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  • पुरानी पेंशन का लाभ देने पर हाईकोर्ट सख्त, हरियाणा सरकार को दिए निर्देश

    पुरानी पेंशन का लाभ देने पर हाईकोर्ट सख्त, हरियाणा सरकार को दिए निर्देश

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अंशकालिक आधार पर काम करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राहत दी है। अदालत ने कहा कि नियमित होने से पहले अंशकालिक, दैनिक वेतन या तदर्थ आधार पर की गई निरंतर सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल किया जाएगा।

    इससे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने जगदीश व अन्य की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि सरकारी स्कूलों में नियमित होने से पहले की गई सेवा पेंशन की गणना में जोड़ी जाए। उन्होंने ओपीएस के तहत पेंशन, सेवानिवृत्ति उपदान और अन्य वित्तीय लाभ देने तथा नई पेंशन योजना के खातों के स्थान पर सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाते खोलने की मांग भी की थी।

    रिट याचिका खारिज
    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना देने के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश के खिलाफ PGIMER, चंडीगढ़ द्वारा दायर रिट याचिका खारिज की। कर्मचारियों को 1994 में वर्क-चार्ज मोर्टार मेट के रूप में नियुक्त किया गया और केवल 2016 में नियमित किया गया। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की खंडपीठ ने कहा कि 1 जनवरी 2004 को नई पेंशन योजना लागू होने से पहले नियुक्त कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना का हकदार है, भले ही उस तारीख के बाद नियमितीकरण हुआ हो। खंडपीठ ने PGIMER की उन आपत्तियों को भी खारिज किया कि कर्मचारियों को आकस्मिक निधि से भुगतान किया गया और कोई स्वीकृत पद मौजूद नहीं था।

    कोर्ट ने कहा,"…एक बार जब नियुक्ति तीन दशकों की अवधि तक जारी रहती है तो केवल यह कि याचिकाकर्ता उत्तरदाताओं को आकस्मिक निधि से भुगतान कर रहे थे, पुरानी पेंशन योजना के तहत इलाज किए जाने के प्रतिवादियों के दावे को खारिज नहीं किया जाएगा।" कर्मचारियों को जनवरी और जून 1994 के बीच अस्थायी/कार्य-प्रभारित मोर्टार मेट के रूप में नियुक्त किया गया। उन्हें नियमित वेतनमान में रखा गया और नियुक्ति की तारीख से वार्षिक वेतन वृद्धि प्राप्त हुई। हालांकि, पहले छह महीने के लिए काम पर लगाया गया, लेकिन काम मौजूद होने के कारण उन्होंने काम करना जारी रखा और 6 अगस्त, 2016 के एक निर्णय के तहत उनकी सेवाओं को नियमित कर दिया गया। PGIMER ने नियमितीकरण के बाद उन्हें पुरानी पेंशन योजना का विस्तार करने से इनकार किया। CAT ने हरबंस लाल बनाम पंजाब राज्य (सीडब्ल्यूपी-2371-2010, 31 अगस्त 2010 को निर्णय) पर भरोसा करते हुए 9 सितंबर, 2025 को उनके मूल आवेदन की अनुमति दी। PGIMER ने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    PGIMER ने माना कि कर्मचारी वार्षिक वेतन वृद्धि के साथ नियमित वेतनमान में थे। हालाँकि, यह तर्क दिया गया कि कार्य-प्रभारित कर्मचारियों के रूप में उन्हें आकस्मिक निधि से भुगतान किया गया, इसलिए पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं हो सकती थी। इसने आगे तर्क दिया कि 2016 में जब कर्मचारियों को नियमित किया गया तब मोर्टार मेट का कोई स्वीकृत पद नहीं था, इसलिए ट्रिब्यूनल उन्हें पुरानी पेंशन योजना नहीं दे सकता। न्यायालय ने कहा कि कई तथ्य निर्विवाद हैं और कर्मचारियों ने 1994 से वेतन वृद्धि के साथ नियमित वेतनमान में 32 वर्षों तक लगातार काम किया, उन्हें 2016 में नियमित किया गया और उनमें से दो सेवानिवृत्त हो गए। कोर्ट ने हरबंस लाल पर भरोसा किया, जिसमें डिवीजन बेंच ने कहा कि जिस कर्मचारी की सेवा 1 जनवरी 2004 से पहले शुरू हुई, उसे उस तारीख से पहले सरकारी सेवा में माना जाएगा, भले ही बाद में नियमित किया गया हो। ऐसा कर्मचारी नई परिभाषित अंशदान पेंशन योजना द्वारा शासित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 की एसएलपी संख्या 4769 में हरबंस लाल को सही ठहराया था।

  • कर्मचारियों के लिए राहत की खबर, हरियाणा HC ने 3 श्रेणियों को पुरानी पेंशन का हक दिया

    कर्मचारियों के लिए राहत की खबर, हरियाणा HC ने 3 श्रेणियों को पुरानी पेंशन का हक दिया

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना को लेकर चल रहे लंबे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। 46 याचिकाओं का निपटारा करते हुए कोर्ट ने मामलों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निर्णय दिया। इनमें एक श्रेणी के कर्मचारियों को राहत नहीं मिली, जबकि तीन अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का रास्ता साफ कर दिया गया है।

