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  • मध्य प्रदेश में बेसमेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक, रेस्टोरेंट से हॉस्टल तक नहीं बना सकेंगे

    मध्य प्रदेश में बेसमेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक, रेस्टोरेंट से हॉस्टल तक नहीं बना सकेंगे

     इंदौर
     मध्य प्रदेश में बड़ी इमारतों में फायर सेफ्टी रूल्स को लेकर बड़ी सख्ती की गई है। मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा नियम-2026 में अब नियमों को तोड़ने पर एफआईआर के साथ बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब इमारतों में जांच के बाद कमियों को दूर करने के लिए केवल 30 दिन का ही समय दिया जाएगा। नए नियमों के तहत अधिकारियों की ओर से होने वाली कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    कमियां दूर न करने पर इमारत या भवन को असुरक्षित घोषित कर सील कर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई सील तोड़कर बिना किसी एनओसी के फिर से इमारत में अपना काम जारी रखता है तो उसके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं ऐसे मामले में बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

    बेसमेंट में किचन और बैटरी रखने पर भी पांबदी
    नए नियमों के तहत इमारतों के बेसमेंट में किसी भी तरह के व्यावासायिक गतिविधि पर पूरी तरह से रोक लगाई गई। यहां किचन, रेस्टोरेंट, रूम, हॉस्टल नहीं बनेंगे। इसके साथ ही बेसमेंट में ज्वलनशील पदार्थ और बैटरी और यूपीएस भी नहीं रखा जा सकेगा। अधिकारी समय-समय पर इसको लेकर इमारतों की जांच करेंगे। अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो तुरंत कार्रवाई होगी।

    पेट्रोल-डीजल और ईवी के लिए सेंसर
    बेसमेंट में ईलेक्ट्रिक व्हीकल के चार्जिंग और पार्किंग के लिए रेट ऑफ राइज हीट सेंसर लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही जहां बेसमेंट में पेट्रोल-डीजल वाहन पार्क होते हैं वहां कार्बन मोनोऑक्साइड सेंसर लगाना होगा। इससे धुआं उठने या जहरीली गैस बेसमेंट में होने की स्थिति में सेंसर तुरंत अलट करेगा।

    आम लोगों के लिए फायर सेफ्टी नियमों की 8 जरूरी बातें

    1. घर और फ्लैट के लिए क्या नियम हैं?

    आवासीय भवनों पर भी फायर सेफ्टी नियम लागू होंगे। 24 मीटर से अधिक ऊंचाई या प्रति फ्लोर 750 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों को फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना होगा।

    निर्धारित दोनों सीमाओं के भीतर आने वाले भवनों को प्रमाण पत्र से छूट दी गई है। पुराने प्रमाणपत्र वाले भवनों के लिए अलग प्रावधान हैं।

    2. दुकानों, बाजारों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा जरूरी

    दुकानों, मॉल, होटलों, कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार फायर सेफ्टी इंतजाम करने होंगे।

    इनमें फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, पानी की उपलब्धता और आपातकालीन निकास शामिल हो सकते हैं।

    3. अस्पतालों और स्कूलों में भी सुरक्षा मानक जरूरी
    अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक भवनों को अपनी श्रेणी के अनुसार फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य आग लगने पर मरीजों, बच्चों, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

    4. फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र कितने समय तक वैध रहेगा?
    नियमों के अनुसार, फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र सामान्यतः पांच साल और फायर प्लान की मंजूरी तीन साल तक वैध रहेगी। प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए उसकी वैधता समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले आवेदन करना होगा।

    5. हर साल फायर सेफ्टी ऑडिट जरूरी
    भवन मालिक या संचालक को हर वित्तीय वर्ष 30 जून तक फायर ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। उसे सुरक्षा इंतजाम चालू रखने और सालाना घोषणा देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

    6. सुरक्षा में कमी मिली तो 30 दिन में सुधार करना होगा
    निरीक्षण में फायर सेफ्टी की कमियां मिलने पर सक्षम प्राधिकारी भवन मालिक या संचालक को नोटिस दे सकता है। सामान्य प्रक्रिया में कमियां दूर करने के लिए अधिकतम 30 दिन मिल सकते हैं। आदेश का पालन नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित कर आगे कार्रवाई की जा सकती है।

    7. शादी, धार्मिक आयोजनों और पंडालों पर भी नियम लागू

    अस्थायी पंडाल, टेंट, मंडप और सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। आयोजक को कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले सुरक्षा संबंधी घोषणा और तय लेआउट जमा करना होगा। गंभीर खामी मिलने पर अस्थायी ढांचे को असुरक्षित घोषित कर सील किया जा सकता है।

    8. फायर टैक्स और सेवा शुल्क कितना लगेगा?

