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  • योगी सरकार में उच्च शिक्षा को बढ़ावा, अलीगढ़ के सांई ग्लोबल विश्वविद्यालय को मिला आशय पत्र

    योगी सरकार में उच्च शिक्षा को बढ़ावा, अलीगढ़ के सांई ग्लोबल विश्वविद्यालय को मिला आशय पत्र

    योगी सरकार में उच्च शिक्षा के विस्तार को नई गति, अलीगढ़ में प्रस्तावित सांई ग्लोबल विश्वविद्यालय को मिला आशय पत्र

    उच्च शिक्षा मंत्री ने ‘ॐ सांई शिक्षा समिति’ को सौंपा लेटर ऑफ इंटेंट, दो वर्ष में पूरी करनी होंगी निर्धारित शर्तें

    अलीगढ़ और आसपास के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में पहल

    निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और रोजगारपरक उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ाने पर योगी सरकार का जोर

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक और पहल की गई है। अलीगढ़ में प्रस्तावित ‘सांई ग्लोबल विश्वविद्यालय’ की स्थापना के लिए प्रदेश सरकार ने प्रायोजक संस्था ‘ॐ सांई शिक्षा समिति, अलीगढ़’ को आशयपत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किया है। इससे अलीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के नए अवसर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

    प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर समिति के प्रतिनिधियों को आशयपत्र सौंपा। उच्च शिक्षा विभाग ने सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के बाद उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की धारा-6 के प्रावधानों के तहत यह आशय-पत्र जारी किया है।

    युवाओं को अपने क्षेत्र में मिलेंगे उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर

    योगी सरकार प्रदेश में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के संस्थानों का विस्तार हो और विद्यार्थियों को अपने गृह क्षेत्र के आसपास ही बेहतर शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध हो सकें।

    प्रस्तावित सांई ग्लोबल विश्वविद्यालय के माध्यम से अलीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में शिक्षा संबंधी सुविधाओं के विस्तार और युवाओं की शैक्षणिक आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में मदद मिल सकती है।

    पारदर्शी प्रक्रिया और निर्धारित मानकों पर जोर

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को उनके गृह क्षेत्र के निकट विश्वस्तरीय, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र के निवेश की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बना रही है, जिससे प्रदेश में उच्च शिक्षा का उत्कृष्ट पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके। मंत्री ने प्रायोजक संस्था को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक मानकों और शर्तों को पूरा करते हुए आगे की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

    दो वर्ष में पूरी करनी होंगी अनिवार्य शर्तें

    जारी आशय पत्र के अनुसार, प्रायोजक संस्था ‘ॐ सांई शिक्षा समिति’ को उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के तहत आगामी दो वर्षों के भीतर निर्धारित अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके बाद संस्था को शासन के समक्ष अनुपालन आख्या प्रस्तुत करनी होगी। विश्वविद्यालय की स्थापना की आगे की प्रक्रिया निर्धारित वैधानिक प्रावधानों और शर्तों की पूर्ति के अनुरूप आगे बढ़ेगी। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष भी उपस्थित रहे।

  • बेसिक शिक्षा विभाग के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बड़ी राहत, वेतन में 25% बढ़ोतरी

    बेसिक शिक्षा विभाग के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बड़ी राहत, वेतन में 25% बढ़ोतरी

    लखनऊ 

    बेसिक शिक्षा के जिला परियोजना कार्यालयों में आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मियों के मानदेय में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। आशुलिपिक, लेखाकार, सहायक लेखाकार, टंकक, लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटरों की मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। फिलहाल इन्हें बढ़े मानदेय का तोहफा मिल गया है।

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा व राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से बढ़ा मानदेय दिए जाने का आदेश जारी कर दिया गया है। आशुलिपिक व लेखाकार को अभी तक प्रति महीने 18560 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा था। अब इन्हें 23200 रुपये प्रति महीने मानदेय दिया जाएगा। सहायक लेखाकार को 11600 रुपये प्रति महीने मानदेय दिया जा रहा था और अब 14500 रुपये प्रति महीने मानदेय दिया जाएगा। टंकक, लिपिकों व कंप्यूटर ऑपरेटरों को अभी तक 11020 रुपये प्रति महीने मानदेय मिल रहा था। अब इन्हें 13775 रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। बढ़ा मानदेय इन्हें अक्तूबर से देने की तैयारी है। फिलहाल, इन्हें किसी भी तरह का कोई एरियर नहीं दिया जाएगा।

