Category: छत्तीसगढ़

  • केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया कल छत्तीसगढ़ प्रवास पर, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में करेंगे राज्योत्सव का भव्य शुभारंभ

    केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया कल छत्तीसगढ़ प्रवास पर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में करेंगे राज्योत्सव का भव्य शुभारंभ

    रायपुर

     केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया  01 नवंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे नवा रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ करेंगे। राज्योत्सव के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय करेंगे। केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया अपने प्रवास के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करने के साथ ही छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के समापन समारोह में भी शामिल होंगे।

    छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 से 3 नवंबर तक नवा रायपुर अटल नगर स्थित राज्योत्सव मैदान में भव्य राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राज्योत्सव में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं, जनजातीय परंपराओं और विकास यात्रा की झलक देखने को मिलेगी। तीन दिनों तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोककलाकारों के साथ ही राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।

    नर्सिंग महाविद्यालय एवं परिचारक छात्रावास निर्माण का करेंगे भूमिपूजन

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया 1 नवंबर को शाम 5 बजे नवा रायपुर स्थित  सत्य साईं संजीवनी बाल हृदय चिकित्सालय पहुंचेंगे। यहां वे नर्सिंग महाविद्यालय एवं परिचारक छात्रावास के निर्माण कार्य का भूमिपूजन करेंगे। नर्सिंग महाविद्यालय एवं परिचारक छात्रावास का निर्माण स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल होगी। इससे नर्सिंग शिक्षा के लिए आवश्यक अधोसंरचना के विकास के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में सहयोग मिलेगा।

    शाम 6 बजे राज्योत्सव का भव्य शुभारंभ, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय करेंगे अध्यक्षता

    केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया शाम 6 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित राज्योत्सव मैदान पहुंचेंगे, जहां वे छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव का शुभारंभ करेंगे। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय करेंगे। समारोह में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव एवं  विजय शर्मा सहित प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के समापन समारोह में होंगे शामिल

    केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान खेल गतिविधियों में भी सहभागिता करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे रात 8 बजे रायपुर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल हॉकी स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के समापन समारोह में शामिल होंगे। केंद्रीय खेल मंत्री की उपस्थिति प्रदेश में हॉकी सहित विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग जैसे आयोजन प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता और कौशल प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया का छत्तीसगढ़ प्रवास राज्य स्थापना दिवस के उत्सव के साथ स्वास्थ्य शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

  • लौह पुरुष सरदार पटेल की मनाई गई 151वीं जयंती, ग्राम भगतपुर में राष्ट्र की एकता और अखंडता का दिया संदेश

    लौह पुरुष सरदार पटेल की मनाई गई 151वीं जयंती, ग्राम भगतपुर में राष्ट्र की एकता और अखंडता का दिया संदेश

    रायपुर

     देश की एकता और अखंडता के प्रतीक लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड के ग्राम भगतपुर में जिला कुर्मी क्षत्रिय समाज द्वारा भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अतिथियों ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद  संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने देश की एकता, अखंडता और अखंड भारत के निर्माण में लौह पुरुष सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। 

    उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने सामाजिक भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपए तथा सीसी रोड एवं डोम निर्माण के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा की। वहीं विधायक भावना बोहरा ने अटल चौक के पास पूर्व प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापना एवं सौंदर्यीकरण के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा की। इस तरह कुल 55 लाख रुपए के विकास कार्यों की सौगात दी गई। कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष  सुरेश चंद्रवंशी, छत्तीसगढ़ कुर्मी क्षत्रिय समाज के दुर्ग संभाग के मंत्री  नंदलाल चंद्रकार, जिला पंचायत के उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, नगरपालिका के अध्यक्ष  चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि और समाज के पदाधिकारी उपस्थित रहे। 

    सरदार पटेल ने रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर बनाया अखंड भारत– उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा

    उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के समय देश के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक चुनौती को स्वीकार किया और साढ़े 500 से अधिक रियासतों को एकजुट कर गौरवशाली एवं वैभवशाली भारत के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। हैदराबाद के निजाम सहित अनेक जटिल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व से रियासतों का भारत में विलय कराया। गुजरात में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा स्थापित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आज भी सरदार पटेल के व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान की प्रेरणा देता है।

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास में जब मुगल शासकों द्वारा देश में हिंदू राजाओं को समाप्त करने और विभिन्न क्षेत्रों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे थे, तब छत्रपति शिवाजी महाराज ने उनके सामने दृढ़ता से खड़े होकर संघर्ष किया और देश की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने समाज की एकजुटता और कृषि परंपरा पर जोर देते हुए कहा कि जब समाज की गंगा एक साथ जुड़ती है, तो उससे सकारात्मक और रचनात्मक परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि कुर्मी समाज कृषि प्रधान समाज रहा है। समाज के लोगों को आधुनिकता और विविधता के साथ खेती की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। कम जमीन में भी अलग-अलग प्रकार की फसलों और कृषि उत्पादों के माध्यम से बेहतर उत्पादन एवं आमदनी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने समाज के युवाओं और चिंतकों से समाज की उन्नति, संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।

    सामाजिक एकता ही विकास की सबसे बड़ी ताकत– सांसद  संतोष पाण्डेय

    सांसद  संतोष पाण्डेय ने सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि सरदार पटेल स्वतंत्र भारत के ऐसे महान नेतृत्वकर्ता थे, जिन्होंने देश की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देश के इतिहास में ऐसे महान व्यक्तित्वों का योगदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने समाज की एकजुटता, गौरव और सामाजिक नेतृत्व के महत्व पर अपने विचार रखे।

    समाज की एकजुटता से आने वाली पीढ़ी को मिलेगी नई दिशा– विधायक भावना बोहरा

     विधायक भावना बोहरा ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल देश की एकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उन्होंने सैकड़ों रियासतों को एकजुट कर अखंड भारत के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता से विकास को नई दिशा मिलती है। सामाजिक आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और रीति-नीति को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने समाज के सभी लोगों से एकजुट होकर आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य और समाज की उन्नति के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

  • विधायक  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा पंचतत्व में हुए विलीन, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दिया कंधा, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

    विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा पंचतत्व में हुए विलीन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिया कंधा, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

    रायपुर  

     अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष स्वर्गीय  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा आज पंचतत्व में विलीन हो गए। बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड स्थित उनके पैतृक ग्राम भेण्ड्रा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा की पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके पार्थिव शरीर को कंधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी। मुख्यमंत्री  साय ने उनके शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उन्हें इस कठिन समय में ढांढस बंधाया।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विधायक  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका असमय निधन पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है।  कोर्सेवाड़ा अहिवारा विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए थे। वे अत्यंत सुलझे हुए, परिपक्व, मिलनसार और मृदुभाषी जनप्रतिनिधि थे। वे सदैव अपने क्षेत्र के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए चिंतित रहते थे। एक शिक्षक से विधायक तक का उनका सफर जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

    मुख्यमंत्री  साय ने भावुक होते हुए कहा कि  कोर्सेवाड़ा के उपचार के दौरान उनकी लगातार बातचीत होती रही थी। कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा था कि वे हैदराबाद से स्वस्थ होकर वापस नहीं लौटेंगे। निधन से एक दिन पूर्व प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल भी हैदराबाद जाकर उनसे मिले थे और चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य एवं उपचार की विस्तृत जानकारी ली थी। चिकित्सकों से मेरी भी बातचीत कराई गई थी। सभी चिकित्सक उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे थे। स्वयं  कोर्सेवाड़ा ने भी स्वस्थ होकर वापस लौटने की उम्मीद जताई थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  कोर्सेवाड़ा का निधन उनके विधानसभा क्षेत्र और प्रदेश के लिए अत्यंत दुःखद है। उनका सहज, सरल व्यक्तित्व और जनसेवा के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

    उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का 78 वर्ष की आयु में हैदराबाद में उपचार के दौरान निधन हो गया था।

    गौरतलब है कि आज शनिवार सुबह उनका पार्थिव शरीर विमान से रायपुर पहुंचा। स्वामी विवेकानंद विमानतल पर लोगों के अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि अर्पित करने की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद पार्थिव शरीर भिलाई-3 स्थित उनके शासकीय आवास पहुंचा, जहां परिजनों, जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इसके पश्चात पार्थिव शरीर को उनके पैतृक ग्राम भेण्ड्रा ले जाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर खाद्य मंत्री  दयाल दास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, कौशल विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  विजय बघेल एवं  भोजराज नाग, विधायक  पुन्नूलाल मोहले,  ईश्वर साहू,  ललित चन्द्राकर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  प्रेमप्रकाश पाण्डेय सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधि, कलेक्टर दुर्ग  अभिजीत सिंह, कलेक्टर बालोद मती दिव्या उमेश मिश्रा, एसपी  किरण गंगाराम चव्हाण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, बड़ी संख्या में सतनामी समाज के गणमान्य नागरिक और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

    दिवंगत विधायक के सम्मान में राज्योत्सव सादगी से होगा आयोजित

    स्वर्गीय  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन पर सम्मान व्यक्त करते हुए बालोद जिला प्रशासन ने जिला स्तरीय राज्योत्सव समारोह को सादगी के साथ आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत समारोह में होने वाले सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। अब राज्योत्सव में केवल शासकीय योजनाओं और जिले में हुए विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से आम नागरिकों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और जिले की विकास उपलब्धियों की जानकारी दी जाएगी।

  • छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 116 नेताओं और मंत्रियों की सुरक्षा होगी कम

    छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 116 नेताओं और मंत्रियों की सुरक्षा होगी कम

    जगदलपुर.

    एक दौर था जब बस्तर में नेताओं का काफिला निकलता था तो साथ में सुरक्षाकर्मियों की लंबी कतार भी चलती थी। जनप्रतिनिधियों के घर से लेकर उनके राजनीतिक कार्यक्रमों तक सुरक्षा का कड़ा पहरा रहता था। वजह थी नक्सलियों का वो खौफ, जिसने बस्तर की राजनीति को कई गहरे जख्म दिए।

    इसी नक्सली हिंसा में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा की झीरम घाटी में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद कर्मा परिवार को Z+ सुरक्षा दी गई। भीमा मंडावी जैसे जनप्रतिनिधि भी नक्सली हमले में अपनी जान गंवा चुके हैं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद सरकार ने नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा घटाने का फैसला लिया है। बता दें कि प्रदेश के 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किया गया है। इनमें Z+ से Z और Z से Y श्रेणी में सुरक्षा घटाई गई है।

    बीजेपी और कांग्रेस के 9 नेताओं की Z+ सुरक्षा को घटाकर Z कर दिया गया है। इसके अलावा वन मंत्री केदार कश्यप, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की सुरक्षा में भी कटौती की गई है। वहीं, बस्तर के सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों की सुरक्षा श्रेणी में भी बदलाव किया गया है। यानी जिस बस्तर में कभी नेताओं की सुरक्षा के लिए दर्जनों जवान तैनात रहते थे, वहां अब सुरक्षा का घेरा छोटा होने जा रहा है। आखिर Z+ और Z सुरक्षा में कितने जवान तैनात होते हैं? किन परिस्थितियों में सुरक्षा घटाई जा रही है और बस्तर में राजनीतिक हत्याओं का इतिहास कितना भयावह रहा है? आज हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

