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  • MP Weather: मानसून लौटा, लेकिन बारिश जारी; जबलपुर-रीवा समेत 16 जिलों में अलर्ट

    MP Weather: मानसून लौटा, लेकिन बारिश जारी; जबलपुर-रीवा समेत 16 जिलों में अलर्ट

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन बारिश का सिलसिला अभी पूरी तरह थमा नहीं है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अगले तीन दिन मौसम बदला रहेगा। बुधवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल समेत 16 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ जगह आंधी के आसार हैं। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत पश्चिमी हिस्से में दिन में तेज धूप रहेगी और रात में ठंडक बढ़ेगी। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के असर से पूर्वी जिलों में बारिश हो रही है। पिछले दो दिन से रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई इलाकों में बादल और रिमझिम बारिश का दौर बना हुआ है।

    आज इन 16 जिलों में बारिश का अनुमान
    जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडोरी, अनूपपुर, मंडला और बालाघाट में बारिश का अनुमान है।बारिश का असर 8 और 9 अक्टूबर को भी प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बना रह सकता है। 10 अक्टूबर से मौसम सिस्टम कमजोर पड़ने की संभावना है। इसके बाद प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम होंगी। दूसरी ओर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में दिन के समय धूप तेज रहेगी। रात के तापमान में गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है।

    कई शहरों में रात का पारा 18 डिग्री के आसपास
    मौसम में बदलाव का असर रात के तापमान पर भी दिख रहा है। बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.2 डिग्री रहा। पचमढ़ी में 18, छिंदवाड़ा में 18.2, शाजापुर में 18.3 और अमरकंटक-करौंदी में 18.9 डिग्री तापमान दर्ज हुआ।

    हालांकि, दिन में गर्मी का असर बना हुआ है। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 37 डिग्री के पार पहुंच रहा है। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के अक्टूबर के आंकड़ों में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी अक्टूबर में मौसम में इसी तरह उतार-चढ़ाव रहने का अनुमान है।

    100 दिन सक्रिय रहा मानसून, फिर भी 4% कम बारिश
    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 24 जून को पहुंचा था और 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से विदा हो गया। यानी मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। इसके बावजूद पूरे प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। मानसून सीजन में 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में कुल बारिश करीब 4 प्रतिशत कम रही। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत कम पानी गिरा। यही वजह है कि बारिश का असमान वितरण पूरे सीजन में बना रहा। 

    बीते 24 घंटे में 8 जिलों में बारिश
    पिछले 24 घंटे के अंदर 8 जिलों में बारिश रिकॉर्ड की गई। इनमें विदिशा, सतना, रीवा, सिंगरौली, अनुपपुर, डिंडोरी, छिंदवाड़ा और सिवनी शामिल हैं। सिवनी के कुरई में सबसे ज्यादा पौन इंच, अनूपपुर के कोतमा में आधा इंच पानी गिर गया।

    इधर, कई शहरों में रात का तापमान 20 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल में 18.8 डिग्री, बैतूल में 19.4 डिग्री, इंदौर में 18.4 डिग्री, खंडवा में 19 डिग्री, खरगोन में 19.4 डिग्री, पचमढ़ी में 17.8 डिग्री, रायसेन में 19.5 डिग्री सेल्सियस रहा।

    रात में पारा 18 डिग्री से नीचे आया
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने कहा- पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है।

    बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.2 डिग्री, पचमढ़ी में 18 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.2 डिग्री, शाजापुर में 18.3 डिग्री और अमरकंटक-करौंदी में 18.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इधर, दिन में ग्वालियर में तापमान 37 डिग्री के पार ही चल रहा है।

    इस बार सामान्य से कम बारिश
    इस बार मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 100 दिन सक्रिय रहा। 24 जून को यह एंटर हुआ था और 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से विदाई ले ली।

    मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।

    इन 25 जिलों में मानसून का कोटा फुल
    भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर में मानसून का कोटा फुल रहा है। आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में सामान्य बारिश हुई है।

    बाकी 30 जिलों में कम बारिश हुई है। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन शामिल हैं। इनके अलावा छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर भी बारिश के आंकड़ों में पीछे हैं।

