Category: छत्तीसगढ़

  • नवा रायपुर तहसील बनाने अधिसूचना जारी, 39 गांवों के लोगों नहीं लगाएंगे शहर के चक्कर

    नवा रायपुर तहसील बनाने अधिसूचना जारी, 39 गांवों के लोगों नहीं लगाएंगे शहर के चक्कर

    रायपुर.

    नवा रायपुर के रहवासियों के लिए सुकून भरी खबर है. अब उन्हें जमीन, मुआवजा या राजस्व संबंधित कामों के लिए बार-बार रायपुर शहर या आसपास की तहसीलों में नहीं जाना पड़ेगा. राज्य सरकार ने नवा रायपुर को तहसील बनाने की अधिसूचना जारी कर दी है.

    नवा रायपुर के साथ अब रायपुर जिले में रायपुर, मंदिर हसौद अभनपुर, धरसींवा, तिल्दा-नेवरा भी नई तहसील होगी. अभी तक वहां के गांवों के लोगों को राजस्व और प्रशासन संबंधित कामों के लिए रायपुर समेत आसपास के तहसीलों में जाना पड़ता था. लेकिन अब वहां के लोग वहीं की नई तहसील में अपने काम निपटा सकेंगे. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने नई तहसील बनाने की अधिसूचना जारी की है. इससे पहले नई तहसील की सीमाओं को लेकर दावा-आपत्ति मंगाई गई थी. इसमें कुछ ही आपत्तियां मिली थी, जिनका निराकरण कर दिया गया है.

    नई तहसील में इन गांवों को किया शामिल
    राजस्व निरीक्षक मंडल के 20 पटवारी हल्के में कुल 39 ग्रामों को शामिल किया गया है. इसमें फ्लौद – परसदा 20, पलौद 21, रीको, सेंध 21, चींचा 23, बरौंदा, 23, रमचंडी 23, कयाबांधा 24, झांझ 24, नवागांव 24, खपरी 24, कुहेरा 25, राखी 25, कोटनी 26, कोटराभाटा 26, तांदुल 26, मंदिर हसौद – छतौना 22, नवागांव 15, केंद्री- केंद्री 13, परसठ्ठी 13, निमोरा 14, उपरवारा 15, तूता 15, केंद्री 16, झांकी 16, खंडवा 18, भेलवाडीह 18, पचेड़ा 19, तोरला चेरिया 1, पाँता 1, बंजारी 1, तेंदुआ 1, कुरूं 2 सेरीखेड़ी में सेरीखेड़ी 16. नकटी 16, टेमरी 39, धरमपुरा 39, बनरसी 40, रायपुर 18, कांदुल माना 51 शामिल हैं.

    रहवासियों को होंगे फायदे
    नए तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के लोगों को राजस्व प्रशासनिक कामों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. इससे समय के साथ पैसे भी बचेंगे. जमीन नामांतरण, खसरा सुधार, बटांकन, डायवर्सन समेत अन्य संबंधित काम में तेजी आएगी. मूल निवासी, जाति, आय समेत कोई भी प्रमाण-पत्र बनाने लोगों को फायदा मिलेगा. सरकारी कामों के लिए लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय या बड़ी तहसील नहीं जाना पड़ेगा. इसके साथ प्रशासन की उपस्थिति से इलाकों में सुरक्षा कानून व्यवस्था पहले से और बेहतर होती है.

  • पूर्व छत्तीसगढ़ DGP विश्वरंजन का निधन, पटना के अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद आखिरी सांसें लीं

    पूर्व छत्तीसगढ़ DGP विश्वरंजन का निधन, पटना के अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद आखिरी सांसें लीं

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ पुलिस (Chhattisgarh Police) महकमे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) विश्वरंजन का निधन हो गया है। कार्डियक (दिल से जुड़ी) समस्या के चलते पिछले करीब एक महीने से पटना के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। एक दिन पहले ही क्रिटिकल कंडीशन को देखते हुए उन्हें डायलिसिस पर रखा गया था। उनके निधन से पूरे छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और पुलिस अमले में शोक की लहर दौड़ गई है।

    1973 बैच के IPS, 4 साल तक संभाली CG पुलिस की कमान

    विश्वरंजन 1973 बैच के बेहद तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी थे। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था। जुलाई 2007 में उन्हें छत्तीसगढ़ का छठवां DGP बनाया गया था। जुलाई 2011 तक करीब 4 साल उन्होंने इस अहम जिम्मेदारी को संभाला। नक्सल प्रभावित (Naxal-hit) इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में उनका बड़ा रोल रहा। इससे पहले वह लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर जैसे अहम पदों पर भी सेवाएं दीं।