    सुरक्षा का बदलेगा गणित
    Z+ सुरक्षा में सामान्य तौर पर करीब 55 सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा घेरा होता है, जबकि Z श्रेणी में यह संख्या लगभग 22 रहती है। यानी सुरक्षा श्रेणी बदलने पर करीब 33 जवानों की तैनाती कम हो सकती है। हालांकि वास्तविक संख्या व्यक्ति की सुरक्षा जरूरत और खतरे के आकलन पर निर्भर करती है। सरकार का मानना है कि नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता के बाद अब पहले जैसी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत नहीं रह गई है। लंबे समय से नेताओं की सुरक्षा में तैनात जवानों को अब दूसरी जिम्मेदारियों में लगाया जा सकेगा। यह फैसला केवल सुरक्षा श्रेणी बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर में बदली परिस्थितियों के बीच पुलिस संसाधनों के इस्तेमाल की नई रणनीति भी है।

    झीरम का जख्म आज भी ताजा
    बस्तर में नेताओं की सुरक्षा की चर्चा हो और झीरम घाटी का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। 25 मई 2013 को परिवर्तन यात्रा के दौरान नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और वरिष्ठ नेता उदय मुदलियार सहित कई लोगों की जान चली गई थी। महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने खास तौर पर निशाना बनाया और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे बस्तर की राजनीति को हिलाकर रख दिया था। कर्मा परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा सामने आने के बाद परिवार के सदस्यों को Z+ सुरक्षा दी गई। अब उसी सुरक्षा घेरे को छोटा करने का फैसला बस्तर के बदले हालात की एक बड़ी तस्वीर पेश कर रहा है।

    सिर्फ बड़े नेता नहीं, पंचायत प्रतिनिधि भी बने नक्सलियों का निशाना
    नक्सली हिंसा का दायरा केवल बड़े राजनीतिक नेताओं तक सीमित नहीं रहा। गांवों में चुनाव लड़ने वाले सरपंच, पूर्व सरपंच, जनपद और जिला पंचायत से जुड़े प्रतिनिधि भी नक्सलियों के निशाने पर रहे हैं। चार दशकों में बस्तर में 100 से अधिक जनप्रतिनिधियों की नक्सली हिंसा में हत्या का आंकड़ा सामने आया है। वहीं 2001 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में अलग-अलग राजनीतिक हैसियत वाले 118 नेताओं की हत्या का आंकड़ा भी सामने आया है। ये आंकड़े बताते हैं कि बस्तर में राजनीति करना कई बार जान जोखिम में डालने जैसा रहा है। जनप्रतिनिधियों को धमकियां मिलती रहीं, कई नेताओं को गांव छोड़ना पड़ा और अनेक लोगों को लंबे समय तक सुरक्षा घेरे में रहना पड़ा।

    भीमा मंडावी की हत्या ने फिर दिखाया था नक्सली खतरा
    झीरम घाटी के बाद भी बस्तर में राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला थमा नहीं था। 9 अप्रैल 2019 को दंतेवाड़ा के तत्कालीन भाजपा विधायक भीमा मंडावी के काफिले को नक्सलियों ने आईईडी विस्फोट से निशाना बनाया था। इस हमले में विधायक भीमा मंडावी और उनके सुरक्षा कर्मियों की मौत हो गई थी। इसके बाद भी अलग-अलग इलाकों में भाजपा नेताओं, पूर्व जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों की हत्याएं सामने आती रहीं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना सरकार और पुलिस के सामने बड़ी चुनौती बनी रही। अब नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद सुरक्षा में कटौती का फैसला इसी लंबे हिंसक दौर के अंत की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।

    अब सुरक्षा में लगे जवान संभालेंगे दूसरी जिम्मेदारी
    नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और वाहन लगाए जाते रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बस्तर में 250 से अधिक संरक्षित व्यक्तियों की सुरक्षा में एक हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं। सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव के बाद इन जवानों को दूसरी सुरक्षा व्यवस्थाओं और पुलिसिंग में लगाने की तैयारी है। सरकार ने सुरक्षा में बदलाव से पहले छह महीने तक हालात की समीक्षा की है। आगे भी सुरक्षा का आकलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर दोबारा बदलाव किया जा सकता है।

