Category: विदेश

  • ईरान से जंग खत्म करने के लिए ट्रंप की 15 शर्तें: एक महीने का सीजफायर, नो न्यूक्लियर और होर्मुज

    ईरान से जंग खत्म करने के लिए ट्रंप की 15 शर्तें: एक महीने का सीजफायर, नो न्यूक्लियर और होर्मुज

    वाशिंगटन

    इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने के करीब 25 दिन बाद अमेरिका अब सीजफायर की उम्मीद कर रहा है। बीते दिनों ईरान युद्ध में जीत का दावा करने वाले ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ उनकी बातचीत जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप सरकार ने समझौते के लिए ईरान को एक 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना की पेशकश की है, जिसमें युद्ध में एक महीने का सीजफायर का जिक्र है। इस घटनाक्रम से अवगत एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

    अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने की शर्त पर बताया कि युद्धविराम योजना पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरान को सौंपी गई। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता की पेशकश की थी। इसके बाद ट्रंप ने भी इसे हरी झंडी दे दी है और कहा है कि ईरानी नेतृत्व के ‘अच्छे लोगों’ के साथ उनकी बातचीत जारी है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 15-सूत्रीय योजना ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है।

    ट्रंप की योजना में क्या?
    हालांकि पूरा दस्तावेज अभी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि इस 15-सूत्रीय योजना का ढांचा तीन बड़ी मांगों पर आधारित है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग की गई है। ट्रंप कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि ईरान को अपनी परमाणु क्षमताओं को खत्म करना होगा। इसमें यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह रोकना, नतान्ज, फ़ोर्डो और इस्फहान जैसी अहम सुविधाओं को बंद करना और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति देना शामिल है।

    प्रॉक्सी मॉडल को छोड़ने की बात भी
    इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता और संख्या को सीमित करे। यह मांग ईरान की प्रतिरोधक क्षमता को निशाना बनाती है, ना कि सिर्फ उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को। एक और बड़ी मांग यह है कि ईरान हिजबुल्लाह और हूती जैसे क्षेत्रीय गुटों को पैसे देना और हथियार मुहैया कराना बंद करे और पूरे मिडिल ईस्ट में अपने प्रॉक्सी मॉडल को छोड़ दे। इसके अलावा प्लान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने, और सीजफायर की समय-सीमा तय करने की बात भी है। वहीं इन सब के बदले अमेरिका ईरान को प्रतिबंधों में पूरी तरह राहत दे सकता है।

    USA के कदम से इजरायल हैरान
    उधर, अमेरिका के इस अचानक सीजफायर प्रस्ताव ने इजरायली अधिकारियों को हैरान कर दिया है जो युद्ध जारी रखने के पक्ष में थे. दूसरी ओर, कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद पेंटागन क्षेत्र में 3,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है. वर्तमान में मिडिल ईस्ट में लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि सैन्य गतिविधियां बढ़ीं, तो वह खाड़ी में समुद्री बारूद (नेवल माइंस) बिछा सकता है। 
    नया नहीं है पीस प्लान
    विशेषज्ञों का कहना है कि ये 15-सूत्रीय ढांचा पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि मई 2025 के उस प्रस्ताव पर आधारित है जो इजरायली हमलों के बाद विफल हो गया था. पहले की योजना में कथित तौर पर व्यापक शर्तें लगाई गई थीं, जिनमें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर सख्त सीमाएं लगाना, यूरेनियम भंडार को बाहर भेजना, संवर्धन सुविधाओं को निष्क्रिय करना और प्रतिबंध राहत निधि के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करना शामिल था, जबकि केवल आंशिक प्रतिबंधों में ढील और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक नागरिक परमाणु कार्यक्रम की पेशकश की गई थी। 

    इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या ये प्रस्ताव औपचारिक रूप से ईरान को प्रस्तुत किया गया है. कुछ राजनयिकों को शक है कि कोई ठोस नया प्रस्ताव मौजूद भी है या नहीं और यदि है भी, तो संभवत इसे अभी तक तेहरान के साथ साझा नहीं किया गया है। 

    वहीं, ट्रंप ने दावा किया कि पिछले दो दिनों में हुई बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत से ईरान के साथ प्रगति हुई है. हालांकि, तेहरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत को फिर से शुरू करने के बारे में सीमित अप्रत्यक्ष संपर्कों के अलावा कोई गुप्त वार्ता नहीं हुई है। 

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता (ऑफ-रैंप) तलाश रहे हैं. हालांकि, दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास और ईरान के अंदर वार्ता के अधिकार को लेकर अनिश्चितता इस शांति प्रक्रिया में बड़ी बाधा है। 

    मानेगा ईरान?
    ईरान ने अब तक अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना को खारिज ही किया है। ऐसे में इसकी बेहद कम संभावना है कि ईरान ट्रंप की इन मांगों को समर्थन देगा। इसकी वजह यह है कि यह प्रस्ताव किसी नई शांति पहल से ज्यादा, पहले नाकाम हो चुकी परमाणु वार्ताओं का ही एक नया रूप लगता है। ईरान का तर्क है कि पिछली बार बातचीत के बीच ही अमेरिका ने हमला कर दिया, जिससे नई गारंटियों पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है।

