Category: छत्तीसगढ़

  • छत्तीसगढ़ जनजातीय आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मंडावी ने किया शुभारंभ

    छत्तीसगढ़ जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी ने किया शुभारंभ

    आदि परब’ का रंगारंग आगाज

    छत्तीसगढ़ जनजातीय आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी ने किया शुभारंभ

    आदि रंग, परिधान और हाट के रंगों में रंगा जनजातीय परब

    जनजातीय समाज का रैंप शो में दिखा उत्साह

    रायपुर
    राजधानी में आदि परब का रंगारंग आज आगाज हुआ। जनजातीय समाज के इस दो दिवसीय उत्सव में छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकार शामिल हो रहे हैं। आदि परब की थीम ’परम्परा से पहचान तक’ रखी गई है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। कल 14 मार्च को आदि परब के समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम सहित जनजातीय समाज के पदाधिकारी तथा अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

    आदि परब का शुभारंभ नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में छत्तीसगढ़ राज्य जनजातीय आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी ने किया। राज्य अंत्याव्यावसायी आयोग के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार बेहरा, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, टीआरटीआई के संचालक श्री हिना अनिमेष नेताम, श्रीमती गायत्री नेताम सहित अन्य विभागीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में प्रदेश से जनजातीय समुदाय उपस्थित थे। 

        आदि परब के शुभारंभ अवसर पर जनजातीय समाज के आकर्षक परिधान से सजे-धजे युवाओं ने रैंप में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया। इसे लोगों ने उत्साह के साथ आनंद लिया। आदि परब में जनजातीय समाज के खान-पान, वेशभूषा, विभिन्न कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जो लोगों का आकर्षण का केन्द्र रही। “आदि रंग – जनजातीय चित्रकला महोत्सव” का आयोजन भी किया जा रहा है। इसी तरह “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

  • छत्तीसगढ़ के सरकारी महाविद्यालयों में 700 नए पदों पर भर्ती की शुरुआत

    छत्तीसगढ़ के सरकारी महाविद्यालयों में 700 नए पदों पर भर्ती की शुरुआत

    छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में 700 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ

    सहायक प्राध्यापक के 625, ग्रंथपाल के 50 एवं क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर होगी नियुक्ति

    रायपुर
    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की विशेष पहल पर राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण एवं सहायक सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। विभाग द्वारा सहायक प्राध्यापक के 625 पद, ग्रंथपाल के 50 पद तथा क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी।

    उच्च शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों का निर्धारण करते हुए उनका विस्तृत रोस्टर ब्रेक-अप भी तैयार कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को 24 फरवरी 2026 को विस्तृत जानकारी के साथ पत्र भी भेजा जा चुका है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायन शास्त्र, वनस्पति शास्त्र एवं प्राणीशास्त्र के 50-50 पदों, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल के 25-25 पदों, कम्प्यूटर एप्लीकेशन के 15, वाणिज्य के 75, विधि के 10 पदों पर भर्ती के साथ ही क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद तथा ग्रंथपाल के 50 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी।

    विभाग द्वारा इन पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, भर्ती नियम, श्रेणीवार पदों की संख्या, परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम तथा विज्ञापन प्रारूप भी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को प्रेषित कर दिया गया है। आयोग द्वारा आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को पूर्ण करने के पश्चात भर्ती संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इन पदों पर नियुक्ति से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ता मिलेगी तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी।

    यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था सहायक प्राध्यापक एवं प्राध्यापक पदों के साथ-साथ ग्रंथपाल तथा क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर भी लागू है, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की शैक्षणिक बाधा का सामना न करना पड़े। विभाग द्वारा नियुक्त अधिकांश अतिथि शिक्षक पीएच.डी. उपाधिधारी हैं तथा नेट एवं सेट जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं से योग्य हैं। ये शिक्षक वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान कर रहे हैं तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

  • मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने पूर्व विधायक मती मंगली बाई रावटे के निधन पर  जताया गहरा शोक

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व विधायक मती मंगली बाई रावटे के निधन पर जताया गहरा शोक

    रायपुर
    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा की पूर्व सदस्य मती मंगली बाई रावटे के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
           मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय मंगली बाई रावटे अत्यंत सरल, विनम्र और समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व की धनी थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज के लोगों के सुख-दुःख में सदैव सहभागिता निभाते हुए सेवा और सहयोग की भावना से कार्य किया।
            मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक प्रतिबद्धता और सेवा का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता था। उनके निधन से समाज ने एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी कमी सदैव महसूस की जाएगी।
    मुख्यमंत्री  साय ने सदन की ओर से दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करें तथा परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

  • मंत्री देवांगन के विभागों के लिए 1823 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित

    मंत्री देवांगन के विभागों के लिए 1823 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित

    मंत्री  लखनलाल देवांगन के विभागों के लिए 01 हजार 823 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित

    राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रूपए से अधिक निवेश प्रस्ताव

    भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया-जिससे राजस्व 20 प्रतिशत बढ़ा* 

    श्रमिक आवास एवं ई-रिक्शा की राशि 01 लाख रूपए से बढ़ाकर  1.50 लाख रूपए कर दी गई

    अगले वर्ष से श्रमिकों के 200 बच्चों को उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला हेतु अभिनव पहल 

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वाणिज्य एवं उद्योग विभाग तथा श्रम विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 01 हजार 823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 01 हजार 567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रूपए, श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रूपए शामिल हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश मंे नई औद्यागिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। 

