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  • OpenAI का पहला हार्डवेयर लॉन्च, ChatGPT कीबोर्ड के बाद अब आया AI बास्केटबॉल

    OpenAI का पहला हार्डवेयर लॉन्च, ChatGPT कीबोर्ड के बाद अब आया AI बास्केटबॉल

    OpenAI ने इस सप्ताह अपना पहला हार्डवेयर प्रोडक्ट लॉन्च किया है, जो एक मिनी कीबोर्ड है और उसकी कीमत 230 अमेरिकी डॉलर है. इसके साथ ही कंपनी ने एक चैटजीपीटी के ब्रांडनेम के साथ बास्केटबॉल को भी लॉन्च किया है. इसकी जानकारी टेकक्रंच ने अपनी रिपोर्ट में दी है.

    बास्केटबॉल पर लिखा है कि Pause. Play. Promp, जो कंपनी के कैंपेन का हिस्सा है. रिपोर्ट में बताया है कि कंपनी का मकसद लोगों को डिजिटल स्क्रीन से ब्रेक देना और आउटडोर गेम के लिए प्रोत्साहित करना है. हालांकि OpenAI की वेबसाइट पर इस Pause. Play. Prompt कैंपन का कोई जिक्र नहीं है.

    रिपोर्ट के मुताबिक, ChatGPT बास्केटबॉल की कीमत 70 डॉलर (करीब 6,756 रुपये) है, यानी GPT-5 के लगभग 5.6 करोड़ इनपुट टोकन के बराबर है. यह बास्केटबॉल असल में  100 परसेंट रबर से तैयार की गई है, जो मौसम की मार भी झेल सकती है.

    स्क्रीन टाइम घटाना चाहिए
    यहां सिर्फ ओपनएआई ही नहीं है, जो चाहती है कि लोगों को अपना स्क्रीन टाइम घटाना चाहिए और घर के बाहर निकलकर गेम खेलना चाहिए. दुनिया में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर के अलावा और भी टेक कंपनियां हैं, जो चाहती हैं कि लोगों को स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए.

    मोबाइल मैन्युफैक्चरर भी देते हैं खास फीचर
    आज के समय में बहुत से मोबाइल मैन्युफैक्चरर ये बताते हैं कि पूरे दिन में उन्होंने कितने समय तक मोबाइल देखा है. इसमें यूट्यूब, सोशल मीडिया ऐप और वॉट्सऐप आदि की जानकारी देते हैं.

    गूगल प्ले स्टोर पर कुछ ऐप्स भी मौजूद
    डिजिटल डिटॉक्स या स्मार्टफोन से कुछ देर के लिए दूरी बनाने के लिए ऐप्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. गूगल प्ले स्टोर पर कुछ खास ऐप्स मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल करके स्मार्टफोन बार-बार चेक करने की आदत को दूर किया जा सकता है.

    नोटिफिकेशन्स को ऑफ कर दें
    स्मार्टफोन को बार-बार चेक करने की आदत को खत्म करना चाहते हैं, तो मोबाइल पर आने वाले नोटिफिकेशन्स पर कंट्रोल करना होगा. स्मार्टफोन की बढ़ती लत को कम करने के लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आने वाले नोटिफिकेशन्स को ऑफ करना होगा.  
     

  • OpenAI ने लॉन्च किए नए AI मॉडल, ChatGPT अब करेगा ज्यादा नेचुरल बातचीत

    OpenAI ने लॉन्च किए नए AI मॉडल, ChatGPT अब करेगा ज्यादा नेचुरल बातचीत

    चैटजीपीटी मेकर OpenAI ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है. कंपनी ने अब अपने न्यू कन्वर्सेशनल AI मॉडल GPT-Live-1 और GPT-Live-1 mini को लॉन्च कर दिया है.  कंपनी ने बताया है कि अब चैटजीपीटी ज्यादा नेचुरल तरीके से कन्वर्सेशन कर पाएगा. ये जानकारी टेक क्रंच ने अपनी रिपोर्ट में दी है. हिंदी ट्रांसलेशन में यह मॉडल थोड़ा कमजोर नजर आता है.

    कंपनी ने बताया कि नए मॉडल उन परेशानियों को दूर करेंगे, जिनकी वजह से यूजर्स को परेशानी हो रही थी. AI यूजर की बात पूरी होने से पहले ही जवाब देना शुरू कर देता था या मुश्किल सवालों के सही जवाब नहीं दे पाता था.

