खेल

विश्व कप फाइनल विवाद में अर्जेंटीना के खिलाड़ियों पर फीफा की बड़ी कार्रवाई

 नई दिल्ली
 फीफा विश्व कप 2026 फाइनल हारने के बाद मैदान में गुंडागर्दी करने वाले अर्जेंटीना के फुटबॉलरों और कोचिंग टीम के सदस्यों पर फीफा ने कुल मिलाकर 21 मैच का प्रतिबंध लगाया है। विश्व फुटबॉल को चलाने वाली संस्था फीफा ने एक बयान जारी करते हुए इस फैसले की जानकारी दी।

फीफा ने बीती जुलाई में ही कहा था कि वह फाइनल मैच के बाद स्पेन के खिलाड़ियों के साथ हुई धक्का-मुक्की की जांच करेंगे। स्पेन के मिडफील्डर गावी पर भी एक मैच का प्रतिबंध और 30 हजार डालर (28 लाख रुपये) का जुर्माना लगा है। यह प्रतिबंध सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान लागू रहेंगे।

पारेदेस पर सबसे ज्यादा प्रतिबंध
अर्जेंटीना के मिडफील्डर लींद्रो पारेदेस पर सबसे ज्यादा दस मैचों का प्रतिबंध लगा है, साथ ही उन पर 90 हजार अमेरिका डॉलर (86 लाख रुपये) का जुर्माना भी लगा है। पारेदेस ने स्पेन के डिफेंडर एरिक गार्सिया को गले से पकड़ने के साथ मिडफील्डर गावी को जमीन पर पटका भी था। अपनी टीम की जीत का जश्न मनाने जा रहे स्पेन के कप्तान रोड्री को पेट में मारने वाले अर्जेंटीना के डिफेंडर नाहुएल मोलीना पर सात मैच का प्रतिबंध और 90 हजार डॉलर का जुर्माना लगा है।

अर्जेंटीना के अटैकिंग मिडफील्डर थिएगो अल्मादा पर एक जबकि टीम के अधिकारी रोबेर्तो अयाला पर तीन मैच का प्रतिबंध और 30-30 हजार डॉलर का जुर्माना लगाया है। फीफा ने ये भी बताया कि अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन पर 31 लाख डॉलर ( लगभग तीन करोड़ रुपये) का फाइन लगाते हुए उन्हें अपना अगला घरेलू मैच तय संख्या से आधे दर्शकों के साथ खेलने का आदेश भी दिया गया है। वैसे तो यह प्रतिबंध दो मैचों का रहेगा लेकिन दूसरे मैच वाला प्रतिबंध अनिश्चित काल के लिए निलंबित रखा गया है।

इस कारण लगा बैन
फीफा ने यह फाइन एक खेल समारोह की आड़ में ऐसे व्यवहार का प्रदर्शन करने के चलते लगाया है, जो खेल से इतर किसी अन्य चीज से जुड़ा हुआ हो। दरअसल, इंग्लैंड को हराने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने विवादित फाकलैंड द्वीप को अपना बताने वाले पोस्टर-बैनर दिखाए थे। पहले ये बैनर दर्शकों के हाथ में थे, लेकिन मैच के बाद इन्हें मैदान पर भी देखा गया और इंग्लैंड ने इसकी शिकायत भी की थी। फीफा ने ये भी बताया कि इस फैसले के विरुद्ध अपील की जा सकती है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्जेंटीना ने इसे खेलों की सर्वोच्च अदालत (खेल पंचाट) तक ले जाने की बात कही है।

 

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