Category: छत्तीसगढ़

  • वनांचल में गूंजा क्रिकेट का रोमांच, अरुण साव ने मैदान में दिखाया बल्लेबाजी का अंदाज

    वनांचल में गूंजा क्रिकेट का रोमांच, अरुण साव ने मैदान में दिखाया बल्लेबाजी का अंदाज

    जंगल के बीच क्रिकेट का मैदान और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के हाथ में बैट

    बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर 
    सुकमा

    सुकमा के जंगलों के बीच मैदान में युवाओं को क्रिकेट खेलते देख उप मुख्यमंत्री अरुण साव खुद को रोक न सके। उन्होंने गाड़ी रुकवाई, खिलाड़ियों के बीच मैदान में पहुंचे और क्रीज पर जाकर बैट थाम लिया। टूर्नामेंट खेल रहे कुशल गेंदबाजों की गेंदों पर कुछ करारे शॉट भी लगाए। यह बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर है।

    किरंदुल से सुकमा के रास्ते का यह मुनगा गांव था जहां साव ने मैदान में बल्ला भांजा। सुकमा जिले के ग्राम पंचायत कोर्रा का आश्रित गांव है यह। मैदान पर खेलने के लिए जुटे युवाओं से पता चला कि यहां 7 जून से क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा है जिसमें आसपास के गांवों की 16 टीमों ने भाग लिया है। मैदान के एक छोर पर खिलाड़ियों का झुंड तो दूसरे छोर पर दर्शकों का झुंड था।

    उप मुख्यमंत्री साव ने कुछ गेंदे खेलने के बाद पिच पर ही खिलाड़ियों से अपने सहज-सरल अंदाज में बातचीत शुरू की, जिससे इस टूर्नामेंट की जानकारी मिली। उन्होंने खिलाड़ियों के मांगे बिना ही सभी 16 टीमों को क्रिकेट किट देने का वादा किया, जिससे वे पूरे साजो-सामान के साथ अपने खेल का आनंद ले सकें। साव से चर्चा के बीच खिलाड़ियों ने खेल मैदान की कमी की बात रखी, जिस पर उन्होंने कलेक्टर को निर्देशित कर समुचित व्यवस्था का आश्वासन दिया।

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव इन दिनों चार दिनों के बस्तर प्रवास पर हैं। वे रोज दिनभर निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। साथ ही अधिकारियों की बैठक लेकर इनकी प्रगति की समीक्षा भी कर रहे हैं। बस्तर संभाग के प्रगतिरत काम जल्दी कैसे पूरे हों… अप्रारंभ कार्यों को तत्काल शुरू कर कैसे तेजी से अंजाम तक पहुंचाएं, इन पर बैठकों में मंथन भी कर रहे हैं।

  • लोगों से सीधे संवाद करेंगे CM साय, सुशासन तिहार में योजनाओं के क्रियान्वयन का लेंगे फीडबैक

    लोगों से सीधे संवाद करेंगे CM साय, सुशासन तिहार में योजनाओं के क्रियान्वयन का लेंगे फीडबैक

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सुशासन तिहार 2026 के तहत विभिन्न जिलों का दौरा कर सकते हैं. किसी भी गांव में मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतर सकता है. इस दौरान मुख्यमंत्री जन समस्या निवारण शिविर में शामिल होकर जनता से योजनाओं का फीडबैक लेंगे. साथ ही समीक्षा बैठक भी करेंगे. इसके बाद शाम 5 बजे रायपुर के जोरा मॉल में भाग्य विधाता फिल्म देखेंगे.