    375 कर्मियों को मिलेगा मानदेय बढ़ोत्तरी का लाभ
    वर्षों से कार्य कर रहे इन कर्मियों को बड़ी राहत मिल गई है। सभी जिलों के जिला परियोजना कार्यालयों में पांच-पांच कर्मचारी कार्यरत हैं। यूपी भर में कुल 375 आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं। सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्यरत इन कर्मियों को अब बढ़ा मानदेय दिया जाएगा। राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह बढ़ा हुआ मानदेय आउटसोर्सिंग पर कार्यरत इन कर्मियों को दिलाना सुनिश्चित करें। किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी न हो और पारदर्शी ढंग से मानदेय भुगतान किया जाए।

    डेढ़ महीने पहले आउटसोर्स कर्मियों के वेतन बढ़ोतरी को मिली थी मंजूरी
    डेढ़ महीने पहले उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम में तैनात आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की मंजूरी मिली थी। इनमें कम्प्यूटर ऑपरेटर, प्रोग्रामर, लेखाकर, टैली ऑपरेटर्स का मानदेय साल में दो बार जनवरी और जुलाई माह में पांच-पांच फीसदी बढ़ाने पर फैसला हुआ था। ऐसे में परिवहन निगम मुख्यालय से लेकर क्षेत्रों में तैनात आउटसोर्स कर्मियों के बेसिक मानदेय में पांच फीसदी की बढ़ोतरी जुलाई 2026 में करते हुए अगस्त माह के वेतन में मिलने की बात कही गई थी। बतादें कि मैकेनिकों की मजूदरी तय नहींरोडवेज बसों की कार्यशाला में वाह्यस्रोत से मैकेनिक कार्य पर रखे गए है। लेकिन इनका मानदेय श्रेणीवार पुन: निर्धारण नहीं किया गया। इस संबंध में क्षेत्रों के सेवा प्रबंधकों ने मुख्यालय पत्र भेजकर बताया कि पूर्व में जिस प्रकार 7500 रुपये प्रति कार्मिक में वृद्धि करते हुए 8400 प्रति कार्मिक किया गया था।

  • सतत विकास लक्ष्यों को गति देने में यूपी की पहल, स्वास्थ्य-शिक्षा और पोषण पर योगी सरकार का फोकस

    सतत विकास लक्ष्यों को गति देने में यूपी की पहल, स्वास्थ्य-शिक्षा और पोषण पर योगी सरकार का फोकस

    लखनऊ

     सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के क्षेत्रों में योजनाओं को प्रभावी बनाने के साथ डेटा, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में बुधवार को होटल क्लार्क्स अवध में सशक्त भविष्य: शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को गति विषय पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, डिजिटल हेल्थ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कौशल विकास और सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

    प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रमुख आधार हैं। सफल प्रयासों और नवाचारों को साझा कर प्रभावी रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं। डेटा, प्रौद्योगिकी और नवाचार के बेहतर उपयोग से योजनाओं के परिणामों को प्रभावी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के पहले सत्र में स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बेहतर परिणामों के लिए डेटा, तकनीक और नवाचार के प्रभावी इस्तेमाल को जरूरी बताया।

    अपर मुख्य सचिव, बाल विकास एवं पुष्टाहार लीना जौहरी ने बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वीके पॉल ने स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में निवेश को मानव विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। पैनल चर्चा में रोकथाम योग्य मौतों, बच्चों में कम वजन और अविकसित शारीरिक विकास जैसी चुनौतियों पर विचार हुआ। स्वास्थ्य ढांचे और डेटा व्यवस्था को एआई से मजबूत करने पर हिमांशु बुराड, पीयूष एंटनी ,डॉ. कनिका अग्रवाल और डॉ आलोक सक्सेना ने विचार साझा किए।

