उत्तर प्रदेशराज्य

यूपी के 12 जिलों की बदलेगी तस्वीर, गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बनेंगे लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब

 लखनऊ
 उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क अब केवल दो शहरों के बीच दूरी घटाने का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की समग्र आर्थिक गतिविधियों को पंख देने वाला मजबूत आधार बन चुका है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजरने वाला गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ते हुए स्थानीय व्यापार, परिवहन और पर्यटन को अभूतपूर्व गति दे रहा है।

मेरठ से प्रयागराज तक लगभग 36,230 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 594 किलोमीटर लंबे इस 6-लेन (8-लेन तक विस्तार योग्य) एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे ने ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और टूर-ट्रैवल ऑपरेटरों के परिचालन व्यय को घटाकर उनके कारोबार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।

माल ढुलाई में समय और ईंधन की भारी बचत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकार्पण के बाद से ही गंगा एक्सप्रेसवे राज्य में लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई का मुख्य केंद्र बन चुका है। एक्सप्रेसवे के सुचारु और जाम-मुक्त यातायात से ट्रकों और भारी वाहनों के समय तथा ईंधन खर्च में भारी कमी आई है।

लागत में गिरावट: सहारनपुर के उपकार ट्रांसपोर्ट के संचालक अमित शर्मा के अनुसार, पहले सहारनपुर से प्रयागराज माल भेजने में 20 से 22 घंटे लगते थे, जो अब घटकर मात्र 11 से 12 घंटे रह गए हैं। टोल देने के बावजूद ईंधन की बचत और मेंटेनेंस घटने से परिचालन लागत में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

व्यापारियों का भरोसा: मेरठ के गुडलक ट्रांसपोर्ट के शिव कुमार यादव बताते हैं कि समय पर डिलीवरी होने से व्यापारियों का भरोसा मजबूत हुआ है। इससे कृषि, औद्योगिक और दैनिक उपभोग की वस्तुओं (FMCG) की आवाजाही के लिए नए व्यावसायिक अवसर बन रहे हैं।

टूर एंड ट्रैवल कारोबार में आई बड़ी छलांग
एक्सप्रेसवे के चालू होने से पर्यटन और ट्रैवल एजेंसियों के कारोबार का दायरा भी काफी बढ़ गया है।

सफर हुआ सुगम: मेरठ से ज्योति टूर एंड ट्रैवल के मूलक सिंह और सहारनपुर के अमित गुप्ता बताते हैं कि पहले मेरठ से प्रयागराज कार या बस से जाने में 10-12 घंटे लगते थे, जो अब महज 6 घंटे का रह गया है।

धार्मिक व पारिवारिक पर्यटन को बढ़ावा: कम समय में लंबी दूरी तय होने से प्रयागराज, काशी और आसपास के धार्मिक व पर्यटन स्थलों के लिए ग्रुप टूर, टैक्सी और कैब बुकिंग में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

12 जिलों का बदला भाग्य, किसानों को भी सीधा लाभ
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को एक मजबूत आर्थिक सूत्र में पिरोता है।

कृषि क्षेत्र को संजीवनी: फल, सब्जियां, डेयरी और जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों को कम समय में बड़ी मंडियों और प्रोसेसिंग यूनिट्स तक पहुंचाना आसान हो गया है। इससे किसानों को बर्बादी से मुक्ति और उत्पादों के बेहतर दाम मिल रहे हैं।

इमरजेंसी एयरस्ट्रिप: एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन हवाई पट्टी भी बनाई गई है, जो सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

2,635 हेक्टेयर में लॉजिस्टिक्स व मैन्युफैक्चरिंग हब की तैयारी
योगी सरकार के एक्सप्रेसवे-आधारित विकास मॉडल के तहत गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर करीब 2635 हेक्टेयर क्षेत्र में एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है।

इसके अंतर्गत एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, फ़ूड प्रोसेसिंग पार्क और ऑटोमोटिव हब स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।

 

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