    मुख्यमंत्री आज गुरुवार को आयोजित विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित निरीक्षण, जन समस्या निवारण शिविर एवं समीक्षा बैठक में भाग लेंगे। इस दौरान वे आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था का जायजा लेने के साथ अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे।

    कार्यक्रम के तहत विभिन्न विभागों की योजनाओं और जनहित कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री अधिकारियों को शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के संबंध में आवश्यक निर्देश देंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री शाम 5 बजे निर्धारित अन्य कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

  • आधुनिक खेती, उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन से बढ़ी पैदावार, किसानों की आय में हो रहा इजाफा

    आधुनिक खेती, उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन से बढ़ी पैदावार, किसानों की आय में हो रहा इजाफा

    रायपुर

     प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (च्डक्क्ज्ञल्) जशपुर जिले में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की कृषि-केंद्रित नीतियों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, सिंचाई सुविधाएं और कृषि विशेषज्ञों का निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा है। इसका परिणाम यह है कि किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

    जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के किसान  सुधीर लकड़ा इस परिवर्तन की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। लगभग 3.40 हेक्टेयर कृषि भूमि के स्वामी  लकड़ा को शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ मिला है, जिससे उनकी खेती अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी और टिकाऊ बनी है। आत्मा योजना के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन मक्का कार्यक्रम, कृषि यंत्रों एवं ट्रैक्टर की सुविधा तथा सौर सुजला योजना के तहत सोलर सिंचाई व्यवस्था ने उनकी खेती को नई दिशा दी है। कृषि विभाग द्वारा दिए गए प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें आधुनिक खेती की विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनकी उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें पारंपरिक धान फसल के स्थान पर प्री-बीज ग्रेड मक्का उत्पादन की सलाह दी। विभाग से प्राप्त 8 किलोग्राम निःशुल्क उन्नत बीज का उपयोग कर उन्होंने 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती की। वैज्ञानिक पद्धति, संतुलित पोषण प्रबंधन और समय-समय पर तकनीकी सलाह के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिकता की नई पहल

    प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के माध्यम से जिले में फसल विविधीकरण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि मशीनीकरण, भंडारण क्षमता विकास तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य अनाज, दलहन एवं तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण बीजों और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से कृषि उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देकर मानसून पर निर्भरता कम करने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को घटाने तथा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

    किसानों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव
     
    सुधीर लकड़ा बताते हैं कि योजना से प्राप्त उन्नत बीज, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी है। बेहतर उत्पादन के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के हित में संचालित योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना आज जशपुर सहित प्रदेश के किसानों के लिए समृद्धि का नया माध्यम बन रही है। आधुनिक कृषि तकनीकों और शासकीय सहयोग के माध्यम से यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन कर रही है।

  • चन्द्रनाहू कुर्मी समाज के महाअधिवेशन में शामिल होंगे मुख्यमंत्री साय, कई मुद्दों पर करेंगे संबोधन

    चन्द्रनाहू कुर्मी समाज के महाअधिवेशन में शामिल होंगे मुख्यमंत्री साय, कई मुद्दों पर करेंगे संबोधन

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रविवार काे रायपुर और धमतरी जिले में आयोजित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 12:30 बजे मुख्यमंत्री निवास, रायपुर से धमतरी के लिए रवाना होंगे।
    धमतरी पहुंचकर वे दोपहर करीब 1:30 बजे क्षेत्रीय चन्द्रनाहू कुर्मी समाज के केंद्रीय अधिवेशन में शामिल होंगे।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय क्षेत्रीय चन्द्रनाहू कुर्मी समाज के प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री रायपुर लौट आएंगे। इसके बाद शाम 4 बजे वे बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय मछुवारा संघ के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करेंगे। कार्यक्रम के बाद शाम 5:15 बजे तक मुख्यमंत्री निवास लौटने का कार्यक्रम है।

    साध्वी निरंजन ज्योति आज आएंगी रायपुर
    राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति 7 जून को रायपुर के एक दिवसीय आधिकारिक प्रवास पर रहेंगी. साध्वी निरंजन ज्योति रविवार को नई दिल्ली से रायपुर पहुंचेंगी. वे राज्य अतिथिगृह रायपुर में पिछड़ा समाज के प्रतिनिधिमंडल से भेंट करेंगी. वे रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात करेंगी. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष दोपहर दो बजे बूढ़ापारा स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में पिछड़ा वर्ग संगठन के सामाजिक प्रगति चिंतन सम्मेलन में शामिल होंगी.