  • कोलंबिया का मिलिट्री प्लेन पेरू बॉर्डर के पास क्रैश, 66 सैनिकों की जान चली गई

    कोलंबिया का मिलिट्री प्लेन पेरू बॉर्डर के पास क्रैश, 66 सैनिकों की जान चली गई

    बोगोटा

    कोलंबिया के दक्षिणी अमेजन इलाके में बीते दिन सोमवार को सेना का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें सवार 125 लोगों में से कम से कम 66 लोगों की मौत हो गई है।

    यह घटना कोलंबियाई वायु सेना के हाल के इतिहास की सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक थी। दुर्घटना के मलबे और राख के बीच अभी भी लगभग दो दर्जन लोग लापता हैं। पुटुमायो विभाग के गवर्नर जॉन गैब्रियल मोलिना ने स्थानीय समाचार आउटलेट को बताया कि 66 लोग मारे गए, कई लोग घायल हुए और 21 लोग लापता हैं।

    कब और कैसे हुई दुर्घटना?
    रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज ने एक्स पर बताया कि यह दुर्घटना तब हुई, जब लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित हरक्यूलिस C-130 परिवहन विमान पेरू की सीमा पर स्थित प्यूर्टो लेगुइजामो से उड़ान भर रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि मरने वालों और घायल लोगों के आंकड़े बदल भी सकते हैं।

    फायरफाइटर एडुआर्डो सैन जुआन कैलेजास ने बताया कि माना जा रहा है कि जब विमान उड़ान भर रहा था तो रनवे के आखिर के पास उसे किसी चीज से टक्कर लगी। इसके बाद जब विमान नीचे गिर रहा था तो उसका एक पंख एक पेड़ से टकरा गया। उन्होंने आगे बताया कि इस दुर्घटना के कारण विमान में आग लग गई और उसमें रखे कुछ विस्फोटक उपकरण फट गए।

    घटना का वीडियो वायरल
    इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दूरदराज के इस इलाके के रहने वाले लोग सबसे पहले बचाव कार्य के लिए आगे आते हुए और कुछ लोग अपनी मोटरसाइकिलों पर घायल सैनिकों को बिठाकर कच्ची सड़क पर तेजी से दौड़ते हुए देखे जा सकते हैं।

    बाद में सेना के वाहन भी वहां पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटनास्थल तक पहुंचना काफी मुश्किल था और इसकी वजह से बचाव कार्यों में बाधा आ रही थी।

  • ईरान का अमेरिका को चेतावनी, युद्ध खत्म करने की दो बड़ी शर्तें, 9 अप्रैल तक होगा युद्ध समाप्त?

    ईरान का अमेरिका को चेतावनी, युद्ध खत्म करने की दो बड़ी शर्तें, 9 अप्रैल तक होगा युद्ध समाप्त?

    वाशिंगटन/ तेहरान 

    अमेरिका अब ईरान जंग खत्म करने को रेडी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने का दावा है कि कि ईरान अब युद्ध नहीं लड़ना चाहता. वह समझौता करना चाहता है. उनकी मानें तो अमेरिका सीजफायर को लेकर ईरानी नेता के साथ बातचीत कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ प्रोडक्टिव बातचीत हो रही है. वहीं ईरान ने ट्रंप के दावों को फेक ही बता दिया है. ईरान का कहना है कि मार्केट को मेनुपुलेट करने के लिए ट्रंप ईरान जंग पर ऐसा दावा कर रहे हैं. अब सवाल है कि क्या सच में ईरान जंग खत्म करने को तैयार नहीं हैं? वह भी तब जब उसके सारे टॉप लीडर्स मारे जा चुके हैं. अब ईरान ने भी अपनी मंशा जाहिर कर दी है. ईरान ने ट्रंप को सीधा जवाब दिया है कि वह भी युद्ध खत्म करने को तैयार है, मगर उसकी कुछ शर्तें हैं। 

    जी हां, ईरान भी अमेरिका और इजरायल संग युद्ध खत्म करना चाहता है. मगर वह ऐसे ही जंग खत्म नहीं करना चाहता. उसकी कुछ शर्तें हैं. ईरान का कहना है कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक सभी प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते और अमेरिका द्वारा युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर दी जाती. जी हां, ईरान अब अमेरिका से युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई चाहता है. साथ ही वह अपने ऊपर लगे सारे सैंक्शन्स हटवाना चाहता है. ये दोनों चीजें अमेरिका मान लेता है तो फिर ईरान इस युद्ध को आगे नहीं बढ़ाएगा और डोनाल्ड ट्रंप की बात मान लेगा। 

    क्या मानेंगे डोनाल्ड ट्रंप?
    मगर सवाल है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ईरान की इन शर्तों को मानेंगे? दरअसल, ईरान के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि युद्ध का अंत ईरान के हाथ में है. ईरान इसे तभी समाप्त मानेगा जब अमेरिका से पूर्ण मुआवजा मिले और भविष्य में हस्तक्षेप न करने की गारंटी हो. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध को ‘समाप्त करने की दिशा में’ विचार करने की बात कही थी. ट्रंप प्रशासन ने तेल की कीमतों में भारी उछाल को नियंत्रित करने के लिए ईरानी तेल पर कुछ प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाए हैं, जिससे लगभग 140 मिलियन बैरल तेल बाजार में आ सकता है. लेकिन ईरान इसे अपनी जीत के रूप में देख रहा है और अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। 