    नियमों में संपत्ति कर के कम से कम 2% की दर से फायर टैक्स लगाने का प्रावधान है। इसकी दर राज्य सरकार तय कर सकती है, लेकिन आवासीय संपत्तियों को फायर टैक्स से छूट दी गई है।

    कुछ फायर सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी संगठनों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी निर्धारित परिस्थितियों में सेवा शुल्क से छूट मिलेगी।।

    1. हर इमारत के लिए अलग फायर सेफ्टी मानक
    नियमों में भवनों को उपयोग के आधार पर आवासीय, शैक्षणिक, संस्थागत, असेंबली, व्यावसायिक, बाजार, औद्योगिक, भंडारण और खतरनाक गतिविधियों वाली श्रेणियों में बांटा गया है। अग्निशमन उपकरणों की संख्या, निकास द्वार और सुरक्षा इंतजाम भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार तय होंगे।

    2. फायर सेफ्टी की जिम्मेदारी भवन मालिक की
    भवन मालिक या संचालक को फायर सेफ्टी इंतजाम चालू हालत में रखने होंगे। सालाना घोषणा में इनकी स्थिति की पुष्टि करनी होगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारी कमियों की रिपोर्ट तैयार कर साक्ष्य दर्ज कर सकते हैं और सुधार के निर्देश दे सकते हैं।

    नोटिस के बाद भी कमियां दूर नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में उसे सील करने या बिजली-पानी की आपूर्ति काटने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

    3. आग लगने पर दमकल, पुलिस और चिकित्सा सेवाओं में समन्वय
    नियमों के तहत फायर कंट्रोल रूम, दमकल, पुलिस, चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय किया जाएगा। आग की सूचना मिलने पर घटनास्थल, फंसे लोगों और संभावित नुकसान का ब्योरा दर्ज होगा।

    जरूरत के अनुसार बिजली बंद कराने, एंबुलेंस बुलाने, भीड़ हटाने और मलबा हटाने में संबंधित विभागों की मदद ली जा सकेगी। दमकल अधिकारी दूसरे फायर स्टेशनों से भी कर्मचारी और उपकरण बुला सकेंगे। आपात स्थिति में सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं के संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकेगा।

    4. फायर सेफ्टी के काम के लिए एजेंसी को लाइसेंस जरूरी
    फायर सेफ्टी का काम करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए संबंधित तकनीकी क्षेत्र में योग्यता और कम से कम तीन साल का अनुभव जरूरी है। आवेदन शुल्क ₹10,000 है और लाइसेंस पांच साल तक वैध रहेगा।

    एजेंसियों को निर्धारित मानकों के अनुसार काम करने, उपकरणों की जांच व रखरखाव करने, दस्तावेज सुरक्षित रखने और काम पूरा होने का प्रमाणपत्र देने की जिम्मेदारी निभानी होगी। लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।

     

  • छत्तीसगढ़ के नगरनार स्टील प्लांट परिसर में आग से हड़कंप, घटना की जांच जारी

    छत्तीसगढ़ के नगरनार स्टील प्लांट परिसर में आग से हड़कंप, घटना की जांच जारी

    जगदलपुर.

    नगरनार स्थित एनएमडीसी के स्टील प्लांट के भीतर आग लगने की एक और घटना सामने आई है. इस बार प्लांट परिसर में टीआरएल कंपनी के स्टोर में आग लग गई. घटना के बाद मौके पर पहुंचे फायर फाइटर ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पा लिया.

    राहत की बात यह रही कि आग पर नियंत्रण कर लिया गया, लेकिन घटना के कारणों और इससे हुए नुकसान को लेकर अब तक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, वहीं प्लांट प्रबंधन ने घटना को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. उल्लेखनीय है कि स्टल प्लांट परिसर के भीतर आग लगने की सूचना से कुछ समय के लिए हलचल की स्थिति निर्मित हो गई. आग किस वजह से लगी, स्टोर में किस तरह की सामग्री रखी हुई थी और आग से कितना नुकसान हुआ है, इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं. आग बुझाने के लिए फायर फाइटर को मौके पर पहुंचना पड़ा, उनके प्रयासों से आग पर काबू पा लिया गया.

    घटना को लेकर प्लांट प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. प्रबंधन के टिप्पणी करने से इनकार के कारण आग लगने की वजह, नुकसान की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है. फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि घटना की विस्तृत जांच कराई जा रही है या नहीं. औद्योगिक इकाई के भीतर आग लगने की घटनाओं में समय पर आग पर नियंत्रण के साथ-साथ उनके कारणों का पता लगाना भी महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रबंधन घटना को लेकर कब तक आधिकारिक जानकारी देता है, और आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा कब होता है. नगरनार स्टील प्लांट में इससे पहले भी आग लगने की घटना सामने आ चुकी है. ऐसे में एक बार फिर प्लांट परिसर में आग लगने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि पिछली और वर्तमान घटना के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने के बीच आग लगने के कारणों की जांच और औद्योगिक सुरक्षा उपायों की जानकारी सार्वजनिक किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है.

