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  • संपत्ति विवाद में नया मोड़, पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा राणा के बयान आज

    संपत्ति विवाद में नया मोड़, पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा राणा के बयान आज

    ग्वालियर
     सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में बुधवार को सुनवाई होगी। पिछले गुरूवार को यह सुनवाई नियत थी लेकिन जिला कोर्ट में तिथि आगे बढ़ गई। फिलहाल यह पूरा मामला समझौते पर हस्ताक्षर की वैधता पर केंद्रित है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सुनवाई चल रही है।

    इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज किए जाने हैं। प्रतिमा ने आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए थे। अब उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य भी पेश करने होंगे।

    प्रतिमा राणा ने अदालत में आवेदन देकर समझौता प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराए।

    पक्ष रखने का अवसर दिया
    अदालत ने उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए पक्ष रखने का अवसर दिया है। इससे पहले 14 अक्टूबर को हुई सुनवाई में भी प्रतिमा के साक्ष्य दर्ज कराने के मुद्दे पर विचार किया गया था। प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राणा की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि सहमति से हस्ताक्षर हुए, हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए।

    आपसी सहमति से तैयार हुए जिस समझौता प्रस्ताव (राजीनामे) पर कोर्ट के फैसले की उम्मीद लगाई जा रही थी, अब वह पूरी तरह प्रतिमा राणा की आपत्ति पर टिक गया है।

    अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में आज (बुधवार, 04 नवंबर) इस हाई-प्रोफाइल केस की अहम सुनवाई है। सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ (दिवंगत पद्मावती राजे) की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज होंगे।

    प्रतिमा राणा ने आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी करके समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। कोर्ट ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का मौका दिया है।

    डिनर हुआ, फोटो खिंचे: मौसियों ने खारिज किए धोखाधड़ी के आरोप
    प्रतिमा देवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत अपनी तीनों मौसियों जिनमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे पर धोखे से दस्तखत कराने का सीधा आरोप लगाया है।

    दूसरी ओर, तीनों मौसियों (वसुंधरा, यशोधरा व उषा राजे) ने अदालत में जवाब दाखिल कर इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि सभी की सहमति से हस्ताक्षर हुए थे।

    दस्तखत के बाद सभी लोग साथ रुके, फैमिली डिनर हुआ और तस्वीरें भी खिंचवाई गईं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष ने भी कोर्ट को बताया कि दस्तखत पूरी सहमति से हुए हैं और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है।

    पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरे समझौते की चाबी प्रतिमा के पास
    गौरतलब है कि वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हक मांगने के लिए सिविल सूट दायर किया था।

    पहले केस का पुराना मोड़
    इस मूल केस में बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटियों (कनिका देवी और प्रतिमा देवी) को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन कोर्ट में हाजिर न होने पर उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया गया था।

    अब वर्तमान स्थिति
    अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में अर्जी देकर दोबारा प्रक्रिया में शामिल होने की गुहार लगाई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, ऐसे में उनकी बेटियों को नजरअंदाज कर किया गया राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।

    78 साल पुराना 'द कोवेनेंट' तय करेगा फैसला
    ग्वालियर की अदालती जंग में अब 78 साल पुराना ऐतिहासिक विलय पत्र यानी ‘द कोवेनेंट’ सबसे बड़ा और निर्णायक दस्तावेज बनकर उभरा है। दिल्ली के नोटरी से सर्टिफाइड इस दस्तावेज की ट्रू कॉपी कोर्ट में पेश की जा चुकी है।

    इसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और पूर्व राजाओं को मिलने वाले टैक्स-फ्री ‘प्रिवी पर्स’ (वार्षिक भत्ते) का पाई-पाई का ब्योरा दर्ज है। अब देखना होगा कि आज प्रतिमा राणा के बयानों और सबूतों के बाद इस ₹41,000 करोड़ के साम्राज्य का विवाद क्या मोड़ लेता है।

  • सिंधिया परिवार की संपत्ति विवाद में नया मोड़, प्रतिमा देवी ने लगाए धोखे से हस्ताक्षर कराने के आरोप

    सिंधिया परिवार की संपत्ति विवाद में नया मोड़, प्रतिमा देवी ने लगाए धोखे से हस्ताक्षर कराने के आरोप

