Category: मनोरंजन

  • AI से पाएं 1980s का रेट्रो लुक, इन 8 आसान प्रॉम्प्ट से बदलें अपनी फोटो

    AI से पाएं 1980s का रेट्रो लुक, इन 8 आसान प्रॉम्प्ट से बदलें अपनी फोटो

    पुराने जमाने की तस्वीरों में कुछ अलग ही बात होती है। उस समय के फैशन वाले कपड़े, पुराने कैमरे की तस्वीर और हल्के-फीके रंग देखकर आज भी कई लोगों को अपना बचपन या पुराना समय याद आ जाता है। अब अगर आप अपनी आज की फोटो को भी वैसा ही लुक देना चाहते हैं, तो एआई इसमें आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए सिर्फ फोटो पर पुराना रंग चढ़ाने की जरूरत नहीं है। आप एआई को बता सकते हैं कि कपड़े कैसे हों, बाल कैसे दिखें, पीछे का माहौल कैसा हो और फोटो में किस तरह की रोशनी हो। सही प्रॉम्प्ट देने पर आपकी फोटो ऐसी लग सकती है, जैसे वह कई साल पहले ही खींची गई हो। यहां जानिए 1980 के दशक वाला लुक पाने के लिए 8 आसान प्रॉम्प्ट।

    1. 1980 के दशक वाला स्टूडियो फोटो
    अगर आप चाहते हैं कि आपकी फोटो पुराने समय के स्टूडियो में खींची गई लगे, तो यह प्रॉम्प्ट डालें।

    प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक में स्टूडियो में खींची गई फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल ना बदलें। उस समय के कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे सादा स्टूडियो का बैकग्राउंड हो। हल्की पीली रोशनी और पुराने कैमरे से खींची गई फोटो जैसा लुक दें। तस्वीर असली और नैचुरल लगे।

    2. 1980 के दशक का फैमिली फोटो
    पुराने पारिवारिक एलबम जैसी फोटो चाहिए तो यह प्रॉम्प्ट ट्राई करें।

    प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक के फैमिली एलबम की फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल वही रखें। उस समय के साधारण कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे घर का पुराना माहौल दिखे। फोटो में हल्की गर्म रोशनी और पुराने कैमरे वाली तस्वीर जैसा हल्का दानेदार असर रखें। तस्वीर बिल्कुल असली और नैचुरल लगे।

    3. सड़क पर खींची गई पुरानी फोटो
    अगर आपको सड़क पर अचानक खींची गई पुराने जमाने की फोटो जैसा लुक चाहिए, तो यह प्रॉम्प्ट डालें।

    प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक की सड़क पर खींची गई फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल ना बदलें। उस समय के कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे पुरानी दुकानें, सड़क और उस दौर का माहौल दिखाएं। फोटो में प्राकृतिक रोशनी और पुराने कैमरे वाली तस्वीर जैसा लुक रखें।

    4. 1980 के दशक का कॉलेज वाला लुक
    कॉलेज के दिनों वाली पुरानी फोटो जैसा अंदाज चाहिए तो यह प्रॉम्प्ट काम आएगा।

    प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक के कॉलेज स्टूडेंट की फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल वही रखें। उस समय के साधारण कपड़े और बालों की स्टाइल दें। पीछे पुराना कॉलेज का माहौल दिखाएं। फोटो ऐसी लगे जैसे उस समय के कैमरे से खींची गई हो। रंग हल्के पुराने और नैचुरल रखें।
    परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा का 1980s AI Photo

    5. पुराने समय की भारतीय फोटो
    इस प्रॉम्प्ट से फोटो में पूरा भारतीय रेट्रो लुक आ जाएगा।
    प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक की भारतीय फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल ना बदलें। उस समय के भारतीय कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे पुराने घर या सड़क का भारतीय माहौल दिखाएं। रोशनी गर्म और रंग थोड़े पुराने रखें। फोटो ऐसी लगे जैसे यह असली पुरानी तस्वीर हो।

    6. 1980 के दशक की शादी वाली फोटो
    पुराने शादी के एलबम जैसा लुक चाहिए तो यह प्रॉम्प्ट डालें।
    प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक की शादी में खींची गई फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल वही रखें। उस समय के शादी वाले कपड़े, गहने और बालों की स्टाइल रखें। पीछे पुराने समय की शादी का माहौल और सजावट दिखे। फोटो में पुराने कैमरे वाली रोशनी और रंग रखें। तस्वीर असली और नैचुरल लगे।

    7. पुराने सिनेमा जैसा लुक
    अगर आपको अपनी फोटो में 1980 के दशक की फिल्मों जैसा अंदाज चाहिए, तो यह प्रॉम्प्ट यूज कर सकते हैं।

    प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक की हिंदी फिल्म के दृश्य जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल ना बदलें। उस समय के फैशन वाले कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे पुराने सिनेमा जैसा माहौल हो। रोशनी थोड़ी खास लेकिन नैचुरल रखें और फोटो में पुराने फिल्म कैमरे जैसा रंग और लुक दें।

    8. 1980 के दशक की पासपोर्ट जैसी स्टूडियो फोटो
    अगर आप अपनी फोटो को 1980 के दशक में खिंची पासपोर्ट या स्टूडियो फोटो जैसा लुक देना चाहते हैं, तो यह प्रॉम्प्ट इस्तेमाल करें।