    उद्योग विभाग

    उद्योेग मंत्री  देवांगन नेे कहा कि इस बजट में सरकार द्वारा राज्य के औद्योगिक विकास हेतु वाणिज्य एवं उद्योग विभाग को बजट में रुपए 1750 करोड़ आबंटित किया गया है। इसमें रूपए 652 करोड़ उद्योगों को अनुदान हेतु तथा औद्योगिक प्रयोजन हेतु भू-अर्जन, भूमि विकास तथा औद्योगिक अधोसंरचना विकास के लिए लगभग रूपए 700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि औद्योगिक भूमि आबंटन को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि राजस्व में भी 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है।

    इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य द्वारा 140 से अधिक निवेशकों को इन्विटेशन टू इन्वेस्ट जारी किया गया है। राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल्स, आईटी, बीपीओ तथा क्लीन एनर्जी जैसे विविध और उभरते हुए क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

    मंत्री  देवांगन नेे कहा कि विगत एक वर्ष में 951 उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके द्वारा रु 8000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया एवं हमारी सरकार आने के बाद लगभग 45000 से अधिक रोजगार उत्पन्न हुए। राज्य में बस्तर से सरगुजा तक 23 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों एवं पार्कों का निर्माण किया जा रहा है जिनमें से 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना है। राज्य शासन सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास हेतु प्रतिबद्ध है एवं इस दिशा में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उनके जीवन को सरल करने की दृष्टि से बिलासपुर जिले में 2 कामकाजी महिला हॉस्टल निर्माणाधीन है, जिसके लिए बजट में रुपए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। निजी भूमि पर औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित करने की दृष्टि से अधोसंरचना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान औद्योगिक विकास नीति में किया गया है। इससे राज्य केन औद्योगिक अधोसंरचना विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री के पहल पर स्टार्ट-अप मिशन के लिए रूपए 100 करोड़ का प्रावधान बजट के अंतर्गत किया है।

    श्रम विभाग 

    मंत्री  देवांगन सदन में कहा कि मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में श्रम विभाग छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 प्रवर्ग के असंगठित श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के लिये वर्ष 2026-27 के बजट में कुल रुपये 128 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष से लगभग 3 करोड़ अधिक है। श्रमिक बच्चों को उत्कृष्ट स्कूल में शिक्षा की अभिनव पहल करते हुए प्रदेश में 96 श्रमिकों के बच्चों को 6वीं क्लास में डी.पी.एस. राजकुुमार कॉलेज, कांगेर वैली एकेडमी में निःशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला देने की घोषणा की थी, इस पर अमल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा उपकर के माध्यम से संकलित राशि से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवार के लिये उपलब्ध निधि से 60 प्रवर्ग में पंजीकृत 32.58 लाख निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं के क्रियान्वयन में वर्ष 2025 में लगभग रूपये 387 करोड़ से अधिक राशि कल्याणकारी योजनाओं में व्यय किया गया है। वर्ष 2026-27 में पंजीकृत 02.01 लाख संगठित श्रमिकों के लिये 14 योजनाओं हेतु बजट में राज्य शासन के अनुदान हेतु रुपये 06 करोड़ प्रावधान किया गया है। श्रम मंत्री ने बताया कि श्रम विभाग के मुख्य दायित्व विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत श्रमिकों के हित संरक्षण किया जाना है, जिसके पालन हेतु श्रमायुक्त संगठन में रुपये 30 करोड़ 63 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी। 

    औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 10 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। संचालनालय द्वारा कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कारखानों का लायसेंस नवीनीकरण, आनसाइट आपात योजना एवं कारखाना भवनों के नक्शे आदि का निराकरण भी आनलाईन ही किया जा रहा है। इंडस्ट्रियल हाईजिन लैब हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 05 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है।  वर्ष 2026-27 हेतु कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए रुपये 76 करोड़ 38 लाख का प्रावधान किया गया है। 

    वाणिज्यक कर (आबकारी) विभाग

    मंत्री  देवांगन नेे कहा कि विभागीय दक्षता बढ़ाने हमने इस वित्तीय वर्ष में 10 जिला अधिकारी, 85 आबकारी उपनिरीक्षक की भर्ती की है तथा 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण पर है। वर्ष 2024-25 हेतु निर्धारित किये गये 10500 करोड़ (दस हजार पांच सौ करोड़) आबकारी राजस्व लक्ष्य के विरूद्ध 10145 करोड़ (दस हजार एक सौ पैतालीस करोड़) का आबकारी राजस्व अर्जित किया गया जो कि इससे पूर्व के वित्तीय वर्ष 2023-24 में अर्जित आबकारी राजस्व 8430 करोड़ (आठ हजार चार सौ तीस करोड़) की तुलना में 20.35 प्रतिशत अधिक है तथा राज्य के कुल कर राजस्व प्राप्ति का लगभग 11 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त नीति एवं विभागीय कार्ययोजना से आबकारी राजस्व में सुनिश्चित वृद्धि परिलक्षित हुई है। अतः आबकारी विभाग के लिये वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 12000 करोड़ (बारह हजार करोड़) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके विरूद्ध 28 फरवरी, 2026 तक रूपये 9660.00 करोड़ (नौ हजार छः सौ साठ करोड़) का राजस्व प्राप्त हो चुका है, जो कि कुल राजस्व लक्ष्य का 80.50 प्रतिशत है।

