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  • इंदौर में म.प्र. प्रगतिशील लेखक संघ का 14वां राज्य सम्मेलन संपन्न, ‘उम्मीद से भर दें ये जहान’ रहा संदेश

    इंदौर में म.प्र. प्रगतिशील लेखक संघ का 14वां राज्य सम्मेलन संपन्न, ‘उम्मीद से भर दें ये जहान’ रहा संदेश

    अतीत से सबक और आज की समझ के साथ लिखना लेखक का दायित्व-गणेश देवी

    इंदौर में म.प्र.प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन 'उम्मीद से भर दें ये जहान’ घोष वाक्य के साथ संपन्न

    भूमंडलीय समकाल, लेखक संगठन की भूमिका, लेखकीय प्रतिरोध एवं प्रतिबद्धता और हाशिए के समाज की चुनौतियों पर मंथन

    इंदौर
    प्रगतिशील लेखक संघ, मध्य प्रदेश का 14वाँ राज्य सम्मेलन 24 और 25 अक्टूबर को इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के सहयोग से अभिनव कला समाज सभागृह में आयोजित हुआ। सम्मेलन में वैश्वीकरण की चुनौतियों, फ़ासीवाद के बढ़ते खतरों, प्रतिरोध की परंपरा, लेखक संगठनों की वैचारिक प्रतिबद्धता, वंचितों  के संघर्षों और हाशिये के समाज की समस्याओं पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। विभिन्न सत्रों में शामिल शीर्ष साहित्यकारों एवं विचारकों ने समकालीन सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में साहित्य की भूमिका और लेखकों के दायित्वों पर अपने विचार रखे। सम्मेलन में वरिष्ठ कवि मोहन कुमार डहेरिया (छिंदवाड़ा) को मध्य प्रदेश की राज्य इकाई का अध्यक्ष और कवि अनिल करमेले (भोपाल) को महासचिव चुना गया।

    विभिन्न सत्रों के दौरान शेखर मल्लिक (झारखंड) की लैटिन अमरीकी कहानियों की अनुवाद की पुस्तक, सतना इकाई के विजयशंकर चतुर्वेदी की पुस्तक ‘निर्णय का  स्थापत्य’, नागौद के एड. रमाकांत मिश्र के ‘सच के कटघरे में खड़ा समय’, अशोकनगर की रामदुलारी शर्मा की भारतीय संस्कृति में लोकसंगीत पर केन्द्रित पुस्तक “डूबते स्वर”, सीधी के सोमेश्वर सिंह के कविता संग्रह ‘चलो कहीं और चलें’, शहडोल के अरुण नामदेव के ‘डाल-डाल गिद्ध’ और अन्य अनेक पुस्तकों का लोकार्पण हुआ।
    सम्मेलन की पूर्व संध्या पर 23 अक्टूबर को प्रदेश की विभिन्न इकाइयों से आये प्रतिनिधियों के स्वागत में लोकगायक विक्रम बोर्डिया के गायन समूह ने कबीर के पदों का प्रभावी गायन किया। 

    कार्यक्रम का उद्घाटन 24 अक्टूबर 2026 की सुबह 10 बजे गांधी हॉल परिसर स्थित अभिनव कला समाज में प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाबी के प्रमुख साहित्यकार डॉक्टर सुखदेव सिंह सिरसा द्वारा किया गया। कार्यक्रम स्थल को नाम दिया गया “प्रेमचंद नगर”, जिस स्थान पर कार्यक्रम हो रहे थे, उसे “मुक्तिबोध प्रांगण” का नाम दिया गया। मंच का नामकरण प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े रहे दो प्रमुख दिवंगत कवि-मित्रों के नाम पर “चन्द्रकान्त देवताले-कृष्णकांत निलोसे मंच” किया गया।

    इसके पश्चात डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा, स्वागताध्यक्ष शैला शिंत्रे, कथाकार जितेंद्र भाटिया (मुंबई), उपन्यासकार रणेंद्र, सुरेश कुमार शर्मा (शहडोल), कवि कुमार अंबुज (भोपाल), सुबोध कुमार श्रीवास्तव (भोपाल), नथमल शर्मा (छत्तीसगढ़), राजेंद्र शर्मा (भोपाल), प्रेमचंद गांधी (राजस्थान), और राकेश वानखेड़े (महाराष्ट्र) सहित अन्य माननीय अतिथियों ने अनंत श्रोत्रिय स्मृति पुस्तक प्रदर्शनी, एस.के. दुबे स्मृति कला दीर्घा और केसरी सिंह चिडार स्मृति कविता पोस्टर प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया, जिसमें पंकज दीक्षित, मुकेश बिजौले, अशोक दुबे के साथ ही ग्वालियर से आये युवा चित्रकारों की पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई थीं। पुस्तक प्रदर्शनी में ज्ञान-विज्ञान से संबंधित पुस्तकों के प्रकाशक “एकलव्य” प्रकाशन और “आस” प्रकाशन की पुस्तकें प्रदर्शित की गई थीं। महत्त्वपूर्ण पुस्तकों और कविता पोस्टरों के माध्यम से साहित्यिक-सांस्कृतिक परंपरा तथा जनपक्षधर रचनात्मक अभिव्यक्तियों को सामने लाने का रचनात्मक प्रयास था।

    पहले दिन का पहला सत्र ‘प्रतिरोध का अतीत और वर्तमान की चुनौतियाँ’ विषय पर केंद्रित रहा। कथाकार, उपन्यासकार और चिंतक जितेंद्र भाटिया ने वैश्वीकरण के दौर में साहित्य की भूमिका, सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों, विस्थापन के दर्द की रोशनी में प्रतिरोध की नयी प्रवृत्तियों पर चर्चा की। प्रसिद्ध उपन्यासकार रणेंद्र ने हाशिये के समाज, विशेषकर आदिवासी समुदायों के संघर्षों और उनके प्रतिरोध की विविध अभिव्यक्तियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने लेखकों से इन संघर्षों को पहचानने, वंचित एवं शोषित समुदायों की प्रतिरोधी चेतना को साहित्य में जगह देने और अपने लेखन के ज़रिये प्रभावी हस्तक्षेप करने का आह्वान किया। सुखदेव सिंह सिरसा ने निजी अनुभव साझा करते हुए पंजाबी साहित्य और लोकजीवन की गहन पड़ताल की और प्रतिरोध के पड़ावों को चिह्नित किया। उन्होंने भारत में युवाओं द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन में भी लेखकों के शामिल होने की अपील की। सत्र की अध्यक्षता करते हुए कवि-नाट्यकार हरिओम राजोरिया (अशोकनगर) और शैला शिन्त्रे (इंदौर) ने भी अपने विचार रखे। कवि पवन करण (ग्वालियर) ने सत्र का संचालन किया और डॉ. अभय नेमा (इंदौर) ने आभार ज्ञापित किया। 

