Category: विदेश

  • उत्तर कोरिया की मिसाइल लॉन्च, अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से THAAD हटाने का किया ऐलान

    उत्तर कोरिया की मिसाइल लॉन्च, अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से THAAD हटाने का किया ऐलान

    फियोंगयांग

    ईरान वॉर अभी तक समाप्‍त नहीं हुआ है, पर एक और क्षेत्र में तनाव की आहट ने खलबली मचा दी है. कोरियाई प्रायद्वीप से बड़ी खबर सामने आ रही है. दक्षिण कोरिया का कहना है कि उत्‍तर कोरिया ने मिसाइल दागी है. उत्‍तर और दक्षिण केारिया के बीच तनाव नई बात नहीं है. दोनों देशों के बीच संबंध लंबे समय से तल्‍ख हैं. उत्‍तर कोरिया को चीन और रूस का करीबी माना जाता है, जब‍कि साउथ कोरिया अमेरिका का करीबी सहयोगी है. दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्‍य बेस भी स्थित है. किम जॉन्‍ग उन के देश की तरफ से ऐसे समय में मिसाइल दागी गई है, जब अमेरिका दक्षिण कोरिया से अपने कुछ THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को हटाने पर विचार कर रहा है. ऐसे में उत्‍तर कोरिया के कदम से दक्षिण कोरिया की चिंता बढ़ गई है.

    रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ कोरिया ने समंदर की तरफ मिसाइल दागी है. उत्‍तर कोरिया की तरफ से अक्‍सर ही समंदर का रुख कर मिसाइल परीक्षण किए जाते रहे हैं. यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किम जोंग उन के देश की तरफ से इस तरह की कार्रवाई की गई है. हालांकि, इस बार की टाइमिंग काफी अहम है. पश्चिम एशिया में हालात पहले से ही खराब है. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्‍त रूप से ईरान पर अटैक कर दिया है. तेहरान की तरफ किए गए पलटवार से माहौल पहले ही तनावपूर्ण और गंभीर हो चुके हैं. ऐसे में उत्‍तर कोरिया की ओर से मिसाइल दागने से एशिया के एक और जोन में हालात तनावपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है. चीन की आक्रामक नीतियों की वजह से इस क्षेत्र में ऐसे ही तनाव का आलम है.

    जापान सतर्क
    उत्तर कोरिया ने शनिवार को एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया है. जापान के रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. ‘निक्‍केई एशिया’ के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि यह मिसाइल संभवतः जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर जाकर गिरी. इस प्रक्षेपण के कारण किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है. वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि उत्तर कोरिया ने पूर्व दिशा की ओर कम से कम एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र यानी प्रोजेक्‍टाइल दागा. इससे पहले उत्तर कोरिया ने 27 जनवरी को जापान सागर की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिनके बारे में भी आकलन किया गया था कि वे जापान के ईईजेड के बाहर गिरी थीं.

    बढ़ा तनाव, क्या खुलेगा जंग का तीसरा मोर्चा या होगी World WAR 3?

    दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, शनिवार को उत्तर कोरिया ने जापान सागर की ओर एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल दागी। इससे पूर्वी एशिया में नया तनाव पैदा हो गया है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे संघर्ष अभी भी वैश्विक सुरक्षा चिंताओं का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि यह मिसाइल उत्तर कोरिया से उसके पूर्वी जलक्षेत्र की ओर दागी गई थी, जिसे आमतौर पर जापान सागर (पूर्वी सागर) के नाम से जाना जाता है। अधिकारियों ने शुरू में इस हथियार को अज्ञात मिसाइल बताया था, लेकिन माना जा रहा है कि यह एक बैलिस्टिक मिसाइल ही थी।