     ग्वालियर
    देश के बड़े राजघरानों में शामिल मध्यप्रदेश के ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) कानूनी अड़चनों में फंस गया है। गुरुवार (29 अक्टूबर 2026) को ग्वालियर में अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति लगाने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पदमाराजे की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज होने थे लेकिन जज के छुट्टी पर होने के कारण सुनवाई टल गई और अब 4 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

    प्रतिमा देवी ने अपने हक के लिए खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
    वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने सिंधिया राजघराने की संपत्ति में अपने हिस्से के लिए सिविल वाद दायर किया था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर राजीनामा अदालत में पेश किया गया। मूल वाद में पद्मावती राजे की दोनों बेटियों प्रतिमा देवी राणा और कनिका देवी सिंह को पक्षकार बनाया गया था, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उन्हें एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया था। इसके बाद प्रतिमा देवी राणा ने अदालत में आवेदन देकर कहा है कि उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए और संपत्ति में अपने वैधानिक अधिकार पर विचार किया जाए। इतना ही नहीं प्रतिमा देवी ने ये भी आरोप लगाया है कि समझौता प्रस्ताव पर सहमति के हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए गए हैं।

    ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी हैं प्रतिमा देवी
    प्रतिमा देवी राणा केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी हैं। पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के राज परिवार में हुआ था। उनकी दो बेटियां प्रतिमा देवी राणा और कनिका देवी सिंह हैं। सिंधिया राजघराने की संपत्ति के बंटवारे के आपसी सहमति से तैयार संपत्ति समझौते में इन दोनों को शामिल नहीं किए जाने पर प्रतिमा देवी ने आपत्ति दर्ज कराई थी।

    राजमाता के समय से चल रहा संपत्ति विवाद
    दरअसल सिंधिया राजपरिवार के बीच राजमाता के समय से संपत्ति विवाद चल रहा है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया की बुआओं ने संपत्ति पर अपना अधिकार जताया है, जबकि सिंधिया का विरोध है कि उनके यहां राजा की गद्दी का कानून चलता है और संपत्ति पर राजा का अधिकार रहता है। इसके चलते बंटवारे के विवाद जिला न्यायालय में पहुंचा। ऊषा राजे, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे ने वर्ष 2010 में संपत्ति के विवाद को लेकर न्यायालय में एक वाद पत्र पेश किया। उनकी ओर से कहा गया कि पिता की संपत्ति में बेटियों का बराबर का हक है, इसलिए उन्हें भी संपत्ति में हिस्सा दिया जाए। एक अन्य वाद पत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी बुआओं के खिलाफ पेश किया है। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

    महल की ये कोठियां और संपत्ति समझौते के दायरे में..

        जय विलास पैलेस 12.40 लाख वर्गफीट में फैला है। जय विलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, छोटी विश्रांति, रानी महल शामिल हैं।

        स्वतंत्रता के समय सिंधिया परिवार के पास 100 से अधिक कंपनियों में शेयर थे। ग्वालियर में विशाल जय विलास पैलेस परिसर। शिवपुरी में माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल जैसी संपत्तियां हैं। उज्जैन में कालियादेह पैलेस भी है। दिल्ली में, परिवार के पास ग्वालियर हाउस, राजपुर रोड पर एक प्लॉट और सिंधिया विला है। पुणे में पद्म विलास पैलेस, वाराणसी में सिंधिया घाट और गोवा में विठोबा मंदिर आदि संपत्तियां है।

        कई जिलों में कृषि भूमि, शहरी भूखंड, ट्रस्ट और अन्य परिसंपत्तियां भी बताई जाती हैं। स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार, अधिग्रहण और विभाजन के कारण इन संपत्तियों का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है।

        ग्वालियर रियासत ब्रिटिश काल की सबसे बड़ी और समृद्ध रियासतों में गिनी जाती थी।

  • ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद फिर चर्चा में, सिंधिया परिवार के समझौते को धोखाधड़ी बताने वाले आरोपों की होगी जांच

    ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद फिर चर्चा में, सिंधिया परिवार के समझौते को धोखाधड़ी बताने वाले आरोपों की होगी जांच

    ग्वालियर

    सिंधिया राज परिवार की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) हर सुनवाई के साथ कानूनी अड़चनों में फंसता गया है।

    अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में गुरुवार (29 अक्टूबर 2026) को फिर सुनवाई है।

    आज समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति लगाने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पदमाराजे की सुपुत्री प्रतिमा राणा के बयान दर्ज होंगे।

