Category: विदेश

  • डब्ल्यूएचओ प्रमुख बोले- ‘निपाह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी’

    डब्ल्यूएचओ प्रमुख बोले- ‘निपाह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी’

    वाशिंगटन.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि निपाह वायरस के मामले दुर्लभ हैं लेकिन गंभीर भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निपाह वायरस के प्रकोप से जुड़े मामले केवल भारत तक ही सीमित हैं। किसी अन्य देश से इनकी सूचना नहीं मिली है।

    पहली पहचान के बाद तीसरे मामला-घेब्रेयसस
    घेब्रेयेसस ने एक्स पर लिखा,"पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण के दो मामले सामने आए है। वे 1998 में वायरस की पहली पहचान के बाद से इस राज्य में तीसरे मामले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अधिकारी 190 से अधिक संपर्कों की निगरानी कर रहे हैं।  अभी तक किसी में भी यह बीमारी विकसित नहीं हुई है। उन्होंने आगे लिखा, "अधिकारियों ने बीमारी की निगरानी और परीक्षण बढ़ा दिए हैं, स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में रोकथाम और नियंत्रण के उपाय लागू किए हैं। जनता को खुद को सुरक्षित रखने के तरीकों के बारे में सूचित कर रहे हैं।"

    डब्ल्यूएचओ प्रमुख की यह चेतावनी वैश्विक स्वास्थ्य संस्था द्वारा यह कहने के एक दिन बाद आई है कि वायरस के फैलने का जोखिम कम है। किसी भी यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की कोई आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य निकाय ने यह भी कहा था कि मानव से मानव में संक्रमण बढ़ने का कोई सबूत नहीं है, और इसलिए जोखिम कम बना हुआ है।

    पश्चिम बंगाल में दो लोग हुए थे संक्रमित
    पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए थे। दोनों ही नर्सें थीं। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों ने बाद में बताया कि उनकी हालत में सुधार हुआ है। उनकी जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। पुरुष नर्स को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि महिला नर्स को वेंटिलेटर से हटा दिया गया है, लेकिन उन्हें अभी भी निगरानी में रखा गया है। डब्ल्यूएचओ ने एक विज्ञप्ति में कहा, "दोनों मामलों में दिसंबर 2025 के अंत में गंभीर एनआईवी संक्रमण के विशिष्ट लक्षण विकसित हुए और उन्हें जनवरी 2026 की शुरुआत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। 21 जनवरी 2026 तक, दूसरे मामले में नैदानिक सुधार देखा गया, जबकि पहला मामला गंभीर स्थिति में रहा।"

    निपाह वायरस चमगादड़ों से मनुष्यों में फैलता
    स्वास्थ्य निकाय ने बताया था कि निपाह वायरस चमगादड़ों से मनुष्यों में फैलता है और यह निकट संपर्क या दूषित भोजन के माध्यम से हो सकता है। इस वायरस से जुड़े लक्षण बुखार, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द हैं, जिससे इसका पता लगाना अधिक कठिन हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसे मस्तिष्क में सूजन होने की संभावना होती है और मृत्यु की संभावना 40% से 75% के बीच होती है।

  • पाक का आरोप- ‘भारत की मदद से बलूच  विद्रोही संगठन कर रहा हमले’

    पाक का आरोप- ‘भारत की मदद से बलूच विद्रोही संगठन कर रहा हमले’

    इस्लामाबाद.

    पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोहियों ने एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। इन हमलों में 80 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हुए हैं। वहीं पाकिस्तान ने इससे उलट ही दावा करते हुए कहा है कि उसके 18 सैनिक मारे गए हैं, जबकि 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। यही नहीं पाकिस्तान ने अपने घर में लगी आग के लिए भारत पर भड़ास निकाली है।

    चीन के हस्तक्षेप, CPEC प्रोजेक्ट और ग्वादर बंदरगाह के लिए बड़े पैमाने पर बलूचिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन वहां के स्थानीय निवासियों की जिंदगी बदतर है। इसी के विरोध में बलूच विद्रोही संगठन अकसर पाकिस्तानी सेना, पंजाबी मूल के लोगों और यहां तक की चीनी नागरिकों पर भी निशाना साधते रहते हैं। कई बार बलूच विद्रोही संगठनों ने खूनी हमले भी किए हैं। इस बार अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक अटैक किया है। लेकिन पाकिस्तान इन हमलों की वजह तलाशने की बजाय भारत पर ही भड़ास निकाल रहा है।

    पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगेंडा यूनिट ISPR ने इसके लिए भारत को जिम्मेदार बताने की कोशिश की है। उसने कहा कि ये हमले भारत से मदद पाने वाले फितना-अल-हिन्दुस्तान नाम के संगठन ने किए हैं। ये हमले क्वेटा, मस्तंग, नुशकी, दलबंदीन, खारन, पंजगुर, ग्वादर और पसनी में हुए हैं। इस तरह एक साथ ही कई शहरों पर बलूच विद्रोहियों ने हमले किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान जैसे संगठन की बात कर रहा है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है।

    पाकिस्तानी एजेंसी ने कहा कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान में क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया है। इसमें अब तक 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। इस कार्रवाई के दौरान 18 नागरिक और 15 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन से गहरी नाराजगी है। यही नहीं यहां पर अकसर पंजाबियों को टारगेट करते हुए भी हमले किए जाते रहे हैं। इसकी वजह पंजाबी वर्चस्व को माना जाता है। इस बीच खबर है कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के सारे रास्तों को भी पाकिस्तान ने बंद कर दिया है।

    खौफ इतना कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के रास्ते ही बंद
    डेरा गाजी खान के डिप्टी कमिश्नर उस्मान खालिद ने कहा कि बलूचिस्तान से पंजाब जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ऑपरेशन के दौरान बलूच विद्रोही किसी आम नागरिक को टारगेट न कर सकें। अकसर बलूच विद्रोही पंजाबी मूल के लोगों को टारगेट करते रहे हैं। ऐसे में रूट ही बंद करने के पीछे यही एक वजह मानी जा रही है। खालिद ने कहा कि फोर्ट मुनरो हाइवे और मूसा खेल रोड को बंद किया गया है, जो बलूचिस्तान जाते हैं। इसके अलावा जो ट्रैफिक चल रहा था, उसे भी सीमाओं पर ही रोक दिया गया है। ये सारे कदम एहतियात के तौर पर उठाए गए हैं।