    दूसरे सत्र में शिक्षा और कौशल विकास पर जोर रहा। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सतत विकास लक्ष्यों की आधारशिला बताया। प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरि ओम ने शिक्षा के साथ कौशल विकास को युवाओं के रोजगार और बेहतर अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

    वहीं शंकर नारायणन, विनोद कराटे, सुनील कुमार, प्रेम रंजन सिंह और विष्णुकांत पांडेय ने नामांकन, बच्चों को विद्यालयों में बनाए रखने, डिजिटल कौशल और सीखने के बेहतर परिणामों पर चर्चा की। चौथी औद्योगिक क्रांति के अनुरूप कौशल, रोजगार और करियर में बदलाव पर प्रो. बलवंत सिंह मेहता, डॉ. कृष्ण कुमार सिंह, डॉ. अनन्या समाजदार, प्रणव बंसोडे और दीपक कुमार सिंह ने विचार रखे। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों को गति देने पर भी मंथन हुआ।

  • बिहार में PG पढ़ाई में बड़ा बदलाव, 150 से अधिक विशेषज्ञ मिलकर बनाएंगे एकसमान पाठ्यक्रम

    बिहार में PG पढ़ाई में बड़ा बदलाव, 150 से अधिक विशेषज्ञ मिलकर बनाएंगे एकसमान पाठ्यक्रम

     पटना
    प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए अब एकसमान पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इसके लिए बिहार लोक भवन में मंगलवार से छह दिवसीय शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें दो वर्षीय पीजी के तृतीय और चतुर्थ सेमेस्टर तथा एक वर्षीय पीजी के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर का पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। 

    यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 और यूजीसी के दिशा-निर्देश के अनुरूप की जा रही है। इस संबंध में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्य के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों से 150 से अधिक विषय विशेषज्ञों और शिक्षकों को लोक भवन में बुलाया गया है। 

    इस दौरान राज्य के विश्वविद्यालयों में संचालित हो रहे सभी 46 स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे।

    प्रत्येक सेमेस्टर में होगी 22 क्रेडिट की समान व्यवस्था
    नए पाठ्यक्रम में प्रत्येक सेमेस्टर के लिए 22 क्रेडिट की समान व्यवस्था होगी तथा विद्यार्थियों को अपनी रुचि और भविष्य की जरूरत के अनुसार विषय चुनने के अधिक विकल्प मिलेंगे। तृतीय सेमेस्टर में विषय से जुड़े वैकल्पिक और कौशल विकास के पाठ्यक्रम के साथ शोध का विकल्प भी होगा। 

    चतुर्थ सेमेस्टर में विद्यार्थी विशेष विषयों की पढ़ाई, शोध परियोजना या शोध आधारित पाठ्यक्रम में से विकल्प चुन सकेंगे। दीपक कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य स्नातकोत्तर पीजी शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करना और सभी विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम में एकरूपता लाना है। 

    नए पाठ्यक्रम में विषय की गहरी जानकारी के साथ विद्यार्थियों के कौशल विकास पर भी जोर दिया जाएगा। इसे बिहार में लागू चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि स्नातक के बाद स्नातकोत्तर की पढ़ाई में बेहतर तालमेल बना रहे।

  • कॉलेज बढ़े, लेकिन जरूरत से कम! झारखंड में 5 साल में 323 से 436 हुए संस्थान, फिर भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे

    कॉलेज बढ़े, लेकिन जरूरत से कम! झारखंड में 5 साल में 323 से 436 हुए संस्थान, फिर भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे

     रांची
    केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन-2023-24 की रिपोर्ट यह बताती है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड में काफी काम किए जाने की आवश्यकता है।

    नए संस्थानों की स्थापना से लेकर शिक्षकों की नियुक्ति पर जोर देना होगा। कुछ मामले में आंशिक सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन अभी भी झारखंड उच्च शिक्षा में एक-दो राज्यों से ही आगे है।

    कॉलेजों की उपलब्धता की ही बात करें तो झारखंड में निश्चित रूप से कॉलेजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन यह वृद्धि आबादी के अनुरूप नहीं हो पाई है।

