Category: विदेश

  • आंखों के इलाज के लिए अस्पताल में शिफ्ट होंगे इमरान खान, राहत की खबर के साथ परिवार से मुलाकात की संभावना

    आंखों के इलाज के लिए अस्पताल में शिफ्ट होंगे इमरान खान, राहत की खबर के साथ परिवार से मुलाकात की संभावना

    लाहौर 

    पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जल्द अस्पताल शिफ्ट किए जाने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक उनकी आंख के इलाज के लिए 21 फरवरी से 26 फरवरी के बीच आइलिया इंजेक्शन की एक और डोज दी जानी है. उन्हें आंखों के इलाज के लिए रावलपिंडी के अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक इस बार उन्हें रावलपिंडी के अल शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है.

    अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह अस्पताल में कितने दिन रहेंगे. अंतिम फैसला डॉक्टरों से सलाह-मशविरा करने के बाद लिया जाएगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि इलाज के दौरान या उसके बाद इमरान खान को अपने कुछ करीबी सहयोगियों और जेल में बंद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से मुलाकात की अनुमति मिल सकती है. सरकार व्यापक मेडिकल जांच कराने की भी योजना बना रही है. इनमें एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे, हृदय संबंधी जांच और पूरे शरीर के ब्लड टेस्ट जैसे प्रमुख परीक्षण शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि इन सभी टेस्ट के जरिए उनकी सेहत की विस्तृत और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी.
    दुनियाभर में हो रही है इमरान के इलाज की मांग

    इमरान खान को सरकार ने अकेले ही एक कोठरी में बंद कर रखा है, जहां न तो उनसे किसी को मिलने की इजाजत है और न ही वे वहां से निकल सकते हैं. उनसे मिलकर आए उनके वकील ने बताया था कि उनकी आंखों की रोशनी 85 फीसदी तक जा चुकी है और उन्हें दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं. इसके अलावा उन्हें फ्रिज और टीवी जैसी बेसिक सुविधाएं भी नहीं दी गईं जबकि मच्छरों की वजह से वहां सोना तक मुश्किल हो रहा है. वकील ने मांग की थी कि उन्हें टीवी नहीं तो कम से कम किताबें ही दी जाएं, ताकि वे अपना समय बिता सकें. इमरान खान की ये हालत सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उनके समर्थन में रैलियां हुईं और ये अपील की गई कि उनका इलाज हो. दुनिया में क्रिकेट जगत के 12 पूर्व कप्तानों ने मिलकर पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी भी लिखी कि इमरान खान को उचित इलाज दिया जाए.
    खराब सेहत को बता रहे सियासी ड्रामा

    वहीं पाकिस्तान के पंजाब की सूचना मंत्री अज्मा बुखारी ने इमरान खान की हालिया मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी सेहत और आंखों की रोशनी पूरी तरह ठीक है. उन्होंने बताया कि खान साहब को जेल में सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिनमें पौष्टिक भोजन और टहलने के लिए अलग स्थान भी शामिल है. अजमा बुखारी ने कहा कि मेडिकल जांच में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पुष्टि नहीं हुई है. उनके मुताबिक इमरान खान एक आंख से घड़ी की सुइयां तक साफ देख सकते हैं. उन्होंने इमरान खान पर निशाना साधते हुए इसे उनका राजनीतिक ड्रामा करार दिया.

  • इजरायल का विवादित कदम: वेस्ट बैंक में कब्जा करने की तैयारी, 8 मुस्लिम देशों ने विरोध जताया

    इजरायल का विवादित कदम: वेस्ट बैंक में कब्जा करने की तैयारी, 8 मुस्लिम देशों ने विरोध जताया

    तेल अवीव

    इजरायल सरकार ने पश्चिमी तट में जमीन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने के हालिया फैसले की आठ मुस्लिम देशों द्वारा निंदा करने वाले संयुक्त बयान को बेबुनियाद और गुमराह करने वाला बताया है। मंगलवार को तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने पश्चिमी तट में जमीन को सरकारी सम्पति घोषित करने और उनके पंजीकरण और मालिकाना हक के सेटलमेंट के लिए प्रक्रिया को मंजूरी देने के इजरायली सरकार के फैसले की निंदा की।

    मंत्रालय ने आज एक बयान में कहा, 'यह बयान असल में बेबुनियाद और जानबूझकर गुमराह करने वाला है। फिलिस्तीनी अधिकारी ही क्षेत्र सी में गैर-कानूनी जमीन पंजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे है, जो कानून और मौजूदा समझौतों का उल्लंघन है।' मंत्रालय ने बताया कि इजरायली सरकार ने सिविल और सम्पति कानून के तहत प्रशासनिक कदम को मंजूरी दी है।
    क्या बोला सऊदी अरब

    सऊद अरब के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह कदम कब्जे वाले इलाके में एक नई कानूनी और प्रशासनिक हकीकत को थोपता है, जिससे द्वि-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीनी अधिकार कमज़ोर होते हैं। मंत्रालय ने कहा कि फिलिस्तीनी जमीन पर इजरायल का कोई हक नहीं है। मंत्रालय ने इन कदमों को फिलिस्तीनी लोगों के चार जून, 1967 की सीमाओं पर एक आजाद देश बनाने के कानूनी हक पर हमला बताया, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो।
    प्रस्ताव