    प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक में स्टूडियो में खींची गई पासपोर्ट जैसी फोटो बनाएं। मेरा चेहरा, चेहरे की बनावट और पहचान बिल्कुल वही रखें। फोटो सामने से हो, पीछे सादा हल्के रंग का बैकग्राउंड हो और चेहरे पर सीधी, साफ रोशनी हो। उस समय के कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। फोटो में पुराने कैमरे की हल्की दानेदार रंगत और पुरानी तस्वीर जैसा नैचुरल लुक दें।

  • सड़क पर क्यों भटक रहे ‘तारक मेहता’ के गोली यानी कुश शाह? राहगीरों से कर रहे खास गुजारिश

    सड़क पर क्यों भटक रहे ‘तारक मेहता’ के गोली यानी कुश शाह? राहगीरों से कर रहे खास गुजारिश

    तारक मेहता का उल्टा चश्मा सिटकॉम सालों से फैंस को एंटरटेन करता आ रहा है. शो में आने वाले कैरेक्टर्स को करोड़ों लोग चाहते हैं. उनकी घर-घर में पहचान है. फिर क्यों शो के गोली का किरदार निभाने वाले कुश शाह को सड़क पर उतरना पड़ा. वो राह चलते लोगों से गुजारिश करते दिखे. अब ये गुजारिश क्या है, और वो क्यों लोगों से ऐसे बात कर रहे हैं, इसकी एक बड़ी वजह है. आइये आपको बताते हैं.

    क्यों भटक रहे 'गोली'?
    वैसे घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि गोली यानी कुश किसी मुसीबत में नहीं हैं. वो बिल्कुल चुस्त-दुरुस्त और हैप्पी हैं. दरअसल, यूट्यूब व्लॉगिंग की इस बढ़ती दुनिया में कुश भी कदम रख चुके हैं. उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया है. इसके लिए उन्होंने मजेदार कंटेंट को चुना है.

    कुश ने इसकी झलक अपने इंस्टाग्राम पर भी दिखाई. वो मुंबई की सड़कों पर भटकते हुए राह चलते लोगों से उनके घर जाकर खाना बनाने की रिक्वेस्ट की. कुश ने कहा कि लोगों ने मुझे इतने सालों तक बहुत प्यार दिया है. अब वक्त है कि मैं उन्हें पेबैक करूं. मेरी खुद की हॉबी है, खाना बनाना सिर्फ खाना नहीं.

    एक्टर ने लोगों से कहा कि वो उनके घर जाकर खाना बनाना चाहते हैं और उन्हें खिलाना चाहते हैं. एक-एक कर कुश ने कई लोगों से पूछा, काफी हिचकिचाते नजर आए, तो वहीं कुछ बहुत खुश दिखाई दिए.  कुश फाइनली एक घर में जाते हैं और वहां जाकर खाना बनाकर खिलाते हैं. अपने चहेते सितारे को देखकर गली-मोहल्ले के लोग भी बहुत खुश होते हैं. बच्चे गोली… गोली कहकर चीयर करते दिखते हैं.

    गोली का ये आइडिया फैंस के बीच खूब पॉपुलर हो रहा है. कमेंट कर फैंस पूछ रहे हैं कि हमारे घर कब आओगे. वहीं शो में सोनू का किरदार निभा चुकीं झील मेहता और पलक सिंधवानी ने भी रिएक्ट किया और कहा कि- हमारे घर कब आ रहे हो और खूब खुशी जाहिर की.

    क्यों छोड़ा था TMKOC?
    कुश ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो से 16 साल तक जुड़े रहे. 2024 में उन्होंने इसे फाइनली अलविदा कह दिया. वजह बताते हुए कुश का कहना था कि वो आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहते थे और वहीं कोई और करियर ऑप्शन तलाशना चाहते हैं. हालांकि लगता है कुश का वो प्लान काम नहीं कर पाया, तभी उन्हें भारत में ही यूट्यूब के जरिए नए मौके तलाशने पड़ रहे हैं.

  • ‘हनुमान अंश’ के शो को लेकर हंगामे की खबरों के बीच बंद हुआ Gaiety Galaxy, जानें पूरा मामला

    ‘हनुमान अंश’ के शो को लेकर हंगामे की खबरों के बीच बंद हुआ Gaiety Galaxy, जानें पूरा मामला

    नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. रिलीज के एक महीने बाद भी फिल्म के शोज हाउसफुल जा रहे हैं. फिल्म देखने के लिए लोग थिएटर्स तक खिंचे चले आ रहे हैं. इसी बीच मुंबई के बांद्रा स्थित मशहूर गेयटी गैलेक्सी थिएटर में फिल्म 'हनुमान अंश' का शो हटाने पर बवाल मचने की खबर सामने आई. बताया गया कि कुछ लोगों ने वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद थिएटर को बंद कर दिया गया है. हालांकि, थिएटर बंद होने की असली वजह क्या है? चलिए बताते हैं..

    क्यों बंद हुआ थिएटर?
    ऐसी रिपोर्ट्स सामने आईं कि बांद्रा के गेयटी गैलेक्सी थिएटर में 'हनुमान अंश' फिल्म न दिखाए जाने पर कुछ लोगों ने हंगामा किया. उन्होंने वहां लगी 'मिर्जापुर द मूवी' के पोस्टरों को भी फाड़ दिया. बवाल के बाद जब मुंबई पुलिस मामले की जांच के लिए वहां पहुंची तो पता चला कि Gaiety Galaxy थिएटर ने साल 2021-22 से अपना लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाया है. इसके बाद से ही थिएटर का कामकाज ठप पड़ गया, क्योंकि पुलिस ने इसे बंद कर दिया है.