    प्रति कॉलेज छात्रों की संख्या में बिहार-दिल्ली के बाद झारखंड
    झारखंड में पांच वर्षों में कॉलेजों की संख्या 323 से बढ़कर 436 पहुंच गई है, लेकिन अभी भी यहां एक लाख आबादी (23 वर्ष आयु वर्ग) पर महज नौ कॉलेज उपलब्ध हैं। अखिल भारतीय स्तर पर इतनी आबादी पर कॉलेजों की संख्या 32 है। पिछले पांच वर्षों से कॉलेजों की सघनता प्रति एक लाख आबादी पर आठ या 9 रही है।

    कॉलेजों की अनुपलब्धता का असर कॉलेजों में औसत नामांकन पर पड़ा है। झारखंड के कॉलेजों में औसत नामांकन 1,611 विद्यार्थियों का होता है। प्रति कॉलेज विद्यार्थियों की यह संख्या बिहार और दिल्ली के बाद सबसे अधिक है।

    झारखंड में उच्च शिक्षा में छात्र शिक्षक अनुपात में कमी आई है, लेकिन अभी भी झारखंड में 48 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध हैं। यह अनुपात बिहार के बाद सबसे अधिक है।

    इन सभी के बीच अच्छी खबर यह है कि उच्च शिक्षा में छात्राओं का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) छात्रों से अधिक है। कुल सकल नामांकन अनुपात जहां 19.4 है, वहीं छात्रों तथा छात्राओं में यह अनुपात क्रमश: 18.7 तथा 20.2 प्रतिशत है। राज्य में आंशिक ही सही इस अनुपात में सुधार हो रहा है।

    झारखंड में कॉलेजों की संख्या और एक लाख आबादी पर उपलब्ध कॉलेज
    वर्ष     कॉलेज     एक लाख आबादी पर उपलब्ध कॉलेज
    2019-20     323     08
    2020-21     336     09
    2021-22     366     08
    2022-23     425     09
    2023-24     436     09

    कब कितना रहा सकल नामांकन अनुपात
    सत्र     छात्र     छात्रा     कुल
    2023-24     18.7     20.2     19.4
    2022-23     18.6     19.5     19.0
    2021-22     18.6     18.7     18.6
    2020-21     16.5     17.5     17.0
    2019-20     17.5     18.7     18.1

  • राज्य शिक्षा सेवा के 22 अधिकारियों का प्रमोशन, पे मैट्रिक्स लेवल-9 से बढ़कर हुआ लेवल-11

    राज्य शिक्षा सेवा के 22 अधिकारियों का प्रमोशन, पे मैट्रिक्स लेवल-9 से बढ़कर हुआ लेवल-11

     रांची
     स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य शिक्षा सेवा के 22 पदाधिकारियों को प्रोन्नति प्रदान की है। इनमें कई जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक सम्मिलित हैं। प्रोन्नति के बाद वेतनमान पे मैट्रिक्स लेवल-9 से बढ़कर लेवल-11 हो गया है।

    जिन अधिकारियों को प्रोन्नति मिली है, उनमें बोकारो के डीईओ प्रवीण रंजन, पश्चिमी सिंहभूम के डीईओ प्रिंस कुमार, रामगढ़ के डीईओ अभय कुमार शील, हजारीबाग की डीईओ कुमारी नीलम, पूर्वी सिंहभूम की डीईओ निशु कुमारी और गिरिडीह के डीईओ विनय कुमार सम्मिलित हैं।

    साथ ही सिमडेगा के डीईओ मिथिलेश केरकेट्टा, डायट, पाकुड़ के प्राचार्य संतोष गुप्ता, रांची के डीईओ मो. वसीम अहमद, देवघर के डीईओ बिनोद कुमार, बोकारो के डीएसई अतुल कुमार चौबे, साहिबगंज के डीएसई नयन कुमार, लोहरदगा की डीईओ दास सुनंदा चन्द्रमौलेश्वर, दुमका के डीईओ संजीत कुमार, कोडरमा के डीएसई मुकुल राज, जामताड़ा के चार्ल्स हेम्ब्रम, पाकुड़ की अनिता पुरती और गोड्डा की मिथिला टुडू को भी प्रोन्नति दी गई है।

    झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के प्रशासी पदाधिकारी मनोज कुमार को भी प्रोन्नति प्रदान की गई है। वहीं, सेवानिवृत्त अधिकारी जयंत मिश्रा को नोशनल प्रोन्नति प्रदान की गई है।

    तीन प्रशासनिक अधिकारियों की सेवा संपुष्ट की गई
    प्रशासनिक सेवा के तीन अधिकारियों की सेवा संपुष्ट कर दी गई है। इससे संबंधित अधिसूचना कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने जारी कर दी है।

    अधिसूचना के अनुसार ज्योति वंदना कुजूर, अरुण कुमार मुंडा और विनय कुमार की सेवा संपुष्टि से संबंधित पत्र जारी कर दिया गया है। विनय कुमार 2022 से प्रशासनिक सेवा में कार्यरत थे, ज्योति वंदना कुजूर 2010 से और अरुण कुमार मुंडा 2015 से कार्यरत हैं।

     

  • शिक्षा सुधार पर बड़ा फैसला: चार विभाग मिलकर बनाएंगे छात्र कल्याण निदेशालय

    शिक्षा सुधार पर बड़ा फैसला: चार विभाग मिलकर बनाएंगे छात्र कल्याण निदेशालय

    पटना
    बिहार में छात्र कल्याण से जुड़े काम-काज को प्रभावी ढंग से लागू करने और समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए चार सरकारी विभागों का एक अलग निदेशालय गठित होगा। शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रावैधिकी तथा युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग मिलकर यह निदेशालय बनाएंगे। इस नई व्यवस्था से शिक्षाा और परीक्षाा में सुधार होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को अधिवेशन भवन में शिक्षा अधिकारियों के दो दिवसीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के उद्घाटन के मौके पर यह घोषणा की। कार्यशाला में शिक्षा विभाग के 322 अधिकारी भाग ले रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने शिक्षा और परीक्षा में सुधार के लिए दो राज्यस्तरीय कमेटियों के गठन की भी घोषणा की। एक कमेटी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित कराएगी ताकि हर विद्यालय उत्कृष्टता का केंद्र बने और छात्रों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार हो। दूसरी कमेटी परीक्षा सुधार की होगी, जो परीक्षाओं को सुचारू, पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के लिए कार्य करेगी। यह समिति बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ कक्षा आधारित मूल्यांकन में तकनीकी एवं एआई के उपयोग के माध्यम से छात्रों के ज्ञान, समझ एवं विश्लेषण क्षमता के बेहतर आकलन का सुझाव देगी।

    मुख्यमंत्री ने युवाओं को बिहार का भविष्य बताते हुए कहा कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। आने वाली पीढ़ी ही राज्य का नवनिर्माण करेगी। सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिससे बिहार के बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़े।

    उन्होंने कहा कि समर्थ लोग अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। लेकिन, संसाधनों की कमी से जूझने वालों के लिए बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लगभग 18 हजार करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं और इसका बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में जा रहा है। कोटा में लाखों बच्चे पढ़ने जाते हैं और वहां पढ़ाने वाले अधिकतर शिक्षक भी बिहार के हैं।

    छात्रों के लिए प्रत्येक माह सहयोग शिविर लगेगा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक एवं वरीय पदाधिकारी स्कूलों-कॉलेजों में जाकर छात्रों से संवाद करेंगे। उनसे प्राप्त सुझावों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। मुख्यमंत्री स्तर पर प्रत्येक माह छात्रों के लिए सहयोग शिविर का आयोजन होगा और उनकी समस्याओं और सुझावों पर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अबतक 551 मॉडल स्कूल बनाए जा चुके हैं। लक्ष्य 1001 मॉडल स्कूल बनाने का है। शिक्षा से जुड़े अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ गुंडा एक्ट और सीसीए के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें दोषियों को एक वर्ष तक कैद का प्रावधान है।

    रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे विद्यार्थी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त से ऐसी व्यवस्था शुरू की जा रही है, जिसके तहत विद्यार्थी रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। ऐप के माध्यम से रात 11 बजे भी छात्र किसी सवाल का उत्तर शिक्षक से पूछ सकते हैं।

  • मेधावी प्रतिभाओं का सम्मान: शिक्षा, संस्कार और चेतना के संगम से सजा प्रेरक आयोजन