    मंत्री  देवांगन नेे कहा कि वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग में प्रशासनिक सुविधा एवं दक्षता हेतु नवा रायपुर में पृथक कम्पोजिट कार्यालय भवन का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। कम्पोजिट कार्यालय भवन में आबकारी मुख्यालय के साथ-साथ छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड, छत्तीसगढ़ स्टेट ब्रेवरेज कारपोरेशन लिमिटेड, राज्य स्तरीय उड़नदस्ता कार्यालय, राज्य आबकारी प्रशिक्षण संस्थान, रासायनिक प्रयोगशाला एवं समान प्रांगण में प्रशिक्षु कर्मचारियों हेतु छात्रावास एवं प्रशिक्षण स्थल का निर्माण प्रस्तावित है। आबकारी विभाग के कम्पोजिट कार्यालय भवन निर्माण हेतु बजट में 15 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

  • नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार :  रामविचार नेताम

    नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार : रामविचार नेताम

    मंत्री  रामविचार नेताम के विभागों के लिए 50 हजार 537 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित

    नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार :  रामविचार नेताम 

    “संकल्प” से ही हासिल करेंगे विकास की सिद्धि

    मत्स्य बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ अब देश में 5वें स्थान पर 

    नवा रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय के अध्ययन के लिए आ रहे देश-विदेश के विशेषज्ञ

    बीजापुर में बनेगा 500 सीटर आवासीय प्रयास विद्यालय

    रायपुर
      छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कृषि एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 50 हजार 537 करोड़ 98 लाख 68 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें कृषि विभाग के लिए 7075 करोड़ 90 लाख 56 हजार रूपए, पशुपालन विभाग के लिए 656 करोड़ 12 लाख 49 हजार रूपए, मछली पालन विभाग के लिए 110 करोड़ 67 लाख 30 हजार रूपए की अनुदान मांगें शामिल हैं। इसी प्रकार आदिम जाति कल्याण के लिए 157 करोड़ 05 लाख 58 हजार रूपए, अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए 39,568 करोड़ 18 लाख 20 हजार रूपए, अनुसूचित जनजाति उपयोजना से संबंधित लोक निर्माण कार्य-सड़कें और पुल के लिए 1596 करोड़ 89 लाख रूपए, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा से संबंधित व्यय के लिए 447 करोड़ 30 लाख रूपए, अनुसूचित जनजाति उपयोजना से संबंधित लोक निर्माण कार्य-भवन के लिए 215 करोड़ 69 लाख 19 हजार रूपए, अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता के लिए 453 करोड़ 91 लाख 68 हजार रूपए तथा अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत नगरीय निकायों को वित्तीय सहायता के लिए 256 करोड़ 24 लाख 68 हजार रूपए शामिल हैं। 

    कृषि एवं संबद्ध विभागों तथा अनुसूचित जनजाति विकास विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए  रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मूलभाव खेती-किसानी से जुड़ा है। यह हमारी आत्मा में बसी हुई है। राज्य में 70-80 प्रतिशत लोगों की कृषि पर निर्भरता है। छत्तीसगढ़ जनजातीय बाहुल्य प्रदेश भी है। राज्य में विश्व स्तरीय जनजातीय संग्रहालय बनाकर हमने इतिहास में जगह नहीं पाने वाले जनजातीय नायकों को स्थान दिया है। हमारे इस विश्व स्तरीय डिजिटल संग्रहालय के अध्ययन के लिए देश-विदेश के विशेषज्ञ और अधिकारी आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर अमन-चैन और खुशहाली के रास्ते की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को हमने “संकल्प” की थीम पर तैयार किया है। इस “संकल्प” से ही हम राज्य के विकास की सिद्धि को हासिल करेंगे। 

     नेताम ने सदन में कहा कि कृषि उन्नति योजना के माध्यम से हम राज्य के किसानों का धान 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीद रहे हैं। धान के अलावा अन्य फसलें लेने वाले किसानों को हर साल 10 हजार रूपए की आदान राशि दे रहे हैं। इससे दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में लगातार लिए गए कल्याणकारी फैसलों से खेती अब लाभ का व्यवसाय हो गया है। साथ ही खेती का रकबा बढ़ रहा है, किसान समृद्ध और किसान खुशहाल हो रहे हैं। 

    आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में खाद्य पोषण सुरक्षा और बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। प्रदेश के कम वर्षा वाले क्षेत्रों एवं पड़ती भूमि में मसूर, तिवरा, चना जैसे दलहनी फसलों की खेती के लिए उन्नत बीज तैयार करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक फसली जमीन को दो फसली बनाने के काम को अभियान के रूप लेना चाहिए। जैविक खेती को बढ़ावा देने हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। पहले भी हमारी सरकार ने गरियाबंद, दंतेवाड़ा और सुकमा को जैविक जिला घोषित किया है, शेष जिलों में भी जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में केन्द्र सरकार के सहयोग से सरसों, अरहर, मूंग और उड़द की खरीदी समर्थन मूल्य पर करने की व्यवस्था की जा रही है। 

     नेताम ने सदन में बताया कि किसानों के लिए हमारी सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। वहीं प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की सोच के अनुरूप किसानों को समृद्ध बनाने कम पानी में अधिक फसल लेने की तकनीकों की जानकारी भी दी जा रही है। किसानों को “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। 

     नेताम ने कहा कि राज्य में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए सभी काम किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूध का उत्पादन बढ़ाने एनडीडीबी के साथ एमओयू किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में हरे चारे के विकास के लिए 7.50 करोड़, चिलिंग प्लांट के लिए 50 लाख, शूकर वितरण के लिए 5 करोड़ और बकरी वितरण के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में मत्स्य बीजों के उत्पादन में बेहतर काम हो रहा है। छत्तीसगढ़ इसके उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर अब 6वें से 5वें स्थान पर आ गया है। उन्होंने बताया कि धमधा के राजपुर में मत्स्य कॉलेज के लिए भवन और छात्रावास निर्माण के लिए इस बजट में 3 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 