    दूसरा सत्र “हाशिये का समाज और साहित्य” पर केन्द्रित था। कवयित्री आरती ने महिला संघर्ष के व्यापक होते दायरे की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आधी आबादी का सवाल अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अनेक आश्रित और वंचित समूहों के संघर्ष भी जुड़ गए हैं। इस सत्र में कथाकार दिनेश भट्ट (छिंदवाड़ा), असअद अंसारी (मंदसौर), जितेंद्र विसारिया (ग्वालियर) ने अपने विचार व्यक्त किये और अध्यक्षता कवि-पत्रकार नथमल शर्मा, कवि राजेन्द्र शर्मा, सुरेश शर्मा, तथा पी. आर. मलैया (सागर)ने की। वक्ताओं के विचार प्रस्तुति में यह सवाल प्रमुखता से उभरा कि लेखक समाज में गहराते अंतर्विरोधों और वंचित समुदायों के अनुभवों को किस तरह अपने लेखन का हिस्सा बनाएँ। वक्ताओं ने ज़ोर दिया कि साहित्य में हाशिए के समाज का चित्रण केवल सहानुभूति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके पीछे मौजूद सामाजिक संबंधों, सत्ता संरचनाओं और असमानताओं की भी पड़ताल होनी चाहिए। इस सत्र का संचालन कवि अनिल करमेले ने किया और आभार जावेद आलम ने व्यक्त किया।

    उपस्थित लेखकों ने सद्भावना यात्रा के अंतर्गत शहर में रचनाकारों का जुलूस निकाला, जिसमें “अभिव्यक्ति की आज़ादी ज़िन्दाबाद”, “प्रेमचंद ज़िन्दाबाद”, “सज्जाद ज़हीर, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, भीषम साहनी, बलराज साहनी, राही मासूम रज़ा, कैफ़ी आज़मी, मुल्कराज आनंद, आदि” के ज़िन्दाबाद के नारे सड़कों पर गूँजे। शाम के जनसत्र का विषय था “भूमंडलीय समकाल में लेखकों का हस्तक्षेप”। इस सत्र की शुरुआत प्रख्यात संगीतज्ञ विदुषी अनुप्रिया देवताले के वायलिन वादन से हुई। उनकी प्रस्तुति ने अनिर्वचनीय सांस्कृतिक वातावरण निर्मित किया। उसके पश्चात मुख्य अतिथि प्रख्यात भाषाविद्, साहित्यिक आलोचक एवं गणेश एन. देवी ने प्रतिरोध के ऐतिहासिक संदर्भों को रेखांकित करते हुए भाषाओं और साहित्य में उसकी विविध अभिव्यक्तियों की पड़ताल की।

    उन्होंने फ़ासीवाद के बढ़ते खतरे के कुछ नाजुक पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया। उनका व्याख्यान श्रोताओं ने इस एकाग्रता से सुना कि गर्मी के बावजूद लोगों ने कूलर बंद कर दिए ताकि शोर न हो। गणेश देवी के व्याख्यान का केंद्रीय निष्कर्ष था कि भारत में पिछले 2600 वर्षों से एक लंबा सांस्कृतिक संघर्ष चला आ रहा है और आज का प्रतिरोध भी उसी ऐतिहासिक सिलसिले की एक कड़ी है। विशिष्ट अतिथियों ने भूमंडलीकरण के दौर में बदलते सामाजिक संबंधों, सांस्कृतिक चुनौतियों और लेखकों की हस्तक्षेपकारी भूमिका पर चर्चा की। इस बात पर जोर दिया गया कि लेखक का दायित्व अपने समय की विसंगतियों को दर्ज करने के साथ-साथ उनके पीछे सक्रिय सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं को समझना भी है। इस सत्र का संचालन मध्य प्रदेश के कार्यकारी महासचिव और राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने किया और आभार इंदौर इकाई के अध्यक्ष ज़ाकिर हुसैन ने व्यक्त किया। 

    सम्मेलन के दूसरे दिन का आगाज़ ‘लेखक संगठन, विचार और प्रतिबद्धता’ विषय के साथ हुआ। इस सत्र में लेखक संगठनों की वैचारिक भूमिका, साहित्यकारों की सामाजिक प्रतिबद्धता और समकालीन परिस्थितियों में सामूहिक साहित्यिक हस्तक्षेप की जरूरत पर चर्चा हुई। राकेश वानखेड़े,  सुधीर सजल (भोपाल), सारिका श्रीवास्तव (इंदौर), शेखर मल्लिक, सत्यम पांडे (जबलपुर), अभिषेक अंशु (भोपाल) ने इस सत्र में अपने विचार व्यक्त किये। अध्यक्ष मंडल की ओर से कुमार अंबुज, शैलेन्द्र शैली, हरनाम सिंह, मोहन कुमार डहेरिया और पवित्र सलालपुरिया (गुना) ने विषय को स्पष्ट किया। सत्र का संचालन शशिभूषण ने किया और आभार विवेक मेहता ने व्यक्त किया। वक्ताओं ने इस सवाल पर विचार किया कि बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में लेखक संगठन किस तरह अपनी वैचारिक पहचान और सामाजिक प्रतिबद्धता को प्रभावी बनाए रख सकते हैं। साहित्यिक सक्रियता, संगठनात्मक एकजुटता और समाज के प्रति लेखक की जिम्मेदारी इस विमर्श के प्रमुख विषय रहे।

    दूसरे दिन दोपहर बाद संगठनात्मक सत्र आयोजित किया गया। संगठन सत्र में सर्वप्रथम प्रगतिशील धारा से जुड़े दिवंगत साहित्यकारों को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया। यह सत्र विशेष रूप से प्रगतिशील लेखक संघ की मध्य प्रदेश की इकाइयों के प्रतिनिधियों के लिए था। इस अवसर पर 14वें राज्य सम्मेलन के समक्ष प्रस्तुत प्रस्तावों पर विचार किया गया। निवर्तमान कार्यकारिणी ने नई कार्यकारिणी का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिस पर अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की गई। संगठन की भावी दिशा, इकाइयों की सक्रियता और आगामी कार्ययोजना से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। चुन्नीलाल वाधवानी ने आभार व्यक्त किया।

