Author: Lalaji 24×7

  • IND vs NZ: सीरीज शुरू होने से पहले कीवी टीम को बड़ा झटका, दो स्टार खिलाड़ी चोट के चलते बाहर

    IND vs NZ: सीरीज शुरू होने से पहले कीवी टीम को बड़ा झटका, दो स्टार खिलाड़ी चोट के चलते बाहर

    नई दिल्ली
    भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज 4 नंवबर से शुरू हो रही है. सीरीज का पहला मुकाबला ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेला जाना है. अब वनडे सीरीज से पहले न्यूजीलैंड को दोहरा झटका लगा है. मार्क चैपमैन और रचिन रवींद्र चोट से पूरी तरह फिट नहीं हो पाए हैं, जिसके चलते दोनों खिलाड़ी सीरीज में नहीं खेलेंगे.

    मार्क चैपमैन यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग के दौरान बाईं हैमस्ट्रिंग में चोटिल हुए थे. हालिया MRI के बाद उन्हें पूरी फिटनेस हासिल करने के लिए करीब दो और सप्ताह रिहैबिलिटेशन की जरूरत बताई गई है. वहीं रचिन रवींद्र प्रमोशनल शूट के दौरान दाहिना कंधा चोटिल करा बैठे थे. न्यूजीलैंड क्रिकेट (NZC) के मुताबिक रवींद्र फिलहाल व्हाइट बॉल क्रिकेट में पूरी क्षमता के साथ फील्डिंग करने के लिए तैयार नहीं हैं.

    मुख्य कोच रॉब वॉल्टर ने दोनों खिलाड़ियों के बाहर होने पर निराशा जताई. उन्होंने कहा कि आगामी टेस्ट सीरीज को देखते हुए टीम प्रबंधन किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता.

    इन खिलाड़ियों की हुई एंट्री
    विकेटकीपर बल्लेबाज टिम सीफर्ट को पहले तीन वनडे के लिए कीवी टीम में शामिल किया गया है. सीरीज के आखिरी दो मैचों के लिए सीफर्ट पहले ही टीम में चुने जा चुके थे. वहीं बाएं हाथ के बल्लेबाज हेनरी निकोल्स भी शुरुआती तीन मुकाबलों के लिए चुने गए हैं.

    ऑलराउंडर डीन फॉक्सक्रॉफ्ट आखिरी दो वनडे के लिए टीम से जुड़ेंगे. तेज गेंदबाज मैथ्यू फिशर को भी पहले तीन मुकाबलों के लिए टीम में शामिल किया गया है. फिशर इससे पहले आखिरी दो मैचों के लिए ही टीम में चुने गए थे. इस बीच, क्वाड्रिसेप की चोट से उबर रहे मैट हेनरी टीम के साथ जुड़ेंगे. उनकी फिटनेस का आकलन करने के बाद ही उनके खेलने पर फैसला लिया जाएगा.

    भारत के खिलाफ पहले तीन वनडे के लिए न्यूजीलैंड की टीम: मिचेल सेंटनर (कप्तान), माइकल ब्रेसवेल, डेवोन कॉन्वे, जैकब डफी, मैथ्यू फिशर, हेनरी, काइल जेमिसन, टॉम लैथम (विकेटकीपर), डेरिल मिचेल, हेनरी निकोल्स, ग्लेन फिलिप्स, टिम सीफर्ट, नाथन स्मिथ, विल यंग और ​​ब्लेयर टिकनर.

    भारत के खिलाफ आखिरी दो वनडे के लिए न्यूजीलैंड की टीम: मिचेल सेंटनर (कप्तान), फिन एलन, माइकल ब्रेसवेल, क्रिस्टियन क्लार्क, जैकब डफी, मैथ्यू फिशर, डीन फॉक्सक्रॉफ्ट, लॉकी फर्ग्यूसन, मिचेल हे (विकेटकीपर), निक केली, टिम सीफर्ट (विकेटकीपर), ब्लेयर टिकनर और विल यंग.

    भारत vs न्यूजीलैंड (वनडे सीरीज का शेड्यूल)
        पहला वनडे: 4 नवंबर, ऑकलैंड, सुबह 7:30 बजे
        दूसरा वनडे: 7 नवंबर, वेलिंगटन, सुबह 7:30 बजे
        तीसरा वनडे: 10 नवंबर, हैमिल्टन, सुबह 7:30 बजे
        चौथा वनडे: 13 नवंबर, माउंट माउंगानुई, सुबह 7:30 बजे
        पांचवां वनडे: 15 नवंबर, माउंट माउंगानुई, सुबह 7:30 बजे

     

  • पंजाब सरकार ने बदली स्वास्थ्य विभाग की कमान, डॉ. सिमी मल्होत्रा को भी मिली नई जिम्मेदारी

    पंजाब सरकार ने बदली स्वास्थ्य विभाग की कमान, डॉ. सिमी मल्होत्रा को भी मिली नई जिम्मेदारी