  • खेती के साथ कमाई का मजबूत विकल्प बना डेयरी व्यवसाय, विभाग दे रहा हर संभव सहयोग

    खेती के साथ कमाई का मजबूत विकल्प बना डेयरी व्यवसाय, विभाग दे रहा हर संभव सहयोग

    रायपुर.

    प्रदेश के ग्रामीण किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि के साथ ही अन्य व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में महासमुंद जिले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन से ग्रामीणों की आजीविका से जोड़ा गया है। जिले में करीब 1,78,533 गौवंशीय एवं 12,776 भैंसवंशीय सहित कुल 1,91,309 पशुधन उपलब्ध है। जिले में वर्तमान में दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय लगातार प्रगति पर है तथा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का क्रय-विक्रय किया जा रहा है।

    पशुधन विकास विभाग क जानकारी के अनुसार देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा जिले से प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी डेयरियों द्वारा भी किसानों से बेहतर दर एवं समय पर भुगतान कर बड़ी मात्रा में दूध खरीदा जा रहा है। निजी डेयरियों में हर्षन डेयरी सरायपाली द्वारा प्रतिदिन 6000 लीटर, शारदा डेयरी सरायपाली द्वारा 4000 लीटर, प्रगति डेयरी सरायपाली द्वारा 2000 लीटर, शारदा डेयरी पिथौरा द्वारा 4000 लीटर तथा गाया डेयरी महासमुंद द्वारा प्रतिदिन 1000 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इस प्रकार निजी डेयरियों द्वारा प्रतिदिन लगभग 17 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है।

    देवभोग दुग्ध महासंघ एवं निजी डेयरियों को मिलाकर जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो विगत वर्ष की तुलना में अधिक है। यहां जिले में किसानों को दुग्ध विपणन का कार्य में दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ा गया है। पहले 131 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित है, वहीं शासन की सहकारिता से समृद्धि की मंशानुरूप 25 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित हैं तथा 30 नई समितियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालक किसानों को उन्नत हरा चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु लगातार प्रेरित किया जा रहा है। हरा चारा एवं साईलेज पशुओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का प्रमुख स्रोत है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु साईलेज निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को टाँक डेयरी फार्म, सेमरिया जिला रायपुर का भ्रमण कराकर साईलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी प्रदान की गई है तथा 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया गया है। साथ ही पशुपालकों को नेपियर, बरसीम, अजोला आदि हरे चारे के उपयोग हेतु कृषक संगोष्ठियों के माध्यम से लगातार प्रेरित किया जा रहा है। जिले में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने हेतु कृत्रिम गर्भाधान कार्य निरंतर किया जा रहा है। इस तकनीक से अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा पशुपालकों को उन्नत नस्ल की दुधारू गायें प्राप्त होंगी।

    जिले में महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़ने हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 2-2 गायों का वितरण किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 94 पशुपालकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा गया है। इसी प्रकार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (छक्क्ठ) द्वारा महासमुंद जिले के 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से आदिवासी परिवारों को दुग्ध व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन की स्थिति लगातार मजबूत एवं प्रगतिशील बनी हुई है।

  • विकास कार्यों की प्रगति पर सीएम साय की नजर, पांच जिलों के अधिकारियों संग करेंगे अहम बैठक

    विकास कार्यों की प्रगति पर सीएम साय की नजर, पांच जिलों के अधिकारियों संग करेंगे अहम बैठक

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गरियाबंद में पांच जिलों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे. जिला पंचायत के सभा कक्ष में दोपहर 3:30 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगी.

    जिला पंचायत के सभा कक्ष में दोपहर 3:30 बजे से होने वाली इस बैठक में गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, धमतरी और रायपुर जिले में संचालित विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. बैठक में संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. साथ ही क्षेत्र के सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे, जिनके साथ मुख्यमंत्री योजनाओं के क्रियान्वयन और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

  • पेड़ लगाकर मनाया पर्यावरण दिवस, जिंदल स्टील मशीनरी डिवीजन रायपुर ने दिखाई हरियाली के प्रति प्रतिबद्धता

    पेड़ लगाकर मनाया पर्यावरण दिवस, जिंदल स्टील मशीनरी डिवीजन रायपुर ने दिखाई हरियाली के प्रति प्रतिबद्धता

