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  • TMC के 20 बागी सांसदों को फिर मिली मोहलत, अब 8 अक्टूबर तक देना होगा जवाब

    TMC के 20 बागी सांसदों को फिर मिली मोहलत, अब 8 अक्टूबर तक देना होगा जवाब

    नई दिल्ली

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में जाने वालीं सांसद सायोनी घोष समेत 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़ी अर्जी पर जवाब देने के लिए लोकसभा सचिवालय ने एक बार फिर नरमी दिखाई है। लोकसभा सचिवालय ने इन सांसदों को जवाब दाखिल करने की समय-सीमा 15 दिन के लिए आगे बढ़ा दी है। लोकसभा सचिवालय ने अब TMC के बागी सांसदों से 8 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है। उन्हें दी गई समय सीमा 22 सितंबर को खत्म हो गई थी। इसके बाद बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से और एक महीने की मोहलत मांगी थी लेकिन स्पीकर ने 15 दिन का समय दिया है।

    इससे पहले 26 अगस्त को लोकसभा सचिवालय ने इन बागी सांसदों को पहले जवाब देने के लिए सात दिन की मोहलत मिली थी फिर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 22 सितंबर तक की मोहलत बढ़ा दी थी। अब एक बार फिर से इन बागी सांसदों को मोहलत मिली है। बता दें कि ममता गुट वाली TMC के अभिषेक बनर्जी ने जून में इन सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई करने की मांग लोकसभा अध्यक्ष से की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में सुनवाई करते हुए सांसदों को नोटिस जारी किया और स्पीकर के सामने चल रही कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही थी।

    SC ने भी दो दिन पहले दिए थे निर्देश

    दो दिन पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष से इन सांसदों के मामले पर तुरंत फैसला लेने को कहा था। शीर्ष अदालत ने बुधवार को उम्मीद जताई थी कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को अयोग्य करार देने की मांग वाली याचिका पर ''जल्द'' निर्णय लेंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उन्हें पता है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश नहीं दे सकते, ''लेकिन हम महज उन्हें मामले के शीघ्र समाधान के लिए स्मरण कराना चाहते हैं।''

    लोकसभा अध्यक्ष को पता है कि उन्हें क्या करना है

    यह याचिका पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने दायर की थी। सुनवाई शुरू होने पर, तृणमूल नेता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि बागी सांसदों को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद उन्होंने अपना जवाब दाखिल नहीं किया है तथा और समय मांगा है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि अध्यक्ष अयोग्यता याचिकाओं पर पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं। मेहता ने कहा, ''लोकसभा अध्यक्ष को पता है कि उन्हें क्या करना है। वह मामले की गंभीरता को समझते हैं।''

    20 में से 17 हो सकते हैं भाजपा में शामिल

    अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में बागी सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर निर्णय लेने में हुई कथित देरी को चुनौती दी है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से संविधान के दल-बदल विरोधी प्रावधानों के अनुसार अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने का निर्देश देने का न्यायालय से अनुरोध किया था। इस बीच, 20 सांसदों के अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी अटकलें जारी हैं। पिछले सप्ताह बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया था कि 20 में से 17 सांसद दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

  • ममता बनर्जी को बड़ी राहत, TMC के बैंक अकाउंट का मिला एक्सेस

    ममता बनर्जी को बड़ी राहत, TMC के बैंक अकाउंट का मिला एक्सेस

    कलकत्ता

    चुनाव आयोग की तरफ से 'जोड़ाफूल' सिंबल फ्रीज किए जाने के झटके के बीच 'कालीघाट तृणमूल' (ममता बनर्जी गुट) को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने साफ किया है कि चुनाव चिन्ह में बदलाव का बैंक खातों के इस्तेमाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पार्टी अपने तीनों बैंक खातों का संचालन पूर्व आदेश के तहत ही करती रहेगी।

    अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिह्न में किया गया बदलाव केवल आगामी उपचुनावों तक ही सीमित है। इसलिए फिलहाल यह बैंक खातों के वित्तीय प्रबंधन पर लागू नहीं होगा।