    उल्लेखनीय है कि इजरायली सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के बड़े इलाकों को अपनी भूमि के तौर पर वर्गीकृत करने की योजना को मंजूरी दी, अगर फिलिस्तीनी मालिकाना हक साबित नहीं कर पाते। यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी मंत्रियों बेज़ालेल स्मोट्रिच (वित्त), यारिव लेविन (न्याय), और इजरायल काट्ज (रक्षा) ने रखा था।

    स्मोट्रिच ने इस योजना को 'हमारी सभी जमीनों पर नियंत्रण करने के लिए समाधान क्रांति' का अगला कदम बताया, जबकि लेविन ने इसे इज़रायल के अपने सभी हिस्सों पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया। इस मंजूरी से ज़मीन के मालिकाना हक के समाधान की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई हैं, जो 1967 में वेस्ट बैंक पर इजरायल के कब्जे के बाद से रुके हुए थे।

  • मोहम्मद यूनुस की नहीं चली, तारिक रहमान ने संविधान पर दिखाया सख्त रुख

    मोहम्मद यूनुस की नहीं चली, तारिक रहमान ने संविधान पर दिखाया सख्त रुख

    ढाका
    पड़ोसी देश बांग्लादेश में तारिक रहमान की अगुवाई में आज (मंगलवार, 17 फरवरी को) नई सरकार शपथ लेने जा रही है। उससे पहले तारिक रहमान और उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNS) ने संविधान बदलने से इनकार कर दिया है और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें कहा गया था कि सभी सांसदों को नई "कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल" के सदस्य के तौर पर एक शपथ पत्र पर दस्तखत करने हैं।

    सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में ही मोहम्मद यूनुस के इस मनमानीपूर्ण फैसले को BNP ने खारिज कर दिया। BNP नेता सलाउद्दीन अहमद ने तारिक रहमान की मौजूदगी में कहा कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के निर्देशों के बाद सभी नवनिर्वाचित BNP सांसदों से कहा गया है कि वे कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल फॉर्म पर साइन न करें, क्योंकि वे काउंसिल के सदस्य के तौर पर नहीं चुने गए हैं। BNP के इस कदम से यूनुस की उन कोशिशों को बड़ा झटका लगा है, जिसके तहत वह संविधान को बदलना चाह रहे थे। बता दें कि इस काउंसिल का मकसद पार्लियामेंट चुनावों के साथ हुए रेफरेंडम के हिसाब से बांग्लादेश के संविधान को बदलना है।

    कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल संविधान में शामिल नहीं
    डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सलाउद्दीन अहमद ने इस पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल संविधान में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि काउंसिल को पहले रेफरेंडम के नतीजों के हिसाब से संविधान में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उसमें कई जरूरी नियमों की भी जरूरत है, जिसमें यह भी शामिल है कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल के सदस्यों को शपथ कौन दिलाएगा।

    BNP MPs ने सिर्फ बांग्लादेश संसद के सदस्य के तौर पर शपथ ली
    इसके बाद BNP के सांसदों ने सिर्फ बांग्लादेश संसद के सदस्य के तौर पर शपथ ली। BNP का कहना है कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल के नियम अभी मौजूदा संविधान का हिस्सा नहीं हैं और इस पर संसद में विचार-विमर्श की जरूरत है। बतौर सांसद शपथ लेने तारिक रहमान अपनी बेगम जुबैदा रहमान और बेटी ज़ाइमा रहमान के साथ करीब 10:28 बजे शपथ लेने वाले कमरे में दाखिल हुए। इसके बाद चीफ इलेक्शन कमिश्नर AMM नासिर उद्दीन ने 12 फरवरी को हुए 13वें पार्लियामेंट्री इलेक्शन में चुने गए सांसदों को शपथ दिलाई।

    ढाका पहुंचे ओम बिरला
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए मंगलवार को ढाका पहुंच चुके हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी और अन्य अधिकारियों के साथ ढाका पहुंचने के बाद, बिरला ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण क्षण है जो दोनों पड़ोसी देशों के बीच जन-संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा। बिरला ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''तारिक रहमान के नेतृत्व में नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ढाका में उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है जो हमारे दोनों देशों के बीच जन-संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा।"

     

  • तारिक रहमान का बड़ा दांव, हिंदू प्रतिनिधित्व बढ़ाकर साधा भरोसा, मां से जुड़ा खास कनेक्शन

    तारिक रहमान का बड़ा दांव, हिंदू प्रतिनिधित्व बढ़ाकर साधा भरोसा, मां से जुड़ा खास कनेक्शन

    ढाका
    बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करने वाले तारिक रहमान की कैबिनेट में दो अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को जगह दी गई है. 25 सांसदों ने मंत्री पद की शपथ ली. इनमें निताई रॉय चौधरी का नाम भी शामिल है. हालांकि पहले चर्चा थी कि चौधरी के समधी और अहम महकमों के मंत्री रह चुके गोयेश्वर चंद्र रॉय को जगह मिलेगी. वहीं दूसरे अल्पसंख्यक नेता का नाम दीपेन दीवान है.

