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  • भोपाल AIIMS में ली अंतिम सांस, एक सप्ताह से वेंटिलेटर पर थीं शिवराज सिंह की मां

    भोपाल AIIMS में ली अंतिम सांस, एक सप्ताह से वेंटिलेटर पर थीं शिवराज सिंह की मां

    भोपाल 

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का शुक्रवार सुबह भोपाल स्थित एम्स में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन की खबर से परिवार और शुभचिंतकों में शोक है। स्वर्गीय काशीबाई का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए शुक्रवार सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक भोपाल के 9-बी, साकेत नगर स्थित निवास पर रखा जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके गृह ग्राम जैत, जिला सीहोर ले जाया जाएगा। दोपहर 3 बजे जैत में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 
    काशीबाई के निधन की खबर के बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम निरस्त कर दिए हैं। उन्हें शुक्रवार को रायसेन में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होना था। मां के निधन के चलते अब वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा उनके आगे के सभी कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं।

    बचपन में मां को खो दिया था, पिता ने की थी दूसरी शादी
    शिवराज सिंह चौहान की पहली मां का नाम सुंदरबाई था। बचपन में ही उनका निधन हो गया था। इसके बाद बच्चों की देखभाल और लालन-पालन के लिए उनके पिता प्रेम सिंह चौहान ने काशीबाई से दूसरी शादी की थी। काशीबाई ने परिवार को संभाला और बच्चों का पालन-पोषण किया।

    शिवराज सिंह चौहान के चार भाई-बहन हैं। इनमें नरेंद्र सिंह चौहान, शशि और रोहित सिंह चौहान शामिल हैं। वहीं, काशीबाई के एक बेटे वरुण सिंह चौहान हैं, जो पेशे से वकील हैं।

    काशीबाई भोपाल के साकेत नगर में निवासरत थीं। पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। सांस संबंधी परेशानी बढ़ने पर उन्हें एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया था, जहां एक सप्ताह तक उनका उपचार चला।

    साकेत नगर स्थित आवास पर रखा जाएगा पार्थिव शरीर
    केंद्रीय मंत्री की मां काशी बाई का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए 9 बी, साकेत नगर स्थित आवास पर 11-12 बजे तक रखा जाएगा। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवराज सिंह चौहान के पैतृक गांव जैत ले जाया जाएगा। तीन बजे वहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    कौन हैं काशी बाई
    दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के पिता ने दो शादियां की थीं। कृषि मंत्री की जैविक मां का नाम सुंदरबाई चौहान है। उनका निधन शिवराज सिंह चौहान के बचपन में ही हो गया है। काशी बाई उनकी दूसरी मां हैं। पिता का नाम प्रेम सिंह चौहान है। काशी बाई से एक पुत्र का जन्म हुआ था, जिनका नाम वरुण चौहान है। वहीं, शिराज सिंह चौहान तीन भाई और एक बहन हैं। इनमें शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह, रोहित सिंह और बेटी शशि है। काशी बाई अपने बेटे वरुण चौहान के साथ ही साकेत नगर में रहती थीं।

    कुछ दिन पहले ही आई थी खुशियां
    गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के घर में खुशियां आई थीं। उनकी छोटी बहू ने बेटे को जन्म दिया था। इसके बाद परिवार में खुशी का माहौल था।

    शिवराज के पिता ने किया था दूसरा विवाह
    शिवराज सिंह चौहान की जैविक मां का नाम स्वर्गीय सुंदरबाई चौहान था। उनका निधन शिवराज के बचपन में ही हो गया था। इसके बाद उनके पिता प्रेम सिंह चौहान ने दूसरा विवाह किया था। काशीबाई उनकी दूसरी मां थीं। जानकारी के अनुसार, काशीबाई से एक पुत्र वरुण का जन्म हुआ था। वहीं सुंदरबाई से शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह, रोहित सिंह और बेटी शशि हैं। 

  • कृषि छात्रों की डिग्री बेकार नहीं जाने देंगे; शॉर्ट और लॉन्ग टर्म रोडमैप पर काम करेगी सरकार- शिवराज सिंह

    कृषि छात्रों की डिग्री बेकार नहीं जाने देंगे; शॉर्ट और लॉन्ग टर्म रोडमैप पर काम करेगी सरकार- शिवराज सिंह

    'आप मंथन से अमृत निकालिए, हम लागू करेंगे': एग्रीविज़न सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का ऐलान

    दिल्ली में एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सहभागिता

    किसानों की आजीविका को और बेहतर बनाने के साथ ही भारत अब सिर्फ अपना पेट नहीं भरेगा, दुनिया का 'फूड बास्केट' बनेगा- शिवराज सिंह चौहान

    नई दिल्ली
    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रीशिवराज सिंह चौहान ने आज पूसा, दिल्ली में एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की आजीविका को और बेहतर बनाने के साथ ही भारत अब केवल अपना पेट भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में पूरी दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनकर उभरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में बिना मानक के कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी और इसके नियमन हेतु जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन होगा।

