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  • मध्यप्रदेश में मेडिकल एडमिशन की रेस तेज, 62 खाली सीटों के लिए आए 13,876 आवेदन; एक सीट पर 224 दावेदार

    मध्यप्रदेश में मेडिकल एडमिशन की रेस तेज, 62 खाली सीटों के लिए आए 13,876 आवेदन; एक सीट पर 224 दावेदार

    भोपाल 

     मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन का अंतिम दौर यानी कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) में खाली सीटों पर एडमिशन के लिए विद्यार्थियों में मारामारी है। राज्यभर के मेडिकल (एमबीबीएस) और डेंटल (बीडीएस) कॉलेजों की केवल 62 सीटें खाली हैं, जिसके लिए 13876 च्वाइस फिलिंग (आवेदन) हुए हैं। एक सीट के लिए औसतन 224 विद्यार्थियों ने आवेदन किए हैं। इंदौर में एमबीबीएस की खाली चार सीटों के लिए 2003 विद्यार्थी मैदान में हैं।

    प्रदेश में सबसे ज्यादा क्रेज जीएमसी भोपाल की एकमात्र खाली सीट पर है, जहां पर 944 विद्यार्थी एडमिशन की लाइन में हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश में एमबीबीएस की 38 सीटें खाली है, जिसके लिए 12069 आवेदन प्राप्त हुए है, यानी प्रत्येक सीट पर लगभग 317 विद्यार्थियों ने दावा किया है। बीडीएस की 24 सीटों के लिए 1807 च्वाइस फिलिंग दर्ज की गई है, जिसमें औसतन प्रति सीट करीब 75 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा कुछ आवेदनों में से 13345 आवेदन यानी 96.1 प्रतिशत मध्यप्रदेश के मूल निवासी, वहीं 531 आवेदन अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के हैं।

    ये है प्रदेश की स्थिति

    62-खाली सीटें
    13876-च्वाइस फिलिंग
    12069-एमबीबीएस आवेदन
    317-प्रति सीट आवेदन
    1807-बीडीएस आवेदन
    75-प्रति सीट आवेदन
    13345-राज्य के विद्याथियों के आवेदन
    531-बाहरी राज्यों के विद्यार्थियों के आवेदन

    इंदौर के गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज का क्रेज
    शहर के एकमात्र गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज में बीडीएस की एक सीट के लिए 262 छात्रों ने दावेदारी की है। प्राइवेट डेंटल कॉलेजों (इंडेक्स डेंटल, मॉडर्न डेंटल, और श्री अरबिंदो डेंटिस्ट्री) में 9 सीटें खाली हैं, जिन पर 651 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अरबिंदो डेंटल व माडर्न डेंटल की एक-एक सीट पर क्रमशः 213 व 211 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है।

    इंदौर में एडमिशन की होड़
    सीएलसी काउंसलिंग में इंदौर के मेडिकल व डेंटल एजुकेशन कॉलेज में प्रवेश के लिए भारी होड़ है। यहां 14 सीटों के लिए 2900 से अधिक आवेदन आए हैं। यानी औसतन प्रति सीट 208 विद्यार्थी मैदान में हैं। इसमें एमबीबीएस की मात्र चार सीट है।

    यहां गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एकभी सीट खाली नहीं है। इंदौर के 3 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों (इंडेक्स, एलएनसीटी और श्री अरबिंदो) में एमबीबीएस की चार सीटें खाली हैं, जिन पर 2003 विद्यार्थियों ने च्वाइस फीलिंग की है। मतलब है कि इंदौर में एमबीबीएस की एक सीट पर 500 से अधिक छात्र कतार में हैं।

    गवर्नमेंट की 8 सीटों पर 5676 आवेदन
    गवर्नमेंट कॉलेजों में 8 सीटों के लिए 5676 आवेदन आए हैं। यहां 1 सीट के लिए औसतन 709 विद्यार्थियों में दौड़ में है। निजी मेडिकल कॉलेजों की खाली 54 सीटों के लिए 8200 च्वाइस फीलिंग की है। 