    25 जिलों में कोटा पूरा, 30 अब भी पीछे
    प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो गया है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।वहीं 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। पश्चिमी हिस्से के कई जिले इसमें शामिल हैं। आलीराजपुर में कमी सबसे ज्यादा रही और इंदौर समेत कई जिलों में भी बारिश सामान्य से नीचे रही। पूर्वी हिस्से में भी बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    जून की कमी आखिर तक पूरी नहीं हो सकी
    इस बार मानसून सीजन के कुल आंकड़े में सबसे बड़ा असर जून की कम बारिश का रहा। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम पानी गिरा था। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून दो बार ब्रेक हुआ। मानसून के आखिरी दौर में बारिश का एक मजबूत दौर आया, जिससे जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का आंकड़ा संभला। इसके बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही कारण रहा कि पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा सामान्य से करीब 4 प्रतिशत नीचे रह गया। 

  • मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई शुरू, दिन में बढ़ेगा तापमान और रात में रहेगी ठंडक

    मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई शुरू, दिन में बढ़ेगा तापमान और रात में रहेगी ठंडक

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है और 10 अक्टूबर तक प्रदेश से इसके लौटने की संभावना है। अगले तीन दिनों तक कई इलाकों में तेज धूप रहने के आसार हैं, जिससे दिन का तापमान बढ़ सकता है, जबकि रात में हल्की ठंडक महसूस होगी। 5 अक्टूबर को 9 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। प्रदेश में अब तक करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 4% कम है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 4% ज्यादा, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में लगभग 12% कम बारिश दर्ज की गई है। 

    ग्वालियर-चंबल और उज्जैन से हो सकती है मानसून की वापसी
    मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 30 सितंबर को समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी तक प्रदेश के किसी भी जिले से मानसून की औपचारिक विदाई नहीं हुई है। वर्तमान में मानसून की वापसी रेखा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है। इसका असर मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के आसपास भी देखा जा रहा है।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मानसून की वापसी की शुरुआत इन्हीं क्षेत्रों से हो सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून विदा हो सकता है। इसकी शुरुआत शुक्रवार या शनिवार से होने की संभावना जताई जा रही है।

    अक्टूबर में दिन गर्म, रातें रहेंगी ठंडी
    अक्टूबर को मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। मानसून की विदाई के साथ आसमान साफ होने लगता है, जिससे दिन में धूप का असर बढ़ता है, जबकि रात के तापमान में गिरावट आने लगती है। यही वजह है कि अक्टूबर की शुरुआत में ही प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में कमी दर्ज की गई है।

    मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश भी हो सकती है।

    5 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश के आसार
    5 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
    प्रदेश के 25 जिलों में इस मानसून सीजन में बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    ऐसे में संभावना है कि यहीं से मानसून वापसी करेगा। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से इसकी विदाई होगी। शुक्रवार-शनिवार को इसकी शुरुआत हो सकती है।

    अक्टूबर में दिन गर्म और रातें ठंडी होंगी
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड रहा है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। दूसरी ओर, अक्टूबर का महीना चेंज ओवर पीरियड रहता है। इस महीने मानसून विदाई पर रहता है। इससे आसमान साफ हो जाता है। इस कारण दिन में गर्मी और रात में ठंड पड़ती है। यही वजह है कि अक्टूबर के पहले ही दिन कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट देखने को मिली है।

    कम बारिश, लेकिन गर्मी का अहसास बढ़ सकता है
    मौसम विशेषज्ञ नायक ने बताया कि अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्से में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान भी है। 5 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है।

    इस बार प्रदेश में 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड
    दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई है। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    प्रदेश के पश्चिमी हिस्से आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।

    इन 25 जिलों में कोटा फुल
    भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।

  • छत्तीसगढ़ में मानसून की विदाई का काउंटडाउन, बढ़ने लगा दिन का पारा

    छत्तीसगढ़ में मानसून की विदाई का काउंटडाउन, बढ़ने लगा दिन का पारा

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई की बेला नजदीक आ गई है. अगले 48 घंटे में प्रदेश के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनने की संभावना जताई गई है.

    (CG Weather Forecast) गुरुवार को पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क कहा. किसी भी इलाके में उल्लेखनीय बारिश दर्ज नहीं हुई. बारिश का दौर थमने के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है. (Monsoon Withdrawal) दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने से लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा हैं. वहीं रात हो हल्की ठंड महसूस होने लगी है.

    रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम 
    राजधानी रायपुर में 2 अक्टूबर को मौसम मुख्यतः साफ रहने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान जताया है. बारिश की फिलहाल कोई संभावना नहीं है. प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान राजनांदगांव 34.5 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा. वहीं पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 18.2 डिग्री दर्ज किया गया. यानी प्रदेश में दिन और रात के तापमान के बीच अच्छा खासा अंतर बना हुआ है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे भी प्रदेश में मौसम के शुष्क रहने की संभावना है. फिलहाल किसी जिले के लिए कोई चेतावनी नहीं की है.  