    प्रतिमा देवी ने आरोप लगाया था कि समझौता प्रस्ताव में सहमति पर हस्ताक्षण धोखाधड़ी है। इसी आरोप के बाद केस में हलचल तेज हो गई थी।

    अब प्रतिमा के आवेदन को स्वीकार कर कोर्ट ने उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करने का मौका दिया है। प्रतिमा देवी के गुरुवार को बयान होंगे और उनको अपनी बात को सबित करने के लिए साक्ष्य भी पेश करने होंगे। इससे पहले 14 अक्टूबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने साक्ष्य कराने की बात पर सहमति देते हुए केस को आगे बढ़ाया था।

    एक दूसरे पर लगा चुके हैं धोखाधड़ी का आरोप
    इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद के समझौते पर सात दिन पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना के समझौता आपत्ति आवेदन पर बहस हुई थी।

    प्रतिमा देवी की ओर से कहा गया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। मतलब साफ तौर पर प्रतिमा देवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, वंसुधरा राजे, यशोधरा राजे व ऊषा राजे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया था।

    सहमति से हस्ताक्षर की बात
    प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राणा की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है।

    उनका कहना है कि स​हमति से हस्ताक्षर हुए हैं। हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए।

    सहमति से हुआ समझौता?
    दरअसल संपत्ति विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे, ऊषा राजे और प्रतिमा देवी के बीच समझौता हुआ था. अन्य पक्षों ने कहा था कि समझौता सहमति से हुआ था लेकिन प्रतिमा देवी ने समझौते को धोखाधड़ी बताया। 

    सिंधिया राजघराने में कब शुरू हुआ संपत्ति विवाद?
    बताया जाता है कि सिंधिया राजघराने में संपत्ति विवाद की शुरुआत 80 के दशक में शुरू हुई थी, जब एक तरफ राजमाता विजयाराजे सिंधिया थीं और दूसरी तरफ उनके इकलौते बेटे माधवराव सिंधिया. बाद में जब माधवराव कांग्रेस में चले गए, तो राजमाता ने एक वसीयत बनाई, जिसमें उन्होंने अपने बेटे को अपनी निजी संपत्ति और कई प्रमुख अधिकारों से बेदखल कर दिया. उन्होंने अपनी संपत्तियों को ट्रस्टों में बदला और बेटियों को अहम हिस्सेदार बनाया. माधवराव की मौत के बाद कानूनी लड़ाई की जिम्मेदारी उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाली, तो राजामाता की तरफ से उनकी बेटियां मैदान में आ गईं. इसी तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया अब संपत्ति के लिए अपनी बुआओं से ही जंग कर रहे हैं. उनकी कुल चार बुआ हैं- पद्मावती राजे, ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे. प्रतिमा देवी पद्मावती राजे की बेटी हैं। 

    पहले एकपक्षीय घोषित, अब समझौते पर आपत्ति

    पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ सिविल वाद दायर किया था। लंबे समय तक चले विवाद के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से राजीनामा तैयार कर अदालत में पेश किया। हालांकि, इस समझौते पर अब आपत्तियां सामने आने लगी हैं।

    मूल वाद में दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा राना को भी पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया था। अब प्रतिमा ने दोबारा कार्यवाही में शामिल होने और संपत्ति में अपना हक सुनिश्चित करने के लिए आवेदन दिया है।
    बेटियों की हिस्सेदारी पर भी सवाल

    पद्मावती राजे की संपत्ति में हिस्सेदारी के आधार पर उनकी बेटियों के अधिकार का मुद्दा भी विवाद का अहम पहलू बन गया है। प्रतिमा की आपत्ति और उनके साक्ष्यों के बाद अदालत में पेश राजीनामे की वैधानिकता पर आगे की कार्यवाही की दिशा तय हो सकती है। गुरुवार को होने वाले बयान इस मामले में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

     

    पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरा समझौता इन पर ही टिका
    वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था।

    मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।

    प्रतिमा ने लगाया आवेदन

    अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक पाने की गुहार लगाई है। साथ ही वर्तमान समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को छोड़े जाने से यह राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।

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  • शाही लिबास में देवघर पहुंचे सिंधिया और महाआर्यमन, विजयादशमी पर की पूजा-अर्चना