    अभाव के दौर से आत्मनिर्भरता और रिकॉर्ड उत्पादन तक का सफर
    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में देश की कृषि यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि एक दौर वह था जब देश को पीएल-480 के तहत आयातित अनाज पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज भारतीय किसानों के परिश्रम और आधुनिक नीतियों के दम पर देश खाद्यान्न में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ा है। भारत आज चावल उत्पादन और निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं में दूसरे स्थान पर है। अब समस्या उत्पादन की नहीं, बल्कि उसके वैज्ञानिक भंडारण, प्रबंधन और वैश्विक निर्यात की है।

    'आप अमृत निकालिए, हम उसे नीति बनाकर लागू करेंगे'
    श्री चौहान ने नीति-निर्माण में छात्र और किसान संगठनों की विशेषज्ञता को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय किसान संघ जैसे संगठन दिन-रात जमीनी हकीकत के बीच काम करते हैं। उन्होंने अधिवेशन में उपस्थित विशेषज्ञों और छात्रों से आह्वान किया, "आप इस राष्ट्रीय अधिवेशन में गहन मंथन कीजिए और निष्कर्ष रूपी अमृत निकालिए, उसे देशहित में बांटने और लागू करने का काम सरकार करेगी।" उन्होंने घोषणा की कि अधिवेशन के निष्कर्षों पर विस्तृत कार्ययोजना बनाने के लिए वे अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक करेंगे, जिसमें शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं पर सीधा काम होगा।

    कृषि छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना पहली प्राथमिकता
    कृषि शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्रीचौहान ने कहा कि किसी को भी सिर्फ फीस लेकर डिग्री बांटने की दुकान चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि युवाओं द्वारा ली जाने वाली बीएससी (एजी) और एमएससी (एजी) जैसी तकनीकी डिग्रियों का पूरा मान रहे और वे व्यर्थ न जाएं।

    छोटे किसानों के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' मॉडल
    भारत में औसत जोत मात्र 0.96 हेक्टेयर होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) जरूरी है। अनाज के साथ-साथ फल, सब्जी, औषधीय खेती, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती को जोड़कर ही किसानों की आजीविका को सुरक्षित व समृद्ध बनाया जाएगा। साथ ही, आधुनिक तकनीक जैसे एआई, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स को खेती से जोड़ने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।

    कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने एग्रीविज़न के 10 वर्षों के सफर पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन किया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रघुराज किशोर तिवारी, एग्रीविज़न के अखिल भारतीय प्रमुखविक्रम सिंह, राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्रीएस. बालकृष्ण, क्षेत्रीय संगठन मंत्रीघनश्याम शाही, आयोजन सचिवमनीष फाटे, राष्ट्रीय संयोजकसनथ कुमार सहित देशभर से आए कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

     

  • ‘किसानों की जिंदगी बदल रही है’— शिवराज सिंह ने बताए 6 बड़े लाभ, सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

    ‘किसानों की जिंदगी बदल रही है’— शिवराज सिंह ने बताए 6 बड़े लाभ, सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

    भोपाल 

     केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्यप्रदेश के विदिशा से सांसद शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में विकास और परिवर्तन को लेकर बड़ा दावा किया है। शिवराज ने कहा कि एमपी समेत पूरे देश में किसानों को 6 बड़े फायदे मिल रहे है। जिससे उनका जीवन खुशहाल हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ये जानकारी दी है। बताया कि आज का किसान परंपरागत खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर आधुनिक और विकसित खेती पद्दति से आत्मनिर्भर बना है।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा – "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। किसान कल्याण को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियों ने खेती को परंपरागत सीमाओं से निकालकर आधुनिक, विकसित और आत्मनिर्भर बनाया है।

    इन 12 वर्षों में कृषि की तस्वीर भी बदली है और तकदीर भी।
    व्यवस्था भी बदली है और विश्वास भी।
    खेती भी आगे बढ़ी है और किसान भी।

    – PM-KISAN के माध्यम से ₹4.3 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंची।
    – MSP पर ₹26 लाख करोड़ से अधिक की खरीद हुई।
    – 8 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड बने।
    – 26 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड दिए गए।
    – PM फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को सुरक्षा कवच मिला।
    – e-NAM ने किसान को खेत से बाजार तक नई ताकत दी।

    अन्न को वैश्विक पहचान मिली, जलवायु अनुकूल फसल किस्में विकसित हुईं और AI आधारित कृषि सेवाएँ गाँव तक पहुंचीं। इन सब प्रयासों के परिणामस्वरूप खाद्यान्न उत्पादन में 71% की वृद्धि हुई।

    यह केवल योजनाओं की सफलता नहीं है, यह करोड़ों किसानों के जीवन में आए बदलाव की कहानी है।

    आज किसान के चेहरे पर मुस्कान है, क्योंकि उसकी मेहनत को सम्मान मिला है।
    आज किसान के मन में विश्वास है, क्योंकि उसका हक सीधे उसके पास पहुंचा है।
    आज किसान के खेत में उम्मीद लहलहा रही है, क्योंकि बीज से बाज़ार तक उसके साथ मोदी सरकार खड़ी है।"