  • न्यू मार्केट में आग बुझाने में देरी, 400 रेहड़ियों के अतिक्रमण से दमकल का रास्ता रुका

    न्यू मार्केट में आग बुझाने में देरी, 400 रेहड़ियों के अतिक्रमण से दमकल का रास्ता रुका

    भोपाल

     बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से शुरू हुई आग ऊपर तक पहुंची और देखते ही देखते पास की 5-6 चार मंजिला दुकानों को चपेट में ले लिया। मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों में रखा दीवाली का स्टॉक जल गया।इनके आसपास लगी 10-12 रेहड़ियां भी पूरी तरह खाक हो गईं। दुकानदारों के मुताबिक नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है।

    घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल आग की वजह से ज्यादा न्यू मार्केट की तैयारी और पहुंच को लेकर है। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक छोले-भटूरे बनाते समय भट्ठी से आग भड़की और ऊपर लगे बैनर तक पहुंची। दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर रखे थे।

    सिलेंडर फटे या नहीं, इसकी पुष्टि फायर विभाग अभी नहीं कर रहा है। दूसरी तरफ आग बुझाने पहुंची दमकलों को संकरी सड़क, रेहड़ियों और अतिक्रमण के बीच रास्ता बनाकर घटना स्थल तक पहुंचना पड़ा। दुकानदार के मुताबिक इसमें 25 से 30 मिनट लग गए।

    जहां से आग शुरू हुई, वहीं सबसे बड़ा सवाल सिलेंडर को लेकर

    बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में बाहर की तरफ ही भट्ठी लगी है। प्रत्यक्षदर्शी नीलेश पाटिल के मुताबिक दोपहर में भटूरे बनाते समय अचानक आग भड़की। दुकान में उस समय करीब 50-60 लोग मौजूद थे। आग लगते ही सभी बाहर भागे।

    नीलेश के मुताबिक दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर भी रखे थे और धमाके हुए। हालांकि, नगर निगम के फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने सिलेंडर रखे होने की बात तो कही है, लेकिन इनके ब्लास्ट होने की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि दुकान पूरी तरह तहस-नहस हो गई है और यह भी जांचा जा रहा है कि सिलेंडर ब्लास्ट हुए थे या नहीं।

    मंदिर तक पहुंच सकती थी आग, दीवार ने बचाया
    आग की चपेट में दुकान से सटा खेड़ापति हनुमान मंदिर भी आ सकता था। हालांकि मंदिर की दीवार के कारण आग वहां तक नहीं पहुंच सकी और मंदिर सुरक्षित रहा।

    अतिक्रमण ने बढ़ाई दमकल की परेशानी
    इस घटना के बाद न्यू मार्केट में अतिक्रमण का मुद्दा भी सामने आया। बाजार में दुकान के बाहर और आसपास काफी अतिक्रमण होने के कारण दमकल वाहनों को अंदर पहुंचने में परेशानी हुई आग तेजी से फैल रही थी, जबकि फायर ब्रिगेड को मौके तक पहुंचने के लिए सीमित जगह में काम करना पड़ा। इससे आग पर काबू पाने में चुनौती बढ़ गई।

    विधायक सबनानी ने कहा कि घटना से सबक लेते हुए न्यू मार्केट को जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी आपात स्थिति में दमकल और राहत वाहनों को आसानी से रास्ता मिलना जरूरी है।

    25 फीट की लपटों ने ऐसे पकड़ीं एक के बाद एक दुकानें
    छोले-भटूरे की दुकान से उठी आग ऊपर की मंजिलों तक पहुंची। दुकान के अंदर फर्नीचर और पर्दे थे, जबकि ऊपरी हिस्से में फ्लैक्स और पोस्टर लगे थे। यही आग फैलने का जरिया बने। इसके बाद पास की मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों तक आग पहुंच गई।

    दुकानदार संजय कुमार जैन के मुताबिक इन दुकानों में दीवाली का स्टॉक भरा था, जो पूरी तरह जल गया। सजावटी सामान, मोबाइल एक्सेसरीज और खाने-पीने की रेहड़ियां भी आसपास थीं। इनमें से 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं।

    दुकानदारों के अनुसार कुल नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है। इसकी अंतिम पुष्टि नुकसान के आकलन के बाद होगी।

    दमकल को आधा घंटा क्यों लगा, जबकि फायर स्टेशन करीब 1 किमी दूर?
    न्यू मार्केट के अंदर आने-जाने के करीब 10 रास्ते हैं। टीटी नगर थाने की ओर से दो और क्वॉलिटी रेस्टॉरेंट की ओर से एक प्रमुख रास्ते से वाहन आते-जाते हैं। आग वाली दुकानें टीटी नगर थाने के सामने वाले रास्ते की तरफ हैं।

    दुकानदार संजय कुमार के मुताबिक फायर कंट्रोल रूम पर सूचना देने के बाद कर्मचारियों को घटना स्थल की लोकेशन समझाने में भी समय लगा।

    इसके बाद जब दमकलें अंदर पहुंचीं तो रास्ते में लगी रेहड़ियां और संकरी सड़क बड़ी बाधा बनीं। दुकानदार के मुताबिक दमकल को मौके तक पहुंचने में 25 से 30 मिनट लग गए। माता मंदिर फायर स्टेशन यहां से करीब एक किलोमीटर दूर है।

    सामने आया अहम सवाल – अगर फायर स्टेशन करीब एक किलोमीटर दूर है और न्यू मार्केट में कई प्रवेश मार्ग हैं तो दमकल को घटना स्थल तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? क्या अतिक्रमण और रेहड़ियां सिर्फ रास्ते में थीं या पार्किंग और संकरी सड़क भी उतनी ही बड़ी बाधा बनी?

