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  • सेवा ज्योति कलश कार्यक्रम में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करें

    सेवा ज्योति कलश कार्यक्रम में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करें

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पहले 21 साल बाद सुगम बस के रूप में सरकारी बस सेवा प्रारम्भ हुई। अब 21 साल बाद भोपाल के मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट जारी किया गया। यह मास्टर प्लान भोपाल को वर्ष 2047 में विकसित और हरित बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से अनुरोध है कि वे मास्टर प्लान के प्रारूप पर अपने दावे-आपत्ति और सुझाव देने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे।

    उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के लिए बस सेवा का संचालन आरंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म जयंती और अनंत चतुर्दशी के अवसर पर सुगम परिवहन सेवा के रूप में प्रदेश में एक बार फिर सरकारी बसें शहर-शहर और गांव-गांव तक सड़कों पर दौड़ने लगी है। सुगम परिवहन शहर के अंदर चलने वाली ई-बसें, जिले के अंदर चलने वाली बसें, एक से दूसरे जिले को जोड़ने वाली बसें और अन्य राज्यों को जाने वाली बस सेवाएं प्रदेशवासियों को उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के लिए बस सेवा का संचालन आरंभ किया गया है।

    मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को मिली वैश्विक पहचान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाओं को यूनेस्को की अस्थाई लिस्ट में शामिल किए जाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत की कुल 78 अस्थायी धरोहरों में से 19 मध्यप्रदेश में होना बड़े गौरव की बात है। इससे मध्यप्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई वैश्विक पहचान मिली है।

    सेवा संकल्प अभियान-2026

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के संदर्भ में आरंभ सेवा-संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में लगभग 3 करोड़ 88 लाख दीये सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में प्रज्ज्वलित किये गये। प्रदेश में 650 से अधिक रक्तदान शिविर आयोजित हुए, जिनमें लगभग 11 हजार यूनिट रक्त एकत्र हुआ। भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता में 87 हजार से अधिक स्कूल-कॉलेजों के 40 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। आंगन मिलन कार्यक्रम अब तक 43 हजार से अधिक आंगनवाडियों में आयोजित हो चुका है, जिनमें 17 लाख से अधिक माताओं और बच्चों ने भाग लिया हैं। नमो – सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 484 नुक्कड़ टोलियों द्वारा 3000 से अधिक प्रस्तुतियां दी गईं। वड़नगर से वाराणसी यात्रा में अब तक 1000 ग्राम और 190 नगरीय क्षेत्रों में 725 सभाएं आयोजित हुई हैं। सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम के अंतर्गत 25 सेवा गतिविधियों में 9 लाख से अधिक नागरिकों एवं 10 हजार से अधिक संस्थाओं ने भाग लिया। सेवा की कहानी कार्यक्रम के अंतर्गत 5 लाख से अधिक प्रेरक कहानियां और आभार संदेश रिकार्ड हो चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 7 अक्टूबर को आयोजित होने वाले सेवा ज्योति कलश कार्यक्रम में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए।

    हाइड्रोजन ट्रेन के बाद अब लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) ट्रेन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच प्रारंभ की गई थी। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा गुजरात के साबरमती से मेहसाणा तक देश की पहली लिक्विड नेचुरल गैस से चलने वाली ट्रेन को हरी झण्डी दिखाई गई है। यह ट्रेन एलएनजी और डीजल दोनों से चल सकती है। इससे एक तरफ ईंधन की लागत में कमी आएगी तो दूसरी ओर प्रदूषण भी कम होगा।

    एशियन गेम्स-2026

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एशियन गेम्स-2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी। कबड्डी में महिला और पुरूष दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीते हैं। महिला क्रिकेट टीम को स्वर्ण पदक मिला है। इस खेल में सुश्री क्रांति गौड़ ने मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। शूटिंग में खरगौन के ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर एवं भोपाल की आशी चौकसे ने भारत को रजक पदक दिलाया। देवास के श्री जय मीणा ने एशियाई खेलों में सॉफ्ट टेनिस में कांस्य पदक जीता है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली सुश्री नीरू ढांडा को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