  • शिवराज सिंह ने सड़क पर घायल युवक को मदद दी, अपनी गाड़ी से भेजवाया अस्पताल

    शिवराज सिंह ने सड़क पर घायल युवक को मदद दी, अपनी गाड़ी से भेजवाया अस्पताल

     भोपाल
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक फिर मिशाल पेश की है. जिसकी लोग तारीफ कर रहे हैं. हुआ ये कि वह भोपाल से ग्वालियर जा रहे थे, इस दौरान एक युवक सड़क पर घायल पड़ा था, जबकि उसे भीड़ ने घेरकर रखा था. इस दौरान जब शिवराज सिंह की नजर पड़ी तो उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया और खुद अपनी गाड़ी से युवक को अस्पताल पहुंचवाया. इसको लेकर उन्होंने खुद एक्स पर एक पोस्ट किया है.

    एक्स पर किए पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैं भोपाल से ग्वालियर की ओर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था. रास्ते में सड़क किनारे एक घायल युवक अचेत अवस्था में दिखाई दिया. चारों ओर भीड़ थी, लोग खड़े थे, देख रहे थे. पर कोई आगे नहीं बढ़ रहा था. मैंने तुरंत गाड़ी रुकवाई. घायल युवक के पास पहुंचा और अपनी गाड़ी में तत्काल अस्पताल पहुंचाया. साथ ही डॉक्टर से बातचीत कर समुचित उपचार की व्यवस्था की.

     श्यामला हिल्स के पास रुका काफिला
    जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री का काफिला श्यामला हिल्स क्षेत्र से गुजर रहा था. किलोल पार्क के पास सड़क किनारे एक व्यक्ति घायल अवस्था में दिखाई दिया. यह देखते ही शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल काफिला रुकवाया और स्वयं वाहन से उतरकर घायल के पास पहुंचे. उन्होंने आसपास मौजूद लोगों से तुरंत अस्पताल ले जाने को कहा. इतना ही नहीं, मंत्री ने घायल युवक को खुद सहारा देकर उठाया और अपने ही काफिले की गाड़ी से अस्पताल भिजवाया. जाते समय उन्होंने घायल से कहा कि तुम अस्पताल जाओ, हम फोन करवा रहे हैं.

    एक्स पर लिखा, नर सेवा ही नारायण सेवा
    इस घटना के बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ''नर सेवा ही नारायण सेवा.'' उन्होंने कहा कि, ''मानवीय संवेदना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है. ग्वालियर के लिए रवाना होते समय रास्ते में घायल युवक को देखकर उन्होंने तत्काल मदद सुनिश्चित की.'' 

     वीडियो वायरल , सोशल मीडिया पर सराहना
    घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. समर्थकों और आम नागरिकों ने केंद्रीय मंत्री की संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की. कई लोगों ने इसे जनप्रतिनिधि के कर्तव्य और मानवीय मूल्यों का उदाहरण बताया. बताया जा रहा है कि मंत्री अपने आवास से एयरपोर्ट जा रहे थे, तभी उनके सामने यह घटना दिखी. जिसके बाद केंद्रीय मंत्री ने प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर घायल को मदद पहुंचाई.

    पहले भी दिखा चुके हैं संवेदनशीलता
    यह पहला मौका नहीं है जब शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह मानवीय पहल की हो. जुलाई 2025 में भी भोपाल के अवधपुरी इलाके में एक कार्यक्रम में जाते समय चेतक ब्रिज पर हादसे में घायल युवक की उन्होंने मदद की थी. उस समय भी उन्होंने काफिला रुकवाकर घायल को अस्पताल पहुंचाया और उपचार की व्यवस्था कराई थी. 

    शिवराज ने लोगों से की ये अपील

    हमने अक्सर देखा है कि इस तरह की घटनाओं में हम मदद के लिए हाथ बढ़ाने की बजाय तमाशबीन बनकर देखते रहते हैं, जिससे कीमती समय व्यर्थ हो जाता है और घायल व्यक्ति का जीवन खतरे में पड़ जाता है. एक अध्ययन के अनुसार हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार मिल जाए, तो लगभग 50% जीवन बचाए जा सकते हैं.

    सोचिए, हमारी छोटी सी मदद और समय पर बढ़ाया गया एक हाथ कितनी माताओं की गोद सूनी होने से बचा सकता है. कितने बच्चों के सिर से पिता का साया हटने से रोक सकता है और कितनी बहनों के विश्वास को टूटने से बचा सकता है. मित्रों, किसी का जीवन बचाना सबसे बड़ा पुण्य है. सेवा ही सच्चा धर्म है और परोपकार ही हमारा कर्तव्य है. जब भी ऐसी स्थिति सामने आए तो आगे बढ़िए और मदद कीजिए. आपकी एक मदद किसी का जीवन बचा सकती है.