    बस्तर में शांति की नई तस्वीर या सुरक्षा को लेकर नई चुनौती?
    बस्तर ने नक्सलवाद के दौर में नेताओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की कई पीढ़ियों को हिंसा का दर्द झेलते देखा है। झीरम घाटी से लेकर भीमा मंडावी की हत्या तक की घटनाएं आज भी राजनीतिक इतिहास का हिस्सा हैं। अब सरकार सुरक्षा के पुराने ढांचे को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लेकिन बस्तर के अंदरूनी इलाकों में काम करने वाले जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता भी जरूरी है। क्योंकि नक्सलवाद के खिलाफ सफलता का असली मतलब तभी होगा, जब जनप्रतिनिधि बिना डर के गांवों तक पहुंच सकें और आम नागरिक भी सुरक्षित महसूस करें। बस्तर में बदलते हालात के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुरक्षा के पुराने दौर की जगह वास्तव में भयमुक्त बस्तर ले पाएगा?

  • राज्योत्सव में दिखेगी बदलते बस्तर की तस्वीर, वन संरक्षण और पर्यटन से रोजगार तक की झलक

    राज्योत्सव में दिखेगी बदलते बस्तर की तस्वीर, वन संरक्षण और पर्यटन से रोजगार तक की झलक

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में इस बार बस्तर की बदलती तस्वीर देखने को मिलेगी। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ‘बदलता बस्तरदृसंवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर अपनी प्रदर्शनी लगाएगा। इसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति के साथ बढ़ते पर्यटन और रोजगार के अवसरों से लेकर प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की पहल को प्रदर्शित किया जाएगा। राज्योत्सव की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ के अनुरूप प्रदर्शनी में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसरों पर विशेष जोर रहेगा।

    प्रदर्शनी में बस्तर के उन क्षेत्रों की झलक दिखाई जाएगी, जहां कभी नक्सलवाद के कारण पर्यटन गतिविधियां सीमित थीं और अब स्थानीय समुदाय पर्यटन से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। कांगेर घाटी की जंगल सफारी और गुफाओं के साथ स्टार गेजिंग के लिए प्रसिद्ध कोण्डागांव की पुष्पाल घाटी, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका और सुकमा के तुंगल डैम को मॉडल के जरिए दिखाया जाएगा। धुड़मारास  के धुरवा होमस्टे और देवगुड़ियों के संरक्षण के माध्यम से बस्तर की संस्कृति और पर्यटन से जुड़ी आजीविका को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    तुंगल कैफे चला रहीं मुख्यधारा में लौटीं 10 महिलाएं, कांगेर घाटी में युवाओं को रोजगार

    प्रदर्शनी में सुकमा का तुंगल कैफे महिला आत्मनिर्भरता की मिसाल के रूप में सामने आएगा। मुख्यधारा में लौटीं 10 महिलाएं मिलकर इस कैफे का संचालन कर रही हैं। वहीं, कांगेर घाटी में चक्रीय निधि से उपलब्ध कराए गए 35 जिप्सी वाहनों से लगभग 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। तुंगल में युवा नौका विहार और कयाकिंग जैसी गतिविधियों से आय अर्जित कर रहे हैं। स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में भी रोजगार मिल रहा है। प्रदर्शनी के जरिए बताया जाएगा कि किस तरह पर्यटन वनांचल के लोगों के लिए आजीविका का नया जरिया बन रहा है।

    काले हिरण की वापसी और गिद्ध संरक्षण के प्रयास भी दिखेंगे

    वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण होंगी। बारनवापारा में दशकों बाद काले हिरण की वापसी, औरापानी में गिद्ध संरक्षण और छत्तीसगढ़ के पहले रामसर स्थल कोपरा जलाशय के संरक्षण को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बारनवापारा में काले हिरण की वापसी का उल्लेख किया था। इसके अलावा धमतरी के ठेमली द्वीप को इको-पर्यटन केंद्र के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन और सह-अस्तित्व का संदेश दिया जाएगा। प्रदेश के राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय वृक्ष साल, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना और राजकीय तितली बनाए जाने के लिए अनुमोदित ऑरेंज ओकलीफ की जानकारी भी दर्शकों को मिलेगी।