    खास तौर पर नियमित होने से पहले की लंबी सेवा और पुरानी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। पहली श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल थे, जिनकी नियुक्ति एक जनवरी 2006 के बाद और 18 अगस्त 2008 से पहले हुई थी। इन कर्मचारियों ने 28 अक्टूबर 2005 की कटआफ तारीख को बदलकर 18 अगस्त 2008 करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि हरियाणा की नई पेंशन योजना 18 अगस्त 2008 को अधिसूचित हुई थी, इसलिए इसी तारीख को आधार बनाया जाना चाहिए।

    हाई कोर्ट ने यह मांग खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी कर्मचारियों से संबंधित पेंशन नीति बनाते समय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कटआफ तारीख को अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। इसलिए 28 अक्टूबर 2005 की कटआफ तारीख में बदलाव नहीं किया जा सकता। दूसरी श्रेणी के कर्मचारियों को महत्वपूर्ण राहत मिली है। इसमें वे कर्मचारी शामिल हैं, जिन्होंने एक जनवरी 2006 से पहले पार्ट टाइम, एडहाक, अस्थायी या अनुबंध के आधार पर काम शुरू किया था और बाद में नियमित हुए। कोर्ट ने कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता है। लंबे समय तक कर्मचारी से सेवा लेने के बाद उसकी पूर्व सेवा को पूरी तरह नजरअंदाज कर उसे पेंशन जैसे लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। लगातार की गई ऐसी सेवा को केवल पार्ट टाइम या अस्थायी सेवा बताकर बाहर नहीं किया जा सकता। लिहाजा नियमितीकरण से पहले की पात्र निरंतर सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल किया जाएगा।

    पुराने विज्ञापन पर हुई भर्ती में भी ओपीएस का लाभ
    तीसरी श्रेणी में वे कर्मचारी हैं, जिनके लिए भर्ती का विज्ञापन 28 अक्टूबर 2005 से पहले जारी हो चुका था, लेकिन नियुक्ति एक जनवरी 2006 के बाद हुई। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की तारीख को अहम माना। यदि बाद में भर्ती प्रक्रिया में कोई बदलाव हुआ या नया विज्ञापन जारी किया गया, लेकिन वह वास्तव में पहले शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया की निरंतरता था, तो उसे नई भर्ती नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में केवल नियुक्ति बाद में होने के आधार पर पुरानी पेंशन का लाभ नहीं रोका जा सकता।

    अनुकंपा नियुक्तियों में भी रास्ता साफ
    चौथी श्रेणी में अनुकंपा और एक्स-ग्रेशिया आधार पर नियुक्त कर्मचारी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी की मृत्यु और अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा या आवेदन 28 अक्टूबर 2005 से पहले शुरू हो चुका था, तो बाद में हुई औपचारिक नियुक्ति के कारण उसे पुरानी पेंशन योजना से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसे पात्र कर्मचारियों को आठ मई 2023 के कार्यालय ज्ञापन के तहत ओपीएस का लाभ देने का रास्ता साफ किया गया है।

  • 30 सितंबर 2026 तक रिटायर्ड कर्मचारी चुन सकेंगे पुरानी पेंशन योजना का विकल्प

    30 सितंबर 2026 तक रिटायर्ड कर्मचारी चुन सकेंगे पुरानी पेंशन योजना का विकल्प

    जयपुर
    राजस्थान सरकार ने पेंशन योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। वित्त विभाग द्वारा जारी नए परिपत्र के अनुसार, 1 जनवरी 2004 से 31 मार्च 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को अब नई पेंशन योजना (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को चुनने का एक और अंतिम अवसर प्रदान किया गया है।

    बता दें कि वित्त विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इस विकल्प को चुनने की अंतिम समय सीमा 30 सितंबर 2026 निर्धारित की है। इसके पश्चात किसी भी परिस्थिति में कर्मचारियों का आवेदन या ओपीएस चुनने का विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, सरकार ने यह भी साफ किया है कि वर्तमान में सेवारत कर्मचारी पहले की तरह ही ओपीएस के दायरे में बने रहेंगे।

    क्या हैं प्रमुख शर्तें और नियम?
    यह छूट विशेष रूप से 1 जनवरी 2004 से 31 मार्च 2022 की अवधि के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों पर ही लागू होगी।

    जीपीएफ ब्याज दर जमा शर्त: एनपीएस के तहत सेवानिवृत्ति पर प्राप्त हुई राशि को कर्मचारियों को जीपीएफ की ब्याज दरों के समान राशि के साथ सरकारी खाते में वापस जमा कराना होगा।

    पेंशन लाभ की प्रभावी तिथि: निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर राशि जमा कराने वाले पात्र कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2022 से राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के तहत पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

    गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 19 मई 2022 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एनपीएस को समाप्त कर दिया था और 1 अप्रैल 2022 से ओपीएस व्यवस्था को दोबारा लागू कर दिया था। उसी दौरान 31 मार्च 2022 तक रिटायर्ड हुए कर्मचारियों के लिए शर्त रखी गई थी कि एनपीएस फंड वापसी पर ही उन्हें पुरानी पेंशन दी जाएगी।

    कई कर्मचारियों के विकल्प चुनने से चूक जाने के कारण वित्त विभाग ने अब अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है, ताकि सभी पात्र पूर्व कर्मचारी समय रहते अपनी औपचारिकताएं पूरी कर पेंशन का लाभ उठा सकें।