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  • जनवरी तक बदलेगा हॉकी मैदान का टर्फ, बड़े टूर्नामेंट की तैयारी

    जनवरी तक बदलेगा हॉकी मैदान का टर्फ, बड़े टूर्नामेंट की तैयारी

    राजनांदगांव.

    ‘हॉकी की नर्सरी’ को आगामी जनवरी माह तक नए एस्ट्रोटर्फ की सौगात मिल जाएगी। पीडब्ल्यूडी विभाग ने दिल्ली की एजेंसी को वर्क आर्डर जारी कर दिया है, जिसके बाद युध्द स्तर पर पुराना एस्ट्रोटर्फ को हटाने की कवायद शुरू हो गई है।

    एस्ट्रोटर्फ तैयार होने के बाद अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन हो सकेगा। बता दें कि 11 साल पहले 22 करोड़ की लागत से पूरे स्टेडियम का निर्माण कराया गया था, जिसमें एस्ट्रोटर्फ भी शामिल था। लेकिन टर्फ के खराब होने, सतह उखड़ने और जगह- जगह कीचड़ व काले धब्बे जमने के कारण न केवल खिलाड़ियों का खेलने एक तरह से बंद हो गया था, बल्कि 80 सालों से चली आ रही अखिल भारतीय महंत राजा सर्वेश्वरदास स्मृति हॉकी प्रतियोगिता के आयोजन की परंपरा खत्म हो गई थी।

    पिछले वर्ष मिली स्वीकृति के बाद अब करीब 5.64 करोड़ रुपए की लागत से नया एस्ट्रोटर्फ बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। शनिवार से पुराने टर्फ को उखाड़ने का काम मजदूरों ने शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में इसे पूरी तरह से उखाड़ दिया जाएगा। इसके बाद नया टर्फ लगाने का काम शुरू होगा।
    एस्ट्रोटर्फ बदलने के बाद वहां अन्य संसाधनों की भी जरूरत है। बहरहाल, टर्फ को धोने वाली स्प्रंकलर खराब हो चुका है, उसे सुधारना जरूरी होगा, जिसके बाद ही मैच हो सकेंगे। इसी तरह फ्लड लाइट की लंबे समय से मांग की जा रही है। वहीं पवेलियन के दोनों साइड धूप से बचने कुर्सी के उपर शेड लगाने की भी मांग की गई है।

  • भारत-पाक हॉकी मैच के लिए पाकिस्तान ने मांगा न्यूट्रल वेन्यू, भारत ने दिया साफ जवाब

    भारत-पाक हॉकी मैच के लिए पाकिस्तान ने मांगा न्यूट्रल वेन्यू, भारत ने दिया साफ जवाब

    चंडीगढ़
     पंजाब में होने वाली
    एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी को लेकर भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ (पीएचएफ) ने सुरक्षा और दोनों देशों के बीच मौजूदा संवेदनशील परिस्थितियों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट को तटस्थ स्थान पर कराने की मांग की है।

    पाकिस्तान की ओर से एशियाई हॉकी महासंघ (एएचएफ) के समक्ष यह मांग रखी गई है कि या तो पूरा टूर्नामेंट भारत से बाहर कराया जाए अथवा पाकिस्तान के मुकाबले किसी न्यूट्रल वेन्यू पर करवाए जाएं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ के अंतरिम अध्यक्ष मोहिउद्दीन अहमद वानी ने कहा है कि यह कदम खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    हालांकि पाकिस्तान ने टूर्नामेंट से हटने की बात नहीं कही है और भारत समेत अन्य टीमों के खिलाफ खेलने की प्रतिबद्धता जताई है।

    हॉकी इंडिया ने ठुकराई न्यूट्रल वेन्यू की मांग
    पाकिस्तान की मांग के बाद हॉकी इंडिया ने फिलहाल साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट के आयोजन स्थल में कोई बदलाव नहीं होगा। हॉकी इंडिया के महासचिव और एएचएफ के उपाध्यक्ष भोला नाथ सिंह ने कहा कि यदि पाकिस्तान को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में खेलना है तो उसे भारत आना होगा। जानकारी अनुसार पाकिस्तान के नहीं आने की स्थिति में ओमान या बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर शामिल किया जा सकता है।