    प्रस्ताव जो पारित हुए

                केन बेतवा नदी परियोजना के विस्थापितों के लिए न्याय की मांग का प्रस्ताव विनीत तिवारी ने प्रस्तुत किया‌, मणिपुर में शांति बहाली के साथ विस्थापितों के पुनर्वास का प्रस्ताव आरती ने, आदिवासियों सहित समाज के वंचित तबको पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ प्रस्ताव सत्यम पांडे ने, शिक्षण व्यवस्था के राजनीतिक दबाव से मुक्त करने का प्रस्ताव असअद अंसारी ने ,सांस्कृतिक राष्ट्रवाद थोपने के विरुद्ध प्रस्ताव शैलेंद्र शैली ने टेलीविजन पर अंधविश्वास फैलाने वाले कार्यक्रमों के विरुद्ध प्रस्ताव दिनेश भट्ट ने, एस आई आर विरोधी आंदोलन के दमन के खिलाफ प्रस्ताव गिरीश पटेल ने तथा डमी स्कूलों के खिलाफ प्रस्ताव शशि भूषण ने प्रस्तुत किया। सभी प्रस्तावों का अनुमोदन सदन सदन में किया गया। 
              ईरान की जनता पर अमेरिकी साम्राज्यवादी द्वारा थोपे का युद्ध एवं फिलिस्तीन में इजरायल द्वारा किए गए नरसंहार की भी  सदन में निंदा की गई।

               समापन सत्र में ईरानी न्यू वेव सिनेमा आंदोलन के शिल्पकार अब्बास कियारोस्तमी की बेहद संवेदनशील फिल्म ‘Where is the friend’s house? (दोस्त का घर कहाँ है?)’ प्रदर्शित की गई।    
               फिलिस्तीन के सपनों की थीम पर विनीत तिवारी और आसिम द्वारा बनाया गया ज़ैतून का रंगीन वृक्ष और पक्षी आगंतुकों के लिए एक सेल्फी प्वाइंट बन गया।

    दो दिनों के इस आयोजन में साहित्य, समाज, राजनीति, संस्कृति और तकनीक से जुड़े अनेक सवालों पर विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन का व्यापक संदेश यह रहा कि साहित्य केवल अपने समय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि वह समाज की विसंगतियों को पहचानने, वंचित समुदायों के अनुभवों को अभिव्यक्ति देने और मानवीय स्वतंत्रता तथा विवेक के पक्ष में हस्तक्षेप करने का माध्यम भी है।

     

  • इंदौर में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में देरी, केलोदहाला ROB का 60% काम बाकी; रेलवे पोर्शन पर काम शुरू नहीं

    इंदौर में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में देरी, केलोदहाला ROB का 60% काम बाकी; रेलवे पोर्शन पर काम शुरू नहीं

    इंदौर
    लसूड़िया मोरी-केलोदहाला रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण धीमी रफ्तार से चल रहा है। अब तक सिर्फ 40 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। रेलवे के हिस्से का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। रविवार को जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने मौके पर पहुंचकर निर्माण की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को बाधाएं जल्द दूर करने के निर्देश दिए।

    एमआर-12 रोड पर केलोदहाला फाटक के ऊपर 734 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा आरओबी बनाया जा रहा है। इसकी कुल लागत करीब 32 करोड़ रुपये है। शासन ने 14 जुलाई 2023 को वित्तीय स्वीकृति दी थी। निर्माण का ठेका मेसर्स केटी कंस्ट्रक्शंस लिमिटेड को मिला है। लोक निर्माण विभाग काम करवा रहा है।

    रेलवे वाला हिस्सा तुरंत शुरू कराने को कहा
    विभागीय अधिकारियों के अनुसार नींव का काम पूरा हो चुका है। अभी सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर का काम चल रहा है, लेकिन रेलवे पोर्शन में काम शुरू न होने से प्रगति प्रभावित हो रही है। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने रेलवे के डीआरएम अश्विन कुमार से फोन पर बात कर रेलवे वाला हिस्सा तुरंत शुरू कराने को कहा।

    आरओबी के दोनों ओर सर्विस रोड और रिटेनिंग वाल का काम भी अतिक्रमण की वजह से रुका है। मंत्री ने आईडीए अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर अतिक्रमण हटाया जाए और निर्माण में आ रही अड़चनें शीघ्र दूर की जाएं। निरीक्षण के समय लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री जेके मीणा, एसडीओ मनोज जैन, पार्षद राकेश सोलंकी, सरपंच जितेंद्र डोडिया और जनपद पंचायत अध्यक्ष विश्वजीत सिंह सिसोदिया मौजूद थे।

    सिंहस्थ में महत्वपूर्ण
    मंत्री सिलावट ने कहा कि आरओबी को दिसंबर 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य है। इसके बनने से फाटक पर लगने वाले जाम से निजात मिलेगी। सिंहस्थ-2028 के दौरान भारी यातायात को देखते हुए यह पुल महत्वपूर्ण रहेगा। एमआर-12 के पूरी तरह चालू होने पर केलोदहाला आरओबी शहर की कनेक्टिविटी में बड़ी भूमिका निभाएगा।

  • इंदौर ट्रैफिक अलर्ट: तीन इमली-पिपल्याहाना मार्ग पर बसों की आवाजाही पर रोक

    इंदौर ट्रैफिक अलर्ट: तीन इमली-पिपल्याहाना मार्ग पर बसों की आवाजाही पर रोक

     इंदौर 
     मूसाखेड़ी चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण के चलते तीन इमली से पिपल्याहाना के बीच यातायात व्यवस्था बदल दी गई है। निर्माण कार्य पूरा होने तक इस मार्ग पर सुबह 6 से रात 11 बजे के बीच अंतरराज्यीय बसें (ऑल इंडिया परमिट) नहीं चल सकेंगी।

    यातायात का दबाव कम करने और दुर्घटनाओं की आशंका रोकने के लिए कलेक्टर शिवम वर्मा ने यह आदेश जारी किया है। प्रतिबंधित मार्ग के स्थान पर बसों के लिए वैकल्पिक रास्ता तय किया गया है। आदेश एक माह तक प्रभावशील रहेगा।