    स्कूल शिक्षा विभाग में 900 से अधिक अनुकम्पा नियुक्ति आदेश जारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में एक साथ 900 से अधिक अनुकम्पा नियुक्ति आदेश जारी कर दिये गये हैं। इनमें 600 से अधिक लिपिकीय पद और 200 से अधिक भृत्य के पद हैं। इस अभियान से, ऐसे शिक्षक जिनका सेवा में रहते हुए निधन हो गया था, उनके परिजन अनुकम्पा नियुक्ति के लिये बरसों से इन्तजार कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संवेदनशील पहल के लिये स्कूल शिक्षा विभाग की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसी प्रकार की कार्यवाही अन्य सभी विभागों में करने के निर्देश दिए।

    बैहर बालाघाट में बीता था मुश्ताक खान का बचपन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हिन्दी फिल्मों के चर्चित अभिनेता और हास्य कलाकार श्री मुश्ताक खान के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के बैहर और बालाघाट में उनका बचपन बीता, शिक्षा-दीक्षा हुई। एक छोटी सी जगह से निकलकर अपनी प्रतिभा के बल पर उन्होंने अभिनय की दुनिया में एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने लगभग 500 फिल्मों में काम किया है।

     

  • आवासीय इलाकों में कारोबार की छूट! भोपाल के 80+ क्षेत्रों में बदलेंगे नियम

    आवासीय इलाकों में कारोबार की छूट! भोपाल के 80+ क्षेत्रों में बदलेंगे नियम

    भोपाल
    भोपाल में आवासीय में कारोबार की छूट के लिए मास्टर प्लान में मार्केट स्ट्रीट का मास्टर स्ट्रोक मारा गया है। जिन मुख्य मार्गों की चौड़ाई 18 मीटर या उससे अधिक है और जहां अवैध निर्माण के शमन से जुड़े अधिकांश मामले निपटाए जा चुके है, उन्हें राज्य सरकार विचार-विमर्श के बाद मार्केट स्ट्रीट घोषित कर सकती है। अरेरा कॉलोनी, अवधपुरी, गुलमोहर, शाहपुरा, कोलार, संतनगर, करोद समेत शहरभर में 80 से अधिक क्षेत्रों में इसका असर होगा। सरकार और संबंधित अफसर के विवेक पर छोड़ दिया गया है कि यदि इस चौड़ाई की सड़क किनारे कारोबार करने वाले कई घर हो गए हैं तो बचे हुए घरों को भी कारोबार की छूट दे दी जाए। मार्केट स्ट्रीट घोषित होने के बाद उन सड़कों पर स्थित आवासीय प्लॉटों पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की कानूनी अनुमति होगी। यह छूट मुख्य सड़क से सटे मूल प्लॉट की गहराई तक ही मान्य रहेगी। सरकार ऐसी सड़कों को मार्केट स्ट्रीट के तौर पर अधिसूचित कर आगामी समय में कानूनी जामा पहना देगी।

    ऐसे समझें स्थिति
    मास्टर प्लान में इस प्रावधान को महज चार लाइन में लिखा गया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेस एंड अर्बन मैनेजमेंट के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एचएम मिश्रा के अनुसार मार्केट स्ट्रीट के प्रावधान स्पष्ट करने चाहिए, ताकि पता चले इसमें किस तरह की मंशा है। गौरतलब है कि आवासीय क्षेत्र में अवैध तौर पर संचालित दुकानों वाले क्षेत्र को अचानक पूरी तरह से मार्केट स्ट्रीट बनाया जाता है तो व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेगी। गाड़ियों की आवाजाही बढ़ेगी, जाम और पार्किंग की दिक्कत के साथ इनके पास के आवासीय क्षेत्रों में लोगों की शांति भंग होगी। शोर-शराबा और भीड़भाड़ बढ़ेगी, जिससे वहां रह रहे वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों की निजता प्रभावित होगी। इतना ही नहीं, पानी की खपत् बिजली की मांग और कचरा प्रबंधन पर दबाव बढ़ जाएगा। यहां जमीनों के दाम तो काफी बढ़ जाएंगे, लेकिन ठीक पीछे की गलियों में रहने वाले लोगों के लिए शांति और सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। बाजार इन गलियों से पीछे की अपेक्षाकृत कम चौड़ाई वाली गलियों में सहजता के साथ फैल जाएगा।