    न्यू मार्केट में 900 दुकानें, करीब 400 रेहड़ियां
    न्यू मार्केट में करीब 900 रजिस्टर्ड दुकानें हैं। इसके अलावा करीब 400 रेहड़ियां लगती हैं। खेड़ापति हनुमान मंदिर के सामने शाम के समय इतना अतिक्रमण रहता है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    आग वाली जगह के पास और सामने भी रेहड़ियां लगी थीं। आग में 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं। हादसे के दौरान इन्हीं रास्तों से दमकलों को अंदर लाने के लिए पुलिस और अन्य टीमों को लगातार रास्ता खाली कराना पड़ा।

    न्यू मार्केट व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी का कहना है कि हॉकर्स के अतिक्रमण के कारण दमकलों को अतिरिक्त समय लगा। उनके मुताबिक मल्टी लेवल पार्किंग पर एक स्टैंडिंग फायर ब्रिगेड रहती है, लेकिन न्यू मार्केट में दोपहिया फायर फाइटर की अतिरिक्त व्यवस्था भी होनी चाहिए।

    फायर सेफ्टी की तैयारी कितनी?
    न्यू मार्केट में कपड़े, सजावटी सामान, ज्वेलरी समेत कई तरह की दुकानें हैं। आग वाली लाइन में 10-12 छोले-भटूरे की दुकानें और रेस्टॉरेंट हैं। इनमें कई जगह भट्ठियां बाहर की तरफ लगी हैं।

    फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानदारों को फायर सेफ्टी नियमों के पालन के लिए कहा जाता है और विभाग की टीमें निरीक्षण भी करती हैं, लेकिन हादसे ने अब यह सवाल खड़ा किया है कि सिर्फ निरीक्षण और नोटिस से आगे बाजार में वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था कितनी है।

    जिस दुकान से आग शुरू हुई, उस पर पहले भी अतिक्रमण की कार्रवाई
    हादसे के बाद अतिक्रमण का मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है। जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से आग शुरू हुई, उसके संचालक के खिलाफ करीब आठ महीने पहले अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकानदार से विवाद होने की बात भी सामने आई है।

    भवन अनुज्ञा शाखा की ओर से भी नोटिस दिए गए थे। भदौरिया के मुताबिक करीब एक महीने पहले अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दिए गए थे और रेहड़ियां भी हटाई गई थीं, यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज रास्ते में अतिक्रमण था या नहीं, बल्कि यह भी है कि जिस अतिक्रमण पर पहले कार्रवाई हुई, वह दोबारा कैसे खड़ा हो गया?

    अतिक्रमण हटेगा या फिर मामला ठंडा पड़ जाएगा?
    न्यू मार्केट व्यापारियों की ओर से लंबे समय से हॉकर्स और अतिक्रमण की समस्या उठाई जाती रही है। हादसे के बाद यह मुद्दा फिर केंद्र में है। समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।

    अब सवाल यह है कि इस घोषणा के बाद कार्रवाई की समय सीमा क्या होगी? पहले दिए गए नोटिस और हटाए गए अतिक्रमण के बाद फिर से रेहड़ियां कैसे लग गईं? क्या पूरे बाजार का दोबारा सर्वे होगा और फायर एक्सेस के रास्ते स्थायी रूप से खाली रखे जाएंगे?

  • मोहाली में फैक्टरी के पास भड़की आग, सूखी झाड़ियों ने पकड़ी लपटें

    मोहाली में फैक्टरी के पास भड़की आग, सूखी झाड़ियों ने पकड़ी लपटें

    मोहाली.

    फेज-5 में किसान मंडी के पास गुरुवार सुबह करीब सात बजे सूखी झाड़ियों और कचरे में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और धुएं का गुबार आसपास फैल गया।

    आग की लपटों के पास ही स्वराज ट्रैक्टर फैक्टरी स्थित होने के कारण बड़ा हादसा होने का खतरा पैदा हो गया था। आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया।

    फायर अफसर लखविंदर सिंह ने बताया कि यदि हवा का रुख फैक्टरी की तरफ होता तो ट्रैक्टर फैक्टरी को नुकसान पहुंच सकता था। मौके पर पहुंचे सीनियर डिप्टी मेयर आर.पी. शर्मा ने आग बुझाने वाले कर्मचारियों को आवश्यक हिदायतें दीं।

  • मंदिर में दो साधुओं की दर्दनाक मौत, तख्त से बांधकर जलाने का आरोप

    मंदिर में दो साधुओं की दर्दनाक मौत, तख्त से बांधकर जलाने का आरोप

     शाहजहांपुर
    यूपी के शाहजहांपुर से रात दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। गांव के पश्चिम में स्थित हनुमान मंदिर में रहकर पूजा-पाठ करने वाले दो वृद्धों की तख्त से बांधकर जिंदा जला देने से मौत हो गई। वारदात रात करीब एक बजे की बताई जा रही है। मृतकों की पहचान गोपाल दास और बड़े दास के रूप में हुई है। बड़े दास दिव्यांग बताए गए हैं।

    शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मंदिर की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद में सुमित सिंह नाम के युवक पर दोनों वृद्धों के साथ मारपीट करने, उन्हें अलग-अलग तख्त से बांधने और मंदिर परिसर और आसपास से लकड़ियां जुटाकर आग लगाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि मंदिर सुमित के परिवार की जमीन पर बना है और वह उस पर कब्जा करना चाहता था। दोनों वृद्ध मंदिर में रहकर पूजा-पाठ करने के साथ उसकी देखभाल भी करते थे। इसी बात को लेकर पहले से विवाद होने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि बुधवार रात सुमित गांव में घूमते हुए पहले काल सिंह स्थान पर पहुंचा और वहां लाइट तोड़ने के बाद हनुमान मंदिर गया। यहां दोनों वृद्धों से उसका विवाद हुआ। इसके बाद उसने कथित तौर पर दोनों के साथ मारपीट की और उन्हें तख्त से बांधकर आग लगा दी। आग में झुलसने से दोनों की मौत हो गई।

    दो महीने पहले जेल से छूटकर आया था आरोपी
    ग्रामीणों के मुताबिक, आरोपी सुमित सिंह करीब दो महीने पहले जेल से छूटकर आया था। उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और कार जलाने समेत कई मामलों में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी है। उस पर पूर्व में आगजनी की घटनाओं में शामिल रहने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। बताया जा रहा है कि उसके पिता का नाम भी हिस्ट्रीशीटर के रूप में सामने आता रहा है। हालांकि, आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और वारदात के पीछे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    दो वृद्धों को मंदिर परिसर में बांधकर जिंदा जलाने की घटना से गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वारदात में इस्तेमाल किए गए तरीके, जमीन के विवाद की पृष्ठभूमि और आरोपी की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

    मंदिर की जमीन को लेकर पुराना विवाद
    गांव के पश्चिम में स्थित हनुमान मंदिर में दोनों वृद्ध लंबे समय से रहकर पूजा-पाठ और देखभाल करते थे। बताया जा रहा है कि मंदिर सुमित के परिवार की जमीन पर बना है। इसी जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि विवाद की तत्काल वजह क्या थी और वारदात से पहले आरोपियों व मृतकों के बीच क्या हुआ।

    दो महीने पहले जेल से छूटने की जानकारी
    ग्रामीणों के अनुसार, सुमित सिंह करीब दो महीने पहले जेल से बाहर आया था। उसके खिलाफ कार जलाने और एससी-एसटी एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है। उस पर पहले भी आगजनी की घटनाओं में शामिल रहने के आरोप हैं।

  • बड़ी चौपड़ के कॉम्पलेक्स में लगी भीषण आग, दिवाली का लाखों का सामान जलकर हुआ राख

    बड़ी चौपड़ के कॉम्पलेक्स में लगी भीषण आग, दिवाली का लाखों का सामान जलकर हुआ राख

    जयपुर
    जयपुर में दिवाली से ठीक पहले लगी भीषण आग ने कई कारोबारियों की महीनों की मेहनत और त्योहार के सीजन से जुड़ी उम्मीदों को एक झटके में राख कर दिया। जिस सामान को व्यापारियों ने अच्छे कारोबार की उम्मीद में लाखों रुपए खर्च कर जुटाया था, वही माल गुरुवार सुबह उनकी आंखों के सामने आग की लपटों में जलता रहा। कोई व्यापारी अपने हाथों से आंसू पोंछता रहा तो किसी परिवार के लिए नुकसान का सदमा इतना भारी पड़ा कि तबीयत बिगड़ गई।

    बड़ी चौपड़ स्थित मणिहारों का कटला-सेठी कॉम्पलेक्स में सुबह करीब 7 बजे दूसरी मंजिल पर चूड़ियों के गोदाम में आग लगी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग शॉर्ट सर्किट से लगी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब 25 दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। कपड़े, प्लास्टिक का सामान, कॉस्मेटिक आइटम, चूड़ियां और दिवाली सीजन से जुड़ा सामान आग में जल गया। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन धुआं शाम तक उठता रहा।

    दिवाली के लिए भरा था माल, आंखों के सामने राख हो गया
    व्यापारी कमल अग्रवाल के लिए यह आग सिर्फ दुकानों में लगी आग नहीं थी, बल्कि दिवाली की उन उम्मीदों पर भी भारी पड़ी थी, जिनके भरोसे उन्होंने पहले से लाखों रुपए का सामान जुटा रखा था। कमल की कॉम्पलेक्स में तीन दुकानें खुद की हैं, जबकि दो दुकानें किराये पर हैं। दिवाली सीजन को देखते हुए पांचों दुकानों में बड़ी मात्रा में सामान स्टॉक किया गया था।

    इनमें बंदरवाल, दिवाली सजावट का सामान, धागों की गट्टियां और टेलरिंग से जुड़े सीजनल आइटम शामिल थे। आग की चपेट में उनकी तीन दुकानें आ गईं। बड़ी मात्रा में माल जलकर राख हो गया।

    आग की खबर मिलते ही कमल अपनी पत्नी और बेटे प्रणव अग्रवाल के साथ मौके पर पहुंचे। दुकानें जलती देखकर कमल भावुक हो गए। कुछ देर तक वह एक कोने में बैठे रहे और लगातार आंसू पोंछते नजर आए। जिस माल को उन्होंने सीजन में बिक्री के लिए सजाकर रखा था, वह उनकी आंखों के सामने धुएं में बदल रहा था।