    जिंदल स्टील लिमिटेड, मशीनरी डिवीजन, रायपुर ने वृक्षारोपण अभियान के साथ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया

    रायपुर, 
    विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिंदल स्टील लिमिटेड, मशीनरी डिवीजन, रायपुर द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया।

    इस अवसर पर कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए परिसर में पौधारोपण किया। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्रकृति की रक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करना था।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री निलेश शाह, प्रमुख – मशीनरी डिवीजन ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कर्मचारियों से अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।

    श्री सूर्योदय दुबे, प्रमुख – मानव संसाधन (एचआर), रायपुर ने कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए संगठन की सतत विकास एवं सामुदायिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देती है, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की संस्कृति को भी बढ़ावा देती है।

    वृक्षारोपण अभियान में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    कार्यक्रम का समापन स्वच्छ, स्वस्थ एवं हरित पर्यावरण के निर्माण हेतु निरंतर हरित पहलों का समर्थन करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

  • मुआवजा घोटाले की रकम शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में लगाई, ED ने कारोबारी पर कसा शिकंजा

    मुआवजा घोटाले की रकम शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में लगाई, ED ने कारोबारी पर कसा शिकंजा

    रायपुर 

    भारतमाला हाईवे भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाला में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है और जय प्रकास गांधी को गिरफ्तार किया है. आरोपी को 3 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया है. जय प्रकाश छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अभनपुर का निवासी हैं। 

    ED ने यह जांच छत्तीसगढ़ ACB/EOW द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। मामला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे (Economic Corridor) के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है। 

    हाईवे क्षेत्र में आने वाली भूमि को छोटे क्षेत्रों में किया विभाजित
    जांच में सामने आया कि जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ लोक सेवकों के साथ मिलकर अधिसूचित हाईवे क्षेत्र में आने वाली भूमि को जानबूझकर 500 वर्ग मीटर से कम आकार के छोटे-छोटे प्लॉटों में विभाजित किया. आरोप है कि यह कदम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अधिक मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया था। 

    ईडी ने आरोपी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत 3 जून को गिरफ्तार किया।मामले में करोड़ों रुपए के मुआवजा घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी है। वहीं, कारोबारी पर आरोप है कि उसने 56 लाख की जमीन पर 9.83 करोड़ का मुआवजा लिया और घोटाले से मिले पैसे को छिपाने के लिए उसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

    ACB/EOW की दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच
    ईडी की जांच छत्तीसगढ़ ACB/EOW की दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह मामला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है।

    अफसरों के साथ मिलकर रची साजिश
    जांच एजेंसी के मुताबिक जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ अफसरों के साथ मिलकर साजिश रची।

    आरोप है कि हाईवे अलाइनमेंट में आने वाली भूमि को खरीदने के बाद उसे 500 वर्गमीटर से कम के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा गया। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि एनएचएआई से अधिक दर पर मुआवजा मिल सके।

    9 करोड़ 83 लाख हासिल किया
    ईडी के मुताबिक इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए आरोपी और उसके परिवार ने करीब 9 करोड़ 83 लाख रुपए का मुआवजा हासिल किया।

    जबकि नियमों के अनुसार उन्हें केवल 56 लाख 76 हजार रुपए ही मिलने थे। जांच में सामने आया है कि इस तरह लगभग 9 करोड़ 27 लाख रुपए की अवैध आय अर्जित की गई।

    शेयर बाजार-म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किए पैसे
    जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से मिले पैसे को छिपाने के लिए उसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

    इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को ईडी ने रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सबूत जब्त किए गए थे।

    गिरफ्तार आरोपी को विशेष पीएमएलए न्यायालय रायपुर में पेश किया गया, जहां से ईडी को तीन दिन की रिमांड मिली है। एजेंसी अब इस मामले में अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

    जानिए कैसे हुआ घोटाला ?
    भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।

    इस केस में दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर छपने के बाद कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था।

    शशिकांत और निर्भय पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद कार्रवाई हुई थी। निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा राशि की गड़बड़ी का आरोप है।

    9.27 करोड़ रुपए की अर्जित की अवैध आय
    ED के अनुसार इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए आरोपी और उसके परिवार ने लगभग 9.83 करोड़ रुपए का मुआवजा प्राप्त किया, जबकि वैध रूप से देय राशि केवल 56.76 लाख रुपए थी. इस प्रकार लगभग 9.27 करोड़ रुपए की अवैध आय अर्जित की गई.