    कई प्रदेशों में मानसून की विदाई की परिस्थियां अनूकूल
    मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा फिलहाल गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया होते हुए आगे बढ़ रही है. मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 48 घंटों में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों के साथ गुजरात, मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से मानसून की और वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना है. इसी क्रम में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी मानसून की वापसी के संकेत मिल रहे हैं.

  • मध्य प्रदेश से मानसून की होगी विदाई, भारी बारिश का अलर्ट नहीं; हल्की बूंदाबांदी संभव

    मध्य प्रदेश से मानसून की होगी विदाई, भारी बारिश का अलर्ट नहीं; हल्की बूंदाबांदी संभव

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की दहलीज पर है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश से लौट सकता है। विदाई से पहले नमी के असर से कुछ इलाकों में बूंदाबांदी और गरज-चमक देखने को मिलेगी, हालांकि फिलहाल प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। इस बीच प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिले ऐसे हैं, जहां अब तक सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। वहीं आज प्रदेश के 8 जिलों में बूंदाबांदी के आसार हैं।

    प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश
    1 जून से 30 सितंबर तक के मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच है। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 4% कम बारिश हुई है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो सका, जबकि भोपाल और ग्वालियर समेत 25 जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है। सबसे ज्यादा कमी आलीराजपुर में रही, जहां सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी पूरी नहीं हो सकी। वहीं निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से अधिक बारिश दर्ज की गई।

    55 में से 30 जिलों में बारिश का कोटा अधूरा
    1 जून से 30 सितंबर तक के मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच है। इस हिसाब से प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 4% कम बारिश हुई है। प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया। वहीं भोपाल और ग्वालियर समेत 25 जिलों में सामान्य से ज्यादा या सामान्य बारिश दर्ज हुई है। सबसे ज्यादा कमी आलीराजपुर में रही, जहां सामान्य की आधी बारिश भी पूरी नहीं हो सकी। इसके उलट निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है।

    प्रदेश में औसत 35.8 इंच बारिश ही रिकॉर्ड IMD के मुताबिक- प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी, यानी 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। ओवर-ऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी एमपी में ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में कमी
    मानसून के दौरान प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का प्रदर्शन पश्चिमी हिस्से से बेहतर रहा। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसतन 4% ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई। पश्चिमी मध्य प्रदेश में कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई। 

    पूर्वी MP में बारिश बेहतर, पश्चिमी हिस्से में कमी
    मानसून के दौरान प्रदेश के पूर्वी हिस्से में पश्चिमी हिस्से की तुलना में बारिश की स्थिति बेहतर रही। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसतन 4% अधिक बारिश दर्ज की गई। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई।
    वहीं पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई।

    जून की कमी आखिर तक नहीं भर पाई
    इस बार मानसून के आंकड़े कम रहने की बड़ी वजह जून में हुई कम बारिश है। मौसम विभाग के अनुसार जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14% कम पानी गिरा था। जुलाई की शुरुआत में हुई तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का आंकड़ा सामान्य या उससे ऊपर रहा, लेकिन जून में हुई कमी पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से मानसून सीजन खत्म होने के बाद भी प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य से करीब 4% नीचे है। प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच रहता है।

    आज इन 8 जिलों में बूंदाबांदी
    मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बूंदाबांदी के साथ गरज-चमक हो सकती है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और जबलपुर समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने और तेज धूप निकलने का अनुमान है।

    4 दिन का मौसम
    1 अक्टूबर: पूर्वी हिस्से में कुछ जगह बूंदाबांदी, बाकी जगह धूप।
    2 अक्टूबर: नमी के असर से कुछ जिलों में हल्की बारिश संभव।
    3 अक्टूबर: बारिश की गतिविधियां और सीमित होने के आसार।
    इसके बाद: मानसून की विदाई के साथ बारिश का दौर लगभग थमने लगेगा। 

    जून की कमी आखिर तक पूरी नहीं हो सकी
    इस मानसून सीजन में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहने की बड़ी वजह जून में हुई कम बारिश रही। मौसम विभाग के अनुसार जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14% कम बारिश हुई थी।
    जुलाई की शुरुआत में हुई तेज बारिश से स्थिति में सुधार आया, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक की स्थिति बनी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक रही, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि मानसूनी सीजन खत्म होने के बाद भी प्रदेश की कुल बारिश सामान्य से करीब 4% कम रही। प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश करीब 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच के आसपास रहता है।