    ईरानी विदेश मंत्री ने क्या कहा?
    ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी दोहराया कि युद्ध अमेरिका द्वारा शुरू किया गया था और इसके सभी परिणामों के लिए वाशिंगटन जिम्मेदार है. उन्होंने मुआवजे, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य अड्डों की वापसी और भविष्य में हमलों की गारंटी की मांग की है. ईरान का कहना है कि बिना इन शर्तों के कोई युद्धविराम स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

    ट्रंप का क्या दावा?
    वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को उस ईरानी नेता का नाम बताने से इनकार कर दिया, जिसके साथ अमेरिका तीन सप्ताह से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि वार्ताकार एक ‘शीर्ष व्यक्ति’ है, जो उस देश में ‘सबसे सम्मानित’ है. खबरों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत होने से इनकार किया है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि क्षेत्र के कुछ देश तनाव कम करने के प्रयास कर रहे हैं। 

    व्हाइट हाउस का जवाब
    इधर, समाचार एजेंसी ANI ने व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट से संपर्क किया और पूछा कि क्या अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति मिशन के लिए अमेरिका के विशेष राष्ट्रपति दूत स्टीव विटकॉफ, और व्यवसायी व अमेरिका के राष्ट्रपति के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर इस सप्ताह इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे? इस पर व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने जवाब दिया, ‘ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चाएं हैं और अमेरिका प्रेस के माध्यम से बातचीत नहीं करेगा. यह एक बदलती हुई स्थिति है और मुलाकातों के बारे में की जा रही अटकलों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि व्हाइट हाउस द्वारा उनकी औपचारिक घोषणा न कर दी जाए। 

    9 अप्रैल तक खत्म हो जाएगा युद्ध?

     मध्य पूर्व में जारी युद्ध को लेकर एक नई और दिलचस्प जानकारी सामने आ रही है. इजराइली मीडिया आउटलेट वाईनेट ने एक अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि अमेरिका ईरान के साथ चल रहे युद्ध को अप्रैल महीने की 9 तारीख तक खत्म करने की योजना बना रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने 9 अप्रैल को युद्ध समाप्त करने की संभावित तारीख तय की है. अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक ही चलता है तो इसका मतलब है कि लड़ाई और बातचीत में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। 

    रिपोर्ट ये भी कहती है कि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता इसी हफ्ते के अंत में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो सकती है. इसे लेकर न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने भी जानकारी दी है कि दोनों पक्षों में बात के लिए इस्लामाबाद को चुना जा सकता है. हालांकि इजरायली रिपोर्ट में ये भी कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल डे के मौके पर नेतन्याहू सम्मानित करने का वादा कर चुके हैं. अगर तब तक ये युद्ध रुका नहीं, तो ये सम्मान समारोह भी टल जाएगा और ट्रंप ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते। 

    क्यों 9 अप्रैल तक खत्म होगा युद्ध?
    दरअसल दिसंबर, 2025 के अंत में इजराइल
    के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद एक विशेष सम्मान देने का वादा किया था. यदि 9 अप्रैल तक युद्ध खत्म होता है, तो यह ट्रंप के लिए इजराइल के स्वतंत्रता दिवस यानि 21-22 अप्रैल के दौरान वहां यात्रा करने और इजराइल प्राइज लेने का मौका देगा. ये देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इसके बाद भी आने वाले तीन हफ्तों के लिए आगे की योजनाएं बनाई जा रही हैं। 

    इजरायल-अमेरिका के बीच बात भी नहीं?
    इजराइल डिफेंस फोर्स के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा कि उनकी सेना ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई यहूदी त्योहार पासओवर तक जारी रखेगी, जो इस साल 1 से 8 अप्रैल के बीच पड़ रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेरी के साथ अपने संपर्कों की जानकारी इजराइल को नहीं दी थी. एक इंटरव्यू में यह भी कहा गया कि गालिबाफ अमेरिका के साथ बातचीत की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

    अब तक युद्ध में क्या-क्या हुआ?
        यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था. शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह संघर्ष लगभग एक महीने तक चल सकता है, लेकिन 11 मार्च को उन्होंने कहा कि यह किसी भी समय खत्म हो सकता है। 

        23 मार्च को ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका पांच दिनों तक ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर हमला नहीं करेगा और तेहरान के साथ बातचीत की बात कही थी. हालांकि, ईरान ने इस तरह की किसी भी बातचीत से इनकार किया है। 

        इससे पहले अमेरिका ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का अल्टीमेटम दिया था और चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर उसके पावर प्लांट्स पर हमला किया जाएगा. इसके जवाब में ईरान ने कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो वह पूरे मध्य पूर्व में ऊर्जा, आईटी और पानी शुद्धिकरण से जुड़े ढांचों को निशाना बनाएगा। 

        दुनिया की लगभग 20% ऑयल एंड एलएनजी सप्लाई होर्मुज से होकर गुजरती है. इस संघर्ष का असर यूक्रेन समेत अन्य देशों पर भी पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार इससे ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है और आगे गैस की कीमतों तथा सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। 

     

  • डेडलाइन आज पूरी: क्या ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद ईरान पर एक्शन लेगा अमेरिका?

    डेडलाइन आज पूरी: क्या ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद ईरान पर एक्शन लेगा अमेरिका?