    जांच में यह भी पता चला है कि इस अवैध धन को शेयरों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश कर छिपाने और वैध दिखाने की कोशिश की गई. इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को ED ने रायपुर, अभनपुर और धमतरी में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए थे। 

    कोर्ट ने आरोपी को 3 दिन की हिरासत में भेजा
    गिरफ्तार आरोपी जय प्रकाश गांधी को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे तीन दिन की ED हिरासत में भेज दिया. ED ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और इस साजिश में शामिल अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों तथा लोक सेवकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। 

  • रायगढ़ में देर रात बरसे बादल, तेज हवाओं और बारिश के साथ मौसम विभाग की चेतावनी

    रायगढ़ में देर रात बरसे बादल, तेज हवाओं और बारिश के साथ मौसम विभाग की चेतावनी

    रायपुर 

    दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार 4 जून को केरल में दस्तक दे दी है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री तीन दिन देरी से हुई। छत्तीसगढ़ में फिलहाल मानसून नहीं पहुंचा है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में प्रदेश के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, जबकि न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    रायपुर और राजनांदगांव प्रदेश के सबसे गर्म शहर रहे, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ।

    प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान केवल हल्की बारिश दर्ज की गई। छोटेडोंगर, मैनपाट और अंबिकापुर में 10-10 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई।

    अगले 24 घंटे कैसा रहेगा मौसम
    मौसम विभाग के मुताबिक आज (शुक्रवार) प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। यही स्थिति अगले दो दिनों तक भी बनी रह सकती है।

    रायपुर में धूलभरी आंधी और बारिश के संकेत
    रायपुर में बादल छाए रहने, गरज-चमक, बारिश और धूलभरी आंधी की संभावना जताई गई है। शहर का अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

    अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है मानसूनी एक्टिविटी
    हालांकि अभी छत्तीसगढ़ में मानसून की सीधी एंट्री नहीं हुई है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में मानसून की तेज प्रगति को देखते हुए प्रदेश में अगले एक सप्ताह के दौरान प्री-मानसून गतिविधियों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

  • सरकारी जमीन पर मचा बवाल, प्रभारी मंत्री ने दिए 52 साल पुरानी रजिस्ट्री की जांच के आदेश

    सरकारी जमीन पर मचा बवाल, प्रभारी मंत्री ने दिए 52 साल पुरानी रजिस्ट्री की जांच के आदेश

    खैरागढ़.

    शहर के बहुचर्चित एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क और नजूल भूमि विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। करीब 85 हजार वर्गफीट जमीन और 40 करोड़ रुपए से अधिक की अनुमानित कीमत से जुड़े इस मामले में 52 साल पुरानी रजिस्ट्री, सरकारी रिकॉर्ड और कथित प्लॉटिंग को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विवाद बढ़ने के बाद अब प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी मामले की जांच के संकेत दिए हैं।

    1974 की रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद
    सामने आए दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1974 में प्लॉट क्रमांक 114 और 115 की रजिस्ट्री अवयस्क स्मृति सिंह के नाम की गई थी। रजिस्ट्री में इन भूखंडों का उल्लेख “एडवर्ड पार्क” और “बाड़ी एडवर्ड पार्क” के रूप में दर्ज है। दस्तावेज में तत्कालीन राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह विक्रेता के रूप में दर्ज हैं, जबकि आम मुख्तियार के रूप में रविंद्र बहादुर सिंह के हस्ताक्षर हैं। क्रेता पक्ष में अवयस्क स्मृति सिंह की ओर से उनकी माता एवं संरक्षिका रश्मि देवी सिंह का नाम दर्ज है। उस समय जमीन का विक्रय मूल्य मात्र 3 हजार रुपए दर्शाया गया था। विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि रजिस्ट्री में शामिल प्रमुख नाम एक ही राजपरिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं।