    कैसे निकाल सकेंगे बैंक अकाउंट से पैसा?
    हाईकोर्ट के नए आदेश के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक अकाउंट के संचालन के लिए तय की गई अंतरिम व्यवस्था को अब 29 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है।

    पैसा निकालने की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी:
    दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता: ममता तृणमूल गूट के कोई भी दो अधिकृत व्यक्ति चेक पर हस्ताक्षर कर सकेंगे।

    स्पेशल ऑफिसर की स्क्रूटनी: अदालत की तरफ से नियुक्त विशेष अधिकारी पूर्व जज सुब्रत तालुकदार इन चेकों की जांच करेंगे। स्पेशल ऑफिसर की मंजूरी के बाद ही बैंक संबंधित राशि का भुगतान करेगा।

    जुलाई के अंतरिम आदेश को कोर्ट ने फिर बढ़ाया
    यह मामला सबसे पहले जुलाई में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के सामने आया था, जब पार्टी के तीन खातों को फ्रीज किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।

    उस समय हाईकोर्ट ने रिटायर जज सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 सितंबर तक खातों के अस्थायी प्रबंधन का आदेश दिया था। अब बेंच ने 9 जुलाई के उसी आदेश की अवधि को 29 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया है, जिससे पार्टी को अपने दैनिक और कानूनी खर्चों को पूरा करने में सहूलियत मिलेगी।

    28 साल पुरानी पार्टी दो धड़ों में बंटी, हाथ से छूटा 'जोड़ाफूल'
    ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर 'तृणमूल कांग्रेस' (TMC) की नींव रखी थी। पिछले 28 वर्षों से 'जोड़ाफूल' (घास पर दो फूल) और 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का नाम ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान का आधार रहा है।

    हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनावों के महज चार महीने के भीतर ममता बनर्जी की बनाई यह पार्टी अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है और व्यावहारिक रूप से दो धड़ों में टूट चुकी है।

    ममता बनर्जी गुट (कालीघाट कैंप): चुनाव आयोग के फैसले के बाद यह धड़ा आगामी उपचुनावों में 'ममता सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस' के नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' सिंबल के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा।

    बागी गुट (ऋतब्रत बनर्जी कैंप): इस धड़े को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित हुआ है।

    पार्टी के नाम और 28 साल पुराने ऐतिहासिक चुनाव चिन्ह के छिन जाने के बाद ममता बनर्जी ने आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर इसी हफ्ते सुनवाई होने की उम्मीद है।

  • TMC के बागियों पर सख्ती, स्पीकर ओम बिरला ने 7 दिन में मांगा जवाब

    TMC के बागियों पर सख्ती, स्पीकर ओम बिरला ने 7 दिन में मांगा जवाब

    नई दिल्ली

    तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों के खिलाफ चल रही अयोग्यता की लड़ाई में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से इन 20 सांसदों को नोटिस जारी कर दिया गया है। सांसदों से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी मंगलवार को TMC नेता और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन बागी सांसदों को नोटिस जारी किया था।

    सागरिका घोष बोलीं- ‘दो महीने तक बैठे रहे, SC के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई’
    TMC की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने इस घटनाक्रम को पार्टी के लिए बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "एक बड़ी और अहम बात। आखिरकार, लोकसभा स्पीकर ने उन 20 बागी सांसदों को नोटिस भेजा है, जिन पर अभिषेक बनर्जी ने अयोग्यता की याचिका दायर की थी। उन्हें 7 दिनों के भीतर इसका जवाब देना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि अयोग्यता की याचिका पर दो महीने तक कोई कार्रवाई न करने के बाद, कल सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद स्पीकर को आखिरकार कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन यह नोटिस सिर्फ पहला कदम है। संविधान का खुलेआम उल्लंघन करने वाले इन 20 बागियों को अयोग्य ठहराना बहुत जरूरी है। यह सिर्फ एक पार्टी की बात नहीं है, बल्कि संविधान की रक्षा की बात है।"