    पूर्व डीजीपी विश्वरंजन की तबीयत पिछले महीने अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा था।

    बताया जा रहा है कि उन्हें गंभीर कार्डियक (हृदय) संबंधी समस्या हुई थी। इसी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी रही और उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली।

    छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे विश्वरंजन

    विश्वरंजन छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे हैं। 2007 में तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर के निधन के बाद राज्य सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। वे लगभग चार वर्षों तक इस पद पर रहे और अपने कार्यकाल के दौरान पुलिस प्रशासन में कई अहम सुधार किए।

    उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    आईबी में भी रहे लंबे समय तक

    1973 बैच के आईपीएस अधिकारी विश्वरंजन का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक रहा है। मध्यप्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था, हालांकि 2007 से पहले वे कभी छत्तीसगढ़ में पदस्थ नहीं रहे थे।

    वे लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर जैसे अहम पद भी संभाले।

  • बस्तर के 125 नक्सलियों ने तेलंगाना में दिए हथियार, 4.18 करोड़ का पुनर्वास पैकेज मिलेगा; IG का खुलासा

    बस्तर के 125 नक्सलियों ने तेलंगाना में दिए हथियार, 4.18 करोड़ का पुनर्वास पैकेज मिलेगा; IG का खुलासा

    जगदलपुर
    नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। शनिवार को तेलंगाना में 130 माओवादियों ने हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया है। सरेंडर करने वाले ज्यादातर नक्सली छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। तेलंगाना के डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण करने वाले 130 माओवादियों में से 125 छत्तीसगढ़ के, 4 तेलंगाना के और एक आंध्र प्रदेश का रहने वाला है।

    तेलंगाना में सरेंडर करने वाले नक्सली सीपीआई (माओवादी), दंडकारण्य विशेष जोनल कमेटी और तेलंगाना राज्य कमेटी क्षेत्र के मेंबर हैं। इनमें से ज्यादातर नक्सली बस्तर इलाके में एक्टिव थे।

    हथियार भी सुरक्षाबलों को सौंपे
    हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटे इन कैडरों ने 124 हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों के सामने जमा कराया, जो माओवादी संगठन को लगे बड़े झटके को दर्शाता है। अधिकारियों ने कहा कि यह घटनाक्रम पिछले कई महीनों से छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड तथा अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में संचालित लगातार और समन्वित सुरक्षा अभियानों का परिणाम है।

    अभियान के कारण पड़ा असर
    बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा-लगातार चलाए जा रहे अभियान, सुरक्षा तंत्र के विस्तार, फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस की स्थापना से माओवादी कैडरों की आवाजाही पर प्रभाव पड़ा है। बस्तर क्षेत्र और उससे सटे वन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे सतत और केंद्रित अभियानों ने माओवादी गढ़ों को धीरे-धीरे ध्वस्त किया है तथा उनके संगठनात्मक नेटवर्क को बाधित किया है, जिससे कैडरों पर हिंसा का मार्ग छोड़ने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    सरेंडर के बाद मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने कहा कि Mahatma Gandhi के देश में हिंसक और सशस्त्र आंदोलन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार पुनर्वास और बेहतर जीवन की व्यवस्था कर रही है.

    केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 तक की समय सीमा तय की है. जैसे-जैसे यह तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे नक्सलियों के सरेंडर की घटनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं. हाल ही में नक्सल संगठन के टॉप नेताओं में शामिल देवजी के आत्मसमर्पण की खबर भी सामने आई थी. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अब संगठन के गिने-चुने नेता ही बचे हैं, जो लगातार दबाव के चलते इधर-उधर छिपते फिर रहे हैं.

    जीवन में बदलाव से आया परिवर्तन
    उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने सुरक्षा प्रयासों के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं को लागू कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, आजीविका के अवसरों तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर दिए गए विशेष ध्यान के कारण पहले से अलग-थलग पड़े गांवों तक धीरे-धीरे शासन की पहुंच बढ़ी है। इन प्रयासों ने स्थानीय समुदायों का लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत किया है तथा जनसामान्य के बीच माओवादी प्रचार के प्रभाव को कम किया है।

    देवजी की टीम के माओवादी भी शामिल
    इन 130 माओवादी कैडर्स में नक्सल संगठन के कई अहम सदस्य भी शामिल हैं। हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी संगठन के चीफ देवजी की PLGA कमांडर टीम के सदस्य भी इस सरेंडर में शामिल हैं।

    ICCC सेंटर में हुआ कार्यक्रम
    माओवादियों ने यह आत्मसमर्पण 7 मार्च को हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित ICCC सेंटर में किया। कार्यक्रम में तेलंगाना सरकार के सीनियर अधिकारी और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी भी मौजूद रहे।