    प्रशासन के आदेश
    प्रशासन के आदेश के अनुसार तीन ईमली चौराहे से मूसाखेड़ी होते हुए पिपल्याहाना चौराहे तक और पिपल्याहाना से मूसाखेड़ी होते हुए तीन इमली तक अंतरराज्यीय बसों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक इस आदेश के तहत प्रतिबंध लागू नहीं होगा। वहीं सिटी बसों और इंटरसिटी बसों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

    दोनों दिशाओं के लिए तय किए वैकल्पिक मार्ग
    तीन इमली से पिपल्याहाना की ओर जाने वाली अंतरराज्यीय बसों को अब पालदा, देवगुराड़िया और बिचौली होकर गुजरना होगा। इसी तरह पिपल्याहाना से तीन इमली आने वाली बसें बिचौली, देवगुराड़िया और पालदा होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेंगी। बस संचालकों को निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का पालन करना होगा।

    निर्माण कार्य पूरा करने की कवायद
    मूसाखेड़ी चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण के कारण सड़क पर यातायात का संचालन प्रभावित होने की आशंका है। इस मार्ग से गुजरने वाली बड़ी बसों के कारण जाम की स्थिति बनने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। भारी वाहनों के दबाव को दूसरे मार्गों पर बांटने से निर्माण क्षेत्र में यातायात सुचारु रखने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में शहर में जगह-जगह ट्रैफिक जाम की परेशानी है।

  • इंदौर में क्रिकेट मैच के लिए हाईटेक सुरक्षा, फेस रिकग्नाइजेशन से निगरानी; जीरो वेस्ट पर रहेगा फोकस

    इंदौर में क्रिकेट मैच के लिए हाईटेक सुरक्षा, फेस रिकग्नाइजेशन से निगरानी; जीरो वेस्ट पर रहेगा फोकस

    इंदौर
     देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में में हो रहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के साथ स्वच्छता के संस्कारों की रोशनी दुनियाभर में फैलेगी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच 11 अक्टूबर को होने वाला अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच जीरो वेस्ट थीम पर आयोजित होगा। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत कचरे को चार हिस्सों में संग्रहीत किया जाएगा। साथ ही विज्ञापन होर्डिंग भी पुन:उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाएंगे।

    मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के साथ मिलकर स्वच्छता के लिए काम करने वाले सृष्टि फाउंडेशन के श्रीगोपाल जगताप ने बताया कि फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत गीला, सूखा, सेनेटरी वेस्ट और हेजार्ड वेस्ट पृथक किया जाएगा। जैविक कचरे से खाद बनेगी और इस प्रक्रिया का पहला चरण स्टेडियम परिसर में ही पूरा किया जाता है। इसके बाद इसे प्लांट भेजा जाता है।

    11 अक्टूबर की शाम होलकर स्टेडियम एक बार फिर भारत और वेस्टइंडीज की भिड़ंत का गवाह बनने जा रहा है। इस बार मुकाबला T20 इंटरनेशनल का है। मैच रात 7 बजे शुरू होगा और करीब 27,500 दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। मैच से पहले दैनिक भास्कर ने स्टेडियम की तैयारियों का जायजा लिया। ग्राउंड से लेकर दर्शक दीर्घा तक तैयारियां अंतिम दौर में हैं। बाहर दर्शकों की एंट्री को व्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाई जा रही है, जबकि अंदर कुर्सियों की धुलाई और सफाई का काम जारी है।

    सबसे बड़ी राहत मौसम को लेकर है। मौसम वैज्ञानिक आनंद हर्षाना के मुताबिक 8 से 12 अक्टूबर तक बारिश की संभावना नहीं है। तापमान सामान्य से कुछ अधिक चल रहा है, लेकिन न्यूनतम तापमान कम है। मौसम के ड्राई रहने की संभावना है। यानी क्रिकेट प्रेमियों को बारिश के कारण मैच रुकने की चिंता फिलहाल नहीं है।

    MPCA के सीएओ रोहित पंडित ने बताया कि मैच की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और लगभग सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। अचानक बारिश की स्थिति के लिए भी बैकअप प्लान तैयार है। जरूरत पड़ने पर पूरे ग्राउंड को कवर करने की व्यवस्था रहेगी।

    बारिश का खतरा नहीं, अब नजर ओस पर
    मैच रात में खेला जाना है, इसलिए बारिश के बाद अब मौसम को लेकर दूसरा सवाल ओस का है। मैच के दौरान तापमान, हवा और नमी की स्थिति गेंदबाजों के लिए अहम रहेगी।

    मौसम वैज्ञानिक आनंद हर्षाना के मुताबिक फिलहाल बारिश के कोई संकेत नहीं हैं। मानसून का दौर समाप्त हो चुका है और आने वाले दिनों में मौसम के ड्राई रहने की संभावना है।

    स्टेडियम के बाहर लग रही रेलिंग
    मैच से पहले होलकर स्टेडियम में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बाहर दर्शकों की एंट्री को व्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाने का काम चल रहा है। मैच के दिन बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचेंगे, ऐसे में प्रवेश द्वारों के आसपास भीड़ को नियंत्रित करना अहम होगा। रेलिंग के जरिए दर्शकों की कतार और आने-जाने के रास्ते को व्यवस्थित किया जाएगा।

    स्टेडियम के अंदर कुर्सियों की सफाई और धुलाई भी की जा रही है। दर्शकों के लिए जरूरी होगा कि वे टिकट पर दर्ज प्रवेश गेट की जानकारी पहले से देख लें और पर्याप्त समय लेकर स्टेडियम पहुंचें।

    27,500 दर्शकों की भीड़ संभालना बड़ी चुनौती
    भारत का मुकाबला हो और वह भी इंदौर में, तो स्टेडियम के बाहर भी क्रिकेट का माहौल बनना तय है। करीब 27,500 दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद के चलते सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    सुरक्षा जांच में समय लग सकता है, इसलिए आखिरी समय में पहुंचने वाले दर्शकों को परेशानी हो सकती है। दर्शकों को टिकट, निर्धारित गेट और स्टेडियम की एंट्री गाइडलाइन पहले से देखनी चाहिए और मैच शुरू होने से काफी पहले पहुंचना बेहतर रहेगा।

    सुरक्षा में पुलिस के साथ टेक्नोलॉजी से निगरानी, 160 CCTV कैमरे लगे
    मुकाबले के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। MPCA और स्थानीय पुलिस के साथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्टेडियम के अंदर करीब 160 CCTV कैमरे लगे हैं। आसपास के क्षेत्रों में भी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी।