    भोपाल के गवर्नमेंट गांधी मेडिकल कॉलेज की एक खाली एमबीबीएस सीट पर

    944, नंदकुमार सिंह चौहान गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज खंडवा में एमबीबीएस की 2 सीटों के लिए 913. गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना में एमबीबीएस की खाली एक सीट के लिए 896 और आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज उज्जैन में एमबीबीएस की 1 सीट पर 702 च्वाइस फिलिंग मिली।

     

  • MBBS इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन जारी, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आज सरकारी अस्पतालों में OPD ठप

    MBBS इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन जारी, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आज सरकारी अस्पतालों में OPD ठप

    भोपाल

    MBBS इंटर्न डॉक्टर्स के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रदेशभर में फैलता नजर आ रहा है। सोमवार सुबह से चल रहे प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई से नाराज इंटर्न डॉक्टर्स ने मंगलवार को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में OPD सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया है।डॉक्टरों के मुताबिक, इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलती रहे। हालांकि OPD बंद रहने से सामान्य मरीजों की नियमित जांच और उपचार सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है।

    भोपाल में रातभर सड़क पर डटे रहे इंटर्न डॉक्टर
    राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन रातभर जारी रहा। डॉक्टर कमला पार्क की सड़क पर बैठकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे।प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। CM हाउस की तरफ जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया गया है, जिससे प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री निवास की ओर आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    इंदौर और रतलाम में भी असर
    भोपाल के अलावा इंदौर, रतलाम समेत प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टर्स के काम नहीं करने की बात सामने आई है। इससे सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को नियमित OPD सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि आंदोलन के दौरान इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने की बात कही गई है।

    चिकित्सक समुदाय के लिए काला दिन
    जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जेडीए) ने समर्थन जताते हुए मंगलवार को हमीदिया अस्पताल की नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे एमटीए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय ने इसे चिकित्सक समुदाय के लिए काला दिन करार दिया और मांग पूरी न होने पर पूरे डॉक्टर समुदाय के आंदोलन में उतरने की चेतावनी दी।

    प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे जीतू पटवारी
    इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को खुद आंदोलन कर रहे डॉक्टरों के बीच आकर उनकी मांग सुननी चाहिए। पटवारी ने CM हाउस जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर बना दी गई है। उन्होंने सरकार से डॉक्टरों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान निकालने की अपील की।

    कमला पार्क की सड़क पर रातभर डटे रहे इंटर्न डॉक्टर
    भोपाल में प्रदर्शन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टर पुलिस कार्रवाई के बाद भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कई इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर बैठे रहे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद पुलिस ने उनके खिलाफ वाटर कैनन और बल प्रयोग का इस्तेमाल किया। वहीं, प्रशासन ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग कर रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी है।

    प्रदेशभर में OPD बंद, इमरजेंसी सेवा रहेगी चालू
    इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का समर्थन मिलने के बाद इसका असर प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में दिखाई दे रहा है। भोपाल के अलावा इंदौर, रतलाम और अन्य शहरों में भी डॉक्टरों के काम से दूर रहने की जानकारी सामने आई है। जूनियर डॉक्टर ने साफ किया है कि जब तक इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर समाधान नहीं होता, तब तक नियमित OPD और तय इलेक्टिव ऑपरेशन सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा। हालांकि, मरीजों की परेशानी को देखते हुए इमरजेंसी सेवाओं को बंद नहीं किया गया है। गंभीर मरीजों को अस्पतालों में जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलती रहेगी। 

    स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
    जूनियर डॉक्टर मध्य प्रदेश के वाइस प्रेसिडेंट अनुराग भारती के मुताबिक, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत हुई है, लेकिन इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों पर कायम हैं। डॉक्टरों की मुख्य मांगों में स्टाइपेंड में तत्काल बढ़ोतरी शामिल है। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की मांग की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मेडिकल छात्रों और इंटर्न डॉक्टरों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

    मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भी समर्थन में
    मामले को लेकर मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश ने भी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का समर्थन किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय देर रात प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों से मिलने पहुंचे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किए जाने से डॉक्टरों में आक्रोश है। उन्होंने इस घटना को चिकित्सक समुदाय के लिए दुखद बताया और कहा कि यदि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो पूरा चिकित्सक समुदाय उनके साथ खड़ा रहेगा।

