Category: छत्तीसगढ़

  • रायपुर में पेट्रोल ₹107.96 पहुंचा, महीने में चौथी बार बढ़े तेल के दाम

    रायपुर में पेट्रोल ₹107.96 पहुंचा, महीने में चौथी बार बढ़े तेल के दाम

    रायपुर 

    देशभर में तेल कंपनियों ने फिर पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ा दिए हैं। आज, 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पेट्रोल का प्राइस 109 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है।

    राजधानी रायपुर में अब 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹107.96 हो गई है। इससे पहले 15 मई को 3-3 रुपए, 19 मई को 90-90 पैसे और 23 मई को भी 90 पैसे प्रति लीटर रेट बढ़ाए गए थे। इस महीने ये चौथी बार दाम बढ़ा है।

    ब्लैक मार्केटिंग पर नजर, शिकायत के लिए नंबर जारी
    फ्यूल संकट और बढ़ती कीमतों के बीच प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। रायपुर कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

    शहर में कहीं भी अधिक कीमत वसूली या अवैध बिक्री की जानकारी मिलने पर लोग 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 नंबर पर शिकायत कर सकते हैं।

    इस महीने चौथी बार फ्यूल के रेट बढ़ें

    ताजा रेट के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में ज्यादा कीमत बढ़ी है। वहीं, रायपुर और कोरबा जैसे शहरों में बाकी जिलों की तुलना में थोड़ी राहत है।

    नारायणपुर में पेट्रोल ₹109.65 प्रति लीटर, जगदलपुर में ₹109.64, दंतेवाड़ा में ₹109.60 और बीजापुर में ₹109.59 लीटर बिक रहा है।

    जशपुर में पेट्रोल ₹109.52, सूरजपुर में ₹109.39 और अंबिकापुर में ₹109.09 प्रति लीटर, रायगढ़ में 109.3 रुपए दर्ज किया गया। बता दें कि इस महीने चौथी बार फ्यूल के रेट में इजाफा हुआ है।

    दुर्ग में पेट्रोल ₹108.29, धमतरी में ₹108.45, महासमुंद में ₹108.64 और बिलासपुर में ₹108.65 प्रति लीटर पहुंच गया है।

    रायपुर में 108 रुपए से नीचे, लेकिन राहत सीमित

    राजधानी रायपुर में पेट्रोल की कीमत ₹107.96 प्रति लीटर रिकॉर्ड है। प्रदेश के बड़े शहरों में यह दर अपेक्षाकृत कम है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी के बाद यहां भी वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।

    कोरबा में सबसे कम कीमत

    प्रदेश में सबसे कम पेट्रोल कीमत कोरबा में दर्ज की गई, जहां पेट्रोल ₹107.63 प्रति लीटर बिक रहा है। इसके अलावा जांजगीर में ₹108.21 और कवर्धा व रायगढ़ में ₹108.86 प्रति लीटर रेट सामने आया है।

    दूर के जिलों में ज्यादा कीमत की वजह
    जानकारों के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा संभाग में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट ज्यादा होने के कारण पेट्रोल की कीमतें ज्यादा रहती है। वहीं बड़े शहरों और औद्योगिक जिलों में सप्लाई बेहतर होने से कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है।

    आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर
    लगातार बढ़ती पेट्रोल कीमतों का असर अब रोजमर्रा के खर्च पर भी दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल और पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई और यात्री किराए पर भी असर पड़ सकता है। वहीं आम लोग भी लगातार बढ़ते ईंधन खर्च से परेशान नजर आ रहे हैं।

    ऐसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत
    भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट को जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होती है।

    अलग-अलग राज्यों में टैक्स की दरें अलग होने के कारण हर शहर में ईंधन के रेट भी अलग-अलग रहते हैं।

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?
    इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

    क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

    बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां 'डेली प्राइस रिवीजन' यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं।

    उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं:

        कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।

        रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।

        केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।

        डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।

        राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती हैं।

  • शादीशुदा महिला की मौत पर बढ़ा शक, कोरबा में 4 दिन बाद कब्र से निकाला गया शव

    शादीशुदा महिला की मौत पर बढ़ा शक, कोरबा में 4 दिन बाद कब्र से निकाला गया शव

    कोरबा.

    उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम भलपहरी में विवाहिता विनीता पाटले की संदिग्ध मौत ने नया मोड़ ले लिया है। दफन के चार दिन बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया। मायके पक्ष ने पति, सास और ससुर पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट और हत्या की आशंका जताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

    तहसीलदार, स्वास्थ्य विभाग, फॉरेंसिक टीम और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शव उत्खनन की कार्रवाई की गई। तेज धूप के बीच घंटों तक चली इस कार्रवाई को देखने ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही। बताया जा रहा है कि शुरुआत में मृतिका के ससुर ने शव निकालने का विरोध किया, लेकिन बाद में पुलिस की समझाइश के बाद कार्रवाई पूरी की गई। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के बाद से ही विनीता को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। पति मुकेश पाटले आए दिन मारपीट करता था और छोटी-छोटी बातों पर घर से निकाल देता था।

    परिजनों के मुताबिक विनीता कई बार रोते हुए मायके पहुंची, लेकिन बच्चों और परिवार की खातिर समझौता कर उसे वापस ससुराल भेज दिया जाता था। मृतिका की मां ने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले विनीता को फांसी लगाकर मारने की कोशिश भी की गई थी। हाल ही में गांव के पंच-सरपंच बताकर कुछ लोग समझौते के नाम पर उसे ससुराल ले गए थे, जबकि बाद में वे रिश्तेदार निकले। इस घटना के बाद परिवार का शक और गहरा गया। परिजनों का कहना है कि मौत के बाद शव को नहलाते समय शरीर पर चोट के निशान दिखाई दिए थे। नाक और मुंह से खून निकलने की बात भी सामने आई। इसके बावजूद बिना पोस्टमार्टम कराए जल्दबाजी में शव दफना दिया गया, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया।

    विनीता की बहन ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह पूरी तरह स्वस्थ थी और पारिवारिक कार्यक्रम में डांस भी कर रही थी। अचानक हुई मौत और बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार किए जाने से परिवार लगातार सवाल उठा रहा है।इधर, पति मुकेश पाटले ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। हालांकि, वह विनीता के बार-बार मायके जाने के कारणों पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। उरगा थाना प्रभारी नवीन पटेल ने बताया कि मायके पक्ष की शिकायत और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कार्यपालिक दंडाधिकारी की मौजूदगी में शव उत्खनन कराया गया है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पूरे मामले की गुत्थी पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विनीता की मौत सामान्य थी या इसके पीछे प्रताड़ना और साजिश का कोई गंभीर पहलू छिपा है।

    कब्र से निकाला शव: उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम भलपहरी में विवाहिता विनीता पाटले की संदिग्ध मौत के बाद, दफन किए जाने के चौथे दिन प्रशासनिक अधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शव को कब्र से बाहर निकाला गया।

    ससुराल पक्ष पर संगीन आरोप: मायके पक्ष ने मृतिका के पति मुकेश पाटले, सास और ससुर पर दहेज के लिए बेरहमी से मारपीट करने और सुनियोजित तरीके से हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है।

    बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार: परिजनों का दावा है कि विनीता की मौत के बाद शव को नहलाते समय उसके शरीर पर चोट के निशान थे और नाक-मुंह से खून आ रहा था, फिर भी ससुराल वालों ने बिना पोस्टमार्टम के शव दफना दिया।

  • सुकमा को स्वच्छ बनाने मिशन मोड में नगर पालिका

    सुकमा को स्वच्छ बनाने मिशन मोड में नगर पालिका

    सुकमा.

    नगर पालिका परिषद सुकमा द्वारा शहर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यापारियों एवं नागरिकों को जागरूक करने मंगलवार को समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।

    केन्द्र सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के संशोधित नियमों को 01 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू कर दिया गया है। इसी क्रम में नगर पालिका परिषद सुकमा के सभा कक्ष में व्यापारियों, दुकानदारों, होटल प्रबंधकों एवं संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री विनीत साव ने बताया कि नए नियमों के तहत कचरे को 4 श्रेणियों में विभाजित कर स्त्रोत पर ही पृथकीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नागरिकों को अब हरा डस्टबीन (गीला कचरा), नीला (सूखा कचरा), लाल (सेनेटरी कचरा) और पीला (विशेष देखभाल वाला हानिकारक कचरा) निर्धारित नियमों के अनुसार उपयोग करना होगा।

    उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक और व्यापारी कचरा अलग-अलग करके स्वच्छता दीदियों को देगा, तो शहर की सफाई व्यवस्था और अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी होगी। नगर पालिका द्वारा अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों अर्थात बल्क वेस्ट जनरेटरों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इनके लिए ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है तथा गीले कचरे के निपटान हेतु स्वयं के परिसर में ही प्रसंस्करण सुविधा स्थापित करना जरूरी होगा। नगर पालिका ने नागरिकों की सुविधा के लिए शिकायत निवारण हेतु निदान हेल्पलाइन नंबर 1100 एवं व्हाट्सएप चौटबॉट नंबर 8519009090 भी जारी किया है, जिससे सफाई संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

    बैठक में प्रशासन ने सिंगल यूज़ पॉलिथीन को पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसे पूर्णतः बंद करने की अपील की। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत गारबेज फ्री सिटी के नियमों की जानकारी देते हुए नागरिकों से तालाबों व सार्वजनिक स्थलों में कचरा न फेंकने, खुले में कचरा न जलाने, खुले में शौच न करने और केवल स्वच्छता दीदियों को ही कचरा देने की अपील की गई। नगर पालिका परिषद सुकमा ने भरोसा दिलाया कि जनसहयोग से शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और आदर्श नगर के रूप में विकसित किया जाएगा। बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष हुंगाराम मरकाम सहित व्यापारी, पार्षद और शहर के वरिष्ठ नागरिक उपस्थित थे।

  • सेना में भर्ती का इंतजार खत्म, परीक्षा तिथि जारी; पांच शहरों में होगी परीक्षा

    सेना में भर्ती का इंतजार खत्म, परीक्षा तिथि जारी; पांच शहरों में होगी परीक्षा

    मोहला/रायपुर.

    भारतीय सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। भर्ती वर्ष 2027 के लिए आयोजित होने वाली ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा (CEE) की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। यह परीक्षा 1 जून से 12 जून 2026 के बीच दो चरणों में आयोजित होगी।

    छत्तीसगढ़ में इसके लिए 5 शहरों में 10 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। एडमिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। भारतीय सेना की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा (CEE) दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहला चरण 1 जून से 5 जून तक और दूसरा चरण 8 जून से 12 जून तक चलेगा। परीक्षा प्रतिदिन 3 से 4 शिफ्टों में आयोजित होगी, ताकि सभी अभ्यर्थियों को सुविधा मिल सके।

    छत्तीसगढ़ के 5 शहरों में बनाए गए 10 परीक्षा केंद्र
    छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात यह है कि राज्य के पांच प्रमुख शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें भिलाई, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर शामिल हैं। इन शहरों में कुल 10 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं।

    एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया शुरू
    पंजीकृत अभ्यर्थी 'भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट (https://joinindianarmy.nic.in/)' पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। सेना भर्ती कार्यालय ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे प्रवेश पत्र पर दिए गए सभी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें।

    भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी: भारतीय सेना
    भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित होगी। किसी भी प्रकार की सिफारिश या बिचौलियों की मदद से नौकरी दिलाने का दावा करने वालों से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

    सहायता के लिए सेना भर्ती कार्यालय से करें संपर्क
    यदि किसी अभ्यर्थी को परीक्षा, एडमिट कार्ड या भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कोई समस्या होती है, तो वे नया रायपुर स्थित सेना भर्ती कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। यह कार्यालय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास स्थित है। सहायता के लिए कार्यदिवस में दूरभाष नंबर 0771-2965212 और 0771-2965214 उपलब्ध हैं।

    युवाओं में उत्साह, तैयारियां तेज
    परीक्षा तिथियों की घोषणा के बाद राज्यभर के युवाओं में उत्साह का माहौल है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अब अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।

  • शिक्षा मंत्री पहुंचे जेआरडी मल्टीपरपस स्कूल, ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का लिया फैसला

    शिक्षा मंत्री पहुंचे जेआरडी मल्टीपरपस स्कूल, ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का लिया फैसला

    दुर्ग.