    इसके अलावा फेस रिकग्नाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दर्शकों की एंट्री से लेकर स्टेडियम के अंदर आवाजाही तक पर नजर रखी जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस आपसी समन्वय से काम करेंगी।

    छोटी बाउंड्री यानी चौके-छक्कों का मैदान
    होलकर स्टेडियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी छोटी बाउंड्री है। यहां चौकोर बाउंड्री करीब 56 मीटर और सीधी बाउंड्री करीब 68 मीटर बताई जाती है। बल्लेबाज अगर गेंद को सही टाइमिंग से कनेक्ट करता है तो बाउंड्री तक पहुंचाने के लिए बहुत ज्यादा ताकत की जरूरत नहीं होती।

    T20 क्रिकेट में छोटी बाउंड्री का महत्व और बढ़ जाता है। यही वजह है कि होलकर में दर्शकों को तेज रन, बड़े शॉट और लगातार बाउंड्री देखने की उम्मीद रहती है। इस मुकाबले के लिए पिच भी T20 के हिसाब से तैयार की जा रही है। ऐसे में टॉस के बाद कप्तानों का फैसला महत्वपूर्ण होगा।

    ODI में 7 जीत के बाद पहली बार हार भी देख चुका है मैदान
    होलकर स्टेडियम लंबे समय तक वनडे में भारत के लिए अजेय मैदान रहा। भारत ने यहां लगातार सात ODI जीते, लेकिन जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराकर यह सिलसिला तोड़ा। अब यहां भारत का ODI रिकॉर्ड 8 मैचों में 7 जीत और 1 हार है।

    इस मैदान पर भारत का सबसे बड़ा ODI स्कोर 418/5 है, जो 8 दिसंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ बना था। इसी मुकाबले में वीरेंद्र सहवाग ने 219 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी।

    पोस्टर से बनाएंगे थैलियां 
    मैच के दौरान स्टेडियम में विज्ञापन पोस्टर प्लास्टिक या फ्लैक्स के बजाए पुन: उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाते हैं। मैच के बाद यह पोस्टर महिला स्व सहायता समूह को दिए जाते हैं, जिससे वे थैलियां और मोबाइल बैग बनाती हैं।

    प्रशंसकों को करेंगे जागरूक
    स्टेडियम परिसर में ही कचरे को रिसाइकल करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया जाएगा। साथ ही घर के कचरे के सही तरीके से निस्तारण के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।

    अन्य शहरों को भी दी सीख
    श्रीगोपाल जगताप बताते हैं कि भारत में हुए महिला विश्व कप के दौरान इंदौर से सीखकर गुवाहाटी, मुंबई आदि शहरों में भी जीरो वेस्ट इवेंट किया गया था। गुवाहाटी में भी इंदौर की टीम ही गई थी।

    ऊर्जा संरक्षण
    होलकर स्टेडियम अपने दैनिक इस्तेमाल की अधिकांश बिजली सौर ऊर्जा से स्वयं उत्पादित करता है। स्टेडियम की छत पर 376 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिससे हर साल लगभग 2,77,400 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इससे प्रति वर्ष करीब 277 टन कार्बन उत्सर्जन की बचत होती है।

    जल संरक्षण
    स्टेडियम में जिस मैदान पर मैच होता है, उसके नीचे 12 कुएं बनाए गए हैं। वर्षा जल को इनमें संग्रहित किया जाता है, जिससे जमीन का जल स्तर बेहतर बना होता है। इससे भीषण गर्मी में भी पूरे क्षेत्र में पानी की दिक्कत नहीं होती।

    2011 में सहवाग ने बनाया था रिकॉर्ड
    8 दिसंबर 2011 को भारत और वेस्टइंडीज आमने-सामने थे। उस दिन वीरेंद्र सहवाग ने ऐसी बल्लेबाजी की, जिसने होलकर स्टेडियम को क्रिकेट इतिहास में खास जगह दिला दी। सहवाग ने 149 गेंदों पर 219 रन बनाए। उन्होंने 25 चौके और 7 छक्के लगाए।

    सहवाग ने 41 गेंदों में अर्धशतक, 69 गेंदों में शतक, 112 गेंदों में 150 और 140 गेंदों में दोहरा शतक पूरा किया था। इस पारी के दौरान उन्होंने सचिन तेंदुलकर के 200 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए वनडे में नया व्यक्तिगत सर्वोच्च स्कोर बनाया।

    भारत ने उस मुकाबले में 50 ओवर में 418/5 का विशाल स्कोर बनाया और वेस्टइंडीज को 153 रन से हराया। सहवाग को मैन ऑफ द मैच चुना गया। अब 15 साल बाद उसी मैदान पर फिर भारत-वेस्टइंडीज की टीमें आमने-सामने होंगी। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मुकाबला 50 ओवर का नहीं, बल्कि 20 ओवर का है।

    सहवाग से कोहली तक… होलकर ने कई ऐतिहासिक पारियां देखीं
    होलकर सिर्फ सहवाग की 219 रन की पारी का मैदान नहीं है। यहां भारतीय क्रिकेट की कई यादगार पारियां दर्ज हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ विराट कोहली की 124 रन की पारी भी लंबे समय तक याद की जाती रही है। मैदान की छोटी बाउंड्री और बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियों ने कई बार बड़े स्कोर की नींव रखी है।

    होलकर के ODI आंकड़ों में भारत का औसत पहली पारी का स्कोर 332 रन बताया गया है। मैदान पर अब तक का सर्वोच्च ODI स्कोर भी भारत के नाम है- 418/5

    अब ODI नहीं, T20 का मुकाबला
    11 अक्टूबर को होने वाला मुकाबला T20 इंटरनेशनल है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का यह तीसरा मैच है। मुकाबला रात 7 बजे शुरू होगा।

    T20 में बल्लेबाजों के पास शुरुआत से ही आक्रामक क्रिकेट खेलने का विकल्प रहता है। होलकर की छोटी बाउंड्री को देखते हुए पावरप्ले के छह ओवर खास हो सकते हैं।

    अगर शुरुआती छह ओवर में बल्लेबाजों को अच्छी शुरुआत मिलती है तो स्कोर तेजी से आगे बढ़ सकता है। दूसरी ओर, गेंदबाजों के लिए छोटी बाउंड्री पर रन रोकना बड़ी चुनौती होगी।

