
लुधियाना
त्योहारों की रौनक के बीच अमृतसर के लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगने जा रहा है। एक नवंबर से शहर में दूध के दामों में उछाल आने वाला है। हैबोवाल और ताजपुर स्थित डेयरी परिसरों के संचालकों ने आपसी सहमति के बाद रेट में बढ़ोतरी का खाका तैयार कर लिया है। इस नए निर्णय के प्रभावी होते ही आम उपभोक्ताओं को दूध की खरीदारी पर प्रति लीटर पांच रुपये का खर्च पड़ने वाला है।
जिला डेयरी एसोसिएशन ने की औपचारिक पुष्टि
जिला डेयरी एसोसिएशन के प्रमुख कुलदीप सिंह लहोरिया और उनके साथी प्रतिनिधियों ने इस रेट बढ़ाने की औपचारिक पुष्टि की है। उनके अनुसार लुधियाना के तमाम दूध बिक्री केंद्रों पर पांच रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध का रेट बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही क्रीम का व्यापार करने वाले डेयरी संचालकों के लिए फैट की दरों में तीस पैसे का इजाफा किया गया है।
एसोसिएशन की कारोबारियों से अपील
एसोसिएशन की ओर से सभी कारोबारियों से आग्रह किया गया है कि वे परिस्थितियों को समझते हुए इन नए दामों को तत्काल प्रभाव से अपनाएं। दूध के दामों में बढ़ोतरी के पीछे मवेशियों के आहार की बढ़ती कीमतों को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि बीते दिनों में सूखा चारा, खल-दाना और हरे चारे के बाजार भाव आसमान छूने लगे हैं। उत्पादन लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी के चलते डेयरी संचालकों के सामने अपने परिवारों का लालन-पालन करना भी दुभर हो गया है।
एसोसिएशन के नुमाइंदों ने साफ कहा कि मौजूदा दौर में यदि कीमतें नहीं बढ़ाई गई तो यह व्यवसाय पूरी तरह टूट जाएगा। घाटे और तंगी के कारण कई लोग अपना पुश्तैनी काम समेटने की कगार पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस आर्थिक संकट की अनदेखी कर पुराने रेट पर काम करने वाले व्यवसायियों को जल्द ही अपनी डेयरियां बेचने की नौबत आ जाएगी।
पशुओं का चारा महंगा होना मुख्य वजह
कीमतों में इस वृद्धि का मुख्य कारण पशुओं की फीड में आई भारी महंगाई को बताया गया है। डेयरी संचालकों के अनुसार पिछले कुछ समय में तूड़ी, दाना और हरे चारे (पठ्ठे) के रेट बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। हर चीज महंगी होने के कारण डेयरी मालिकों के लिए अपने घर का गुजारा चलाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
रेट नहीं बढ़ाए तो बिक जाएंगी डेयरियां
डेयरी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि महंगाई के इस दौर में दूध का महंगा होना बहुत जरूरी है। घाटे और आर्थिक तंगी के चलते कई डेयरी मालिक अपना कारोबार बेचने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई भी इस महंगाई को नहीं समझेगा और रेट नहीं बढ़ाएगा उसे बहुत जल्द अपनी डेयरी बेचनी पड़ जाएगी।
क्या कहते हैं डेयरी संचालक?
डेयरी संचालक राकेश कुमार ने बताया कि डेयरी उद्योग में महंगाई चरम सीमा में है। उन्होंने कहा 40 साल में पहली बार है कि रेट इतने आसमान छू रहे हैं। गाय भैंस के दाम पहले ही बढ़ गए हैं। वहीं, हरा चारा 140 रुपये प्रति चालीस किलो, जो पहले 80 से लेकर 90 रुपये था। वहीं, तूड़ी जो पहले 250 से 300 रुपये के बीच थी अब 400 रुपये प्रति मन (चालीस किलो) तक हो चुकी है। इसी तरह खल दाना और अन्य सामान भी महंगे हो रहे हैं। वहीं, बढ़ती महंगाई के कारण कई डेयरियां पहले ही बंद हो चुकी हैं और अगर अब बढ़ रहे दामों के हिसाब से काम नहीं किया गया तो डेयरी उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगा।