    कौन हैं निताई रॉय चौधरी?
    तृतीयोमात्रा डॉट कॉम के मुताबिक, 1949 में पैदा हुए निताई रॉय चौधरी एक बांग्लादेशी वकील और राजनीतिज्ञ हैं. निताई रॉय चौधरी, जो मगुरा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं, पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों में से एक हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं. उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशी को सीधी टक्कर में मात दी है. 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में उन्होंने मगुरा-2 संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की. निताई रॉय चौधरी को 147896 वोट मिले हैं. उन्होंने जमात उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को 30,838 वोटों के अंतर से हराया है.
     
    कौन हैं दीपेन दीवान?
    दूसरे अल्पसंख्यक नेता दीपेन दीवान, बौद्ध मेजोरिटी वाले चकमा एथनिक माइनॉरिटी ग्रुप से हैं. इन्होंने दक्षिण-पूर्व रंगमती जिले की एक सीट से जीत हासिल की. हालांकि उनकी धार्मिक पहचान साफ नहीं है और कई लोग उन्हें हिंदू बताते हैं. दीवान ने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी के तौर पर एक निर्दलीय चकमा उम्मीदवार को हराया.

    हिंदू मंत्रियों की नियुक्ति और मां से नाता
    तारिक रहमान की कैबिनेट में मंत्री पद को लेकर गोयेश्वर रॉय को लेकर थी, जो बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं. खालिदा जिया सरकार में लगभग 30 साल पहले (1991-1996) वो राज्य मंत्री थे. इस बार उन्हें जगह न देकर उनके समधी निताई रॉय चौधरी को मंत्री बनाया गया है. खालिदा जिया की पार्टी भले ही अल्पसंख्यकों को ज्यादा महत्वपूर्ण पद न देती हो लेकिन खालिदा जिया के दो कार्यकाल में हिंदू मंत्री शामिल रहे –
    1991-1996 में गयेश्वर चंद्र रॉय राज्य मंत्री (स्टेट मिनिस्टर) के रूप में शामिल थे. वे पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तथा मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालय के प्रभारी थे. अब वे बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा बन चुके हैं.
    2001-2006 में गौतम चक्रबर्ती राज्य मंत्री के रूप में जल संसाधन मंत्रालय के प्रभारी थे. वे बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई कल्याण फ्रंट के कन्वेनर भी थे. तारिक रहमान ने भी मां की राह पर चलते हुए अपनी कैबिनेट में हिंदू चेहरों को शामिल किया है. उनकी मां की कैबिनेट में एक हिंदू मंत्री रहे लेकिन रहमान कैबिनेट में 2 अल्पसंख्यक चेहरे हैं, वो भी ऐसे वक्त में जब बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए नर्क बना हुआ है.

    बांग्लादेश के दामन से खून का दाग धोएंगे तारिक रहमान?
    तारिक रहमान ऐसे वक्त में बांग्लादेश की सत्ता संभाल रहे हैं, जब वहां अस्थिरता के साथ-साथ अल्पसंख्यकों के लिए बेहद बुरे हालात हैं. अंतरिम सरकार के राज में हिंदुओं का खूब कत्लेआम हुआ. मॉब लिंचिंग की ऐसी-ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. खासतौर पर चुनावों की घोषणा होने के बाद से अलग-अलग इलाकों से लगभग हर रोज हिंदुओं की हत्या की खबरें आती रहीं. खासतौर पर नवंबर के अंत से फरवरी के पहले हफ्ते तक अल्पसंख्यकों के खून से बांग्लादेश का दामन रंग गया. क्या तारिक रहमान बदलाव के छोटे से कदम से अपने देश की इमेज सुधार पाएंगे?

    BNP कैबिनेट में किसे कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी?
     
    BNP के सूत्रों के हवाले से एक लिस्ट हासिल की है, जिसमें बताया गया है कि किन मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को कौन से मंत्रालय दिए जाएंगे.

        मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय
        सलाहुद्दीन अहमद – गृह मंत्रालय
        अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय
        मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय
        इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय
        AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण
        खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय
        अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
        मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय
        निताई रॉय चौधरी – सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय
        मोहम्मद असदुज्जमां – कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय
        काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय
        अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार
        खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय
        ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद
        उद्दीन चौधरी एनी – जल संसाधन मंत्रालय
        एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय
        अमीन उर ​​राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय
        अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय
        असदुल हबीब दुलु – आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय
        ज़कारिया ताहिर – आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय
        दीपेन दीवान – चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय
        सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल – स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय
        फकीर महबूब अनम – डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
        शेख रबीउल आलम, सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय.