    शाही लिबास में देवघर पहुंचे सिंधिया और महाआर्यमन, विजयादशमी पर की पूजा-अर्चना

    ग्वालियर
     केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके बेटे महाआर्यमन सिंधिया ने मंगलवार को गोरखी स्थित देवघर में विजयादशमी की परंपरा निभाई। शाही पारंपरिक लिबास में सिंधिया देवघर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे अम्मा महाराज की छत्री पहुंचे। यहां भगवान चक्रधर सहित अन्य मंदिरों में दर्शन किए।

    उन्होंने अपनी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया और माता माधवी राजे सिंधिया को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद कुलदेवी मांढरे की माता मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और फिर दशहरा मैदान में शमी पूजन की परंपरा निभाई।

    महल में राजपरिवार के प्रतीक चिह्नों का पूजन
    विजयादशमी के अवसर पर सिंधिया ने गोरखी स्थित देवघर में पूजा करने के साथ जयविलास पैलेस में राजपरिवार के प्रतीक चिह्नों का भी पूजन किया। शमी पूजन के बाद उन्होंने शहरवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार हमें अच्छाई और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    सरदार परिवारों के बैठने की अलग से व्यवस्था
    पूजन स्थल पर सरदार परिवारों के बैठने की पृथक से व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही नगर के प्रबुद्धजनों के अलावा भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे।

    महल शाही दरबार सजा
    सिंधिया राजघराने की पंरपरा के अनुसार शाम को महल में शाही दरबार भी सजा। जहां सिंधिया ने सरदारों के नगर के प्रबुद्धजनों से भेंट की और शमी पत्तियां देकर एक दूसरे को विजय दशमी की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान परंपरा, आस्था और राजपरिवार की विरासत की झलक देखने को मिली।
    हैरिटेज कार में सवार थे

    पूजन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सिंधिया हैरिटेज कार में सवार में पहुंचे। इस कार पर सिंधिया स्टेट नंबर तीन अंकित था। जो कि सिधिया रियासत काल की स्मृति को ताजा कर रहा था। रियासत काल में सिंधिया राजपरिवार का मुखिया पर हाथी लगे चांदी के औहदे में बैठकर पूजन करने के लिए जाते थे।

     

  • ग्वालियर राजपरिवार संपत्ति विवाद में अहम सुनवाई आज, अंतरिम आवेदन पर फैसला या साक्ष्यों के आधार पर चलेगा केस

    ग्वालियर राजपरिवार संपत्ति विवाद में अहम सुनवाई आज, अंतरिम आवेदन पर फैसला या साक्ष्यों के आधार पर चलेगा केस

    ग्वालियर

    सिंधिया राज परिवार की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गया है।अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में बुधवार (14 अक्टूबर 2026) को अंतरिम आवेदन व आपत्ति आवेदन पर बहस होनी है। सात दिन पहले भी आवेदनों पर बहस हुई थी।

    बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट तय करेगी कि आगे की सुनवाई की दिशा क्या रहेगी। मतलब आज साफ हो जाएगा कि अंतरिम आवेदनों पर आगे की सुनवाई की जाएगी या फिर प्रतिमा देवी की आपत्ति को स्वीकार कर साक्ष्य पर यह सुनवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। बुधवार शाम तक सिंधिया राजघराने की पूरे देश में फैली संपत्ति को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है।

    एक दूसरे पर लगा चुके हैं धोखाधड़ी का आरोप

    इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद के समझौते पर सात दिन पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना के समझौता आपत्ति आवेदन पर बहस हुई थी। प्रतिमा देवी की ओर से कहा गया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। मतलब साफ तौर पर प्रतिमा देवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, वंसुधरा राजे, यशोधरा राजे व ऊषा राजे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया था।

    प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राजे की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि स​हमति से हस्ताक्षर हुए हैं।

    हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए।साथ ही इस धोखाधड़ी के आरोप पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से पक्ष आया था कि हस्ताक्षर सहमति से ही हुए हैं। इसमें कोई भी गड़बड़ी नहीं की गई है।

    पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरा समझौता इन पर ही टिका
    वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था।

    लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।

    पर अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक पाने की गुहार लगाई है। साथ ही वर्तमान समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।

    पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को छोड़े जाने से यह राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।

    सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद

    ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर जिला कोर्ट में चल रही कानूनी जंग अब बेहद दिलचस्प और उलझते मोड़ पर पहुंच गई है।

    इस ऐतिहासिक केस के पटाक्षेप के लिए 78 साल पुराना विलय पत्र यानी ‘द कोवेनेंट’ सबसे अहम दस्तावेज बनकर सामने आया है।