     नेताम ने अनुसूचित जनजाति विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के जवाब में कहा कि वनांचलों में बड़ी संख्या में आश्रम-छात्रावासों के भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। विगत दो वर्षों में 167 आश्रम-छात्रावास भवन स्वीकृत किए गए हैं, जिनके निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की अति पिछड़ी जनजातियों को आत्मनिर्भर बनाने कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में बीजापुर में 500 सीटर आवासीय प्रयास विद्यालय बनाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से हमारी सरकार प्रदेश के चिन्हांकित क्षेत्रों में जनजातीय वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इस योजना के तहत अनेक गांवों का कायाकल्प हुआ है। 
            
    कृषि एवं संबद्ध विभागों तथा अनुसूचित जनजाति विकास विभाग से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा में विधायकगण सर्व पुन्नुलाल मोहले, व्यास कश्यप, मोतीलाल साहू, कवासी लखमा, धर्मजीत सिंह, जनक ध्रुव, तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम, धरमलाल कौशिक, रामकुमार यादव, दलेश्वर साहू, कुंवर सिंह निषाद, सु लता उसेंडी, मती अंबिका मरकाम, मती भावना बोहरा और मती सावित्री मंडावी ने भाग लिया।

  • समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित :  वित्त मंत्री  ओपी चौधरी

    समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

    वित्त मंत्री  ओपी चौधरी के विभागों के लिए 11 हजार 470 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित

    समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित :  वित्त मंत्री  ओपी चौधरी

    जीएसटी 2.0 से आम जनता को राहत, कर राजस्व में भी रिकॉर्ड वृद्धि

    पंजीयन विभाग में बड़े सुधार, रजिस्ट्री प्रक्रिया हुई सरल और पारदर्शी 

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्त मंत्री  ओपी चौधरी के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 11 हजार 470 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इनमें वित्त विभाग के लिए 9 हजार 630 करोड़ 30 लाख 20 हजार रुपए, आवास एवं पर्यावरण विभाग के लिए 01 हजार 247 करोड़ रुपए, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के लिए 82 करोड़ 49 लाख 60 हजार रुपए तथा वाणिज्यिक कर विभाग के लिए 510 करोड़ 82 लाख 70 हजार रुपए शामिल हैं।

    अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और समावेशी विकास के माध्यम से राज्य को मजबूत आर्थिक आधार देना है। 

    आवास, पर्यावरण और नवा रायपुर के विकास पर सरकार का फोकस

    छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आवास एवं पर्यावरण विभाग की मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री  ओपी चौधरी ने विभागीय उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के विकास की मजबूत नींव सुरक्षित और सम्मानजनक आवास पर टिकी होती है, इसलिए राज्य सरकार नागरिकों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के समय गृह निर्माण मंडल की 442 करोड़ रुपये की 3219 संपत्तियां लंबे समय से अविक्रित थीं और मंडल पर शासकीय कॉलोनी निर्माण के लिए 735 करोड़ रुपये का ऋण था। राज्य शासन ने ऋण के एकमुश्त भुगतान के लिए बजट में व्यवस्था कर मंडल की वित्तीय स्थिति में सुधार किया।

    मंत्री  चौधरी ने कहा कि लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की गई है। इसके तहत अब तक 1410 संपत्तियों का लगभग 210 करोड़ रुपये में विक्रय किया जा चुका है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए मंडल ने मांग आधारित निर्माण प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत पर्याप्त बुकिंग मिलने के बाद ही नए आवासों का निर्माण शुरू किया जाएगा।

    मंत्री  चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का उद्देश्य केवल मकान बनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना है। मंडल द्वारा बेहतर वित्तीय स्थिति में आने उपरांत प्रदेश भर में नवीन प्रोजेक्ट प्रारंभ किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल द्वारा प्रदेश के 33 में से 27 जिलों में 3069 करोड़ के 78 नवीन प्रोजेक्ट की लॉचिंग  की गई है जिसके अंतर्गत 16782 नवीन प्रापर्टी निर्माण का लक्ष्य है। जल्द ही मंडल द्वारा शेष जिलों में भी नवीन प्रोजेक्ट प्रारंभ किया जावेगा। मंडल के इस प्रयास को जनता का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। बुकिंग प्रारंभ करने के लिए  राज्य स्तरीय आवास मेला का आयोजन नवम्बर 2025 में किया गया, जिस दौरान 305 करोड़ की 1477 संपत्ति की बुकिंग केवल तीन दिनों में प्राप्त हुई।

    पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए मंत्री  ओपी चौधरी ने बताया कि विगत दोे वर्ष में पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। परिवहन के दौरान कच्चे माल, फ्लाई ऐश एवं अन्य ठोस अपशिष्ट के उड़ने एवं गिरने से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिये छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) जारी किया गया है, जिसमें फ्लाई ऐश के समुचित प्रकार से ढककर परिवहन किये जाने का प्रावधान है। उक्त एस.ओ.पी. 01 अगस्त 2024 से प्रभावशील है। एस.ओ.पी. के उल्लंघन की लगातार मानिटरिंग की जा रही है तथा उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की जाती है। 