    1 नवंबर को होना है मुकाबला
    एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन पंजाब में 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होना है। जालंधर में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक उद्घाटन समारोह और लीग चरण के मुकाबले होंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मोहाली में खेले जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला 1 नवंबर को जालंधर में होना है।

    पंजाब में लंबे समय बाद भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को लेकर हॉकी प्रेमियों में खासा उत्साह था। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से न्यूट्रल वेन्यू की मांग आने के बाद इस मुकाबले के आयोजन को लेकर स्थिति फिर असमंजस में पहुंच गई है।

    चार और देश भी उतरेंगे मैदान में
    टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान के अलावा चीन, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया की टीमें प्रस्तावित हैं। पाकिस्तान के नहीं खेलने की स्थिति में ओमान और बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर रखा गया है।

    भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से द्विपक्षीय खेल संबंधों को लेकर अलग स्थिति रही है, हालांकि दोनों देशों की टीमें बहुदेशीय प्रतियोगिताओं में आमने-सामने आती रही हैं। अब सबकी नजर एशियाई हॉकी महासंघ के अगले फैसले पर है कि पाकिस्तान की न्यूट्रल वेन्यू की मांग पर क्या निर्णय होता है और क्या 1 नवंबर को जालंधर में भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को मिलेगा।

  • जालंधर में 27 अक्टूबर से एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, भारत-Pak समेत 6 टीमें लेंगी हिस्सा; एंट्री फ्री

    जालंधर में 27 अक्टूबर से एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, भारत-Pak समेत 6 टीमें लेंगी हिस्सा; एंट्री फ्री

    जालंधर

    एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब 2026 की शुरुआत 27 अक्टूबर से जालंधर से होगी। फाइनल मुकाबला 5 नवंबर को मोहाली में खेला जाएगा। टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान, जापान, मलेशिया, चीन और कोरिया की टीमें हिस्सा लेंगी। ओमान और बांग्लादेश को रिजर्व टीमों के तौर पर रखा। 

    इस दौरान टूर्नामेंट का लोगो भी जारी किया गया। हॉकी इंडिया के खिलाड़ी भी मौजूद रहे। सरकार ने 25 करोड़ 40 लाख रुपए का बजट रखा है। पूरे टूर्नामेंट में दर्शकों की एंट्री फ्री रहेगी। सरकार की तरफ से सभी उचित इंतजाम किए जाएंगे।

    मोहाली में होंगे निर्णायक मुकाबले लीग चरण के बाद टूर्नामेंट के मुकाबले मोहाली में खेले जाएंगे। 4 नवंबर को सेमीफाइनल मुकाबले होंगे। इसके साथ ही तीसरे और चौथे स्थान के लिए भी मुकाबला खेला जाएगा। 5 नवंबर को शाम 7 बजे फाइनल मुकाबला होगा। इसी के साथ एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब 2026 के विजेता का फैसला होगा।

    खिलाड़ियों को इंडस्ट्री व मैदान घुमाएंगे टूर्नामेंट में आने वाले खिलाड़ियों को पंजाब की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से भी रूबरू करवाया जाएगा। उन्हें हॉकी के मैदानों से लेकर स्पोर्ट्स इंडस्ट्री तक ले जाया जाएगा। साथ ही, उन्हें पंजाब के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। खिलाड़ियों को सरसों का साग और मक्की की रोटी खिलाने के साथ अमृतसर, बाघा बॉर्डर और जलियांवाला बाग भी ले जाने की योजना है। कोशिश रहेगी कि खिलाड़ियों को पंजाब की संस्कृति और विरासत का पूरा अनुभव कराया जाए।

    पुराने हॉकी खिलाड़ी भी सम्मानित होंगे इस टूर्नामेंट में बच्चों पर भी विशेष ध्यान रहेगा। हर मैच के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुराने और दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। पंजाब सरकार अब जूनियर और सीनियर हॉकी लीग आयोजित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके अलावा, हॉकी इंडिया लीग में महिला और पुरुष दोनों वर्गों की पंजाब की टीमें शामिल होंगी।

  • संघर्षों को हराकर हॉकी स्टिक से आसमान छू रहीं बड़वानी की बेटियां, राष्ट्रीय खेल दिवस पर खास कहानी