    आपत्ति सुझाव 25 अक्टूबर तक कार्यालयों में नक्शे ही नहीं
    मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 पर 25 अक्टूबर तक आपत्ति सुझाव की समय सीमा है। लोग ड्राफ्ट, नक्शे, खसरे देखने टीएंडसीपी कार्यालय समेत कलेक्ट्रेट, संभागायुक्त कार्यालय पहुंच रहे। स्थिति ये है कि ड्राफ्ट जारी किए तीन दिन का समय बीत गया, अब तक टीएंडसीपी में खसरों के पैनल नहीं लगे हैं। सिर्फ दो नक्शे लगाए हुए है। इन्हें समझाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं की। लोगों को सबसे अधिक आपत्ति ऑनलाइन सुनवाई को लेकर है। कोरोना के समय ऑनलाइन सुनवाई हुई थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। ऑफलाइन सुनवाई में बेहतर बात रखी जा सकती है। टीएंडसीपी की वेबसाइट पर अलग से विंडो ओपन कर आपत्ति देने का प्रावधान किया जा रहा है।

    गलियों में सड़कें छोटी की, ताकि निर्माण न टूटे
    स्थानीय सड़कें जिन्हें मास्टर प्लान में सब सेक्टर रोड का नाम दिया, मौजूदा ड्राफ्ट में इन्हें 15 मीटर से 25 मीटर किया गया, जबकि पिछले प्लान में ये 12 मीटर से 18 मीटर थी। इसका असर ये कि सड़क चौड़ाई बढ़ाने में होने वाली तोड़फोड़ को पूरी तरह खत्म कर सड़क किनारे के व्यावसायिक निर्माणों को बचाया जा सके।

    आर्किटेक्ट-प्लानर राजेश चौरसिया के अनुसार, मास्टर प्लान में बदलाव की जरूरत है। मिक्स्ड लैंडयूज होना चाहिए. लेकिन इसके लिए स्पष्ट तौर पर छोटे प्लॉट बनाने, अधोसंरचना से मजबूती से जुड़े प्रावधान करना जरूरी है। आवासीय और व्यवसायिक में किसी तरह का टकरान हो. इसपर योजना तय करना चाहिए।

    ड्राफ्ट पर इनकी बात
    बाघ भ्रमण क्षेत्र ग्राम बैरागढ़ व दौलतपुर की 425 हेक्टेयर भूमि राजस्व जंगल थी। पिछले साल ही इसे वन को ट्रांसफर की गई। चंदनपुरा में इसी तरह 357 हेक्टेयर जमीन मिलाकर 1200 एकड़ जमीन बनती है। ये पूरा बाघभ्रमण का क्षेत्र है, लेकिन यहां जिस तरह 60 मीटर 24 मीटर तक की सड़कें तय कर दी. उससे बाघ मानव संघर्ष का रास्ता खोल दिया है। मामले में मैंनें एनटीसीए को फोन पर व अब ईमेल से जानकारी दे रहा हूं।
    -प्रभाष जेटली, एक्सपर्ट बाघ संरक्षण व पर्यावरण

    पूरे ड्राफ्ट को पढ़कर सिर्फ इतना लग रहा है कि टीएंडसीपी के नियम कानून, प्रावधानों को मानने वाले पूरी तरह से ठगे गए हैं। जिन्होंने मनमर्जी की। तमाम तय नियम तोडे उन्हें इस ड्राफ्ट में उपकृत करने की कोशिश की है। आवासीय क्षेत्र की शांति के लिए कोई सौदा-समझौता कारोबार नहीं किया। 2005 में तय आवासीय क्षेत्र के रीडॅसिफिकेशन को तय कराने ये लेकर सड़कों की चौड़ाई कहीं घटाकर कहीं बढ़ाकर जो लाभदेने की मंशा स्पष्ट दिख रही है।- लवनीश भाटी, याचिकाकर्ता

    मास्टर प्लान के इस ड्राफ्ट ने रहवासी क्षेत्रों के साथ शहर के पर्यावरण को भारी चोट पहुंचाई है। असीमित एफएआर का क्या मतलब होता है? किसी शहर को नियोजित करने वाला ड्राफ्ट तो नहीं लग रहा है। कर्नाटक सरकार ने भी ऐसा ही प्लान तैयार किया था, जिसके प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया है। हम मॉनीटरिंग कर रहे हैं और ये मामला भी कोर्ट में मजबूती से रखेंगे। ग्रीन एरिया में अन्य गतिविधि तय की गई, स्पांज सिटी, रेंटल हाउसिंग जैसे शब्दों का उपयोग बता रहा है कि प्लानिंग में भोपाल से बाहर वालों की बड़ी भूमिका है।- पूर्णेदु शुक्ला, रहवासी

