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  • ‘महिलाएं और अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं’, शेख हसीना ने बांग्लादेश पर जताई चिंता

    ‘महिलाएं और अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं’, शेख हसीना ने बांग्लादेश पर जताई चिंता

    ढाका 
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश के मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में राजनीतिक उत्पीड़न बढ़ रहा है. महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा खतरे में है. धार्मिक अल्पसंख्यकों, पत्रकारों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को भी डराया जा रहा है। 

    दरअसल, हसीना ने फिनलैंड की आल्टो यूनिवर्सिटी में एक ऑनलाइन ऑडियो संबोधन दिया. इसका आयोजन ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस ने किया था. इस दौरान उन्होंने अगस्त 2024 में अपनी सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में हुए बदलावों पर सवाल उठाए। 

    महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

     

    शेख हसीना ने एक मानवाधिकार रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि जुलाई से सितंबर के बीच 253 महिलाओं और लड़कियों के साथ रेप हुआ. इनमें 154 बच्चियां शामिल थीं. उन्होंने दावा किया कि रेप की 12 पीड़िताओं की हत्या भी कर दी गई. उन्होंने यह भी कहा कि मार्च से अब तक खसरे से 1,250 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है. वहीं फैक्ट्रियां बंद होने, बेरोजगारी, वसूली और हिंसा के कारण आम लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। 

    इस दौरान शेख हसीना ने अपनी सरकार के कामकाज का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में बांग्लादेश में गरीबी की दर 41 फीसदी से घटकर 18.6 फीसदी हो गई थी. उन्होंने करीब 14 हजार सामुदायिक क्लीनिक बनाए जाने की बात कही. साथ ही महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में हुए सुधारों को अपनी सरकार की उपलब्धि बताया। 

    हसीना ने 1997 के चटगांव हिल ट्रैक्ट्स शांति समझौते और 2017 में रोहिंग्या शरणार्थियों को बांग्लादेश में जगह देने के फैसले का भी जिक्र किया। 

    कट्टरपंथी संगठनों के बढ़ते प्रभाव पर जताई चिंता
    पूर्व प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकवाद के खिलाफ काम करने वाले अनुभवी अधिकारियों को मुकदमों और जेल का सामना करना पड़ा है. हसीना ने चेतावनी दी कि ऐसे घटनाक्रम बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष पहचान और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। 

    शेख हसीना ने दावा किया कि अवामी लीग के हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है. कई लोगों पर हमले हुए हैं, जबकि कुछ को छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा है. उन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों, पत्रकारों, स्वतंत्रता सेनानियों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया. हसीना ने यह भी कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए AI से बनाई गई तस्वीरों, फर्जी खबरों और स्कूल की पाठ्यपुस्तकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

    जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा की जांच पर सवाल
    हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 में हुई हिंसा के दौरान निर्दोष लोगों की हत्या का आदेश देने के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 18 जुलाई 2024 को न्यायिक जांच आयोग बनाया था. 1 अगस्त को इसका दायरा बढ़ाया गया था. उन्होंने पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर सत्ता संभालने के बाद जांच रोकने का आरोप लगाया. यूनुस अगस्त 2024 से फरवरी 2026 तक अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे थे। 

    हसीना ने सवाल उठाया कि आंदोलन में शामिल लोगों को कानूनी सुरक्षा क्यों दी गई, जबकि उनके और अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ हत्या के मामले दर्ज किए गए. उन्होंने हिंसा, मौतों, आगजनी और तोड़फोड़ की स्वतंत्र जांच की मांग की। 

    UN और EU से दखल देने की अपील
    शेख हसीना ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, लोकतांत्रिक देशों की सरकारों और मानवाधिकार संगठनों से बांग्लादेश के हालात पर ध्यान देने की अपील की. उन्होंने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और अवामी लीग पर लगी पाबंदियां हटाने की मांग की. साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी, अल्पसंख्यकों को समान सुरक्षा और समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की बात कही. हसीना ने हिंसक कट्टरपंथ के खिलाफ कार्रवाई और स्वतंत्र न्याय व्यवस्था की भी मांग की। 

  • शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी पर बड़ा सवाल, खुद लौटेंगी या भारत करेगा प्रत्यर्पण? जानें पूरा मामला

    शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी पर बड़ा सवाल, खुद लौटेंगी या भारत करेगा प्रत्यर्पण? जानें पूरा मामला

    नई दिल्ली

    भारत में शरण पाईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। उन्होंने ही दिसंबर में अपने मुल्क लौटने की संभावनाएं जताई हैं। खास बात है कि उन्होंने ये ऐलान ऐसे समय पर किया है, जब ढाका ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। शेख हसीना के आरोप हैं कि ये सजा राजनीति से प्रेरित है और उन्हें अपने बचाव का मौका नहीं मिला। शेख हसीना ने यह भी साफ किया है कि वह बांग्लादेश लौटने का फैसला उन्होंने खुद किया है।

    न्यूज18 से बातचीत में जब पूछा गया कि आपको वापस लौटने पर फांसी दी जा सकती, क्या आप इसे लेकर चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे अपनी जिंदगी की कोई चिंता नहीं है। मैंने कई बार मौत का सामना किया है। मुझे चिंता न्याय के खत्म होने की है। मुझे चिंता इस बात की है कि अदालतों, कानूनों और संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना के लिए किया जा रहा है।'

    फांसी की सजा मानने से इनकार
    उन्होंने कहा, 'राजनीति से प्रेरित प्रक्रिया के जरिए सुनाई गई मौत की सजा को आखिरी बात नहीं माना जा सकता। मुझे अपना बचाव करने का सही मौका नहीं दिया गया। आरोपी के शामिल हुए बगैर, उचित बचाव के बिना और राजनीतिक दबाव में सुनाया गया फैसला न्याय नहीं है।'

    उन्होंने कहा, 'जिस कानून का इस्तेमाल अब मेरे खिलाफ किया जा रहा है, उसे मेरे कार्यकाल के दौरान 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया था। अगर अधिकारी सच में न्याय में यकीन रखते हैं, तो उन्हें एक स्वतंत्र प्रक्रिया की अनुमति देनी चाहिए। मुझे अदालत के सामने पेश होने दें। मुझे सबूत पेश करने दें। मेरे वकीलों को मेरा बचाव करने दें। गवाहों के बयान होने दें। सबूतों को सामने आने दें।'

    न्याय का मतलब सजा नहीं
    उन्होंने कहा, 'मैं बस वही उम्मीद करती हूं जिसकी गारंटी संविधान और कानून हर नागरिक को देते हैं। व्यक्तिगत सुरक्षा, वकीलों तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, निष्पक्ष अदालत, कार्यवाही और सुनवाई।' उन्होंने कहा के ये राजनीतिक शर्तें नहीं हैं, बल्कि कानून की बुनियादी जरूरते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार कहती है कि आओ और न्याय का सामना करो, तो मैं कहूंगी कि मैं आने के लिए तैयार हूं। लेकिन न्याय का मतलब न्याय होना चाहिए, पहले से तय सजा नहीं।'

    क्या भारत भेज रहा है वापस
    जब पूछा गया कि क्या उन्होंने वापसी के बारे में भारत से बात की है। उन्होंने वेबसाइट को बताया, 'भारत संप्रभु है और मैं उसकी सरकार की ओर से कोई बात नहीं करूंगी। मेरी समझ यह है कि भारत एक कानूनी मामले की तरह प्रत्यर्पण पर काम कर रहा है। यह भारत का मामला है।' उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा बांग्लादेश के साथ भारत की दोस्ती को अहमियत दी है, लेकिन वापस बांग्लादेश लौटने का फैसला मेरा अपना है। भारत दोस्त है, लेकिन बांग्लादेश मेरा घर है। मैं अनिश्चितकाल तक अपने देश से बाहर नहीं रह सकती।'

    अगस्त में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का फैसला कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था, 'मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।'

  • Sheikh Hasina Press Conference: दिल्ली से दिए बयान के बाद बांग्लादेश में मचा सियासी बवाल, मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया

    Sheikh Hasina Press Conference: दिल्ली से दिए बयान के बाद बांग्लादेश में मचा सियासी बवाल, मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया

    ढाका 

    दिल्ली में बुधवार को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश में दो तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली. एक तरफ अवामी लीग समर्थकों ने फिर से वापसी की उम्मीद देखनी शुरू की, तो दूसरी तरफ हसीना और अवामी लीग के विरोधियों की नाराजगी भी तेज हो गई. इसी बीच बांग्लादेश के क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर रात में बमबाजी और हमला हुआ। 

    इस पूरी घटना से पहले भी ढाका कई दिनों से आपत्ति जता रहा था, लेकिन भारत ने उस पर ध्यान नहीं दिया. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि यह कार्यक्रम एक निजी संस्था की पहल पर हुआ और इसमें सरकार किसी भी तरह से शामिल नहीं है. मामला पूरी तरह गैर सरकारी है। 

    अब बड़ा सवाल यह है कि शेख हसीना के सार्वजनिक रूप से सामने आने और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस को बांग्लादेशी मीडिया ने कैसे कवर किया. ज्यादातर बांग्लादेशी न्यूज प्लेटफॉर्म्स ने शेख हसीना के बयान से ज्यादा बीएनपी सरकार की नाराजगी को प्रमुखता दी। 

    बांग्लादेशी मीडिया ने शेख हसीना के प्रेस कॉन्फ्रेंस को कैसे कवर किया?
    'बांग्लादेश प्रतिदिन' ने इस आयोजन को नकारात्मक ढंग से पेश किया. अखबार ने मुख्य रूप से बांग्लादेश सरकार के गुस्से को सामने रखा. उसके पहले पन्ने की सुर्खी थी, 'दिल्ली के कार्यक्रम में दंडित हसीना को बयान देने की अनुमति पर नाराज प्रतिक्रिया। 

    दूसरी तरफ, बांग्लादेश के लोकप्रिय अखबार 'प्रथम आलो' ने शेख हसीना के भाषण को कवर ही नहीं किया. उसने शाकिब अल हसन के घर पर हमले की खबर छापी. इस तरह यह दिखाया गया कि दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बांग्लादेश के एक हिस्से में गुस्सा है. 'प्रथम आलो' में हसीना के भाषण पर कोई खबर नजर नहीं आई। 

    'दैनिक इत्तेफाक' ने शेख हसीना के बयान के विरोध में बांग्लादेश में क्या क्या हुआ, इसी पर फोकस रखा. उसने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहउद्दीन अहमद की टिप्पणी को मुख्य खबर बनाया. उनका कहना था, 'अवामी लीग की किस्मत तय करेगी अदालत। 

    इसी रिपोर्ट में अवामी लीग सरकार के पूर्व गृह राज्य मंत्री तंजीम अहमद सोहेल ताज की टिप्पणी भी प्रमुख रही. उन्होंने हसीना को निशाना बनाते हुए कहा, 'अपने कामों की जिम्मेदारी स्वीकार किए बिना पार्टी को भ्रमित किया जा रहा है और देश लौटने का अवास्तविक सपना दिखाया जा रहा है। 

    कई अखबारों ने शेख हसीना के बयान को कवर नहीं किया
    'कालेर कंठ' ने भी ढाका की नाराजगी को ही उभारा. दिल्ली के कार्यक्रम को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया को प्रमुखता दी, जबकि हसीना ने क्या कहा, इस पर कुछ भी प्रकाशित नहीं किया गया. 'जुगांतर' ने भी लगभग यही रास्ता अपनाया. उसने भी 'दैनिक इत्तेफाक' की तरह तंजीम अहमद सोहेल ताज की आलोचना को पहले पन्ने पर जगह दी। 

    अंग्रेजी समाचार माध्यम 'ढाका ट्रिब्यून' ने भी हसीना के बयान की खबर से दूरी बनाई और बीएनपी सरकार के गुस्से को पहले पन्ने की मुख्य खबर के तौर पर छापा. उसने विस्तार से बताया कि हसीना के बयान से बांग्लादेश सरकार नाराज है। 

    शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान
    'बांग्लादेश पोस्ट' ने जमात ए इस्लामी के प्रमुख सॉफिकुर रहमान की चेतावनी को प्रमुखता दी. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह इसी साल दिसंबर में शायद बांग्लादेश लौटेंगी. इसी को लेकर सॉफिकुर रहमान ने कहा कि एक और क्रांति सामने है. यानी उन्होंने जोरदार इशारा दिया कि बांग्लादेश फिर अशांत हो सकता है।