    यह भी बताया गया कि पुलिस ने थिएटर पर एक नोटिस भी चिपकाया, जिसमें उसे बंद रखने का निर्देश दिया गया है. हालांकि, आज तक संग बातचीत में अधिकारियों ने साफ किया है कि लाइसेंस रिन्यू होते ही सिनेमाघर को दोबारा खोलने की अनुमति दे दी जाएगी.

    लाइसेंस इश्यू के चलते बंद हुआ थिएटर
    मराठा मंदिर के मैनेजर मनोज पांडे ने 'इंडिया टुडे/ आजतक' संग खास बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि लाइसेंस से जुड़े कुछ इंटरनल इश्यूज की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है, जिसे वो जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. आपको बता दें कि मराठा मंदिर और गेयटी गैलेक्सी दोनों का मैनेजमेंट एक ही है.

    बता दें कि ऐसी अफवाहें भी थीं कि 'हनुमान अंश' की स्क्रीनिंग के दौरान हुए हंगामे के कारण थिएटर बंद किया गया. वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया जा रहा है कि थिएटर के अंदर कुछ केबल जल गए थे और मैनेजमेंट इस समस्या को ठीक करने में लगा हुआ था.

    ऐसे में मनोज पांडे ने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर यकीन न करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा- सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें. कुछ अंदरूनी मुद्दे हैं, जिन्हें हम फिलहाल सुलझाने में लगे हैं. हम जल्द ही शो दोबारा शुरू करेंगे.

    'हनुमान अंश' की बात करें तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तूफानी रफ्तार से कमाई कर रही है. फिल्म के भजन, स्टोरीलाइन और सादगी फैंस के दिलों को छू रही है.

  • ‘हनुमान अंश’ पर बरसी बाबा नीम करौली की कृपा! 32वें दिन 150 करोड़ पार हुई कमाई

    ‘हनुमान अंश’ पर बरसी बाबा नीम करौली की कृपा! 32वें दिन 150 करोड़ पार हुई कमाई

    मिर्जापुर’ का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? बंदूकें, गोलियां, खून, गालियां, गैंगवॉर और वो भौकाल, जिसके आगे अच्छे-अच्छों की बोलती बंद हो जाती है. लेकिन अगर आप इस फिल्म को सिर्फ इसी चश्मे से देखेंगे तो कहानी का एक बेहद दिलचस्प हिस्सा मिस कर देंगे. क्योंकि बंदूक की नोक पर दुनिया चलाने वाले इन बाहुबलियों के अंदर एक ऐसा दिल भी धड़कता है, जो प्यार के सामने पूरी तरह बेबस हो जाता है.

    यही ‘मिर्जापुर’ का वो ह्यूमन एंगल है, जो खून-खराबे के बीच अचानक कहानी को एक अलग रंग दे देता है. फिल्म में भले ही कोई किसी के साथ इंटीमेट हो रहा हो, लेकिन दिल एक ही जगह अटका है.  

    जहां बदले के पीछे छिपी है मोहब्बत
    फिल्म में बीना यानी रसिका दुग्गल की कहानी को ही देख लीजिए. उसकी शादी अखंडानंद त्रिपाठी यानी कालीन भैया से होती है. बाहर से ये रिश्ता सत्ता और रसूख वाला दिखता है, लेकिन इसके पीछे एक पुरानी मोहब्बत सांस ले रही है.

    बीना को वापस पाने के लिए बिर्जू लोहार (मोहित मलिक) का मिर्जापुर आना सिर्फ बदले की कहानी नहीं है. उसके पीछे अपना प्यार वापस पाने की जिद भी है. वो कालीन भैया को खत्म करना चाहता है, ताकि अपनी ‘छटंकी’ को वापस ले जा सके.

    यानी जिस दुनिया में लोग सत्ता के लिए किसी की जान लेने से पहले एक सेकंड नहीं सोचते, उसी दुनिया में एक आदमी अपने प्यार के लिए पूरी व्यवस्था से भिड़ने को तैयार है.

    गुड्डू, स्वीटी और मुन्ना… गोली से ज्यादा खतरनाक इश्क!

    फिर आती है गुड्डू भैया, स्वीटी और मुन्ना भैया की कहानी!
    गुड्डू भैया यानी अली फजल स्वीटी यानी श्रेया पिलगांवकर के प्यार में हैं. लेकिन कहानी यहां सीधी कहां रहने वाली थी? मुन्ना भैया यानी दिव्येंदु भी स्वीटी को चाहते हैं. बस यहीं से शुरू होता है वो लव ट्रायंगल, जिसमें बंदूकें भी हैं और धड़कनें भी.

    गुड्डू के लिए स्वीटी सिर्फ मोहब्बत नहीं है, वो उसकी कमजोरी भी है और ताकत भी. वहीं मुन्ना के लिए उसे पाना सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि अपनी जीत जैसा भी है. दोनों की चाहत अलग है, लेकिन मंजिल एक- स्वीटी. और ‘मिर्जापुर’ की खूबसूरती यही है कि यहां प्यार भी उतना ही हिंसक हो सकता है, जितना सत्ता का खेल.