    डॉक्टरों पर बल प्रयोग की निंदा  
    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए घायल डॉक्टरों के नि:शुल्क इलाज और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं एफएआईएमए के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. आकाश सोनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर सरकार को बल प्रयोग के बजाय बातचीत के जरिए इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए।

    इंटर्न बोले- उप मुख्यमंत्री खुद आएं
    प्रशासनिक स्तर पर देर रात हुई कलेक्टर और सीएमई की वार्ता बेनतीजा रही। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह जब छात्रों को डिप्टी सीएम से मिलाने ले जाने पहुंचीं, तो डॉक्टरों ने वहां जाने से साफ इंकार कर दिया। इंटर्न डॉक्टरों की दो टूक मांग है कि स्टाइपेंड में तत्काल बढ़ोतरी के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल स्वयं आकर उनसे बात करें और लाठीचार्ज के जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।

    लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के विरोध में JDA भी उतरा
    इंटर्न डॉक्टर्स के समर्थन में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) भी सामने आया है। सोमवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल का JDA ने विरोध किया है।

    स्टाइपेंड बढ़ोतरी के साथ कार्रवाई की मांग
    JDA मध्यप्रदेश के वाइस प्रेसिडेंट  के मुताबिक, कलेक्टर और CME के साथ बातचीत हुई है, लेकिन इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों पर कायम हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।फिलहाल इंटर्न डॉक्टर्स के आंदोलन और OPD बहिष्कार के चलते प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सामान्य चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ने की स्थिति बनी हुई है।

     

  • मेडिकल छात्रों पर सख्ती: सीट छोड़ने पर तीन साल तक एडमिशन नहीं, भरनी होगी भारी रकम

    मेडिकल छात्रों पर सख्ती: सीट छोड़ने पर तीन साल तक एडमिशन नहीं, भरनी होगी भारी रकम

    चंडीगढ़
    हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस के छात्र अगर दाखिले के बाद सीट छोड़ते हैं तो उन्हें अगले तीन साल तक प्रवेश के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

    इसके साथ ही 10 लाख रुपये की बांड मनी भी चुकानी होगी। निजी संस्थानों में बीच में कोर्स छोड़ने पर संबंधित शैक्षणिक सत्र की फीस सहित अगले शैक्षणिक सत्र की 50 प्रतिशत फीस भी देनी होगी।

    मैनेजमेंट कैटेगरी में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों पर भी नियम लागू होगा। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राज्य के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले की प्रक्रिया अधिसूचित कर दी है।

    85 फीसदी सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट कैटगरी में भरी जाएंगी
    सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटों में से 15% सीटें नीट-यूजी की अखिल भारतीय मेरिट व 85% सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट कैटेगरी से भरी जाएंगी।

    पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेज रोहतक को ऑनलाइन संयुक्त केंद्रीयकृत काउंसलिंग कराने की जिम्मेदारी दी है। निजी मेडिकल व डेंटल संस्थानों में 50% सीटें स्टेट कोटा व 50% मैनेजमेंट कैटेगरी में रहेंगी।

    एनआरआइ कोटा मैनेजमेंट कैटेगरी में से 15% होगा। स्टेट कोटा की पांच प्रतिशत सीटें दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेंगी। ओपन मेरिट-स्टेट कोटा सीटों के लिए अभ्यर्थी का हरियाणा का मूल निवासी होना जरूरी है। मैनेजमेंट कैटेगरी के लिए पूरे भारत से अभ्यर्थी पात्र होंगे।

    निजी कॉलेज में एकमुश्त एडवांस राशि नहीं होगी जमा
    निजी मेडिकल कॉलेज पूरे कोर्स की ट्यूशन फीस एकमुश्त एडवांस जमा नहीं करा सकेंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पांच वर्षों की वार्षिक फीस चार लाख 22 हजार 910 रुपये व सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेज में आठ लाख 10 हजार रुपये होगी। रजिस्ट्रेशन-कम-काउंसलिंग फीस सामान्य श्रेणी के लिए 2500 रुपये, हरियाणा के आरक्षित श्रेणी के लिए 1250 रुपये और एनआरआइ के लिए 10,000 रुपये निर्धारित की है।