    गुलमोहर कॉलोनी में नौ मीटर की रोड पर होटल्स खुल हैं। 1800 घरों की कॉलोनी है सब परेशान हो रहे हैं। आवासीय प्लॉट में अस्पताल है, घरों में होटल है, रेस्टोरेंट है। रोजाना पार्किंग और अन्य विवाद बन रहे। असामाजिक तत्वों की आवाजाही हो रही है। मास्टर प्लान में इन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं किया। इन्हें नियमित करने के प्रावधान आवासीय में परेशानियां बढ़ाएंगे। 80 फीसदी या इससे चौड़ी सड़कों के किनारे प्रावधान करें तो ठीक होगा। अभी तो काफी गड़बड़ी प्लान है। सुधार होना चाहिए।- ललीत यावय, अध्यक्ष गुलमोहर समिति

  • भोपाल Master Plan-2047 में बड़े बदलाव, 27% हरित क्षेत्र; आवासीय इलाकों में सख्ती

    भोपाल Master Plan-2047 में बड़े बदलाव, 27% हरित क्षेत्र; आवासीय इलाकों में सख्ती

    भोपाल
     राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित महानगर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) का मसौदा जारी कर दिया है। करीब 21 साल की देरी से आए इस प्रारूप में शहर की 45 लाख की संभावित आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार किया गया है।

    नए मास्टर प्लान में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। अब आवासीय इलाकों में शोरूम और शॉपिंग मॉल जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। वहीं, शहर में हरित क्षेत्र को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।भोपाल के मास्टर प्लान 2047 का प्रारूप आखिरकार जारी हो गया है। पिछला मास्टर प्लान 1995 में बना था और उसकी योजना अवधि 2005 तक थी। इसके बाद नया प्लान लागू नहीं हो सका। यानी कानूनी तौर पर तय ही नहीं था कि शहर के किस हिस्से में क्या बन सकता है। 

    विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल भी बढ़ाकर 61,017.02 हेक्टेयर कर दिया गया है। वर्ष 2005 की विकास योजना में यह क्षेत्रफल 25,351 हेक्टेयर प्रस्तावित था। यानी नए प्रारूप में विकास योग्य क्षेत्र करीब ढाई गुना हो गया है।

    1016 वर्ग किमी में फैलेगा निवेश क्षेत्र, 254 गांव होंगे शामिल
    मास्टर प्लान के नए प्रारूप में निवेश क्षेत्र का बड़ा विस्तार किया गया है। इसे बढ़ाकर 1016.90 वर्ग किलोमीटर तक करने का प्रस्ताव है, जिसमें 254 गांव शामिल होंगे। इसके साथ ही शहर के विकास को गति देने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर और असीमित एफएआर का प्रावधान भी किया गया है।

    मास्टर प्लान के मसौदे पर अगले 30 दिनों तक आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से दावे-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इन पर विचार के बाद अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

    21 साल की देरी से बढ़ी थीं विकास संबंधी जटिलताएं
    भोपाल का मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित था। इस देरी के कारण शहर में निर्माण, भूमि उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कई तरह की जटिलताएं पैदा हुईं। इस मुद्दे को लेकर दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन 'नईदुनिया' ने अभियान चलाकर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की तो विवाद बढ़ गया। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मास्टर प्लान लाने की बात कही थी। अब मसौदा जारी होने के बाद शहर के विकास को लेकर नई दिशा तय होने की उम्मीद है।

    सड़क की चौड़ाई तय करेगी व्यावसायिक गतिविधियां
        – 12 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकेंगी। ऐसे क्षेत्र में केवल डाक्टर, वकील, सीए, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, मैनेजमेंट प्रोफेशनल जैसी पेशेवर गतिविधियां ही सिर्फ एक मंजिल तक चलाई जा सकेंगी।