    मेधावी प्रतिभाओं का सम्मान: शिक्षा, संस्कार और चेतना के संगम से सजा प्रेरक आयोजन

    मेधावी प्रतिभाओं का अभिनंदन : शिक्षा, संस्कार और चेतना के संगम का बना प्रेरक आयोजन

    भोपाल
     प्रतिभा जब सम्मान पाती है तो वह केवल व्यक्ति का उत्साह नहीं बढ़ाती, बल्कि समाज के भविष्य को दिशा देती है। इसी भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश प्रेस क्लब एवं महर्षि संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में शहर के मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान में एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, संस्कार, चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का उत्सव बन गया।

    समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पूर्व कमिश्नर शहडोल संभाग डॉ.राजीव शर्मा रहे। विशिष्ट अतिथियों में महर्षि संस्थान के डायरेक्टर श्री मनीष सिन्हा, मध्यप्रदेश प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ.नवीन आनंद जोशी, संयुक्त सचिव अजय सिंह तथा मीडिया टुडे के डायरेक्टर अनुज यादव उपस्थित रहे।

    मध्यप्रदेश प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ.नवीन आनंद जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा को केवल अंक प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का विचारक, नीति निर्माता और समाज का नेतृत्वकर्ता होगा। इसलिए युवाओं में ज्ञान के साथ संस्कार, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी उतना ही आवश्यक है।

    डॉ.जोशी ने अपने उद्बोधन में मध्यप्रदेश प्रेस क्लब द्वारा समाजहित, जनजागरण, शिक्षा प्रोत्साहन एवं सकारात्मक सामाजिक चेतना के लिए देशभर में संचालित विविध अभियानों और आयोजनों की जानकारी देते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल समाचारों का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का दायित्व भी निभाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अध्ययन के साथ मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

    कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति रही। मधुर सैन्य धुनों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रीय भाव से ओतप्रोत कर दिया और उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा अतिथियों में उत्साह का संचार किया।

    इस अवसर पर महर्षि संस्थान द्वारा ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन (भावातीत ध्यान) की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि मानसिक शांति, एकाग्रता और आंतरिक चेतना का विकास आधुनिक शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। संस्थान के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बौद्धिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन के महत्व से भी अवगत कराया। अजय सिंह ने विद्यार्थियों को तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग और परिवार व शिक्षकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने की प्रेरणा दी।

    कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालयों के प्राचार्यों एवं अभिभावकों ने विद्यार्थियों को सम्मानित करने की इस अभिनव पहल के लिए मध्यप्रदेश प्रेस क्लब एवं महर्षि संस्थान की सराहना की तथा इसे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला आयोजन बताया।
    कार्यक्रम का संचालन महर्षि संस्थान के  उद्घोषक प्रियम पटेरिया ने किया। अंत में राष्ट्र निर्माण में शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक चिंतन की भूमिका को रेखांकित करते हुए समारोह का समापन हुआ।

    यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि जब प्रतिभा को सम्मान, शिक्षा को मूल्य और युवाओं को सही दिशा मिलती है, तब एक सशक्त राष्ट्र की नींव तैयार होती है।

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर लर्निंग आउटकम के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आज से शुरू

    गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर लर्निंग आउटकम के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आज से शुरू

    गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर अधिगम परिणामों के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण आज  से

    प्रदेश सरकार के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) तथा लोक 

    शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में AICUF (ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन) में होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

    प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में दिया जाएगा प्रशिक्षण

    भोपाल

    प्रदेश के शासकीय स्‍कूलों में पढ़ाई कर रहे व‍िद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने एवं बेहतर अधिगम परिणामों के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण 2 जून से शुरू होगा। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) तथा लोक शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 2 जून 2026 से AICUF (ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन) में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।

    प्रदेश के 1,872 शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में होंगे शामिल

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 1,872 शिक्षक शामिल होंगे। 12 विषयों में प्रत्येक जिले से चयनित 3-3 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत ये शिक्षक अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करते हुए मूल्यांकन एवं अधिगम सुधार की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों, उच्च गुणवत्ता वाले (Diagnostic Assessment), प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा परिणामों के विश्लेषण तथा Values, Aptitude and Behaviour Test के निर्माण संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    सटीक आकलन होगा संभव