    दो महीने से लंबित थी अयोग्यता याचिका
    TMC ने जून में अपने 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं लोकसभा स्पीकर के पास दाखिल की थीं। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि इन सांसदों ने पार्टी से अलग होकर दूसरी पार्टी के साथ जाने का फैसला किया है और यह संविधान की दसवीं अनुसूची यानी एंटी-डिफेक्शन लॉ के तहत कार्रवाई का आधार बनता है।

    ज्ञात हो कि ये बागी सांसद टीएमसी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) नाम की एक बेहद कम चर्चित पार्टी में शामिल हो गए थे और NDA का समर्थन करने की घोषणा की थी। बागी खेमे का दावा है कि उनके पास TMC के 20 सांसदों का समर्थन है इसलिए यह कदम दो-तिहाई संख्या के कारण वैध। TMC इस दावे का विरोध कर रही है।

    TMC का कहना है कि सांसदों ने जिस पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता, उससे अलग होकर दूसरी राजनीतिक पार्टी के साथ जाने का फैसला किया है। पार्टी के मुताबिक, यह स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है और इसलिए अयोग्यता का मामला बनता है।

    सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे अभिषेक बनर्जी
    स्पीकर के समक्ष याचिकाएं लंबित रहने के बाद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और मांग करते हुए कहा कि अयोग्यता की याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से फैसला कराया जाए।

    मंगलवार, 25 अगस्त को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले पर सुनवाई की और 20 बागी TMC सांसदों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मामले को 28 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। हालांकि, अदालत ने लोकसभा स्पीकर के कार्यालय या लोकसभा महासचिव को अलग से नोटिस जारी नहीं किया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पीकर और लोकसभा सचिवालय की ओर से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य सवाल यह है कि स्पीकर के समक्ष लंबित अयोग्यता की कार्यवाही पर उचित समय में निर्णय लिया जाना चाहिए या नहीं।

    सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के कुछ ही घंटों बाद स्पीकर का नोटिस
    अब लोकसभा स्पीकर के कार्यालय ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में उनसे अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अपना जवाब देने को कहा गया है और इसके लिए सात दिन का समय दिया गया है। सांसदों का जवाब मिलने के बाद स्पीकर मामले पर आगे की सुनवाई और निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं।

  • TMC में बगावत पर बढ़ा विवाद! सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग, जारी हुए नोटिस

    TMC में बगावत पर बढ़ा विवाद! सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग, जारी हुए नोटिस

    नई दिल्ली

    बंगाल में टीएमसी की करारी हार के बाद पार्टी छोड़कर एनसीपीआई का दामन थामने वाले सांसदों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए मांग की थी कि लोकसभा अध्यक्ष को 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने को लेकर जल्द फैसला करने का अनुरोध किया था। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बागी सांसदों से अपना जवाब देने को कहा है।

    सुप्रीम कोर्ट में ऐसा ही एक और मामला
    अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और लोकसभा महासचिव को भी नोटिस जारी करने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उनकी तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में इसी तरह के एक और मामले की सुनवाई चल रही है। शिवसेना (UBT) ने अपने 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस याचिका पर जस्टिस पीए नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच सुनवाई कर रही है।

    अयोग्यता की कार्रवाई में देरी को चुनौती
    बनर्जी ने अपनी याचिका में सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला लेने में कथित देरी को चुनौती दी है। तृणमूल नेता ने लोकसभा अध्यक्ष को संविधान के दलबदल विरोधी प्रावधानों के अनुसार अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए निर्देश का अनुरोध किया है। उन्होंने इससे पहले 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं और बाद में लोकसभा अध्यक्ष से इनका जल्द निपटारा करने का अनुरोध किया था।