    अब नया वॉयस मोड आ गया है, जो बातचीत जारी रखते हुए जरूरत पड़ने पर GPT-5.5 जैसे मॉडल का भी इस्तेमाल कर सकेगा. अब लेटेस्ट मॉडल का इस्तेमाल सर्च, रीजनिंग और एजेंटिक टास्क के लिए किया जाएगा.

    डेमो के दौरान दिखाई दी कमजोर हिंदी
    वॉयस मोड अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है. डेमो के दौरान जब कंपनी ने हिंदी में लाइव ट्रांसलेशन फीचर दिखाया, तो AI असिस्टेंट की आवाज़ में अमेरिकी लहजा साफ सुनाई दिया.  हिंदी काफी अप्राकृतिक और थोड़ी किताबी भाषा लगी.

    दो नए AI मॉडल लॉन्च हुए
    OpenAI ने नए कन्वर्सेशनल AI मॉडल GPT-Live-1 और GPT-Live-1 mini लॉन्च किए हैं. कंपनी ने दावा किया है कि ये मॉडल पहले के मुकाबले ज्यादा नेचुरल आवाज में बात करने की काबिलियत रखते हैं. साथ ही उस बातचीत में पूछे गए सवालों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और उनका जवाब भी दे सकते हैं.

    फुल-डुप्लेक्स मॉडल
    कंपनी ने बताया है कि ये फुल-डुप्लेक्स मॉडल हैं, जिसका मतलब है कि ये एक साथ सुन सकते हैं और बोल भी सकते हैं. फुल-डुप्लेक्स इंसानों की तरह नेचुरल बातचीत कर सकती है. इससे यूजर बीच में बात काटकर सवाल पूछ सकते हैं साथ ही लाइव ट्रांसलेशन जैसे फीचर्स को भी बेहतर तरीके से कंप्लीट कर सकते हें.

    अब डिफॉल्ट रूप से रिप्लेस होगा
    OpenAI ने ऐलान किया है कि चैटजीपीटी का मौजूदा एडवांस्ड वॉयस मोड अब डिफॉल्ट रूप से न्यू मॉडल GPT-Live-1 mini से रिप्लेस किया जाएगा. वहीं, पेड सब्सक्रिप्शन वाले यूजर्स को ज्यादा पावरफुल GPT-Live-1 मॉडल का एक्सेस मिलेगा.

    OpenAI ने डेमो के दौरान दिखाया कि नया मॉडल लंबे समय तक बिना बोले बातचीत का संदर्भ समझ सकता है और जरूरत पड़ने पर ही जवाब देता है. न्यू GPT मॉडल से जुड़े होने के कारण यह कुछ जानकारियों को विजुअल फॉर्मेट में भी दिखाने के काबिलियत रखता है.

    OpenAI ने बताया है कि ChatGPT के नए वॉयस मोड को खासकर लंबी बातचीत के लिए तैयार किया गया है. कंपनी ने बताया है कि भविष्य में वॉयस कंप्यूटिंग का जरूरी इटरफेस बन सकती है.

  • एलॉन मस्क vs सैम ऑल्टमैन: OpenAI को लेकर कोर्ट में हाई-प्रोफाइल जंग शुरू

    एलॉन मस्क vs सैम ऑल्टमैन: OpenAI को लेकर कोर्ट में हाई-प्रोफाइल जंग शुरू

    दुनिया की सबसे बड़ी टेक लड़ाइयों में से एक अब कोर्ट तक पहुंच चुकी है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और AI के धुरंधर सैम ऑल्टमैन आमने-सामने हैं. मामला सिर्फ दो बड़े नामों का नहीं है, बल्कि AI की दुनिया का डायरेक्शन तय करने वाली इस लड़ाई पर पूरी दुनिया की नजर है.

    अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल में एलॉन मस्क खुद गवाही देने कोर्ट पहुंचे. उन्होंने OpenAI पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मस्क का कहना है कि जिस मकसद से OpenAI की शुरुआत हुई थी, उसे पूरी तरह बदल दिया गया है. यहां तक की चैरिटी लूटने तक का आरोप लगा दिया.

    एलॉन मस्क ने ये भी बताया है कि उन्होंने ही कंपनी का नाम रखा था. इसके पीछे की कहानी बताई है. कहा है कि Open नाम इसलिए रखा गया था, क्योंकि इसे ओपन सोर्स रखने का मकसद था, गूगल की तरह इसे क्लोज सोर्स नहीं रखना था.