    ईरान
    ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मेसेज से पूरी दुनिया सकते में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को युद्ध रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने के लिए 48 घंटे का वक्त दिया था। और इसकी समय सीमा आज खत्म हो रही है। ये डेडलाइन खत्म होने से पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर एक लाइन लिखा है जिससे इस बात का अंदेशा बढ़ गया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है।

    ट्रंप के सोशल मीडिया 'ट्रुथ' पर लिखा है PEACE THROUGH STRENGTH, TO PUT IT MILDLY!!! इन शब्दों के मायने हैं कि ‘अगर आसान शब्दों में कहें तो शक्ति से शांति आती है।’ट्रंप ने ये फ्रेज रोनाल्ड रीगन के निरोध सिद्धांत (Doctrine of deterrence) से लिया है। रीगन का मानना था कि अगर आपके पास सैन्य और आर्थिक शक्ति पर्याप्त है तो दुश्मनों को संघर्ष करने से रोका जा सकता है। कोल्ड वॉर के दौरान इसे ही अहम रणनीति माना गया था।

    ईरान ने भी दे डाली जवाबी हमले की धमकी
    डोनाल्ड ट्रंप के अल्टिमेटम के जवाब में ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका अपने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिजली संयंत्रों पर हमले की धमकी पर अमल करता है, तो तेल और अन्य निर्यात के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल ''पूरी तरह से बंद'' कर दिया जाएगा। ईरान ने इजराइल के एक गुप्त परमाणु अनुसंधान स्थल पर मिसाइल हमला किया और इस हमले में आस पास के स्थानों पर रहने वाले लोग बड़ी संख्या में घायल हुए, जिसके बाद इजराइल के नेताओं ने वहां जा कर लोगों से मुलाकात की और उनका हाल चाल जाना।

    इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमले में किसी की जान नहीं गई और यह एक "चमत्कार" है। नेतन्याहू ने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका अपने युद्ध लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन लक्ष्यों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और सशस्त्र समर्थन को कमजोर करना तथा ईरान की जनता को धार्मिक शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने में सक्षम बनाना शामिल है।

    ईरान में 2000 से ज्यादा की मौत
    इजराइल की मंशा के विपरीत ईरान में न तो किसी विद्रोह का कोई संकेत मिला है और न ही उस लड़ाई के अंत का जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त हवाई मार्गों को खतरे में डाल दिया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए इस युद्ध में 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

    इस बीच, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने सोमवार तड़के कहा कि उनकी हवाई रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपट रही है, वहीं बहरीन में हवाई हमले के संकेत देने वाले सायरन बज रहे हैं। ईरान ने फारस की खाड़ी को शेष विश्व से जोड़ने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है और कहा है कि शत्रु देशों को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति है, लेकिन जहाजों पर हमलों ने लगभग सभी टैंकर यातायात को रोक दिया है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

    ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान जलडमरूमध्य नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके ''ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर देगा, शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।'' अमेरिका का तर्क है कि ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड देश के अधिकांश बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करता है और इसका उपयोग युद्ध अभियानों को शक्ति प्रदान करने के लिए करता है। वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है, तो पूरे क्षेत्र के अहम बुनियादी ढांचे को वैध लक्ष्य माना जाएगा और उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा, जिसमें खाड़ी देशों में पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा और जल शोधन प्रतिष्ठान शामिल हैं।

     

  • न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर एयर कनाडा का विमान फायर ट्रक से टकराया, चार लोग घायल

    न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर एयर कनाडा का विमान फायर ट्रक से टकराया, चार लोग घायल

    न्यूयॉर्क

    न्यूयॉर्क के ला गार्डिया एयरपोर्ट पर सोमवार को एक बड़ा विमान हादसा हो गया. खराब मौसम के बीच गेट की तरफ जा रहा एयर कनाडा का एक जेट रनवे पर खड़े फायर ट्रक से टकरा गया। 

    फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे का शिकार हुआ विमान 'एयर कनाडा एक्सप्रेस CRJ-900' है, जो मॉन्ट्रियल से न्यूयॉर्क पहुंचा था. टक्कर इतनी जोरदार थी कि इसमें चार दमकलकर्मी घायल हो गए हैं. उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। 

    हादसे के समय विमान में लगभग 100 यात्री सवार थे. आपातकालीन बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया. सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में यात्री विमान के अगले हिस्से और 'नोज' को भारी नुकसान पहुंचता दिख रहा है। 

    पूरा एयरपोर्ट हुआ बंद
    ला गार्डिया काफी बिजी और भीड़भाड़ वाला एयरपो
    र्ट है. प्लेन क्रैश होने की वजह से फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने ला गार्डिया एयरपोर्ट पर सभी उड़ानों के लिए 'ग्राउंड स्टॉप' जारी कर दिया है. शुरुआत में 05:30 GMT तक उड़ानों पर रोक लगाई गई थी, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे 18:00 GMT तक बंद रखा जा सकता है. एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां रनवे से मलबा हटाने और जांच करने में जुटी हैं। 

    शुरुआती रिपोर्ट की मानें तो हादसे की वजह खराब मौसम और विजिबिलिटी की कमी बताई जा रही है. फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि दमकल की गाड़ी रनवे पर क्यों मौजूद थी. रेगुलेटर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सिक्योरिटी स्टैंडर्ड की भी समीक्षा की जाएगी। 

  • अमेरिका में उठी आवाज: ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ को लेकर नरसंहार घोषित करने की मांग तेज

    अमेरिका में उठी आवाज: ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ को लेकर नरसंहार घोषित करने की मांग तेज

    वाशिंगटन.

    अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें मांग की गई है कि पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा 25 मार्च 1971 को बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को 'युद्ध अपराध और नरसंहार' माना जाए। ओहायो से डेमोक्रेट सांसद लैंड्समैन ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे अब विदेश मामलों की समिति को भेज दिया गया है।

    क्या था ऑपरेशन सर्चलाइट
    प्रस्ताव में कहा गया है कि 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तान सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया और उसकी सेना ने जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा से प्रेरित उग्र इस्लामी समूहों के साथ मिलकर पूर्वी पाकिस्तान में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' नाम से एक व्यापक दमन अभियान शुरू किया, जिसमें नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया। इसमें यह भी कहा गया है कि 28 मार्च 1971 को ढाका में अमेरिका के महावाणिज्य दूत आर्चर ब्लड ने वाशिंगटन को ''चुनिंदा नरसंहार'' शीर्षक से एक टेलीग्राम भेजा था, जिसमें उन्होंने लिखा था, ''पाकिस्तानी सेना के समर्थन से गैर-बंगाली मुसलमान गरीब बस्तियों पर संगठित हमले कर रहे हैं और बंगालियों तथा हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।''

    जब बांग्लादेश पाकिस्तान का ही हिस्सा था तब 1970 में पहली बार पूर्वी पाकिस्तान में चुनाव हुए। इसमें शेख मुजीबुर्रहमान की जीत हुई। याह्या खान और जुल्फिकार अली भुट्टो इसके खिलाफ थे। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी फौज लोगों पर टूट पड़ी। आवामी लीग के लोगों को ढूंढ ढूंढकर मारा जाने लगा। जल्द ही यह हिंसा अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढने लगी। आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के इस ऑपरेशन सर्चलाइट में 30 लाख लोग मारे गए थे और 4 लाख महिलाओं के साथ रेप हुआ था।

    ब्लड टेलिग्राम
    लैंड्समैन ने बताया कि छह अप्रैल 1971 को आर्चर ब्लड ने अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर आपत्ति जताते हुए एक संदेश भेजा था, जिस पर ढाका वाणिज्य दूतावास के 20 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इसे बाद में ''ब्लड टेलीग्राम'' के नाम से जाना गया। उस टेलीग्राम में कहा गया था, ''लेकिन हमने इस आधार पर हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है कि अवामी संघर्ष, जिसमें दुर्भाग्यवश नरसंहार शब्द लागू होता है, एक संप्रभु देश का आंतरिक मामला है।'' लैंड्समैन द्वारा लाए गए प्रस्ताव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से आग्रह किया गया है कि वह 25 मार्च 1971 को बांग्लादेश के लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा करे। प्रस्ताव में कहा गया है कि ''पाकिस्तानी सेना और उसके इस्लामी सहयोगियों ने धर्म और लिंग की परवाह किए बिना जातीय बंगालियों की हत्या की, उनके नेताओं, बुद्धिजीवियों, पेशेवरों और छात्रों को मार डाला और हजारों महिलाओं को यौन दासता के लिए मजबूर किया।''

    इसमें यह भी कहा गया है कि ''उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया, जिनके खिलाफ सामूहिक हत्याएं, सामूहिक बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और जबरन निष्कासन जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया।' प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि किसी भी जातीय या धार्मिक समुदाय को उसके सदस्यों द्वारा किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वह 1971 में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और उसके सहयोगी जमात-ए-इस्लामी द्वारा बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और नरसंहार के रूप में मान्यता दें।

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: सऊदी अरब ने ईरानी अफसरों को निकाला बाहर

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: सऊदी अरब ने ईरानी अफसरों को निकाला बाहर

    नई दिल्ली.

    अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में जिस तरह से हमले किए हैं उससे अरब के समीकरण ही बिगड़ गए हैं। सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के अधिकारियों को तत्काल देश छोड़ने का फरमान सुना दिया है। सऊदी अरब ने कहा है कि ईरान के सभी अधिकारी 24 घंटे के अंदर देश छोड़ दें। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने रविवार सुबह यह आदेश जारी किया है।

    सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों को उल्लंघन किया है। एक अच्छे पड़ोसी को अपने पड़ोसी की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। ईरान ने बीजिंग समझौते और यूएन सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन किया है। सऊदी अरब ने कहा कि तेहरान ने जो कुछ भी किया है उससे इस्लामिक एकता खतरे में पड़ गई है।
    सऊदी अरब ने कहा कि बार-बार समझाने के बाद भी ईरान अपने पड़ोसी देशों को निशाना बना रहा है। आने वाले समय में उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सऊदी अरब ने साफ कहा है कि अपनी सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने से परहेज नहीं किया जाएगा। इस आदेश के कुछ देर बाद ही सऊदी अरब प्रशासन ने ईरानी ड्रोन को मार गिराने की भी पुष्टि की है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि रियाद की तरफ तीन बैलिस्टिक मिसाइल छोड़ी गई थीं जिन्हें असामान में ही ध्वस्त कर दिया गया।