    बब्बन यादव… बाहुबली कम, आशिक ज्यादा
    लेकिन अगर इस फिल्म में किसी की मोहब्बत सबसे ज्यादा ‘आशिकाना’ लगती है, तो वो हैं बब्बन यादव यानी रवि किशन. बब्बन को अपनी मुमताज बेबी यानी सोनल चौहान से बेइंतहा मोहब्बत है. वो उसे अपने आसपास रखते हैं, उसकी हिफाजत करते हैं और उस पर कोई आंच नहीं आने देना चाहते.

    अब यही बब्बन जब मुमताज को खो देता है, तो उसका प्यार एक टूटे हुए दिल में बदल जाता है. और टूटे हुए दिल वाला आशिक जब ‘मिर्जापुर’ की दुनिया में हो, तो उसके हाथ में गुलाब नहीं… बंदूक आती है. मुमताज की मौत के बाद बब्बन का पागलपन सिर्फ बदले की आग नहीं है. ये उस आदमी की कहानी है, जिसने अपनी दुनिया खो दी है और अब उसके पास खोने के लिए कुछ बचा ही नहीं.

    और फिर आते हैं बबलू पंडित. जब मिर्जापुर का हर बाहुबली किसी न किसी के प्यार में गिरफ्तार है, तो बबलू पंडित कैसे पीछे रहते?

    उनका प्यार गोलू गुप्ता के लिए है. लेकिन इसमें न कोई शोर है, न कोई ऐलान. बस एक खामोश मोहब्बत है, जिसे वो अपने अंदर दबाकर रखते हैं. बबलू का ये साइलेंट लव बाकी कहानियों से इसलिए अलग लगता है, क्योंकि यहां प्यार पाने की जिद नहीं है. बस प्यार करने की खामोशी है. और शायद यही इसे सबसे ज्यादा इंसानी बना देती है.

    असली खेल यही है… ये लोग सिर्फ बाहुबली नहीं हैं
    ‘मिर्जापुर’ के इन किरदारों को देखिए. हाथ में हथियार आते ही ये पत्थर बन जाते हैं. दुश्मन सामने हो तो रहम नाम की कोई चीज नहीं. गोली चलाने में देर नहीं, खून बहाने में झिझक नहीं. लेकिन प्यार सामने आते ही? यही लोग मोम की तरह पिघल जाते हैं.

    कालीन भैया के साम्राज्य में सत्ता है, लेकिन रिश्तों में उलझन भी है. मुन्ना भैया के अंदर गुस्सा है, लेकिन प्यार पाने की बेचैनी भी. गुड्डू भैया के हाथ में बंदूक है, लेकिन दिल स्वीटी के लिए धड़कता है. बब्बन यादव लोगों के लिए खौफ हैं, लेकिन मुमताज के लिए एक दीवाना आशिक. और बबलू पंडित… वो तो अपने प्यार को कहने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते.

    यानी ‘मिर्जापुर’ की दुनिया में आदमी चाहे कितना भी बड़ा बाहुबली क्यों न बन जाए, प्यार के आगे उसकी सारी अकड़ धरी की धरी रह जाती है.

    मिर्जापुर की असली हिंसा सिर्फ बंदूकों में नहीं है
    फिल्म का भौकाल अपनी जगह है. गाली-गलौच, खून-खराबा, गैंगवॉर और इंटीमेट सीन्स इसकी पहचान हैं. लेकिन इन सबके बीच प्यार की कहानियां एक दिलचस्प कॉन्ट्रास्ट पैदा करती हैं. यहां हिंसा सिर्फ शरीर पर नहीं होती, दिल पर भी होती है. किसी का प्यार छिन जाता है, कोई अपना प्यार पाने के लिए लड़ता है, कोई प्यार में हारकर बदला लेने निकल पड़ता है और कोई चुपचाप प्यार करता रहता है.

    शायद यही वजह है कि ‘मिर्जापुर’ के बाहुबली किरदार सिर्फ ‘खूंखार’ नहीं लगते. उनके अंदर की कमजोरियां उन्हें इंसान बनाती हैं. क्योंकि बंदूक चलाने वाला आदमी भी आखिर दिल रखता है… और ‘मिर्जापुर’ में सबसे बड़ा भौकाल कई बार बंदूक का नहीं, टूटे हुए दिल का होता है.

  • बिपाशा बसु ने जब चुनी ‘जिस्म’, लोगों ने दी करियर बर्बाद होने की चेतावनी; एक्ट्रेस ने नहीं मानी सलाह

    बिपाशा बसु ने जब चुनी ‘जिस्म’, लोगों ने दी करियर बर्बाद होने की चेतावनी; एक्ट्रेस ने नहीं मानी सलाह

    मुंबई 

    बिपाशा बसु एक समय पर बॉलीवुड की टॉप हीरोइनों में शुमार की जाती थीं. उन्होंने अपने एक्टिंग करियर में कई सुपरहिट फिल्में की हैं. 'राज' और 'अजनबी' जैसी सुपरहिट फिल्में करने के बाद बिपाशा ने महेश भट्ट की बोल्ड फिल्म 'जिस्म' करके हर किसी को हैरान कर दिया था। 