    नुकसान देखकर पत्नी की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल ले जाना पड़ा
    कॉम्पलेक्स के सेक्रेटरी राम कटारिया के मुताबिक दिवाली को देखते हुए कमल ने काफी मात्रा में सामान भरकर रखा था। आग से हुए नुकसान को देखकर कमल की पत्नी भी रोने लगीं। परिवार और रिश्तेदार उन्हें संभालते रहे, लेकिन कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बीपी लो हो गया। उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।

    कमल की हालत भी खराब होने पर परिजनों ने उन्हें घर भेज दिया। बेटे प्रणव ने बताया कि परिवार सीजनल कारोबार करता है। दिवाली पर अच्छे व्यापार की उम्मीद थी, इसलिए पहले से बड़ी मात्रा में सामान खरीदा गया था। आग वाले हिस्से में जाने की अनुमति नहीं होने के कारण परिवार अपने माल की स्थिति भी ठीक से नहीं देख सका।

    व्यापारी बेबस थे, पुलिसकर्मी रास्ता बनाकर अंदर पहुंचे
    एक तरफ व्यापारी अपने कारोबार को अपनी आंखों के सामने खत्म होते देखने को मजबूर थे, वहीं दूसरी तरफ पुलिस, दमकल, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमें आग से जूझ रही थीं।

    तीन मंजिला कॉम्पलेक्स के बरामदों में लोहे की जालियां लगी थीं। रास्ता संकरा था और सामान भी भरा हुआ था। ऐसे में आग वाले हिस्से तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था। माणक चौक थाने में तैनात नरेंद्र सिंह शेखावत और विक्रम सिंह ने रास्ता बनाने के लिए दीवार और लोहे की जाली तोड़ी। इसके बाद सीढ़ियों के जरिए दूसरी मंजिल तक पहुंचकर दमकलकर्मियों के लिए रास्ता बनाया गया।

    धुआं आंखों में चुभता रहा, दम घुटता रहा, फिर भी नहीं रुकी टीम
    दूसरी मंजिल पर जमा सामान आग बुझाने की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था। घने धुएं के बीच दमकलकर्मी, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ जवान लगातार ऑपरेशन में जुटे रहे। कई जगह शटर और दूसरे अवरोध तोड़कर अंदर पहुंचना पड़ा।

    धुआं इतना घना था कि जवानों की आंखों में तेज जलन होने लगी। कुछ को सांस लेने में भी परेशानी हुई। तबीयत प्रभावित होने पर कुछ दमकलकर्मियों को थोड़ी देर के लिए बाहर बैठाया गया, लेकिन इसके बाद वे फिर ऑपरेशन में जुट गए। करीब सात घंटे से ज्यादा चले अभियान में टीम आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास करती रही।

    नीचे के दुकानदारों को भी सताने लगा अपना माल जलने का डर
    दूसरी मंजिल से उठती लपटों और धुएं ने नीचे की दुकानों में बैठे व्यापारियों की चिंता भी बढ़ा दी। ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल के दुकानदार अपने स्टाफ के साथ सामान बाहर निकालने में जुट गए। बड़े-बड़े कार्टून दुकानों और गोदामों से बाहर लाए जाने लगे।

    डर था कि अगर आग नीचे तक पहुंची तो दिवाली के लिए जमा किया गया उनका माल भी राख हो जाएगा। एक तरफ दमकल की गाड़ियां आग बुझा रही थीं, दूसरी तरफ व्यापारी अपनी दुकानों से बचा हुआ सामान बाहर निकाल रहे थे।

    आग बुझी, लेकिन कारोबारियों का संकट अभी बाकी
    अग्निकांड के बाद व्यापारियों में कॉम्पलेक्स प्रबंधन को लेकर आक्रोश है। व्यापारियों ने प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आग ने सिर्फ सामान नहीं जलाया, बल्कि दिवाली के पूरे सीजन की तैयारियों को भी झटका दिया है।

  • महापौर की गाड़ी के ऊपर जलाए कागज, आग लगाने की कोशिश से भोपाल नगर निगम में मचा बवाल

    महापौर की गाड़ी के ऊपर जलाए कागज, आग लगाने की कोशिश से भोपाल नगर निगम में मचा बवाल

     भोपाल
     भोपाल नगर निगम कार्यालय परिसर में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक नाराज कर्मचारी ने हंगामा करते हुए महापौर मालती राय की गाड़ी में आग लगाने का प्रयास किया। कर्मचारी ने कुछ कागजों में आग लगाकर उन्हें महापौर की गाड़ी की छत पर रख दिया।

    मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए जलते कागजों को तुरंत हटा दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आग बुझाने के दौरान एक कर्मचारी रामसिंह यादव के हाथ झुलस गए।

    बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी अपनी मांगों के निराकरण नहीं होने और अन्य समस्याओं को लेकर नाराज था। वह कुछ समय से बीमार चल रहा है और अस्पताल में भर्ती रहकर इलाज भी करा रहा था। जानकारी के अनुसार, सोमवार को वह सीधे अस्पताल से नगर निगम कार्यालय पहुंचा था।

    हाथ में पर्चे लेकर की नारेबाजी
    कार्यालय पहुंचने के बाद कर्मचारी ने हाथ में पर्चे लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वह महापौर मालती राय की गाड़ी के पास पहुंच गया। यहां उसने कुछ कागजों में आग लगाई और उन्हें गाड़ी की छत पर रख दिया।

