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  • ‘सनातन धर्म और हिंदुत्व अलग-अलग’, दिग्विजय सिंह के बयान से फिर छिड़ा विवाद

    ‘सनातन धर्म और हिंदुत्व अलग-अलग’, दिग्विजय सिंह के बयान से फिर छिड़ा विवाद

    उज्जैन

    पूर्व एमपी CM और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व को लेकर एक बार फिर विवादित बयान दिया है. उन्होंने लोगों को हिंदुत्व से दूर रहने की नसीहत दी है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदुत्व की तरफ जाने वालों के दिल और दिमाग में नफरत होती है. उन्होंने सनातन धर्म और हिंदुत्व को अलग बताते हुए कहा कि सनातन को हिंदुत्व की तरह पेश किया जा रहा है. अगर इसे सही तरीके से नहीं समझाया गया, तो लोग हिंदुत्व की तरफ चले जाएंगे। 

    उज्जैन से अयोध्या तक 1000 किलोमीटर की यात्रा
    दिग्विजय सिंह ने यह बयान अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दौरान दिया. दरअसल, दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर निकले हैं. यात्रा के पहले पड़ाव के बाद वह अपने गृह नगर राघौगढ़ पहुंचे. यहां उनके बेटे जयवर्धन सिंह ने यात्रा का स्वागत किया. इसी दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर अपनी बात रखी. जब वह मंच से भाषण दे रहे थे, तब उनका पूरा परिवार भी मंच पर मौजूद था। 

    'सनातन का मतलब विश्व को कुटुंब मानना'
    दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म का मतलब हिंदुत्व बिल्कुल नहीं है. उन्होंने कहा कि, सनातन धर्म को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. इसे हिंदुत्व और नफरत से जोड़कर बताया जा रहा है. सनातन धर्म का असली संदेश पूरे विश्व को एक परिवार मानना है. सनातन धर्म को सही तरीके से लोगों के सामने रखना जरूरी है। 

    दिग्विजय सिंह ने बताया कि 80 साल की उम्र में 1000 किलोमीटर की पदयात्रा करने के पीछे उनके दो मुख्य कारण हैं. पहली वजह देश में लोकतंत्र की जगह एकतंत्र को बढ़ावा दिया जाना है. उन्होंने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों का जिक्र किया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि वोट चोरी के जरिए लोकतंत्र को मजबूत नहीं किया जा सकता. उन्होंने EVM पर रोक लगाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। 

    राम मंदिर के चंदे का भी उठाया मुद्दा
    दिग्विजय सिंह ने अपनी यात्रा का दूसरा मकसद सनातन धर्म के नाम पर हिंदुत्व को आगे बढ़ाने का विरोध बताया. उन्होंने 1992 में महंत लालदास की ओर से लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा का विरोध किए जाने का जिक्र किया. उन्होंने राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए 1400 करोड़ रुपये के चंदे का भी मुद्दा उठाया। 

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि, जब महंत लालदास ने हिसाब मांगा था, तब 8.29 करोड़ रुपये का हिसाब बताया गया था. सनातन धर्म को हिंदुत्व के नाम पर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। 

  • बच्चों से नारे लगवाने के आरोप पर घिरे दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

    बच्चों से नारे लगवाने के आरोप पर घिरे दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

    भोपाल

    पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों को शामिल करने और उनसे राजनीतिक नारे लगवाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है।आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर मामले की जांच कराने और दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    आयोग के 22 अक्टूबर 2026 के पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों से राजनीतिक नारे लगवाए गए। इस कथित घटना के वीडियो और तस्वीरें 22 अक्टूबर को फेसबुक पर साझा किए जाने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।

    शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि बच्चों को यात्रा में लाने के लिए पैसे दिए गए होंगे। उसने मामले की जांच कर आयोजकों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    बाल अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की जांच होगी
    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने संरक्षण मानवाधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होने वाला बताया है।

    आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाए। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या बच्चों को पैसे देकर यात्रा में शामिल किया गया था या किसी तरह से उनका इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही लागू बाल संरक्षण कानूनों के संभावित उल्लंघन की भी जांच करने को कहा गया है।

    इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी नोटिस
    आयोग ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भी निर्देश दिए हैं कि कथित घटना से जुड़े बच्चों के वीडियो और तस्वीरों के इस्तेमाल के मामले को देखें और अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

    आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से पत्र प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल आयोग के पत्र में आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या किसी की जिम्मेदारी तय होने का उल्लेख नहीं है।

    ‘दुर्योधन को सिंहासन दिलाने पदयात्रा कर रहा धृतराष्ट्र-विधायक पन्नालाल 

    प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने प्रतिक्रिया दी है। शाक्य ने तंज कसते हुए सिंह को ‘धृतराष्ट्र’ की संज्ञा दी और कहा कि वह अपने ‘दुर्योधन’ को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाने के लिए यह पदयात्रा कर रहे हैं।