     बड़वानी
    राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर जब पूरा देश हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को नमन कर रहा है, वहीं मध्यप्रदेश का जनजातीय बहुल जिला बड़वानी हॉकी के नए गढ़ के रूप में उभर रहा है। गरीबी और अभावों को मात देकर यहां की बेटियां और बेटे अपने पसीने से संघर्ष की नई इबारत लिख रहे हैं। किसी की मां ने मजदूरी की और किसी के पिता ठेला चलाकर जीवन यापन कर रहे पर बेटियों का हौसला देखिए- सारी बाधाओं को पार कर वे मेडल पर मेडल जीती जा रहीं हैं। शिवानी, सलोनी और मनप्रीत कौर जैसी अनेक हॉकी प्लेयर देश विदेश में अपना हुनर दिखा रहीं हैं।

    सरकारी स्कूलों में फ्री कोचिंग, किट और बेहतर कोच की सुविधा के चलते युवा खिलाडिय़ों ने हॉकी में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेरी है। जिले से मप्र राज्य हॉकी अकादमी, ग्वालियर में 6 बालिकाओं का चयन हुआ। एशियन चैंपियनशिप में स्नेहा दावदे, पिंकी दावदे और मोनिका राठौर खेल चुकी हैं। वहीं, रजनी वास्कले ने स्पोट्र्स कोटे से यूनियन बैंक में नौकरी हासिल की है। खास बात यह है कि बेटियों की सफलता को देखते हुए अब अभिभावक भी बेटियों को हॉकी स्टिक थमा रहे हैं।

    बेटियों ने दिखाया हॉकी में दम
    पीजी कॉलेज के पीछे रहने वाली 16 वर्षीय शिवानी बामनिया गरीबी को हराते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर रही हैं। वर्ष 2017 में पिता छोटू बामनिया के निधन के बाद मां ने झाड़ू-पोंछा और मजदूरी करके परिवार को संभाला। मोहल्ले की लड़कियों को देखकर हॉकी शुरू करने वाली शिवानी आज ग्वालियर अकादमी के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई और खेल का अभ्यास कर रही हैं।

    पिता चला रहे ठेला, बेटी जीत रही मेडल
    विवेकानंद विहार कॉलोनी की 15 वर्षीय मनप्रीत कौर के पिता ओंकार सिंह ठेला गाड़ी चलाकर परिवार का पालन करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मनप्रीत ने 4 वर्षों में शानदार प्रदर्शन करते हुए सात राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लिया है। उन्होंने वेस्ट जोन नेशनल में एक स्वर्ण व एक रजत पदक अपने नाम किया है। वह रायपुर स्पोट्र्स अकादमी अभ्यास कर रही है।

    दो साल पूर्व स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की 68वीं राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता (अंडर 14 बालिका) में भी मनप्रीत कौर का चयन हुआ था। उनके साथ ही बड़वानी की ही खिलाड़ी यामिनी राठौड़ ने भी प्रदेश की ओर से प्रतिनिधित्व किया था। मनप्रीत तब राज्य महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर में ट्रेनिंग ले रही थी जब​कि यामिनी मॉडर्न अकादमी अंजड़ में अध्ययनरत थी। इसके पूर्व भी दोनों खिलाड़ी मध्यप्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी थीं।

  • महिला हॉकी का बदला अंदाज! 52 साल बाद वर्ल्ड कप के टॉप-5 में पहुंचा भारत

    महिला हॉकी का बदला अंदाज! 52 साल बाद वर्ल्ड कप के टॉप-5 में पहुंचा भारत

     एम्स्टेलवीन

    जर्मनी पर 3-1 की जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने विश्व कप अभियान को पांचवें स्थान पर खत्म किया. कागज पर यह सिर्फ एक क्लासिफिकेशन मैच की जीत और पांचवां स्थान नजर आ सकता है, लेकिन भारतीय हॉकी के नजरिए से इसका महत्व इससे कहीं बड़ा है. 1974 के उद्घाटन विश्व कप में चौथे स्थान के बाद यह भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन है. यानी 52 साल बाद भारतीय महिला टीम फिर विश्व कप के शीर्ष पांच में पहुंची है। 