    अगले तीन दिन बूंदाबांदी के आसार
    मानसून की विदाई से पहले अगले तीन दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम में हलचल बनी रह सकती है। गुरुवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बूंदाबांदी और गरज-चमक की स्थिति बनी रही इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और जबलपुर समेत कई इलाकों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहा।

    2 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियां होंगी कम
    मौसम के अगले चार दिनों के पूर्वानुमान के मुताबिक 1 अक्टूबर को पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में बूंदाबांदी हो सकती है, जबकि बाकी इलाकों में धूप रहने की संभावना है। 2 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद बारिश की गतिविधियों में लगातार कमी आएगी और 3 अक्टूबर के बाद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश लगभग थमने लगेगी। इसके साथ ही मध्यप्रदेश से मानसून की विदाई का दौर शुरू होने की संभावना है।

     

  • हरियाणा में मानसून कमजोर, 23% कम हुई बारिश; किसानों की बढ़ी चिंता

    हरियाणा में मानसून कमजोर, 23% कम हुई बारिश; किसानों की बढ़ी चिंता

    हिसार.

    औसत से 23 प्रतिशत कम वर्षा के साथ हरियाणा से मानसून की बुधवार को विदाई हो गई। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के नजदीक जिला यमुनानगर को छोड़कर लगभग पूरे प्रदेश से मानसून लौट चुका है। यमुनानगर में सुबह के समय कोहरा भी छाया रहा।

    इस मानसून में हरियाणा में 317.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। प्रदेश में सामान्य वर्षा का आंकड़ा 413 मिलीमीटर है। यानि प्रदेश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई। पलवल को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही। कमजोर मानसून का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ तापमान में कमी न आने से बिजली की खपत भी बढ़ी हुई है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि राजस्थान में बने प्रति चक्रवातीय परिसंचरण के कारण हरियाणा-एनसीआर में पश्चिमी गर्म और शुष्क हवाएं चल रही हैं। इससे वातावरण में नमी कम हुई है और दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। बुधवार को तकरीबन सभी जिलों में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    गुरुग्राम में 38 डिग्री तापमान
    सबसे अधिकतम तापमान गुरुग्राम का 38.2 डिग्री रहा। 37.4 डिग्री सेल्सियस के साथ फरीदाबाद दूसरे नंबर पर रहा। सभी जिलों का न्यूनतम तापमान 20 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। 25 सितंबर को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हरियाणा के उत्तरी जिलों में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। 28 से 30 सितंबर के दौरान भी पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी की मौसम प्रणाली के प्रभाव से उत्तरी व पूर्वी जिलों में मौसम में बदलाव और हल्की वर्षा की संभावना है। मानसून की वापसी के लिए लगातार वर्षा का न होना, निचले वायुमंडल में प्रतिचक्रवात का बनना और हवा में नमी की कमी प्रमुख संकेत माने जाते हैं।

    दस साल बाद ऐसा मानसून
    दस साल पहले भी मानसून कुछ ऐसा बीता था। 2016 में सामान्य से 58 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी। हालांकि 2015 का मानसून उससे भी कमजोर रहा था। उस वक्त सामान्य से 126 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। तब महज 287.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी।

  • मानसून की विदाई तय, MP में 6% कम बारिश फिर भी बांध लबालब

    मानसून की विदाई तय, MP में 6% कम बारिश फिर भी बांध लबालब

    भोपाल
     देश में मानसून की पश्चिमी राजस्थान से विदाई शुरू हो गई है. मध्य प्रदेश में 30 सितंबर तक प्रदेश के उत्तर पश्चिमी क्षेत्रों से मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी. प्रदेश में 22 जून को मानसून के आगमन हुआ था. मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में करीब 20 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका. प्रदेश में अलीराजपुर जिले में सबसे कम बारिश हुई है. यहां बारिश का आधा कोटा ही पूरा हो सका। 

    हालांकि, मानसून की विदाई के पहले एक बार मानसून पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के एक दर्जन जिलों को तरबतर करेगा. अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र के ऊपर बन रहे निम्न दबाव का क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। 

    इन जिलों को भिगोने के बाद शुरू होगी विदाई
    अलनीनो की वजह से इस बार बारिश में कमी की आशंका जताई गई थी, इसका प्रदेश के कई हिस्सों में असर दिखाई दिया है. प्रदेश में औसतन 6 फीसदी कम बारिश हुई है. प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में औसत से 2 फीसदी कम और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 10 फीसदी कम बारिश हुई है. देश में मानसून की विदाई 19 सितंबर से शुरू हो गई है. पश्चिमी राजस्थान से मानसून ने विदा लेना शुरू कर दिया है. मध्य प्रदेश में 30 सितंबर से बारिश की विदाई शुरू होने जा रही है. हालांकि, विदाई के पहले प्रदेश में झमाझम बारिश होने की उम्मीद है। 