        – 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क पर भी शोरूम, होटल-कैफे नहीं खुलेंगे। यहां सिर्फ बैंक एटीएम, स्टेशनरी, मेडिकल आदि संचालित किए जा सकेंगे।

        – 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर नर्सिंग होम, सीमित क्षमता वाले रेस्टोरेंट, होटल-कैफे, कोचिंग संस्थान और शोरूम का संचालन किया जा सके।

        – 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर शापिंग काम्प्लेक्स संचालित किया जा सकेगा।

    हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर, व्यवस्थित विकास की तैयारी
    भोपाल विकास योजना-2047 में शहर के पर्यावरण संरक्षण और नियोजित विस्तार को प्रमुखता दी गई है। हरित क्षेत्र को 12 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव इसी दिशा में अहम माना जा रहा है। निवेश क्षेत्र के विस्तार, नए ग्रोथ कॉरिडोर और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सड़क की चौड़ाई के आधार पर नियम तय होने से शहर के विकास को व्यवस्थित स्वरूप देने की योजना है।

    मसौदे पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मास्टर प्लान सामने आएगा। इसके बाद ही प्रस्तावित प्रावधानों के अंतिम स्वरूप और उनके क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट होगी।

    पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बड़ा बदलाव 51 किलोमीटर के 'ग्रोथ कॉरिडोर' से आएगा, जो शहर को एयरपोर्ट और बाहरी इलाकों से जोड़ेगा।

        इस पर BRT यानी सिर्फ बसों के लिए रिजर्व लेन बनेगी, ताकि बसें जाम में न फंसें।
        भविष्य में इसे मेट्रो जैसी सेवा में भी बदला जा सकता है।
        इसके इर्द-गिर्द 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) का कॉन्सेप्ट लगेगा यानी जहां बस या मेट्रो जैसी सुविधा होगी, वहीं आसपास घर, दफ्तर और बाकी जरूरी सुविधाएं भी पास-पास बसाई जाएंगी।
        यह सिर्फ आने-जाने की सड़क नहीं होगी, इसके आसपास होटल, अस्पताल, IT-AI-डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक बाजार, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस और शिक्षा संस्थान भी विकसित होंगे।
        पूरे शहर की निगरानी के लिए 'डिजिटल ट्विन सिटी' सिस्टम भी बनेगा, यानी शहर का डिजिटल नक्शा बनाकर अवैध निर्माण या जाम जैसी समस्याएं समय रहते पकड़ी जा सकेंगी।

    18 मीटर या ज्यादा चौड़ी है, तो गाड़ी रिपेयर शॉप, शोरूम, ऑडिटोरियम (100 सीट तक), कॉल सेंटर जैसी बड़ी गतिविधियां भी शुरू हो सकती हैं।

    यानी अगर आपका घर संकरी गली में है, तो आसपास सीमित सुविधाएं ही आएंगी। चौड़ी सड़क पर है, तो रोजमर्रा की जरूरत की हर चीज घर के पास मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। नए आवासीय इलाकों को शुरू से ही इसी सोच के साथ बसाने का प्रस्ताव है, ताकि स्कूल, दुकान, स्वास्थ्य सुविधा और पार्किंग घर के पास ही मिले।

    अगर आप पुराने शहर में रहते हैं और ऊंचाई-सीमा के चलते नई मंजिल नहीं जोड़ पा रहे, तो सरकार आपको 'हेरिटेज TDR' नाम का एक प्रमाणपत्र देगी। यह असल में एक निर्माण करने का हक है, जिसे आप बेच सकते हैं। अगर आप किसी पुरानी अपार्टमेंट सोसाइटी में रहते हैं और 70% पड़ोसी पुनर्विकास के लिए राजी हों, तो पूरी बिल्डिंग तोड़कर नई बनवाना अब कानूनी तौर पर आसान होगा।

    यह समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल का रोडमैप

        राजधानी की यह विकास योजना (मास्टर प्लान) भोपाल की प्राकृतिक धरोहर- भोजताल, वन क्षेत्रों एवं बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से तैयार की गई है। इसमें हरित टीडीआर का बेहतर प्रविधान किया गया है, इससे हरित क्षेत्र में आने वाली भूमि के स्वामियों की क्षतिपूर्ति के साथ विकासकर्ताओं को टीडीआर के जरिये अतिरिक्त विकास की सुविधा भी मिल सकेगी। समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल के संकल्प की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रारूप पर नागरिकगण अपनी आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।

        – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

     

     

  • भोपाल में नए नियम लागू, प्लॉट पर 12% ओपन स्पेस रखना होगा जरूरी

    भोपाल में नए नियम लागू, प्लॉट पर 12% ओपन स्पेस रखना होगा जरूरी

    भोपाल
    भोपाल के मास्टर प्लान-2047 के प्रस्तावित ड्राफ्ट में शहर के विकास और नई कॉलोनियों के स्वरूप को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी नई कॉलोनी में महज सड़क चौड़ी होने से कोई प्लॉट कमर्शियल नहीं मान लिया जाएगा।

    इसके लिए लेआउट में स्पष्ट मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, कॉलोनियों में हरियाली और बच्चों के लिए खेल मैदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खुली जगह (ओपन स्पेस) का दायरा भी 10% से बढ़ाकर 12% कर दिया है।

    चौड़ी सड़क का मतलब सीधे कमर्शियल प्लॉट नहीं
        मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के अनुसार, नई कॉलोनियों में सड़क की चौड़ाई के आधार पर दुकान, ऑफिस, अस्पताल या मॉल खोलने की गुंजाइश तो दी है, लेकिन लेआउट पास करते समय ही यह तय करना होगा कि कमर्शियल या मिक्स लैंड यूज के प्लॉट कहां होंगे।

    नई कॉलोनी में कुल आवासीय क्षेत्र के अधिकतम 5% हिस्से में ही स्थानीय जरूरतों वाली दुकानें खोलने की अनुमति होगी। हालांकि, अगर सड़क 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी है, तो इस 5% की सीमा के अलावा भी मिक्स लैंड यूज वाले प्लॉट मंजूर किए जा सकेंगे।
    पहले से बसी पुरानी कॉलोनियों में सड़क की चौड़ाई के हिसाब से कमर्शियल गतिविधियों की छूट मिलेगी, लेकिन आवासीय परिसरों में गैर-आवासीय उपयोग स्वीकृत एफएआर (FAR) के अधिकतम 50% तक ही सीमित रहेगा।

    हरियाली और खेल मैदानों पर विशेष जोर
    नए प्रस्ताव में पर्यावरण और खुले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। नई कॉलोनियों में अब 12 प्रतिशत सामुदायिक खुली जगह छोड़ना अनिवार्य होगा, जिसमें से आधी जगह एक साथ (सिंगल पैच में) रखनी होगी। इस कुल खुले क्षेत्र का 30 फीसदी हिस्सा पेड़-पौधों के लिए और 30 फीसदी बच्चों के खेल मैदान के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा, सर्विस सुविधाओं के लिए अलग से 2% जमीन छोड़ना भी अनिवार्य किया गया है।

    शहर के बाहर व्यक्तिगत मकान बनाने पर सख्त हुए नियम
        अक्सर लोग शहर के बाहर शांत इलाकों में बड़ी जमीन लेकर अपना अलग मकान बना लेते हैं, जिससे वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का दबाव बढ़ जाता है। अब ऐसे व्यक्तिगत मकानों के लिए नियम सख्त कर दिए गए हैं।

        इनके लिए कम से कम 9 मीटर चौड़ी सड़क का होना जरूरी है। साथ ही अधिकतम 25% ग्राउंड कवरेज, 10 मीटर ऊंचाई और 1.25 एफएआर (FAR) का प्रस्ताव रखा गया है। मकान मालिक को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसकी जमीन किसी अवैध कॉलोनी का हिस्सा तो नहीं है।

        नक्शा पास कराते समय प्लॉट के चारों ओर छोड़ी जाने वाली जगह (मार्जिन) के नियमों में छोटे प्लॉट वालों को काफी राहत दी गई है है। 517 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सिर्फ सामने की तरफ 3 मीटर जगह छोड़नी होगी। पीछे या अगल-बगल कोई जगह छोड़ने की जरूरत नहीं है।