    और इस उपलब्धि को सिर्फ पांचवें स्थान के आंकड़े से नहीं आंका जाना चाहिए. मौजूदा भारतीय टीम में 11 खिलाड़ी विश्व कप में पहली बार उतरी थीं. इसके बावजूद टीम ने पूरे टूर्नामेंट में केवल एक मुकाबला गंवाया- वह भी मेजबान और ओलंपिक चैम्पियन नीदरलैंड्स के खिलाफ 0-2 से. यह आंकड़ा बताता है कि भारत की चुनौती महज एक अच्छे दिन की कहानी नहीं थी। 

    नतीजों से ज्यादा प्रदर्शन में दिखा बदलाव

    भारत ने अभियान की शुरुआत ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को 2-2 से रोककर की और इसके बाद दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया. इंग्लैंड के खिलाफ ड्रॉ और ऑस्ट्रेलिया के साथ दूसरे चरण के आखिरी मैच में गोलरहित बराबरी ने भले ही भारत को सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर कर दिया, लेकिन इन मुकाबलों में टीम की प्रतिस्पर्धात्मकता लगातार दिखाई दी। 

    यही इस अभियान का सबसे सकारात्मक पहलू रहा. भारत ने सिर्फ रक्षात्मक हॉकी खेलकर मैच बचाने की कोशिश नहीं की, बल्कि कई मौकों पर गेंद पर नियंत्रण, पासिंग और आक्रामक हॉकी के जरिए शीर्ष टीमों को चुनौती दी। 

    जर्मनी के खिलाफ पांचवें स्थान के मुकाबले में भी इसका एक दिलचस्प उदाहरण देखने को मिला. 43 मिनट तक दोनों टीमें गोल के लिए संघर्ष करती रहीं. मुकाबला धीमा था और किसी टीम को स्पष्ट बढ़त नहीं मिल रही थी. लेकिन इसके बाद भारत ने अचानक मैच की दिशा बदल दी। 

    आखिरी 17 मिनट में दिखी असली तस्वीर
    43वें मिनट में ईशिका ने रिवर्स हिट से भारत का खाता खोला. इसके बाद नवनीत कौर ने सिर्फ तीन मिनट के भीतर दो गोल करके मुकाबला भारत की मुट्ठी में कर दिया। 

    पहले उन्होंने 'टच एंड स्लैप' तकनीक से पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला और फिर शानदार ड्रिब्लिंग करते हुए जर्मन डिफेंस को छकाकर तीसरा गोल दाग दिया। 

    यानी भारत की जीत सिर्फ गोलों की संख्या से खास नहीं थी. गोल करने का तरीका भी महत्वपूर्ण था. दबाव के बीच धैर्य, सर्कल में बेहतर निर्णय और मौके को गोल में बदलने की क्षमता- ये वे क्षेत्र हैं जिनमें भारतीय टीम को लंबे समय से सुधार की जरूरत महसूस होती रही है। 

    जर्मनी ने छह पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन भारतीय गोलकीपर बिचू देवी और डिफेंस ने उन्हें गोल में बदलने नहीं दिया. यह भी इस अभियान की एक बड़ी तस्वीर है- भारत ने सिर्फ आक्रमण में नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में रक्षात्मक अनुशासन भी दिखाया। 

    जिस जर्मनी ने अभ्यास मैचों में हराया, उसी को विश्व कप में शिकस्त
    इस जीत का एक और पहलू इसे खास बनाता है. टूर्नामेंट से पहले इसी जर्मन टीम ने भारत को दो अभ्यास मैचों में हराया था. विश्व कप के असली मंच पर कहानी उलट गई। 

    यह बदलाव बताता है कि भारतीय टीम ने टूर्नामेंट के दौरान सिर्फ मैच नहीं खेले, बल्कि उनसे सीखा भी. दबाव बढ़ने के साथ टीम का प्रदर्शन बेहतर हुआ और आखिरी मुकाबले में उसने अपने मौके का पूरा फायदा उठाया। 

    कोच शोर्ड मारिन के लिए भी यह अभियान विशेष रहा. टोक्यो ओलंपिक में भारत को ऐतिहासिक चौथे स्थान तक पहुंचाने वाले मारिन ने अंतिम हूटर के बाद जिस तरह खुशी मनाई, उससे साफ था कि टीम के लिए यह पांचवां स्थान सामान्य उपलब्धि नहीं है। 

    अब असली परीक्षा एशियाई गेम्स में
    फिर भी इस प्रदर्शन को अंतिम मंजिल मानना जल्दबाजी होगी. अगले महीने एशियाई खेल हैं और वहां भारत से अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से बढ़ेंगी। 

    विश्व कप में पांचवां स्थान भारत को आत्मविश्वास जरूर देगा, लेकिन अब चुनौती इस प्रदर्शन को निरंतरता में बदलने की है. खासकर तब, जब टीम में 11 विश्व कप डेब्यूटेंट हैं. इन खिलाड़ियों के अनुभव में एक बड़ा टूर्नामेंट जुड़ चुका है और अब सवाल यह है कि क्या भारत इस अनुभव को पदक में बदल पाएगा?