    सुरक्षाबलों के दबाव के कारण सरेंडर जारी
    सुरक्षाबलों के लगातार दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण माओवादी कैडरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। बड़ी संख्या में हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका मान रही हैं।

    सरकार ने कहा है कि जो भी उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास और नई शुरुआत के सभी रास्ते खुले हैं।

    क्या कहा बस्तर रेंज के आईजी ने
    बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि नक्सलियों का सरेंडर दूरस्थ क्षेत्रों में शासन की बढ़ती पहुंच तथा सुरक्षा बलों के लगातार चलाए जा रहे अभियानों के प्रयास को दिखाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से माओवादी संगठनात्मक ढांचा काफी कमजोर हुआ है। उनके संचालन क्षेत्र में उल्लेखनीय कमी आई है। जैसे-जैसे विकास और कल्याणकारी योजनाएं आंतरिक गांवों तक पहुँचती जाएंगी, वैसे-वैसे क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का मार्ग और सुदृढ़ होगा।

     

  • बस्तर में मलेरिया से निपटने के कार्यशाला में बताए उपाय

    बस्तर में मलेरिया से निपटने के कार्यशाला में बताए उपाय

    जगदलपुर.

    बस्तर संभाग में मलेरिया की चुनौती से निपटने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। 7 मार्च को होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर के वरिष्ठ चिकित्सक और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। यह कार्यशाला एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया और शासकीय मेडिकल कॉलेज जगदलपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है।

    मलेरिया के बदलते स्वरूप, जटिल मामलों की पहचान और आधुनिक उपचार पद्धतियों के बारे में चिकित्सकों को अपडेट करना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। विशेषज्ञों के अनुसार बस्तर क्षेत्र में मलेरिया, विशेष रूप से फैल्सीफेरम मलेरिया के मामले अधिक देखने को मिलते हैं, जो गंभीर रूप ले सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार बिना स्पष्ट लक्षण वाले मलेरिया और दस्त के मरीजों में भी मलेरिया के संकेत मिलते हैं, जो चिंता का विषय है। कार्यशाला में मलेरिया की एपिडेमियोलॉजी, आधुनिक जांच तकनीक, समय पर निदान और गंभीर मरीजों के उपचार पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।

    देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ अपने शोध और अनुभव साझा करेंगे। इस पहल से बस्तर के डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को मलेरिया प्रबंधन की आधुनिक पद्धतियों को समझने और मरीजों के बेहतर उपचार में मदद मिलेगी।

  • सुरक्षा एजेंसियों के खौफ से बस्तर में नक्सलियों के TCOC पर सन्नाटा

    सुरक्षा एजेंसियों के खौफ से बस्तर में नक्सलियों के TCOC पर सन्नाटा

    बस्तर.

    देश के सबसे बड़े नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में इस बार एक अलग स्थिति देखने को मिल रही है। करीब दो दशक में पहली बार ऐसा लग रहा है कि नक्सली अपने अहम सैन्य अभियान TCOC (Tactical Counter Offensive Campaign) की शुरुआत तय समय पर नहीं कर पाए हैं। आमतौर पर यह अभियान हर साल 8 मार्च के बाद शुरू होकर जून तक चलता है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करना और बस्तर जैसे क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाना होता है।

    यह अभियान उनके गुरिल्ला युद्ध का हिस्सा है, जिसमें वे सूखे और पतझड़ के मौसम का फायदा उठाते हैं। लेकिन इस बार शुरुआती दिनों में किसी बड़ी गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। बता दें कि सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल संगठन पर बढ़ते दबाव और कमजोर होती संरचना का परिणाम मान रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार चलाए गए ऑपरेशन में कई बड़े कमांडर मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके साथ ही जंगलों में नए सुरक्षा कैंप, सड़कों का तेजी से विस्तार और ड्रोन सर्विलांस ने नक्सलियों की गतिविधियों को काफी सीमित कर दिया है।

    सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों के खौफ से अब नक्सली बड़ी संख्या में एकत्र होकर रणनीति बनाने में भी मुश्किल महसूस कर रहे हैं। ऐसे में बड़े हमलों की योजना बनाना उनके लिए पहले जितना आसान नहीं रह गया है।हालांकि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। आशंका है कि नक्सली छोटे या मध्यम स्तर के हमलों के जरिए अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। इसे देखते हुए बस्तर संभाग के सभी जिलों में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यदि इस साल भी टीसीओसी प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाता, तो यह नक्सली आंदोलन के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका साबित हो सकता है।