    अमेरिका- दक्षिण कोरिया कर रहे सैन्य अभ्यास
    बता दें कि यह मिसाइल तब दागी गई जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया मिलकर अपना सालाना स्प्रिंगटाइम संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे थे, जिसमें हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ भी एक बढ़ता हुआ युद्ध लड़ रहा है। हाल ही में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया था, जो कि युद्ध हर दिन के साथ बढ़ा और हर जगह तबाही मची हुई है। इसमें ईरान से लेकर इजयारल और अमेरिका तक को नुकसान हो रहा है, क्योंकि ईरान खाड़ी देश में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    उत्तर कोरिया ने क्यों की होगी मिसाइल लॉन्च?
    उत्तरी कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के सैन्य अभ्यासों को 'आक्रमण का पूर्वाभ्यास' बताता रहा है, और अक्सर इनका इस्तेमाल अपने सैन्य प्रदर्शनों या हथियारों के परीक्षण को तेज करने के बहाने के तौर पर करता है।

    यह मिसाइल लॉन्च, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन द्वारा मंगलवार को वॉशिंगटन और सियोल की आलोचना किए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ। उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के लिए एक खतरनाक मोड़ पर अपने सैन्य अभ्यास जारी रखने के लिए इन दोनों देशों की आलोचना की थी, और चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को दी गई कोई भी चुनौती भयानक परिणामों को जन्म देगी।

    बता दें कि 11-दिवसीय 'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास, जो 19 मार्च तक चलेगा, यह संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले दो वार्षिक कमांड पोस्ट अभ्यासों में से एक है।

  • अमेरिकी दूतावास पर बगदाद में हेलीपैड पर मिसाइल और ड्रोन से हमला

    अमेरिकी दूतावास पर बगदाद में हेलीपैड पर मिसाइल और ड्रोन से हमला

    बगदाद

    इराक की राजधानी बगदाद के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले 'ग्रीन ज़ोन' में स्थित अमेरिकी दूतावास पर एक बड़ा हमला हुआ है. इराकी अधिकारियों के अनुसार, दूतावास परिसर के भीतर मौजूद हेलीपैड को निशाना बनाकर मिसाइल दागी गई है. हमले के तुरंत बाद दूतावास परिसर से काला धुआं निकलता देखा गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है. अमेरिकी दूतावास में लगे रडार सिस्टम को एक आत्मघाती ड्रोन द्वारा निशाना बनाया गया।

    सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर से धुएं का गुबार उठता साफ दिखाई दे रहा है. हालांकि, अभी तक दूतावास के भीतर किसी के हताहत होने या सटीक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अमेरिकी पक्ष से नहीं की गई है. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है।

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में 'इराकी इस्लामिक रेजिस्टेंस' ने अमेरिकी सैन्य और खुफिया कर्मियों पर भारी इनाम की घोषणा की थी और एक अमेरिकी विमान को मार गिराने का दावा किया था।

    माना जा रहा है कि यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा हो सकता है. दूतावास पर हमला सीधे तौर पर वाशिंगटन को दी गई एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
    बगदाद में अमेरिकी दूतावास सबसे सुरक्षित राजनयिक परिसरों में से एक माना जाता है. इसके बावजूद मिसाइल का हेलिपैड तक पहुंचना सुरक्षा में एक बड़ी सेंध मानी जा रही है।

    ईरान को घुटनों पर लाने का ट्रंप कार्ड? 

    फारस की खाड़ी के शांत दिखने वाले नीले पानी के बीच एक छोटा सा द्वीप है – खार्ग आइलैंड. आकार में यह इतना छोटा है कि पहली नजर में इसे मैप पर ढूंढना भी मुश्किल लगता है. लेकिन आज यही छोटा सा द्वीप वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सैन्य रणनीति के केंद्र में आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐलान किया कि अमेरिकी सेना ने खार्ग आइलैंड पर बड़ा सैन्य हमला किया है. ट्रंप के मुताबिक यह हमला "मध्य पूर्व के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक" था, जिसमें द्वीप पर मौजूद लगभग सभी सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस द्वीप को ईरानी शासन का "क्राउन ज्वेल" यानी सबसे कीमती संपत्ति बताया. उन्होंने यह भी कहा कि हमले के दौरान जानबूझकर तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया गया. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को बाधित करने के आरोप लग रहे हैं. यही वजह है कि अचानक खार्ग आइलैंड अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है.खार्ग आइलैंड आकार में सिर्फ 20 वर्ग किलोमीटर का है. इसकी चौड़ाई करीब 3 मील और लंबाई लगभग 7 मील है. यह ईरान के बुशेहर प्रांत के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है. द्वीप की आबादी बहुत बड़ी नहीं है. यहां लगभग 3,000 से 5,000 लोग रहते हैं. इनमें स्थानीय मछुआरों के परिवार, ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी के कर्मचारी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के सैनिक शामिल हैं।