    'जिस्म' फिल्म में बिपाशा ने काफी बोल्ड और इंटीमेट सीन्स दिए थे. एक्ट्रेस ने अब एक इंटरव्यू में बताया है कि यह फिल्म करने पर उन्हें कई लोगों ने वॉर्निंग दी थी. लोगों ने उनसे कहा था कि यह फिल्म उनके करियर को खत्म कर देगी।  

    बिपाशा को मिली थी वॉर्निंग

    बिपाशा ने Elle संग बातचीत में कहा- इंडस्ट्री में हर किसी ने मुझसे कहा था, यह फिल्म मत करो. उनका कहना था कि अगर मैंने ऐसी कोई फिल्म की, जो थोड़ी भी एरोटिक है, तो मेरा करियर खत्म हो जाएगा. लेकिन मेरा कहना था कि मैं एक एडल्ट हूं. यह एक ए़डल्ट लव स्टोरी है. इसे एडल्ट की फिल्म के तौर पर ही बनाया गया है. यह बच्चों के लिए नहीं है. मुझे उस फिल्म में सोनिया के किरदार के अलग-अलग शेड्स काफी पसंद आए थे. मुझे बस इतना पता था कि मुझे यह फिल्म करनी ही है।  

    इंडस्ट्री के बदले रुख ने की मदद
    बिपाशा आगे बोलीं- अचानक से फिर समुद्र की लहरें, कर्ली बाल, आंखों में गहरा काजल, ब्रॉन्ज स्किन, सफेद कपड़े और समंदर का किनारा…सब कुछ ट्रेंड करने लगा. पूरा लुक ही बदल गया और लोगों ने मेरे बोल्ड अवतार को दिल से स्वीकार करना शुरू कर दिया. इसलिए मुझे लगता है कि मैंने कुछ ऐसे काम किए, जिसने उस दौर में हमारी इंडस्ट्री में महिलाओं को देखने का नजरिया बेहतर बनाया. बात सिर्फ इतनी नहीं है कि मैंने अलग काम किए, बल्कि बात यह भी है कि मुझे एक अलग अंदाज में स्वीकार किया गया। 

    बिपाशा के वर्क फ्रंट की बात करें तो वो अब लंबे समय से स्क्रीन से दूर हैं. वो अपनी बेटी देवी की परवरिश पर ध्यान दे रही हैं. बिपाशा की आखिरी फिल्म साल 2015 में आई Alone थी. इसके बाद वो 2020 में क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज Dangerous में दिखी थीं। 

  • नीम करौली बाबा की फिल्म ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर चमत्कार, 32वें दिन कमाई 150 करोड़ पार

    नीम करौली बाबा की फिल्म ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर चमत्कार, 32वें दिन कमाई 150 करोड़ पार

    नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' पर वाकई में भगवान की कृपा बरस रही है. फिल्म के आंकड़ों ने हर किसी के होश उड़ा दिए हैं. हनुमान अंश रिलीज के एक महीने बाद भी बॉक्स ऑफिस पर चमत्कारी कमाई कर रही है. इस फिल्म ने बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म 'टॉक्सिक' और 'आवारापन 2' को धूल चटा दी है.

    क्या बोले फिल्म के कंपोजर?
    'हनुमान अंश' की चमत्कारी सक्सेस पर अब फिल्म के म्यूजिक कंपोजर साधू सुशील तिवारी और रितेश पाठक ने रिएक्ट किया है. हिंदुस्तान संग बातचीत में फिल्म की ताबड़तोड़ कमाई पर फिल्म के कंपोजर ने कहा- जिस तरह का कलेक्शन चल रहा है, तो इसे कृपा ही कहेंगे.

    'मुझे जितनी बार भी लोगों ने पूछा और कहा कि ये चमत्कार है, तो मैंने यही कहा कि यह आशीर्वाद है…कृपा है. हम हिंदुस्तान के लोग हैं. हमें आशीर्वाद ही लगता है कि माता-पिता का, गुरुओं का. हम बजरंगबली के भक्त हैं, बजरंगबली का, राम जी का आशीर्वाद मिला है. इसे बाबा नीम करौली जी का, सीता-राम जी का आशीर्वाद तो मिला ही हुआ है…वरना इतनी छोटी फिल्म को प्यार जो लोगों का मिल रहा है, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है.

    उन्होंने आगे कहा- यह ऐतिहासिक घटना है. मुझे लगता है कि लोग हनुमान अंश फिल्म पर विचार भी करेंगे कि एक फिल्म ने ऐसे कैसे कमाई कर ली.

    150 करोड़ पार फिल्म की कमाई
    'हनुमान अंश' फिल्म की बात करें तो बिना किसी बड़ी स्टारकास्ट और बजट के फिल्म धुआंधार कमाई कर रही है. 32वें दिन फिल्म का भारत में अब तक का कुल ग्रॉस कलेक्शन 156.20 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 132.13 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है. फिल्म की कमाई अभी भी जारी है. देखते हैं कि यह आंकड़े कहां जाकर रुकते हैं.

  • ‘75 की चीनी हो गई, 75 का पौआ भी…’ वायरल भोजपुरी गाने ने महंगाई पर साधा निशाना

    ‘75 की चीनी हो गई, 75 का पौआ भी…’ वायरल भोजपुरी गाने ने महंगाई पर साधा निशाना

    इन दिनों ये लाइनें आप इंस्टा रील्स और वीडियोज में खूब सुन रहे होंगे. ये लाइन बढ़ती महंगाई पर सीधा कटाक्ष करती है. 75 रुपये की चीनी हो गई है,और 75 का ही पौआ भी मिलता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल करते हुए पूछा जाता है कि बताइये चाय पिएं या शराब?