  • राजनांदगांव में 38°C तक पारा चढ़ा, उत्तर छत्तीसगढ़ की रातें अभी भी ठंडी, बारिश के आसार नहीं

    राजनांदगांव में 38°C तक पारा चढ़ा, उत्तर छत्तीसगढ़ की रातें अभी भी ठंडी, बारिश के आसार नहीं

    राजनांदगांव 

     छत्तीसगढ़ में मार्च के साथ ही गर्मी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई है. मौसम की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जिसके कारण आने वाले कुछ दिनों तक मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई जा रही है।

    राजनांदगांव में सबसे ज्यादा तापमान
    प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तापमान में थोड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान राजनांदगांव में 38.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।

    वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें तो अंबिकापुर में सबसे कम 12.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है. इसके कारण वहां सुबह और रात के समय हल्की ठंड का अहसास बना हुआ है।

    इन इलाकों के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण
    मौसम विभाग के अनुसार उत्तरी ओडिशा और उससे सटे गंगा क्षेत्रीय पश्चिम बंगाल के ऊपर समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।

    इसके साथ ही उत्तरी उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तरी छत्तीसगढ़ और दक्षिणी झारखंड होते हुए उत्तरी ओडिशा तक द्रोणिका बनी हुई है. हालांकि फिलहाल इसका प्रदेश के मौसम पर कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिल रहा है।

    अगले 7 दिनों तक मौसम में बड़ा बदलाव नहीं
    मौसम विभाग का कहना है कि छत्तीसगढ़ में आने वाले 7 दिनों तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. प्रदेश में मौसम शुष्क ही बना रहेगा और दिन के समय हल्की गर्मी का असर महसूस किया जाएगा।

    रायपुर में साफ रहेगा आसमान
    राजधानी रायपुर में 6 मार्च को आसमान मुख्यतः साफ रहने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार यहां अधिकतम तापमान लगभग 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 21 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. दिन के समय तेज धूप के कारण गर्मी का असर महसूस हो सकता है।

  • रायगढ़ में आज से शुरू होगा “प्रशासन पहुंचेगा जनता के द्वार” अभियान, जिला स्तर पर होगी मॉनिटरिंग

    रायगढ़ में आज से शुरू होगा “प्रशासन पहुंचेगा जनता के द्वार” अभियान, जिला स्तर पर होगी मॉनिटरिंग

    रायगढ़ 

     आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा “प्रशासन पहुंचेगा जनता के द्वार” अभियान के तहत जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविरों की श्रृंखला प्रारंभ की जा रही है। इसकी शुरुआत 6 मार्च को विकासखंड धरमजयगढ़ के तहसील मुख्यालय प्रांगण कापू से होगी। शिविर दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक आयोजित होगा, जिसमें आमजन अपनी मांग, शिकायत, आवेदन एवं अन्य आवश्यक प्रकरण सीधे जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। जिला प्रशासन द्वारा 12 मार्च को मुकडेगा (लैलूंगा), 13 मार्च को तमनार, 19 मार्च को पुसौर, 20 मार्च को छाल (धरमजयगढ़), 27 मार्च को लैलूंगा, 2 अप्रैल को घरघोड़ा तथा 4 अप्रैल को खरसिया तहसील मुख्यालय में शिविर आयोजित किए जाएंगे।

    प्रत्येक शिविर में संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों, अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व) एवं जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की गई है, ताकि अधिकतम प्रकरणों का निराकरण स्थल पर ही किया जा सके। शिविर में प्राप्त आवेदनों को मांग एवं शिकायत श्रेणी में वर्गीकृत कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। जिन प्रकरणों का समाधान शिविर दिवस पर संभव होगा, उनका निराकरण तत्काल कर आवेदक को जानकारी दी जाएगी। शेष प्रकरणों के लिए निश्चित समय-सीमा तय कर संबंधित आवेदकों को सूचित किया जाएगा। शिविर की तिथि से एक सप्ताह के भीतर श्रेणीवार निराकरण रिपोर्ट संबंधित जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की जाएगी।

    संपूर्ण प्रक्रिया की सतत मॉनिटरिंग जिला स्तर पर की जाएगी, ताकि पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला स्तरीय अधिकारियों तथा सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि शिविरों का उद्देश्य केवल आवेदन प्राप्त करना नहीं, बल्कि अधिकाधिक प्रकरणों का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करना है। इससे आम नागरिकों को शासकीय कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रशासन के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होगा।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों-कर्मचारियों संग खेली होली

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों-कर्मचारियों संग खेली होली

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। पारंपरिक फाग गीतों और हर्षोल्लास के वातावरण में रंग और उल्लास से सराबोर इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं।

    अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री साय को गुलाल लगाकर उन्हें बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री साय ने भी आत्मीयता के साथ सभी को गुलाल लगाकर रंगोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और स्नेह, विश्वास तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

    अधिकारियों-कर्मचारियों संग होली
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

  • सिग्नल ओवरशूट के कारण बिलासपुर में पटरी से गिरे मालगाड़ी के 9 वैगन

    सिग्नल ओवरशूट के कारण बिलासपुर में पटरी से गिरे मालगाड़ी के 9 वैगन

    बिलासपुर.

