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  • रैक्सिल घोटाले में हुड्डा समेत तीनों को राहत, CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार

    रैक्सिल घोटाले में हुड्डा समेत तीनों को राहत, CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार

    पंचकूला
     गेहूं के बीज के उपचार के लिए कंपनी के रैक्सिल फफूंदनाशक घोटाले के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दो आईएएस अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है।

    पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले में जांच एजेंसी की तरफ से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए केस बंद कर दिया है। सीबीआइ जांच में अधिकारियों के बीच साजिश, धोखाधड़ी, सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने या किसी अधिकारी को निजी आर्थिक लाभ मिलने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

    यह मामला अक्टूबर 2010 में हरियाणा में गेहूं के प्रमाणित बीज के उपचार के लिए बायर कंपनी के रैक्सिल फफूंदनाशक का इस्तेमाल अनिवार्य करने से जुड़ा है। आरोप था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में छह अक्टूबर 2010 को हुई बैठक में इस दवा को अनिवार्य करने का फैसला लिया गया।

    इसके बाद किसानों और बीज विक्रेताओं को सरकारी सब्सिडी लेने के लिए इसी दवा की खरीद करनी पड़ती थी। आरोप यह भी था कि प्रदेश में इसकी आपूर्ति एक ही फर्म से करवाई गई और दवा की कीमत बढ़ाकर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।

    वैज्ञानिक जांच में सही पाया गया दवा का इस्तेमाल
    सीबीआई ने जांच में पाया कि वर्ष 2003 में कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की जांच में गेहूं की फसल में तीन बीमारियों के उपचार के लिए रैक्सिल का नाम शामिल किया गया था। उस समय यह तीनों बीमारियों के उपचार के लिए इसी दवा का इस्तेमाल के लिए कहा गया था।

    जांच में यह भी सामने आया कि पंजाब स्टेट सीड कारपोरेशन और नेशनल सीड काॅरपोरेशन ने भी इसी दर पर दवा खरीदी थी, जिस दर पर हरियाणा सीड डेवलपमेंट काॅरपोरेशन को इसकी आपूर्ति हुई थी। इसलिए कीमत बढ़ाकर वसूली करने का आरोप साबित नहीं हुआ।

    सरकार ने भी क्लोजर रिपोर्ट पर जताई सहमति
    सीबीआई ने जांच के बाद केस बंद करने की रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी। हरियाणा सरकार की ओर से भी इसी साल 20 मई के पत्र के आधार पर अदालत में बयान देकर क्लोजर रिपोर्ट पर सहमति जताई गई और इसे स्वीकार करने पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही गई।

     

  • हुड्डा को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, AJL प्लॉट मामले में ED की अर्जी पर जारी हुआ नोटिस

    हुड्डा को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, AJL प्लॉट मामले में ED की अर्जी पर जारी हुआ नोटिस

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के बहुचर्चित एजेएल (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) प्लाट आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपितों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा मनी लान्ड्रिंग मामले की कार्यवाही बंद करने के आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

    ईडी की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में न केवल निचली अदालत के 3 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, बल्कि उस पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने की भी अपील की गई है। पूरा मामला पंचकूला सेक्टर-6 स्थित प्लाट नंबर सी-17 से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2005 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान एजेएल को दोबारा आवंटित किया गया था। आरोप है कि यह बहुमूल्य भूखंड वर्ष 1982 की पुरानी दरों करीब 91 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर दिया गया, जबकि उस समय बाजार मूल्य कहीं अधिक था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस निर्णय से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर ईडी ने वर्ष 2016 में धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और वर्ष 2018 में लगभग 64 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को कुर्क कर लिया था।

    मामले में महत्वपूर्ण मोड़ 25 फरवरी 2026 को आया, जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मूल आपराधिक मामले में आरोपितों को राहत प्रदान की। इसके बाद पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत ने यह कहते हुए ईडी की कार्यवाही समाप्त कर दी कि जब मूल अपराध ही समाप्त हो गया तो मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही स्वत टिक नहीं सकती। हालांकि अदालत ने यह छूट दी थी कि यदि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट मूल मामले को बहाल करता है तो ईडी पुन कार्रवाई शुरू कर सकती है। अब ईडी ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि पीएमएलए अदालत ने कानून की गलत व्याख्या की। एजेंसी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है और ‘विजय मदनलाल चौधरी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि अपराध से अर्जित संपत्ति की जांच केवल मूल एफआईआर पर निर्भर नहीं रहती।

    ईडी ने यह भी बताया कि सीबीआई पहले ही हाई कोर्ट के फरवरी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुकी है, जहां नोटिस जारी हो चुका है। ऐसे में कार्यवाही बंद रहने से कुर्क संपत्ति मुक्त कराने की कोशिशें जांच को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती हैं। सोमवार को हाई कोर्ट के जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपितों को आठ जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।