पंजाबराज्य

DA-DR बकाया भुगतान का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, मान सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की याचिका

चंडीगढ़ 

पंजाब सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के तीन अगस्त के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार ने अपनी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में कहा है कि वह राज्य कर्मचारियों को समान श्रेणी के केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर टेक-होम (हाथ में आने वाला) वेतन देने के लिए आवश्यक सीमा तक डीए बढ़ाने को तैयार है।

हालांकि, केंद्रीय कर्मचारियों के समान डीए प्रतिशत को यांत्रिक रूप से लागू करने का विरोध किया है। राज्य का तर्क है कि पंजाब में कई पदों पर मूल वेतन केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक है। ऐसे में केवल डीए प्रतिशत की तुलना से वास्तविक समानता नहीं हो सकती। सरकार ने सात प्रतिनिधि श्रेणियों के आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे हैं। इनमें से पांच में 42 फीसदी डीए के बावजूद पंजाब कर्मचारियों की कुल परिलब्धियां संबंधित केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक बताई गई हैं। 

सरकार का कहना है कि उसने बकाया राशि से इन्कार नहीं किया है और 13 फरवरी 2025 को मंजूर लिक्विडेशन प्लान के तहत चरणबद्ध भुगतान किया जा रहा है। राज्य ने कहा कि केंद्रीय दर के अनुरूप डीए करने पर सालाना करीब 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पंजाब का वेतन-पेंशन खर्च राजस्व प्राप्तियों का करीब 51 फीसदी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने और मौजूदा भुगतान योजना जारी रखने की अनुमति मांगी है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button