    चंडीगढ़
    पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए दो वरिष्ठ अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। सरकार ने डॉ. अनिल कुमार गोयल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निदेशक का अस्थायी कार्यभार सौंपा है।

    वहीं, डॉ. सिमी मल्होत्रा को निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (एसबी) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से एक नवंबर को जारी आदेश के अनुसार, डॉ. अनिल कुमार गोयल वर्तमान में अतिरिक्त निदेशक स्वास्थ्य के पद पर कार्यरत हैं।

    अगले हुकमों तक दी जिम्मेदारी
    उन्हें अगले आदेश तक निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण का अस्थायी चार्ज दिया गया है। इसी तरह डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सिमी मल्होत्रा को निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (एसबी) का अस्थायी कार्यभार सौंपा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दोनों अधिकारियों को यह जिम्मेदारी बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय लाभ के दी गई है।

     

  • मीरजापुर की बघेड़ा खुर्द बनी प्रदेश की पहली मॉडल पंचायत, अब पूरे यूपी में लागू होगी योजना

    मीरजापुर की बघेड़ा खुर्द बनी प्रदेश की पहली मॉडल पंचायत, अब पूरे यूपी में लागू होगी योजना

    लखनऊ
    गांव में विकास के काम अब वहां के लोगों की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर कराए जाएंगे। इसके लिए मीरजापुर के छानबे ब्लॉक की बघेड़ा खुर्द ग्राम पंचायत में प्रदेश का पहला विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) तैयार किया गया है। इस योजना को आगे चलकर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में लागू किया जाएगा।

    केंद्र सरकार से प्रशिक्षण प्राप्त मास्टर ट्रेनरों ने ट्रांसफार्म रूरल इंडिया (टीआरआई) के सहयोग से गांव में कार्यशाला आयोजित की। इसमें झारखंड के निहार महाराणा और मध्य प्रदेश के हरिविलास द्विवेदी ने ग्रामीणों को साथ लेकर गांव का भ्रमण किया।

    उन्होंने गांव के ऊंचे हिस्से से निचले हिस्से तक जाकर पानी के बहाव, जमीन और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति समझाई। योजना बनाने के लिए पंचायत को छह हिस्सों में बांटा गया। हर हिस्से में बैठक कर ग्रामीणों से पूछा गया कि उनके क्षेत्र में किन सुविधाओं की जरूरत है और कौन सी समस्याएं हैं।

    ग्रामीणों ने स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल, सड़क और रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग रखी। इसमें सड़क और नाली जैसे निर्माण कार्यों के साथ तालाब, पानी और जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि गांव में रोजगार और आजीविका के साधन बढ़ें। इसके लिए वीपीआरपी, वीजीपीपी, वीडीपी और जीपीडीपी की योजनाओं को एक साथ जोड़कर काम किया जाएगा।

    ग्राम्य विकास विभाग पोर्टल के माध्यम से सभी पंचायतों की योजनाएं तैयार कराएगा। इसके लिए प्रदेश से लेकर ब्लाक और पंचायत स्तर तक के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • बिहार में मुफ्त बिजली योजना को लेकर बड़ा बयान, इनकम टैक्स देने वालों से CM की खास अपील

    बिहार में मुफ्त बिजली योजना को लेकर बड़ा बयान, इनकम टैक्स देने वालों से CM की खास अपील

    पटना
     बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक अहम अपील की है। उन्होंने आर्थिक रूप से सक्षम और इनकम टैक्स देने वाले उपभोक्ताओं से मुफ्त बिजली की सब्सिडी छोड़ने का आग्रह किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग इस सुविधा का खर्च खुद उठा सकते हैं, वे सरकार की सब्सिडी छोड़कर राज्य के विकास में योगदान दे सकते हैं।

    उनका कहना है कि इससे सरकार के खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम होगा। बचने वाली राशि का इस्तेमाल बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है।
    करीब 1.92 करोड़ उपभोक्ताओं को मिल रहा योजना का लाभ

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक, बिहार में करीब 1 करोड़ 92 लाख बिजली उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का फायदा मिल रहा है।

    सरकार इस योजना पर हर साल लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने संपन्न उपभोक्ताओं से आगे बढ़कर अपनी सब्सिडी छोड़ने की अपील की है। हालांकि, यह अपील पूरी तरह स्वैच्छिक है और उपभोक्ताओं पर इसे लेकर कोई अनिवार्यता नहीं है।

    CM बोले- सक्षम लोग आगे आएं, शिक्षा को मिलेगा फायदा
    सम्राट चौधरी ने कहा कि आर्थिक रूप से मजबूत परिवार यदि मुफ्त बिजली की सुविधा छोड़ देते हैं, तो सरकार की बचत बढ़ सकती है। इस बचत का इस्तेमाल राज्य के शिक्षा क्षेत्र में किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि जिन लोगों को सरकारी सब्सिडी की वास्तविक जरूरत नहीं है, वे स्वेच्छा से इसे छोड़कर बिहार के विकास में योगदान दें। उन्होंने इसे सक्षम नागरिकों की सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर भी देखा।