    बिलासपुर रेल मंडल में एक बार फिर सिग्नल ओवरशूट के कारण मालगाड़ी के 9 वैगन पटरी से उतर गए। इस मामले में संबंधित विभाग की टीम ने जांच शुरु कर दी है। पूछताछ में चालक का कहना है कि जिस समय यह घटना हुई उस समय ट्रेन की स्पीड केवल 40 किलोमीटर प्रति घंटे थी। इसके अलावा उसे आगे की स्थिति की कोई भी जानकारी नहीं है।

    बिलासपुर रेल मंडल में ट्रेन के डिरेलमेंट और एक ट्रेन से दूसरी ट्रेन के बीच आपसी टक्कर की घटनाएं कम नहीं हो रही है। आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली के बावजूद रेल प्रशासन भी घटना पर किसी तरह का कोई काबू नहीं कर पा रही है। बिलासपुर रेल मंडल के सिस्टम को सीआरएस ने भी खराब बताया है, जिसके बाद भी कोई सुधार कार्य नहीं हो रहा है। जानकारी के अनुसार 26 फरवरी को चालक प्रमोद कुमार और सहायक चालक महाकेश मीणा बिजूरी से खाली एन बाक्स मालगाड़ी लेकर रवाना हुए थे। सोनपुर स्टेशन पार करने के बाद अचानक बीपी प्रेशर ड्राप हुआ और गाड़ी देर रात 2 बजकर 52 मिनट पर अचानक खड़ी हो गई।

    अचानक मालगाड़ी के खड़े होने पर चालक ने सहायक चालक को चेक करने के लिए भेजा। सहायक चालक ने देखा कि इंजन से 13वां, 14वां, 15वां, 16वां, 17वां, 18वां, 19वां वैगन एवं ब्रेकवैन से दूसरा और तीसरा वैगन पटरी से उतर गया है। जांच में चालक से पूछताछ की गई, जिन्होंने मालगाड़ी और इंजन में किसी तरह की कोई समस्या नहीं होने, अचानक बीपी प्रेशर ड्राप होकर गाड़ी खड़ी होने और पटरी से उतरने के अलावा गाड़ी की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति रफ्तार की होने की जानकारी दी। इसके अलावा अन्य प्रश्नों के संबंध में उनकी ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया। फिलहाल इस मामले में विभागीय टीम के अफसर अपनी जांच करने के बाद आगे की रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी

  • रायपुर : ग्राफ्टेड बैगन से 16 लाख रूपए की आमदनी

    रायपुर : ग्राफ्टेड बैगन से 16 लाख रूपए की आमदनी

    रायपुर 

    रायपुर : ग्राफ्टेड बैगन से 16 लाख रूपए की आमदनी

    किसान वैज्ञानिक पद्धति, उन्नत बीज और सही मार्गदर्शन के साथ खेती करें, तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम करही के किसान चिंतामणि बंजारे ने नवाचार और आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया है। उन्होंने परंपरागत सब्जी खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 10 एकड़ क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर लगभग 1100 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उन्हें करीब 16 लाख रुपये की आमदनी हुई है।  

    कृषक चिंतामणी ने बताया कि सामान्य फसल की तुलना में ग्राफ्टेड बैगन में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि उत्पादन अधिक मिलता है, परिणामस्वरूप आय दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है। ग्राफ्टेड बैंगन की विशेषता इसकी मजबूत जड़ प्रणाली, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अधिक उत्पादन है। पहले वे सामान्य सब्जियों की खेती करते थे, जिसमें लाभ सीमित और जोखिम अधिक था। किंतु उद्यान विभाग के प्रोत्साहन, तकनीकी सलाह और उन्नत पौध सामग्री के उपयोग ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी। उचित सिंचाई प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और नियमित देखभाल से फसल की गुणवत्ता बेहतर रही, जिससे बाजार में उन्हें अच्छा मूल्य प्राप्त हुआ। आज वे आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी उन्नत तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने उनके परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ गांव में आधुनिक कृषि की नई सोच को भी प्रोत्साहित किया है।