    लोकसभा अध्यक्ष से मिले थे बनर्जी
    खबरों के मुताबिक, इस मुद्दे पर बनर्जी ने 27 जुलाई को लिखित रूप से याद दिलाने के बाद 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात भी की थी। यह विवाद तृणमूल के संसदीय दल में हुई बगावत के बाद सामने आया है। तृणमूल के 20 लोकसभा सांसदों ने घोषणा की थी कि वे त्रिपुरा स्थित राजनीतिक संगठन नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं या उसके साथ विलय कर लिया है। साथ ही उन्होंने लोकसभा में अलग दल के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया था।

    दल बदल कानून का भरोसा
    तृणमूल का कहना है कि इन सांसदों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता था और किसी अन्य राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ने का उनका फैसला पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के समान है। ऐसे में दलबदल विरोधी कानून के तहत वे अयोग्य ठहराए जा सकते हैं।

    यह है बागीं सांसदों की पूरी लिस्ट

    काकोली घोष दस्तीदार

    शताब्दी रॉय

    बापी हलदरसायोनी घोष

    खलीलुर्रहमान

    अबू ताहिर खान

    यूसुफ पठान

    मिताली बैग

    डॉ शर्मिला सरकार

    प्रसून बंद्योपाध्याय

    जगदीश बर्मा बसुनिया

    असित कुमार मल

    अरूप चक्रवर्ती

    रचना बनर्जी

    माला रॉय

    कालीपद सोरेन

    दीपक अधिकारी

    जून मालिया

    पार्थ भौमिक

  • यूसुफ पठान समेत TMC के 3 बागी सांसदों का बदला रुख, BJP से दूरी की क्या है वजह?

    यूसुफ पठान समेत TMC के 3 बागी सांसदों का बदला रुख, BJP से दूरी की क्या है वजह?

    नई दिल्ली

    बंगाल में टीएमसी की करारी हार के बाद 20 सांसदों ने विद्रोह किया और वे नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का हिस्सा हो गए। यह स्पष्ट था एनडीए का समर्थन करने के लिए ही इस पार्टी का दामन थामा गया है। वहीं अब कई बागी सांसदों में असंतोष साफ नजर आ रहा है और ऐसे में बागी गुट में दरार पड़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये तीनों ही सांसद मुर्शिदाबाद में मुस्लिम बहुल सीटों से चुने गए सांसद हैं। इनमें पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का भी नाम शामिल है। वह बहरामपुर से सांसद हैं।

    बीजेपी से करीबी, वोट बैंक को खतरा
    सूत्रों के मुताबिक इन तीनों ही सांसदों का मानना है कि बीजेपी से करीबी रखने पर उनका वोट बैंक बुरी तरह प्रभावित होगा। ऐसे में उनका यही कहना है कि बीजेपी के करीब जाना मतलब अपने क्षेत्र की जनता को धोखा देना है। यूसुफ पठान के अलावा इस लिस्ट में मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहिर खान और जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान शामिल हैं।

    एनडीए की बैठक से भी बनाई दूरी
    हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एनडीए की बैठख में भी तीनों सांसद शामिल नहीं हुए थे। हालांकि दिल्ली में ही जब शुभेंदु अधिकारी ने बैठक बुलाई तो ये तीनों सांसद पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए वे बैठक में गए थे। बता दें कि अबू ताहिर काफी अनुभवी नेता हैं। 2019 में वह टीएमसी में शामिल हुए थे और जंगीपुर से दो बार के सांसद हैं।

    क्या बोले अबू ताहिर
    बीते दिनों सांसद अबू ताहिर ने कहा कि वह ''एनडीए में नहीं हैं'', हालांकि वह शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कई सहयोगी दलों के सांसदों के लिए नाश्ते पर आयोजित बैठक में शामिल हुए। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से सांसद ताहिर ने कहा कि इस कार्यक्रम में वह सिर्फ लोगों के मुद्दे उठाने के लिए शामिल हुए। इन मुद्दों में, राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने, मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबंदी और उनके संसदीय क्षेत्र में नयी रेलवे लाइन की मांग शामिल है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक अपनी चिंताओं से उन्हें सीधे अवगत कराने का एक अवसर था, न कि भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन देने का कोई संकेत। बता दें कि कल्याण बनर्जी समेत कुछ सांसद अब भी ममता बनर्जी के ही समर्थन में हैं। बनर्जी ने कहा कि बागी सांसद सबको गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, इन लोगों ने स्पीकर को पत्र देकर कहा कि वे एनसीपीआई के सदस्य हैं। एनसीपीआई पहले सेही एनडीए का हिस्सा है।