  • बांग्लादेश की संसद में अल्पसंख्यकों की संख्या सिर्फ 4, कितने हैं हिंदू? तारिक रहमान ने बुलंद किया एकता का नारा

    बांग्लादेश की संसद में अल्पसंख्यकों की संख्या सिर्फ 4, कितने हैं हिंदू? तारिक रहमान ने बुलंद किया एकता का नारा

    ढाका 

    बांग्लादेश में हाल ही में हुए आम चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं। चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP को बंपर जीत मिली है, जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे, रहमान का PM बनना तय माना जा रहा है। उनकी पार्टी को गुरुवार के चुनावों में 209 सीटों के साथ संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला है। हालांकि अल्पसंख्यकों की बात करें तो उन्हें चुनाव में महज 4 सीटें मिली हैं। आम चुनावों में विजयी चारों अल्पसंख्यक BNP से हैं।

    हिंदुओं की बात की जाए तो नए बांग्लादेशी संसद में उनका प्रतिनिधित्व ना के बराबर होगा। चुनाव में महज 2 हिंदू उम्मीदवारों को जीत मिल पाई। इन उम्मीदवारों के नाम गोयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी हैं, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। दोनों ने अपनी अपनी सीट पर जमात के उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की है। जानकारी के मुताबिक जहां रॉय BNP की पॉलिसी बनाने वाली स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं, वहीं चौधरी पार्टी के प्रमुख वाइस प्रेसिडेंट में से एक होने के साथ-साथ इसके टॉप लीडरशिप के सीनियर सलाहकार और रणनीतिकार भी हैं। इसके अलावा तीसरे विजयी अल्पसंख्यक उम्मीदवार सचिन प्रू हैं, जो BNP के सीनियर लीडर है। वे बौद्ध धर्म से आते हैं। वहीं चौथे माइनॉरिटी कैंडिडेट, दीपेन दीवान भी बौद्ध धर्म से आते हैं और उन्होंने दक्षिण-पूर्वी रंगमती पहाड़ी जिले की सीट से जीत हासिल की है।

    79 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने लड़ा था चुनाव
    गौरतलब है कि 17 करोड़ जनसंख्या वाले बांग्लादेश में 8 फीसदी आबादी हिंदू है। देश के चुनाव आयोग के मुताबिक हालिया चुनावों में 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, जिनमें 10 महिलाएं शामिल थीं। बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (CPB) ने सबसे ज्यादा 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। इसके बाद लेफ्ट-विंग बांग्लादेश साम्यबादी दल (BSD) ने आठ, बांग्लादेश माइनॉरिटी जनता पार्टी (BMJP) ने आठ और लेफ्ट-विंग बांग्लादेश समाजवादी दल (BASOD) ने सात अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। BNP ने छह और जातीय पार्टी ने चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को उतारा था। इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी ने इतिहास में पहली बार एक माइनॉरिटी हिंदू कैंडिडेट को नॉमिनेट किया था।

    तारिक रहमान ने दिया है भरोसा
    बता दें कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के शासन काल में बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए नरक समान बन गया था। यहां हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले, हिंसा और क्रूरता की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। अब बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने बांग्लादेश में किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता देने की बात कही है। रहमान जल्द ही अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की जगह लेंगे।

    संसदीय चुनावों में भारी जीत के एक दिन बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 60 वर्षीय रहमान ने कहा, "हमारे रास्ते और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के हित में हमें एकजुट रहना होगा। मैं दृढ़ता से मानता हूं कि राष्ट्रीय एकता हमारी सामूहिक ताकत है, जबकि विभाजन हमारी कमजोरी।" रहमान ने कहा कि शांति और कानून-व्यवस्था किसी भी कीमत पर बनाए रखनी होगी।

  • 13 साल की बेटी को ‘पावर’ देने की तैयारी में किम जोंग उन, परिवारिक झगड़े में फंसा क्रूर तानाशाह

    13 साल की बेटी को ‘पावर’ देने की तैयारी में किम जोंग उन, परिवारिक झगड़े में फंसा क्रूर तानाशाह

    सोल

    दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों में से एक किम जोंग उन के परिवार में ही फिलहाल झगड़ा होता दिख रहा है। साउथ कोरिया की खुफिया एजेंसी का कहना है कि किम जोंग उन की बेटी किम जू ऐ का नाम अगले नेता के तौर पर घोषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में किम जोंग उन की बेटी का मुकाबला पावरफुल बुआ किम यो जोंग से हो सकता है। भविष्य में देश पर कंट्रोल करने की लड़ाई दोनों के बीच तेज हो सकती है। किम जू ऐ की उम्र महज 13 साल है और चर्चा है कि उसे 14 साल का होते ही किम जोंग उन की ओर से अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जा सकता है। उन की बहन भी खुद को एक पावर सेंटर मानती रही हैं। ऐसे में संभव है कि यह संघर्ष बढ़ सकता है।

