मध्य प्रदेश

MP में रेल सफर होगा तेज, बुधनी-बरखेड़ा ट्रैक पर वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए बिछेगी फेंसिंग

भोपाल
 मध्य प्रदेश में वन्यजीवों को बचाने के लिए भारतीय रेलवे ने एक अनूठी पहल की है। इसके बाद उम्मीद की नई किरण जगी है। रेलवे ने मध्य प्रदेश के बुधनी-बरखेड़ा रेलवे सेक्शन पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष फेंसिंग लगाने जा रहा है। इसका मकसद जानवरों और ट्रेनों की टक्कर को कम करना है। साथ ही वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखना और जंगलों से गुजरने वाले ट्रेनों की समय-पाबंदी में सुधार करना है।

288 करोड़ रुपए की है परियोजना
यह पहल 288 करोड़ रुपए की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत रेलवे बीना-खंडवा मार्ग पर सुरक्षात्मक फेंसिंग लगाने की योजना बना रहा है। पूरा होने पर, यह परियोजना 530 किमी की दूरी को कवर करेगी और इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

जंगली जानवरों को बचाने का काम करेगी फेंसिंग
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह फेंसिंग रेलवे ट्रैक और उससे सटे जंगली इलाकों के बीच एक फिजिकल रुकावट पर काम करेगी, जिससे जंगली जानवरों और मवेशियों को ट्रैक पर आने से रोकेगा। बुधनी और बरखेड़ा के बीच का हिस्सा रातापानी वन क्षेत्र के संवेदनशील हिस्से से गुजरता है। यहां का जानवरों का ट्रैक पार करना लंबे समय से वन्यजीवों और रेल परिचालन, दोनों के लिए सुरक्षा का एक बड़ा मुद्दा रहा है।

ट्रैक पर या उसके आस-पास जानवरों की लगातार मौजूदगी के कारण लोको पायलट को ब्रेक लगाना पड़ता है या ट्रेन की गति कम करनी पड़ती है।

नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल रेल मंडल

बिगड़ जाता है शेड्यूल
उन्होंने कहा कि इस तरह की सावधानी बरतने से ट्रेनों का शेड्यूल बिगड़ जाता है। खासकर व्यस्त और लंबी दूरी के मार्गों पर। साथ ही, अगर अचानक कोई जानवर सामने आ जाए तो दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। फेंसिंग के जरिए जानवरों की अनियंत्रित आवाजाही को रोककर, ट्रेनों का परिचालन सुचारू होगा और बिना योजना के होने वाली देरी में कमी आएगी।

वन्यजीवों की सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
इस परियोजना से वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अन्य उपायों को भी मजबूती देगी। रेलवे की ओर से बुधनी-बरखेड़ा सेक्शन पर जानवरों के लिए अलग से ओवरपास भी बन रहा है, ताकि वन्यजीव सुरक्षित तरीके से ट्रैक पार कर सकें। दरअसल, बुधनी-मिडघाट-चौका-बरखेड़ा कॉरिडोर को एक संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। यहां पहले भी अधूरी फेंसिंग और जानवरों के लिए पर्याप्त रास्ते न होने को लेकर चिंता व्यक्त की जाती रही है।

जानवरों को परेशानी नहीं हो
इसके साथ ही रेलवे कार्यकर्ताओं ने आग्रह किया है कि पूरी प्लानिंग इस तरीके से हो कि जानवरों को परेशानी नहीं हो। निर्माण इस तरह से हो कि सभी चीजें आपस में जुड़ी हों। फेंसिंग की वजह से जानवर किसी असुरक्षित इलाके में नहीं मुड़ जाएं। उनके लिए सुरक्षित रास्ता हो।

गौरतलब है कि बीना-खंडवा फेंसिंग का कार्यक्रम, रेलवे के उस व्यापक नेशनल प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका उदेश्य संवेदनशील रेल मार्गों को सुरक्षित बनाना है। रेलवने पहले ही अपने नेटवर्क के हजारों किमी हिस्से में बाड़ लगा दी है। इससे दुर्घटनाएं कम होंगी।

पूरा रखा जा रहा है ध्यान
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बाड़ लगाते समय स्थानीय औद्योगिक परिस्थितियों और जानवरों की आवाजाही के तरीकों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। अग्रवाल ने कहा कि इसका उद्देश्य न केवल वन्यजीवों की रक्षा करना है, बल्कि यात्रियों और माल ढुलाई सेवाओं के अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद रेल कॉरिडोर तैयार करना भी है।

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