     

  • पाकिस्तान में दहशत का इशारा, तालिबान ने जारी किया ‘डेथ वारंट’

    पाकिस्तान में दहशत का इशारा, तालिबान ने जारी किया ‘डेथ वारंट’

    कंधार

    अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अब 'आर-पार' की जंग में तब्दील होता दिख रहा है. पाकिस्तान द्वारा की गई एयरस्ट्राइक के बाद अब तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान के प्रमुख शहरों पर हमले की धमकी दी है. यह चेतावनी कथित तौर पर अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद सामने आई है। 

    रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत के तालिबान गवर्नर के प्रवक्ता हाजी जाहिद ने कहा कि यदि पाकिस्तान की ओर से ऐसे हमले जारी रहते हैं तो पाकिस्तान के बड़े शहरों को निशाना बनाया जा सकता है. उन्होंने विशेष रूप से इस्लामाबाद, कराची और क्वेटा का उल्लेख किया। 

    यह बयान ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में राजधानी काबुल और कंधार सहित कुछ अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। 

    हाजी जाहिद,हाजी युसूफ के प्रवक्ता हैं. वफा को तालिबान के शीर्ष नेता हैबतुल्ला अखुंदजादा का करीबी माना जाता है और उत्तरी अफगानिस्तान में उनका प्रभाव काफी मजबूत बताया जाता है। 

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है. अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा लंबे समय से विवाद और सैन्य झड़पों का केंद्र रही है. समय-समय पर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और उग्रवादियों को समर्थन देने के आरोप लगाते रहे हैं। 

    ताजा बयान के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. विश्लेषकों के मुताबिक यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और बयानबाजी इसी तरह जारी रही तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। 

    फिलहाल पाकिस्तान की ओर से तालिबान के इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जरूरी होगी। 

  • मोजतबा खामेनेई कोमा में और पैर कटने की अफवाह, वेस्टर्न मीडिया में सनसनी

    मोजतबा खामेनेई कोमा में और पैर कटने की अफवाह, वेस्टर्न मीडिया में सनसनी

    तेहरान

    ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. सबसे हैरान करने वाला दावा है कि मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं. उनका एक पैर भी काट दिया गया है और उनकी हालत बेहद संजीदा है. ये दावा ब्रिटिश अखबार 'द सन' ने अपनी रिपोर्ट में किया है। 

    'द सन' की ये रिपोर्ट उस समय सामने आई, जब कुछ घंटों पहले ही मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में हमले जारी रखे जाएंगे और होर्मुज स्ट्रेट की भी नाकेबंदी रहेगी।  

    'द सन' ने ये रिपोर्ट अपने सूत्र के हवाले से चलाई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई की हालत बहुत खराब है और वह कोमा में है. वह अस्पताल में ईरान के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री मोहम्मद रजा जफरगंदी की निगरानी में हैं. जफरगंदी ईरान के टॉप सर्जन्स में से एक हैं। 

    रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
    'द सन' ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि मोजतबा खामेनेई तेहरान की सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में इंटेसिव केयर में है. इस बिल्डिंग के एक हिस्से को भारी सिक्योरिटी के बीच सील कर दिया गया है। 

    रिपोर्ट में बताया गया कि मोजतबा का एक पैर कट गया है और उनके पेट और लिवर को भी गंभीर चोटें आई हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को उसी हमले में घायल हुए थे, जिसमें आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. हालांकि, ईरान के सरकारी टीवी के एंकर मोजतबा खामेनेई को 'रमजान का जांबाज' यानी 'घायल योद्धा' बताते हैं। 

    'द सन' को सूत्र ने बताया, 'उनका एक या दोनों पैर काट दिए गए हैं. उनका लिवर या पेट भी फट गया है. वह शायद कोमा में भी हैं.' रिपोर्ट में कहा गया है कि दो दिन पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान चुपके से मोजतबा खामेनेई से मिलने गए थे. सिना हॉस्पिटल की इंटेंसिव केयर यूनिट में सिर्फ कुछ ही ऑथराइज्ड लोगों को ही जाने की इजाजत है. 