    सनातन के प्रतीकों से आपत्ति क्यों?
    विधायक शाक्य ने गुरुवार को अपने कार्यालय में प्रेस कान्फ्रेंस कर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पदयात्रा पर निशाना साधा। शाक्य ने महाकाल दर्शन के दौरान दिग्विजय द्वारा गमछा लौटाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सनातन प्रतीकों से इतनी ही आपत्ति है, तो यात्रा महाकाल के बजाए जावरा या अजमेर से शुरू करनी चाहिए थी।

    उन्होंने कहा कि जब महाकाल से यात्रा शुरू कर रहे हो, तो उनके प्रसाद का अपमान मत करो। सनातन हो, हिन्दुपथ की संतान हो, तो हिंदुत्व के चिन्हों को जीवित रहने दो।

    वोट चोरी के आरोप पर पलटवार
    कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार करते हुए विधायक शाक्य ने कहा कि यदि थोड़ी भी शालीनता हो, तो इतिहास देखें। उन्होंने कहा कि जब नीतीश भारद्वाज, प्यारेलाल खंडेलवाल और कैलाश जोशी चुनाव लड़े थे, क्या उस समय वोट चोरी नहीं हुई थी। वोट चोरी तो आपके जमाने से ही चली आ रही है। आज वे लोग उनके पक्ष में माहौल बना रहे हैं, जो विदेशियों के हाथों में खेल रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह की उम्र पर तंज कसते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि 85 साल की उम्र हो गई है, अब अपने अनुचर को उसकी खुद की क्षमता पर छोड़ देना चाहिए। उसमें खुद कितनी क्षमता या योग्यता है, वह अपने आप बन जाएगा। उसे अभी भी अंगुली पकड़कर चलना सिखाने की क्या जरूरत है।

    'अभी तो 10-12 साल हुए, इतने में बौखला गए'
    रिजीम चेंज (सत्ता पलट) के सवाल पर विधायक शाक्य ने हंसते हुए कहा कि हिंदुस्तान में तो सत्ता जब पलटी है, जब कोई घर के भेदी ने भेद दिया है। आज जो स्थिति बनती जा रही है, वैसी तो कोई विशेष बात नहीं बनी। अभी देखते जाओ, उनका क्या-क्या होने वाला है।

    अभी तो दो ही अंदर हुए हैं, तीसरा जब अंदर होगा, तब मालूम पड़ेगा। उसने तो बोल दिया ना कि मैं नहीं हूं, मेरे पीछे तो कोई और डायरेक्शन दे रहा है। लेकिन ऐसे लोगों का हमें समर्थन नहीं करना चाहिए। शाक्य ने कहा कि अभी तो 10-12 साल ही हुए हैं, इतने में ही बौखला गए। एक हजार वर्ष तक दूसरों के गुलाम रहे, तब नहीं बौखलाए थे।

    20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू हुई यात्रा
    दिग्विजय सिंह की करीब 950 किलोमीटर की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन से शुरू हुई थी। यात्रा का लक्ष्य ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या के श्रीराम मंदिर तक पहुंचना है। यात्रा के घोषित उद्देश्यों में धार्मिक स्थलों पर चंदे और चढ़ावे में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच तथा वोट चोरी के आरोपों पर जवाबदेही की मांग शामिल है।

    यात्रा की शुरुआत से पहले उज्जैन में चिंतामण गणेश और महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन किया गया था। इसके बाद पार्थिव शिवलिंग पूजन, कन्या भोज और भंडारे के आयोजन के साथ पदयात्रा शुरू हुई।

    गुरुवार को तराना पहुंची पदयात्रा
    यात्रा के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 21 अक्टूबर को पदयात्रा उज्जैन से देवास जिले के सिंदुरिया गांव पहुंची। तीसरे दिन, 22 अक्टूबर को सिंदुरिया से तराना तक 15 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद तराना में रात्रि विश्राम कर रही है।

     

  • प्रदीप मिश्रा की 350 करोड़ की FD की चर्चा पर दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल, बोले- इतनी संपत्ति कैसे?

    प्रदीप मिश्रा की 350 करोड़ की FD की चर्चा पर दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल, बोले- इतनी संपत्ति कैसे?

    सीहोर
     प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर सीहोर के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा को लेकर तंज कसा है। दिग्विजय सिंह ने बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा को लेकर कथावाचक द्वारा बताए जाने वाले उपायों पर सवाल उठाते हुए उनकी संपत्ति और वित्तीय स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

    वीडियो में दिग्विजय सिंह कहते नजर आ रहे हैं कि आजकल धार्मिक गुरु और कथावाचकों की खूब चल रही है। उन्होंने सीहोर वाले कहावाचक का जिक्र छेड़ा और कहा कि वे बच्चों से कहते थे कि तुम्हें पढ़ाई करने की जरूरत नहीं, भगवान शिव को शहद लगाकर बेल पत्र चढ़ा दो और तुम पास हो जाओगे। दिग्विजय यहीं नहीं रुके। उन्होंने कथावाचक पर चुटकी लेते हुए कहा कि सुनने में आया है कि उनका बेटा ही परीक्षा में फेल हो गया।

