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नोएल टाटा बनाम चंद्रशेखरन? दोबारा नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट में मतभेद

मुंबई 

फिर से एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति और नोएल टाटा के विरोध के बाद टाटा ट्रस्‍ट और टाटा संस के बीच विवाद साफ तौर पर दिखने लगा है. टाटा ग्रुप के बाकी सदस्‍यों ने एन चंद्रशेखरन को दोबारा से नियुक्‍त किया है, जबकि नोएल टाटा ने उनके विपक्ष में वोटिंग की है यानी कि 4:1 की वोटिंग से एन चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाने की मंजूरी मिली है। 

इस बीच, ब्‍लूमबर्ग ने बताया है कि टाटा ट्रस्‍ट और  टाटा संस के बीच कानूनी लड़ाई हो सकती है. नोएल टाटा कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं. दोनों खेमा वकीलों को जुटाने में जुटा हुआ है। 

टाटा ट्रस्‍ट का कहना है कि एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव कानूनी रूप से अमान्य है. टाटा ट्रस्‍ट का तर्क है कि इसे ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशकों का अनिवार्य समर्थन नहीं मिला है। 

टाटा ट्रस्‍ट का क्‍या है तर्क?
टाटा ट्रस्‍ट ने आगे कहा कि 4:1 का कुल मतदान गलत था, क्योंकि इसके दो नामांकित व्यक्तियों में से एक ने प्रस्ताव का विरोध किया था, जिससे कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत एक अलग शर्त पूरी नहीं हुई थी. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस का लगभग 66 फीसदी मालिकाना हक है और इसके बोर्ड में दो चुने हुए डायरेक्‍टर हैं. ट्रस्ट्स के अनुसार, दोनों के बीच बहुमत का मतलब है कि दोनों को प्रस्ताव का समर्थन करना होगा। 

ट्रस्ट ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि मतदान से बोर्ड में गतिरोध पैदा हो गया था और कहा कि चेयरमैन की वोटिंग इस आवश्यकता को रद्द नहीं कर सकता है. ट्रस्‍ट ने कहा कि चंद्रशेखर के दोबारा चेयमैन बनने के प्रस्‍ताव को शुरू से ही रद्द किया गया है। 

टाटा ट्रस्‍ट का यह बयान टाटा संस बोर्ड की ओर से 17 सितंबर को 4:1 की वोटिंग से चंद्रशेखरन को ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के चेयरमन के तौर पर चुने जाने के बाद आया है. टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष और टाटा संस के डायरेक्‍टर नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और इसकी वैधता को चुनौती दी। 

टाटा ट्रस्‍ट ने बताया क्‍यों गलत है ये वोटिंग? 
इस विवाद के केंद्र में टाटा संस के नियमों से संबंधित कंपनी के कॉन्‍ट्रैक्‍ट हैं, जिनमें कंपनी को संचालित करने वाले नियम शामिल हैं. टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, बोर्ड के फैसले केवल कुल वोटों की गिनती के आधार पर तय नहीं किए जा सकते. इसके लिए ट्रस्ट्स द्वारा चुने हुए डायरेक्‍टर के बहुमत का पॉजिटिव रिस्‍पॉन्‍स भी जरूरी है। 

बयान में कहा गया है कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बोर्ड के किसी भी फैसले को केवल डायरेक्‍टर की संख्या पर छोड़ने की अनुमति नहीं है. इसमें तर्क दिया गया कि चूंकि ट्रस्ट द्वारा नामित दो व्यक्तियों में से एक ने चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति का विरोध किया, इसलिए प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जा सकती है। 

ट्रस्ट ने तर्क दिया कि यह शर्त बोर्ड के पूरी वोटिंग से अलग थी. इसलिए 4:1 के रिजल्‍ट से प्रस्ताव वैध नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि कोई शर्त या तो पूरी होती है, या नहीं. इस मामले में शर्त पूरी नहीं हुई। 

'कोई गतिरोध नहीं था'
टाटा ट्रस्ट्स ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि प्रस्ताव के प्रति उसके विरोध ने एक गतिरोध पैदा कर दिया है जो कंपनी को कमजोर कर सकता है. बयान में आगे कहा गया कि फाइनल वोटिंग चेयरमैन को तब दी जाती है, जब बोर्ड में सदस्‍यों की संख्‍या बराबर हो. ट्रस्टों ने तर्क दिया कि इस मामले में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि समग्र बोर्ड स्तर पर कोई बराबरी नहीं थी. इन सभी तर्कों के साथ टाटा ट्रस्‍ट का कहना है कि चंद्रशेखरन की नियुक्‍ति को सही नहीं ठहराया जा सकता है। 

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