    विश्व कप ने भारत को एक परिणाम दिया है, लेकिन उससे ज्यादा एक संकेत दिया है- यह टीम अभी तैयार हो रही है और उसकी कहानी शायद पांचवें स्थान पर खत्म होने वाली नहीं है। 

  • पंजाब में होगा एशियाई हॉकी चैंपियनशिप, सीएम भगवंत मान बोले – जालंधर और मोहाली में होंगे मुकाबले

    पंजाब में होगा एशियाई हॉकी चैंपियनशिप, सीएम भगवंत मान बोले – जालंधर और मोहाली में होंगे मुकाबले

    जालंधर 

    पंजाब में पहली बार हॉकी के इंटरनेशनल मुकाबलों की मेजबानी करेगा। पुरुषों के एशियन चैंपियनशिप हॉकी टूर्नामेंट की पंजाब मेजबानी करेगा। यह दावा पंजाब के सीएम भगवंत मान ने चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस में किया।
    उन्होंने कहा कि इस मुकाबले में एशियन खेलों की टॉप छह टीमें इसमें खेलेंगी। पूरी उम्मीद है भारत इसमें रहेगा। 26-27 अक्टूबर को पहली बार मैच होगा। सारे मुकाबले मोहाली व जालंधर में होंगे।

    इससे पहले 1997 में पाकिस्तान के साथ जालंधर में टेस्ट मैच हुआ था। कल सारी चीजों को चेक टीम कर गई है। वहीं, हॉकी की टीम ने हमें ऑफर दिया है कि आप हर साल एक 4 नेशन टूर्नामेंट करवा सकते हैं।

    इसे वह अपने हॉकी टूर्नामेंट में रख लेंगे। बैडमिंटन अंडर 13 राष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी पंजाब को 44 साल बाद मिली है। यह मुकाबले जालंधर में होगा।

    जालंधर व मोहाली में होंगे एशिया कप हॉक मैच
    खेलों के क्षेत्र का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय बाद पंजाब को एशिया कप हॉकी प्रतियोगिता की मेजबानी मिलने जा रही है। यह मुकाबले जालंधर के बल्टन पार्क मैदान और मोहाली में आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब की खेल परंपरा को नई पहचान मिलेगी और युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अमृतसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का नया क्रिकेट मैदान बनाया जाएगा। उनका कहना था कि राज्य में खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार निवेश कर रही है और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार आने से पहले राज्य में नहरों के पानी का उपयोग लगभग 21 से 22 प्रतिशत तक ही सीमित था, जबकि अब यह बढ़कर 70 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसके लिए नहर प्रणाली को मजबूत बनाने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने रोजगार के मुद्दे पर कहा कि पिछले चार वर्षों में करीब 65 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। साथ ही उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए निवेश आकर्षित किया गया है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, चैंपियनशिप में भारत, पाकिस्तान, मलेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन की टीमों के साथ-साथ अन्य क्वालीफाइंग टीमें भी भाग लेंगी। आधे मैच जालंधर में खेले जाएंगे, जबकि शेष मैच मोहाली में होंगे।

    इस आयोजन से राज्य की खेल संस्कृति को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जालंधर, जो अपने समृद्ध खेल सामग्री उद्योग और हॉकी की विरासत के कारण एक खेल केंद्र के रूप में जाना जाता है, इस टूर्नामेंट की मेजबानी करके एक बार फिर सुर्खियों में आ जाएगा।

    इस बीच, बर्लटन पार्क में विकास कार्य 78 करोड़ रुपये की लागत वाली एक चल रही खेल केंद्र परियोजना का हिस्सा है। आगामी चैंपियनशिप से न केवल अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं के साथ पंजाब के जुड़ाव को पुनर्जीवित करने की उम्मीद है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलने की संभावना है।