  • पाकिस्तान में शिया-सुन्नी विवाद के बीच मुनीर की सांसें फूलीं, उलेमाओं से मिले

    पाकिस्तान में शिया-सुन्नी विवाद के बीच मुनीर की सांसें फूलीं, उलेमाओं से मिले

    इस्लामबाद 

    ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पाकिस्तान में शिया-सुन्नी तनाव की आग भड़कने की आशंका बढ़ गई है। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर शिया विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़क उठी थी, जिसने देश के अंदर सांप्रदायिक संतुलन को हिला दिया है। इस संवेदनशील स्थिति में पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने शिया उलेमाओं से मुलाकात की, लेकिन यह बैठक विवादों में घिर गई।

    रमजान के दौरान इफ्तार के मौके पर रावलपिंडी में हुई इस बैठक में मुनीर ने कथित तौर पर शिया धर्मगुरुओं से कहा कि अगर उन्हें ईरान से इतनी मोहब्बत है, तो वे ईरान चले जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि 'कायदे आजम जिन्ना खुद शिया थे', लेकिन उनका मुख्य जोर इस बात पर था कि किसी दूसरे देश की घटनाओं के आधार पर पाकिस्तान में हिंसा या अशांति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, शिया समुदाय के कुछ नेताओं और सोशल मीडिया पर इस बयान को अपमानजनक बताया जा रहा है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि मुनीर ने बैठक में एकतरफा मॉनोलॉग दिया, उलेमाओं को बोलने का मौका नहीं दिया और अचानक चले गए। इससे शिया समुदाय में रोष बढ़ा है और कुछ धार्मिक नेताओं ने इसे एंटी-शिया एजेंडा करार दिया है।

    बेहद मुश्किल कूटनीतिक राह पर पाकिस्तान
    पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका में जारी जंग के बीच पाकिस्तान एक बेहद मुश्किल कूटनीतिक राह पर चल रहा है। सऊदी अरब के साथ गहरे रणनीतिक व रक्षा संबंध, पुरानी भू-राजनीतिक वफादारी और आर्थिक निर्भरता के कारण पाकिस्तान पर यह बाहरी दबाव है कि अगर युद्ध और भीषण होता है तो वह अपने पारंपरिक खाड़ी सहयोगी का समर्थन करे। वहीं दूसरी ओर, देश की आंतरिक सांप्रदायिक संवेदनशीलता और घरेलू सुरक्षा चिंताओं के कारण किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन करना जोखिम भरा हो गया है। इसी वजह से पाकिस्तान सतर्क तटस्थता की नीति अपनाने को मजबूर है, जिसे बनाए रखना अब उसके लिए कठिन होता जा रहा है। इन तमाम दबावों और दुविधाओं की झलक पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की हालिया टिप्पणियों में स्पष्ट रूप से देखने को मिली है।

    शिया उलेमाओं के साथ सेना प्रमुख की बैठक
    जनरल असीम मुनीर ने हाल ही में अहल-ए-तशीह (शिया) समुदाय के धार्मिक विद्वानों और उलेमाओं से मुलाकात की। इस बातचीत का मुख्य फोकस राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सौहार्द और बढ़ती क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता के बीच पाकिस्तान के कूटनीतिक रुख पर था। इस दौरान मुनीर का मुख्य संदेश बिल्कुल स्पष्ट था- सबसे पहले तो पाकिस्तान है।

    'हम पहले मुसलमान और पाकिस्तानी हैं, फिर शिया-सुन्नी'
    ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष को लेकर शिया समुदाय की चिंताओं को संबोधित करते हुए, जनरल मुनीर ने इससे जुड़ी भावनात्मक और धार्मिक संवेदनाओं को स्वीकार किया। लेकिन, उन्होंने धार्मिक नेताओं से राष्ट्रीय स्थिरता को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा- हम पहले मुसलमान और पाकिस्तानी हैं; उसके बाद शिया या सुन्नी। उनका संदेश था कि सांप्रदायिक पहचान को राष्ट्रीय हितों पर हावी नहीं होने देना चाहिए। मुनीर ने पाकिस्तान की डेमोग्राफी का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही देश में सुन्नी बहुसंख्यक हैं, लेकिन आबादी का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा शिया है। उलेमाओं से बात करते हुए उन्होंने कहा- मैं शिया समुदाय की भावनाओं को समझता हूं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि विदेशों में हो रहे घटनाक्रमों का गुस्सा पाकिस्तान में घरेलू अशांति में नहीं बदलना चाहिए।

    आम पाकिस्तानी को क्यों भुगतना चाहिए?
    सेना प्रमुख ने सख्त चेतावनी दी कि पाकिस्तान अपनी सीमाओं के बाहर के संघर्षों के कारण होने वाली आंतरिक अस्थिरता को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा- पाकिस्तान अन्य देशों के मुद्दों, नीतियों और संघर्षों के कारण होने वाले दंगों का बोझ नहीं उठा सकता। एक आम पाकिस्तानी को इसका खामियाजा क्यों भुगतना चाहिए? उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल हिंसा भड़काने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने सभी संप्रदायों के मौलवियों और उलेमाओं से एकता, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देने तथा आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की।

