मचारी रेलवे की अधिकृत मेडिकल अथारिटी से परामर्श लिए बिना अपनी इच्छा से लेसिक सर्जरी करवा रहे थे। इसके बाद यदि वे अपनी मौजूदा मेडिकल श्रेणी के लिए अनुपयुक्त पाए जाते हैं तो चिकित्सकीय रूप से अयोग्य कर्मचारियों को मिलने वाले वैकल्पिक रोजगार और अन्य सेवा लाभों की मांग करते हैं। रेलवे बोर्ड ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए माना है कि ट्रेन संचालन से जुड़े पदों पर कर्मचारियों की आंखों की दृष्टि और निर्धारित मेडिकल मानकों का सीधा संबंध रेल परिचालन की सुरक्षा से है। ऐसे में व्यक्तिगत निर्णय के आधार पर कराई गई सर्जरी के बाद उत्पन्न स्थिति को सामान्य मेडिकल डिकैटेगराइजेशन के मामलों के समान नहीं माना जा सकता।

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