     

  • Indore 311 App: प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े 21 सुधार के लिए घर बैठे कर सकेंगे आवेदन

    Indore 311 App: प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े 21 सुधार के लिए घर बैठे कर सकेंगे आवेदन

    इंदौर
     इंदौर नगर निगम द्वारा जारी इंदौर 311 एप पर संपत्तिकर संबंधी नई आनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे संपत्तिकर संबंधी दावे-आपत्ति एवं शिकायत दर्ज करने, अपनी संपत्ति का खुद असेसमेंट कर सकेंगे। इसके अलावा की स्वयं की संपत्ति के संपत्तिकर खाते में आवश्यक सुधार हेतु ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इस एप में अब शिकायत एवं आवेदनों की लाइव ट्रैकिंग भी हो सकेगी।

    शिकायतकर्ता जान सकेगा कि उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है या शिकायत किस अधिकारी के पास जांच के लिए है। प्रॉपर्टी टैक्स पर दावे-आपत्ति के सहित 21 तरह के सुधार के झोन या नगर निगम कार्यालय जाने की जरूरत नहीं रहेगी। कई काम आसानी से घर बैठे मोबाइल एप के जरिए हो जाएंगे।

    प्रॉपर्टी का आकलन खुद कर सकेगा मालिक
    मोबाइल एप के जरिए संपत्ति के मालिक अब खुद ही प्रॉपर्टी टैक्स का आकलन कर सकते हैं। इसमें उसे प्रॉपर्टी सेल्फ असिसमेंट का ऑप्शन चुनकर इसमें मांगी गई जानकारिया दर्ज कर फार्म को सबमिट करना होगा। इसके साथ ही प्रॉपर्टी टैक्स में दोव और आपत्तियों की शिकायत भी इसी एप के जरिए दर्ज कराई जा सकेगी।

    अधिकारियों ने शहर के लोगों से अपील की है कि वे अब निगम के दफ्तर आने की जगह घर बैठे ही मोबाइल एप के जरिए इन सुविधाओं का उपयोग करें। एप में सबसे खास बात यह है कि लोग आपत्ति दर्ज कराने के साथ उसे ट्रैक भी कर सकेंगे।

    एक कॉल में मिलेंगे महापौर
    यदि आप नगर निगम की कोई भी सेवा से परेशान है जैसे, स्वच्छता, कचड़ा गाड़ी, जीरो वेस्ट ईवेंट,  प्रमाणपत्र, लाइट या अन्य समस्याओं के लिए परेशान हैं, तो 311 एप आप के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. इसके जरिए आप घर बैठे अपनी किसी भी समस्या का समाधान कर सकते हैं. इतना ही नहीं यहां आपको मेयर हेल्पलाइन पर सीधे महापौर तक अपनी समस्या पहुंचाने का मौका भी मिलेगा. इसके लिए आपको एक कंप्लेंट नंबर दिया जाएगा साथ ही आपके पास कॉल बैक भी आएगा. इसके लिए टोल फ्री नंबर 18002331311 भी जारी किया गया है। 

    एप पर शिकायत और फीडबैक दोनों दे सकते हैं
    Indore 311 App की खास बात ये है कि यहां आप शिकायत के अलावा अपना फीडबैक भी दे सकते हैं. इसके लिए आप अपनी समस्या की कैटेगरी चुनकर फोटो सहित रिपोर्ट करें और कंप्लेंट नंबर  सेव कर लें. यह एप में भी सेव रहता है. यहां आपको निगम की नई जानकारियां और नोटिस भी मिल जाएंगे. यदि कोई कर्मचारी आपसे सही बर्ताव नहीं करता है तो इसके लिए भी आप शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इस एप पर इंदौर म्युनिसिपल कमिश्नर और महापौर दोनों नजर रखते हैं। 

    एप इंदौर 311 क्या है?

    इंदौर 311 एप लोगों की सुविधाओं के लिए लाया गया है. इस एप के जरिए आप स्वच्छता, कचड़ा गाड़ी, जीरो वेस्ट ईवेंट, प्रमाणपत्र, लाइट या अन्य समस्याओं का समाधान सिर्फ एक कॉल के जरिए कर सकते हैं. इस एप की खास बात ये है कि इसके जरिए आप सीधे समुदाय के नेताओं के साथ संवाद कर सकते हैं. इंदौर 311 एप को नागरिक सेवाओं के उपयोग को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। 

     

  • AI और रोबोट से बदलेगी कैंसर जांच की तस्वीर, इंदौर में 12 सेकंड में रिपोर्ट और मुफ्त स्क्रीनिंग

    AI और रोबोट से बदलेगी कैंसर जांच की तस्वीर, इंदौर में 12 सेकंड में रिपोर्ट और मुफ्त स्क्रीनिंग

    इंदौर
     देश भर में तेजी से ओरल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय रहते बीमारियों की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी मददगार साबित हो रहा है. रोबोट डिवाइस मुंह से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा रहा है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा। 

    हर साल कैंसर की चपेट में आ रहे हजारों लोग
    भारत में धूम्रपान की लत के अलावा, तंबाकू का सेवन और तरह-तरह के जानलेवा शौक से कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं. हर साल हजारों मरीज डायग्नोज हो रहे हैं, इनमें से अधिकांश थर्ड और फोर्थ स्टेज कंडीशन में होते हैं. इसलिए इनमें से हर साल 50 हजार लोगों की इलाज के बावजूद बीमारी फैलने के कारण मौत हो जाती है. हॉस्पिटल और ऑन्कोलॉजिस्ट वाले कैंसर सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों को प्री स्टेज में पता करने के लिए स्कैन ओ एयर नामक रोबोटिक मशीन का उपयोग कर रहे हैं. यह मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बीमारी का 96% तक पता लगाने में सक्षम है। 

    फ्री में होगी जांच
    इंदौर स्थित एक निजी अस्पताल में पहली बार यह मशीन स्थपित किया गया है. जहां मुंह की किसी भी समस्या का निशुल्क जांच किया जा रहा है. जांच के बाद फौरन रिपोर्ट मरीज के मोबाइल नंबर में आ जाता है. अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट अमय बियानी ने कहा, "अधिकांश मरीजों को यह पता नहीं होता कि उनके मुंह की छोटी सी तकलीफ कभी भी कैंसर का रूप ले सकती है. अस्पताल में किसी भी तरह की तकलीफ में आने वाले लोग अपने मुंह की प्री मेलेनिन स्टेज में ही जांच कर सकें. इसलिए यह रोबोटिक मशीन स्थापित की गई है। 