    साउथ कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस ने बीते सप्ताह बताया कि किम जू ऐ की उम्र 13 साल की हो गई हैं। अब उन्हें औपचारिक तौर पर उत्तराधिकारी घोषित किया जा सकता है। यह समय अहम है क्योंकि उत्तर कोरिया में इसी महीने एक बड़ा राजनीतिक आयोजन होने वाला है। इसमें किम जोंग उन बताएंगे कि देश के लिए भविष्य में क्या लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके अलावा वह देश की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भी कुछ कदमों का ऐलान कर सकते हैं। इस दौरान किम जोंग उन की बेटी भी मंच पर हो सकती हैं। हाल ही में एक मीटिंग में वह अपने पिता का हाथ थामे हुए पहुंची थीं।

    किम जू ऐ को किसी सार्वजनिक आयोजन में पहली बार नवंबर 2022 में देखा गया था। तब वह एक लॉन्ग रेंज मिसाइल के परीक्षण में पहुंची थीं। इसके बाद वह लगातार कई आयोजनों में पिता के साथ नजर आई हैं। उन्होंने हथियार फैक्ट्रियों के दौरे किए हैं तो वहीं सैन्य परेडों में भी हिस्सा लिया है। यही नहीं बीते साल सितंबर में वह चीन की राजधानी बीजिंग भी पहुंची थीं। आमतौर पर उत्तर कोरिया की राजनीति में पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है, लेकिन पहली बार किम जोंग उन बेटी को कमान दे सकते हैं। इसी उद्देश्य से उन्हें चीन ले जाया गया था ताकि उन्हें स्थापित किया जा सके और दुनिया भर में एक संदेश जाए।
    क्यों इतनी पावरफुल मानी जाती हैं किम जोंग उन की बहन

    किम जोंग उन की बेटी के लिए देश में कोई चुनौती नहीं है, लेकिन बुआ से ही चैलेंज मिल सकता है। दरअसल 38 वर्षीय किम यो जोंग को उन के बाद देश की दूसरी सबसे पावरफुल शख्सियत माना जाता है। उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत है तो वहीं सैन्य हलकों में भी उनकी ताकत कम नहीं है। फिलहाल वह कोरिया की वर्कर्स पार्टी की सेंट्रल कमेटी में सीनियर पद पर हैं। इसके अलावा भाई की राय को भी वह काफी हद तक प्रभावित करती रही हैं। ऐसे में अब यदि किम जोंग उन की बेटी मजबूत हुई तो फिर चीजें बदल सकती हैं।
    किम जोंग के परिवार में बर्बर रहा है सत्ता का संघर्ष

    उत्तर कोरिया पूरी दुनिया के उनके मुल्कों में शुमार किया जाता है, जो सूचना से कटे हुए हैं। यहां के आम नागरिकों को दुनिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। इसके अलावा दुनिया के मीडिया या लोगों की एंट्री पर भी काफी पाबंदियां हैं। मीडिया पर इस सेंसरशिप के चलते ही उत्तर कोरिया के लोग पूरी दुनिया से एक तरह से कटे हुए हैं। बता दें कि देश में सत्ता संघर्ष भी बहुत क्रूर रहा है। किम जोंग उन ने 2011 में सत्ता संभालने के बाद अपने अंकल और मेंटर रहे जांग सॉन्ग थाएक को गोलियां मरवाकर जान ले ली थी। इसके अलावा किम जोंग उन के सौतेले भाई किम जोंग नाम की भी 2017 में हत्या करा दी गई थी।

  • पावरफुल शख्सियतें और नाबालिग लड़कियां: एपस्टीन के घातक काले कारनामों का पर्दाफाश

    पावरफुल शख्सियतें और नाबालिग लड़कियां: एपस्टीन के घातक काले कारनामों का पर्दाफाश

    आईलैंड 
    जेफरी एपस्टीन का प्राइवेट आईलैंड लिटिल सेंट जेम्स कैरिबियन सागर में स्थित है, जो अमेरिकी वर्जिन द्वीप समूह में सेंट थॉमस के दक्षिण-पूर्व में है। यह लगभग 72 एकड़ का छोटा आईलैंड है, जिसे एपस्टीन ने 1998 में करीब 80 लाख डॉलर में खरीदा था। यहां सफेद रेत के समुद्र तट, नारियल के पेड़, नीले रंग की छत वाले भवन, स्विमिंग पूल, हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड, मुख्य विला, गेस्ट कॉटेज और डॉक जैसी सुविधाएं थीं। 2010 तक एपस्टीन ने द्वीप का बड़े पैमाने पर नवीनीकरण किया, जिसमें नई विलाएं, स्टोन केबिन और एक रहस्यमयी नीले-सफेद धारीदार भवन शामिल था, जिसे कुछ लोग टेम्पल कहते हैं। यह द्वीप अलग-थलग होने के कारण गोपनीय गतिविधियों के लिए सही माना जाता था, जहां नाव या हेलीकॉप्टर से ही पहुंचा जा सकता था।