    गाड़ी में आग लगने की आशंका को देखते हुए वहां मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल जलते हुए कागजों को हटा दिया। इस दौरान आग बुझाने की कोशिश में कर्मचारी रामसिंह यादव के हाथ झुलस गए। समय रहते आग पर काबू पा लेने से वाहन को बड़े नुकसान से बचा लिया गया।

    पर्चों पर कर्मचारी संगठन का नाम
    कर्मचारी ने परिसर में जो पर्चे फेंके, उन पर कर्मचारी नगर निगम भोपाल के साथ सम्राट अशोक संगठन का नाम लिखा हुआ है। पर्चों पर सुनील गायकवाड़, कर्मचारी अध्यक्ष, नगर निगम भोपाल का नाम भी अंकित है।

    घटना के बाद नगर निगम कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल कर्मचारी के हंगामे और महापौर की गाड़ी में आग लगाने के प्रयास के मामले में आगे की कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है।

     

  • Jalandhar Fire: गद्दे की फैक्ट्री धधकी, आसमान में छाया काला धुआं; आग बुझाने पहुंचीं 10 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां

    Jalandhar Fire: गद्दे की फैक्ट्री धधकी, आसमान में छाया काला धुआं; आग बुझाने पहुंचीं 10 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां

     जालंधर
     थाना बस्ती बावा खेल के बस्ती पीर दाद रोड पर स्थित गद्दे बनाने की एक फैक्ट्री में वीरवार सुबह अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे परिसर में धुआं फैल गया।

    गनीमत रही कि समय रहते फैक्ट्री के अंदर मौजूद करीब 12 लोगों को बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। जानकारी के मुताबिक वीरवार सुबह करीब नौ बजे फैक्ट्री के अंदर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। आसपास के लोगों ने जब फैक्ट्री से निकलता धुआं देखा तो तुरंत वहां मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। कुछ ही देर में आग तेजी से फैल गई। गद्दे और उनमें इस्तेमाल होने वाला सामान ज्वलनशील होने के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया।

    फैक्ट्री के अंदर केमिकल होने के कारण आग काफी भड़क गई है, जिससे इसे बुझाने में दिक्कत हुई। आग लगने के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात कही जा रही है।

    केशव नामक व्यक्ति ने बताया कि एक व्यक्ति घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। आग लोगों के घरों तक पहुंच गई। पुलिस प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन पुलिस एक घंटे के बाद मौके पर पहुंची। किसी भी फैक्टरी के संचालक ने घटना स्थल का आकर जायजा नहीं लिया गया।

    इस घटना के दौरान एक लैंटर भी गिर गया। व्यक्ति ने प्रशासन से फैक्ट्री को रिहायशी इलाके से बाहर निकालने की अपील की। केशव के अनुसार, 10 साल पहले भी एक फैक्टरी में आग लगने की घटना सामने आई थी।

    तक फैक्ट्री कर्मी ने कहा था कि इस यूनिट को इलाके से बाहर ले जाया जा रहा है और इसे गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन फैक्ट्री में आज भी गद्दे बनाने का काम चल रहा है। केशव के अनुसार फैक्टरी में भारी मात्रा में एलपीजी कॉमर्शियल सिलेंडर मौजूद है।

    आग की लपटें और घना धुआं देखकर आसपास के लोगों में भी दहशत फैल गई। धुआं इतना अधिक था कि करीब दो किलोमीटर दूर तक इसे आसानी से देखा जा रहा था। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया।

    आग की भयावहता को देखते हुए करीब 10 दमकल गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। दमकल कर्मियों ने कई दिशाओं से पानी की बौछार कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, आग से फैक्ट्री में कितना नुकसान हुआ है, इसका अभी आकलन नहीं हो सका है। थाना बस्ती बावा खेल की पुलिस भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच कर रही है।

  • सुबह 4 बजे शोरूम में लगी भयंकर आग, 40 इलेक्ट्रिक वाहन समेत ऑटो पार्ट्स स्टोर राख

    सुबह 4 बजे शोरूम में लगी भयंकर आग, 40 इलेक्ट्रिक वाहन समेत ऑटो पार्ट्स स्टोर राख

    सीकर 
    राजस्थान के सीकर शहर में शनिवार तड़के एक बड़ा हादसा हो गया। सर्किट हाउस के सामने स्थित दो इलेक्ट्रिक व्हीकल शोरूम में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे दोनों शोरूम में रखे लगभग 40 इलेक्ट्रिक वाहन जल गए। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उसने पास ही स्थित एक अन्य ऑटो पार्ट्स के शोरूम को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में कुल करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान जताया जा रहा है।

    सुबह 4 बजे हुआ हादसा
    मामले की जानकारी देते हुए थाना अधिकारी राजाराम लेघा ने बताया, घटना शनिवार सुबह करीब चार बजे की है। सर्किट हाउस के सामने भैरों सिंह शेखावत के दो इलेक्ट्रिक व्हीकल शोरूम 'बीएस ऑटोमोबाइल' और 'बच्चन मोटर्स' स्थित हैं। सबसे पहले आग बीएस ऑटोमोबाइल शोरूम में लगी थी। शोरूम के भीतर गाड़ियों में अत्यधिक प्लास्टिक, रबर और बैटरी मैटेरियल होने के कारण आग तेजी से भड़क गई। कुछ ही देर में लपटें पास में स्थित बच्चन मोटर्स तक फैल गईं।