  • बंगाल की राजनीति में हलचल! शाह के साथ नजर आए सौगत रॉय, नड्डा पर शत्रुघ्न सिन्हा के बयान से बढ़ी चर्चा

    बंगाल की राजनीति में हलचल! शाह के साथ नजर आए सौगत रॉय, नड्डा पर शत्रुघ्न सिन्हा के बयान से बढ़ी चर्चा

    नई दिल्ली

    पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका लग सकता है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद और ममता के वफादार सौगत रॉय और शत्रुघ्न सिन्हा की एक तस्वीर सुर्खियां बटोर रही हैं, जिनमें वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ संसद की कैंटीन में दोपहर का भोजन करते नजर आ रहे हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। शत्रुघ्न सिन्हा से जब इस तस्वीर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नड्डा को अपना पुराना दोस्त करार दिया।

    हालांकि सौगत रॉय ने तुरंत पलटवार करते हुए एनडीए (NDA) की बैठक से NCPI के तीन मुस्लिम सांसदों की गैरमौजूदगी को उजागर कर पूरे मामले का रुख ही मोड़ दिया। आपको बता दें कि लीक हुई तस्वीरों में सौगत रॉय संसद कैंटीन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ एक ही टेबल पर नजर आ रहे थे। उनके साथ आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी मौजूद थे।

    तस्वीरों पर सफाई देते हुए सौगत रॉय ने किसी भी तरह की राजनीतिक साजिश या दलबदल की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया। संसद के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, "कैंटीन में अमित शाह से कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई। नड्डा जी से भी कोई अलग से बात नहीं हुई। अमित शाह और एक अन्य भाजपा नेता उसी मेज पर आए। हम पहले वहां बैठे थे, वे जल्द ही चले गए। हमारी आपस में कोई बात नहीं हुई। असल में भाजपा के लोग हमसे संपर्क कर रहे हैं। हम तो एनडीए में गए लोगों से वापस लौटने के लिए कह रहे हैं।"

    नड्डा मेरे पुराने दोस्त
     रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व भाजपा नेता और टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और नड्डा उनके एक पुराने मित्र हैं, इसलिए वे वहां बैठे थे।

    काकोली घोष दस्तीदार का तीखा बयान

    श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी और बेलेघाटा से विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संसद या विधानसभा में सामाजिक मुलाकातों के दौरान ऐसी तस्वीरें खिंचना आम बात है और इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। कुणाल घोष ने कहा, "ऐसी अटकलों का कोई अंत नहीं है। इन बातों का हमारी विचारधारा या राजनीति से कोई संबंध नहीं है।" हालांकि तृणमूल कांग्रेस (NCPI) की ही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस विवाद में घी डालने का काम किया। उन्होंने संकेत दिया कि रॉय का यह लंच एक सोची-समझी डबल ट्रैक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

    काकोली घोष ने कहा, "मैंने तस्वीरों को ध्यान से देखा है। शायद वे कुछ योजना बना रहे हैं। हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे सीधे बात कर रहे हैं। राजनीति में ऐसा ही होता है, यह एक डबल ट्रैक है।"

  • ओम बिरला से मुलाकात के बाद TMC में हलचल, बागी सांसदों को मिला बड़ा भरोसा

    ओम बिरला से मुलाकात के बाद TMC में हलचल, बागी सांसदों को मिला बड़ा भरोसा

    नई दिल्ली

    पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे कलह के बाद जल्द ही संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है। 20 जुलाई से शुरू होने वाले इस सत्र से पहले अब टीएमसी के बागी सांसदों ने एक बड़ा दावा किया है। बागी सांसदों की अगुवाई करने वालीं काकोली घोष दस्तीदार ने कहा है उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आश्वासन मिला है कि बागी सांसदों को लोकसभा में बैठने के लिए नई सीटें मिलेंगीं। साथ ही इन सांसदों को अलग दफ्तर भी मिल सकता है।