    दिल्ली के नोटरी द्वारा सर्टिफाइड ट्रू कॉपी के रूप में प्रमाणित यह दस्तावेज कोर्ट के सामने आ चुका है, जिसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और राजाओं को मिलने वाले टैक्स फ्री ‘प्रिवी पर्स’ (वार्षिक भत्ते) का पाई-पाई का ब्योरा दर्ज है।

  • सिंधिया ने मंत्रियों के साथ मल्टीलेवल कार पार्किंग का किया निरीक्षण

    सिंधिया ने मंत्रियों के साथ मल्टीलेवल कार पार्किंग का किया निरीक्षण

    केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने राज्य के मंत्रिगणों के साथ मल्टीलेवल कार पार्किंग का किया निरीक्षण 

    पानी निकासी के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी अध्ययन कराया जाए 

    ग्वालियर 
     केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर के प्रमुख केंद्र महाराजा बाड़ा में बन रहे मल्टीलेवल कार पार्किंग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति, निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा विशेष रूप से बेसमेंट-3 में पानी की समस्या और उसकी निकासी की व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर, भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी, सीईओ स्मार्ट सिटी प्रतीक राव सहित जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
        केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि विकास कार्यों में गति जरूरी है, लेकिन गुणवत्ता और निर्माण की सावधानियों से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बेसमेंट-3 में पानी की निकासी के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे विषय का समग्र एवं तकनीकी अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि पानी के आउटलेट और निकासी व्यवस्था का ऐसा स्थायी एवं सुरक्षित समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। उन्होंने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को इस विषय की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
        केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि महाराजा बाड़ा मल्टीलेवल कार पार्किंग ग्वालियर के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकसित की जा रही इस परियोजना से महाराजा बाड़ा क्षेत्र में पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य में आवश्यक गति लाने के साथ गुणवत्ता के उच्च मानकों को बनाए रखने के निर्देश दिए।
        परियोजना के तहत लगभग 77 करोड़ रुपये की लागत से 429 वाहनों की पार्किंग क्षमता विकसित की जा रही है। इसमें 353 चार-पहिया और 76 दो-पहिया वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था होगी।
        केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने निर्देश दिए कि बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर का कार्य जनवरी-फरवरी 2027 तक पूरा करने की दिशा में प्रभावी ढंग से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूर्ण हो सके। उन्होंने कहा कि पानी, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सीधे आमजन के जीवन से जुड़ी हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जा रही राशि का सदुपयोग करते हुए ऐसी सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए, जिनका लाभ लंबे समय तक आम नागरिकों को मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों का अंतिम उद्देश्य जनता की सेवा, बेहतर सुविधाएं और ग्वालियर का सुनियोजित विकास सुनिश्चित करना है। 
     

  • 40 हजार करोड़ की सिंधिया संपत्ति का मामला फिर पहुंचा अदालत, प्रतिमा देवी की याचिका पर होगी सुनवाई

    40 हजार करोड़ की सिंधिया संपत्ति का मामला फिर पहुंचा अदालत, प्रतिमा देवी की याचिका पर होगी सुनवाई

     ग्वालियर
     सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामले में गुरुवार को जिला कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। अदालत में प्रतिमा देवी की ओर से दर्ज आपत्ति और पूर्व में तैयार किए गए समझौते की वैधता पर बहस होनी है।

    वसीयत और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी नहीं दी गई
    पिछली सुनवाई में प्रतिमा देवी अपनी बेटी शिवांगी और दामाद के साथ कोर्ट पहुंची थीं और उन्होंने कहा था कि उन्हें न तो वसीयत की जानकारी दी गई और न ही जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां पद्मावती राजे सिंधिया संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों की अनदेखी कर समझौता नहीं किया जा सकता।

    गलत पते पर नोटिस भेजने का आरोप
    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें नेपाल के गलत पते पर नोटिस भेजे गए, जबकि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं। इसी आधार पर उन्होंने खुद को एकतरफा कार्रवाई से बाहर किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

    अंतिम चरण में आपत्ति उठाने का औचित्य स्पष्ट नहीं
    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से पहले ही प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब पेश किया जा चुका है। इन पक्षों की ओर से कहा गया है कि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी और अंतिम चरण में आपत्ति उठाने का औचित्य स्पष्ट नहीं है। गुरुवार की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों से यह तय होगा कि संपत्ति विवाद के समझौते पर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।