    कितना मजबूत है ये दावा?
    28 फरवरी से जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग शुरू हुई है, तब से मोजतबा खामेनेई एक बार भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। 

    मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. खामेनेई की मौत के लगभग एक हफ्ते बाद. उसी दिन ईरानी मीडिया ने खबरें दी थीं कि मोजतबा खामेनेई देश को संबोधित करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 

    सुप्रीम लीडर चुने जाने के पांच दिन के बाद मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश दुनिया के सामने आया. लेकिन उनके संदेश को टीवी पर एक एंकर ने पढ़ा. वह कैमरे पर भी दिखाई नहीं दिए। 

    ईरान के सरकारी टीवी रिपोर्ट्स के एंकर्स ने मोजतबा खामेनेई को 'रमजान युद्ध का जांबाज' यानी 'घायल योद्धा' बताया. हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की कि मोजतबा 28 फरवरी को घायल हुए थे या नहीं। 

    इन्हीं सब बातों के कारण उनकी हेल्थ को लेकर अटकलें, अफवाहें और दावे और भी बढ़ गए हैं. हालांकि, अब तक मोजतबा खामेनेई को सिर्फ दावे ही किए जा रहे हैं, कुछ पुष्टि नहीं हुई है। 

     

  • ईरान का बड़ा ऐलान: अमेरिका से जंग खत्म करने को तैयार, लेकिन तीन शर्तें ट्रंप को नहीं हजम होंगी

    ईरान का बड़ा ऐलान: अमेरिका से जंग खत्म करने को तैयार, लेकिन तीन शर्तें ट्रंप को नहीं हजम होंगी

    वाशिंगटन

    ईरान के खिलाफ जारी युद्ध अमेरिका के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है. पेंटागन के शुरुआती अनुमान के मुताबिक जंग के पहले छह दिनों में ही अमेरिकी टैक्सपेयर्स के कम से कम 11.3 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. इस बीच ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने का ऑफर रखा है. लेकिन इसके साथ उन्होंने तीन शर्तें भी रखी हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि तेहरान क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन मौजूदा संघर्ष तभी खत्म हो सकता है जब ईरान के ‘वैध अधिकारों’ को मान्यता दी जाए. उन्होंने साफ किया कि किसी भी समाधान के लिए ईरान की मुख्य मांगों को स्वीकार करना जरूरी होगा।

    ईरान ने युद्ध खत्म करने की क्या शर्तें रखीं?
    पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने दोहराया कि ईरान का मानना है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत ‘जायनिस्ट शासन और अमेरिका’ की कार्रवाई से हुई. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि इस संकट के समाधान के लिए तीन अहम बातें जरूरी हैं।

        ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए.
        युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई यानी मुआवजा दिया जाए.
        भविष्य में ईरान पर हमले रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए.

    अमेरिका ईरान से जीत गया- ट्रंप
    एक तरफ जब पेंटागन कह रहा है कि अरबों डॉलर हर रोज इस युद्ध में खर्च हो रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ ट्रंप जीत का दावा कर रहे हैं. केंटकी में एक रैली करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध अमेरिका जीत चुका है. हालांकि उन्होंने आगे बताया कि ऑपरेशन खत्म नहीं होगा. वहीं उन्होंने दावा किया कि अब तक 58 नौसैनिक जहाज नष्ट किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका काम पूरा होने तक अभियान जारी रखेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई है।

    युद्ध में अब तक कितनी मौत?
    अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे. इसके बाद से दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक ठिकानों पर हमले किए. रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में 1,200 से ज्यादा ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है. दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर हमले किए, जिनमें 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 140 से ज्यादा घायल हुए हैं।