    इस द्वीप पर एपस्टीन और उनकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल पर नाबालिग लड़कियों और महिलाओं के साथ यौन शोषण और मानव तस्करी के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ितों के बयानों के अनुसार, यहां दुनिया भर से 12 साल की उम्र की लड़कियों को लाया जाता था, जिन्हें अमीर और प्रभावशाली लोगों को शेयर किया जाता था। वर्जीनिया गिफ्रे जैसी पीड़िताओं ने अपनी किताब में बताया कि उन्हें अपमान, मारपीट और बलात्कार का सामना करना पड़ा। 15 साल की लड़की ने कथित तौर पर द्वीप से भागने के लिए दो मील तैरकर सेंट थॉमस पहुंचने की कोशिश की। ईमेल और दस्तावेजों में स्वीट यंग कोकोनट्स जैसे संकेत और लिटिल गर्ल का जिक्र मिला है, जो यौन शोषण की ओर इशारा करते हैं। कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें छुट्टी के बहाने लाया गया लेकिन वे यौन हिंसा का शिकार बनीं।
    किन लोगों के नाम आए सामने

    एपस्टीन फाइल्स में अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी लाखों पन्नों के दस्तावेजों में द्वीप के ब्लूप्रिंट, फोटो, लॉगबुक और यात्रा रिकॉर्ड शामिल हैं। इनमें डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन, प्रिंस एंड्र्यू, मार्क जुकरबर्ग, वुडी एलन जैसे कई बड़े नामों का जिक्र है। हालांकि, नाम आने से दोष सिद्ध नहीं होता और कई ने किसी गलत संबंध से इनकार किया है। फाइल्स में एपस्टीन की संपत्तियों से बरामद सीडी, फोटो और अन्य सबूतों की सूची भी है। एपस्टीन 2008 में बाल यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए थे और 2019 में सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार हुए, लेकिन जेल में उनकी मौत हो गई, जिसे सुसाइड बताया गया।
    कई सवालों के जवाब बाकी

    हाल के वर्षों में द्वीप को 2023 में 6 करोड़ डॉलर में बेच दिया गया है और नए मालिक स्टीफन डेकोफ इसे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की योजना बना रहे हैं, ताकि इसकी कुख्यात इतिहास को मिटाया जा सके। एपस्टीन फाइल्स की रिलीज से कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं और पीड़ितों की आवाज को न्याय मिलने की उम्मीद बनी हुई है। यह मामला शक्ति, धन और गोपनीयता के दुरुपयोग की एक दुखद मिसाल बन चुका है।

  • संसाधनों की दौड़ में गिलगित-बाल्टिस्तान: रेअर अर्थ खनिजों को लेकर बढ़ी हलचल, सेना पर उत्पीड़न के आरोप

    संसाधनों की दौड़ में गिलगित-बाल्टिस्तान: रेअर अर्थ खनिजों को लेकर बढ़ी हलचल, सेना पर उत्पीड़न के आरोप