    वनोपज से आजीविका बढ़ाने के प्रयासों की भी मिलेगी जानकारी

    प्रदर्शनी में लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन से वनवासियों की आय बढ़ाने के प्रयासों को भी दिखाया जाएगा। इसके लिए लघु वनोपज प्रसंस्करण इकाई, ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’  और छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड की गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाएगा। दर्शक यहां वन उत्पादों की जानकारी लेने के साथ उनकी खरीदारी भी कर सकेंगे।

    युवाओं के लिए होगा क्विज प्रतियोगिता, मिलेंगे पुरस्कार

    युवाओं और बच्चों के लिए वन, वन्यजीव और बस्तर पर आधारित प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की जाएगी। सही जवाब देने वालों को पुरस्कार मिलेंगे। वहीं, क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शक प्रदेश के इको-पर्यटन स्थलों, वहां पहुंचने के मार्ग, उपलब्ध सुविधाओं और बुकिंग की जानकारी अपने मोबाइल पर प्राप्त कर सकेंगे।

    मंडप के तीन द्वारों में दिखेगी आस्था, जनजातीय गौरव और टाइगर बॉय की झलक

    लगभग 88 गुणा 30 फीट में तैयार होने वाले मंडप में तीन विशेष द्वार बनाए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के वन मंदिर, जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका और बस्तर के प्रसिद्ध ‘टाइगर बॉय’ चेंदरू की स्मृति में चेंदरू द्वार शामिल होंगे। एलईडी स्क्रीन पर बस्तर में आए बदलाव पर आधारित लघु फिल्में भी दिखाई जाएंगी।

  • राज्यपाल  पटेल ने दिलाई राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ

    राज्यपाल पटेल ने दिलाई राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ

    भोपाल

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने लोकभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ दिलाई। उन्होंने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। राष्ट्रीय एकता दिवस शपथ समारोह लोकभवन के बैंक्वेट हॉल में शनिवार को आयोजित किया गया था।  

    इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उप सचिव  सुनील दुबे, विधि अधिकारी  उमेश कुमार वास्तव सहित लोकभवन में पदस्थ सभी अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     राज्यपाल  पटेल ने समारोह में लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के कृतित्व को प्रकाशित किया। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल ने आजादी के बाद रियासतों में बंटे देश को एकता के सूत्र में बांधा था। इसीलिए उन्हें लौहपुरुष कहा जाता है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत बनाने के सरदार पटेल के संस्कारों का परिवार एवं समाज में प्रसार किया जाना चाहिए।

    राज्यपाल  पटेल के नेतृत्व में लोकभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने की शपथ ली। उन्होंने सरदार पटेल की दूरदर्शिता और उनके योगदान का स्मरण किया। राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए स्वयं को समर्पित करने का संकल्प लिया। साथ ही, देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपना योगदान देने की शपथ ली। अधिकारियों-कर्मचारियों ने सत्यनिष्ठा से इस संकल्प का पालन करने और राष्ट्र की एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का भी प्रण लिया है।

     

  • शिक्षक भर्ती परीक्षा के पहले दिन 83.25 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति, 34,514 परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र जारी

    शिक्षक भर्ती परीक्षा के पहले दिन 83.25 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति, 34,514 परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र जारी

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1812 रिक्त संविदा पदों पर भर्ती के लिए आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) के पहले दिन अभ्यर्थियों में उत्साह देखने को मिला। यह परीक्षा 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक आयोजित की जा रही है। पहले दिन प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में कुल 83.25 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई।

    लोक शिक्षण संचालनालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा के पहले दिन प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में कुल 10 विषयों की परीक्षा आयोजित की गई। इसमें 7,025 अभ्यर्थी उपस्थित हुए, जबकि 1,177 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।