  • UAE के प्रमुख शहरों और बंदरगाहों पर ईरान का हमला, सिटी बैंक ने सुरक्षा कारणों से की शाखाएं बंद

    UAE के प्रमुख शहरों और बंदरगाहों पर ईरान का हमला, सिटी बैंक ने सुरक्षा कारणों से की शाखाएं बंद

    दुबई
    ईरान ने गुरुवार तड़के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर मिसाइलों और ड्रोनों से बड़ा हमला किया है. दुबई के जेबेल अली बंदरगाह से 65 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में एक कंटेनर जहाज पर अज्ञात गोला गिरने से आग लग गई है. ब्रिटिश सेना के मुताबिक, जहाज के सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। 

    यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने देश भर में ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया है. कई जगह धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं. अधिकारियों ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमले की भी निंदा की है। 

    यूएई में सुरक्षा कारणों से सिटी बैंक ने एक को छोड़कर अपनी सभी शाखाएं बंद रखने का फैसला किया है। 

    जहाज पर हमला…

    दुबई तट के पास जेबेल अली पोर्ट के करीब एक कंटेनर जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया. ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने पुष्टि की है कि यह हमला सुबह होने से ठीक पहले हुआ. हमले के बाद जहाज पर मामूली आग लग गई थी, जिसे कंट्रोल कर लिया गया है. राहत की बात यह है कि इस घटना में क्रू मेंबर्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। 

    यूएई का एयर डिफेंस…
    यूएई की नेशनल इमरजेंसी क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने निवासियों को सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आसमान में सुनाई देने वाले धमाके ईरानी मिसाइलों को बीच में रोकने (इंटरसेप्शन) के कारण हुए हैं. दुबई में एक रिहायशी इमारत पर भी ड्रोन गिरने की खबर है, जहां लगी आग पर काबू पा लिया गया है. अधिकारियों ने इसे ईरान की ओर से शुरू की गई नई लहर बताया है। 

    फाइनेंशियल बिल्डिंग्स पर मंडराया खतरा
    ईरान द्वारा क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने की धमकी के बाद सिटी बैंक ने बड़ा कदम उठाया है. बैंक ने ऐलान किया है कि वह गुरुवार को देश की एक ब्रांच को छोड़कर बाकी सभी को बंद रखा जाएगा. बैंक मैनेजमेंट ने यह फैसला देश के अंदर बन रही स्थितियों को देखते हुए लिया है. यूएई ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमलों को विश्वासघाती कार्रवाई बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। 

  • 12 दिन में संघर्ष तेज, ईरान ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला कर दिखाया कॉन्फिडेंस, हॉर्मुज पर कब्ज़ा

    12 दिन में संघर्ष तेज, ईरान ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला कर दिखाया कॉन्फिडेंस, हॉर्मुज पर कब्ज़ा

    तेहरान

    ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया. रात भर पूरे पश्चिम एशिया में हवाई हमले के सायरन, मिसाइल लॉन्च और नए हमलों की खबरें सामने आईं. इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले जारी रखे, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया. हालांकि अब इन हमलों से ज्यादा बड़ा मुद्दा स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जिसने बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। 

    ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है. इसमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के मध्य हिस्सों को निशाना बनाया गया. वहीं इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई ठिकानों पर एक और बड़ा हमला किया है. उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ईरान के लोगों को सीधा संदेश यह आपके लिए जीवन में एक बार मिलने वाला ऐसा अवसर है जिससे आप अयातुल्लाहशासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं. अयातुल्ला अब इस दुनिया में नहीं हैं और मैं जानता हूं कि आप नहीं चाहते कि उनकी जगह कोई दूसरा तानाशाह आ जाए। 

    स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज पर बढ़ा तनाव, बड़ी मुसीबत
    अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया, जिनमें बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाज भी शामिल थे. हॉर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसके बलों ने इस अहम तेल मार्ग के पास इन जहाजों को निशाना बनाया। 