    गांधी चौक स्थित शहर के सबसे पुराने एवं ऐतिहासिक जेआरडी मल्टीपरपस स्कूल के संरक्षण और शैक्षणिक उन्नयन को लेकर प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने विगत दिनों शिक्षा विभाग एवं आरईएस के अधिकारियों के साथ विद्यालय परिसर का निरीक्षण किये। देश की आजादी से पूर्व स्थापित विद्यालय से दुर्ग शहर की कई पीढ़ियों की भावनात्मक स्मृतियाँ जुड़ी हैं।

    वर्षों से यह विद्यालय न केवल शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है, बल्कि शहर की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। निरीक्षण के दौरान विद्यालय भवन की वर्तमान स्थिति, आवश्यक मरम्मत, संरचनात्मक मजबूती तथा उसके मूल स्वरूप एवं ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के विषय में शिक्षक और इंजिनियरों से विस्तृत चर्चा की गई। निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि जेआरडी स्कूल केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि दुर्ग शहर की विरासत और पहचान है। इस विद्यालय से हजारों विद्यार्थियों ने शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। यहां से पढ़कर निकले विद्यार्थी आज देश-प्रदेश के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खेल, साहित्य, पत्रकारिता, कला, पुलिस, सेना, राजनीति एवं प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में इस विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों ने दुर्ग का नाम गौरवान्वित किया है। स्वयं शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव भी इसी विद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं, जिसके कारण इस संस्था से उनका विशेष भावनात्मक जुड़ाव है।

    सुपर 30 क्लास की योजना
    जेआरडी स्कूल में सुपर-30 योजना प्रारंभ करने की दिशा में भी पहल की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत नीट एवं जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को विशेष कोचिंग, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य दुर्ग एवं आसपास के विद्यार्थियों को बड़े शहरों जैसी गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को भी बेहतर अवसर मिल सकें।

  • लोक निर्माण विभाग सख्त: SDO, EE और ENC अधिकारियों की मुख्यालय में उपस्थिति अनिवार्य, ठेकेदारों के मासिक भुगतान के आदेश

    लोक निर्माण विभाग सख्त: SDO, EE और ENC अधिकारियों की मुख्यालय में उपस्थिति अनिवार्य, ठेकेदारों के मासिक भुगतान के आदेश

    रायपुर
    लोक निर्माण विभाग ने अपने सभी अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीओ) से लेकर प्रमुख अभियंता (ईएनसी) तक सभी को मुख्यालय में रहने के निर्देश दिए हैं। निर्माणाधीन कार्यों की गुणवत्ता व समयबद्धता सुनिश्चित करने, कार्यों की गहन मॉनिटरिंग और स्वीकृत कार्यों को तत्काल प्रारंभ करने के लिए विभाग ने ये निर्देश जारी किए हैं।

    लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर उन्हें हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने ठेकेदारों को समय पर भुगतान के लिए प्रमुख अभियंता को एक-एक देयक (बिल) के स्थान पर संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को हर तीन महीने के भुगतान के लिए जरूरी राशि आबंटित करने के निर्देश दिए हैं।

  • नीति आयोग की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ का जलवा, उसूर ब्लॉक ने हासिल किया दूसरा स्थान

    नीति आयोग की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ का जलवा, उसूर ब्लॉक ने हासिल किया दूसरा स्थान

    नीति आयोग की रिपोर्ट: देश में चमका छत्तीसगढ़ का उसूर ब्लॉक, मिला दूसरा स्थान

    वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बीजापुरवासियों को बधाई, मुख्यमंत्री साय बोले – यह सुशासन का प्रमाण

    रायपुर
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जन- कल्याणकारी नीतियों का असर अब राज्य के सबसे दूरस्थ अंचलों में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले से एक गौरवशाली खबर सामने आई है।

    नीति आयोग द्वारा जारी देश के आकांक्षी ब्लॉकों की 'चैंपियंस ऑफ द क्वार्टर' (अक्टूबर- दिसंबर 2025) की रिपोर्ट में बीजापुर के उसूर ब्लॉक ने सेंट्रल जोन में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।

    मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई, कहा – यह जनता के भरोसे की जीत है  

            मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर उसूर ब्लॉक और बीजापुर जिले के नागरिकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "उसूर ब्लॉक का राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बस्तर के सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उसूर ने कठिन परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। यह सफलता जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन बहनों, एएनएम और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम है। हमारा लक्ष्य अब देश में प्रथम स्थान हासिल करना है।"

    मंत्री कश्यप ने जताया हर्ष, बढ़ाया हौसला  

            वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसूर ब्लॉक की यह राष्ट्रीय सफलता बेहद गौरवशाली है। उन्होंने कहा, "यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि हमारी सरकार की नीतियां प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंच रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों और जिला प्रशासन ने जो समर्पण दिखाया है, वह सराहनीय है। हमारा संकल्प बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।"

            मंत्री कश्यप कहा कि कभी बुनियादी सुविधाओं से दूर माना जाने वाला उसूर ब्लॉक आज देश के लिए विकास का मॉडल बन गया है। इस सफलता का श्रेय जमीनी डॉक्टरों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिन बहनों की दिन-रात की मेहनत को जाता है।

    विकास की नई इबारत: कड़े मानकों पर खरा उतरा उसूर  

             नीति आयोग ने स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया था, जिसमें उसूर ब्लॉक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया:

    1. संचारी रोगों पर नियंत्रण: मलेरिया, डेंगी और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सुदूर गांवों तक प्रभावी अभियान चलाया गया।
    2. सुरक्षित मातृत्व: संस्थागत प्रसव की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई।
    3. सशक्त टीकाकरण कवच: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण के साथ एचपीवी टीकाकरण को जमीनी स्तर पर सफल बनाया गया।
    4. गंभीर बीमारियों की जांच: बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच व उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई गई।

    अगला संकल्प: देश में हासिल करना है प्रथम स्थान 
     
              कलेक्टर विश्वदीप और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव पूरे जिले के लिए बड़ी प्रेरणा है। शासन और प्रशासन का अगला लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और निखारते हुए आगामी तिमाहियों में देश में पहला स्थान हासिल करना है, जिसके लिए काम तेज कर दिया गया है।

  • समर वेकेशन में खुल रहे स्कूलों पर कड़ा एक्शन, DEO को DPI का आदेश जारी

    समर वेकेशन में खुल रहे स्कूलों पर कड़ा एक्शन, DEO को DPI का आदेश जारी

    रायपुर.

    भीषण गर्मी के बीच ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूल संचालित करने वाले निजी शिक्षण संस्थानों पर अब कार्रवाई की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संभागीय संयुक्त संचालकों को ऐसे स्कूलों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए भी कहा गया है।

    20 अप्रैल से 15 जून तक घोषित है ग्रीष्मकालीन अवकाश
    राज्य सरकार की ओर से सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और अशासकीय विद्यालयों में 20 अप्रैल से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। इसके बावजूद कई निजी स्कूलों में बच्चों को बुलाकर नियमित कक्षाएं संचालित किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।

    आदेश की अनदेखी कर स्कूल चला रहे कई निजी संस्थान
    जानकारी के मुताबिक कुछ अशासकीय विद्यालय शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभिन्न कारणों से स्कूलों का संचालन कर रहे हैं। शासन ने इसे आदेश का उल्लंघन माना है और ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। हाल ही में हाई कोर्ट ने भी अवकाश अवधि के दौरान निजी स्कूलों में कक्षाएं संचालित किए जाने पर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

  • ग्राम सोनझरी में ‘हर घर जल ग्राम” के रूप में मिली नई पहचान’

    ग्राम सोनझरी में ‘हर घर जल ग्राम” के रूप में मिली नई पहचान’

    कबीरधाम/रायपुर.

    कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनझरी में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों की जिंदगी बदल दी है। वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे इस गांव में अब हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। घर-घर नल कनेक्शन मिलने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है और गांव को “हर घर जल ग्राम” के रूप में नई पहचान मिली है।

    पहले ग्राम सोनझरी में खासकर गर्मी के दिनों में, गांव के लोगों को पानी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों को पानी लाने के लिए तपती धूप में दूर-दूर तक जाना पड़ता था और घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। पानी के इस इंतजाम में उनका काफी समय और मेहनत बर्बाद हो जाती थी, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी और बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता था। इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन के तहत गांव में तेजी से काम किया गया। इसके अंतर्गत सोनझरी गांव में पाइपलाइन का विस्तार किया गया, जल स्रोतों को सुधारा गया और एक ऊंची पानी की टंकी का निर्माण किया गया। इसके बाद गांव के सभी घरों में घरेलू नल कनेक्शन देकर नियमित रूप से पानी की सप्लाई शुरू की गई।