    सरकारी रिकॉर्ड में पार्क और सार्वजनिक भूमि का उल्लेख
    मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी अभिलेखों को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार खसरा नंबर 167, 169 और 170 में सड़क, रास्ता, घास भूमि और छोटे झाड़ का जंगल दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं नजूल मेंटेनेंस खसरे में प्लॉट नंबर 114 को “एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” और प्लॉट नंबर 115 को “बाड़ी एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” के रूप में दर्ज बताया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग या पार्क की श्रेणी में थी, तो इसका भूमि उपयोग परिवर्तन कब और किस प्रक्रिया के तहत हुआ? अब तक इससे संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

    22 हिस्सों में हुई प्लॉटिंग, 40 करोड़ से अधिक कीमत
    संयुक्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 85,627 वर्गफीट भूमि विभिन्न लोगों को विक्रय किए जाने का उल्लेख है। जानकारी के मुताबिक इस जमीन को 22 हिस्सों में बांटकर प्लॉटिंग की गई। वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 40 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। यही कारण है कि मामला अब केवल जमीन की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक महत्व की बहुमूल्य भूमि से जुड़े बड़े विवाद का रूप ले चुका है।

    पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है मामला
    यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2020 में तत्कालीन विधायक और खैरागढ़ राजपरिवार के सदस्य स्वर्गीय देवव्रत सिंह ने विधानसभा में क्षेत्र में चल रही कथित अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा उठाया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच भी हुई थी और कई भूखंडों को अवैध प्लॉटिंग की श्रेणी में चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। कुछ मामलों में रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने की कार्रवाई भी की गई थी।

    छोटे अतिक्रमणों पर कार्रवाई, बड़े मामलों में चुप्पी क्यों?
    इस पूरे विवाद ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर सरकारी जमीन पर छोटे अतिक्रमण की शिकायत मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो जाता है। सड़क किनारे बनी झोपड़ियों, गुमटियों और छोटे निर्माणों पर बुलडोजर चलाने में देर नहीं लगाई जाती। लेकिन अब लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड, जांच प्रतिवेदन और अन्य दस्तावेज करोड़ों रुपए मूल्य की इस जमीन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो अब तक कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? लोगों का मानना है कि नियमों की सख्ती कमजोर और गरीब लोगों के लिए अलग दिखाई देती है, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गति धीमी पड़ जाती है।

    भूमिस्वामी पक्ष ने रखा अपना पक्ष
    भूमिस्वामी पक्ष के प्रतिनिधि रजत भार्गव ने कहा कि उनके पास वर्ष 1974 की विधिवत पंजीकृत रजिस्ट्री, सीमांकन प्रतिवेदन और राजस्व अभिलेख उपलब्ध हैं। उनके अनुसार यह भूमि वर्षों से उनकी पत्नी स्मृति भार्गव के नाम दर्ज है और समय-समय पर उसका सीमांकन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि शासन या प्रशासन किसी भी प्रकार की जानकारी मांगता है तो सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। बिना सभी रिकॉर्ड और तथ्यों की जांच किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

    प्रभारी मंत्री ने दिए जांच के संकेत
    मामले को लेकर खैरागढ़ जिले के प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि वह कलेक्टर से चर्चा करेंगे और उपलब्ध दस्तावेजों तथा जांच प्रतिवेदन का परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा, “यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

    जांच पर टिकी सबकी नजर
    एक तरफ 52 साल पुरानी रजिस्ट्री है तो दूसरी तरफ सरकारी रिकॉर्ड में पार्क और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का उल्लेख। एक ओर निजी स्वामित्व का दावा है, तो दूसरी ओर करोड़ों रुपए की प्लॉटिंग और सरकारी जमीन के कथित उपयोग को लेकर उठ रहे सवाल। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और शासन के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह विवाद सिर्फ जमीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और कानून के समान अनुपालन की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।