    1300 से ज्यादा की हो चुकी है मौत
    संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका और इजराइल के हमलों में 1300 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है. रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के हो सकते हैं. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बताया कि ईरान के हमलों में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है। 

    बढ़ रहा है संघर्ष का दायरा
        इस युद्ध का असर पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई दे रहा है. लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए, जो ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को हुए हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई. वहीं हिज्बुल्लाह ने उसी दिन इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया। 

        खाड़ी देशों में भी हवाई सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए. बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं. कतर ने सात मिसाइल हमलों की पुष्टि की जबकि कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में पांच ड्रोन घुसने की जानकारी दी। 

        सऊदी अरब ने चार ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया. वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1,475 ड्रोन और 260 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. इससे साफ है कि यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। 

    इजरायल ने रात में किया हमला, ईरान ने सुबह-सुबह दिया धुआंधार जवाब
    मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच इजरायल ने तेहरान में हमलों की दूसरी लहर शुरू की. इजरायली सेना ने बताया कि उसने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हवाई हमले किए. बुधवार सुबह ईरान की ओर से ने कहा कि तेहरान के एक रिहायशी इलाके को निशाना बनाया गया. वहीं लेबनान में इजरायली हमले के दौरान रेड क्रॉस की एक एम्बुलेंस पर हमला हुआ, जिसमें एक पैरामेडिक की मौत हो गई. दूसरी ओर ईरान की सेना ने दावा किया कि उसने युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे तेज और भारी ऑपरेशन शुरू किया है. सरकारी मीडिया के अनुसार इस हमले में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया.

    ईरान की 175 बच्चियों का हत्यारा कौन? ट्रंप की सेक्रेटरी ने क्या कहा
    व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एक स्कूल पर हमले के मामले में क्यों कहा कि ईरान के पास टॉमहॉक मिसाइल हो सकती है, जबकि ये मिसाइलें केवल अमेरिका और उसके तीन सहयोगी देशों के पास हैं. इस पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जवाब दिया कि राष्ट्रपति को अमेरिकी जनता के सामने अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है और इस पर जांच चल रही है.

    ईरान ने दागीं सऊदी अरब पर बैलिस्टिक मिसाइलें, 7 को मार गिराया गया
    ईरान के साथ चल रहे युद्ध के 12वें दिन सऊदी अरब ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश की ओर दागी गई सात बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये मिसाइलें देश के विभिन्न इलाकों की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया. मंत्रालय ने बताया कि सऊदी सेना लगातार हाई अलर्ट पर है और किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार है. हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं.

     ईरान ने इजरायल में मचाई है भारी तबाही, दिखा नहीं रहे नेतन्याहू: अरागची
    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे दुनिया से सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. अरागची ने दावा किया कि ईरान की शक्तिशाली सेना इजरायल के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, जिसे नेतन्याहू नहीं चाहते कि लोग देखें. उन्होंने दावा किया कि जमीन पर मौजूद ईरानी सैनिकों की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी मिसाइलों से इजराइल में भारी तबाही हुई है. अरागची के मुताबिक इन हमलों के बाद इजराइली नेतृत्व घबराया हुआ है और वहां की हवाई रक्षा प्रणाली भी अव्यवस्थित हो गई है. उन्होंने कहा कि ईरान की सेना अपने देश पर हुए हमलों का लगातार जवाब दे रही है और इजराइल को उसकी कार्रवाई का परिणाम भुगतना पड़ रहा है.

     

     

  • जबरन कब्जे पर क्या कहते हैं संयुक्त राष्ट्र के कानून?

    जबरन कब्जे पर क्या कहते हैं संयुक्त राष्ट्र के कानून?