    कौन हैं प्रतिमा देवी और कनिका देवी?
    प्रतिमा देवी और कनिका देवी, ग्वालियर के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की सबसे बड़ी बेटी स्वर्गीय पद्मावती राजे की संतानें हैं.महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की पांच संतानें थीं। 
    त्रिपुरा राजपरिवार से संबंध: पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के तत्कालीन राजपरिवार के महाराजा किरीट बिक्रम किशोर माणिक्य देबबर्मा बहादुर से हुआ था. वर्ष 1965 में कम उम्र में ही पद्मावती राजे का निधन हो गया था। 

    कौन हैं प्रतिमा देवी और कनिका देवी?
    प्रतिमा देवी और कनिका देवी, ग्वालियर के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की सबसे बड़ी बेटी स्वर्गीय पद्मावती राजे की संतानें हैं.महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की पांच संतानें थीं। 

    त्रिपुरा राजपरिवार से संबंध: पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के तत्कालीन राजपरिवार के महाराजा किरीट बिक्रम किशोर माणिक्य देबबर्मा बहादुर से हुआ था. वर्ष 1965 में कम उम्र में ही पद्मावती राजे का निधन हो गया था। 

    नेपाल के राणा परिवार से जुड़ाव: प्रतिमा देवी का विवाह नेपाल के प्रतिष्ठित राणा परिवार के डॉ. धवल शमशेर राणा से हुआ है। 

    क्या था ‘काबिज़ वही मालिक’ का फॉर्मूला?
    बता दें कि सिंधिया राजघराने की अचल संपत्तियों  जिनमें ग्वालियर का ऐतिहासिक जय विलास पैलेस, मुंबई के सिंधिया हाउस, दिल्ली में सिंधिया की अलग-अलग प्रॉपर्टी सहित देश भर के प्रमुख शहरों में फैली कोठियां और जमीनों की विशाल संपत्तियां शामिल हैं के अधिकार को लेकर विभिन्न अदालतों में करीब 12 मामले लंबित चल रहे हैं। 

    इसी संदर्भ में बीते दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच जो समझौता ड्राफ्ट हुआ था, उसका मुख्य आधार “जो सदस्य जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज है, वही उसका अंतिम मालिक रहेगा” तय किया गया था.इस फॉर्मूले के तहत ग्वालियर के ऐतिहासिक जय विलास पैलेस, शिवपुरी की कोठियों, मुंबई के सिंधिया हाउस और दिल्ली स्थित सिंधिया पॉटरीज की जमीनों के मालिकाना हक का निपटारा होना था। 

    यदि यह समझौता मंजूर हो जाता, तो देश की अलग-अलग अदालतों में लंबित करीब 12 मुकदमे एक साथ खत्म हो जाते. हालांकि इन मुकदमों में से एक में प्रतिमा देवी और कनिका देवी अपनी दिवंगत मां पद्मावती राजे के कानूनी उत्तराधिकार के तहत पहले से ही पक्षकार हैं. हालांकि जिस 40 हजार करोड़ रुपये के संपत्तियों के राजीनामे का प्रारूप तैयार किया गया था, उसमें पद्मावती राजे के वारिसों को शामिल नहीं किया गया था. इसी कारण दोनों बहनों ने अदालत पहुंचकर समझौते की प्रक्रिया पर रोक लगाने और अपना हिस्सा तय करने की मांग की है.अब अगली सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दशकों पुराना यह शाही संपत्ति विवाद समझौते से सुलझता है या नए कानूनी पचड़े में फंसकर लंबा खींचता है।

     

  • 40 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद में प्रतिमा देवी की एंट्री, बोलीं- न वसीयत मिली, न नोटिस

    40 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद में प्रतिमा देवी की एंट्री, बोलीं- न वसीयत मिली, न नोटिस

    ग्वालियर
     सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ प्रतिमा देवी पहली बार अपनी बेटी शिवांगी और दामाद के साथ जिला न्यायालय पहुंचीं। करीब डेढ़ घंटे तक अदालत में मौजूद रहीं प्रतिमा देवी ने न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें न तो वसीयत की जानकारी दी गई और न ही जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।