    साफ है कि महंगाई पर जनता का गुस्सा अब सिर्फ बातचीत और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है. अब तो भोजपुरी गाने भी महंगाई का हिसाब-किताब बताने लगे हैं. सरकार पर तंज कसता ये गाना सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है.

    बस फिर क्या था, ये लाइन सोशल मीडिया पर लोगों की जुबान पर चढ़ गई. गाने के जरिए महिलाओं ने बढ़ती महंगाई और खासकर रसोई के बिगड़ते बजट पर तंज कसा है.

    चीनी महंगी हुई तो गाने में पूछ लिया- चाय पिएं या पउवा?
    गाने का अंदाज बेहद देसी और सीधा है. इसमें चीनी के दाम बढ़ने को शराब के पौआ की कीमत से जोड़कर सरकार पर व्यंग्य किया गया है. गाने के बोल के मुताबिक, जब चीनी और पौआ की कीमत लगभग एक जैसी हो जाए तो सवाल उठता है कि आखिर चाय बनाई जाए या पौआ खरीदा जाए.

    यही मजेदार और चुभने वाला अंदाज इस गाने को लोगों के बीच तेजी से वायरल कर रहा है. गाने में आगे बात सिर्फ चीनी तक नहीं बल्कि पेट्रोल-डीजल तक के बढ़ते दामों की भी बात की गई है. सिंगर का कहना है कि सरकार ने माहोल को बिगाड़ दिया है.

    न महंगा सेट, न मॉडल्स… फिर भी वायरल हो गया गाना
    इस गाने की सबसे खास बात इसका सिंपल सा वीडियो है, जिसे बेहद सादगी से फिल्माया गया है. गाने को अशोक प्रेमी यादव ने आवाज दी है, जबकि इसके बोल संदीप बाबू ने लिखे हैं. वीडियो में कोई बड़ा सेट, ग्लैमरस मॉडल या महंगी लोकेशन नजर नहीं आती. अशोक प्रेमी यादव खुद माइक हाथ में लेकर स्टूडियो में बैठे गाना गाते दिखाई देते हैं. कुछ सीन्स में AI का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन कुल मिलाकर वीडियो बेहद सिंपल रखा गया है.

    इसके बावजूद गाने ने महज 10 दिनों में ढाई लाख से ज्यादा व्यूज हासिल कर लिए हैं और लगातार वायरल हो रहा है. मतलब साफ है कि इस गाने के बोल ही इतने धारदार हैं कि सुनने वालों के सीधा दिल पर लग रहे हैं.

    भोजपुरी इंडस्ट्री को लेकर बोले- ‘न्यूजपेपर से भी तेज हो गई’
    गाना वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के मजेदार रिएक्शन भी सामने आ रहे हैं. एक यूजर ने लिखा कि भोजपुरी इंडस्ट्री तो न्यूजपेपर से भी तेज हो गई है, क्योंकि किसी भी करंट अफेयर या ताजा मुद्दे पर तुरंत गाना तैयार हो जाता है. वहीं एक अन्य यूजर ने गाने की तारीफ करते हुए लिखा कि महंगाई के मुद्दे पर बहुत बढ़िया गीत गाया गया है.

    पहले मर्डर केस पर भी बने थे भोजपुरी गाने
    ये पहली बार नहीं है जब किसी ताजा मुद्दे को भोजपुरी गाने का हिस्सा बनाया गया हो. भोजपुरी इंडस्ट्री को लेकर एक बात फेमस है कि यहां अपनी बात कहने का तरीका ही गाना है, किसी को कोई संदेश देना या ताना मारता होता है तो गाने को ही जरिया बनाया जाता है.

    इससे पहले मेरठ के चर्चित नीले ड्रम मर्डर केस पर भी कई भोजपुरी गाने बनाए गए थे. इन गानों को लोगों ने खूब सुना, लेकिन मामले को गाने और मनोरंजन का विषय बनाने को लेकर भोजपुरी इंडस्ट्री की आलोचना भी हुई थी. हालांकि इस बार मामला थोड़ा अलग है. चीनी की महंगाई पर बनाया गया ये गाना सीधे-सीधे रोजमर्रा की परेशानी और रसोई के बजट पर व्यंग्य करता है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर इसे खूब पसंद किया जा रहा है.

    फिलहाल ‘75 की चीनी हो गई…’ वाली लाइन सोशल मीडिया पर खूब घूम रही है और भोजपुरी के देसी अंदाज में महंगाई का ये तंज लोगों को खूब गुदगुदाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर रहा है.

  • संजय दत्त से मराठी बोलने को कहा तो बोले- ‘6 साल यरवदा में रहा, फिर भी नहीं सीख पाया’, छूटी हंसी

    संजय दत्त से मराठी बोलने को कहा तो बोले- ‘6 साल यरवदा में रहा, फिर भी नहीं सीख पाया’, छूटी हंसी

    मुंबई में रविवार को एक इवेंट के दौरान बॉलीवुड के ‘संजू बाबा’ यानी संजय दत्त का एक मजेदार अंदाज देखने को मिला. मंच पर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ मौजूद संजय दत्त से जब मराठी में बोलने की उम्मीद की गई, तो एक्टर ने ऐसा जवाब दिया कि वहां मौजूद लोग हंस पड़े.