    गांव की एक बुजुर्ग निवासी पंचकुंवर बाई ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि पहले इस उम्र में दूर से पानी लाना उनके लिए सबसे मुश्किल काम था, और सुबह होते ही पानी की चिंता सताने लगती थी। लेकिन अब घर के पास ही साफ पानी मिलने से उनका जीवन बेहद आसान हो गया है। उन्होंने इसके लिए शासन और प्रशासन का आभार जताया है। सोनझरी गांव में आई इस बड़ी तब्दीली के बाद अब चौतरफा सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। महिलाओं का कीमती समय बच रहा है, बच्चों की पढ़ाई अब बाधित नहीं होती और साफ पानी मिलने से जलजनित बीमारियों में भी भारी कमी आई है।

    इस सफलता को आधिकारिक रूप देने के लिए बीते 13 मई 2026 को सोनझरी में एक ग्राम सभा का आयोजन किया गया था। इस बैठक में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ष्हर घर जलष् प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया गया और सोनझरी को आधिकारिक रूप से “हर घर जल ग्राम” घोषित कर दिया गया। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन केवल पानी पहुंचाने की योजना नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण जीवन में सुविधा, बेहतर स्वास्थ्य और सम्मान का नया सवेरा लाया है।

  • 7.5 करोड़ खर्च फिर भी घटिया निर्माण, निरीक्षण में खुली नहर घोटाले की परतें

    7.5 करोड़ खर्च फिर भी घटिया निर्माण, निरीक्षण में खुली नहर घोटाले की परतें

    डोंगरगढ़.

    डोंगरगढ़ क्षेत्र में देवकट्टा जलाशय से बेलगांव तक बनाई गई करीब 7.5 करोड़ रुपए की नहर परियोजना में गंभीर तकनीकी गड़बड़ियां सामने आने से हड़कंप मच गया है. ताजा निरीक्षण में नहर लाइनिंग की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं. जांच के दौरान कई स्थानों पर लाइनिंग की मोटाई निर्धारित मानक से बेहद कम पाई गई, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी दोनों संदेह के घेरे में आ गई हैं.

    जानकारी के मुताबिक नहर लाइनिंग की मोटाई 4 इंच तय थी, लेकिन मौके पर कई हिस्सों में यह 2 इंच से भी कम मिली. कमजोर कंक्रीट और घटिया निर्माण के कारण डेढ़ साल के भीतर ही लाइनिंग उखड़ने लगी है. कई स्थानों पर बेस लेयर खुल चुकी है और नहर की स्थिति किसी टूटी नाली जैसी दिखाई दे रही है. नहर में जगह-जगह सिल्ट और कचरा जमा होने से जल प्रवाह भी प्रभावित हो रहा है. सिर्फ मुख्य नहर ही नहीं, उससे जुड़ी माइनर नहरों में भी भारी लापरवाही सामने आई है.

    किनारों की फिलिंग अधूरी बताई जा रही है और पर्याप्त कंपैक्शन नहीं होने से बरसात में कटाव का खतरा बढ़ गया है. कई हिस्सों में कंक्रीट की पतली परत उखड़ रही है, जिससे निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप और तेज हो गए हैं. बुधवार को विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान खामियों को गंभीर मानते हुए ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई गई और दोषपूर्ण हिस्सों में तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए. जानकारी यह भी सामने आई है कि मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है.

    किसानों का बड़ा आरोप
    किसानों का कहना है कि निर्माण कार्य अधूरा और मानक से कम होने के बावजूद पूरा भुगतान कर दिया गया. उनका दावा है कि यदि माप पुस्तिका और भुगतान रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो जाए तो पूरी गड़बड़ी सामने आ सकती है. ग्रामीणों और किसानों ने चेतावनी दी है कि समय रहते गुणवत्ता सुधार नहीं किया गया तो आगामी बारिश में नहर की लाइनिंग बह सकती है, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने का खतरा है.