    मौसम वैज्ञानिक अरूण शर्मा के मुताबिक "अंडमान सागर और आसमान क्षेत्र के ऊपर स्थित निम्न दवाब का क्षेत्र आगे बढ़ रहा है. इसके चलते 23 और 24 सितंबर को प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के जिलों में अच्छी बारिश होगी. इसके चलते जिन जिलों में कम बारिश हुई है, वहां भी बारिश के कोटे में सुधार की उम्मीद है। 

    दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में बारिश का दौर रहेगा। मौसम विभाग ने 24 सितंबर से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले रिमझिम जारी रहेगी। प्रदेश में अब तक औसत 33.9 इंच पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार तक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) उत्तर अंडमान सागर एवं आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित था। रविवार को यह आगे बढ़ गया। इसके आगे बढ़ने और 21 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। ऐसा होने से 24 सितंबर से कई जिलों में तेज बारिश शुरू होगी। इस दिन प्रदेश के छतरपुर, सतना, दमोह, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

    इससे पहले रविवार रात को भोपाल के कई इलाकों में तेज पानी गिरा। नर्मदापुरम में हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिर गया। बिजली गुल होने से शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा।

    32 जिलों में 5% से 49% तक कम बारिश
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 24% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। रविवार तक आंकड़ा माइनस में 2 प्रतिशत रहा।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 49% कम पानी गिरा है।

    मध्य प्रदेश के 20 जिले रह गए प्यासे
    मध्य प्रदेश में 1 जून से 20 सितंबर तक के आंकड़ों को देखा जाए तो मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 10 फीसदी से लेकर 49 फीसदी तक कम बारिश हुई है. प्रदेश में सबसे कम बारिश अलीराजपुर जिले में हुई है. यहां बारिश का कोटा आधा ही पूरा हो सका. अलीराजपुर के अलावा कई जिले हैं जहां बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका. इसके अलावा विदिशा, नर्मदापुरम, रायसेन जैसे जिलों में भी कम बारिश हुई है, जहां बड़े पैमाने पर गेहूं और धान की फसल होती है. कम बारिश से यह फसलें प्रभावित होंगी। 

    इसके अलावा इंदौर, उज्जैन में भी सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि राजधानी भोपाल में सामान्य से 12 फीसदी ज्यादा बारिश हुई और भोपाल का बड़ा तालाब भरने से भदभदा और फिर कलियासोत डैम के गेट भी खोलने पड़े हैं। 

    मध्य प्रदेश के बांधों में पहुंचा भरपूर पानी
    हालांकि, मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश के बाद भी प्रदेश में गर्मी के सीजन में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना होगा. प्रदेश के बांधों में भरपूत पानी पहुंचा है. प्रदेश के बड़े बांध 80 फीसदी और उससे ज्यादा भर चुके हैं. मंदसौर जिले में आने वाला गांधी सागर बांध 79.35 फीसदी भर चुका है, जबकि तवा बांध 87.26 फीसदी भर चुका है. जबलपुर के बरगी बांध का बारिश में कई बार गेट खोलना पड़ा है. यह बांध पूरी तरह से लबालब हो चुका है। 

    यही स्थिति बाणसागर डैम की है. प्रदेश के 45 प्रमुख बांधों में से 34 बांध 80 फीसदी से ज्यादा भर चुके हैं, इनमें प्रदेश के सभी बड़े बांध शामिल हैं. प्रदेश में ऐसा कोई बांध नहीं है, जो 50 फीसदी से कम भरा हो. सबसे कम जल भराव वाला बांध ओंकारेश्वर है, वह भी 69.84 फीसदी पानी भर चुका है। 

    इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई।

    आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह से अब तक भी प्रदेश में 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

    प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

    भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश
    भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था।

    इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

  • पंजाब में मानसून की वापसी का दौर शुरू, कई जिलों में आज हल्की बारिश संभव

    पंजाब में मानसून की वापसी का दौर शुरू, कई जिलों में आज हल्की बारिश संभव

    अमृतसर.