    संयुक्त राष्ट्र

    दुनियाभर में अभी दो जंगे चल रही हैं, जिनकी चर्चा हर जगह हो रही है। इसमें पहला युद्ध तो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हो रहा है, जबकि दूसरा रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा है। रूस-यूक्रेन जंग फरवरी 2022 से ही जारी है। इस युद्ध में रूस ने यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जाया है, जिसमें डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसी जगहें शामिल हैं। इसके अलावा वह 2014 से ही क्रीमिया पर कब्जा करके बैठा है, जो कभी यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था। ये तो बस एक ताजा उदाहरण है, जिसमें किसी देश ने दूसरे देश के हिस्सों को कब्जाया है।

    अगर इतिहास उठाकर देखें तो ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे, जहां किसी देश ने पहले दूसरे मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ दी। फिर उस मुल्क के किसी हिस्से को कब्जा लिया। ईरान के साथ चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग में भी ऐसा होने की संभावना जताई जा रही है। अब यहां सवाल उठता है कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है? क्या किसी देश को दूसरे मुल्क की जमीन पर जबरन कब्जा करने का अधिकार है? संयुक्त राष्ट्र के नियम इस संबंध में क्या कहते हैं? अगर आप इंटरनेशनल रिलेशन के स्टूडेंट हैं या फिर सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो फिर आपको इसका जवाब भी मालूम होना चाहिए।

    देश कब्जाने को लेकर UN के नियम क्या हैं?
    संयुक्त राष्ट्र (UN) एक ऐसी संस्था है, जिसका प्रमुख काम दुनिया में शांति बनाए रखना है, ताकि युद्ध की संभावना पैदा ना हो। मगर फिर भी कई देशों के बीच युद्ध होते रहते हैं। UN के 193 सदस्य देश हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करना होता है। इस चार्टर को आप UN का संविधान मान सकते हैं, जिसमें बताया गया है कि किसी देश को क्या करना है और क्या नहीं करना है। इसी चार्टर में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि क्या कोई देश दूसरे देश के किसी हिस्से पर कब्जा कर सकता है या नहीं। UN चार्टर के आर्टिकल 2 में इस बारे में विस्तार से बात की गई है। इस आर्टिकल में 7 प्वाइंट्स हैं, जिसमें आर्टिकल 2(4) में कब्जे से संबंधित बातें हैं।

    आर्टिकल 2(4) में कहा गया है, 'सभी सदस्य देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी मुल्क की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी से परहेज करेंगे, या किसी भी अन्य ऐसे तरीके से परहेज करेंगे जो संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाता हो।' आसान भाषा में कहें तो इस आर्टिकल में कहा गया है कि दूसरे देशों पर ना तो हमला करें और ना ही उन्हें धमकी दें। यहां जिस क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की बात हुई है, उसका मतलब है कि किसी देश की ना तो जमीन कब्जाई जाए और ना ही उसके बॉर्डर चेंज किए जाएं। कुल मिलाकर शांति से रहें और युद्ध ना करें।

    जमीन कब्जाने के बाद क्या नियम लागू होते हैं?
    हालांकि, ऐसा देखने को मिलता है कि भले ही हर देश UN चार्टर पर साइन कर दे, लेकिन वह इसके नियमों का पालन नहीं करता है। जैसे रूस का ही उदाहरण लेते हैं, उसने UN के नियमों का पालन नहीं किया और यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जा लिया। अब यहां सवाल उठता है कि अगर कोई देश ऐसा कर देता है, तो फिर उसे कब्जे वाली जगह पर किन नियमों का पालन करना चाहिए। 12 अगस्त, 1949 को अपनाई गई चौथी जिनेवा संधि में इस बारे में विस्तार से बात हुई है। ये संधि युद्ध के समय और कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए समर्पित है।

    इसमें कहा गया है कि कब्जे वाले इलाके में उन सभी लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए, जो सेना के सदस्य नहीं हैं। कब्जे वाले इलाके में रहने वाले सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उनके साथ मारपीट या उन्हें टॉर्चर नहीं किया जा सकता है। कब्जाने वाले देश को इस बात की इजाजत नहीं है कि वह लोगों को भगाए या उन्हें डिपोर्ट करे। उसे इस बात की भी इजाजत नहीं है कि वह कब्जे वाले इलाके में अपने देश के नागरिकों को बसा सके। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कब्जा वाले इलाके में खाना और दवाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