    प्रतिमा देवी ने कहा कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वसीयत की प्रति भी उनके पास नहीं है। उन्होंने मुंबई की एक अदालत में उपलब्ध वसीयत की कॉपी का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी के माध्यम से उन्हें कुछ जानकारी मिल सकी। उन्होंने संपत्ति में बराबर का अधिकार दिए जाने की मांग भी अदालत के समक्ष रखी।

    प्रतिमा देवी ने नोटिस को लेकर उठाए सवाल
    प्रतिमा देवी ने नोटिस को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि उन्हें नेपाल के नेपालगंज पते पर नोटिस भेजे गए, जबकि उनका निवास काठमांडू में है। इस वजह से उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला और उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया गया। उन्होंने अपनी छोटी बहनों का भी जिक्र करते हुए कहा कि वे भी अपनी मां के हिस्से पर दावा कर रही हैं। यहां बता दें कि प्रतिमा देवी सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्माराजे की बेटी हैं।

    नेपाल के पते पर नोटिस भेजने पर भी आपत्ति
    प्रतिमा देवी ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मामले से जुड़े नोटिस कभी प्राप्त नहीं हुए। उनके मुताबिक नोटिस नेपालगंज के ऐसे पते पर भेजे गए, जहां वह रहती ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं और उनका निवास पशुपतिनाथ मंदिर के पास है।

    उन्होंने अपनी तीन छोटी बहनों का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तराधिकार से जुड़े सभी पक्षों को उचित तरीके से सूचना दिए बिना संपत्ति के मामले में समझौता नहीं किया जा सकता। प्रतिमा देवी ने खुद को एक्स पार्टी बनाए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

    अधिवक्ता ने मांगा समय 
    प्रतिमा देवी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत से विस्तृत बहस के लिए समय मांगा। न्यायालय ने आवेदन स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 तय की है। इस दिन प्रतिमा देवी की आपत्ति और संपत्ति विवाद के समाधान के लिए तैयार किए गए समझौते की वैधता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बहस होने की संभावना है।

    वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ एवं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे की ओर से भी अधिवक्ता अदालत पहुंचे। उनके वकीलों ने भी अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा।

    बंटवारे में शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति
    बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच संपत्तियों के बंटवारे का विवाद चल रहा है। सभी पक्षों के बीच बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी थी। सिंधिया परिवार की संपत्तियों के बंटवारे के लिए हुए आपसी समझौते (आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट) में प्रतिमा देवी को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले में कानूनी विवाद बढ़ गया।

    10 सितंबर को अगली सुनवाई
    पिछली सुनवाई पर प्रतिमा देवी के आवेदन पर सभी पक्षों ने जवाब पेश कर दिए थे। मंगलवार को इन आवेदनों पर बहस होनी थी, लेकिन सभी पक्ष बहस के लिए तैयार नहीं थे। इसके चलते बहस नहीं हो सकी। अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। ज्ञात हो कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से प्रतिमा देवी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग भी की गई है। इन आवेदनों पर भी अगली सुनवाई में बहस होगी।

    पिछली सुनवाई में ये हुआ था
    वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया था कि बंटवारे की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी की मौजूदगी और उनकी लिखित सहमति रिकॉर्ड में है, दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर भी हैं। बंटवारे के दौरान हस्ताक्षर किए जाने का फोटो भी कोर्ट में पेश किया गया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी जवाब पेश किया जा चुका है, जिसमें कहा गया है कि बंटवारा कानून के तहत हुआ है।

    पहले की सहमति पर भी उठे थे सवाल
    इससे पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब अदालत में पेश किया गया था। जवाब में कहा गया था कि यदि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी और खुद को प्रक्रिया से अलग रखा था, तो अंतिम चरण में आपत्ति दर्ज कराने का औचित्य क्या है।

    पिछली सुनवाई में बंद लिफाफे में दस्तावेज पेश किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि सभी पक्षों को सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और आगे से दस्तावेज बंद लिफाफे में पेश नहीं किए जाएं।

    मां के हिस्से का हवाला देकर मांगा अधिकार
    प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां दिवंगत पद्मावती राजे, जो राजमाता विजयाराजे सिंधिया की सबसे बड़ी पुत्री थीं, संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों की अनदेखी कर किया गया कोई समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद सिंधिया राजघराने की विशाल संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर पेचीदा हो गई है। अब 10 सितंबर की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत उनकी आपत्तियों और समझौते की वैधता को लेकर आगे किस दिशा में बढ़ती है।