    पंजाब में मानसून का सफर अब समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 15 सितंबर के बाद से राज्य में मानसून की विदाई प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है। मालवा क्षेत्र के फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जिलों से मानसून के बादल पीछे हट चुके हैं।

    मौसम विभाग की तरफ से जारी जानकारी के अनुसार 25 सितंबर या उससे पहले मानसून पूरे प्रदेश से पूरी तरह से विदा हो जाएगा। दो दिन बारिश के दौर के बाद अब तापमान में हल्की बढ़ौतरी देखने को मिली। हालांकि, तापमान अभी भी सामान्य के करीब बना हुआ है। आज मौसम विभाग ने कोई अलर्ट तो जारी नहीं किया, लेकिन छुटपुट बारिश के आसार बन रहे हैं। वहीं, आने वाले दिनों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। 
    मौसम केंद्र की चेतावनी व पूर्वानुमान मानचित्र के अनुसार 19 सितंबर को राज्य के कुछ चुनिंदा जिलों में हल्की या छिटपुट (25 प्रतिशत तक क्षेत्र में) बारिश होने की संभावना है।

    19 सितंबर: आज पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, होशियारपुर, शहीद भगत सिंह नगर और रूपनगर हल्की बारिश के आसार हैं। वहीं जालंधर, लुधियाना, पटियाला, बठिंडा और मोहाली समेत राज्य के मध्य व दक्षिणी इलाकों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

    20-21 सितंबर: राज्य के सभी जिलों में मौसम पूरी तरह से शुष्क रहने की संभावना जताई गई है।

    तापमान में 0.3 डिग्री की मामूली बढ़ोतरी
    शुक्रवार (18 सितंबर) को राज्य के औसत अधिकतम तापमान में बीते दिन के मुकाबले 0.3 डिग्री सेल्सियस की हल्की वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि यह सामान्य तापमान के आसपास ही बना रहा। प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान फरीदकोट में 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अन्य प्रमुख शहरों के तापमान की बात करें तो अमृतसर में अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री, लुधियाना में 33.0 डिग्री, पटियाला में 34.4 डिग्री, बठिंडा में 34.0 डिग्री, फिरोजपुर में 33.4 डिग्री, जालंधर में 31.3 डिग्री, होशियारपुर में 31.6 डिग्री और संगरूर में 30.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 

  • MP में मानसून का आखिरी दौर, 4.3 इंच बारिश से पूरा होगा सीजन का कोटा

    MP में मानसून का आखिरी दौर, 4.3 इंच बारिश से पूरा होगा सीजन का कोटा

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय नजदीक आ रहा है, लेकिन बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से पीछे है। ऐसे में सितंबर के आखिरी दौर में सक्रिय होने वाला मौसम तंत्र प्रदेश के लिए अहम रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है। तंत्र मजबूत रहा तो मानसून का सामान्य कोटा पूरा हो सकता है। प्रदेश में मंगलवार तक 33 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, जबकि पूरे मानसून सीजन का सामान्य औसत 37.3 इंच है। यानी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अब करीब 4.3 इंच बारिश और चाहिए। फिलहाल प्रदेश में सामान्य से करीब 6% कम बारिश हुई है।

    17 से 19 सितंबर तक बढ़ेगी बारिश की गतिविधि
    मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश में बारिश का एक और दौर ला सकता है। इसकी ताकत और सक्रियता पर यह निर्भर करेगा कि मानसून के विदा होने से पहले प्रदेश में कितनी बारिश होती है।मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में निम्न दाब क्षेत्र सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधियां भी बनी रहीं, लेकिन इसका असर प्रदेश में तेज बारिश के रूप में नहीं दिखा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन में धूप खिली रही। मैहर में शाम के समय तेज बारिश हुई।

    17 से 19 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा गतिविधि के अधिक व्यापक होने की संभावना है। 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी हिस्से में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) एक्टिव रहा। मानसून ट्रफ की एक्टिविटी भी देखने को मिली, लेकिन प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश नहीं हुई। भोपाल में धूप खिली रही। इंदौर, उज्जैन में भी ऐसा ही मौसम रहा।

    अब तक कोटे की 88.5% बारिश बता दें कि मानसूनी सीजन को अब 14 दिन बाकी बचे हैं। मंगलवार तक प्रदेश में 33 इंच यानी, 88.5% बारिश हुई है। भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है।

    इन जिलों में अब जो भी बारिश होगी, वह बोनस रहेगी। 18 जिलों में भोपाल, राजगढ़्र, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया भी शामिल हैं।

    इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 37 जिलों में कम बारिश हुई है। आलीराजपुर में तो सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है।