        517 से 1615 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सामने 3 मीटर और पीछे 1.5 मीटर जगह छोड़नी होगी। 1615 से 2422 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सामने 3 मीटर, पीछे 1.5 मीटर और एक तरफ 3 मीटर जगह छोड़नी होगी। इससे बड़े आकार (5382 वर्ग फीट तक) के प्लॉट्स के लिए साइज के हिसाब से चारों तरफ जगह छोड़ने के अलग-अलग नियम तय किए गए हैं।

    दूसरी ओर, सामान्य आवासीय प्लॉट्स पर निर्माण की अच्छी छूट दी गई है। मसलन, 5000 वर्ग फीट के प्लॉट पर सभी मंजिलों को मिलाकर 7500 वर्ग फीट तक निर्माण किया जा सकता है। इसकी अधिकतम ऊंचाई 12.50 मीटर हो सकती है और इसमें ज्यादा से ज्यादा 6 फ्लैट बनाने की इजाजत होगी।

    अतिरिक्त निर्माण के लिए टीडीआर (TDR) और शुल्क का फॉर्मूला
    अगर कोई व्यक्ति तय सीमा से अधिक निर्माण करना चाहता है, तो उसे अतिरिक्त एफएआर का 50% हिस्सा शुल्क देकर और बाकी 50% हिस्सा टीडीआर (यानी दूसरे की जमीन से मिला निर्माण अधिकार) के जरिए हासिल करना होगा। वहीं, 12.50 मीटर तक की ऊंचाई वाले मकानों में एफएआर को 1.25 से बढ़ाकर 1.50 तक ले जाने के लिए पूरा अतिरिक्त अधिकार शुल्क देकर मंजूरी प्राप्त की जा सकती है।

  • जबलपुर के 62 गांवों में मास्टर प्लान का असर, जमीन के उपयोग को लेकर बढ़ी चिंता

    जबलपुर के 62 गांवों में मास्टर प्लान का असर, जमीन के उपयोग को लेकर बढ़ी चिंता

    जबलपुर.

    जबलपुर के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर एक बार फिर जमीन के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2022 में नियोजन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 62 गांवों को शामिल किए जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के संभावित लैंड यूज को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।

    पाटन, जबलपुर और पनागर तहसील के कुछ गांवों में बड़े हिस्से को अंतिम योजना में कृषि या ग्रीन बेल्ट के रूप में रखे जाने की संभावना चर्चा में है। इससे जमीन मालिकों और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें अंतिम लैंड यूज मैप पर टिक गई हैं। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित गांवों का वास्तविक भू-उपयोग मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा।

    इन गांवों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर
    पाटन तहसील के नुहारी, बिनेकी और टिमरी, जबलपुर तहसील के खमरिया, पिपरिया कला, नौमखेड़ा और कोसमघाट तथा पनागर तहसील के पिपरिया, मगेला, पटना और बरौदा सहित कुछ गांवों को लेकर भू-उपयोग की चर्चाएं अधिक हैं। यदि इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा कृषि या ग्रीन बेल्ट में निर्धारित होता है तो वहां आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप अथवा अन्य गैर-कृषि विकास भू-उपयोग नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होगा। इसके विपरीत आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियोजित विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    2022 में बढ़ा था नियोजन क्षेत्र
    शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में जबलपुर के नियोजन क्षेत्र का विस्तार किया गया था। इसमें 62 गांवों को शामिल किया गया। इसके साथ इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्र के नियोजन की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश व्यवस्था के दायरे में आ गई। अब जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अंतिम योजना में उनकी भूमि किस श्रेणी में आती है। यही स्थिति भविष्य में जमीन के विकास और उपयोग की दिशा तय करेगी।

    धारा 16 के तहत विकास योजना अहम
    मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत विकास योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के नियोजित भू-उपयोग का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में 62 गांवों के लिए तैयार किए जा रहे अंतिम लैंड यूज मैप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीन मालिकों और डेवलपर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित उपयोग के आधार पर भूमि पर भविष्य की विकास गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खासकर जिन क्षेत्रों को शहरी विस्तार की संभावनाओं के आधार पर निवेश योग्य माना जा रहा है, वहां अंतिम भू-उपयोग का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा।