    बता दें कि ये सभी सांसद पिछले महीने 'नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हो चुके हैं। अब संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में NCPI के दो प्रतिनिधियों को शामिल होने का न्योता मिला है। इसे संसद में नए गुट को अनौपचारिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

    काकोली घोष का क्या दावा
    बारासात क्षेत्र से काकोली घोष दस्तीदार ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, “हमने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की थी। उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि हमें संसद में एक नया कार्यालय मिलेगा और वे हमारे लिए नई सीटें आवंटित करेंगे। हमारे दो प्रतिनिधि 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में भी शामिल होंगे।”

    इससे पहले बागी सांसदों के गुट के सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार ने बीते सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार उन्होंने निचले सदन में पार्टी के 20 सांसदों के बैठने की व्यवस्था पर चर्चा की। सूत्रों ने पीटीआई भाषा को बताया कि सोमवार को हुई इस बैठक में उन्होंने नए संसद भवन में पार्टी के लिए कार्यालय आवंटित करने पर भी बातचीत की।

    ममता खेमे ने भी दायर की है याचिका
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले ओम बिरला से मुलाकात कर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत बागी 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी थीं। बनर्जी ने अपनी याचिका में कहा था कि दूसरे दल में शामिल होकर इन सांसदों ने स्वेच्छा से तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से यह भी आग्रह किया था कि पार्टी के अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा नहीं दी जाए।

    कब तक फैसला?
    इस बीच रिपोर्ट्स के मुताबिक संसद के मानसून सत्र से पहले ही NCPI के विलय को औपचारिक मान्यता मिल सकती है। लोकसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "स्पीकर जल्द ही तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों से जुड़े मामलों पर फैसला लेंगे। फैसला होने के बाद इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।" गौरतलब है कि ममता बनर्जी की टीएमसी के 20 सांसदों के बगावत के बाद शिवसेना यूबीटी के भी 9 में से 6 लोकसभा सांसद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) में शामिल हो गए थे।

  • ममता बनर्जी ने संभाली TMC के खजाने की कमान, पार्टी में बदलाव के बीच बड़ा फैसला

    ममता बनर्जी ने संभाली TMC के खजाने की कमान, पार्टी में बदलाव के बीच बड़ा फैसला

    कोलकाता
    कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों से सीमित लेनदेन का आदेश दिया है. साथ ही इन लेनदेनों की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया है. खास बात यह है कि बैंक खातों में लेन-देन का ये अधिकार तृणमूल कांग्रेस के ममता गुट को मिला है. TMC पर कब्जे की लड़ाई लड़ रही ममता बनर्जी के लिए ये बड़ी जीत मानी जा रही है. कोर्ट के इस फैसले से पूर्व सीएम ममता बनर्जी को टीएमसी के खाते में मौजूद करोड़ों रुपयों को अदालत की निगरानी में खर्च करने का अधिकार मिल जाएगा। 

    कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुब्रता तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया है. जस्टिस सुब्रता तालुकदार कोर्ट के आदेशानुसार केवल तृणमूल कांग्रेस के दो पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित चेक के आधार पर ही खर्च को अधिकृत करेंगे। 

    गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा कि यह अंतरिम उपाय 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगा।

    कलकत्ता हाई कोर्ट के अनुसार टीएमसी पार्टी को चलाने में होने वाले खर्चे को पूरा करने के लिए इस अकाउंट से पैसे की निकासी खर्च कर सकेगी. हाई कोर्ट के अनुसार विशेष अधिकारी किसी और तरह के खर्च की इजाजत नहीं देंगे। 

    TMC के बैंक अकाउंट्स में सीमित लेन-देन की इजाजत देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि अकाउंट्स फ्रीज़ करने का आदेश देने के लिए पुलिस ने जो सबूत दिखाए अदालत उससे संतुष्ट नहीं था। 