    88.5% बारिश पूरी, 14 दिन बाकी
    मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का 88.5% कोटा पूरा हो चुका है।18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। इन जिलों में आगे होने वाली बारिश  सामान्य आंकड़े से अतिरिक्त होगी। वहीं इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले सामान्य बारिश से पीछे हैं। अलीराजपुर में सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हो सकी है। इसके उलट निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा पानी गिर चुका है। 

    जून की कमी ने बिगाड़ा पूरा हिसाब
    इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से आंकड़े में सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया। जुलाई के आखिरी सप्ताह में मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हुआ और बारिश बढ़ी, फिर भी पूरे जुलाई में सामान्य से 13% कम बारिश दर्ज हुई। अगस्त में अच्छी बारिश हुई, लेकिन शुरुआती महीनों की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि मानसून सीजन खत्म होने में दो सप्ताह से भी कम समय बचा है और प्रदेश अभी भी सामान्य बारिश से 6% पीछे है। मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। इसके मुकाबले अब तक 33 इंच पानी गिर चुका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच के बीच है। 

  • मध्य प्रदेश में कमजोर पड़ा मानसून, ज्यादातर इलाकों में मौसम साफ; जबलपुर-दमोह समेत कई जिलों में बौछारें

    मध्य प्रदेश में कमजोर पड़ा मानसून, ज्यादातर इलाकों में मौसम साफ; जबलपुर-दमोह समेत कई जिलों में बौछारें

    भोपाल
    प्रदेश में वेदर सिस्टम कमजोर पड़ने के साथ मानसूनी वर्षा का दौर धीमा पड़ गया है। सोमवार को प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मौसम साफ रहा। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक श्योपुर में 21 और शिवपुरी में 18 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं नर्मदापुरम में 13.1, खरगोन में 10.8, इंदौर में 7.2 और राजगढ़ में 7 मिमी पानी गिरा। राजधानी भोपाल सहित बाकी जिलों में हल्की बूंदाबांदी के बाद धूप खिल गई।

    यहां पड़ सकती हैं बौछारें
    मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार को दमोह, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, पन्ना, कटनी सागर, नर्मदापुरम व जबलपुर जैसे जिलों में मामूली बारिश हो सकती है।

    मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं, लेकिन विदाई से पहले प्रदेश में वर्षा का एक और दौर देखने को मिलेगा।

    ये वेदर सिस्टम सक्रिय
    वर्तमान में राजस्थान-गुजरात सीमा पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही मुख्य मानसून ट्रफ राजगढ़ व दमोह से और अरब सागर से झारखंड तक फैली दूसरी ट्रफ लाइन भी प्रदेश के ऊपर से गुजर रही है। इन सक्रिय वेदर सिस्टम के चलते अगले 48 से 72 घंटों के दौरान भोपाल, सीहोर, राजगढ़, उज्जैन और चंबल-ग्वालियर संभाग सहित राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा और गरज-चमक की स्थिति बनी रहने का अनुमान है।

    मानसूनी सीजन को अब 15 दिन बाकी बचे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में 88% बारिश ही हुई है। इंदौर, उज्जैन-जबलपुर समेत 37 जिलों में कोटा फुल नहीं हुआ है।भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया। आलीराजपुर में तो कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश में बारिश का सिस्टम आज से और कमजोर हो गया है।

    IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के मुताबिक अगले 4 दिन तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है।

    बता दें कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से यानी- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में पिछले चार दिन से भारी बारिश का दौर चल रहा था।

    सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश रिकॉर्ड की गई, लेकिन मंगलवार से सिस्टम कमजोर हो जाएगा। इस वजह से 15 से 17 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा।

    पूर्वी हिस्से में रिकॉर्ड बारिश, लेकिन पश्चिम पिछड़ा
    मौसम विभाग के अनुसार, इस बार प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में रिकॉर्ड बारिश हुई। सागर के निवाड़ी में कोटे से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34%, मैहर में 29% पानी ज्यादा गिर गया।

    यदि इंच के हिसाब से बात करें तो मऊगंज में सबसे ज्यादा 54.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। सतना में 50 इंच से ज्यादा पानी गिरा। दूसरी ओर, इंदौर संभाग के आलीराजपुर में सिर्फ 16 इंच पानी ही गिरा है।

    आज से और कमजोर होगा सिस्टम
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, 15 सितंबर से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और प्रसार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है। सात दिन के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कभी तेज तो कभी हल्की बारिश होने की संभावना है।

    अब तक 32.8 इंच बारिश, 23 जिलों में ज्यादा
    IMD (मौसम केंद्र) की माने तो प्रदेश में अब तक 834.4 मिमी यानी, 32.8 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 34.9 इंच (886.6 मिमी) की तुलना में 2.1 इंच कम है।

    वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है।

     

     

  • मध्यप्रदेश में बारिश का दौर फिर शुरू, 12 जिले भीगेंगे; कल से इंदौर संभाग में भी बरसेंगे बादल

    मध्यप्रदेश में बारिश का दौर फिर शुरू, 12 जिले भीगेंगे; कल से इंदौर संभाग में भी बरसेंगे बादल

    भोपाल

    मध्य प्रदेश में तीन दिन की राहत के बाद मानसून ने फिर करवट ली है। शुक्रवार को प्रदेश के पूर्वी हिस्से के 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में बारिश का जोर रहने की संभावना है। 12 सितंबर से इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी।

     फिर सक्रिय हुआ मानसून, अब पश्चिमी एमपी की बारी
    प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश का जोर थमा हुआ था। ज्यादातर इलाकों में धूप निकलने से गर्मी और उमस बढ़ गई थी। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में भी गुरुवार को धूप का असर रहा। अब बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दाब क्षेत्र, सक्रिय मानसून ट्रफ और पश्चिमी हिस्से में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। शुक्रवार को इसका ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश में रहेगा, जबकि शनिवार से पश्चिमी हिस्से में भी बारिश बढ़ सकती है। 

    शुक्रवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में मौसम मिला-जुला रहने का अनुमान है। कुछ जगहों पर धूप निकल सकती है, जबकि कहीं-कहीं हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।

    तीन दिन से बारिश नहीं, गर्मी-उमस बढ़ी प्रदेश में पिछले 3 दिन से भारी बारिश नहीं हुई है। इस वजह से गर्मी और उमस का असर बढ़ गया है। गुरुवार को भोपाल में तीखी धूप रही। इस वजह से लोग बचाव करते हुए नजर आए। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में भी धूप खिली। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र), मानसून ट्रफ एक्टिव है। वहीं, पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) की सक्रियता भी है। इसके चलते बारिश का दौर चलेगा।

    एमपी में 8% बारिश कम, 32 जिले पीछे मौसम विभाग के अनुसार, अब तक हुई बारिश की बात करें तो इस सीजन 795.3 मिमी यानी, 31.3 इंच बारिश हो चुकी है। यह अब तक की सामान्य बारिश 33.9 इंच (862.5 मिमी) की तुलना में 2.6 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 8 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 2 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में औसत से 13% बारिश कम हुई है।

    33 जिलों में 1% से 56% तक कम बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 2% से 25% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। बीते एक सप्ताह से यहां के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन बुधवार तक आंकड़ा एक प्रतिशत हो गया।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 56% कम पानी गिरा है।

    इन 22 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    मौसम ने क्यों बदला रुख?
    मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र और मानसून ट्रफ इस समय सक्रिय हैं। इसके अलावा प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इन मौसमी परिस्थितियों के चलते बारिश के लिए अनुकूल माहौल बन रहा है और आने वाले दिनों में कई इलाकों में बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    बारिश थमते ही बढ़ी उमस
    पिछले तीन दिनों में प्रदेश में तेज बारिश का दौर नहीं रहा। इसका असर तापमान और उमस के रूप में देखने को मिला। गुरुवार को भोपाल में तेज धूप रही। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में भी मौसम साफ रहा। बारिश से मिली राहत के बाद अब उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

    सीजन में अब तक सामान्य से कम पानी
    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 795.3 मिलीमीटर यानी करीब 31.3 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य आंकड़ा 862.5 मिलीमीटर यानी 33.9 इंच है। इस हिसाब से प्रदेश में अभी करीब 2.6 इंच बारिश की कमी बनी हुई है। कुल बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत कम है। पूर्वी हिस्से में कमी करीब 2 प्रतिशत, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 13 प्रतिशत है।

    पश्चिमी जिलों में बारिश की ज्यादा कमी
    बारिश के आंकड़ों में सबसे ज्यादा पिछड़ने वाले जिलों में पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिले शामिल हैं। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। इन जिलों में कमी 1 से 56 प्रतिशत तक है।

    22 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
    प्रदेश के कुछ जिलों में मानसून मेहरबान भी रहा है। अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    अब फिर बढ़ेगी बारिश की गतिविधि
    पिछले एक सप्ताह में खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश के आंकड़ों में सुधार हुआ है। कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बनने के कारण सीजन का आंकड़ा भी ऊपर आया है। अब मानसूनी सिस्टम दोबारा सक्रिय होने से आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला बढ़ने की उम्मीद है।