    वाशिंगटन
    पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में सियासी हालात संजीदा हो चले हैं। चीन के अलावा, पाकिस्तान अब अमेरिकी और सेंट्रल एशियाई कंपनियों से भी इस इलाके में संसाधनों के दोहन में शामिल होने की गुजारिश कर रहा है। एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में कजाकिस्तान और इंडोनेशिया ने गिलगित- बाल्टिस्तान के सोने और तांबे की माइन्स में निवेश करने में दिलचस्पी दिखाई है। कई स्थानीय कार्यकर्ता मानते हैं, "गिलगित-बाल्टिस्तान में अस्थिरता की एक मुख्य वजह स्ट्रेटेजिक लोकेशन और रेयर अर्थ्स की मौजूदगी है। पाकिस्तानी सेना स्थानीय लोगों को मुआवजा दिए बिना उनके संसाधनों का फायदा उठाना चाहती है। पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में एक गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक लैंड रिफॉर्म एक्ट लागू किया है, जिससे प्राकृतिक संसाधन का गलत इस्तेमाल जारी है। जब स्थानीय सही हिस्सा मांगते हैं, तो पाकिस्तान रॉयल्टी देने से मना कर देता है, यह कहते हुए कि सियासी दिक्कत यह है कि जमीन विवादित जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बनी हुई है और इसलिए संवैधानिक और आर्थिक मजबूरियों के चलते इस पर मालिकाना हक नहीं जताया जा सकता।"
    पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के रहने वाले सेंगे सेरिंग ने वाशिंगटन के ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के जरिए ये खुलासा किया है।
    सेरिंग, जो अब वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर गिलगित बाल्टिस्तान स्टडीज (आईजीबीएस) के प्रमुख हैं, ने विस्तार से बताया कि यह देखते हुए कि रेयर अर्थ एलिमेंट का प्रसंस्करण और आपूर्ति कुछ ही देशों में केंद्रित है, गिलगित बाल्टिस्तान की भौगोलिक स्थिति प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के रेयर अर्थ सप्लाई चेन में विविधता लाने के प्रयासों को पूरा करती है।
    उन्होंने बताया कि तंगिर और गिलगित बाल्टिस्तान की आस-पास की घाटियां दुनिया भर में जानी-मानी मिनरल हॉटस्पॉट हैं – जहां मोनाजाइट, चेवकिनाइट, लैंथेनम, समैरियम, प्रेज़ोडायमियम, नियोडिमियम, सेरियम, टाइटेनियम, थोरियम और दूसरे रेयर अर्थ एलिमेंट्स बहुत अधिक हैं। चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की कोशिशों से पाकिस्तान को (अपने कब्जे वाले इलाके को) एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के चौराहे पर एक रेयर-अर्थ हब बनाने में मदद मिल रही है।
    उन्होंने वर्तमान हालातों को ध्यान में रख एक अपील की है। कहा है, "इन हालात में, गिलगित बाल्टिस्तान के लोगों को एकजुट रहना चाहिए और कब्जा करने वाले पाकिस्तानी औपनिवेशिक मालिकों को निकालने की अपनी कोशिशें जारी रखनी चाहिए, जो सिर्फ कुदरती दौलत और आने-जाने के रास्तों का फायदा उठाने और उनका गलत इस्तेमाल करने में दिलचस्पी रखते हैं, जबकि वहां के लोगों को उनके जरूरी सियासी और संवैधानिक अधिकार नहीं देते। यह लगन और हिम्मत आखिरकार गिलगित बाल्टिस्तान के लोगों को भारत के संवैधानिक नागरिक के तौर पर लद्दाख में शामिल होने और इलाके और पहचान दोनों की रक्षा करने में मदद करेगी।"
    गुरुवार को, पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि पीओजीबी में डायमर की तंगिर घाटी में एक गाड़ी के पास एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) फटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक आर्मी मेजर समेत तीन अन्य घायल हो गए।
    सेरिंग, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके के सबसे जाने-माने जानकारों में से एक हैं, ने कहा कि कमांडर मौलाना आमिर हमजा से जुड़े एक आतंकवादी सेल ने हमले से पहले एक बयान दिया था, जिसमें बताया गया था कि वे गिलगित बाल्टिस्तान के डायमर जिले से हैं और पाकिस्तानी सेना, जिसमें आईएसआई और एमआई जैसी सीक्रेट एजेंसियां के अलावा पुलिस भी शामिल हैं, पर हमले करते हैं।
    सेरिंग ने ग्लोबल स्ट्रैट व्यू में लिखा, "उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना गिलगित बाल्टिस्तान को कंट्रोल करने के लिए फूट डालो और राज करो की स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करती है। गिलगित बाल्टिस्तान के शिया और सुन्नी नेताओं, जिसमें आगा राहत भी शामिल हैं, को दिए एक बयान में, ग्रुप ने कहा कि अगर पहले आगा राहत या काजी निसार पर सांप्रदायिक हमले हुए हैं, तो यह पाकिस्तान की सेना और उनके एजेंटों का काम है ताकि स्थानीय लोगों के बीच झगड़ा और फूट पैदा की जा सके।"

  • भारत मॉडल की ओर झुकाव! 70% बांग्लादेशी ने ‘जुलाई चार्टर’ को दी मंजूरी

    भारत मॉडल की ओर झुकाव! 70% बांग्लादेशी ने ‘जुलाई चार्टर’ को दी मंजूरी

    ढाका  
    बांग्लादेश के इतिहास में 12 फरवरी, 2026 की तारीख एक नए युग की शुरुआत के रूप में दर्ज हो गई है। देश में संपन्न हुए आम चुनावों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) गठबंधन ने 297 में से 210 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही, लगभग 35 वर्षों में तारिक रहमान बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। यह चुनाव केवल सत्ता हस्तांतरण के लिए नहीं था, बल्कि देश की शासन प्रणाली को पूरी तरह से बदलने के लिए एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी था। चुनाव आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनमत संग्रह में 60.26 प्रतिशत मतदान हुआ। इनमें से 70 प्रतिशत लोगों ने भारत की तरह संसदीय व्यवस्था के पक्ष में मतदान किया है।

    मतदाताओं ने व्यापक सुधार पैकेज, जिसे "जुलाई चार्टर 2025" के रूप में जाना जाता है, के कार्यान्वयन के पक्ष में भारी जनादेश दिया है। हां के पक्ष में 4,80,74,429 मत मिले हैं। यह स्पष्ट बहुमत है। वहीं, ना के पक्ष में 2,25,65,627 पड़े हैं। आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने मीडिया को बताया कि जनता ने देश के पुनर्गठन के पक्ष में अपनी मुहर लगा दी है।

    क्या है जुलाई चार्टर?
    यह चार्टर अगस्त 2024 में प्रधान मंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाले छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद तैयार किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सत्ता के केंद्रीकरण को रोकना और राज्य की प्रमुख संस्थाओं को पुनर्गठित करना है ताकि भविष्य में तानाशाही और फासीवादी शासन की पुनरावृत्ति न हो। इस चार्टर में 84 सुधार बिंदु शामिल हैं, जिन्हें लागू करने के लिए एक संवैधानिक सुधार परिषद (Constitutional Reform Council) 270 कार्य दिवसों के भीतर काम करेगी।

    जुलाई चार्टर के प्रमुख प्रस्ताव
    1. प्रधानमंत्री कार्यकाल की सीमा: सत्ता के दीर्घकालिक केंद्रीकरण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री के लिए सख्त कार्यकाल सीमा निर्धारित करना।