    हाई कोर्ट ने कहा कि इस अंतरिम चरण में उसे ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जो FIR दर्ज होने के तुरंत बाद अकाउंट्स को फ्रीज़ करने के पुलिस के फ़ैसले को सही ठहरा सके। 

    बेंच ने कहा, "FIR 18 जून को दर्ज की गई थी और 19 जून को जल्दबाज़ी में अकाउंट्स फ्रीज़ कर दिए गए। इस चरण में, कोर्ट को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि इतने अचानक उठाए गए कदमों का आधार क्या था। 

    कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस अंतरिम व्यवस्था का मतलब किसी गुट को "असली" तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता देना नहीं होगा; यह मामला अभी भी चुनाव आयोग के पास लंबित है। 

     एक रिपोर्ट के अनुसार TMC की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि डेबिट फ्रीज ने एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के कामकाज को लगभग ठप कर दिया और उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया। 

    उन्होंने कहा कि शिकायत अस्पष्ट थी, उसमें खातों को अपराध से हुई कमाई से जोड़ने वाले कोई ठोस आरोप नहीं थे, और उन्होंने बताया कि पार्टी का सारा फंड चुनाव आयोग के नियमों और इनकम टैक्स एक्ट के तहत रेगुलेट होता है। 

    चुनाव हारने के बाद ममता के हाथ से पार्टी गई
    बता दें कि 4 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी में टूट हुई है. पार्टी के 20 सांसदों ने TMC से अलग होकर NCPI में अपना विलय कर लिया है. कोलकाता में TMC के 60 से ज्यादा विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग हो गए हैं. ऋतब्रत बनर्जी ही इस TMC का नेतृत्व कोलकाता में कर रहे हैं. ऋतब्रत बनर्जी गुट के TMC ने पार्टी के मुख्यालय पर भी अपना हक जता लिया है. ऐसे में पार्टी खाते से खर्च करने का अधिकार ममता बनर्जी को मिलता बड़ी बात है। 
     

     

  • TMC Symbol Row: क्या ममता बनर्जी से छिन जाएगा पार्टी का चुनाव चिह्न? आज EC पहुंचेगा ऋतब्रत गुट

    TMC Symbol Row: क्या ममता बनर्जी से छिन जाएगा पार्टी का चुनाव चिह्न? आज EC पहुंचेगा ऋतब्रत गुट

    कोलकत्ता 

    तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी संघर्ष अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा घासफूल' को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज दोपहर 12 बजे नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। 

    ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उनका प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने अपना पक्ष रखेगा और यह बताएगा कि असली तृणमूल कांग्रेस उनका गुट है. उन्होंने बताया कि 22 जून को विधानसभा के विशेष सत्र के बाद आयोग को पूरी घटना की जानकारी और सभी जरूरी दस्तावेज भेज दिए गए थे. अब आयोग ने उनकी बात सुनने के लिए समय दिया है। 

    यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पार्टी के भीतर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच संगठन और राजनीतिक पहचान को लेकर संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जता रहे हैं। 

    58 विधायकों के साथ टीएमसी के बागी हैं ऋतब्रत बनर्जी
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद TMC में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया. दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 80 में से कमोबेश 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से दूरी बना ली और ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में आ गए. इसके बाद बागी गुट ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना और 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का भी ऐलान किया। 

    तब से दोनों गुट पार्टी संगठन, विधायी दल और चुनावी पहचान पर अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं. इसी विवाद के चलते चुनाव आयोग की भूमिका अब बेहद अहम हो गई है. माना जा रहा है कि आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेज और दलीलें सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगा। 

    ऋतब्रत बनर्जी का टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर दावा
    इस सप्ताह की शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा था कि उनके गुट को चुनाव चिह्न पर अलग से दावा करने की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि असली तृणमूल कांग्रेस वही हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के ज्यादातर निर्वाचित जनप्रतिनिधि उनके साथ हैं। 
    अब सभी की नजर चुनाव आयोग की इस बैठक पर टिकी है. अगर विवाद गहराता है तो आयोग को यह तय करना पड़ सकता है कि तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिह्न 'जोड़ा घासफूल' किस गुट के पास रहेगा. ऐसे में आज की बैठक पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। 