    तीन साल का प्रतिबंध भी लगेगा, निजी संस्थानों में बीच में कोर्स छोड़ने वाले छात्र को अगले सत्र की 50% फीस भी देनी होगी
    अभ्यर्थी को भरना पड़ेगा बांड सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए पुरुष अभ्यर्थियों को 25 लाख 77 हजार 90 रुपये व महिला अभ्यर्थियों को 23 लाख 19 हजार 381 रुपये का बांड भरना होगा।

    सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कालेज में यह राशि पुरुषों के लिए 21 लाख 90 हजार और महिलाओं के लिए 19 लाख 71 हजार रुपये रखी है।

     

  • एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्न्स को बड़ी सौगात, भत्ता 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये

    एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्न्स को बड़ी सौगात, भत्ता 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये

    एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्नशिप भत्ता दोगुने से ज्यादा, 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये

    मेडिकल इंटर्न युवा डॉक्टरों को योगी सरकार का तोहफा, 2021 में भी बढ़ाया गया था इंटर्नशिप भत्ता

    लखनऊ
    प्रदेश के राजकीय मेडिकल कालेजों, संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों से एमबीबीएस व बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वाले छात्रों को अब हर माह 12 हजार के बजाय 25 हजार रुपये इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि योगी सरकार ने इससे पहले भी 2021 में यह भत्ता 7500 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया था।

    दोगुने से ज्यादा बढ़ाया इंटर्नशिप भत्ता
    अभी इंटर्नशिप के दौरान मेडिकल छात्रों को 12 हजार रुपये प्रतिमाह बतौर भत्ता मिलता है। कैबिनेट ने यह राशि दोगुने से ज्यादा बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर इन छात्रों को आर्थिक राहत दी है। इससे प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रशिक्षण लेने वाले एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न को प्रोत्साहन मिलेगा।

    ओपीडी व रात्रि ड्यूटी में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका
    प्रदेश में एमबीबीएस और बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए रोटेटिंग इंटर्नशिप अनिवार्य है। इंटर्नशिप के दौरान छात्र राजकीय चिकित्सा संस्थानों में मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय सहयोग देने के साथ ही आपातकालीन सेवाओं, वार्ड, ओपीडी और रात्रि ड्यूटी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • दोगुने से ज्यादा बढ़ा इंटर्नशिप भत्ता, अब MBBS-BDS इंटर्न्स को मिलेंगे 25 हजार रुपये

    दोगुने से ज्यादा बढ़ा इंटर्नशिप भत्ता, अब MBBS-BDS इंटर्न्स को मिलेंगे 25 हजार रुपये

    एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्नशिप भत्ता दोगुने से ज्यादा, 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये

    मेडिकल इंटर्न युवा डॉक्टरों को योगी सरकार का तोहफा, 2021 में भी बढ़ाया गया था इंटर्नशिप भत्ता

    लखनऊ
     प्रदेश के राजकीय मेडिकल कालेजों, संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों से एमबीबीएस व बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वाले छात्रों को अब हर माह 12 हजार के बजाय 25 हजार रुपये इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि योगी सरकार ने इससे पहले भी 2021 में यह भत्ता 7,500 से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया था।

    दोगुने से ज्यादा बढ़ाया इंटर्नशिप भत्ता
    अभी इंटर्नशिप के दौरान मेडिकल छात्रों को 12 हजार रुपये प्रतिमाह बतौर भत्ता मिलता है। कैबिनेट ने यह राशि दोगुने से ज्यादा बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर इन छात्रों को आर्थिक राहत दी है। इससे प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रशिक्षण लेने वाले एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न को प्रोत्साहन मिलेगा।

    ओपीडी व रात्रि ड्यूटी में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका
    प्रदेश में एमबीबीएस और बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए रोटेटिंग इंटर्नशिप अनिवार्य है। इंटर्नशिप के दौरान छात्र राजकीय चिकित्सा संस्थानों में मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय सहयोग देने के साथ ही आपातकालीन सेवाओं, वार्ड, ओपीडी और रात्रि ड्यूटी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।