    यूपी से की बिहार की बिजली सब्सिडी की तुलना
    मुख्यमंत्री ने अपनी बात समझाने के लिए उत्तर प्रदेश का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी बिहार से लगभग दोगुनी है, लेकिन वहां बिजली सब्सिडी पर करीब 6 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आती है।

    इसके मुकाबले बिहार में इस मद में सालाना करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसी अंतर का हवाला देते हुए उन्होंने संपन्न उपभोक्ताओं से सब्सिडी छोड़ने की अपील की।

    क्या 125 यूनिट मुफ्त बिजली बंद होगी?
    मुख्यमंत्री की अपील के बाद यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना खत्म होने वाली है। फिलहाल ऐसा नहीं है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने योजना बंद करने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने सिर्फ आर्थिक रूप से सक्षम और आयकर देने वाले लोगों से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने की अपील की है। यानी जरूरतमंद उपभोक्ताओं को मिलने वाली मुफ्त बिजली योजना को लेकर इस बयान को बंदी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    बचत की रकम से शिक्षा व्यवस्था सुधारने की योजना
    मुख्यमंत्री का तर्क है कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल उन क्षेत्रों में किया जाना चाहिए जहां उसका व्यापक लाभ मिले। यदि सक्षम लोग बिजली सब्सिडी छोड़ते हैं, तो सरकार के पास बचने वाली राशि को शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लगाया जा सकता है।

    बिहार में स्कूलों की व्यवस्था, शिक्षा की गुणवत्ता और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। ऐसे में सरकार इस बचत को शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर देख रही है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की चेतन-नितिन सभरवाल की अपील, आयकर विभाग करेगा पुराने सौदों की जांच

    सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की चेतन-नितिन सभरवाल की अपील, आयकर विभाग करेगा पुराने सौदों की जांच

     नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट ने भारत के पूर्व चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल के दो बेटों चेतन सभरवाल और नितिन सभरवाल से जुड़े आयकर मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने शेयरों की खरीद-बिक्री से मिले पैसे के इस्तेमाल और दिल्ली के सिकंदरा रोड पर खरीदी गई प्रॉपर्टी के मामले में आयकर विभाग की दोबारा असेसमेंट की कार्रवाई को हरी झंडी दे दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने दोनों भाइयों की ओर से दायर चार अपीलों को खारिज कर दिया. इसके साथ ही वित्त वर्ष 2008-09 और 2009-10 के लिए जारी री-असेसमेंट नोटिस को बरकरार रखा गया है। 

    क्या है पूरा मामला?
    यह मामला साल 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड पर खरीदी गई एक प्राइम प्रॉपर्टी से जुड़ा है. आयकर विभाग को शक था कि इस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम दो कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हासिल हुई थी. विभाग ने शेयरों की बिक्री में तय की गई कीमत और उनकी वास्तविक कीमत के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठाए थे. जांच में यह भी सामने आया कि शेयर बेचकर मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया था. इसके बाद आयकर विभाग ने दोनों भाइयों के टैक्स असेसमेंट की दोबारा जांच शुरू की थी। 

    2007 में हुआ था समझौता
    मामले के मुताबिक, अक्टूबर 2007 में चेतन सभरवाल, नितिन सभरवाल और दो अन्य शेयरधारकों ने पवन इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड (Pawan Impex Pvt Ltd) और एसवीआईआईटी सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड (SVIIT Software Pvt Ltd) के शेयर बेचने का समझौता किया था. ये शेयर जीवाईएस रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड (GYS Real Estate Pvt Ltd) को बेचे जाने थे. दोनों कंपनियों के शेयरों की बिक्री के लिए क्रमशः 195 करोड़ रुपये और 60 करोड़ रुपये की कीमत तय की गई थी. समझौते के मुताबिक, प्रत्येक शेयरधारक को बिक्री की कुल रकम में एक चौथाई हिस्सा मिलना था। 

    शेयरों की कीमत पर हुआ शक
    बाद में आयकर विभाग ने इस शेयर ट्रांजैक्शन की जांच की. जांच के दौरान विभाग ने पाया कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाली रकम उन कंपनियों की संपत्तियों में मौजूद जमीन और इमारतों की वास्तविक कीमत के मुकाबले काफी ज्यादा दिखाई दे रही थी. विभाग ने शुरुआती तौर पर माना कि शेयरों की कीमत तय करने में वास्तविक मूल्य से काफी अधिक रकम दिखाई गई हो सकती है. इसी आधार पर शेयरों की बिक्री से प्राप्त रकम और उससे जुड़े टैक्स के पहलुओं की जांच की गई. विभाग ने इस मामले में डायरेक्टर जनरल की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की। 