    350 करोड़ की एफडी का जिक्र
    दिग्विजय सिंह ने सीहोर के कथावाचक की पिछले कुछ सालों में उपजी आर्थिक संपन्नता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीहोर के स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि महज दो साल में उनके (पं. प्रदीप मिश्राा) पास करीब 350 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट हो गई है। इसी को लेकर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देखना चाहिए कि पिछले दो साल में वे क्या से क्या हो गए।

    हालांकि, दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट किया कि 350 करोड़ रुपये की एफडी होने का दावा वे स्वयं नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल सीहोर के स्थानीय लोगों द्वारा कही जा रही बातों का उल्लेख कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा की संपत्ति, आय और वित्तीय स्थिति को लेकर इंटरनेट मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 350 करोड़ रुपये की एफडी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    बयान की सोशल मीडिया में चर्चा
    दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा की संपत्ति, आय और वित्तीय स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 350 करोड़ रुपये की एफडी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 

     

  • पूर्व CM दिग्विजय सिंह को अदालत से राहत, 14 साल पुराने मानहानि मामले में हुए बरी

    पूर्व CM दिग्विजय सिंह को अदालत से राहत, 14 साल पुराने मानहानि मामले में हुए बरी

    भोपाल
     मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को बिहार के हाजीपुर की अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने 14 साल पुराने मानहानि के मामले में उन्हें बरी कर दिया है। अवर मुख्य न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार ने मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया। दिग्विजय सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालती कार्यवाही में शामिल हुए।

    दिग्विजय सिंह की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता युवराज सुनील सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 2012 में बाबा रामदेव को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा था। उस समय हाजीपुर के भाजपा नेता प्रो. अजीत कुमार सिंह ने स्थानीय सिविल कोर्ट में दिग्विजय सिंह के खिलाफ मानहानि का परिवाद दायर किया था।

    बाबा रामदेव पर टिप्पणी को लेकर दर्ज हुआ था केस
    अधिवक्ता के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव के खिलाफ कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर उनके खिलाफ मानहानि की कार्रवाई शुरू की गई थी।

    करीब डेढ़ दशक तक चले इस मामले में अदालत ने अंतिम सुनवाई के बाद दिग्विजय सिंह को आरोपों से बरी कर दिया। फैसले के बाद उनके पक्ष की ओर से इसे महत्वपूर्ण कानूनी राहत बताया गया है।

    वीसी से सुनवाई में जुड़े दिग्विजय 
    मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल रहे। उनके अधिवक्ता ने अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि 2012 में दर्ज हुए इस मानहानि प्रकरण का अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत पटाक्षेप हो गया है।

     

  • सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी से घिरे दिग्विजय सिंह, इंदौर महापौर ने की कानूनी कार्रवाई की मांग

    सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी से घिरे दिग्विजय सिंह, इंदौर महापौर ने की कानूनी कार्रवाई की मांग

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों पर भाजपा के कब्जे के बाद शुरू हुई राजनीतिक जंग अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस जहां दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महापौर ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक शिकायती पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत की आपराधिक अवमानना का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

    'चोरी में सुप्रीम कोर्ट भी शामिल' बयान पर आपत्ति
    महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सॉलिसिटर जनरल को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने को मिली-जुली सीट चोरी करार दिया था। सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसकी ट्रांसक्रिप्ट भी शिकायत के साथ संलग्न की गई है। वीडियो में कांग्रेस नेता कथित तौर पर कह रहे हैं कि, 'इस चोरी में सभी शामिल हैं। न केवल राज्य बल्कि केंद्र भी, चुनाव आयोग भी और मुझे कहना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट भी।' दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई में देरी को लेकर अदालत पर यह टिप्पणी की थी।

    कंटेम्प्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
    इंदौर मेयर ने पत्र में स्पष्ट किया है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान माननीय न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और अदालत को बदनाम करने की श्रेणी में आता है। उन्होंने मांग की है कि कांग्रेस नेता के खिलाफ 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' के सेक्शन 15(1)(बी) के तहत सर्वोच्च न्यायालय की आपराधिक अवमानना की सख्त वैधानिक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।

    'पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर है'
    इस पूरे घटनाक्रम पर महू से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने भी तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने को एक पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर बताया। ठाकुर ने दावा किया कि तेलंगाना में एक महिला द्वारा कांग्रेस नेता के खिलाफ की गई शिकायत पर नटराजन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके कारण पीड़ित महिला की बद्दुआ के चलते उनका फॉर्म रिजेक्ट हुआ है।

    आपराधिक अवमानना क्या होती है?
    भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' लागू है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति या नेता लिखित, मौखिक या वीडियो के जरिए अदालत की गरिमा को कम करने, उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने या उसे 'स्कैंडलाइज्ड' करने की कोशिश करता है, तो सॉलिसिटर जनरल या अटॉर्नी जनरल की सहमति से सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।