    2. द्विसदनीय संसद: विधायी शक्ति को संतुलित करने के लिए 100 सीटों वाले एक नए उच्च सदन का निर्माण, जिसमें सीटें पार्टी के राष्ट्रीय वोट शेयर के आधार पर आवंटित की जाएंगी। आपको बता दें कि भारत में भी लोकसभा और राज्यसभा जैसी दो सदन वाली संसदीय व्यवस्था है।

    3. कार्यकारी शक्तियों में कमी: प्रधानमंत्री कार्यालय की शक्तियों को कम करने के लिए राष्ट्रपति की भूमिका को मजबूत करना।

    4. न्यायिक और संस्थागत स्वतंत्रता: न्यायपालिका और अन्य प्रमुख राज्य संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने के उपाय।

    5. विपक्ष की भागीदारी: प्रमुख संसदीय समितियों का नेतृत्व करने और डिप्टी स्पीकर के रूप में सेवा करने के लिए विपक्षी नेताओं के प्रावधान शामिल करना।

    6. जुलाई सेनानियों को सुरक्षा: विद्रोह में भाग लेने वाले प्रतिभागियों जिन्हें "जुलाई सेनानी" कहा जाता है, को सुरक्षा प्रदान करना।

    7. महिलाओं का प्रतिनिधित्व: संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाना।

    यह तीसरी बार है जब बांग्लादेश में सुधारों का चार्टर पेश किया गया है। अब BNP की नई सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह इन सुधारों को कैसे लागू करती है और पिछले शासन की अस्थिरता के बाद देश को स्थिरता की ओर कैसे ले जाती है।

     

  • निखिल गुप्ता मामले में सजा की संभावना और अमेरिका की डिमांड पर अपडेट

    निखिल गुप्ता मामले में सजा की संभावना और अमेरिका की डिमांड पर अपडेट

    न्यूयॉर्क

    खालिस्तानी आतंकवादी और अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश वाले मामले में एक बड़ा नाटकीय मोड़ आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी 54 साल के भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने शुक्रवार को अमेरिकी अदालत के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया है। यह कदम उनके पिछले रुख से बिल्कुल उलट है। जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण के बाद से वे लगातार खुद को निर्दोष बता रहे थे। निखिल गुप्ता ने अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष तीन गंभीर आरोपों में अपना दोष स्वीकार किया है।

    उनके खिलाफ सुपारी देकर हत्या कराने, हत्या की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रचने का आरोप है। उन्होंने इन तीनों में दोष कबूल कर लिया है। कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि अभियोजकों द्वारा जुटाए गए पुख्ता सबूतों के कारण निखिल गुप्ता के पास अपना गुनाह कबूल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

    इस मामले की सुनवाई 30 मार्च से शुरू होने वाली थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार और वायरटैप की गई बातचीत पेश की जानी थी। इन रिकॉर्डिंग्स में कथित तौर पर निखिल गुप्ता को एक हिटमैन के साथ 1,00,000 डॉलर की सुपारी पर बातचीत करते हुए सुना गया था।

    अपना गुनाह कबूल करने के बाद अब निखिल गुप्ता एक हाई-प्रोफाइल ट्रायल से बच जाएंगे, जिसमें उन्हें अधिकतम 40 साल की सजा हो सकती थी। हालांकि सजा का अंतिम निर्णय न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करेगा, लेकिन अमेरिकी सरकार ने गुप्ता के लिए 21 से 24 साल की कैद की सिफारिश की है। सीनियर जिला जज विक्टर मरेरो आने वाले महीनों में सजा सुनाने के लिए औपचारिक सुनवाई की तारीख तय करेंगे।

    इस पूरी साजिश के केंद्र में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के पूर्व अधिकारी विकास यादव का नाम भी उछला है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यादव ने ही पन्नू की हत्या के समन्वय के लिए गुप्ता को भर्ती किया था। साल 2024 के अंत में यादव के खिलाफ संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन वे फिलहाल भारत में हैं।

    भारत सरकार ने पुष्टि की है कि विकास यादव अब सरकारी सेवा में नहीं हैं, लेकिन उनके प्रत्यर्पण को लेकर फिलहाल कोई सहमति नहीं जताई गई है। भारत की आंतरिक जांच समिति ने स्वीकार किया है कि उक्त अधिकारी के आपराधिक लिंक थे, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।
    कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू?

    गुरपतवंत सिंह पन्नू 'सिख फॉर जस्टिस' (SFJ) नामक संगठन का जनरल काउंसल है, जो अमेरिका में सक्रिय है। हाल के महीनों में पन्नू ने भारत विरोधी गतिविधियों को तेज किया है, जिसमें अमेरिकी शहरों में खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित करना, एयर इंडिया के बहिष्कार के वीडियो जारी करना और भारत विरोधी हरकतों के लिए इनामों की घोषणा करना शामिल है। इन गतिविधियों के कारण भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पन्नू के खिलाफ आतंकवाद से संबंधित नए मामले दर्ज किए हैं।