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान एवं कॉमर्स सहित कुल 12 विषयों के लिए प्रत्येक जिले से चयनित शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

    इस पहल से विद्यालयों में आयोजित मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक, प्री-बोर्ड एवं वार्षिक परीक्षाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों का अधिक सटीक आकलन संभव हो सकेगा, जिससे उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारात्मक योजनाएं तैयार की जा सकेंगी।

    प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को परीक्षा परिणामों के विश्लेषण के आधार पर शैक्षणिक नियोजन एवं अधिगम सुधार रणनीतियों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की विषयगत समझ, अधिगम स्तर और परीक्षा प्रदर्शन में सकारात्मक सुधार होने की संभवनाएं रहेंगी।

    यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरुप विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर राज्य में मूल्यांकन सुधार की मजबूत शैक्षणिक टीम के रूप में कार्य करेंगे तथा विद्यार्थियों को बेहतर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

     

  • ईरान-इजरायल से लेकर पाक-अफगान तक युद्ध, करोड़ों बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा गहरा असर, सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट

    ईरान-इजरायल से लेकर पाक-अफगान तक युद्ध, करोड़ों बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा गहरा असर, सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट

      नई दिल्ली
    आज दुनिया के नक्शे पर एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां स्कूलों की घंटी नहीं बल्कि धमाकों का शोर सुनाई दे रहा है. ईरान-इजरायल, रूस-यूक्रेन, पाक-अफगान से लेकर दुन‍िया के कई देश इस आग में झुलस रहे हैं. लेकिन इस सनक का सबसे ज्यादा खामियाजा अगर कोई भुगत रहा है या भुगतने वाला है तो वो आज के बच्चे यानी कल के युवा… 

    दुनिया की सबसे बड़ी बाल अधिकार संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की ताजा और डराने वाली रिपोर्ट ने इस खतरे को सामने रखा है. रिपोर्ट कहती है कि मिडिल ईस्ट और उसके आसपास के देशों में जारी हिंसा ने करीब 5.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप कर दी है।

    यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे एक 'एजुकेशन इमरजेंसी' कहा जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के डेटा पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि 5 से 17 साल के करोड़ों बच्चे अब स्कूल जाने के बजाय अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।

    ईरान में 65 स्कूल मलबे में तब्दील
    ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी के हवाले से खबर है कि अकेले ईरान में हवाई हमलों ने 65 स्कूलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है. जिन कमरों में बच्चे पहाड़े और कविताएं याद करते थे, वहां अब सिर्फ ईंट-पत्थर और धुआं बचा है।

    स्कूल नहीं, अब 'शेल्टर होम' कहिए
    रिपोर्ट में उन 12 देशों का जिक्र है जहां शिक्षा व्यवस्था आईसीयू (ICU) पर है. इनमें ईरान, इजरायल, जॉर्डन, सऊदी अरब, फिलिस्तीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में दो बड़ी चुनौतियां सामने आई हैं।

    स्कूलों पर हमला: कई स्कूल बमबारी में क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
    मजबूरी में शरण: जो स्कूल बच गए हैं, उन्हें बंद कर दिया गया है क्योंकि वहां बेघर हुए हजारों परिवार शरण लिए हुए हैं. यानी क्लासरूम अब रहने के ठिकानों में बदल गए हैं।

    ऑनलाइन पढ़ाई भी फेल!
    हालांकि कुछ देशों ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और बार-बार कटते इंटरनेट ने इस उम्मीद को भी तोड़ दिया है. कई इलाकों में बिजली और सुरक्षित इंटरनेट न होने के कारण बच्चे महीनों से अपनी किताबों से दूर हैं. बता दें कि इस क्षेत्रीय अस्थिरता का असर सिर्फ युद्ध लड़ रहे देशों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी इस हिंसा का 'रिपल इफेक्ट' (लहर जैसा असर) दिख रहा है. वहां भी अस्थिरता की वजह से बच्चों की नियमित पढ़ाई में बाधा आ रही है।