  • ममता सरकार पर बढ़ा दबाव, ₹2.29 लाख करोड़ के कथित नुकसान पर CAG रिपोर्ट से सियासी हलचल

    ममता सरकार पर बढ़ा दबाव, ₹2.29 लाख करोड़ के कथित नुकसान पर CAG रिपोर्ट से सियासी हलचल

    कोलकाता

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद लगातार राज्य में हलचल मची हुई है. पहले ममता बनर्जी चुनाव हार गईं फिर उनकी पार्टी टूट गई. अब ताजा मामला यह है कि उनके सरकार के दौरान 2.29 लाख करोड़ रुपए गायब होने का आरोप लग रहा है.  जिसके बाद माना जा रहा है कि राजनीति में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा बवंडर उठने वाला है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, बीजेपी सरकार अब विधानसभा में पिछले चार सालों की लंबित सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है. यह मामला सीधे तौर पर साल 2011 से 2020 के बीच खर्च हुए 2.29 लाख करोड़ रुपये के उपयोग प्रमाण पत्र (UCs) से जुड़ा है, जो अभी तक जमा नहीं किए गए हैं. समझते हैं पूरी बात। 

    पैसों का हिसाब ही नहीं दिया गया!
    सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग को मिले सरकारी अनुदान के बाद उसका उपयोग प्रमाण पत्र यानी ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ जमा करना अनिवार्य होता है. यह सर्टिफिकेट बताता है कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ. लेकिन हैरानी की बात यह है कि बंगाल सरकार ने इतने लंबे समय तक इन प्रमाण पत्रों को जमा ही नहीं किया. इस लापरवाही ने अब राज्य के सरकारी खजाने की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले विपक्ष में रही बीजेपी इन दिनों राज्य में सरकार चला रही है. अब बीजेपी का आरोप है कि इतने बड़े फंड का बिना हिसाब-किताब के खर्च होना सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है। 

    पंचायत और शिक्षा विभाग सबसे ज्यादा संदेह में
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएजी की साल 2020-21 की आखिरी रिपोर्ट में सबसे बड़ी गड़बड़ियां पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में पाई गई थीं. इस विभाग के करीब 81,839 करोड़ रुपये के यूसी पेंडिंग थे. इसके बाद स्कूली शिक्षा विभाग का नंबर आता है, जिसके 36,850 करोड़ रुपये का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है. शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग के भी 30,693 करोड़ रुपये का कोई ठोस ब्यौरा नहीं मिला है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस तरह सवालों के घेरे में रहा है। 

    आपदा राहत फंड में भी बड़ी धांधली
    सिर्फ सामान्य विभागों की बात नहीं है, बल्कि आपदा राहत फंड के साथ भी खेल हुआ है. मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सीएजी ने बताया था कि 3,400 करोड़ रुपये के 11,321 ‘डिटेल्ड कंटिजेंट’ (DC) बिल जमा ही नहीं किए गए. ये बिल तब जरूरी होते हैं जब सरकार ‘एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंट’ (AC) बिलों के जरिए पैसा निकालती है. तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद इन बिलों का न आना बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। 

    बजट सत्र में मचेगा सियासी घमासान
    अब बीजेपी सरकार 2021-22 से लेकर 2024-25 तक की उन रिपोर्टों को भी सदन के पटल पर रखने जा रही है, जिन्हें पिछली सरकार ने छिपाए रखा था. आने वाले बजट सत्र में इन रिपोर्टों के पेश होते ही ममता बनर्जी की सरकार की आखिरी चार सालों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार होना तय माना जा रहा है. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या ये रिपोर्टें केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगी या फिर इनके आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी. टीएमसी के लिए यह सदन में अपनी सफाई देना सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है।