    पास के ऑटो पार्ट्स शोरूम तक पहुंचीं लपटें
    दोनों ईवी शोरूम में आग की लपटें पास ही स्थित हुंडई के ऑटो पार्ट्स शोरूम तक जा पहुंची। वहां रखे स्पेयर पार्ट्स, एयर कंडीशनर और अन्य कीमती सामान भी जल गए।

    पांच दमकलों ने ढाई घंटे में पाया काबू
    आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने सबसे पहले इलाके की बिजली सप्लाई बंद करवाई और सड़क के एक तरफ वाहनों की आवाजाही को रोक दिया। इसके बाद फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग ढाई घंटे में आग पर पूरी तरह से काबू पाया।

    SHO राजाराम लेघा ने बताया, बीएस ऑटोमोबाइल में इलेक्ट्रिक स्कूटी और बाइक बेची जाती थीं, जबकि बच्चन मोटर्स में ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक ऑटो रखे थे। हादसे के वक्त दोनों शोरूम में मिलाकर करीब 40 वाहन मौजूद थे, जो पूरी तरह जल गए।

    शुरुआती जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि आग के वास्तविक कारणों का सटीक पता जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल, पुलिस मामले की आगे की कार्रवाई में जुटी है।

  • थाईलैंड में बड़ा हादसा: बैंकॉक के पब में आग का तांडव, 27 लोगों की जान गई, कई गंभीर घायल

    थाईलैंड में बड़ा हादसा: बैंकॉक के पब में आग का तांडव, 27 लोगों की जान गई, कई गंभीर घायल

    बैंकॉक
     थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के एक पब में सोमवार सुबह तड़के भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 27 लोग मारे गए हैं, जबकि 60 से ज्यादा घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि घायलों में 22 लोगों की हालत गंभीर है। मौके पर पहुंचने वाले प्रत्यक्षदर्शियों ने ऑनलाइन वीडियो शेयर किए हैं, जिसमें पब के दरवाजे के आग की लपटें और धुआं निकलता दिख रहा है। इसके बीच में लोगों को भागने की कोशिश करते देखा जा सकता है।

    आधी रात को पब में लगी आग
    अधिकारियों का कहना है कि उन्हें आधी रात के आसपास बैंकॉक के उत्तरी हिस्से में स्थित ना लादप्राओ पब में आग लगने की सूचना मिली थी। बाद में घटनास्थल पर पहुंचे थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने बताया कि 27 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

    थाई पीएम ने कहा कि पब में परफॉर्म कर रहे एक म्यूजिशियन ने उन्हें बताया कि बिजली जाने से पहले स्टेज के पास लगे सर्किट ब्रेकर से धुआं निकलते देखा था। फिर एक धमाके की आवाज सुनाई थी और तेजी से पूरी जगह घना धुआं भर गया। कई पीड़ित पब के पिछले हिस्से में बने रेस्ट रूम में पाए गए।

    आखिर हुआ क्या?
    देश के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने सोमवार तड़के सुबह घटनास्थल का दौरा किया. उनके अनुसार जिन लोगों की जान बच गई उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद पब तेजी से धुएं से भर गया, जिससे कई लोगों को जगह के पिछले हिस्से में बाथरूम के पास भागना पड़ा. अनुतिन ने कहा, "हमने 27 शव बरामद किए हैं, बाकी लोगों को हॉस्पिटल भेजा जा रहा है। 

    उन्होंने कहा कि पब पर मौजूद म्यूजिशियन ने बताया कि "स्टेज के पास लगे सर्किट ब्रेकर से धुआं निकला, जिसके बाद लाइट चली गई और धमाका हुआ। 

    बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारी सुरियाचाई राविवान ने बताया कि इस घटना में घायल हुए 63 और लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टीपुंट ने पत्रकारों को बताया कि घायल और हॉस्पिटल में भर्ती लोगों में से 22 की हालत गंभीर है. यानी मौतों का आंकड़ा अभी बढ़ सकता है। 

    22 घायलों की हालत गंभीर
    समाचार एजेंसी एपी ने बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टीपुंट के हवाले से बताया कि 63 लोगों को अस्पताल ले जाया गया। इनमें 22 की हालत गंभीर है। अधिकारियों के सामने लोगों पीड़ितों की पहचान करने में मुश्किल हो रही है, क्योंकि कई लोगों के पास आईडी नहीं थी या वे बेहोश थे। घटनास्थल पर अपने प्रियजनों की जानकारी लेने आ रहे लोगों से जानकारी इकठ्ठा करने के लिए एक रजिस्ट्रेशन डेस्क भी बनाया गया है।

    टॉयलेट में मिले लोगों के शव
    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आग ने कुछ मिनट के अंदर ही पब को चपेट में ले लिया। आग लगने के दौरान कुछ लोग जान बचाने के लिए टॉयलेट में छिप गए थे। बचाव टीमों को कई लोगों के शव टॉयलेट में ही मिले। अधिकारियों ने बताया फायरकर्मियों ने करीब आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में पब के अंदर का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त था। तस्वीरों में जली हुई मेजें और कुर्सियां नजर आ रही थीं।