    उद्योगों द्वारा जनित फ्लाई ऐश के निष्पादन के मानिटरिंग हेतु जी.पी.एस. तथा जियोटैगिंग के साथ फ्लाई ऐश के परिवहन/भू-भराव की मानिटरिंग हेतु इण्डस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट एण्ड मानिटरिंग सिस्टम (आई.डब्ल्यू.एम.एम.एस.) विकसित किया गया है। आई.डब्ल्यू.एम.एम.एस. प्रारंभ होने के पश्चात् प्रदेश में कुल 1 लाख 44 हजार 291 ट्रीप की गई है।

    छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा राज्य में स्थापित होने वाले उत्सर्जन और प्रदूषण की रियल-टाईम निगरानी करना और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से CG Nigrani  पोर्टल विकसित किया गया है। इस पोर्टल पर कुल 124 उद्योगों को इस सिस्टम से जोड़ा गया है। इन उद्योगों में IoT आधारित डिवाइस लगाये गये हैं, जो Continuous Emission Monitoring System (CEMS), Effluent Quality Monitoring Systems और Continuous Ambient Air Quality Monitoring System  के माध्यम से डेटा एकत्रित करते हैं। यह सिस्टम 17 प्रकार के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों में स्थापित किया गया है।

    मंत्री  चौधरी ने कहा कि CG Nigrani  सिस्टम की मदद से उद्योगों के उत्सर्जन और प्रदूषण के स्तर की लगातार ऑनलाईन निगरानी प्रारंभ की गई है। यदि किसी उद्योग का उत्सर्जन निर्धारित अनुमेय सीमा (Permissible Limit) से अधिक हो जाता है तो यह सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है। इसके अलावा यदि प्रदूषण मानकों का उल्लंघन होता है तो इस सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को नोटिस जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य केवल आधुनिक विकास की दिशा में ही नहीं बढ़ रहा है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के माध्यम से सिरपुर क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर में HNLU, IIIT, IIM, जैसे प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हो रहे हैं। हमने यह प्रयास किया कि नवा रायपुर को न केवल राज्य का बल्कि देश के शैक्षणिक केन्द्र के रूप में विकसित किया जाये। यह बताते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि NIFT] NIELIT] NFSU  जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की स्थापना भी नवा रायपुर में होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि नरसी मोनजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान (NMIMS) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो चुका है और बहुत शीघ्र इसके कार्य प्रारंभ हो जायेंगे। इस तरह के संस्थान आने से न केवल राज्य के छात्रों को लाभ मिलेगा बल्कि पूरे देश में नवा रायपुर शैक्षणिक केन्द्र के रूप में अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज करायेगा।

    मंत्री  चौधरी ने कहा कि हमने अपने संकल्प पत्र में राज्य राजधानी क्षेत्र स्थापित करने का उल्लेख किया था। यह हमारे लिये हर्ष और गर्व दोनों का विषय है कि हमने राज्य राजधानी क्षेत्र अधिनियम बनाकर इस सदन के माध्यम से उसे पारित कराया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ राज्य राजधानी क्षेत्र का गठन भी हो चुका है। जिसका आज विधानसभा में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पहली बैठक हुई है। 

    वाणिज्यिक कर (जी.एस.टी) विभाग

    छत्तीसगढ़ विधानसभा में वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से जीएसटी 2.0 लागू कर, कर की दरों  का युक्तियुक्तकरण किया गया है। 

    मंत्री  चौधरी ने बताया कि जीएसटी राजस्व संग्रह के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य के जीएसटी राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर रहा। उन्होंने बताया कि व्यापार को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। 1 अप्रैल 2025 से पेट्रोल पर 1 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। वहीं राज्य में आंतरिक ई-वे बिल की सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे लगभग 26 प्रतिशत व्यापारियों को लाभ होगा और अनुपालन लागत में करीब 54 प्रतिशत की कमी आएगी।

    मंत्री  चौधरी ने बताया कि करदाताओं की सुविधा के लिए राज्य के सभी 33 जिलों में जीएसटी कार्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें 6 नए क्षेत्रीय कार्यालय और 3 नई सर्किल शाखाएं शामिल हैं। इसके अलावा व्यापारियों को जीएसटी संबंधी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने के लिए राज्य स्तरीय जीएसटी कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है।

    मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि जीएसटी के आठ वर्ष पूरे होने पर सरकार ने जीएसटी 2.0 के रूप में व्यापक कर सुधार लागू किए हैं, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है। खाने-पीने की वस्तुओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है, कपड़ों पर टैक्स 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है और सीमेंट पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे 1000 वर्गफुट का घर बनाने पर लगभग 1.5 लाख रुपये की बचत हो रही है। इसके अलावा मोटरसाइकिल, कार, फ्रिज, टीवी और एसी जैसे उपभोक्ता उत्पादों पर भी जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। इससे मोटरसाइकिल पर 8 से 12 हजार रुपये, छोटी कार पर 60 हजार से 1 लाख रुपये और टीवी-एसी पर 3 हजार से 25 हजार रुपये तक की बचत संभव हुई है।

    मंत्री  चौधरी ने बताया कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे टूथपेस्ट, साबुन, साइकिल, रसोई गैस, डिटरजेंट और बर्तनों पर टैक्स घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे एक मध्यमवर्गीय परिवार को सालाना 25 से 40 हजार रुपये तक की बचत हो रही है।  कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए भी राहत दी गई है। ट्रैक्टर पर करीब 1.20 लाख रुपये और हार्वेस्टर पर लगभग 1.90 लाख रुपये की राहत दी गई है, वहीं कृषि उपकरण, खाद और बीजों पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। 
    मंत्री  चौधरी ने कहा कि जीएसटी 2.0 का उद्देश्य केवल कर व्यवस्था को सरल बनाना नहीं है, बल्कि आम जनता के खर्च को कम करना, किसानों और कारीगरों को सशक्त बनाना और छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास को नई गति देना है।