    दरअसल, कार्यक्रम में प्रताप सरनाईक ने मराठी भाषा को लेकर बात करते हुए कहा कि इन दिनों वह सभी को मराठी सिखा रहे हैं. इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में संजय दत्त को भी मराठी बोलने के लिए कह दिया.

    मंत्री ने कहा कि वह सोच रहे थे कि संजय दत्त के आने के बाद उनसे मराठी में बात करवाई जाए. उन्होंने कहा कि संजय हिंदी में बोलते हैं, लेकिन यहां मौजूद सभी लोग मराठी समझते हैं. अब बारी थी संजय दत्त की. माइक हाथ में आते ही संजय ने मराठी बोलने की बजाय ऐसा मजेदार जवाब दिया कि पूरा माहौल हल्का-फुल्का हो गया.

    ‘6 साल जेल में रहा, तब भी मराठी नहीं सीख पाया’
    संजय दत्त ने प्रताप सरनाईक को संबोधित करते हुए कहा- प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, यरवदा में. तब भी मराठी नहीं सीख पाया. मैं थोड़ा सीखा था. संजय का ये जवाब सुनकर वहां मौजूद लोगों को गुस्सा नहीं आया बल्कि चेहरे पर हंसी आ गई. एक्टर ने इसी अंदाज में मराठी बोलने की रिक्वेस्ट को टाल दिया और फिर प्रताप सरनाईक के साथ अपने पुराने रिश्ते का जिक्र किया.

    संजय ने कहा कि वह प्रताप भाई के आभारी हैं कि उन्होंने उन्हें यहां बुलाया. साथ ही उन्होंने बताया कि दोनों का रिश्ता काफी पुराना है और करीब 25 साल से एक-दूसरे को जानते हैं.

    मराठी को लेकर क्यों छिड़ी है बहस?
    दरअसल, महाराष्ट्र में इन दिनों मराठी भाषा को लेकर बहस तेज है. परिवहन विभाग की ओर से मुंबई में ऑटो चलाने वाले ड्राइवरों के लिए कामकाज जारी रखने के लिए मराठी के कुछ जरूरी वाक्यों की समझ रखने से जुड़ा फैसला सामने आया है. इस फैसले को लेकर शहर में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

    इसी मुद्दे के बीच प्रताप सरनाईक का संजय दत्त से मराठी बोलने का कहना भी चर्चा में आ गया. कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं और लिख रहे हैं कि- संजय दत्त 50 साल से ज्यादा समय से मुंबई में रह रहे हैं. खुद उन्होंने कहा है कि यरवदा जेल में 6 साल बिताने के बाद भी वह मराठी नहीं सीख पाए. उन्होंने यह बात सबके सामने बिना किसी झिझक के स्वीकार की. तो अब सवाल है कि क्या MNS और उद्धव ठाकरे की पार्टी भी संजय दत्त के साथ वैसा ही व्यवहार करेगी, जैसा वे टैक्सी ड्राइवरों, ऑटो ड्राइवरों और सड़क किनारे सामान बेचने वाले लोगों के साथ करते हैं?

    संजय दत्त और सलमान खान की भी दिखी थी जोड़ी
    वर्कफ्रंट की बात करें तो संजय दत्त हाल ही में साल 2026 में आई अरबी फिल्म ‘7 Dogs’ में कैमियो करते नजर आए थे. खास बात ये है कि इस फिल्म में उन्होंने सलमान खान के साथ स्क्रीन शेयर की थी.

    वहीं उनकी पिछली थिएट्रिकल रिलीज निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग की पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म 'आखिरी सवाल’ थी. फिल्म में नमाशी चक्रवर्ती, अमित साध, तृधा चौधरी और समीरा रेड्डी भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे.

  • न स्टार, न बड़ा बजट… फिर भी ‘हनुमान अंश’ का जलवा, नेत्रहीन सुनील लोधी की आवाज ने जीता दिल

    न स्टार, न बड़ा बजट… फिर भी ‘हनुमान अंश’ का जलवा, नेत्रहीन सुनील लोधी की आवाज ने जीता दिल

    न कोई बड़ा स्टार और न ही बड़ा बजट…फिर भी बॉक्स ऑफिस पर 'हनुमान अंश' फिल्म गर्दा उड़ा रही है. फिल्म की ताबड़तोड़ कमाई ने हर किसी को हैरान कर दिया है. नीम करौली बाबा की जिंदगी पर बनी फिल्म इतिहास रच रही है. फिल्म की सादगी भरी कहानी के साथ इसके गाने भी लोगों के दिलों को छू रहे हैं. फिल्म के एक भजन 'मैंने तेरे ही भरोसे' को दर्शकों का काफी प्यार मिल रहा है.