    ओरल कैंसर के लिए क्रांतिकारी साबित
    इस रोबोटिक मशीन की खोज साल 2020 में पुणे की डेंटिस्ट विधि भानुशाली और रजत कबाड़े ने किया था, इसका उद्देश्य दांतों और मसूड़े की 40 तरह की बीमारियों की पहचान के लिए किया गया था. इस रोबोटिक मशीन से तरह-तरह की मुंह की जांच के अलावा, कैंसर की प्री स्टेज से संबंधित बीमारी और स्थितियां भी डायग्नोज होने लगी हैं, जिससे यह मशीन ओरल कैंसर के डायग्नोज के लिए क्रांतिकारी साबित हो रही है। 

     
    मेडिकल प्रोफेशनल के लिए सहायक
    कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा पवार ने कहा, "रोबोटिक मशीन की जांच रिपोर्ट से काफी हद तक मरीज की बीमारी का पता चल जाता है. जिससे यह डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेशनल के लिए भी सहायक सिद्ध होगी. मशीन की जांच रिपोर्ट के बाद सिर्फ उन मरीजों को सीटी स्कैन अथवा बायोप्सी करनी जरूरी होगी. जिनका डायग्नोज मशीन द्वारा ओरल कैंसर के रूप में किया गया है इससे लोगों को अनावश्यक जांच के खतरे और आर्थिक समस्या से बचाव हो सकेगा। 

  • इंदौर की हवा ने भी बढ़ाया शहर का गौरव, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में मिला दूसरा स्थान; 7 सितंबर को ऐलान

    इंदौर की हवा ने भी बढ़ाया शहर का गौरव, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में मिला दूसरा स्थान; 7 सितंबर को ऐलान

    इंदौर 
    स्वच्छता के सिरमौर इंदौर ने अब अपनी आबोहवा को शुद्ध रखने में भी एक नया मुकाम हासिल किया है। 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026' में इंदौर ने देश के शीर्ष तीन शहरों में अपनी जगह पक्की कर ली है। सूत्रों की मानें तो इस प्रतिष्ठित सर्वेक्षण में शहर ने दूसरा पायदान हासिल किया है। हालांकि, रैंकिंग की आधिकारिक और अंतिम घोषणा 7 सितंबर को नई दिल्ली में की जाएगी। इस खास उपलब्धि के लिए इंदौर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना है।

    दिल्ली में मिलेगा 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार'
        सात सितंबर को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में 'स्वच्छ वायु दिवस' कार्यक्रम आयोजित होगा। इसी समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव परिणामों की विधिवत घोषणा करेंगे।

        कार्यक्रम के दौरान इंदौर को 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार' से नवाजा जाएगा। यह सम्मान ग्रहण करने के लिए शहर के महापौर और निगमायुक्त को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी इस पुरस्कार की सूचना पहुंच चुकी है।

    इन प्रयासों से सुधरी शहर की आबोहवा
    वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने जमीनी स्तर पर कई अहम कदम उठाए, जिनका सीधा और सकारात्मक असर इस सर्वेक्षण में नजर आया। निगम के प्रमुख प्रयास इस प्रकार रहे:

        सड़कों की मशीनीकृत सफाई: हवा में धूल के कणों को उड़ने से रोकने के लिए मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया गया।

        ग्रीन बेल्ट का विस्तार: पर्यावरण को शुद्ध रखने और हरियाली बढ़ाने के लिए शहरभर में नए ग्रीन बेल्ट विकसित किए गए।

        मलबे का उचित प्रबंधन: निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया गया।

        रीसाइकिल और रीयूज: सीएंडडी कचरे (मलबे) के अधिकतम हिस्से को दोबारा उपयोग में लाने और उसे रीसाइकिल करने पर विशेष जोर दिया गया।

        ई-वाहनों पर फोकस: प्रदूषण का स्तर घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया गया।

    7 सितंबर को आधिकारिक तौर पर साफ होगी तस्वीर
    वर्तमान में नगर निगम के सूत्रों के हवाले से इंदौर के दूसरे स्थान पर रहने की सुगबुगाहट है। हालांकि, शहर की वास्तविक रैंकिंग और स्थिति की अंतिम तस्वीर 7 सितंबर को दिल्ली के मुख्य समारोह में ही स्पष्ट होगी, जब परिणामों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

  • इंदौर में Wrong Side Driving पर बड़ा एक्शन, 4 लोगों पर FIR; ड्रोन से रखी जा रही नजर

    इंदौर में Wrong Side Driving पर बड़ा एक्शन, 4 लोगों पर FIR; ड्रोन से रखी जा रही नजर

    इंदौर
     देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था की स्थिति को सुधारने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। पहली बार इंदौर में रॉन्ग साइड वाहन चलाने पर एफआईआर दर्ज की गई है। एक ही दिन में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके जरिए ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को सख्त संदेश दिए हैं।

    चाणक्यपुरी चौराहे पर की गई कार्रवाई
    इंदौर के चाणक्यपुरी चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से चेकिंग अभियान चलाया गया है। इस दौरान ड्रोन सर्विलांस की भी मदद ली जा रही थी। नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का चालान काटा जा रहा था।

    दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे चालक
    चेकिंग के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ लोग विपरीत दिशा में वाहन चलाने के दौरान फोन पर बात कर रहे थे। उन्हें इस बात की परवाह नहीं थी कि इससे दूसरों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इंद्रप्रस्थ चौराहे पर एक ऐसे ही स्कूटी सवार को पकड़ा गया जो रॉन्ग साइड में चल रहा था।

    जांच के दौरान यह भी पाया गया कि उसने हेलमेट भी नहीं पहन रखा था। साथ ही उसके पास वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं था। इन लापरवाहियों की वजह से पुलिस ने उसकी स्कूटी जब्त कर ली। साथ ही 4500 रुपए का चालान काटा है।

    एफआईआर भी दर्ज की गई
    अलग-अलग मामलों में रॉन्ग साइड वाहन चलाने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की गई है। ऐसे चालकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। मीडिया से बात करते हुए ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने कहा है कि रॉन्ग साइड में वाहन चलाकर लोग दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं। ऐसे मामलों में अब सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी।