    पंजीयन विभाग में बड़े सुधार, रजिस्ट्री प्रक्रिया हुई सरल और पारदर्शी: वित्त मंत्री ओपी चौधरी

    छत्तीसगढ़ विधानसभा में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि पंजीयन विभाग राज्य का तीसरा सबसे बड़ा राजस्व अर्जक विभाग है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक यह विभाग जटिल प्रक्रियाओं, पुरानी व्यवस्थाओं और तकनीकी पिछड़ेपन से प्रभावित रहा, जिसके कारण आम नागरिकों को रजिस्ट्री कराने के लिए कई कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे और बिचौलियों की भूमिका बढ़ जाती थी। कई स्थानों पर रजिस्ट्री कार्यालयों में नागरिकों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधा के लिए रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे जिलों में रजिस्ट्री कार्यालयों की संख्या बढ़ाई गई है। साथ ही वीजा सेंटर की तर्ज पर 10 स्मार्ट रजिस्ट्री ऑफिस स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें नवा रायपुर, तिल्दा और रायगढ़ में कार्यालय प्रारंभ हो चुके हैं। आम जनता को राहत देने के लिए पारिवारिक दान पत्र, हकत्याग पत्र और बंटवारा नामे में पंजीयन शुल्क घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया गया है। साथ ही गाइडलाइन दर से अधिक मूल्य पर सौदा होने की स्थिति में अतिरिक्त पंजीयन शुल्क समाप्त किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि सुधार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी और पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी तथा जनसुविधा के माध्यम से छत्तीसगढ़ को सुशासन का आदर्श राज्य बनाने का लक्ष्य है।

    वित्त विभाग

    छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में वित्त विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। 

    राज्य के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए “छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड” का गठन किया गया है। इस फंड में वर्तमान में 50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है तथा आगामी वर्ष के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में संचित शोधन निधि का आकार 8 हजार 875 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो कुल अवशेष ऋणों का लगभग 7 प्रतिशत है। इसी तरह राज्य सरकार की गारंटी वाले ऋणों की देनदारियों के प्रबंधन के लिए गारंटी मोचन निधि में अब तक 1 हजार 32 करोड़ रुपये निवेशित किए गए हैं तथा बजट में 125 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।

    वित्त मंत्री ने बताया कि विभाग के बजट में मुख्य रूप से शासकीय सेवकों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के लिए प्रावधान किया गया है। इसमें पेंशन, परिवार पेंशन, पेंशन कम्यूटेशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और एनपीएस में नियोक्ता अंशदान शामिल हैं।

    वित्त मंत्री ने बताया कि भविष्य के पेंशन दायित्वों के बेहतर प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ पेंशन निधि अधिनियम 2025 लागू कर पेंशन फंड की स्थापना की है। वर्तमान में इस निधि में 1 हजार 121 करोड़ रुपये निवेशित हैं और आगामी वर्ष के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। अंत में वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सकारात्मक सोच के साथ हर क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य किया जा रहा है।

  • साय कैबिनेट ने कर्मचारी चयन मंडल और धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को दी मंजूरी

    साय कैबिनेट ने कर्मचारी चयन मंडल और धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को दी मंजूरी

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज विधानसभा स्थित उनके प्रतिकक्ष में कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्रदेश में धर्मांतरण रोकने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय विधेयक को मंजूरी दी गई।

    बैठक में लिए गए ये फैसले –
    मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय विधेयक 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति व साधनों, अनुचित प्रभाव या मिथ्या निरूपण पर प्रभावी ढंग से रोक लगाना है। मंत्रिपरिषद द्वारा विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित प्रकरणों को न्यायालय से वापस लिए जाने के संबंध में गठित मंत्रिपरिषद की उप-समिति द्वारा अनुशंसित 13 प्रकरणों को न्यायालय से वापस लिए जाने का अनुमोदन किया गया। मंत्रिपरिषद द्वारा अपारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों पर आधारित संयंत्रों व परियोजनाओं के लिए अनुदान की दरों का निर्धारण किए जाने के प्रस्ताव पर सहमति दी गई।

    क्रेडा द्वारा सोलर हाईमास्ट संयंत्र वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए 01 लाख 50 हजार रूपए का राज्य अनुदान तथा वर्ष 2026-27 एवं आगामी वर्षाें के लिए निविदा दर का 30 प्रतिशत अथवा 01 लाख 50 हजार रूपए जो भी कम हो, प्रस्तावित किया गया है। इसी तरह घरेलू बॉयो गैस संयंत्र न्यूनतम 2 से 6 घन मीटर के लिए वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में 9 हजार रूपए प्रति संयंत्र तथा वर्ष 2026-27 एवं आगामी वर्षाें के लिए 9 हजार रूपए प्रति संयंत्र सभी क्षमताओं के लिए प्रस्तावित किया गया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इससे पंजीयन पर प्रभार्य उपकर शुल्क समाप्त हो जाएगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्त पोषण के सम्पत्ति के अंतरण पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत की दर से उपकर अधिरोपित किया गया था। वर्तमान में राजीव गांधी मितान क्लब योजना संचालित नहीं है, इस कारण पंजीयन पर अतिरिक्त उपकर शुल्क को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

    मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।    मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (संशोधन) विधेयक 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य शासन के विभिन्न कार्यालयों में तकनीकी और गैर तकनीकी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के नियुक्तियों के लिए उम्मीदवाराें के चयन और परीक्षा आयोजित करने के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल का गठन किया जाएगा। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य लोक परीक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को कायम करना है।

    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 40, 50 एवं 59 में संशोधन विधेयक 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। मंत्रिपरिषद द्वारा जिला क्रिकेट एसोसिएशन राजनांदगांव को राजगामी संपदा की 5 एकड़ भूमि आबंटित करने का निर्णय लिया गया। इस भूमि पर अत्याधुनिक खेल मैदान क्रिकेट अकादमी का निर्माण किया जाएगा।

  • 8 करोड़ की अफीम खेती मामले में बड़ी कार्रवाई, भाजपा नेता के भाई की दुकान तोड़ी गई

    8 करोड़ की अफीम खेती मामले में बड़ी कार्रवाई, भाजपा नेता के भाई की दुकान तोड़ी गई

     दुर्ग

    छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए समोदा गांव में बुलडोजर चलाया. इस अभियान के दौरान उस दुकान को ध्वस्त कर दिया गया, जिसे अधिकारियों ने सरकारी जमीन पर बना अवैध निर्माण बताया है. यह दुकान उस व्यक्ति की थी, जिसके भाई को हाल ही में अफीम की खेती के मामले में गिरफ्तार किया गया है. प्रशासन की इस कार्रवाई ने इलाके में काफी चर्चा पैदा कर दी है. जैसे ही बुलडोजर मौके पर पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां इकट्ठा हो गए और पूरी कार्रवाई को देखने लगे. इस पूरे मामले का संबंध भाजपा किसान मोर्चा के नेता विजय ताम्रकार से जुड़ा बताया जा रहा है, जिन्हें कुछ दिन पहले पुलिस ने अफीम की खेती के आरोप में गिरफ्तार किया था।

    मक्के के खेत में मिली करोड़ों की अफीम
    जानकारी के मुताबिक 7 मार्च को पुलिस और नारकोटिक्स से जुड़ी एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक खेत में छापा मारा था. जांच के दौरान मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे पाए गए. जांच में सामने आया कि खेत में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही थी. अधिकारियों के अनुसार बरामद फसल की अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये आंकी गई. इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने भाजपा किसान मोर्चा से जुड़े नेता विजय ताम्रकार को दो अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी।

    भाई की दुकान पर चला बुलडोजर
    इसी घटनाक्रम के बीच प्रशासन ने समोदा गांव में एक और कार्रवाई की. अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार नेता के भाई बृजेश ताम्रकार गांव में करीब 32 डिसमिल सरकारी जमीन पर दुकान चलाते थे. जिला प्रशासन को लंबे समय से इस जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही थीं. जांच के बाद पाया गया कि यह दुकान सरकारी भूमि पर बनाई गई है. इसके बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया और मंगलवार को बुलडोजर की मदद से इस निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर मौजूद रही. इस अभियान का नेतृत्व अतिरिक्त तहसीलदार ने किया. उन्होंने बताया कि प्रशासन ने सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही यह कदम उठाया है. अवैध निर्माण को हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया और कुछ ही समय में पूरी संरचना को गिरा दिया गया. अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के अभियान का हिस्सा थी और इसका उद्देश्य सरकारी जमीन को मुक्त कराना था।

    पहले ही जारी हो चुका था बेदखली आदेश
    प्रशासन के मुताबिक इस मामले में स्थानीय अदालत पहले ही बेदखली का आदेश जारी कर चुकी थी. इसके बावजूद लंबे समय तक कब्जा नहीं हटाया गया. गांव के लोगों और ग्राम प्रधान ने कई बार प्रशासन को लिखित शिकायत देकर बताया था कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया गया है. इन शिकायतों के आधार पर जांच की गई और अंततः अदालत से बेदखली वारंट जारी होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

    बुलडोजर कार्रवाई देखने जुटे ग्रामीण
    मंगलवार को जब प्रशासन की टीम समोदा गांव पहुंची, तो वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया. जैसे ही बुलडोजर ने अवैध निर्माण को गिराना शुरू किया, गांव के लोग आसपास इकट्ठा होने लगे. कई लोग पूरे घटनाक्रम को देखने के लिए मौके पर मौजूद रहे. हालांकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिससे कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा नहीं हुई. अधिकारियों का कहना है कि जिले में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों को लेकर प्रशासन गंभीर है. राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कई जगहों पर अवैध कब्जों की शिकायतें मिल रही हैं और उन्हें हटाने के लिए चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मिलेगा, वहां इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

    विपक्ष ने उठाए सवाल
    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. विपक्षी दल कांग्रेस ने अफीम की खेती के मामले को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने मामले की गहन जांच की मांग भी की है. हालांकि सरकार की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

    कानून व्यवस्था पर प्रशासन का जोर
    प्रशासन का कहना है कि अवैध गतिविधियों और सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में सरकारी भूमि की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है. इसी के तहत जहां भी अवैध कब्जे की शिकायत मिलेगी, वहां जांच कर कार्रवाई की जाएगी. समोदा गांव में हुई यह कार्रवाई इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. एक तरफ अफीम की करोड़ों की खेती का खुलासा और दूसरी तरफ उससे जुड़े व्यक्ति के परिवार की अवैध दुकान पर बुलडोजर चलने की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. प्रशासन के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल एक मामले तक सीमित नहीं है. जिले में जहां-जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें हैं, वहां जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में भी अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहेगा और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. इस बीच पुलिस अफीम की खेती से जुड़े मामले की भी जांच आगे बढ़ा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

  • अफीम की खेती वाले ‘दाऊजी’ से शमशान जाने की भी लेते थे परमिशन

    अफीम की खेती वाले ‘दाऊजी’ से शमशान जाने की भी लेते थे परमिशन

    भिलाई नगर.