  • US-South Korea सैन्य अभ्यास पर उत्तर कोरिया की चेतावनी, किम जोंग-उन की बहन ने कहा—परिणाम होंगे खतरनाक

    US-South Korea सैन्य अभ्यास पर उत्तर कोरिया की चेतावनी, किम जोंग-उन की बहन ने कहा—परिणाम होंगे खतरनाक

     उत्तर कोरिया

    कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। उत्तर कोरिया के सनकी किंग किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को चुनौती देने वाला कोई भी कदम “भयानक परिणाम” ला सकता है। यह बयान उस समय आया जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने सोमवार से 11 दिन तक चलने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास Freedom Shield की शुरुआत की है।

     इस अभ्यास में हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं और इसका उद्देश्य बदलते युद्ध परिदृश्यों के बीच दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता का परीक्षण करना है।किम यो जोंग ने बिना सीधे ईरान का नाम लिए कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और वैश्विक सुरक्षा ढांचा तेजी से कमजोर हो रहा है, अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया बाहरी खतरों के खिलाफ अपनी सैन्य शक्ति और युद्ध निरोधक क्षमता को लगातार मजबूत करता रहेगा। किम यो जोंग ने उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों को बार-बार अपनी “घातक युद्ध निरोधक क्षमता” का एहसास कराता रहेगा।

    प्योंगयांग लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संभावित हमले की तैयारी बताता रहा है और अक्सर इन्हें अपने हथियार परीक्षणों को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल करता है। हालांकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि यह अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य केवल संभावित खतरों के खिलाफ संयुक्त तैयारी को मजबूत करना है। aइसी अभ्यास के साथ Warrior Shield नामक फील्ड-ट्रेनिंग कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की भी आलोचना की थी और इसे “फर्जी शांति के बहाने किया गया अवैध आक्रामक कृत्य” बताया था। विश्लेषकों के अनुसार उत्तर कोरिया और ईरान उन कुछ देशों में शामिल हैं जिन्होंने यूक्रेन पर रूसी हमले का समर्थन किया है और दोनों पर रूस को सैन्य उपकरण देने के आरोप भी लगते रहे हैं।

  • दुबई एयरपोर्ट पर खतरे की घंटी: ईरान के हमले के बीच सायरन से दहशत

    दुबई एयरपोर्ट पर खतरे की घंटी: ईरान के हमले के बीच सायरन से दहशत

    दुबई

    पश्चिम एशिया में तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसकी लपटें अब दुबई तक पहुंच गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुबई के आसमान में मिसाइलें और एयरपोर्ट से धुआं उठता देखा गया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न केवल खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यटन के प्रमुख केंद्र दुबई में भी डर का माहौल पैदा कर दिया है।

    दुबई एयरपोर्ट पर हमले का असर ईरान की जवाबी कार्रवाई के दौरान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) को निशाना बनाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के कॉनकोर्स एरिया में मिसाइल या ड्रोन के गिरने से मामूली क्षति हुई है। घटना के तुरंत बाद वहां धुआं उठते देखा गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, दुबई मीडिया ऑफिस ने स्पष्ट किया है कि स्थिति को तुरंत काबू में कर लिया गया। इस हमले में चार लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

     बुर्ज अल अरब के पास दुर्घटना
    दुबई के आसमान में सक्रिय डिफेंस सिस्टम ने एक संदिग्ध ड्रोन को समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया। हालांकि, नष्ट किए गए ड्रोन का जलता हुआ मलबा विश्व प्रसिद्ध 'बुर्ज अल अरब' होटल की बाहरी दीवार पर जा गिरा। इससे होटल के एक हिस्से में हल्की आग लग गई, जिसे दमकल विभाग ने तुरंत बुझा दिया। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में मलबे का गिरना सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा गया है।

    सुरक्षा एजेंसियां और हाई अलर्ट
    इस हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं। पूरे शहर और संवेदनशील ठिकानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट संचालन को जल्द से जल्द सामान्य करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका ज्यादा असर न पड़े। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। फिलहाल, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।