    प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल हुई रकम
    आयकर विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि शेयरों की बिक्री से मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा अप्रैल 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड स्थित प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल किया गया था. इस निवेश के आधार पर सभरवाल भाइयों ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54F के तहत कैपिटल गेन टैक्स से छूट का दावा किया था. धारा 54F के तहत कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर संपत्ति की बिक्री से हुए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर आवासीय संपत्ति में निवेश के आधार पर छूट मिल सकती है. आयकर विभाग ने अब इस पूरे लेनदेन की जांच और टैक्स छूट के दावे को दोबारा परखने की जरूरत बताई थी। 

    स्वीकार हो चुका था चेतन सभरवाल का रिटर्न
    इस मामले में चेतन सभरवाल का असेसमेंट ईयर 2008-09 का इनकम टैक्स असेसमेंट दिसंबर 2010 में पूरा कर लिया गया था. उस समय उनके द्वारा घोषित आय को आयकर विभाग ने स्वीकार कर लिया था. हालांकि, बाद में विभाग की जांच में शेयरों की बिक्री की कीमत और उससे प्राप्त रकम के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे. इसके बाद विभाग ने पुराने असेसमेंट को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू की. इसी कार्रवाई को चेतन और नितिन सभरवाल ने अदालत में चुनौती दी थी। 

    क्यों बरकरार है री-असेसमेंट नोटिस?
    सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर को दिए अपने फैसले में कहा कि आयकर विभाग की ओर से 31 मार्च 2015 को जारी नोटिस के पीछे पर्याप्त आधार मौजूद था. बेंच ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 147 और 148 के तहत असेसमेंट दोबारा खोलने के लिए अधिकारी के पास यह मानने का उचित कारण होना चाहिए कि टैक्स के दायरे में आने वाली आय का आकलन नहीं हो पाया है. अदालत के मुताबिक, इस मामले में डायरेक्टर जनरल की जांच रिपोर्ट ने असेसिंग ऑफिसर को ऐसा विश्वास बनाने के लिए ठोस सामग्री उपलब्ध कराई थी. इसलिए नोटिस जारी करने की कार्रवाई को अवैध नहीं कहा जा सकता। 

    'रीजन टू बिलीव' का मतलब अंतिम सबूत होना नहीं
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि 'रीजन टू बिलीव' का अर्थ किसी अधिकारी के पास यह मानने का उचित कारण या आधार होना है कि टैक्स योग्य आय का आकलन छूट गया है. इसके लिए असेसिंग ऑफिसर को नोटिस जारी करने से पहले ही यह अंतिम रूप से साबित करना जरूरी नहीं है कि टैक्स चोरी हुई है या कोई आय छिपाई गई है. अदालत ने कहा कि इस स्तर पर अधिकारी के पास उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच की जरूरत का उचित आधार होना पर्याप्त है. कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अदालतें इस बात का मूल्यांकन नहीं कर सकतीं कि अधिकारी के पास मौजूद कारण पर्याप्त हैं या नहीं। 

    कीमत बढ़ाकर दिखाने की दलील भी खारिज
    PTI के मुताबिक, अदालत ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि शेयरों की कीमत ज्यादा दिखाए जाने भर से टैक्स योग्य आय के
    आकलन से छूटने का मामला नहीं बन सकता. बेंच ने कहा कि शेयर बेचने वाले के हाथ में हुई आय का टैक्स असेसमेंट भी इस मामले में महत्वपूर्ण है. शेयरों की बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल बाद में कैपिटल एसेट खरीदने और टैक्स छूट का दावा करने के लिए किया गया था. ऐसे में अगर बिक्री की रकम वास्तविक कीमत से काफी ज्यादा थी, तो इस पूरे लेनदेन की जांच जरूरी हो सकती है. अदालत ने कहा कि बिक्री से मिली रकम की आड़ में आय को दूसरी तरह दिखाए जाने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

    जांच की जरूरत
    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ
    किया कि किसी लेनदेन की सच्चाई जानने के लिए जांच की जरूरत महसूस करना और जांच के बाद नोटिस जारी करने के लिए पर्याप्त आधार होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. अदालत के मुताबिक, इस मामले में आयकर अधिकारी ने केवल किसी अस्पष्ट आशंका के आधार पर कार्रवाई नहीं की थी. उनके सामने जांच रिपोर्ट के रूप में ठोस सामग्री मौजूद थी, जिसके आधार पर टैक्स योग्य आय के आकलन से छूटने की आशंका पैदा हुई. इसी वजह से कोर्ट ने आयकर विभाग के नोटिस को वैध माना और दोनों भाइयों की चारों अपीलें खारिज कर दीं। 

    कौन थे पूर्व चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल?
    वाईके सभरवाल भारत के 36वें चीफ जस्टिस ऑ
    फ इंडिया (CJI) रहे थे. उन्होंने 1 नवंबर 2005 को देश के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था और 14 जनवरी 2007 तक इस पद पर रहे. उनका न्यायिक करियर दिल्ली हाई कोर्ट, बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक फैला रहा. मौजूदा मामला उनके बेटों चेतन और नितिन सभरवाल के कारोबारी शेयर ट्रांजैक्शन और प्रॉपर्टी निवेश से जुड़ा है। 

  • कार्तिक महीने में तुलसी पूजा का खास महत्व, रोज दीपक जलाने से घर में आएगी सुख-समृद्धि!