    निलंबित भाजपा नेता विनायक ताम्रकर के समोदा गांव के 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में 8 करोड़ कीमत के अफीम के पौधे जब्त मामले में कई नए खुलासे हो रहे हैं. अब ग्रामीण अलग-अलग तरह के आरोप लगा रहे हैं. गांव की महिलाएं बताती है कि विनायक का इतना दहशत है कि गांव में अगर किसी की मौत हो जाती है तो श्मशान ले जाने के लिए भी दाऊजी (विनायक ताम्रकर) की परमिशन लेनी पड़ती है.

    जब तक वे नहीं कहते, तब तक लाश को अंतिम संस्कार के लिए नहीं ले जाया जाता. यहां तक कि गांव के सरकारी शौचालय पर भी उनका कब्जा है, बिना उनकी मर्जी के हम वहां तक नहीं जा सकते. निलंबित भाजपा नेता विनायक ताम्रकार पिछले 5 वर्षों से अफीम की खेती कर रहे थे. लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी. एक दिन गांव के बच्चों के हाथ अजीब सा कुछ पौधा लगा. गूगल में सर्च करने पर पता चला कि यह अफीम है. बस फिर यही से पूरे गांव में हल्ला मच गया और 6 मार्च को मामला सामने आया. बताते हैं कि फार्म हाउस के चारों ओर गेट लगाए गए थे, जिससे आम लोगों का अंदर जाना लगभग असंभव था.

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 8 करोड़ कीमत के पौधे जब्त किए हैं. इसके बाद गांव का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था. महिलाएं समूह बनाकर विनायक ताम्रकर के खिलाफ नारे लगाते हुए विरोध के लिए निकल पड़ी थी. ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ कुआं ही नहीं, बल्कि आसपास के तालाब और वहां तक जाने वाली सड़क पर भी ताम्रकार का दबदबा रहा. गांव वालों का कहना है कि इन जगहों का इस्तेमाल करने में भी उन्हें धमकाकर रोक दिया जाता था.

    वहीं दूसरा दिलचस्प मामला यह है कि अफीम के पौधों की सिंचाई के लिए शिवनाथ नदी से पानी चोरी करने की बात सामने आई है. मौके पर निरीक्षण के दौरान संयुक्त टीम को शिवनाथ नदी पर मोटर पंप लगाए जाने का प्रमाण मिला है. जिस जगह पर पंप लगाया गया है, वहां विनायक ताम्रकार के खेत तक पाइप लाइन का विस्तार किया गया है . इसके लिए किसी तरह की अनुमति नहीं लिए जाने की बात सामने आ रही है. लिहाजा इसे पानी की चोरी करार दिया जा रहा है.

  • 16 लाख किसानों ने किया 2 लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा समर्पण: मंत्री बघेल

    16 लाख किसानों ने किया 2 लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा समर्पण: मंत्री बघेल

    रायपुर.

    विधानसभा के बजट सत्र में आज खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री दयाल दास बघेल ने सवालों का जवाब दिया. धान खरीदी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया है कि 16 लाख 55 हजार से अधिक किसानों ने दो लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा समर्पण किया है. इस संबंध में कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने सवाल पूछा था.

    दिलीप लहरिया ने सवाल पूछा था कि खरीफ विपणन वर्ष2025–26 में प्रदेश में तकनीकी कारणों, एग्रीस्टेक पोर्टल और खरीदी की समय सीमा समाप्त होने के कारण अनेक किसान पंजीयन एवं टोकन होने के बावजूद धान नहीं बेच पाए हैं? यदि हां तो ऐसे किसानों की संख्या कितनी है. एग्रीस्टेक पोर्टल में रकबा/ शून्य कम अथवा त्रुटिपूर्ण दर्शाए जाने के कारण धान विक्रय से वंचित किसानों की आर्थिक क्षति का आकलन किया गया है या नहीं? यदि हां तो क्षतिपूर्ति के लिए शासन ने क्या किया है. इसके अलावा यह भी पूछा गया था कि किसानों से रकबा समर्पण किन परिस्थितियों में तथा शासन की किस नीति या आदेश के तहत कराया गया है ? अब तक कितने किसानों ने रकबा खसरा समर्पित किया है. ऋण वसूली के संबंध में भी सवाल पूछते हुए कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने पूछा कि जिन ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा जा सकता है. उनके

    अल्पकालीन कृषि ऋण के संबंध में शासन की क्या नीति है?
    खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने अपने जवाब में बताया है कि धान खरीदी अवधि के दौरान किसानों द्वारा लाये गये मानक धान का पूर्ण खरीदी किया गया है. जिन किसानों के द्वारा धान विक्रय का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, उनसे रकबा समर्पण कराया जा सकता है. संबंधी निर्देश थे. खरीफ वर्ष 2025-26 में 1655149 किसानों ने 2.16 लाख हेक्टेयर रकबा का समर्पण किया. मंत्री ने बताया है कि जिन ऋणी कृषकों के द्वारा धान उपार्जन अवधि के दौरान अपना धान उपार्जन केन्द्रों विक्रय के लिए नहीं लाया गया है. उनके शेष ऋणों की वसूली देय तिथि के पूर्व कृषकों से व्यक्तिगत संपर्क कर नगद राशि वसूली की कार्यवाही की जाती है.