    सऊदी अरब के साथ रणनीतिक संबंधों की पुष्टि
    एक तरफ जहां उन्होंने देश के भीतर शांति की अपील की, वहीं दूसरी तरफ सेना प्रमुख ने सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के गहरे रणनीतिक और रक्षा संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने दोनों देशों को करीबी रक्षा साझेदार बताया, जो पुराने सुरक्षा सहयोग और आपसी प्रतिबद्धताओं से बंधे हुए हैं। मुनीर ने मक्का और मदीना में इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों (हरमैन शरीफैन) के 'रक्षक' के रूप में इस्लामाबाद की भूमिका का भी जिक्र किया। यह बयान पाकिस्तान की रणनीतिक सोच में सऊदी अरब के साथ रिश्ते के धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व को दर्शाता है।

    पाकिस्तान की दोहरी चुनौती
    सेना प्रमुख का यह दोहरा संदेश इस्लामाबाद की मौजूदा दुविधा को सटीक रूप से दर्शाता है।

    बाहरी दबाव: सैन्य साझेदारी, वित्तीय निर्भरता और खाड़ी देशों (विशेषकर सऊदी अरब) की उम्मीदें।

    आंतरिक कमजोरियां: सांप्रदायिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती, राजनीतिक अस्थिरता, और किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष में एक पक्ष लेने पर देश में सांप्रदायिक दंगे भड़कने का सीधा जोखिम।

    जनरल मुनीर की इन बातों से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान अपने कूटनीतिक विकल्पों को खुला रखते हुए देश में किसी भी तरह की घरेलू अशांति को पहले ही रोकने की कोशिश कर रहा है। देश के भीतर एकता और संयम की अपील करके और विदेशी मंच पर रणनीतिक संबंधों की पुष्टि करके, पाकिस्तान खुद को बहुत ही सावधानी से स्थापित कर रहा है। 

  • मिशन ईरान के करीब, ट्रंप ने सैन्य अभियान समेटने की ओर इशारा किया

    मिशन ईरान के करीब, ट्रंप ने सैन्य अभियान समेटने की ओर इशारा किया

    वाशिंगटन

    अमेरिका-ईरान युद्ध के 21वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला 'एग्जिट प्लान' साझा किया है.  'ट्रुथ सोशल' पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने के 'बेहद करीब' है और अब वह मध्य पूर्व में जारी अपने बड़े सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे कम करने (Winding Down) पर विचार कर रहा है। 

    ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उन उपलब्धियों को गिनाया जिन्हें वे जीत का आधार मान रहे हैं' उन्होंने कहा, 'हमने ईरान की मिसाइल क्षमता, रक्षा औद्योगिक आधार, नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है' ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियारों के करीब न पहुंच सके। 

    इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों-इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत की सुरक्षा सुनिश्चित की है और आगे भी उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। 

    ट्रंप के इस बयान का सबसे अहम हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा को लेकर था. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जो देश इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल अपने तेल और व्यापार के लिए करते हैं, अब सुरक्षा और पुलिसिंग की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर मदद कर सकता है, लेकिन यह जिम्मेदारी अन्य देशों को निभानी चाहिए। 

    ट्रंप ने तर्क दिया, 'अमेरिका इस रास्ते का उपयोग नहीं करता है, इसलिए अन्य देशों को आगे आना चाहिए'' उन्होंने इसे उन देशों के लिए एक 'आसान सैन्य अभियान' बताया और कहा कि ईरान का खतरा खत्म होने के बाद अमेरिका की मुख्य भूमिका की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। 

    आपको बता दें कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. हाल के हफ्तों में यहां हमलों और तनाव के कारण वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ा है. ट्रंप के इस बयान को ऐसे समय में देखा जा रहा है जब युद्ध को लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है। 

  • ईरानी ड्रोन अटैक से कुवैत की रिफाइनरी में लगी भीषण आग, तीन को फांसी की सजा

    ईरानी ड्रोन अटैक से कुवैत की रिफाइनरी में लगी भीषण आग, तीन को फांसी की सजा

    तेहरान 
    अमेरिका–ईरान युद्ध अपने 20वें दिन पूरे होने के साथ ही पूरे क्षेत्र में हमले तेज हो गए हैं. हालांकि इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वह “कहीं भी सेना तैनात करने” पर विचार नहीं कर रहे हैं. वहीं इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दावा किया है कि वो यह जंग जीत रहे हैं और ईरान युद्ध में पूरी तरह तबाह हो गया है. नेतन्याहू ने कहा कि यह अभियान “जब तक आवश्यक होगा” तब तक जारी रहेगा।

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी सेना के एक F-35 लड़ाकू विमान पर हमला किया है जिससे उसे नुकसान पहुंचा है. जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि फिलहाल अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने ग्राउंड ट्रूप्स नहीं भेज रहा है।

    कुवैत की रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक
    कुवैत ने जानकारी दी है कि मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर रात में ड्रोन हमला हुआ, जिससे कुछ यूनिट्स में आग लग गई. KPC के अनुसार, दमकल टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की कार्रवाई की और सुरक्षा के मद्देनजर कुछ यूनिट्स को बंद कर दिया गया।

    ईरान पर अचानक हमला करना सरप्राइज था- डोनाल्ड ट्रंप
    व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने 1941 के पर्ल हार्बर हमले का उल्लेख किया, जिस पर प्रधानमंत्री ताकाइची कुछ असहज दिखाई दीं।