    कार्तिक महीने में तुलसी पूजा का खास महत्व, रोज दीपक जलाने से घर में आएगी सुख-समृद्धि!

     Kartik Month Tulsi Puja: हिंदू धर्म में कार्तिक महीने को बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है. इस महीने भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. साथ ही तुलसी की पूजा का भी खास महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय हैं. इसलिए कार्तिक महीने में तुलसी के पौधे की पूजा करना, उसके पास दीपक जलाना और परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे के अनुसार, कार्तिक महीने में तुलसी का पौधा लगाना और रोज उसकी पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है. आइए जानते हैं कि तुलसी का धार्मिक महत्व क्या है और कार्तिक महीने में इसकी पूजा कैसे करनी चाहिए.

    तुलसी का भगवान विष्णु से क्या है संबंध?
    हिंदू धर्म में प्रकृति को भी भगवान का रूप मानकर पूजा जाता है. नदियों, पहाड़ों और पेड़-पौधों को देवी-देवताओं से जोड़कर देखा जाता है. इसी वजह से तुलसी के पौधे को भी बहुत पवित्र माना गया है और उसे देवी का स्थान दिया गया है. तुलसी में कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, तुलसी और भगवान विष्णु का संबंध एक शाप और वरदान से जुड़ा है. इसी कथा से भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप की पूजा की परंपरा भी जुड़ी हुई है. यही वजह है कि शालिग्राम की पूजा में तुलसी के पत्ते चढ़ाना जरूरी माना जाता है. भगवान विष्णु के साथ-साथ श्रीराम और श्रीकृष्ण की पूजा में भी तुलसी दल का विशेष महत्व है.

    कार्तिक महीने में तुलसी का पौधा लगाना क्यों शुभ है?
    ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे के अनुसार, घर में तुलसी का पौधा गुरुवार के दिन लगाना शुभ माना जाता है. खासतौर पर कार्तिक महीने में तुलसी लगाने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस महीने तुलसी की रोज पूजा करने और तुलसी विवाह कराने से घर में सुख-समृद्धि आती है. इससे भगवान विष्णु की कृपा भी बनी रहती है. घर में तुलसी का पौधा ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां सुबह की धूप और ताजी हवा पहुंच सके. आप इसे आंगन में रख सकते हैं. अगर फ्लैट में रहते हैं तो बालकनी में भी तुलसी का पौधा लगा सकते हैं.

    कार्तिक महीने में कैसे करें तुलसी की पूजा?
    कार्तिक महीने में रोज सुबह स्नान करने के बाद तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं. इसके बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें, पौधे की परिक्रमा करें. शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक महीने में तुलसी के नीचे दीपक जलाकर पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.

    तुलसी पूजा के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान
    तुलसी की पूजा करते समय कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना चाहिए. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे के अनुसार, तुलसी के पत्ते हमेशा सुबह ही तोड़ने चाहिए. दिन के बाकी समय पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए. भगवान विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण को तुलसी दल चढ़ाना शुभ माना जाता है, लेकिन भगवान गणेश और माता दुर्गा को तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए.

    तुलसी के पत्ते पहले से तोड़कर रखे हों तो उन्हें पूजा में इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि ये जल्दी बासी नहीं होते. इसके अलावा तुलसी के पौधे के आसपास सफाई रखें. शाम के समय उसके पास घी का दीपक जलाएं. धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक महीने में नियमित रूप से तुलसी की पूजा करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है.

  • मंदिरों के लिए बने आचार संहिता, पुजारी महासंघ ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र

    मंदिरों के लिए बने आचार संहिता, पुजारी महासंघ ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र

    उज्जैन
     मंदिरों की पवित्रता, धार्मिक परंपराओं और गर्भगृह की मर्यादाओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. मद्रास हाई कोर्ट के उस निर्णय का अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने स्वागत किया है, जिसमें मंदिरों को पर्यटन स्थल के बजाय धार्मिक आस्था का केंद्र मानते हुए रीति रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करने पर जोर दिया गया है। 

    महासंघ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की है कि प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय मंदिरों के लिए एक समान आचार संहिता लागू की जाए. साथ ही मंदिरों की मर्यादा भंग करने वालों के प्रवेश पर प्रतिबंध और पुजारियों की सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाया जाए। 