    विषयवार उपस्थिति के आंकड़ों के अनुसार शिक्षक गणित विषय में सर्वाधिक 90.25 प्रतिशत अभ्यर्थी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त व्याख्याता संस्कृत में 81.77 प्रतिशत, व्याख्याता सामाजिक विज्ञान में 84.87 प्रतिशत, व्याख्याता भौतिकी में 84.83 प्रतिशत, व्याख्याता जीव विज्ञान में 83.27 प्रतिशत, व्याख्याता इतिहास में 80.56 प्रतिशत, व्याख्याता रसायन में 77.07 प्रतिशत, व्यायाम शिक्षक में 76.9 प्रतिशत, व्याख्याता भूगोल में 64.29 प्रतिशत तथा व्याख्याता अर्थशास्त्र में 63.64 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई।

    34,604 अभ्यर्थियों ने किया आवेदन, 99.74 प्रतिशत को प्रवेश पत्र जारी

     इस भर्ती परीक्षा के लिए कुल 34,604 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इनमें से 34,514 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए हैं, जो कुल आवेदकों का 99.74 प्रतिशत है। आवेदन करने वालों में 20,779 महिला अभ्यर्थी (60 प्रतिशत) तथा 13,825 पुरुष अभ्यर्थी (40 प्रतिशत) शामिल हैं। इस प्रकार महिला आवेदकों की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक रही है। कुल आवेदकों में 332 दिव्यांग अभ्यर्थी भी शामिल हैं। 

     छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पहली बार आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा में प्रथम दिवस परीक्षार्थियों में अत्यधिक उत्साह देखा गया। परीक्षार्थियों ने बताया कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली, ओएमआर एवं पारंपरिक पेन-पेपर परीक्षा की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी, सटीक एवं प्रभावी है।

     कंप्यूटर द्वारा उत्तरों का स्वचालित मूल्यांकन होने के कारण कम समय में त्रुटिरहित परीक्षा परिणाम तैयार एवं घोषित किए जा सकेंगे। परीक्षार्थियों ने इसे राज्य शासन की एक सराहनीय पहल बताया। कंप्यूटर आधारित परीक्षा (ब्ठज्) में अभ्यर्थियों के उत्तर, उत्तर कुंजी, डिजिटल रिकॉर्ड एवं ऑडिट ट्रेल उपलब्ध होने से परीक्षा प्रक्रिया अन्य परीक्षा प्रणालियों की तुलना में अधिक पारदर्शी है। परीक्षार्थियों ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में अन्य भर्ती परीक्षाओं का आयोजन भी यथासंभव कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा।

  • मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने स्वर्गीय विधायक  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को दी अंतिम विदाई

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वर्गीय विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को दी अंतिम विदाई

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज बालोद जिले के ग्राम भेंडरा पहुंचे, जहां उन्होंने अहिवारा विधायक स्वर्गीय  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री  साय उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

    मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन पूरे क्षेत्र की जनता और व्यक्तिगत रूप से उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है। स्वर्गीय  कोर्सेवाड़ा का सरल व्यक्तित्व, आत्मीय व्यवहार और जनसेवा के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। 

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान देने तथा परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

  • कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और अनुभव विभाग की अमूल्य धरोहर, सेवानिवृत्त कार्मिकों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा : बंशीधर तिवारी

    कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और अनुभव विभाग की अमूल्य धरोहर, सेवानिवृत्त कार्मिकों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा : बंशीधर तिवारी

    देहरादून

     सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में लगभग 30 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने के बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी  रईस अहमद सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर विभाग की ओर से आयोजित विदाई समारोह में महानिदेशक  बंशीधर तिवारी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया और  रईस अहमद के दीर्घकालीन सेवाकाल की सराहना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।