    डेवलपर्स को भी अंतिम नक्शे का इंतजार
    62 गांवों के नियोजन क्षेत्र में आने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां भी इस बात पर निर्भर करेंगी कि किन इलाकों को आवासीय, मिश्रित, कृषि या हरित क्षेत्र में रखा जाता है। क्रेडाई सहित रियल উভয় एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठन भी मास्टर प्लान को स्पष्ट रूप से लागू करने और भू-उपयोग की स्थिति जल्द सामने लाने की मांग करते रहे हैं।

    देरी ने बढ़ाया असमंजस
    मास्टर प्लान 2041 की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी 62 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल किए जाने, योजना के मसौदा स्तर पर होने तथा आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। अंतिम स्वरूप सामने नहीं आने से जमीन मालिकों के लिए यह तय करना मुश्किल बना हुआ है कि भविष्य में उनकी भूमि का नियोजित उपयोग क्या होगा।जबलपुर के विस्तार की दृष्टि से 62 गांवों का नियोजन क्षेत्र में शामिल होना महत्वपूर्ण है।

  • मास्टर प्लान पर ब्रेक! भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में भूमि विकास के प्रस्ताव अटके

    मास्टर प्लान पर ब्रेक! भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में भूमि विकास के प्रस्ताव अटके

    भोपाल.

    प्रदेश में भले ही भूमि विकास नियम का मसौदा तैयार किया जा रहा हो, लेकिन शहरों का मास्टर प्लान बनाकर लागू होने के बाद ही भूमि का उपयोग निर्धारित किया जा सकेगा। दअरसल, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे महानगरों का मास्टर प्लान अब तक नहीं बनाया जा सका है।

    मास्टर प्लान न होने से शहरों का अनियोजित विकास हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए मध्य प्रदेश मेट्रोपालिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के तहत बड़े शहरों के सुनियोजित विकास के लिए नए ड्राफ्ट तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन मास्टर प्लान में एक बार जो लैंड यूज (आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या ग्रीन एरिया) तय हो जाता है, उसे बिना वैधानिक सरकारी प्रक्रिया के बदलना संभव नहीं होता है।

    मास्टर प्लान के बाद ही लैंड यूज तय हो सकेगा
    यही वजह है कि मध्य प्रदेश में मास्टर प्लान लागू होने के बाद ही भूमि का वास्तविक उपयोग (लैंड यूज) तय हो सकेगा। इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के मास्टर प्लान की समय अवधि 2021 में समाप्त हो गई थी। भोपाल का मास्टर प्लान 1995 में आया था, उस समय भोपाल की आबादी 10 से 15 लाख थी। मास्टर प्लान की अवधि दिसंबर, 2005 को ही समाप्त हो चुकी है। इधर, वर्ष 1975 से शासन ने केवल भोपाल के दो मास्टर प्लान को मंजूरी दी है।

    वर्ष 2047 की अनुमानित आबादी के आधार पर दावा
    भोपाल के जिस मास्टर प्लान (वर्ष 2031) पर दावे-आपत्तियां सुनी गई थीं, उसे फिर नए सिरे से तैयार किया जाएगा। सरकार का दावा है कि नया मास्टर प्लान वर्ष 2047 की अनुमानित आबादी के आधार पर तैयार होगा। भोपाल शहर के जनप्रतिनिधियों ने पुराने मास्टर प्लान के कई प्रविधानों पर असहमति जताते हुए भविष्य के लिए सुझाव भी दिए थे। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नए बिंदुओं और प्राप्त सुझावों के आधार पर नया मास्टर प्लान बनाने की बात कही लेकिन इस बात को भी लंबा समय हो गया है। मास्टर प्लान में देरी से अवैध कालोनियों का कारोबार फल-फूल रहा है।

                                     भोपाल व इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्रः एक नजर में –
    भोपाल मेट्रोपालिटन में 13 हजार वर्ग किमी क्षेत्र
    भोपाल मेट्रोपालिटन के लिए 13 हजार वर्ग किमी का क्षेत्र अधिसूचित किया गया है। इसमें भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम के नगरीय निकायों के साथ 2,510 गांव शामिल हैं।

    इंदौर मेट्रोपालिटन में 16 हजार वर्ग किमी क्षेत्र –
    इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्र के लिए 16,087 वर्ग किमी का क्षेत्र अधिसूचित किया गया है। इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिलों के नगरीय निकायों के साथ 2,781 गांव शामिल हैं।