    'मंदिर की परंपराओं और नियमों का सख्ती से हो पालन'
    महासंघ की मांग केवल गैर हिंदुओं तक सीमित नहीं है. अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गुरु का कहना है, "मंदिर की परंपराओं और नियमों का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति चाहे किसी धर्म या वर्ग का हो उसके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए. यहां तक की सनातन धर्म को मानने वाले लोगों और साधु-संतों को भी मंदिर के निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए। 

    महासंघ ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई प्रमुख मंदिरों में गर्भगृह की मर्यादा और निर्धारित वेशभूषा संबंधी नियमों का उल्लंघन हो रहा है. उज्जैन के महाकालेश्वर, काल भैरव, हरसिद्धि, गढ़कालिका जैसे प्रसिद्ध मंदिरों का उदाहरण देते हुए संगठन ने व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू करने की मांग की है। 

    पुजारी सुरक्षा अधिनियम की मांग
    महासंघ ने ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में पुजारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. संगठन के सचिव रूपेश मेहता ने बताया, "कई स्थानों पर मंदिर परिसर में ताश, जुआ, बीड़ी सिगरेट जैसी गतिविधियां भी होती हैं. पुजारी द्वारा रोकने पर उनके साथ अभद्रता और मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं. कुछ मामलों में पुजारियों की हत्या तक हो जाती है. ऐसे में पुजारियों को कानूनी संरक्षण देने के लिए मध्य प्रदेश में पुजारी सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग की गई है। 

    'मद्रास हाईकोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य'
    अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गुरु का कहना है, "मंदिर की पवित्रता, मर्यादा और परंपरा अक्षुण्ण रहना चाहिए. मद्रास हाईकोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है. मंदिर धर्मस्थल हैं पर्यटन स्थल नहीं. वहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मंदिर के रीति रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। 

    पुजारी महासंघ की मांग है, मध्य प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था लागू हो जिससे मंदिर की मर्यादा भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई हो सके. चाहे वह गैर हिंदू हो या सनातन धर्म को मानने वाला व्यक्ति. कई बार सनातन धर्म के रक्षक माने जाने वाले साधु संत भी मंदिरों की निर्धारित परंपराओं का पालन नहीं करते. महाकाल मंदिर में निर्धारित नियमों के बावजूद कुछ लोग उनका उल्लंघन करते हैं. मंदिर प्रबंधन और अधिकारियों से शिकायत के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं है, अब मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। 

    महासंघ की प्रमुख मांगे

        प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय मंदिरों के लिए एक समान आचार संहिता.

        मंदिरों की धार्मिक परंपराओं के साथ निर्धारित वेशभूषा और गर्भगृह की मर्यादा का अनिवार्य पालन.

        नियम तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई और आवश्यकतानुसार प्रवेश प्रतिबंध.

        मंदिर परिसरों में अनुचित गतिविधियों पर रोक और मंदिर प्रबंधन की जवाबदेही तय करना.

        पुजारियों की सुरक्षा सम्मान और कानूनी संरक्षण के लिए पुजारी सुरक्षा अधिनियम लागू करना.

  • AAP छोड़ने वाले तीनों पंजाब विधायकों ने थामा BJP का दामन, दिल्ली में ली सदस्यता

    AAP छोड़ने वाले तीनों पंजाब विधायकों ने थामा BJP का दामन, दिल्ली में ली सदस्यता

    चंडीगढ़ 

    पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के 3 विधायक भाजपा में शामिल हो गए हैं। इनमें अमृतसर नॉर्थ से कुंवर विजय प्रताप सिंह, समाना से चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं।

    तीनों विधायकों ने पिछले 2 दिनों में AAP से इस्तीफा दिया। रविवार को जौड़ामाजरा और पठानमाजरा के इस्तीफे के बाद सोमवार को कुंवर ने भी पार्टी छोड़ दी। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पिछले दो दिन में तीन विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। बागी विधायकों ने सोमवार को बीजेपी का दामन थाम लिया।सोमवार को दिल्ली में आप के बागी नेता कुंवर विजय प्रताप सिंह, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा बीजेपी में शामिल हो गए।

    कुंवर ने विधानसभा की मेंबरशिप से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा स्पीकर को भेजे गए इस्तीफे में कुंवर विजय प्रताप ने लिखा-

    मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि मैंने राजनीति से 'माई-बाप कल्चर' को खत्म किया है।

    जून 2025 में आम आदमी पार्टी ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते 5 साल के लिए पार्टी से सस्पेंड कर दिया था।

    वहीं AAP ने कहा कि वह विधानसभा स्पीकर से समाना और सनौर विधायकों की मेंबरशिप रद्द करने की मांग करेगी।

    MLA कुंवर विजय प्रताप सिंह ने दिया इस्तीफा 

    पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी से निलंबित विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को भेज दिया है।