    ट्रंप ने कहा कि ईरान पर हालिया हमलों से पहले किसी को जानकारी नहीं दी गई क्योंकि अमेरिका सरप्राइज देना चाहता था. उन्होंने आगे कहा कि सरप्राइज के महत्व को जापान से बेहतर कौन समझ सकता है, जैसे कि पर्ल हार्बर हमले से पहले भी कोई सूचना नहीं दी गई थी।

    ईरान ने मोजतबा खामेनेई का ‘रेयर वीडियो’ किया जारी
    अमेरिका-इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद से ही जंग जारी है, लेकिन अभी तक जंग थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं. इस बीच ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने मोजतबा खामेनेई का एक रेयर वीडियो जारी किया है।

    ट्रंप को कौन बता सकता है कि क्या करना है? – बेंजामिन नेतन्याहू
    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यह दावा खारिज किया है कि उन्होंने अमेरिका को इजरायल-ईरान संघर्ष में शामिल किया है. नेतन्याहू ने कहा, “क्या सच में कोई सोचता है कि कोई राष्ट्रपति ट्रंप को बता सकता है कि उन्हें क्या करना है?”

    ईरान पर किए गए हमले का आज 20वां दिन है. इस दौरान युद्ध में कोई कमी नहीं आई है. साथ ही युद्ध थमने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं. अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर लगातार हमले जारी है. इसी क्रम में ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खतीब के भी मारे जाने की ताजा खबर सामने आई है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसकी पुष्टि की है. इस तरह पिछले दो दिनों में ईरान के तीन ताकतवर लोग मारे गए. इससे पहले मंगलवार को इजराइल के हवाई हमलों में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और बासिज अर्धसैनिक बल के प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी भी मारे गए थे. इस बीच ईरान ने लारिजानी के मारे जाने के बदले में इजराइल और खाड़ी देशों में हमले तेज कर दिए. अबु धाबी मीडिया ऑफिस ने बताया कि अबु धाबी में हबशान गैस प्लांट को हाल ही में रोकी गई मिसाइलों के मलबे से हुई एक घटना के बाद इसे बंद कर दिया गया है।

    ऑफिस ने आगे बताया कि अधिकारी बाब ऑयलफील्ड और गैस प्लांट में हुई घटनाओं पर भी कार्रवाई कर रहे हैं. मीडिया ऑफिस ने पुष्टि की, गैस प्लांट में काम रोक दिया गया है, और किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है. कतर में बीती रात फारसी खाड़ी में अहम ऊर्जा इंफ़्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की चेतावनियों के बाद कतर की एक बड़ी फैसिलिटी में आग लगने की खबरें आई और सऊदी अरब के ऊपर हवाई खतरों को रोका गया. कतर के गृह मंत्रालय ने बुधवार को पर एक पोस्ट में बताया कि सिविल डिफेंस की टीमें रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में आग लग गई।

    यह जगह प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का एक अहम केंद्र है और कतर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. सऊदी अरब, कुवैत और अन्य अरब देशों को भी बुधवार को ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार का सामना करना पड़ा, जिन्हें हवाई सुरक्षा प्रणालियों द्वारा बीच में ही रोक दिया गया. वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि तेहरान का होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग पर अपनी कड़ी पकड़ छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. यह जलडमरूमध्य तेल परिवहन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।

    यूरोपियन देशों और जापान ने होर्मुज में जहाजों पर ईरानी हमलों की निंदा की

    लंदनः यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान के नेताओं ने गुरुवार को खाड़ी में बिना हथियार वाले कमर्शियल जहाजों और तेल और गैस प्लांट समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरानी हमलों की निंदा की, क्योंकि इस इलाके में संघर्ष बढ़ रहा है. एक जॉइंट स्टेटमेंट में, देशों ने ईरानी सेना द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को असल में बंद करने पर चिंता जताई और तेहरान से धमकियों, माइन बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों, और स्ट्रेट को ब्लॉक करने वाली दूसरी कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की अपील की, और यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2817 का पालन करने की अपील की।

    बयान में कहा गया, "नेविगेशन की आज़ादी इंटरनेशनल कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसमें यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी भी शामिल है." बयान में ईरान की कार्रवाइयों के दुनिया भर में असर पर ज़ोर दिया गया, खासकर सबसे कमज़ोर आबादी पर, और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले हमलों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई. देशों ने होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता पक्का करने की कोशिशों में मदद करने की तैयारी जताई और दूसरे देशों की तैयारी की प्लानिंग का स्वागत किया।

    बयान में आगे कहा गया, "UNSC रेज़ोल्यूशन 2817 के मुताबिक, हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि इंटरनेशनल शिपिंग में इस तरह की दखलअंदाज़ी और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में रुकावट इंटरनेशनल शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। इस बारे में, हम तेल और गैस इंस्टॉलेशन समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों पर तुरंत पूरी रोक लगाने की मांग करते हैं." होर्मुज स्ट्रेट एक ज़रूरी ट्रांज़िट रूट है जो आम तौर पर हर दिन 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 5 मिलियन बैरल तेल प्रोडक्ट्स को हैंडल करता है, जो दुनिया भर के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 परसेंट है।