    तंबूरा बजाने वाला कैसे बना स्टार?
    लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस भजन को बुंदेलखंड के गांव के एक नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी ने गाया है. 'हनुमान अंश' में भजन गाकर सुनील की जिंदगी बदल गई है. वो स्टार बन गए हैं. उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है. नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी ने यहां तक पहुंचने के लिए काफी स्ट्रगल किया है. आइए जानते हैं उनके बारे में खास बातें…

    'हनुमान अंश' में 'मैंने तेरे ही भरोसे' भजन गाने वाले सुनील भले ही नेत्रहीन हैं, लेकिन उनमें टैलेंट का खजाना भरा है. सुनील लोधी का जन्म बुंदेलखंड के एक छोटे से गांव में हुआ. वो एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनका परिवार खेती करके गुजारा करता है. पैदाइश के समय से ही सुनील देख नहीं पाते हैं. लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी जिंदगी में अंधेरा नहीं छाने दिया.

    संगीत-भक्ति को बनाया दुनिया
    पीटीसी पंजाब में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक इंटरव्यू में सुनील ने अपने बचपन और आर्थिक हालात के बारे में बात की थी. उन्होंने बताया था कि उनके माता-पिता ने उनकी आंखों की रोशनी वापस लाने के लिए उनका इलाज कराया था, लेकिन फिर भी वो ठीक नहीं हो पाए. उन्होंने यह भी बताया कि पैसों की तंगी और आंखों से न देख पाने की वजह से वो अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए.

    सुनील ने फिर संगीत और भक्ति को ही अपनी दुनिया बना लिया. उन्होंने गांव की चौपालों और धार्मिक कार्यक्रमों में बुंदेली लोकगीत और भजन गाए,  जिसके साथ वो अक्सर पारंपरिक तंबूरा बजाते थे.

    सोशल मीडिया ने बदली दुनिया
    वो गांव के लोगों के बीच बैठकर भजन गाते थे. ट्रेनों और स्थानीए कार्यक्रमों में भी भजन गाते थे. लेकिन फिर उनकी जिंदगी साल 2019 में तब बदलनी शुरू हुई, जब उनकी मुलाकात यूट्यूबर रोहित साहू से हुई.

    रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील को गाते हुए सुनने के बाद, रोहित ने उनकी परफॉर्मेंस रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर अपलोड करना शुरू कर दिया. सुनील के बुंदेली गानों को यूट्यूब पर मिलियन में व्यूज मिलने लगे, जिसके बाद उन्हें पहचान मिलने लगी.

    सुनील की जिंदगी में सबसे बड़ा ब्रेक उनके पारंपरिक हनुमान भजन 'ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान' के बाद आया. सुनील की देसी आवाज और तंबूरे की सादगी के साथ गाए गए इस भजन को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया. इसके वीडियो को मिलियंस में व्यूज मिले और लोग सिंगर को ढूंढने लगे.

    कैसे मिली हनुमान अंश फिल्म?
    सुनील के वायरल भजन ने आखिरकार हनुमान अंश के मेकर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इसके बाद सुनील को भक्ति गीत रिकॉर्ड करने के लिए मुंबई बुलाया गया. फिल्म में सुनील का गाना 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' को काफी पसंद किया जा रहा है. इस भक्ति गीत को गाकर वो स्टार बन गए हैं.

  • ‘द ओडिसी’ ने ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ को छोड़ा पीछे, 8वें हफ्ते में मारी बाजी

    ‘द ओडिसी’ ने ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ को छोड़ा पीछे, 8वें हफ्ते में मारी बाजी

     क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘द ओडिसी’ ने अपने आठवें हफ्ते में ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ को पीछे छोड़ दिया है। लेकिन वर्ल्डवाइड कलेक्शन में अब भी ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ आगे है। जानिए क्या है पूरा मामला।

    वीकएंड पर की 'स्पाइडर मैन' से ज्यादा कमाई
    8वें हफ्ते ‘द ओडिसी’ ने करीब 433.97 करोड़ की कमाई की, जबकि ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ ने करीब 416.95 करोड़ कमाए। इस तरह नोलन की फिल्म ने स्पाइडर-मैन को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया।

    नोलन के करियर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म

    • ‘द ओडिसी’ की दुनियाभर में कमाई अब करीब 15,127 करोड़ की हो चुकी है।
    • इसी के साथ यह फिल्म क्रिस्टोफर नोलन के करियर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है।
    • फिल्म अब ऑल-टाइम ग्लोबल बॉक्स ऑफिस की लिस्ट में भी 14वें स्थान पर पहुंच गई है।
    • वहीं, ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ अब भी ऑल-टाइम सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में तीसरे नंबर पर बनी हुई है।

    ऑल टाइम कलेक्शन में स्पाइडर मैन आगे
    भले ही इस हफ्ते ‘द ओडिसी’ ने स्पाइडर-मैन को पीछे छोड़ दिया हो, लेकिन ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ की कमाई भी शानदार बनी हुई है। फिल्म दुनियाभर में करीब 22,691 करोड़ की कमाई कर चुकी है।

    फिल्म ने हाल ही में नॉर्थ अमेरिका में 8,509 करोड़ का आंकड़ा भी पार किया है। खास बात यह है कि ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ ने यह आंकड़ा सिर्फ 36 दिनों में पार किया, जो एक नया रिकॉर्ड है।

    दोनों फिल्मों का इंडिया में कलेक्शन
        वहीं, भारत की बात करे, तो दोनों फिल्मों ने यहां भी धूम मचा रखी है।
        'द ओडिसी' ने इंडिया में 192.82 करोड़ का कलेक्शन किया है।
        वहीं, दूसरी ओर ‘स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे’ ने 497.30 करोड़ की कमाई कर चुकी है।