    अमृतसर नॉर्थ विधानसभा सीट से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने अपने इस्तीफे की प्रति साझा करते हुए लिखा, "मैंने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।" विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में उन्होंने 1 नवंबर, 2026 से अपना इस्तीफा प्रभावी करने की बात कही है।

    इससे पहले 2 और विधायकों ने दिया इस्तीफा 
    कुंवर विजय प्रताप सिंह का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब रविवार को आम आदमी पार्टी के दो विधायकों चेतन सिंह जौड़ामाजरा (समाना) और हरमीत सिंह पठानमाजरा (सनौर) ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों से पंजाब की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

    गौरतलब है कि कुंवर विजय प्रताप सिंह को पिछले साल जून में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पांच साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई और उनकी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

    कुंवर विजय प्रताप सिंह कई मुद्दों पर भगवंत मान सरकार की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। 2015 के बेअदबी और पुलिस फायरिंग मामलों में न्याय मिलने में देरी को लेकर भी उन्होंने सरकार के कामकाज पर नाराजगी जताई थी। वह कोटकपूरा और बहिबल कलां पुलिस फायरिंग मामलों की जांच करने वाली विशेष जांच टीम (SIT) का हिस्सा रह चुके हैं।

    विधानसभा में भी उन्होंने कई बार 2015 के बेअदबी मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके अलावा अमृतसर में पिछले साल जहरीली शराब के सेवन से 20 से अधिक लोगों की मौत के बाद भी उन्होंने भगवंत मान सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे।

    बता दें कि कुंवर विजय प्रताप सिंह ने 2021 में पुलिस सेवा से समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने के बाद आम आदमी पार्टी का दामन थामा था। इसके बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में वह अमृतसर नॉर्थ सीट से विधायक चुने गए थे।

     

  • भाजपा की रैली को लेकर जबलपुर में ट्रैफिक डायवर्ट, कई रास्तों पर रहेगी पाबंदी

    भाजपा की रैली को लेकर जबलपुर में ट्रैफिक डायवर्ट, कई रास्तों पर रहेगी पाबंदी

    जबलपुर 
    जबलपुर में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा निकाली जाएगी। इसमें सोमवार को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई मंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
    कार्यक्रम को लेकर पुलिस और प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। पदयात्रा दोपहर 3 बजे शुरू होगी।

    केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे दिल्ली एयरपोर्ट से जबलपुर के लिए रवाना होंगे। वे सुबह 9:20 बजे जबलपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे तीन पत्ती चौक स्थित 'लोकतंत्र बचाओ, आपातकाल हटाओ' प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे और विभिन्न बैठकों में शामिल होंगे।

    दोपहर 3 बजे वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ पदयात्रा में शामिल होंगे।

    गोल बाजार से शुरू होकर मालवीय चौक और गंजीपुरा से गुजरेगी पदयात्रा

    जानकारी के मुताबिक, भाजपा की पदयात्रा गोल बाजार क्षेत्र से शुरू होकर मालवीय चौक, गंजीपुरा और कमानिया होते हुए वापस गोल बाजार पहुंचेगी। इसमें केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

    भाजपा नेताओं का कहना है कि इस पदयात्रा के जरिए जबलपुर से संदेश दिया जाएगा कि देश में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व में देश में अराजकता फैलाई जा रही है। संवैधानिक संस्थाओं का मजाक बनाने वाली ताकतों को जवाब दिया जाएगा।

    6 घंटे तक लोडिंग-अनलोडिंग भी बंद
    बल्देवबाग से पांडे चौक और बल्देवबाग से रानीताल चौक के बीच दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक छोटे मालवाहक और लोडिंग वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। इस दौरान लोडिंग-अनलोडिंग भी नहीं हो सकेगी।

    रानीताल स्टेडियम में खड़ी होंगी बसें
    कार्यक्रम में आने वाली सभी बसों की पार्किंग रानीताल स्टेडियम खेल परिसर में होगी। बसें रानीताल चौक पर यात्रियों को उतारकर यू-टर्न लेंगी और निर्धारित पार्किंग स्थल पहुंचेंगी।

    पाटन, कटंगी, दमोह, नरसिंहपुर और सिवनी से आने वाली बसें: पाटन-कटंगी बायपास, दीनदयाल चौक, दमोह नाका, बल्देवबाग और आगा चौक होते हुए रानीताल पहुंचेंगी।

    कटनी, सिहोरा और डिंडौरी से आने वाली बसें: आधारताल तिराहा, रद्दी चौकी, गोहलपुर चौक, दमोह नाका, बल्देवबाग और आगा चौक होते हुए रानीताल पहुंचेंगी।

    मंडला से आने वाली बसें: एकता मार्केट बायपास, चूल्हा गोलाई, तिलवारा, अंधमूक, पाटन-कटंगी बायपास, दीनदयाल चौक, दमोह नाका, बल्देवबाग और आगा चौक होते हुए रानीताल पहुंचेंगी।

    कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी बसें इन्हीं निर्धारित मार्गों से वापस जाएंगी।

    दोपहिया और चारपहिया वाहनों की पार्किंग यहां होगी

    दोपहिया वाहन: महाकौशल स्कूल और अंजुमन इस्लामिया स्कूल।

    चारपहिया वाहन: एमएलबी स्कूल और डीएन जैन स्कूल।

    3 नवंबर को भोपाल में रैली निकाली जाएगी। जबलपुर में कार्यक्रम दोपहर 3 बजे गोल बाजार स्थित शहीद स्मारक से शुरू होगा, जबकि भोपाल में अटल पथ पर सुबह 10 बजे रैली आयोजित करने की तैयारी है।

    एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य
    भाजपा ने प्रत्येक शहर में एक लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए संगठन स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। रैली में शामिल होने वाले लोगों का पंजीयन क्यूआर कोड के माध्यम से कराया जा रहा है। पंजीयन के दौरान नाम, मोबाइल नंबर, लिंग और निवास स्थान की जानकारी दर्ज करनी होगी।

    खड़गे की टिप्पणी के विरोध में भाजपा का अभियान
    यह अभियान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी के विरोध में चलाया जा रहा है। भाजपा जिला मुख्यालयों पर भी कार्यक्रम आयोजित कर अपने संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की योजना बना रही है।

  • यूपी से MP पहुंची नकली मिठाई की खेप, सतना में पुलिस और खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई

    यूपी से MP पहुंची नकली मिठाई की खेप, सतना में पुलिस और खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई

    सतना 
     दीपावली आते ही मिठाई की डिमांड बढ़ जाती है. ऐसे में बाहर से जानलेवा खोवा और खाद्य सामग्री आने लगती है. इसी बीच सतना की खाद्य सुरक्षा टीम ने देर रात बस स्टैंड में दबिश दी, जहां एक यात्री बस के अंदर से भारी मात्रा में अवैध खोवा मिल्क केक, मोतीचूर लड्डू की बूंदी पकड़ में आई गई. लगभग 450 किलो ये मीठा जहर कानपुर से सतना लाया गया था. इस संबंध में तीन लोगों के नाम के बिल भी मिले हैं, जिन्हें पार्टी बनाकर कार्रवाई की जा रही है। 

    बस में भरा था मीठा जहर
    खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र दुबे के मुताबिक, '' कानपुर से सतना आने वाली बस सर्विस क्रमांक MP07-ZV-3777 में मिल्क केक जैसा आर्टिकल पकड़ा गया है. खाद्य सुरक्षा टीम ने जब बस में रखी बोरियों को खुलवाया तो देखा कि उसमें खोवे की मिठाई और मिल्क केक भरा हुआ था, जो खोवे से नहीं बल्कि अन्य मिलावटी चीजों से बना हुआ था. इसके साथ ही दो अन्य बोरियों में मोतीचूर के लड्डू बनाने वाली बूंदी भी पाई गई है. बस के चालक परिचालक से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने सामग्री से संबंधित दस्तावेज व बिल को खाद्य टीम को सौंप दिया, जिसमें यह पाया गया कि कानपुर से किसी गोपाल डेरी के नाम से यह सामग्री सतना लाई जा रही है। 

    यूपी से एमपी आ रही नकली मिठाई
    पुलिस व खाद्य विभाग को सूचना मिली है कि उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश में फर्जी तरीके से अवैध खोवा और मिल्क केक भेजा जा रहा है, जो की सीधे तौर पर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. बड़ी बात यह है कि मिल्क केक में सूजी और पाम ऑयल पाया गया है, जो करीब 100 से 150 रुपए किलो की कीमत कानपुर से सतना लाया जाता है. और विंध्य क्षेत्र में आकर यह सामग्री बाजार में दुकानदारों द्वारा ₹400 में बाजार में बेची जाती है. लेकिन इसमें कोई मैन्युफैक्चरिंग डेट इंक्लूड नहीं है. ऐसे में कहीं ना कहीं यह मिल्क केक लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। 

    दीपावली की मिठाई खरीदते वक्त रखें सावधानी
    वहीं, दूसरी ओर फर्जी तरीके से बनाए गए खोवे की मिठाई भी पैकेट के रूप में गोपाल डेरी के टैग लगाकर बाजारों में दुकानदार कम दाम में खरीद कर उसे दुगने रेट में बेचते हैं. अगर आप बाजार में खोवे से बनी मिठाइयां, मिल्क केक एवं मोतीचूर के लड्डू खरीद रहे हैं तो सावधानी बहुत जरूरी है. अक्सर दीपावली, रक्षाबंधन जैसे बड़े त्यौहार में यह खाद्य सामग्रियां बाजार में आने लगती है. इसलिए लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।