    बचना है मुश्किल
    वहीं, ट्रैफिक चेकिंग के दौरान लोग अभी तक पुलिस को चकमा देकर निकल जाते हैं। मगर इंदौर ट्रैफिक पुलिस ड्रोन से लैस है। चेकिंग प्वाइंट पर ड्रोन से निगरानी की जाती है। अगर आपने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया है तो आपकी तस्वीर खींचकर चालान काटा जाएगा। साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

  • इंदौर ने जगाई हजारों आंखों की रोशनी, 16 साल में 19 हजार कॉर्निया दान कर बनाया रिकॉर्ड

    इंदौर ने जगाई हजारों आंखों की रोशनी, 16 साल में 19 हजार कॉर्निया दान कर बनाया रिकॉर्ड

    इंदौर
     अंगदान के क्षेत्र में देश में पहचान बना चुका इंदौर अब नेत्रदान में भी मिसाल कायम कर रहा है। शहरवासियों की पहल से पिछले 16 वर्षों में करीब 19 हजार कार्निया एकत्र किए गए हैं। इनमें से कई कार्निया मध्य प्रदेश के अलावा देश के दूसरे शहरों के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे हैं। इनके माध्यम से दृष्टिहीनता से जूझ रहे लोग फिर से दुनिया और अपने प्रियजनों को देख पा रहे हैं। नेत्रदान की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में मुस्कान ग्रुप परमार्थिक ट्रस्ट और एमके इंटरनेशनल आई बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    आठ लोगों से शुरू हुआ कारवां
    इंदौर में करीब 32 वर्ष पहले आठ लोगों ने द्वारकापुरी क्षेत्र की एक गरीब परिवार की कन्या के विवाह में सहयोग के लिए पहल की थी। धीरे-धीरे यह प्रयास व्यापक सामाजिक सेवा अभियान में बदल गया और इसी से मुस्कान ग्रुप की नींव मजबूत हुई। वर्ष 2002 में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर महाशब्दे और डॉ. सुहास बांडे ने इंदौर में नेत्रदान को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू किए।

    16 साल में डोनेट कराए 19000 कॉर्निया
    मुस्कान ग्रुप के सदस्य जीतू बागानी, संदीपन आर्य और अन्य सदस्यों ने वर्ष 2002 में कालानी नगर निवासी एक व्यक्ति के निधन के बाद उनका कॉर्निया दान करवाया। यही पहल आगे चलकर नियमित अभियान में बदल गई। ग्रुप के सहयोग से 2010 से 2026 तक करीब 19 हजार कॉर्निया एकत्र किए जा चुके हैं। इसमें सामान्य मृत्यु के साथ ब्रेन डेड अंगदानियों के कॉर्निया भी शामिल हैं।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 2237 और वर्ष 2025 में 2748 कार्निया एकत्र किए गए। इससे स्पष्ट है कि शहर में नेत्रदान के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर का आई बैंक भी बना
    इंदौर में वर्ष 2010 में एमके इंटरनेशनल आई बैंक की शुरुआत हुई। इसके संस्थापक संपत झंवर ने नेत्रदान को व्यवस्थित स्वरूप देने और जरूरतमंदों तक कार्निया पहुंचाने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की। आई बैंक का शुभारंभ तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने इंदौर में किया था। यहां एकत्र कार्निया को केवल इंदौर या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि आवश्यकता के अनुसार देश के विभिन्न शहरों में भी भेजा जाता है। इस तरह इंदौर में किया गया नेत्रदान दूसरे शहरों के लोगों के जीवन में भी रोशनी लौटा रहा है।

     

  • जमीन कब्जा छोड़ने के बदले रुपए मांगने का आरोप, इंदौर में मुख्तियार गिरफ्तार; 4 करोड़ की संपत्ति सीज

    जमीन कब्जा छोड़ने के बदले रुपए मांगने का आरोप, इंदौर में मुख्तियार गिरफ्तार; 4 करोड़ की संपत्ति सीज

    इंदौर 

    इंदौर क्राइम ब्रांच ने जमीन मालिकों से अवैध कब्जे छोड़ने के बदले रुपए मांगने के मामले में गिरफ्तार बदमाश मुख्तियार की करीब 4 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की है। सोमवार को क्राइम ब्रांच की टीम टीआई जितेंद्र यादव के नेतृत्व में मुख्तियार को लेकर उसके घर पहुंची थी। जांच के दौरान अवैध शेड में बने गोदाम और दुकानों से जुड़े दस्तावेज मिले।

    क्राइम ब्रांच ने मुख्तियार से इन संपत्तियों की खरीदी और मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मांगे। संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने के बाद टीम ने उससे जुड़ी संपत्तियों का मौके पर निरीक्षण किया और उन्हें सीज करने की कार्रवाई की।

    35 अपराध दर्ज हो चुके हैं
    मुख्तियार के खिलाफ वर्ष 2018 में विजयनगर पुलिस ने कार्रवाई की थी। उस समय एक नाबालिग को धमकाने और टॉयलेट शीट चटवाने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया था। इसके बाद जमीन विवाद से जुड़े कई पीड़ित सामने आए। पुलिस के मुताबिक मुख्तियार के खिलाफ अब तक करीब 35 अपराध दर्ज हो चुके हैं।

    जेल से बाहर आने के बाद कब्जे के आरोप
    पुलिस के मुताबिक जेल से बाहर आने के बाद भी मुख्तियार पर राधिका कुंज इलाके की जमीनों पर कब्जे करने के आरोप लगे। हाल ही में क्राइम ब्रांच ने उसे जमीन मालिकों से अवैध कब्जे छोड़ने के बदले रुपए मांगने के मामले में गिरफ्तार किया था।

    संपत्तियों की जांच जारी
    डीसीपी राजेश त्रिपाठी के निर्देशन में क्राइम ब्रांच मुख्तियार की संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस ने फिलहाल करीब 4 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की है और इनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है।

    नगर निगम और राजस्व विभाग से मांगी जानकारी
    क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक, मुख्तियार को लेकर चार प्लॉट की एफआईआर दर्ज हुई थी। मौके पर पहुंचने पर तीन अन्य प्लॉट के दस्तावेज भी मिले, जिसके आधार पर करीब सात संपत्तियां सीज की गई हैं। मामले में नगर निगम और राजस्व विभाग से जानकारी मांगी गई है। जांच में सामने आया है कि कुछ प्लॉट 10 हजार वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल के हैं, जबकि कुछ का क्षेत्रफल 2 हजार से 5 हजार वर्गफीट के बीच है।