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नवंबर में लौटेगा अग्निवीरों का पहला बैच, हरियाणा सरकार देगी तुरंत जॉइनिंग लेटर, 3685 पद मंजूर

 चंडीगढ़
 भारतीय सेना से चार साल की सेवा पूरी करके हरियाणा के अग्निवीरों का पहला बैच अगले महीने वापस आएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही अग्निवीरों का पहला समूह आए, तो उन्हें तुरंत ज्वाइनिंग लेटर दिए जाएं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को चंडीगढ़ में पंचनद शोध संस्थान द्वारा आयोजित 33वां वार्षिक व्याख्यान पूर्व-लोकमंथन कार्यक्रम में यह बात कही। ‘हम भारत के लोग, हमारा दायित्व’ की थीम पर आधारित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंचनद शोध संस्थान को 11 लाख रुपये देने की भी घोषणा की।

अग्निवीरों के लिए उठाए कदम साझा करते हुए कहा कि ग्रुप सी के सामान्य पदों पर पांच प्रतिशत और पुलिस, जेल, वन व खनन सहित चिह्नित विभागों में 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। प्रवेश परीक्षाओं और चयनित पदों पर शारीरिक जांच से संबंधित छूट भी दी जाएगी।

वर्ष 2022-23 में भर्ती हुए 2227 अग्निवीरों का पहला बैच नवंबर में सेवा पूरी करेगा। वर्ष 2027 में 2,893 और 2028 में 2,108 अग्निवीरों के सेवा पूरी करके लौटने का अनुमान है। इनके लिए पुलिस, जेल, वन विभाग और आपदा प्रबंधन में 3685 पदों की मंजूरी दी गई है।

विकसित भारत की यात्रा में शामिल होने की अपील
मुख्यमंत्री ने हरियाणा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई योजना की जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत की यात्रा में युवाओं, विश्वविद्यालयों और संस्थाओं से भाग लेने का आह्वान किया है। इस साझा संकल्प में हरियाणा भी एक महत्वपूर्ण भागीदार है।

प्रदेश के जवान देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, किसान देश के खाद्यान्न भंडार को भरने में योगदान देते हैं और खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों से देश का नाम रोशन करते हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर देना और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। आज बेटियां रक्षा, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव एवं आयोजक डा. सच्चिदानंद जोशी, पंचनद शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो. बृज किशोर कुठियाला और मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डा. राज नेहरू ने भी अपनी बात रखी।

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