    इस अवसर पर महानिदेशक  बंशीधर तिवारी ने कहा कि किसी भी विभाग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाए रखने में प्रत्येक कार्मिक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी विभागीय व्यवस्था की मजबूत कड़ी होते हैं।  रईस अहमद ने लगभग तीन दशकों तक पूरी निष्ठा, लगन और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया है। उनका सेवाकाल अन्य कार्मिकों के लिए भी प्रेरणादायी है।

    उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन व्यक्ति का अनुभव, व्यवहार और विभाग के प्रति उसका योगदान सदैव याद रखा जाता है। उन्होंने  रईस अहमद के स्वस्थ, सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    समारोह में अपर निदेशक  आशीष त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक  नितिन उपाध्याय, उप निदेशक  मनोज वास्तव,  रवि बिजारनिया,  बद्री चंद सहित विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं  रईस अहमद के परिजन उपस्थित रहे। सभी ने उनके साथ बिताए कार्यकाल के अनुभव साझा किए और उनके सुखद भविष्य की कामना की।

    समारोह का माहौल आत्मीय और भावुक रहा। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने  रईस अहमद को स्मृति चिह्न एवं शुभकामनाएं देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी।

    इस अवसर पर सूचना कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कैलाश रावत, उपाध्यक्ष प्रशांत रावत, संजय कुमार, महामंत्री  अंकित चौहान, कोषाध्यक्ष राकेश कुमार धीमान, संयुक्त मंत्री मती पारूल चौधरी आदि उपस्थित थे।

     

  • छत्तीसगढ़ पुलिस में नौकरी का अवसर, 128 आरक्षक पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू

    छत्तीसगढ़ पुलिस में नौकरी का अवसर, 128 आरक्षक पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू

    जगदलपुर.

    छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले में बस्तर फाइटर्स (विशेष कार्यपालिक बल) के अंतर्गत फाइटर आरक्षक के 128 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

    जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार, जिले के स्थानीय निवासी पात्र अभ्यर्थी निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकेंगे। जारी विज्ञापन के मुताबिक, भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 2 नवंबर 2026 से शुरू होगी। इच्छुक अभ्यर्थी 12 दिसंबर 2026 को शाम 5 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। दंतेवाड़ा जिले में कुल 128 पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें वर्गवार पदों का विवरण इस प्रकार है।

    • अनारक्षित वर्ग – 07 पद
    • अन्य पिछड़ा वर्ग (अपिव) – 17 पद
    • अनुसूचित जाति (अजा) – 11 पद
    • अनुसूचित जनजाति (अजजा) – 93 पद

    इन स्थानों पर जमा कर सकेंगे आवेदन
    अभ्यर्थी अपना आवेदन पत्र कार्यालय पुलिस अधीक्षक, जिला दंतेवाड़ा, कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), किरंदुल तथा थाना गीदम में जमा कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदन पत्र पंजीकृत भारतीय डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक, जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, पिन कोड 494449 के पते पर भी भेजे जा सकते हैं।

    शारीरिक मापदंड और परीक्षा की जानकारी यहां मिलेगी
    भर्ती से संबंधित आवेदन पत्र का प्रारूप, शारीरिक मापदंड, शारीरिक योग्यता परीक्षा, लिखित परीक्षा एवं अन्य जरूरी जानकारी जिले के सभी थाना, चौकी, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सूचना पटल पर उपलब्ध कराई जाएगी। भर्ती के दौरान छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) 1994 के प्रावधानों तथा सामान्य प्रशासन विभाग के समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन किया जाएगा।

    वेबसाइट पर भी देख सकेंगे भर्ती की जानकारी
    भर्ती से जुड़े संपूर्ण नियम एवं अन्य विस्तृत जानकारी छत्तीसगढ़ पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट https://cgpolice.gov.in और दंतेवाड़ा पुलिस की वेबसाइट https://dantewada.cgpolice.gov.in पर उपलब्ध है। बस्तर क्षेत्र के स्थानीय युवाओं के लिए पुलिस विभाग में सेवा का यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।