    कहां से शुरू हुई कहानी
    यह कहानी 2015 से शुरू होती है, जब एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन ने मिलकर OpenAI की शुरुआत की थी. उस समय इसे एक नॉन-प्रॉफिट संस्था के तौर पर बनाया गया था. मकसद AI को सुरक्षित और इंसानों के हित में डेवेलेप करना था. मस्क ने इस प्रोजेक्ट को फंड भी किया और इसे एक मानवता के लिए AI पहल बताया गया. लेकिन समय के साथ चीजें बदलने लगीं.

    अब आरोप क्या हैं
    एलॉन मस्क का आरोप है कि OpenAI ने अपने असली मकसद से धोखा किया. उनका कहना है कि कंपनी अब एक प्रॉफिट कमाने वाली कंपनी बन गई है, जबकि शुरुआत में इसे गैर-लाभकारी संस्था के रूप में बनाया गया था.

    मस्क ने कोर्ट में कहा कि उन्हें यह सोचकर इन्वेस्ट करने को कहा गया था कि OpenAI मानवता के लिए काम करेगा, लेकिन बाद में इसे एक बिजनेस में बदल दिया गया. उन्होंने यहां तक कहा कि यह चैरिटी को लूटने जैसा है और कंपनी ने अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह हटकर काम किया.

    कितना बड़ा है मामला
    यह सिर्फ एक सामान्य केस नहीं है. एलॉन मस्क इस केस में अरबों डॉलर का मुआवजा मांग रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रकम 130 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकती है.

    अगर कोर्ट एलॉन मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो इससे OpenAI के काम करना का तरीका पूरी तरह से बदल सकता है. यहां तक कि कंपनी को फिर से नॉन-प्रॉफिट मॉडल में वापस लाने की मांग भी की गई है.

    इस पूरे केस को और बड़ा बनाता है इसमें दांव पर लगी रकम. मस्क ने OpenAI के खिलाफ करीब 100 अरब डॉलर से ज्यादा के नुकसान का दावा किया है. उनका कहना है कि उन्हें जिस मकसद के लिए निवेश करने को कहा गया था, वह पूरी तरह बदल दिया गया और इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ.

    अगर कोर्ट एलॉन मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो यह टेक इंडस्ट्री के इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक बन सकता है.

    OpenAI का जवाब क्या है
    दूसरी तरफ OpenAI और सैम ऑल्टमैन ने इन आरोपों को खारिज किया है. कंपनी का कहना है कि मस्क का असली मकसद प्रतिस्पर्धा है. OpenAI का तर्क है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में टिके रहने के लिए फंडिंग और प्रॉफिट मॉडल जरूरी था. खासकर गूगल और दूसरी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा.

    कंपनी यह भी कह रही है कि मस्क खुद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI चला रहे हैं, इसलिए यह मामला कंपटीशन से भी जुड़ा हुआ है.

    कोर्ट में क्या हुआ अब तक
    ट्रायल के दौरान एलॉन मस्क ने खुद गवाही दी और ओपनAI के शुरुआती दिनों की कहानी बताई. उन्होंने कहा कि OpenAI एक ओपन और सुरक्षित AI बनाने के लिए शुरू किया गया था, उन्होंने गूगल के साथ AI रेस और उस समय के अंदरूनी फैसलों का भी जिक्र किया.

    वहीं, कोर्ट में यह भी सामने आया कि यह मामला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि पर्सनल भी बन चुका है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह लड़ाई अब दो नेताओं के बीच की टकराव जैसी दिख रही है.

    AI की दुनिया पर क्या असर पड़ेगा
    यह केस सिर्फ मस्क और ऑल्टमैन तक सीमित नहीं है. इसका असर पूरी AI इंडस्ट्री पर पड़ सकता है. अगर मस्क जीतते हैं, तो AI कंपनियों पर ज्यादा नियम और ट्रांसपेरेंसी का दबाव बढ़ सकता है. वहीं अगर OpenAI जीतता है, तो यह साबित होगा कि AI को आगे बढ़ाने के लिए प्रॉफिट मॉडल जरूरी है.

    दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर
    एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन कभी साथ काम करते थे. लेकिन आज वही दो लोग कोर्ट में आमने-सामने खड़े हैं. यह लड़ाई सिर्फ पैसे की नहीं है, बल्कि इस बात की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फ्यूचर कैसा होगा. क्या यह मानवता के लिए काम करेगा या कंपनियों के मुनाफे के लिए?

    इस पूरे मामले से एक बात साफ है. AI जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके आसपास विवाद भी बढ़ रहे हैं. एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन की यह लड़ाई आने वाले समय में यह तय कर सकती है कि AI का रास्ता कौन तय करेगा, टेक्नोलॉजी या बिजनेस.